शादी.कॉम-27

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शादी डॉट कॉम-27

बांसुरी– नही ,पहले हमारी बात सुनो!! क्या कह रहे थे सिद्धार्थ सर ,मुझसे शादी करेंगे,हो चुकी तब तो।।तुमने कहा नही उनसे कि बांसुरी सिर्फ और सिर्फ राजा की है,और राजा से ही बांसुरी की शादी होगी।।

राजा– नही कहा!! लेकिन कल उनके घर जायेंगे ना तब कह देंगे,,अब खुश!!

बांसुरी– हाँ बहुत बहुत खुश ।।

राजा– तो फिर आओ इधर।

बांसुरी– कब से देख रहे हैं,घूम फिर के एक ही जगह तुम्हारा कांटा अटक जा रहा

राजा– इत्ते साल से इन्तजार भी तो किया है तुम्हारा बन्सी!!!
      मुस्कुराती हुई बांसुरी आगे बढ़ कर राजा के गले से लग गयी,और राजा उसके चेहरे पे झुकता चला गया।।

    आंखो में खो जाये आंखे
    बोले हाथों से हाथ
    बाहों में छिप कर
    सांसों से जैसे डोले रात
    उंगलियों को उंगलियों से
     मौसमों को शोखियों से बात करने दो
     चुप तुम रहो,चुप हम रहें
    खामोशी को खामोशी से
    जिंदगी को जिंदगी से बात करने दो।।

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बांसुरी में धीरे से राजा को अपने से अलग कर दिया

राजा– क्या हुआ बन्सी??

बाँसुरी — कुछ नही बस ऐसे ही।।
   अच्छा सुनो तुमने यहां पर कुछ भी नहीं देखा है ना 4 दिन से तो सिर्फ काम में ही भिडे हो बैंक से होटल होटल से बैंक।। चलो तुम्हें पुणे घूमाती हूं यहां ऐतिहासिक महत्व की बहुत सी चीजें हैं पुराने अंग्रेजों के जमाने के स्मारक हैं शिवाजी महाराज के जमाने के किले हैं बाजीराव मूवी देखी थी ना ,उसमें दिखाया काशीबाई का महल भी यही है शनिवार वाडा में।। पांच नदियां हैं कई ब्रिज है बहुत बड़े-बड़े कॉलेजेस हैं चलो सब तुम्हें दिखाऊं।

राजा– हम जो देखने आए थे वह तो देख लिया बंसी

बांसुरी राजा की बात सुन मुस्कुराने लगी।।

राजा– सुनो अब देखना वेखना छोड़ो यार जोर की भूख लगी है चार-पांच दिन से कुछ ढंग से खाया नहीं कुछ अच्छा सा खिलाओ तो कोई बात बने।।

बांसुरी– कानपुर सी कचौड़ीयां और पकौड़ीयां  तो यहां मिलने से रहीं फिर भी एक अच्छी जगह है एफसी रोड पर वहां चलते हैं वहां की चाट  खिलाती हूं तुम्हें।।

राजा– यहां की चाट से तो तौबा कर ली बंसी हमने। उस दिन तुम्हारे सिद्धार्थ सर तुम्हारी कैंटीन में बड़ी शान से हमारे सामने लेकर आए कहा सर यह चख कर  देखिए हमारे यहां का रगड़ा पेटिस आपके कानपुर की चाट ना भूल गए तो हमारा नाम बदल दीजिएगा।
     वो  चाट खाकर जो जबान का स्वाद बिगड़ा है तो आज जाकर सुधरा है,, अब तब से हम सोच रहे हैं कि तुम्हारे सिद्धार्थ सर को क्या नया नाम दें।।

बांसुरी– तुम नही सुधर सकते।।

राजा– हाँ तो सुधरे भी क्यों,,जैसे हैं अच्छे हैं ।।

बांसुरी– राजा हम चाहते हैं ,यह रात कभी खत्म ना हो बस ऐसे ही चलती रहे और हम दोनों एक दूसरे का हाथ हाथ थामे आगे बढ़ते रहें।

राजा– बंसी हम तो अब तुम्हें एक पल के लिए नहीं खोना चाहते ।।हम तो चाहते हैं __हम कल जल्दी से घर पहुंचे और सबसे, तुरंत अपनी शादी की बात कर ले, और बस एक हफ्ता बीतते  बीतते तुम हमारी दुल्हन बनकर हमारे घर आ जाओ हमेशा के लिए।।

