जीवनसाथी -119

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  जीवनसाथी – 119

    
     सगाई निपट चुकी थी सभी लोग इधर-उधर घूमते हुए आपस में बातें करते खाते-पीते मसरूफ थे, और समर और पिया बाकी लोगों से अलग एक दूसरे में खोए हुए एक किनारे बैठे थे।

“अब बताइए डॉक्टर साहिबा! यह किस का आईडिया था?”
“अब यह भी आपको बताना पड़ेगा! अब भी आप समझ नहीं पाए कि यह सारा किस का आईडिया हो सकता है?”
“रानी साहिबा का!”
“जी हां! बिल्कुल! असल में रानी साहिबा अपने रूटीन चेकअप के लिए जिस दिन मेरी ओपीडी में आई, उसी वक्त मेरी मम्मा मुझे सरप्राइस देने मौसी और बाकी रिश्तेदारों के साथ सीधे अस्पताल में ही धमक पड़ी! मम्मी ने अनजाने ही रानी साहेब के सामने मेरी सगाई की बात बोल दी। वह सुनते ही रानी साहब का दिमाग ठनका, और उन्होंने मुझे सगाई की बधाई दे दी । लेकिन जाते-जाते यह भी बता गयीं कि तुम इस शहर में नहीं हो। बल्कि राजा साहब का केस लड़ने दून गए हुए हो । बस उस एक वाक्य से ही मेरी सारी गलतफहमी दूर हो गई । अब आगे क्या करूं क्या ना करूं यही सोच रही थी। क्योंकि मैं खुद ही अपने बनाए जाल में फंस चुकी थी। लड़का और उसके घर वाले पहले ही यहां मौजूद थे। सगाई से बचने का जब कोई उपाय नहीं दिखा तो मैंने खुद उस लड़के से मिलकर उसे सारी सच्चाई बता दी एंड रेस्ट इज हिस्ट्री।”
“मुझे लगा ही था कि यह सब रानी साहब का ही कारनामा है। “
“वह तो भला हो रानी साहेब का। जुग जुग जिए वो। उनके कारण कम से कम तुमने इजहार तो किया वरना मैं वाकई सगाई करके चली जाती और तुम हाथ मलते रह जाते। “
“ओ मैडम! ऐसा भी नहीं है , लड़कियों की कोई कमी नहीं है हमारे लिए। “
“मालूम है मालूम है! अच्छे से जानती हूं।”
दोनों एक दूसरे से बातें करते एक दूसरे की बाहें थामे भवन के बाहर बगीचे में टहलते हुए जरा दूर तक निकल आए। दोनों आगे बढ़ते जा रहे थे कि सामने से एक गाड़ी आकर अचानक रुकी। गाड़ी का दरवाजा खुला और उसमें से रेवन बाहर निकल आई।

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      रेवन ने समर को देखा और समर ने रेवन को।
  मुस्कुराती  रेवन समर की ओर आगे बढ़ने लगी उसे आगे बढ़ते देख मुस्कुराते हुए समर भी आगे बढ़ गया और अनजाने ही उसके हाथों  में थमा पिया का हाथ उससे छूट गया।
   रेवन आगे बढ़ कर उसके गले से लग गयी…- हाय हॉटी हॉउ आर यू?”
   इतने दिनों बाद अचानक रेवन को सामने देख समर की भी खुशी का ठिकाना नहीं था। दोनों एक दूसरे का हालचाल लेने में पास खड़ी पिया को कुछ देर के लिए भूल कर ही रह गए। कुछ देर बाद पिया खुद उन दोनों के पास चली आई। समर ने पिया को देखते ही रेवन से मिलवाया।
  “ओह्ह !सो शी इज योर फियांसी?”
  समर ने हां में  सिर हिला कर पिया के कंधों पर हाथ रख कर उसे अपने से सटा लिया। रेवन और समर एक बार फिर अपनी बातों में डूब गए और पिया वहां खड़ी होने के बावजूद उनके बीच से गायब सी हो गई।

*****

     रेवन का थीसिस का काम पूरा हो चुका था और उसी के फाइनल सबमिशन के लिए वह यहां वापस आई थी।
   उसने आने से पहले समर को अपने आने के बारे में बताया था और समर ने ही उसे अपने शहर बुला लिया था।
   लेकिन समर को खुद अपनी सगाई के बारे में मालूम नहीं था । जब वो वहां सगाई के बाद पिया के साथ बैठा था तभी रेवन का मैसेज आया कि वह इस वक्त कहां है? और समर ने उस बात को अधिक गंभीरता से लिए बिना सीधे रेवन को अपना पता ठिकाना भेज दिया और रेवन उसी वक्त वहाँ उससे मिलने पहुंच गई।
   समर के लिए ये एक सामान्य सी बात थी लेकिन पिया के लिए ये उतनी भी सामान्य बात नही रह गयी थी।

