जीवनसाथी- 122

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    जीवनसाथी -122

      गाड़ी खाई से निकाली जा चुकी थी। गाड़ी महल की ही थी, जो विराज के नाम से थी लेकिन उसमें विराज नही था।
         गाड़ी में केसर थी, लेकिन उसके पिता नदारद थे। सड़क पर आते जाते लोगों का भी मजमा लगा हुआ था। पुलिस की गाड़ी के साथ ही एंबुलेंस भी लगी खड़ी थी।
  भीड़ को चीरते महल के लोग भी वहाँ पहुंच गए थे। समर और आदित्य के साथ ही युवराज भी आ चुका था।
रेखा को बाँसुरी ने महल में ही रोक लिया था। इतना सब हो हल्ला होते देख विराज को ढूंढ़वाने युवराज ने पहले ही अपने लड़कों को दौड़ा दिया था।
    विराज के बरामद होते ही युवराज ने उससे फ़ोन में बात कर सारी बातें उसे बता दी थी और तुरंत महल वापसी का फरमान सुना दिया था।
    अजातशत्रु से विराज का बैर अलग था लेकिन युवराज के लिए उसके मन में सम्मान था और इसी कारण वो उससे दबता भी था।
    बिना कोई बहाना किये  वो कुछ देर में ही महल चला आया था।
   उसे सामने सही सलामत देख रेखा की जान में जान आ गयी थी।
   ” बाँसुरी हमें लगता है गाड़ी में केसर दीदी और पिता साहब रहें होंगे।”
    रेखा का शक सहीं भी साबित हुआ था।

*****

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    गाड़ी की हालत बहुत खराब थी, और उससे भी ज्यादा गाड़ी में मिलने वाली लाश की। सिर्फ कपड़ों के रंग, जूतों और हाथ में बंधी महंगी घड़ी से ही लाश की पहचान केसर के रूप में हो पाई थी।
   गाड़ी का भयानक एक्सीडेंट हुआ था इसलिए लाश का पोस्टमार्टम होना बहुत जरूरी था इसीलिए एंबुलेंस में उसे डालकर अस्पताल की और भेज दिया गया। पंचनामा करने के बाद पुलिस बाकी औपचारिकताओं को पूरा करने चली गई महल से सारे लोग वापस लौट आए लेकिन समर आदित्य के साथ अस्पताल चला गया था।
       महल में यह खबर पहुंचते ही कि केसर जिस गाड़ी से जा रही थी वही गाड़ी दुर्घटनावश या किसी बड़ी गाड़ी की चपेट में आकर खाई में गिर चुकी थी, एक बार फिर दुख का माहौल बन गया था ।
रेखा पिछले कुछ दिनों में इतनी बार रो चुकी थी कि अब उसके आंसू थम गए थे। वह समझ गई थी कि उसकी केसर  दी अब हमेशा हमेशा के लिए उसे छोड़ कर जा चुकीं थीं, लेकिन एक बात थी कि जाने से पहले उन्होंने उसे एक रास्ता दिखा दिया था अपनी जिंदगी का रास्ता।
     केसर वहां से जाने से पहले रेखा से मिलकर अपनी प्रोजेक्ट की सारी डिटेल उसे समझा चुकी थी। इसके साथ ही उसने सारे कागज पत्तर रेखा के हवाले कर दिए थे।
   रेखा ने केसर से मिलकर उसे रोकने और समझाने की बहुत कोशिश की थी। लेकिन केसर रेखा को ही अपनी बातें समझा गई थी।
     केसर ने रेखा से स्पष्ट कहा था कि वह यहां से निकलकर अपनी नई जिंदगी जीना चाहती है। अब तक कि उसकी जिंदगी में शायद उसे कुछ भी वैसा नहीं मिला जिसकी उम्मीद थी लेकिन अब वह अपनी जिंदगी अपने हिसाब से बनाना चाहती है। उसने जाने से पहले अपने पिता साहब के एक मित्र का जिक्र भी किया था कि उनसे एक बार मिलने की इच्छा है तो हो सकता है हम लोग महल से निकलने के बाद उनसे मिलने जाए।
    
