शादी.कॉम – 24

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  शादी डॉट कॉम:- 24
                   

                  रिवॉलविंग चेयर पे वही तो बैठा था,  अपनी सफेद कमीज की बाहों को कुहनीयों तक मोड़ कर दाहिने हाथ मे ऑडिटर वाली पेन्सिल पकड़े टेबल पर पड़ी फाइल को देखता,,बिल्कुल वैसे का वैसा।। पर बुआ सही कह रही थी ,कुछ दुबला हो गया था,और ये चश्मा कब लग गया जनाब को।।
       अपने इस अवतार में तो और भी लुभावना हो गया था राजा!!
      राजा को देख ही रही थी कि राजा से उसके किसी साथी ने कुछ कहा,जिसे सुन वो खिलखिला के हँस पड़ा और तभी उसकी नज़र दरवाजे पे खड़ी बांसुरी पर पड़ गयी।।

      कितनी दुबली हो गयी थी बांसुरी!! पहले से कुछ अलग भी लगने लगी थी,अपने लम्बे बालों को सदा बांधे रखने वाली बंसी के बाल कितने करीने से कटे संवरे उसने खुले छोड़ रखे थे,एकदम एक सीधी लाइन मे सतर सीधे बाल ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने गर्म लोहा चला दिया हो ,उसपर सामने की कुछ लटें हवा से उड़ कर बार बार आंखों के आसपास आ उसे परेशान कर रही थी,जिन्हें उतनी ही शालीनता से अपनी उंगलियों से कान के पीछे संवारती बांसुरी कितनी प्यारी लग रही थी….
     खुले बाल ,आंखों मे लगा काजल,कानों में छोटे-छोटे हीरे के कर्णफूल,और गले में सोने की पतली सी चेन,उसी से मैच करती रागा की घड़ी, स्मार्ट तो पहले ही थी अब महानगरीय छवि को इतनी आसानी से आत्मसात कर और भी मोहक हो चली थी…..

      दोनों ने अभी एक दूसरे को भर नज़र देखा भी नही था कि सिद्धार्थ की आवाज़ उनके कानों में पड़ी

सिद्धार्थ -“सर ये मेरी एम्प्लायी हैं बांसुरी!!,ये आपको इस फाइल की सारी डिटेल्स समझा देंगी, कम बांसुरी!!”

राजा-” हेलो!! प्लीज़ बी सीटेड!!

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बांसुरी- ” थैंक यू” बोल कर बांसुरी राजा की सामने की कुर्सी पर बैठ तो गयी पर उसे खुद अपने आप पर बड़ी शर्मिंदगी सी हो रही थी,,राजा को देखने के बाद उसकी हृदय गति जिस तीव्रता से बढ़ती चली जा रही थी ,ऐसा लग रहा था शताब्दी से होड़ लगा रही है।।
         कांपते पैरों को यथासम्भव संयत कर उसने झुक कर फाइल उठा ली,,ऑफिस की सबसे होनहार एम्प्लायी का सारा तेज़ आज चूक गया,वहाँ की सबसे धुरंधर खिलाडी का हर दांव टेढ़ा पड़ गया.. बांसुरी उसे देख चकित थी,उसे बार बार देखने का मोह त्याग नही पा रही थी,लेकिन वो अपने पूरे आत्मविश्वास के साथ मुस्कुराता उसके सामने बैठा एक के बाद एक हर साल का हिसाब उससे बड़े आराम से मांगता चला जा रहा था।

     इसी हड़बड़ी में किसी एक जगह पे गलती से छूट गये दस्तखत करने जैसे ही बांसुरी ने टेबल से पेन उठानी चाही,वहीं रखा पानी का गिलास लुढ़क गया, वो ज़मीन पे गिर के चकनाचूर होता उसके पहले ही राजा ने उसे पकड़ लिया __

  राजा– रिलैक्स बांसुरी!! आराम से बताती जाओ ,हमें कोई जल्दी नही है,हम पूरे पांच दिन यहाँ रुकने वाले हैं।।