******

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   दिन बीतते वक्त नही लगता। देखते ही देखते राजा और बाँसुरी के राजकुमार को पैदा हुए बारह दिन बीत भी गए।
    बारहवें दिन पर महल की प्रथानुसार बच्चे को सूर्यदर्शन करवा कर नाम रखा गया…
  नाम क्या रखना है इसी सिलसिले में पिछले बारह दिन से बाँसुरी और राजा की बातचीत चल रही थी। बाँसुरी को कोई नाम पसन्द ही नही आ रहा था।  और राजा बाँसुरी की तरह फैंसी नाम सोच ही नही पा रहा था। आखिर पूजा वाले दिन बच्चे को पूजा सम्पन्न करने के बाद घर से बाहर ले जाया गया और उसके बड़े पिता यानी युवराज ने उसे गोद में लेकर उसके कान में धीरे से रूपा द्वारा उसके लिए चुना गया नाम उसे बता दिया ….” राजकुमार शौर्य सिंह”! क्यों कुमार ठीक है ना?”
राजा मुस्कुरा उठा…-“जी भैया , मैं इसमें कुछ और जोड़ना चाहता हूँ। इसका नाम होगा ‘शौर्य प्रताप सिंह’
क्यों प्रेम ठीक है? “
   प्रेम ने मुस्कुरा कर अपने दोनों हाथ जोड़ दिए। पिंकी ने आगे बढ़ कर अपने प्यारे से भतीजे को गोद में ले लिया…-” बिल्कुल अपने पापा जैसे ही बनना मेरे लाडेसर! तुम्हें तुम्हारी फुई की उम्र लग जाये। ” पास रखे कजरौटा से काजल निकाल कर उसकी आँखों में आंज पिंकी ने बुआ का नेग पूरा किया और बांसुरी ने रूपा के हाथ से लेकर एक नवलखा हार पिंकी के गले में डाल दिया।
   बच्चे को आशीर्वाद देने सभी उस पर अक्षत बरसाने लगे।
      शाम में बच्चे के आने की खुशी में लंबा चौड़ा कार्यक्रम था। बाकी लोग उन्हीं तैयारियों में लगे थे और घर की बुज़ुर्ग महिलाएं सोहर गाने वालों को बुलवाए शगुन के गीत सुन रही थीं।
         रूपा और जया बाकी सारी तैयारियों में लगीं थीं, पिंकी ने बांसुरी को उसके कमरे में भेज दिया।
        बाँसुरी की रात से नींद पूरी नही हुई थी। रात भर उसका नन्हा उसे जगाए रखता था। और सुबह से पूजा पाठ के कारण भी उसे आराम नही मिल पाया था। वैसे तो राजमहल में नौकरों की कमी नही थी, लेकिन उसकी ताई ने उसे छोटे बच्चे को हर किसी के हाथ में न सौंपने की ताकीद कर रखी थी।  फिर उसका खुद का भी माँ का दिल था,ऐसे कैसे किसी के भी पास छोड़ कर आराम कर लेती , आज बच्चा कुछ ज्यादा ही  रो भी रहा था।
   उसे गोद में लिए इधर से उधर चलती वो कुछ गाकर उसे चुप कराने की कोशिश में थी कि राजा भी कमरे में चला आया।
   राजा की तरफ देखे बिना ही वो राजकुंवर को चुप कराती रही…-“क्या बात है हुकुम? कुछ नाराज़ हो क्या? “
  राजा की बात सुनते ही उसकी आँखों में आँसू आ गए…-“अरे ये क्या? इसमें  रोने की क्या बात है? हुआ क्या बताओ तो सही।”