    जब बांसुरी निरमा और बाकी लोग रेखा को सांत्वना देते उसके आंसू पोंछ रहे थे उसी वक्त उनमें से किसी ने बताया कि वहां केसर की ही लाश मिली थी और रेखा के पिता साहब वहां मौजूद नहीं थे।
   यह सुनते ही रेखा को केसर की वह बात याद आ गई थी और उसने तुरंत युवराज भाई साहब को अपने पिता के उन मित्र का पता ठिकाना और फोन नंबर दे दिया था।
   रेखा का सोचना सही निकला युवराज ने उस नंबर पर फोन कर जब पतासाजी की तो पता चला रेखा के पिता वहीं मौजूद थे।
  उनसे बात करने पर सारी बातें और स्पष्ट हो गई थी उन्होंने बताया कि रेखा उन्हें वहां छोड़कर अकेली ही अपनी हवेली के लिए निकली थी और उसका कहना था कि दो दिन में हवेली साफ करवा कर अपने पिता को वहां बुला लेगी।
    रेखा को अब सारी बातें समझ में आने लग गई थी। उसकी केसर दीदी बहुत दिन से परेशान थी। उसे और उसके आत्मसम्मान को अब इस महल में रहना पसंद नहीं आ रहा था। रेखा यह सब जानते समझते हुए उसे भी यही समझाती रहती थी कि महल के लोग उसके बारे में अब कुछ नहीं सोचते लेकिन इतना समझाने के बावजूद केसर के मन में जो चल रहा था आखिर उसने अपना निर्णय उसी आधार पर लिया।
    इसलिए ही तो रेखा के इतना ज़िद करने पर भी उसने ड्राइवर साथ लेकर जाने से इंकार कर दिया था और कह दिया था कि हवेली में पहुंचने के बाद वह अपने सबसे भरोसेमंद आदमी के हाथों गाड़ी वापस भिजवा देगी।
    जाने  केसर के दिमाग में यह सब कब से चल रहा था। क्योंकि उसने कुछ समय पहले ही बिजनेस के सारे लीगल पेपर रेखा के नाम से तैयार करवा लिए थे। यहां तक कि एनजीओ में भी अपने नाम के साथ साथ रेखा का भी नाम हर जगह डलवाया था। रेखा को याद आने लगा कि उसने इस बात पर आपत्ति भी की थी….-” सारा काम तो आप करेंगी जीजा साहब फिर नाम हमारा क्यों डाला है? इसका मतलब मेहनत करें आप और प्रॉफिट में हिस्सेदार हों हम! यह कैसा न्याय हैं आपका। “
   तब  केसर ने बड़े प्यार से रेखा के सर पर हाथ फेर कर उसे अपने गले से लगा लिया था…-” हमारा सब कुछ आपका ही तो है। इस जिंदगी में और कुछ कमाया हो या ना कमाया हो। रुपए तो हमने बहुत कमा लिया आपके लिए रेखा। यह सब कुछ आपका ही है, बस यह याद रखना कि आपको इस सब की सार संभाल करनी है। “
” हमसे यह सब नहीं होगा जीजा साहेब। हम अपने घर परिवार और बच्चे में ही खुश हैं हमारी जिंदगी तो बस इतनी ही है इन्हीं सबके बीच।”
” नहीं अब तुम्हारा बेटा भी बड़ा होने लगा है इसलिए घर परिवार की परिधि से भी बाहर खुद को पहचानो रेखा। “
     रेखा को अब केसर कि कहीं हर बात धीरे-धीरे समझ में आ रही थी मतलब इतने दिनों से वह जो प्रोजेक्ट तैयार कर रही थी वह पूरी तरह से रेखा को खड़े करने के लिए था । उसने अपनी हवेली, बिज़नेस सभी में रेखा का नाम जुड़वा दिया था। और इतना सब करने के बाद पिता साहब को लेकर निकल गयी।
   उन्हें उनके सबसे करीबी दोस्त कम पार्टनर के घर छोड़ वो अकेली ही अपनी मंज़िल तय करने निकल गयी।
     यानी केसर महल से निकलते समय ही ये तय कर चुकी थी कि उसे अब ज़िंदा नही रहना।
   उसकी गाड़ी वाकई किसी बड़ी गाड़ी से टकरा कर असंतुलित हो खाई से गिर गई या उसने जानबूझकर उस खतरनाक मोड़ पर अपनी गाड़ी खाई में गिरा दी, यह राज अब केसर के साथ ही हमेशा हमेशा के लिए चला गया।