   पूरे पांच दिन पर राजा ने सच में ज़ोर दिया था या बांसुरी के ही मन का वहम था,पर जो भी था उसका दिल तो बार बार यही कह रहा था कि ये पांच दिन उसके जीवन से कभी समाप्त ना हों।।

    इसके बाद करीबन तीन घन्टे दोनो फाइलों पर सर गड़ाये काम करते रहे,बीच में जितनी भी बातें हुई सिर्फ बैंक और बैंक के काम को लेकर ही हुई।।

    ऑडिटर टीम का लंच फाईव स्टार होटल में प्रस्तावित था,जहां सिद्धार्थ उन सब को लेकर जाने वाला था,पर टीम के सीनियर के साथ अन्य लोगों ने भी वही बैंक के कैन्टीन में ही खाने की इच्छा जाहिर की जिससे एक पल को सिद्धार्थ भी सोच में पड़ गया कि कहीं ये भी टीम की इंटर्नल ऑडिट का हिस्सा तो नही?
      पूरी टीम को लिये सिद्धार्थ कैन्टीन में पहुंच गया, वहाँ पहले से बैठे सभी कर्मचारी सतर हो गये, पर टीम पूरी तन्मयता से मेन्यू देखने में ही व्यस्त थी,जब सभी को समझ आ गया कि ये उनके काम का हिस्सा नही है तब एक बार फिर सभी अपने खाने पीने और बातों में लग गये ।।
 
      उसकी टेबल से कुछ दूर हट कर जिस टेबल पर सिद्धार्थ ने सब को बैठाया वहाँ जान बूझ कर राजा ने ऐसा किया या अनजाने में बांसुरी समझ नही पायी पर जिस कुर्सी को सिद्धार्थ ने राजा के बैठने के लिये खोला उसे छोड़ राजा उस कुर्सी पे जा बैठा जिससे वो ठीक बांसुरी के आमने सामने पड़ गया।।

     वो तो बड़े मज़े से सबसे हँसता बोलता खाता रहा पर बांसुरी के गले से फिर एक निवाला भी नीचे नही उतरा….सभी का साथ देने वहाँ बैठना भी ज़रूरी था,पर अपनी प्लेट और चम्मच से निरर्थक खेलती बांसुरी को बार बार यही लग रहा था की सामने बैठे वो उसे देख रहा है,और इत्तेफाक से जब जब बांसुरी की नज़र राजा पर पड़ी हर बार उसने उसे खुद को देखता हुआ ही पाया….शरमा कर कभी बाल ठीक करती कभी पहले से जमे आंचल को सही करती बांसुरी वहाँ से निकल भागने को तड़प उठी।।

    इतने सालों में मन ही मन जिसका नाम जपती चली जा रही थी ,आज उसी से ऐसे आमना सामना हो गया कि सारा प्रेम सरल संकोच में बदल गया।।
  
      लंच समाप्त कर टीम वापस अपने काम में लग गयी,उन लोगो के रुकने की व्यवस्था बैंक की तरफ से मैरियट में की गयी थी।।
     लंच के बाद बांसुरी वापस अपने डेस्क पर आ गयी थी,कुछ थोड़े बहुत काम निपटा के टीम वहाँ से निकल गयी तब एक बार फिर सिद्दार्थ ने मीटिंग बुला ली।।

“गाईज़ आज का तो काम निबट गया,पर कल ये लोग सारे इंटरनल आडिट शुरु करेंगे, कल का दिन हमारे लिये थोड़ा मुश्किल हो सकता है ,सो बी रेडी”

  सिद्धार्थ के जाते ही माला दो कॉफ़ी के कप पकड़े बांसुरी की डेस्क पर आ गयी।।

” बंसी !! यार देखा तूने क्या हैंडसम बंदा आया है, हाय!!! ऐसे बंदे आयें तो मैं रोज़ ऑडिट करा लूँ ।”

राहुल- ” सुना है ग्रेड बी क्लियर किया है उसने ,वो भी एक बार में।।सही है बॉस ….. भगवान जिसे देतें हैं छप्पर फाड़ के देतें हैं ।”

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माला- ” सही है !!! क्रीम जॉब है,फुल ऐश!! बंदा शकल से ही पैदाईशी ब्रिलीयन्ट दिख रहा,स्कूल कॉलेज टॉपर टाईप,है ना बंसी ।।

   माला की बात सुन बांसुरी को ज़ोर की हँसी आ गयी,वो कैसे मुहँफट होकर राजा को गधा बोल देती थी ,और आज देखो उसके ही ऊपर पहुंच गया।।

माला– नाम क्या था राहुल ,उस बंदे का?? और है कहाँ का??