  बाँसुरी क्या बताती? जब उसे कुछ खुद समझ आ पाता तब तो वो राजा से कुछ कहती। सब कुछ तो अच्छा ही हो रहा था बिल्कुल किसी सपने के पूरे होने जैसा…
   मनभावन पति, खुशहाल परिवार, स्वस्थ और सुंदर बच्चा! किसी भी औरत के जीवन में इस से इतर और क्या चाहिए। यहाँ तक कि वो तो खुद अपने पैरों पर भी खड़ी थी। एक राजपरिवार की बहू होते हुए भी उसका खुद का आत्मसम्मान था और अपने पूरे वजूद के साथ वो वहाँ की जिलाधीश थी। बावजूद उसके आंसूओं की धार रुकने का नाम नही ले रही थी कि राजा ने तुरंत जाकर उसकी गोद से बच्चे को अपनी गोद में लिया और बाँसुरी को पानी का गिलास पकड़ा दिया।
   पानी पीकर उसे थोड़ी राहत मिली तो वो हाथ मुहँ धोने चली गयी।
   उसी बात का फायदा उठा कर राजा ने तुरंत पिया को फोन लगा लिया।
      बांसुरी से जुड़ी सारी बातें उसे बता कर राजा परेशान हो उठा…-“,वो कुछ कह भी नही रही बस रोये जा रही है पिया। क्या करूं?”
” आपको बिल्कुल भी घबराने की ज़रूरत नही है राजा साहेब! ऐसा होता है। इसे पोस्टपार्टम डिप्रेशन कहा जाता है।
  ये लगभग अस्सी से नब्बे फीसदी औरतों में होता है। असल में इस वक्त शरीर में हार्मोनल लेवल इतना ऊपर नीचे होता है कि औरतें बेहद भावुक हो जातीं हैं। शरीर में इतने बदलाव के साथ ही न ठीक से खाना हो पाता है और न नींद इसलिए बहुत सी औरतो में  चिड़चिड़ापन भी आ जाता है। पर ये कोई बहुत घबराने की बात नही है। ये समस्या क्षणिक होती है। इसे मूड स्विंग भी कहा जाता है। पल में नाराज़ पल में खुश।
   अभी देखिएगा वो कुछ थोड़ा बहुत खा पी लेंगी तो बिल्कुल ठीक महसूस करने लगेंगी। हो सकता है उनकी नींद पूरी न हुई हो, तो अगर दस मिनट की भी झपकी लेंगी तो फ्रेश लगेगा उन्हें । इस वक्त उन्हें आपके प्यार और सपोर्ट की बहुत जरूरत है। हो सकता है वो आप पर नाराज़ भी हो बैठें। पर आपको थोड़ा धैर्य से काम लेना पड़ेगा।”
  दरवाजे पर खटका होते ही राजा ने” ठीक है मैं सब समझ गया!” कह कर फोन रख दिया। बांसुरी के बाहर आते ही उसने बांसुरी को अपने पास बुला लिया।
बांसुरी बैठना नहीं चाह रही थी। उसे हड़बड़ी थी, ढेर सारे काम निपटाने थे। लेकिन राजा ने उसे अपने पास बैठा कर उसका सर अपनी गोद में रख लिया। बच्चे को वह पहले ही बिस्तर पर लेटा चुका था।
” क्या कहना चाह रहे हैं आप ? अभी मैं बिल्कुल नहीं बैठूंगी! वक्त नहीं है शाम की पार्टी के लिए तैयार भी होना है।”
“मेरी हुकुम को तैयार होने की कोई खास जरूरत नहीं है ! सिर्फ 10 मिनट में तुम पार्टी के लिए रेडी हो जाऊंगी मेरे पास आओ तो सही।”
बड़े इसरार से राजा ने उसे अपने पास बैठा लिया और धीरे से उसके सिर को पकड़ कर अपनी गोद में रख लिया। उसके बालों में हाथ फिराते वो इधर उधर की बातें करता रहा। मुश्किल से दो मिनट में बांसुरी मीठी नींद में खो गई।
  राजा उसे देख कर मुस्कुरा उठा।
यह औरतें भी ना, इन्हें मालूम होता है कि इन्हें क्या समस्या है। और उसका समाधान क्या है। लेकिन समस्या का समाधान करने की जगह यह सिर्फ नाराजगी व्यक्त करतीं हैं।
  बांसुरी इतनी मीठी नींद में सो रही थी कि उसका सिर उठाकर नीचे रखने का राजा को मन नहीं किया।
उसने वहीं बैठे बैठे समर को फोन लगा लिया और अगले हफ्ते होने वाले चुनावों की तैयारियों का जायजा लेने लगा।
    घंटे भर बाद बांसुरी की आंख खुली, और वो एकदम चौक कर हड़बड़ा कर उठ बैठी…-” अरे आपने मुझे जगाया क्यों नहीं? मैं सो क्यों गई ? मुझे तैयार होना था।”
“जानबूझकर नहीं जगाया! तुम्हारी नींद ही नहीं पूरी हो रही है। तुम्हें भी तो जरूरत है, अपना ख्याल रखने की। ऐसे ही चलता रहा तो बीमार पड़ जाओगी।”
“जी !  दुनिया की हर मां अपने बच्चे के लिए अपनी नींदे गंवाती ही है, लेकिन कोई बीमार नहीं पड़ती।”
“सही कह रही हो तुम । इसीलिए तो मां का दर्जा सबसे ऊपर है। अब वह सब छोड़ो, अब बातों में वक्त जाया मत करो। हाथ मुहँ धो कर फटाफट तैयार हो जाओ। तुम्हारी ब्यूटीशियन दो बार आकर दरवाजे से वापस लौट चुकी है।”
“मुझे बहुत देर हो जाएगी रूपा भाभी जया भाभी सब लोग तैयार हो गए होंगे।”
“अभी कोई भी तैयार नहीं हुआ! सब हो रहे हैं ।और तुम तो रानी साहेब हो। तुम्हें इतना हड़बड़ाने की कोई जरूरत नहीं ।कार्यक्रम आठ  से है, हम आराम से पहुंच जाएंगे ।”
“आपके पैरों में दर्द नहीं हुआ, मैं लगभग घन्टे भर से आपके पैरों में सर रख के सो रही थी।”
“तुम्हारे पास रहने से कभी मुझे दर्द हो सकता है भला?”
      राजा मुस्कुराकर अपने काम से बाहर निकल गया। उसके जाते ही बांसुरी की ब्यूटीशियन अंदर आ गई। बांसुरी मुस्कुराते हुए पार्टी के लिए तैयार होने लगी।