बांसुरी– बड़े बेसबर हो  रहे तुम तो।

राजा– हां तो क्यों ना हो?? इतने साल इंतजार भी तो किया है तुम्हारा….. हमारा बस चले तो अभी यहीं फेरे ले ले तुम्हारे साथ।।
    हम तो कहते हैं बंसी तुम भी हमारे साथ कानपुर चलो ,तुम तुम्हारे घर बात कर लेना…. हम हमारे घर और सब मान गए तो अगले दिन ही शादी कर लेंगे।।

बांसुरी– अरे इतनी शॉर्ट नोटिस पर छुट्टी कहां मिलेगी राजा ऐसे कहां जा पाएंगे हम,, ऐसा करो अभी तुम ही जाओ दो-तीन दिन में सर से बात करके छुट्टियां लेकर हम भी आ जाएंगे और जैसा तुम चाहते हो …भगवान ने चाहा तो 1 हफ्ते में ही तुम्हारी दुल्हन बनकर तुम्हारे घर आ जाएंगे।।

राजा– सोच लो अब हमारे बिना रह पाओगी??

  दोनों इसी तरह हंसते बोलते एक दूसरे का हाथ थामे रास्ते के किनारे किनारे चलते रहे।। इतने सालों के ताने उलाहने, प्यार भरी मीठी झिड़कियां,, सवाल जवाब और ढेर सारी बातें …..न सुलझने वाली समस्याएं और उलझने वाली मीठी-मीठी बातें करते करते दोनों जाने कहां तक चलते चले गए……… जब कहीं थक जाते तो रास्ते के किनारे पड़ी बेंच पर बैठ जाते हैं जो ठेला मिला उससे कुछ खा लिया कहीं चाय मिली वहां पी ली…….. एक पानी की बोतल पकड़े दोनों सारी रात पूरे शहर की खाक छानते रहे।।

     रात के अंधियारे से सुबह हल्की हल्की सी उगने  लगी।।। तब राजा ने बांसुरी को उसके फ्लैट पर छोड़ा और अपने होटल चला गया दोनों ने विदा होते समय सिद्धार्थ के घर एक ही समय में पहुंचने का वक्त तय कर लिया।।।

********

माला– बंसी अरे उठ जा कब तक सोती रहेगी सुबह का 10:00 बज गया है तू कल रात पार्टी में अचानक गायब हो गई रात भर पता नहीं कहां भटकती रही किस समय फ्लैट पर आई मुझे तो कुछ पता ही नहीं चला ??यार यह चल क्या रहा है ??

बांसुरी– सब बता देंगे थोड़ा तो धैर्य रखो पहले 1 कप प्यारी सी चाय पिला दो।।

माला– जो आज्ञा मैडम जी मैं जा रही हूं ,आपके लिए चाय चढ़ाने …..आप ऐसा कीजिए हाथ मुंह धो लीजिए।।

बाँसुरी उठ कर बाथरुम में घुसने ही वाली थी कि दरवाजे पर किसी ने घंटी बजाई, दूध वाला दूध दे चुका,पेपर वाला आ चुका,फिर ये कौन आ गया,,सर को झटक कर बांसुरी बाथरूम में घुस गयी।।

   नहा धोकर निकलकर बालों को झटकते हुए बांसुरी जब बैठक में आई तो वहाँ राजा को बैठे देख आश्चर्यचकित रह गई।।

बांसुरी– अरे तुम!! तुम यहाँ कैसे??

माला– सर बस अभी कुछ देर पहले ही यहां आए हैं बांसुरी,, तुम यहां बैठो मैं सर के लिए कॉफी बना कर लाती हूं।।

राजा– माला जी अगर आपको तकलीफ ना हो तो चाय बना दीजिए कॉफी हमें जरा कम पसंद है।।

माला–  हाँ  बिल्कुल!! तकलीफ क्यों होगी मैं चाय ही बनाकर ले आती हूं।।

   माला अन्दर जाते जाते बांसुरी को भी साथ में खींच ले गयी।।

माला– चल क्या रहा है मैडम कुछ बताइन्गी  आप?? यह आरके सर आखिर हैं कौन?? तुम्हें कैसे जानते हैं?? यह सुबह-सुबह हमारे घर पर क्या कर रहे हैं ??
     और सुन यार तू कॉफी फेंट ले तब तक मैं थोड़ा चेहरे का रंग रोगन कर लूँ  वरना बंदा सोचेगा कैसी वाहियात लड़की है भूतनी बनी घूम रही है घर पर।। सारा इंप्रेशन खराब हो जाएगा।।

बांसुरी– तुमने सुना नहीं उन्हें कॉफी नहीं चाय पीनी है तुम जाओ आराम से तैयार हो जाओ हम तब तक चाय चढ़ातें हैं ।।