‘राजकुमार ‘ बोलते बोलते बांसुरी चुप रह गयी

राहुल- तुझे बड़ी माख लगी है पता करने की,,शादी करने का विचार है क्या??

माला– और क्या ? ऐसा सही प्रपोसल मिले तो क्यों ना शादी कर लूँ,तेरे जैसे बन्दर से तो फार बेटर है।

राहुल- आर के बोल रहे थे सब के सब ,हम तो भाई आर. बी.आई. वालों को सर ही बोलतें हैं,क्या पता कल को आठ दस साल बाद ये गवर्नर बन जायें और इनके दस्तखत वाले नोट से हम अपना राशन खरीदें ।
माला– हम्म पर जो भी हो,बंदा तो दिल ले गया मेरा, चल यार बांसुरी अब घर चलें,आज तो थकान भी बड़ी मीठी सी लग रही।।

   सब के सब हँसते हुए घर को निकल पड़े ।।

************

     बांसुरी बाथरूम से हाथ मुहँ धो कर निकली तब तक में माला चाय बना कर ले आयी और रेडियो ट्यून करने लगी__

           मन ये साहेब जी, जाणे हैं सब जी
              फिर भी बनाए… बहाने
          नैना नवाब जी, देखें हैं सब जी
              फिर भी न समझे… इशारे

          मन ये साहेब जी, हाँ करता बहाने
            नैना नवाब जी, न समझे इशारे
              धीरे-धीरे नैनों को धीरे-धीरे
                  जीया को धीरे-धीरे
                     भायो रे साएबों

धीरे धीरे कहाँ वो तो बहुत तेज़ी और मजबूती से हृदय में अपना आसन जमाये बैठा है…..
      बांसुरी एक बार फिर सोच मे पड़ गयी__ इतना लम्बा समय तो नही बीत गया था फिर ये कैसा संकोच दोनो के बीच पसर गया था।
     “चलो मैं तो लड़की हूँ,लड़कियाँ स्वभाव से ही संकोची होती हैं,पर वो तो आगे बढ कर बात कर सकता था,पूछ सकता था__ कैसी हो बांसुरी ?
   पर उसने भी कहाँ ज़रूरत समझी हालचाल पूछने की,अरे इतने साल कहाँ रही,कैसे रही,कुछ जानने का मन नही किया??
   कैसे बना रहा जैसे कोई जान पहचान नही ,सारा वक्त बस फाइल्स और बैंक की ही बातें करता रहा, जैसे बहुत ही गम्भीर हो अपने काम के लिये, क्या मै नही जानती,एक एक रग से वाकिफ हूँ,और मेरे सामने ही इतना दिखावा!!”

    दिखावे वाली बात सोच बांसुरी को खुद पर ही हँसी आ गयी__ कहाँ किया उसने दिखावा?? कोई दिखावा बनावटीपन ना उसे पहले कभी छू पाया था ना अभी!! वो तो बिल्कुल सामान्य बना हुआ था, ना उसे बांसुरी से कोई शिकवा था ना शिकायत!!
   और शायद इसी बात से बांसुरी ज्यादा परेशान हो उठी थी।।
     अगर कभी भी दोनो के बीच प्रेम था तो उसे वापस मिलने के बाद शिकायत करनी चाहिये थी ना, पूछना चाहिये था मुझे अकेला छोड़ कर कहाँ  चली गयी थी बांसुरी पर नही वो तो बिल्कुल तटस्थ बना हुआ था,ऐसे मुस्कुरा रहा था जैसे असल में उसे अब कोई फर्क ही नही पड़ता बांसुरी रहे या ना रहे।।
      पर जब फर्क ही नही पड़ता तो ऐसे घूर घूर के देख क्यों रहा था।।

माला- मैडम जी कहाँ खोयी हुई हो!!! इतनी देर से देख रही हूं बाई गॉड,खुद से बातें कर रही हो, क्या हो गया भई ,,सिद्धार्थ की याद सता रही क्या??