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   राज महल का कार्यक्रम शुरु हो चुका था । नए राजकुंवर की अगुवाई में सारा महल रोशनी से जगमग आ रहा था ढेर सारे अतिथियों के साथ राज महल के लोग मिलते जुलते सबकी बधाइयां और आशीर्वाद ग्रहण करते खुश नजर आ रहे थे।
   बांसुरी के चेहरे की चमक आज कुछ अलग ही कहानी कह रही थी। राजा हमेशा की तरह भले ही बांसुरी से दूर खड़ा था और दूसरों से बातचीत में लगा था लेकिन बीच-बीच में उसका ध्यान बांसुरी पर चला ही जाता था । वह इधर उधर से किसी भी तरीके से समय निकालकर बांसुरी के पास पहुंचकर उसका हालचाल ले लिया करता। कभी किसी वेटर के हाथों उसके लिए कुछ खाने की चीज भेजता या फिर कभी कोई जूस भेज देता। बांसुरी दूर से ही उसे देखकर मीठी सी झिड़की से उसे नवाज़ जाती।
     दूर बैठी पिया बांसुरी और राजा को देख-देख कर मुस्कुरा रही थी। तभी समर हाथ में दो गिलास थामे वहां चला आया। एक गिलास पिया के सामने रखते हुए वहीं उसके पास कुर्सी खींच कर बैठ गया…-” क्या बात है बहुत मुस्कुरा रही हो?”
“आपकी राजा साहेब और रानी बांसुरी की जोड़ी एकदम परफेक्ट है। वो कहते हैं ना मेड फॉर ईच अदर वही कपल हैं। !”
“कह तो सही रही हो! वैसे हमारा भी ऐसा ही कुछ कपल बनने वाला है।”
“वह तो वक्त ही बताएगा! वैसे आप राजा साहिब जितने सीधे सच्चे नहीं लगते मुझे।”
“क्यों भाई अब मुझ में क्या खराबी दिख गई तुम्हें? देखो मेरा जो भी पास्ट था, मैंने सब कुछ पूरी सच्चाई से तुम्हारे सामने रख दिया था उसके बाद तुमने निर्णय लिया है।”
“हां ! तो मैं कहां कुछ कह रही हूं आपके पास्ट के लिए। बल्कि मैं ऐसा कहने वाली कोई होती भी नहीं! क्योंकि मेरा खुद का भी एक खूबसूरत पास्ट था।”