दस मिनट में माला तैयार होकर आ गयी,बांसुरी चाय चढ़ा कर राजा के साथ बैठी बातें कर रही थी और चाय खौल खौल कर काढ़ा बन चुकी थी।।

माला– बंसी चाय को छान दूं या थोड़ी और जलानी है।।

बांसुरी माला की आवाज सुन भागती हुई रसोई में आई और चाय को झांक कर देख हंस पड़ी।।

” कुछ ज्यादा ही खौल गई ना” उसने हंस के माला से पूछा

माला– चाय तो जो पकी सो पकी ,,, तुम दोनों के बीच क्या पक रहा है ??अब तो सब सच सच बता दे।

बांसुरी ने तीन कप में चाय छानी एक प्लेट में कुकीज निकाली और माला को साथ लिए बैठक में चली आई।।

बांसुरी– राजा इनसे मिलो यह है हमारी प्यारी सहेली माला।।

राजा — अच्छे से जानते हैं हम।।

मुस्कुराते हुए बांसुरी ने राजा को देखा और कहा

बांसुरी– माला हमारे बारे में सब जानना चाहती है।

राजा– क्यों तुमने आज तक कुछ बताया नहीं चलो कोई बात नहीं…. आइए माला जी आपको हम ही बता देते हैं हमारी और बांसुरी की कहानी।।

माला–  कुछ कुछ समझ तो आने लग गया है कि बांसुरी की अलमारी का वह स्पेशल कोना आप ही हैं।।
जहां  कुछ अजीबोगरीब सामान रखती है ये ।।

राजा– अच्छा!! जैसे क्या क्या रखती है??

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माला– एक रुद्राक्ष की माला,एक जेंट्स परफ्यूम,, एक टूटी से पैन रखी हुई है, एक छोटी सी नोटबुक पड़ी है, एक टी-शर्ट भी है ।।।रुद्राक्ष की माला को कभी-कभी निकाल कर अपने हाथ में लपेट लेती है और फिर वापस निकाल कर वही रख देती है।

राजा– टी-शर्ट कौन सी रखी है तुमने??
 
ऐसा बोलते में उसके हाथ से छलक कर चाय उसकी शर्ट पर गिर गयी।।

बांसुरी– वाह टी शर्ट रखी है,ये सुनते ही शर्ट खराब कर ली।।लायो उतार कर हमे दो,हम साफ करके ले आते हैं ।।

राजा– क्या बात है बंसी !! हमें शर्ट लेस देखने की बड़ी जल्दी है तुम्हें ।।

बांसुरी– बकवास बन्द करो ,और लाओ इधर दो

राजा– पर ये टी शर्ट तुम्हें मिली कहां से??

बांसुरी– और कहां से मिलेगी तुम्हारी जिम से।। जिस दिन हम जॉइनिंग के लिए निकल रहे थे उस दिन जिम गए थे तब प्रिंस से बोलकर तुम्हारे लॉकर से तुम्हारी यह टीशर्ट निकलवा ली थी हमने,, और अपने साथ ले आए इसमें तुम्हारी खुशबू बसी है आज तक वैसी की वैसी रखी है।।

राजा–  छी फिर मैं नहीं पहनूंगा  बिना धुली गंदी टीशर्ट।।

बांसुरी– अरे अपने कपड़ों के साथ इसे भी धोते थे बाबा !! और फिर से तुम्हारा परफ्यूम डालकर आयरन करके वापस रख देते थे,साफ है पहन लो।

राजा ने हंसते हुए कपड़े बदले और माला को अपनी कहानी सुनाने बैठ गया।
      प्रिंस प्रेम और निरमा, पिंकी और रतन, बंटी और रानी,रेखा और लल्लन युवराज भैया रूपा भाभी अम्मा बाबूजी दादी बुआ जी जितने लोग उनकी प्रेम कहानी का हिस्सा थे प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से सबको दोनों ने याद किया।।। पूरी कहानी में दोनों जाने कितनी बार पागलों की तरह हंसे और बहुत बार दोनों की आंखें  भीग गई।।

बांसुरी– प्रिंस कैसा है राजा?? कानपुर छोड़ने के बाद से तो उसने हमसे कभी बात ही नहीं की!!

राजा– तुम से सब नाराज जो हो गए थे,, तुम उनके हीरो को छोड़कर जो चली आई थी।।

बांसुरी मुस्कुरा कर रह गयी__” बात तो करी जा सकती थी ना!!”