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     रेखा ने आंसू भरी आंखें उठा कर ऊपर देखा समर और आदित्य भी वापस चले आए थे। आदित्य भरी आंखों से आकर रेखा के पास बैठ गया उसने रेखा के दोनों हाथ थाम लिए।
    आज भले ही उन दोनों का देखा जाए तो कोई रिश्ता नहीं था। लेकिन आज से 6 महीने पहले तक दोनों भाई बहन के रिश्ते में बंधे थे। और दिल से आज भी आदित्य रेखा को अपनी छोटी बहन ही मानता आया था । जाते-जाते केसर ने उसके ऊपर रेखा की जिम्मेदारी भी डाल दी थी।
   वो मज़बूत था। उसकी आँखों में बहुत जल्द ऑंसू नही आया करते थे। और आज भी उसने अपने दिल में बहते आंसूओं को बाहर आने से रोक लिया था।
     
     विराज भी भागता दौड़ता वापस आ गया था। उसे भी अब तक रेखा और केसर की सच्चाई मालूम हो चुकी थी,  रेखा के पास बैठे आदित्य को देख वो दूसरी तरफ आ कर बैठ गया।

” खुद को सम्भालिए रेखा, ये वक्त मज़बूत होने का है न कि कमज़ोर होकर बिखर जाने का। आपके पिता साहब को हम महल वापस ले आते हैं। चलिए …”!

  रेखा आश्चर्य से विराज को देखती रह गयी… उसने धीरे से मना कर दिया…-” ,हमारी बात हुई थी उनसे। अभी वो वहीं रहना चाहतें हैं।
 
“ठीक है जैसी उनकी मर्जी। वैसे आप चाहें तो हम चलतें हैं आपके साथ। केसर बाई सा की बॉडी लाने…”

  रेखा पर एक के बाद एक बम फूट रहे थे, उसकी समझ से बाहर था कि आज विराज को हो क्या गया था।
    उसने धीरे से सिर हिला कर मना कर दिया। उसकी हिम्मत नही थी अपनी केसर दीदी को वैसे देखने की। पुलिस ने पंचनामा करने के बाद वैसे भी बॉडी को अस्पताल भेज दिया था,पोस्टमॉर्टम के लिए।
    रेखा ने आदित्य की तरफ देखा, वो खुद खोया सा बैठा बाहर कहीं दूर देख रहा था।
  समर धीमे कदमों से आकर आदित्य के पास खड़ा हो गया। उसने धीरे से उसके कंधों पर हाथ रख दिये, आदित्य समझ गया कि समर उससे कुछ कहना चाहता है…
   आदित्य के समर की ओर देखते ही समर ने अपनी बात कह दी…-” हमें वापस अस्पताल जाना होगा आदित्य! उन्हें कोई कंसेंट फॉर्म भरवाना है।”
   आदित्य ‘हाँ’ में सिर हिला कर खड़ा हो गया। उसने आंखों ही आंखों में रेखा की तरफ देखा और चलने के लिए इशारों में ही पूछ लिया। रेखा ने सिर हिला कर मना कर दिया।
    आदित्य और समर अस्पताल निकल गए…

  अस्पताल में समर आदित्य को साथ लिए पिया के केबिन के बाहर पहुंचा की बाहर खड़ी नर्स ने समर को पहचान कर केबिन का दरवाजा खोल दिया…-” आप अंदर बैठिये सर। मैडम एक डिलीवरी में हैं। निपटा कर यहीं आएंगी। आप लोगों के लिए चाय ले आऊं तब तक? “
    ‘न’ में सिर हिला कर दोनों थके हारे से वहीं बैठ गए। आदित्य का मन बेचैन सा हो रहा था, उसे बार-बार यही लग रहा था कि केसर ऐसा कदम नही उठा सकती। या तो उसके किसी दुश्मन ने ऐसा किया या केसर के किसी दुश्मन ने। पर कौन हो सकता है।
   वो सोचता सोचता टहलते हुए दरवाजे तक पहुंचा ही था कि एक झटके से दरवाज़ा खुला और एक औरत उसके सामने चली आयी…-” सर ! मैं आपसे रिक्वेस्ट करती हूँ, उस फूल सी बच्ची का पोस्टमार्टम मत कीजिये। प्लीज़ हो सके तो उसकी बॉडी हमें वापस कर दीजिए। हम लोग वैसे भी बहुत शर्मिंदा हैं कि उसके माँ …
    नीली आसमानी साड़ी में अपने लंबे बालों को करीने से पीछे बांध माथे पर छोटी सी बिंदी लगाए वो औरत अपने चश्में के भीतर से उसे घूरती कहने लगी कि उसकी बात आदित्य ने काट दी…