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    समर की ड्रिंक उसके हाथों से छलकती जरा सी नीचे गिर गई ।वह चौक कर पिया की तरफ देखने लगा   ” क्या कहा तुमने?”
“यही कि मेरा भी एक खूबसूरत सा पास्ट था।”
“कौन था वह? क्या करता था? कहां मिला था तुम्हे?”
“बताया तो था एक बार।”
“नहीं! मुझे तो कुछ याद नहीं”।
“मेरे कॉलेज में ही था। डॉक्टर था। मुझसे सीनियर था। कॉलेज में ही हम पहली बार मिले, दोस्ती हुई और दोस्ती प्यार में बदल गई। जब मैं फाइनल ईयर में पहुंची तब वह हॉस्टल छोड़कर एमडी की तैयारी के लिए रूम लेकर रहने लगा तब मैं भी उसके साथ ही शिफ्ट हो गई थी।”
“व्हाट डु यू मीन तुम उसके साथ लिव इन थीं।”
“हां! अब  एक ही फ्लैट में रहते थे तो लिव इन ही कहा जाएगा ना!”
“मतलब कैसे रहते थे? मेरा मतलब कैसे रिलेशन थे तुम दोनों के?”

     पिया के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गई वह मुस्कुराते हुए अपनी कहानी आगे बताने लगी…..
   “वैसे ही रिलेशन थी जैसे एक प्रेमी और प्रेमिका के बीच होते हैं! एक नॉर्मल कपल के बीच जो रिलेशन होता है वही कपल जो जल्दी शादी करनेवाला हो।”
“तुम दोनों शादी करने की सोच रहे थे।”
“सोच रहे थे लेकिन कर नहीं पाए!”
“क्यों जब इतना आगे बढ़ गए थे तो शादी कर लेनी थी।”
“वह बहुत एंबिशियस था! उसे एम एस करने के लिए यूएस जाना था। और उसे यूएस के सबसे बड़े बोस्टन हॉस्पिटल  में सर्जन बनना था। वह चाहता था मैं भी उसके साथ चलूं।”
“तो चली जाना था ना।”
“ऐसे कैसे चली जाती? मेरे मम्मी पापा की तो मैं अकेली बेटी हूं। उन्हें छोड़कर उनसे इतनी दूर अमेरिका कैसे चली जाती? और फिर दूसरी बात अमेरिका चली जाती तो तुम से कैसे मिलती?”

समर मुंह बनाकर दूसरी ओर देखने लगा पिया ने छुप कर अपनी हंसी छुपा ली।

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“उसके बाद उसने बहुत कोशिश की कि मैं मान जाऊं, लेकिन मैं अपना देश अपने पेरेंट्स को छोड़ने के लिए बिलकुल राजी नहीं थी, और उसने मुझे छोड़ दिया। वह मुझे छोड़ कर अमेरिका चला गया। सच कहूं तो उस वक्त बहुत टूट गई थी। मुझे लगा मैं फाइनल ईयर पास भी कर पाऊंगी या नहीं। लेकिन फिर मेरा एक दोस्त मेरा क्लासमेट था, उसने पढ़ाई में मेरी बहुत मदद की और सच कहूं तो फाइनल ईयर मैं उसी की मदद के कारण पास कर पाई।”
“अब ये दूसरा कौन है यार?”
“अरे नहीं उसके साथ वैसा कोई रिलेशन नहीं था! यह बहुत प्यारा दोस्त था अक्सर मेरे कमरे में आया करता था मुझे पढ़ाने।”
“फिर वहीं रुक तो नहीं जाता था।”
“यार तुम तो जादूगर निकले! बिल्कुल रुक ही जाता था। ऑब्विसली  हमारी पढ़ाई काफी टफ  होती है। कि हम रात रात भर पढ़ते हैं तो जब रात में चार चार बजे तक मेरे साथ पढ़ता था तो  उतनी सुबह उठकर घर कहां जाता मेरे कमरे में ही सो जाया करता था।”