   माला बांसुरी को देख ज़ोर से हंसने लगी

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माला– नही नही अच्छा है,लगे रहो!! बेटा शादी तो करनी ही है एक दिन,और बॉस अगर आप पे फिदा है तो इससे अच्छा तो कोई ऑप्शन हो ही नही सकता ।।।

बांसुरी- चुप करो यार!! ऐसा कुछ नही है,हम तो कुछ और सोच रहे थे…..

माला — अब तो लग रहा जैसे इस आर.के. के चक्कर में मुझे भी तेरे जैसे सोचने की आदत पड़ जायेगी।।
     क्या महक रहा था यार बंदा ,जाने कौन सा पर्फ्यूम लगाया था उसने।

बांसुरी– डेविडॉफ

माला– क्या?? क्या कहा तूने,,तुझे कैसे पता??

बांसुरी– हमें कैसे पता होगा,तुम खुद ही सोचो …. अरे यार हमने तो ऐसे ही मजाक मे कह दिया,और तुम सीरियस होकर बैठ गयी।।

माला– हम्म सही कहा ,पर यार राहुल कह रहा था बंदा तेरे ही शहर का है….यार इसी बहाने बात करवा दे मेरी ,कुछ तू अपने शहर की बात पूछ लियो और उसी बहाने मैं उसे ताड़ लूंगी।।

   बाँसुरी मुस्कुरा कर रसोई में चली गयी__” पुलाव बनाने जा रही हूँ,चलेगा ना।”

माला- दौड़ेगा मेरी जान!! तेरे हाथ के मटर पुलाव पर तो ‘ मैं वारी जावाँ,’।।

***************

अगले दिन सुबह से ही बैंक में अफरा तफरी मची थी, सभी टीम मेंबर्स बहुत गम्भीरता से हर एक फाइल का मुआयना कर रहे थे।।
     टीम के सीनियर तीनो लोग ऑडिट में व्यस्त थे , सभी किसी ना किसी काम को करने में लगे थे बस एक वो ही कहीं नही था।।
   
          चारों तरफ बार बार देखने पर भी बांसुरी को राजा नज़र नही आ रहा था,पहले उसे लगा शायद सिद्धार्थ की केबिन में होगा इसिलिए एक बार वो बहाने से वहाँ भी हो आयी,पर वहाँ भी नदारद।।
     दूसरे ऑफिस रूम में भी नही था,यहाँ तक की हार कर बांसुरी एक बार लॉकर रूम भी झांक आयी, आखिर आज गायब कहाँ हो गया??

         अपने डेस्क पे वापस आ कर बाँसुरी ने फाइल खोली ही थी कि उसे अपने पीछे से वही आवाज़ सुनाई दी__ ” हमें ढूँढ रही थी??”

   चौंक कर बांसुरी ने पीछे देखा,,,राजा खड़ा मुस्कुरा रहा था,वो भी मुस्कुरा उठी…..

सिद्धार्थ– सर!!आईये आईये ,आप ही का वेट कर रहे थे,,अब तबीयत कैसी है आप की,is everything alright?”

राजा- yeah everything is fine,,चलिये आगे का काम देखा जाये।।

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    बांसुरी पे एक के बाद एक बम फोड़ा जा रहा था, पहले आर.बी.आई. की टीम के हिस्से के रूप मे, फिर ऐसी धुआँधार अन्ग्रेजी बोल के…..
    कितना बदल गया था वो,,पर मन से आज भी वही कानपुर का अपने मोहल्ले का राजा भैय्या ही था…..
       जी में तो आ रहा कि एक बार गले से लग के इतने दिनों के सारे ताने उलाहने माफ कर लिये जाये,पर सामने पड़ने पर तो हाथ भी मिलाने की हिम्मत नही हो रही थी।।

**************

    लंच के समय एक बार फिर बांसुरी ने सोचा __ “अगर आज सामने की कुर्सी पर बैठा तो बिना किसी लाज शरम के मैं भी आँखे खोल के देखूँगी….कुछ ज्यादा ही फ्रैंक हो रहे हैं जनाब!!