” जी आप किसकी बात कर रहीं हैं? मैं शायद नही समझ पा रहा। मैं इस शहर से भी नही हूँ…”
  आदित्य कुछ कह पाता कि वो एक बार फिर वही सब कहने लगी…-” देखिए वो बच्ची परेशान थी। लेकिन उसकी परेशानी का कारण “मायानगरी” नही है। वो असल में उसने मुझसे सारी बात बताने की कोशिश की थी,कुछ थोड़ा बहुत मैं जानती भी हूँ…

उनकी बातों के बीच ही कमरे का दरवाजा खोले पिया भीतर चली आयी।
   वो उस दूसरी खड़ी औरत की तरफ देखते ही सब समझ गयी। उसने अपनी टेबल से पानी का गिलास उठा कर उसकी तरफ बढ़ा दिया…-” जैसा आप सोच रहीं हैं मैडम वैसा नहीं है यह डॉक्टर नहीं है यह खुद भी एक….”
   आगे की बात पिया भी नहीं कह पाई उसने उस औरत को एक कुर्सी पर बैठाया और खुद जाकर अपनी कुर्सी पर बैठ गई समर और आदित्य की तरफ उसने कुछ पेपर्स बढ़ा दिये….

” केसर जी की पहचान सिर्फ उनके कपड़ों और उनके हाथ में बंधी इस घड़ी से हो पाई है। अगर आप लोगों को ये शंका हो कि ये केसर नही कोई और है तो हम लोग डी एन ए टेस्ट करवा सकते हैं।”

” क्यों केसर का चेहरा…?”

” एक्सीडेंट में बुरी तरह से खराब हो चुका है। आप देख कर शायद ही पहचान पाएं। वैसे अगर आप लोग देखना चाहतें हैं तो देख सकते। हैं। अभी उनका पोस्टमार्टम किया जा रहा है।
   मैं तो यही कहूंगी की आप लोग उन्हें घर लेकर जाने की जगह यही उनका क्रिमेशन भी करवा दें। क्योंकि उनकी बॉडी की जो हालत है , वो घर लेकर जाने लायक नही है।”

“मैं फिर भी एक बार देखना चाहता हूँ..”

  आदित्य के ऐसा कहते ही पिया ने समर की तरफ देखा और आदित्य को देख “हाँ” में सिर हिला दिया। वो अपनी जगह से उठ खड़ी हुई। उसके पीछे ही समर आदित्य और वो दूसरी औरत भी चल पड़ी।
   मॉर्ग( मुर्दाघर) में पिया बेधड़क अंदर घुस गई लेकिन समर बाहर ही खड़ा रह गया। आदित्य धीरे से अंदर चला गया। पिया ने केसर के चेहरे पर पड़ी चादर हटा दी। और उसे देख साथ खड़ी मैडम ने अपना सिर थाम लिया, उसी की बाजू वाली बेड पर उस लड़की की लाश पड़ी थी। उसकी बंद आंखे  और चेहरा देख मैडम खुद को संभाल नही पायी और सिसक कर रो पड़ी। उनका रोना बढ़ते बढ़ते तेज़ होता चला गया और उनकी हिचकियाँ बंध गयीं।