“हद है  यार पिया! तुम्हारी क्लास में कोई लड़की नहीं थी जो तुम्हें पढ़ा सके! तुम्हारी पढ़ाई में मदद कर सके?”
“बहुत सारी थी। लेकिन लड़कियों में जलन की भावना बहुत होती है ना। जानते तो हो मैं वैसे भी शुरू से टॉपर टाइप की लड़की थी। तो सारी लड़कियां तो बहुत खुश थी इस बात से कि मेरा ब्रेकअप हो गया, और मैं पढ़ाई में मन नहीं लगा पा रही हूं। इसलिए कोई भी मेरी मदद करने क्यों आता भला? बस यही था अरविंद जो मेरी मदद करता रहा।”
“अच्छा तो इसका नाम अरविंद था।”
“हां बहुत पढ़ाया उसने मुझे । एक तरह से कहूं तो
मेरा गार्जियन कम गाइड कम दोस्त कम…”
“बस बस समझ गया! तो अभी कहां है ये तुम्हारा अरविंद?”
“पता नहीं यार बहुत समय से कांटेक्ट में नहीं हूं।”
“क्यों ऐसा क्या हो गया?”
“कुछ नहीं मेरी क्लास का एक दूसरा लड़का था शरभ वह भी अच्छा था। वह एक्चुली मेरे शहर का था। तो जब भी वह घर से आता जाता था तो मेरी मम्मी उसके हाथ से सामान भेज दिया करती थी। बस इसी बात पर अरविंद और शरभ का कुछ पंगा हो गया था।”
तुम्हारी मम्मी शरभ के हाथ से तुम्हारे लिए सामान भेजती थी इस बात पर अरविंद को क्या दिक्कत हो गयी यार?”
“शरभ ने एक बार सामान के साथ एक लव लेटर मुझे दे दिया बस अरविंद को सहन नहीं हुआ।”
“हे भगवान ! तो ये शरभ भी लाइन में था।”
“जब अरविंद ने उसकी खूब पिटाई की तब मुझसे मेरी कुछ सहेलियों ने कहा कि असल में अरविंद भी मुझे पसंद करने लगा था। “

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   समर अब अपना सर पकड़ कर बैठ गया…-” यह कितना घुमा रही हो यार पिया? यह सब पहले क्यों नहीं बताया?”
“क्यों? पहले बता देती तो तुम मुझसे शादी नहीं करते?”

   समर पिया को देखता रहा  और प्रिया जोर जोर से हंसने लगी समर को अचानक सब कुछ समझ में आ गया।

“उल्लू बना रही थी ना मेरा इतनी देर से।”

पिया जोर-जोर से हंसने लगी…-” हां जी बिल्कुल उल्लू ही बना रही थी । मैं बस यही देखना चाहती थी कि लड़के कितने बायस होते हैं न। जब अपनी होने वाली बीवी को अपने प्रेम प्रकरण सुनाते  हैं तो पूरे गर्व से सुनाएंगे। और साथ ही कहेंगे देख लो भाई मैंने तुम्हें सब बता दिया है। क्योंकि वह जानते होते हैं कि सामने वाली लड़की उनसे इतना टूट कर प्यार करती है कि उनके पास्ट को सुनकर भी सब कुछ सह कर भी उन्हें अपना लेगी।
     लेकिन लेकिन जब वही काम हम लड़कियां करती हैं तो तुम लड़कों के तन बदन में आग लग जाती है। तुम्हारे दिमाग में ऊटपटांग ख्याल आने लगते हैं ।यह रिलेशन में थी मतलब जरूर कुछ ना कुछ गड़बड़ होगी और तब तुम हमें एक्सेप्ट करने से पहले सौ बार सोचने लगते हो?
आखिर क्यों इतना सोचना। जब तुम शादी से पहले के अपने रिलेशंस के लिए खुद को माफ कर सकते हो तो अपनी होने वाली बीवी को क्यों नहीं? और अगर तुम्हारी होने वाली बीवी को तुम उसके पास्ट के लिए माफ नहीं कर सकते तो अपने आप को कैसे इतना साफ सुथरा मान लिया मिस्टर मंत्री जी?”
समर ने पिया के सामने कान पकड़ लिये…- मैं हार मानता हूं डॉक्टर साहिबा!! आपके सामने मैं वाकई हार मानता हूं! अरे यार बस मेरी लाइफ में लड़कियां आई और गई। कहीं भी मैं किसी सीरियस रिलेशनशिप में नहीं था। और दूसरी बात दोस्ती से आगे मेरा कोई भी रिलेशनशिप नहीं गया, नॉट इवन विद रेवन।
   तुम चाहो तो खुद रेवन से पूछ लो।”