राजा– हां बात तो करी जा सकती थी पर एक-एक कर ऐसी छोटी-छोटी बातें जुड़ती चली गई कि सब का गुस्सा बढ़ता ही चला गया।। उस दिन तुम्हारे जाने के बाद तुम्हारे एग्जाम वाले दिन हमने चिट्ठी लेकर प्रेम को तुम्हारे सेंटर भेजा था तुमने कोई जवाब नहीं दिया बल्कि उल्टे पैरों उसे बिना हमारी चिट्ठी पढ़े ही वापस भेज दिया…. इस बात के बाद से हमें तेज बुखार आ गया हमें बुखार में पड़े देखकर अम्मा पसीज गई और तुम्हारे घर गई बंटी को लेकर तुम्हारे और हमारे बारे में बात करने चली गयी।। तुम्हारी बुआ ने हमारी अम्मा को भी खोटे सिक्के सा वापस भेज दिया।।उसके बाद हम बीमार पड़ गए बहुत बीमार पड़ गए थे बंसी !!इतने बीमार कि हमें लेकर युवराज भैया को मुंबई तक दौड़ लगाना पड़ा पर इसके बाद भी तुमने हमारी कोई खोज खबर नहीं ली इस घटना के बाद घर में सब टूट गए हर किसी ने अलग-अलग हमें कसम दे दी कि हम अब तुमसे कोई संबंध ना रखें तुम्हें भूल जाए पर क्या हमारे लिए यह संभव था कि हम तुम्हें भूल जाते ।।

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    अविश्वास से राजा को देखती बांसुरी की आंखों से आंसुओं की अविरल धारा बहती रही जिसे पोंछने की उसने कोई कोशिश नहीं की उसने बहुत धीमी सी आवाज में राजा से पूछा “क्या अम्मा जी खुद हमारे घर आई थी”?

राजा– हाँ अम्मा खुद गयी थी।।

बांसुरी– राजा हमारा विश्वास करो किसी ने इस बारे में हमें कुछ नहीं बताया !!हमें समझ नहीं आ रहा कि हमारी मम्मी तक ने हमें कुछ  क्यों नहीं बताया।। हमसे सच में बहुत भूल हुई हमें दोबारा तुम्हें फोन करना चाहिए था,, कानपुर से निकलने के बाद जब हम पहली बार ज्वाइन करने गए तो हमने एक ही बार तुम्हें फोन किया रूपा भाभी से थोड़ी बहस हो गई…… और फिर हमारा दिमाग गरम हो गया उसके बाद कई बार सोचा और फोन भी उठाया लेकिन हिम्मत ही नहीं पड़ी तुमसे बात करने की….
     हमें माफ कर दो राजा अब तुम रूपा भाभी अम्मा जी कोई हमें कुछ भी कह ले कितना भी सुना ले हम अब तुम्हें छोड़कर कभी नहीं जाएंगे।।

    बांसुरी सर झुकाए रोती रही राजा अपनी जगह से उठकर बांसुरी के पास आया और उसने उसे गले से लगा लिया।। इन दोनों को अपने आंसुओं में भीगा देख माला वहां से उठकर चुपचाप चली गई कुछ देर बाद एक ट्रे में दो गिलास  में पानी और तीन कप चाय लिए वह वापस चली आई।

माला– मुझे लगता है अब हमारे लव बर्ड्स की सारी शिकायतें दूर हो गई होंगी,अब ऐसा करो आंसू पोछो ,चाय पियो और बंसी तैयार हो जाओ ,सिद्धार्थ सर के घर भी तो जाना है।।

  बांसुरी आंखें पोंछ कर तैयार होने अंदर चली गई माला ने रेडियो पर एक गाना ट्यून किया और फोन पर कैब बुक करने दरवाजा खोलकर बाहर निकल गई राजा वहीं सोफे पर दोनों हाथ सीने पर रखें आंख बंद करके लेट गया__

       मोहे लगे प्यारे सभी रंग तिहारे
       सुख दुख में हर पल रहूं संग तिहारे
       मगन अपनी धुन में रहे मोरा सैयां
       पग पग लिए जाऊं मैं तोहरी  बलैया।।

राजा आंखें बन्द किये लेटा रहा और बांसुरी वही खड़ी उसे देखती रही।।गाना खतम होते ही राजा ने आंखें बन्द किये हुए ही कहा__

राजा– मन भर कर निहार लिया हो हमें तो अब जाकर तैयार भी हो जाओ वरना तुम्हारे सिद्धार्थ सर गोली मार देंगे हमें ।।
    बांसुरी लजा कर तुरंत अन्दर चली गयी।।