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   पिया को आकर उन्हें संभालना पड़ा…-“मैडम प्लीज़ खुद को संभालिए। मैं समझती हूं वह आपकी यूनिवर्सिटी की लड़की थी पर इस वक्त उसके माता-पिता को इनफॉर्म करना बेहद जरूरी है। “
   पिया उन सब से बात कर रही थी कि बाहर से वॉर्ड बॉय ने पिया को पुकार कर कहा कि पुलिस की गाड़ी बाहर आई है।
    उसकी बात सुन पिया अपने कमरे की तरफ बढ़ गयी। उसके पीछे ही आदित्य और वो मैडम भी चली आयीं।
    समर पहले ही आकर उसके केबिन में बैठ चुका था। उसे जाने क्यों मुर्दाघर के बाहर पहुंचते ही अजीब सी घुटन महसूस हो रही थी। उसकी बिगड़ी शक्ल देख पिया ने उसकी तरफ पानी का गिलास बढ़ाया ही था कि उसके दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी और दरवाजा खोल कर दो पुलिस के अधिकारी अंदर चले आए।  उनके आते तक में पिया ने अस्पताल में उस वक्त मौजूद बाकी दोनों सीनियर डॉक्टर्स को भी बुलवा लिया था।
  पिया ने उन दोनों में अधिकारियों का अभिवादन कर उन दोनों को बैठने के लिए जगह दी इसके साथ ही वह समर और आदित्य की तरफ घूम गई….
” अगर आप लोगों की इजाजत हो तो हम अस्पताल की तरफ से केसर….. केसर जी का क्रीमेशन कर देंगे! आप लोगों को ये कंसेंट फॉर्म भर कर साइन करना होगा। “
    समर को भी उस वक्त पिया की बात सहीं लगी। उसने आदित्य के कंधे पर हाथ रखा। आदित्य ने नीचे सिर किए हुए ही  “हां” में सर हिला दिया !समर ने पिया को इजाजत दे दी।
    पिया उन पुलिस वालों से बातों में लग गई” सर आप लोग चाय या पानी कुछ लेंगे”
  ” नहीं डॉक्टर पिया इस वक्त हम सिर्फ उस लड़की के बारे में पूछताछ करने आए हैं। आप उनके बारे में क्या बता सकती हैं?”
” सर ये मैडम माया नगरी यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज में लैब अटेंडेंट हैं, वह लड़की जिसने मेडिकल कॉलेज में सुसाइड किया है इनकी रिश्तेदार थी उसके बारे में यह ही आपको बता सकती हैं। “

   उन दोनों में से एक पुलिस वाले ने उन मैडम की तरफ देख कर अपना हाथ आगे बढ़ा दिया” जी नमस्कार मैं इंस्पेक्टर रोहित हूं। पहले बनारस में काम कर रहा था अभी ट्रांसफर में यहां 2 महीने पहले ही ज्वाइन किया है। आप तफ्सील से मुझे उस लड़की का नाम ?वह क्या पढ़ती थी? क्या करती थी? सारी बातें बता सकती हैं। “

” जी इंस्पेक्टर साहब नमस्ते। मेरा नाम रागिनी श्रीवास्तव है! मैं मायानगरी यूनिवर्सिटी के रानी बांसुरी मेडिकल कॉलेज के फिजियोलॉजी डिपार्टमेंट में लैब अटेंडेंट का काम करती हूं। यह लड़की दूर के रिश्ते में मेरी भतीजी होती थी। अभी सेकंड ईयर में थी। मेरा मतलब है फर्स्ट ईयर पास करके सेकंड ईयर में आई ही थी। “

” इसने क्यों सुसाइड किया? क्या आप इन बातों पर रोशनी डाल सकती हैं?”

” सर ये यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में ही रहा करती थी। इसलिए मैं ज्यादा कुछ तो नहीं बता सकती, लेकिन यह बता सकती हूँ, कि लड़की पढ़ने में बहुत होशियार थी। मध्यम वर्गीय परिवार की लड़की थी सर । इसने ऑल इंडिया मेडिकल एंट्रेंस में टॉप किया था। टॉप फिफ्टी में जगह बनाई थी सर।  और खुद ही मायानगरी का चुनाव कर के यहां आई थी।
      सर आपसे हाथ जोड़कर विनती है कि उसके शरीर के साथ छेड़छाड़ मत करवाइए।  उसके माता-पिता उसे इस हालत में नहीं देख पाएंगे । उनके सपनों को पूरा करने ही वो यहां आई थी। उनके लिए यह सदमा बहुत बड़ा है, कि उनकी बेटी अब नहीं रही। सर आपसे एक रिक्वेस्ट और है , डॉक्टर मैडम से गुजारिश करके उसका पोस्टमार्टम रुकवा दीजिए।
      सर मैं बताना चाहती हूं कि उसके सुसाइड में हमारे मायानगरी का कोई हाथ नहीं है। वह किसी तरह की उलझन या परेशानी में नहीं थी। क्योंकि अभी लगभग एक हफ्ते पहले ही मेरी उससे बात हुई थी। और वह काफी खुश लग रही थी।
   वह शायद अपने साथ वाले बच्चों को और कुछ मेडिकल के बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाना शुरू कर चुकी थी। क्योंकि उसने मुझसे कहा था कि मेरी कमाई शुरू हो गई है। बहुत खुश थी वह। मैंने कभी नहीं सोचा था कि वह ऐसे सुसाइड कर लेगी।”