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“मुझे किसी से नहीं पूछना। तुम पर भरोसा है बहुत भरोसा। आंख मूंदकर तुम्हारी हर बात पर विश्वास करती हूँ।  लेकिन शादी के बंधन में बंधने से पहले मैं बस एक बार अपने मन की यह बात तुमसे कहना चाहती थी जो आज मैंने कह दी। मैं प्यार तो तुमसे बहुत करती हूं समर बहुत ज्यादा लेकिन हमेशा तुम मेरे लिए मेरे पति ही रहोगे मैं कभी भी भगवान का दर्जा तुम्हें नहीं दे पाऊंगी। एक और बात मैं कभी भी अपने माता-पिता को तुम्हारे लिए नहीं छोडूंगी मेरे लिए हमेशा उनकी जगह सबसे ऊपर है ।जब कभी भी उन्हें मेरी जरूरत होगी मैं उनके एक फोन कॉल पर दौड़ी चली जाऊंगी उस वक्त प्लीज मुझे कोई भी दुहाई देकर रोकने की कोशिश मत करना। और तीसरी और सबसे बड़ी बात जितना प्यार और विश्वास मैं तुमसे करती हूं उतने ही प्यार और विश्वास की तुम से भी उम्मीद करती हूं। आज हालांकि एक झलक मैंने देख ली कि कहीं ना कहीं तुम्हारे अंदर भी लड़कों वाला वह ईगो छिपा हुआ है कि मेरी वाइफ….
      पर मैं समझती हूं ऐसा सभी के साथ होता है। और इसीलिए कह रही हूं कि मुझ पर अपना विश्वास कभी मत खोना । शादी का बंधन प्यार से भी ज्यादा विश्वास पर टिका होता है और अगर दोनों में से किसी भी एक के मन में विश्वास की वो डोर  टूट गई तो उसे जोड़ना बहुत मुश्किल होता है।

“विश्वास रखिये डॉक्टर साहिबा! यह मंत्री जी आपके विश्वास को जिंदगी भर टूटने नहीं देंगे।”
बातें करते हुए दोनों महल के भवन से बाहर बगीचे की तरफ चले आए थे। वही बनी एक झील के किनारे बैठे दोनों अपने भविष्य के प्यारे सपने बुनते रहे अगले दिन से समर को होने वाले चुनावों की रणभूमि में जो कूदना था।

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     चुनाव का एक हफ्ता देखते देखते ही बीत गया राजा समर युवराज विराट आदित्य प्रेम सभी इन कामों में ऐसे व्यस्त हो गए थे कि घर परिवार की तरफ किसी का ध्यान ही नही रहा।
    अपने समय पर चुनाव भी हो गए। सत्तारूढ़ पार्टी और विपक्ष दोनों ने ही वह सारे तामझाम किए जिनसे वोटर्स को अपनी तरफ खींचा जा सके ।
   कोई मुफ्त की दारू बांट रहा था तो कोई मुफ्त के कंबल लेकिन सभी किसी न किसी तरह का प्रलोभन ही दे रहे थे एकमात्र राजा की पार्टी ही ऐसी थी जो इस बार पूरी इमानदारी से लड़ रही थी।
     बेईमानी की इंतहा यह थी कि किसी किसी बूथ पर पार्टी के लोग खुद बैठकर सामने से लोगों को तोहफे देते हुए अपनी पार्टी के प्रत्याशी को वोट देने की गुहार कर रहे थे लेकिन लोग भी अब इतने नासमझ और अनपढ़ नहीं रह गए थे खासकर राजा की रियासत के लोग।

    चुनाव समाप्त होते ही वोटों की गिनती प्रारंभ हो चुकी थी।
    वोटों की गिनती में कोई गड़बड़ ना हो सके इसलिए बाहर राज्य से भी लोगों को बुलाया गया था रुझान आने शुरू हो गए थे और रुझानों के मद्देनजर राजा की पार्टी के प्रत्याशी जिस जगह से भी खड़े हुए थे वहां उन्हीं की जीत दिखाई देने लगी थी हालांकि अभी पूरा परिणाम आने में समय था लेकिन फिर भी राजा के पास पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ के ही फोन बजने लगे थे।
  इस सब के बावजूद समर मन ही मन अब भी शंकित था। उसे जब तक परिणाम सामने न आ जाये किसी पर भी विश्वास नही था कि उसके पास नेता जी का फोन चला आया…
   उनका फ़ोन रखते ही उसके माथे पर चिंता की लकीरें दिखने लगीं थीं…

क्रमशः

aparna …

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  दिल से….

  न हो पाया भई, मैंने कोशिश बहुत करी की ये अंतिम पार्ट लिख लूँ पर नही हो पाया।
अब तो मुझे लग रहा ये कहानी नही बल्कि पीपल वाली चुड़ैल है जो मुझसे चिपक गयी है और मुझे छोड़ कर जाने को तैयार ही नही।
  कहती है तू भले और कुछ भी लिख ले पर ये कहानी तो तुझे आजीवन लिखनी पड़ेगी।
  
     जब तक तेरी कहानी चलेगी तब तक तेरी सांस चलेगी टाइप्स!!!