   पर हाय रे मन!! जो सब सोच सोच के भावी रूपरेखा तैयार की जाती है ,ज़रूरी नही कि ये मन उस समय आपका साथ दे और आपको सब अपने मन का पूरा करने दे।।
      बांसुरी का मन खुद हर बार उसे धोखे पे धोखे दिये जा रहा था,बेचारी कुछ सोच के रखती पर राजा के सामने पड़ते ही हो कुछ जाता।।

     एक बार फिर वही हुआ!!,वो बड़ी शान से अपनी टीम के साथ आया और ठीक उसके सामने की कुर्सी खींच बैठा गया….एक बार फिर बांसुरी कट के रह गयी,ना उसके बाद वो माला से कोई बात कर पायी और ना ही ढंग से कुछ खा पायी।।

    टीम के सदस्यों के खाने की व्यवस्था देख सिद्धार्थ बांसुरी की टेबल पे चला आया ,और एकदम उसकी कुर्सी के पास ही खड़ा हो कर उन लोगों को आगे के बारे में कोई जानकारी देने लगा….
       सिद्धार्थ पहले भी ऐसा करता था या आज ही कर रहा था पर बांसुरी को उसका इतना घुल मिल के  बात करना रास नही आ रहा था….

     बात करते करते सिद्धार्थ ने बांसुरी की प्लेट से एक इडली उठा ली और बड़े मज़े से चटनी लगा कर खाने लगा,पर उसकी इस हरकत पर बांसुरी तिलमिला कर रह गयी,मन ही मन प्रार्थना करती हुई कि राजा ने ना देखा हो उसने जब राजा की तरफ देखा तो वो उसे ही देख रहा था।।
    अब इतनी दूर से वो उसे समझाती भी कैसे कि सिद्धार्थ की इस हरकत में बाँसुरी की कोई जिम्मेदारी नही थी….पता नही आज ही वो क्यों इतना फ्रेंडली हो रहा था।।

    बाँसुरी ने अपने सूखते गले को तर करने पानी पीकर गिलास नीचे रखा और सामने देखा तब तक राजा वहाँ से जा चुका था।।

***************

   राजा को सिद्धार्थ का इस तरह बांसुरी से घुलना मिलना पसंद तो नही आ रहा था,पर वो भी कॉरपोरेट जगत की सभ्यता को समझता था,इस बात को जानने लगा था कि साथ काम करते हुए अक्सर ऐसे रिश्ते बन जाते हैं  ।।
     तभी राजा को फोन बजने लगा उसे उठाये वो बाहर निकल गया।।

   बाँसुरी ने जब राजा को अपनी कुर्सी पर नही पाया तो वो भी लपक के बाहर निकल गयी….

माला– क्या हुआ बंसी ?? कहाँ चल दी तुम?

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बांसुरी– बस अभी आयी……बिना उन लोगो की तरफ देखे वो जल्दी से कैन्टीन से निकल ही रही थी कि बाहर गैलरी में इधर से उधर घूमते हुए फोन पर बात करते राजा पर उसकी नज़र पड़ गयी,राजा ने भी उसे देख लिया,वो मुस्कुराते हुए उसकी तरफ बढ़ आया__
 
   ” बन्टी का फोन था,उसकी पोस्टिंग मुम्बई में ही है, आज शाम मुझसे मिलने पुणे आ रहा है।।

” अच्छा” बांसुरी को इससे अधिक कुछ सूझा ही नही कि क्या कहे।।

राजा– तुम भी चलोगी डिनर पर?? यहीं कहीं आस पास चले जायेंगे जिससे तुम्हें लौटने मे देर ना हो।।