  रोहित ने मुड़कर पिया की तरफ देखा….-” डॉक्टर साहब क्या बिना पोस्टमार्टम के बॉडी इन के हवाले की जा सकती है?

पिया ने “ना” में सिर हिला दिया…-” सर हमें मौत का कारण कैसे पता चलेगा? “
” जी आपकी बात भी सही है। ” रोहित वापस उन मैडम की तरफ मुड़ गया…-” मैं देखता हूं क्या हो सकता है। और यह कहना चाहता हूं कि मुझे अभी इसी वक्त आपकी यूनिवर्सिटी का चक्कर लगाना पड़ेगा। “
“सर आप बिल्कुल हमारी यूनिवर्सिटी में आ सकते हैं! पर मैं फिर आपसे गुजारिश करूंगी कि अगर आप लोग सादे कपड़ों में आकर पूछताछ करें तो ज्यादा अच्छा रहेगा । असल में हमारे यहाँ मैनेजमेंट सीट के भी बहुत सारे बच्चे हैं तो इसलिए हमारी रेपुटेशन का भी थोड़ा…

” जी मैं समझता हूं।” रोहित ने उसकी बात बीच में ही काट दी और समर की तरफ मुड़ गया…-” समर जी यह राजा अजातशत्रु की बनाई यूनिवर्सिटी ही तो नहीं है कहीं। “

समर और रोहित आपस में परिचित थे। फिर अभी कुछ दिन पहले ही दून वाले केस के समय भी रोहित ने समर की बहुत मदद की थी। आज भी यहां मिलते ही दोनों एक दूसरे को पहचान कर अभिवादन कर चुके थे।
  समर के हाँ में सिर हिलाते ही रोहित चौक कर अपनी जगह से खड़ा हो गया। और अचानक उसका ध्यान इस बात पर गया कि अस्पताल में समर और आदित्य मौजूद है।

“क्या आप दोनों भी उसी केस के सिलसिले में यहां आए हुए हैं।”

” ना ” में सिर हिलाकर समर केसर के साथ घटी वारदात रोहित को बता गया रोहित चौक कर आदित्य की तरफ देखने लगा…

“यह केसर कहीं रेखा की बड़ी बहन तो नहीं? “

आदित्य के हां कहते ही रोहित के चेहरे पर परेशानी के भाव झलकने लगे । वह अपनी जगह से उठकर बाहर निकल गया। बाहर निकलते हुए उसने अपने साथ वाले पुलिस वाले को भी बाहर बुला लिया। उनसे कुछ देर बात करने के बाद वह वापस समर की तरफ बढ़ गया…-” अगर आप लोग बुरा ना माने तो क्या मैं आप लोगों के साथ एक बार महल चल सकता हूं।”

समर और आदित्य के हाँ कहते ही वो पिया के पास पहुंच गया…-” डॉक्टर साहब मैं एक बहुत जरूरी काम निपटा कर महल से वापस आता हूं! उसके बाद आगे की तफ्तीश करूंगा!  तब तक के लिए अगर हो सके तो आप पोस्टमार्टम शुरू मत करवाइएगा।
    रोहित ने  एक नज़र उन मैडम की तरफ देखा। मैडम ने उसकी तरफ देखकर दोनों हाथ जोड़ दिये।  रोहित समर और आदित्य के साथ बाहर निकल गया।