  हे भगवान ! ये तो किसी हॉरर कहानी का प्लॉट सा बन गया है।
  लिख लूँ क्या एक हॉरर भी।
कमेंट में ज़रूर बताना आप लोग। और आजकल प्रतिलिपी पर आप लोगों के कमेंट्स छोटे होने लगें हैं। मैंने तो पहले भी कहा था कि मुझे आप लोगों का नाइस, वेरी स्वीट, सुपर्ब स्टोरी भी चल जाता है लेक़िन आप ही लोगों ने समीक्षा में बड़ी बड़ी पोथियां लिख कर शेरनी के मुहँ में खून लगा दिया, अब आप लोगों की छोटी समीक्षा दिल में ठक सी लगती है कि क्या मैं अच्छा नही लिख रही कि मुझे इतने छोटे कमेंट मिल रहे।
   तो दोस्तों पढ़ने के साथ लिखते भी रहें।
मतलब मुझे पढ़ें और मेरी रचना पर कमेंट लिखें।।
   जस्ट जोकिंग। आप सभी को पढ़ने के लिए स्वतंत्र हैं पर ….
…. बस ज्यादा खुल कर मैं नही लिखती….
… कारण आप सब को पता ही है…
         … संस्कार बहुत है ना मुझमें❤️

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aparna….
    

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

45 विचार “जीवनसाथी -119” पर

  1. ना जी, इतना भी मुश्किल नहीं है इसको लिखते रहना। बस आप एक बात समझ लें तो…… इसे पीपल वाली चुड़ैल नहीं समझें। पर तुलसीदास जी के शब्दों में “जस जस सुरसा बदन बढ़ावा, तासु दुगुन कपि रूप दिखावा।” की तरह इसके अंत को अपने मन पर ही छोड़ दे। तभी यह कहानी सूक्ष्म रूप में समाप्त हो जाएगी। पर एक बेहद सच्ची बात, हम पाठकों के लिए एक सुखद अनुभूति है यह कहानी, बस मन भरता ही नहीं। अभी इसी कहानी को ही पढ़ना अच्छा लगता है। हां अगर राजा किसी रियासत के राजा न भी होते या बांसुरी रानी न होती तब भी यह कहानी यूं ही बढ़ती। क्योंकि यह सिर्फ परी कथा नहीं, आज के मुद्दों को इतने हल्के से उठाती है कि भारी महसूस ही नहीं होती।
    प्रतिलिपि अब बहुत पीछे छूट गई है कई अच्छे लेखक अब या तो लिख नहीं रहे या कभी कभी ही वहां लिखते हैं। मेरे लिए भी यहां लिखना ज्यादा आसान लगता है तो आशा है कि प्रतिलिपि पर आपकी कहानियों की समीक्षा के स्थान पर यहीं लिखूं तो अनुमति देंगी।

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      1. Aparna ji Raja saheb aur Rani basuri dilo dimag pe etna habi ho gayi hai ki enko pdhe bina chain hi nhi milta roj akbar dekhri hu aaj sayad aap aage ka bhejengi na milne pr mausi hoti hai, khani ko chalne den, aapki bystata ka gyan hai, pr dil nhi manta kya kre, to kripya aage ki khani bdhate rhen aur etna der n kiya kren, aapki sb khani bhut acchi hai, pr raja rani bhulte hi nhi. ❤❤

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  2. So sweet r u❤️❤️
    Part was superb 👌👌
    और पीपल वाली चुड़ैल 🤣🤣🤣🤣🤣
    आप हॉरर के साथ हास्य भी लिखे।
    मुझे तो लगता है की आप जो भी लिखे, परफेक्ट ही होगा। Because just like ur stories u r also fentestic

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  3. आप खुलकर नहीं लिखतीं तब ये हाल है कि हमलोग कतई आशिक हुये बैठे हैं, खुलकर लिखतीं तो हमें पागलखाने ही चला जाना था।खूबसूरत पार्ट💞💐

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  4. Shaandar, super se bhi uper,,, piya ne to mere mann ki baat kr di,,wahh. Really iss mantri ko bevkoof bnakr maza aa gya.. but piya ne bahut sahi baate boli. Equality ka rista achha rehta h bs ego na aane paye.
    Raja jis tarah se bansi ka khyal rakhta h sayad hi koi rakhta ho,, kash duniya ke sb ladke ye story padhe😊
    Pratilipi pr comments chhote ho gye h kuki hm yha comments kr dete h.
    Shourya naam bhi achha h.

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