    उफफ!! कितना औपचारिक निवेदन था ये,,अरे पूरे रौब से भी तो कह सकता था,कि बांसुरी रात मे हमारे साथ तुम भी डिनर पर चलना पर नही….
       बांसुरी को अपने विचारों में खोये देख राजा कुछ बोलने ही जा रहा था की उसने तुरंत ही हामी भर दी,बांसुरी को लगा अगर उसने जल्दी से जवाब नही दिया तो कहीं राजा अपनी योजना ही ना बदल दे।।

” हाँ हम आ जायेंगे,पर आना कहाँ हैं??”

” रुके तो हम मैरियट में हैं,, चाहें तो वहाँ डिनर कर सकते है पर वापसी में तुम्हें थोड़ा दूर पड़ेगा।।”

” कोई बात नही,हम आ जायेंगे।।

” ठीक है ,ऐसा करना अपनी सहेली को भी लेते आना जिससे अकेले ना लौटना पड़े ।।”

  बांसुरी ने हाँ में सर हिलाया और मुस्कुरा के वापस चली गयी पर ये आखिरी बात दिल में फांस की तरह चुभ गयी….माला को लेकर आने क्यों बोला आखिर राजा ने??

*************

    वैसे हमेशा सिर्फ दस मिनट में झट से तैयार होने वाली बंसी को आज क्या पहनूँ क्या ना पहनूँ सोचने में ही आधा घंटा लग गया…..
     आधे घन्टे से तैयार हो कर बैठी माला ने जब हर एंगल से अपनी सेल्फी खींच ली तब झल्ला के उसने ही आलमारी से एक मैरून कुर्ता निकाल उसके हाथ में पकड़ा दिया__
    ” बन्सी अब और देर की ना तूने,तो मैं अकेली ही चली जाऊंगी।”

  बांसुरी तैयार होकर आयी तो माला उसे देखती ही रह गयी__
    ” क्या बात है बन्सी!! आज तो मतलब खूब जम रही हो ,,दिन भर जिसके गाने सुनती हो ना तुम्हारी प्यारी सुचित्रा सेन उनकी नवासी रायमा जैसी ही लग  रही हो, भई अब तो बता दो ,हम जा कहाँ रहे हैं ।।

” सरप्राइस है आपके लिये,चलिये तो सही।।”
  मुस्कुराती हुई बंसी दरवाजा खोल बाहर निकल आयी।
 
    दोनों के वहाँ पहुंचने तक राजा और बन्टी भी हॉल में आ चुके थे,और उन्हीं दोनो का इन्तजार कर रहे थे।।

माला–उफ अल्ला!! बन्सी तू वापस चल घर,फिर बताती हूँ तुझे,,एक बार तो बताती की हम आर के से मिलने आ रहे हैं,यार मैं भी कुछ ढंग का पहन लेती, कैसी बेकार सी जीन्स डाल ली मैंने।।

  दोनों को देखते ही राजा ने खड़े होकर दोनो का मुस्कुरा के अभिवादन किया और माला का बन्टी से परिचय करवा दिया_
” ये मेरे कजिन है रविवर्मा,मुम्बई एक्सेंचर में काम कर रहे हैं,मेरा काम पुणे में है पता चला तो मुझसे मिलने आ गये।।
    और बन्टी ये हैं माला जी,ये भी उसी बैंक में काम करती हैं जहां बांसुरी ।।

बन्टी– हेलो जी!! आप दोनो से मिल कर बड़ी खुशी हुई,,क्या हाल है बंसी !!तुम तो यार और दुबली हो गयी हो,वैसे अच्छी लग रही हो।।

माला को कुछ भी समझ नही आ रहा था वो कभी बांसुरी को देखती कभी अपने सामने बैठे दोनो लड़कों को।।

  बांसुरी ने दो दिन से राजा को फॉर्मल कपडों में ही देखा था,उसे अभी ब्लू डेनिम और टी शर्ट में देख थोड़ा संकोच कम होने लगा।।
   इत्तेफ़ाक़ से राजा ने भी मैरून टी शर्ट ही पहनी थी