   समर ड्राइविंग सीट पर बैठ गया आदित्य उसके साथ वाली सीट पर और रोहित पीछे बैठ गया।

  ” मैं समझता हूं तुम बहुत परेशान हो आदित्य।  लेकिन भगवान के रचे  खेल को कोई नहीं समझ सकता । जिसका जितना साथ होता है वह उतना ही साथ देता है।”

  समर की बात सुनकर आदित्य उसकी तरफ देखने लगा….-” क्या तुम्हें पूरा भरोसा है कि वह केसर की ही बॉडी थी? “

  समर आश्चर्य से आदित्य की तरफ देखने लगा-” तुम कहना क्या चाहते हो? “

” वह केसर नहीं थी। मैं जानता हूँ,वो केसर नही थी।”
  अपनी बात कह कर आदित्य चुपचाप सामने देखने लगा समर ने कुछ सोचते हुए गाड़ी और तेजी से महल की तरफ दौड़ा दी।

क्रमशः

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दिल से….

     प्यारे दोस्तों कैसे हैं आप सब?  पिछली तीन चार दफा से ऐसा हो रहा था कि, आप सब मुझसे शिकायत कर रहे थे कि आपको “दिल से” पढ़ने नहीं मिल रहा! तो यह भी एक कारण था आज “दिल से” लिखने का और दूसरा कारण था कहानी में आई नई गुत्थियों को आपके सामने थोड़ा सा सुलझा सकूं।
  
      मेरे जो पाठक सिर्फ जीवनसाथी पढ़ रहे हैं। उन्हें यह सुसाइड वाला एंगल शायद समझ में नहीं आ पाया होगा, लेकिन मैंने पहले भी कहा था कि जीवन साथी खत्म होने के बाद वह माया नगरी के साथ चलती रहेगी तो बस यही बात है।
    मायानगरी के छठवें  भाग के अंत में मेडिकल कॉलेज हॉस्टल में एक लड़की ने सुसाइड कर लिया था।  वही कड़ी जीवनसाथी के इस भाग में जोड़ी गई है। लेकिन आप लोग निश्चिंत रहिए जो पाठक सिर्फ जीवनसाथी पढ़ रहे हैं, उन्हें निराश होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि इस सुसाइड केस से जुड़ी जितनी भी बातें मायानगरी की है वह जीवन साथी के अगले भाग में आपको पढ़ने मिल जायेंगी।
    दूसरी बात माया नगरी में भी इस मर्डर मिस्ट्री को सुलझाया जाएगा लेकिन वह कॉलेज और वहां के स्टूडेंट के पॉइंट ऑफ व्यू से होगा। रंगोली और अभिमन्यु के नज़रिए से।
      दोनों ही कहानियों में किसी तरह का कोई रिपीटेशन नहीं होगा। बावजूद जो पाठक जीवनसाथी पढ़ रहे हैं वह भी संतुष्ट रहेंगे और जो मायानगरी पढ़ रहे हैं वह भी संतुष्ट रहेंगे।
     और जो पाठक दोनों कहानियां पढ़ रहे हैं उनकी तो फिर बल्ले-बल्ले है।
    तो आप सब पढ़ते रहिए त्योहारों को एंजॉय करते रहिए।
   

    और एक छोटी सी बात …..
    …..   याद रखें नवदुर्गा 9 दिन बैठती हैं हम उन्हें नौ दिन पूजते हैं । लेकिन उनका आदर हमें साल के 365 दिन करना है , अपने आसपास रहने वाली बच्चियां लड़कियां युवतियां औरतें प्रौढा वृद्धाएं सभी में वही नवदुर्गा है बस नजर और नज़रिए का अंतर है।

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    हमारी तरफ तो खूब गरबा और डांडिया होता है। आपकी तरफ भी होता होगा तो लगे रहिए झूम झूम कर करते रहिए और एक दूसरे के साथ त्योहारों का आनंद लीजिए…

          पेथल पुरमा सुनले ओ छोरिया
           झूमे नगरिया जब जब ये घूमे
             कमरिया रे थारी कमरिया
             कमरिया रे थारी कमरिया….

    शुभो नवरात्रि !!!

   मुझे पढ़ने और सराहने के लिए आप सबों का हार्दिक आभार प्रियजनों!!!

aparna…..

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लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

23 विचार “जीवनसाथी- 122” पर

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