बांसुरी– कैसे हैं आप बन्टी भैया,क्या हाल चाल हैं ।

बन्टी–हाल तो फिलहाल ए सी है,और चाल चलन के तो हम बचपन से बड़े पक्के हैं।।

राजा– हाँ ये मुझसे बेहतर कौन जानता है,,अरे बन्टी अकेले ही आये तुम रानी को भी लेते आना था।।

बन्टी– मैं ले तो आता लेकिन उनका चौथा महीना चल रहा है,इसिलिए इतनी लम्बी ड्राइव के लिये उसने मना कर दिया।।

बांसुरी– एक मिनट !! किसने मना कर दिया?? क्या चल रहा है?? मुझे कुछ समझ नही आ रहा ,साफ साफ बताईये।।

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राजा– अरे तुम्हें पता नही शायद!! हमारे बन्टी भाई की शादी हो चुकी है,पूरे दो साल हो गये शादी को।।

  ये सुनकर बांसुरी ने बन्टी की तरफ खुशी से चहक के देखा कि बन्टी पहले ही बोल उठा__

बन्टी– यार बन्सी तुम ना तो एफ बी पे हो ना इंस्टा पे , मैं ढूँढता भी कैसे,वैसे मैने राजा को बोला था,तुम्हे बताने के लिये…पता नही इस नामुराद ने बताया क्यों नही।।

बांसुरी– वो सब बाद में,पहले आप अपनी शादी की कहानी तो बताइये।।

बन्टी– हाँ बिल्कुल!! वो तो सबसे ज़रूरी है।।
देखो भई हुआ ये कि दिल्ली में मेरी एक नई गर्लफ्रैंड बन गयी,जिसको खाने का बड़ा शौक था,वो रोज़ सुबह फोन पे यही प्लान करती की किस नये रेस्तराँ को आबाद किया जाये,और बस इतने से पेट नही भरता था उसका,,मेरा दिमाग भी बराबर खाती थी, जाने उसे कौन सी ऐसी गलतफहमी थी कि अंबानी मेरे बाप का नौकर है।।रोज़ नही फरियाद,रोज़ नयी गुजारिश ,अच्छा और फोन इत्ते प्यार से करती ‘ हेलो बाबू’ की मैं एकदम पिघल जाता था।।
     वैसे घंटो बात करती फिर जब उसका रखने का  मन करता तो बहाना मार देती ‘ बेबी मॉम आ रही है’
पहले तो साला मैं गधे पे गधा बनता गया,फिर एक दिन शाम को जब हम लौट रहे थे मैनें कहा घर तक छोड़ देता हूँ,कम्बख्त कहती है-‘ नो बेबी !! होस्टल वॉर्डन  ने देख लिया तो मुसीबत हो जायेगी!!
  मैं सोच में पड़ गया कि होस्टल में मम्मी कैसे आ जाती है पर मैनें कुछ कहा नही।।
   फिर बाद में समझ आया मम्मी वम्मी नही आती वो तो उसके दूसरे बॉयफ्रेंड का फोन आता था,,बेमुराद, बेमुरव्वत, बेवफा !! मैनें लाखों उड़ा दिये उसके गोलगप्पो के पीछे।।
    उसी चक्कर में तो रानी से मिलना हुआ।।

बांसुरी– अच्छा कैसे??

बन्टी– मेरी एक्स को एक दिन गोलगप्पे की तलब लगी,जो उसे हर दो दिन के बाद लग ही जाती थी,तो हम दोनो गली मुहल्ले ढूँढ ढाँढ के उसके पसंदीदा गोलगप्पे वाले तक पहुंच गये …..अब इनका शुरु हुआ ,एक पे एक खाना और उसपे तुर्रा देखो__” भैय्या मिर्ची तो डाली ही नही,थोड़ा और तीखा करो ना” वो गोलगप्पे वाला बेचारा कई बार मिर्ची डालने के बाद अपना एवरेस्ट का पैकेट निकाल चेक करने लगा __ साले टी वी पे बोलते हैं सही तीखा सही लाल ।।और ये धुरंधर यहाँ ‘ ना ही तीखा ना ही लाल’ कर रही है।।
      भर पेट खाने के बाद जब आगे बढ़े तो उसकी पेट में कोहराम मच गया,,एवरेस्ट के तीखालाल ने अपना कमाल दिखाया।।
      मैं  उसको लेकर सीधा एम्स भागा,वहाँ मैडम को तुरंत ऐडमिट कर लिया गया…..
   वहीं हमारी मुलाकात हुई रानी से!! रानी को तो जानती हो ना??

बाँसुरी ने राजा की तरफ प्रश्न पूछती निगाहों से देखा उसने आंखों से ही हाँ कह कर समाधान कर दिया

बन्टी– रानी वहाँ सर्जरी में एम एस कर रही थी,मैने उसे प्रिया से मिलवाया और दोस्ती का वास्ता देकर प्रिया की एक्स्ट्रा केयर लेने को कह ऑफिस निकल गया।
   अब जब जब मैं ऑफिस से फोन करुँ प्रिया का फोन बिज़ी आये,बाद मे उसने कहा मम्मी से बात कर रही थी।।
   पर डिस्चार्ज के समय प्रिया को बाहर भेज रानी ने मुझे सारी सच्चाई बता दी उसके दूसरे बॉय फ्रेंड के बारे में ।।
   बस यही से रानी से दोस्ती शुरु हुई और घर वालों के आशीर्वाद से दो साल पहले शादी भी हो गयी।।

माला– वॉव मज़ा आ गया सुन के!! अब प्लीज़ कोई मुझे ये बतायेगा कि आप सब एक दूसरे को कैसे जानते हैं ।।

बन्टी– क्यों इन दोनों ने तुम्हे कुछ बताया नही।।

बांसुरी ने घबरा के बन्टी की तरफ देखा ही था की राजा की आवाज़ कानों में पड़ी __

राजा- हम दोनो एक ही शहर से हैं,बल्कि एक ही मोहल्ले के हैं,इसिलिए अच्छी जान पहचान है!!बस!!

   मैरियट के बड़े से हॉल में एक तरफ गज़ल सन्ध्या का आयोजन किया गया था,जहां कोई एक साहब गुलाम अली जी की गज़ल गा रहे थे__

  इस शहर में किस से मिलें हम से तो छूटी महफिलें
    हर शख़्स तेरा नाम ले, हर शख़्स दीवाना तेरा।
    कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तेरा।
    कुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा तेरा।।

  डिनर होते होते ग्यारह बज चुके थे ,,इतना समय हो गया देख कर राजा थोड़ा परेशान होने लगा__

राजा — हम साथ चलें क्या बांसुरी,तुम लोगों को वहाँ ड्रॉप कर हम वापस आ जायेंगे।।

बांसुरी– नही नही !! आप परेशान मत होईये,,पुणे तो जागता शहर है,वैसे भी सदाशिव पेठ में भीड़ भाड़ रहती है।।

राजा ने उनके लिये कैब बुक करी और  बांसुरी के
बार बार मना करने के बावजूद गाड़ी में उन दोनों को पीछे बैठा कर खुद ड्राईवर के बाजू वाली सीट पर बैठ गया,दुसरी कैब लेकर बन्टी भी मुम्बई निकल गया।।
 
     उनकी कैब सदाशिव पेठ की तरफ भाग चली, एफ एम में चलते गाने के साथ बांसुरी एक बार फिर कानपुर की गलियों में और राजा में खो के रह गयी…..

         मेरी साँस साँस महके
              कोई भीना भीना चन्दन
         तेरा प्यार चाँदनी है
               मेरा दिल है जैसे आँगन
         हुयी और भी मुलायम
                मेरी शाम ढलते ढलते
        हुयी और भी मुलायम
                मेरी शाम ढलते ढलते
         ये कहाँ आ गये हम
                 यूँ ही साथ साथ चलते………

क्रमशः

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aparna…
    
      

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

3 विचार “शादी.कॉम – 24” पर

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