   कुछ देर बाद तीनो कैब में सवार सिद्धार्थ के घर की ओर निकल पड़े,,रास्ते मे बांसुरी को अचानक कुछ याद आ गया__

बांसुरी– राजा एक बात बोलूं नाराज तो नहीं होंगे

राजा– हां बोलो

बांसुरी– यहां एक गणपति मंदिर है बहुत मानता ( मान्यता) है उनकी!!  बहुत दिनों से हमारी इच्छा थी की कभी जब हमारे बीच सब सुलझ जाए तब तुम्हारे साथ हम उनके दर्शन को जाएंगे क्या हम वहां चल सकते हैं??

राजा– इसमें पूछने की क्या बात है बंसी उन्हीं के कारण तो आज हम एक हो पाए हैं।। हमने भी बड़े हनुमान जी के पास अर्जी लगा रखी थी,, अब जब तुम कानपुर आओगी ना ,तो तुम्हें वहां भी लेकर जाना है।।

   कुछ आगे जाकर उन्होनें कैब छोड़ दी और तीनों मन्दिर के लिये मुड़ गये। तीन चार छोटी छोटी गलियां पार करने के बाद आखिरी गली के छोर पर बड़ा सा गणपति मंदिर था।। तीनों ने वहां के सदर दरवाजे से अंदर प्रवेश किया ,,प्रांगण को पार करते जब वह मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंचे तभी पंडित जी ने आगे बढ़कर कपाट बंद कर दिया।।

माला– अरे यह क्या हो गया यह तो अच्छा नहीं माना जाता है।। मंदिर पहुंचो और दर्शन भी ना मिले।। है ना बंसी अपशकुन होता है ना यह।।

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बांसुरी– पंडित जी थोड़ा सा कपाट खोल दीजिए ना हम बस झांक कर ही  दर्शन कर लेंगे और तुरंत चले जाएंगे।
   बांसुरी की बात पर पंडित जी ने कान तक नहीं दिए और अपने काम में लगे रहे। भीड़ एक-एक कर प्रसाद और फूल समेटे छन्टने लगी ।।
      तीनों बहुत देर तक इधर-उधर कोशिश में रहे कि शायद कोई पंडित कपाट खोल दे पर वह बंद कपाट फिर नहीं खुले।।
     ना चाहते हुए भी बांसुरी के मन में अजीब सा संशय घर कर गया,, उसे वह अपशगुन वाली बात अच्छी नहीं लगी।। बार-बार उसके मन में यह डर बैठने लगा कि कहीं फिर से वह राजा को खो ना दे।।

   तीनों वहां से निकल कैब बुक कर सिद्धार्थ के घर पहुंच गए।।
       उनके वहां पहुंचने तक में लगभग सभी मेहमान आ चुके थे ।।अपने साथ के लोगों के साथ राजा भी बातचीत में व्यस्त हो गया।।

नायर– क्या बात है आरके!! तुम तो बहुत पंक्चुअल हो आज कैसे लेट हो गए??

राजा– सर हम निकल तो टाइम पर गए थे पर एक बिल्ली रास्ता काट गई।।

    हँसते हुए राजा ने बांसुरी को देखा और वापस अपने साथियों के साथ बातों में लग गया।।
    बनावटी गुस्सा दिखाते हुए बांसुरी भी माला के साथ रसोई में सिद्धार्थ की माँ की मदद करने चली गयी।।

     रसोई मे तीनों औरते खाने की तैयारियों मे लग गयी,वहीं बातों बातों मे माला ने सिद्धार्थ की माँ को मन्दिर वाला किस्सा भी कह सुनाया जिसे सुन उन्होनें भी माला की अपशगुन वाली बात पर अपनी मोहर लगा दी,इस सब को सुन कर बांसुरी का मन और बुझ गया,अब वो किसी भी हाल में राजा से अलग नही होना चाहती थी….आखिरकार उसने सोच लिया कि किसी तरह आज राजा रुक जाये,क्योंकि ऐसे अपशगुन के साथ यात्रा करना कहीं से भी सही नही रहेगा,,अगर दो दिन राजा रुक जाये तो वो भी छुट्टी लेकर उसके साथ ही कानपुर चली जायेगी।।
    ऐसा सोचने के बाद उसके मन को तसल्ली मिली और एक बार फिर वो पूरे उत्साह से अपने काम में लग गयी।

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        सिद्धार्थ की मां को बांसुरी पहली ही नजर में बहुत भा गई थी वो रसोई में बहुत उत्साह से हर एक दक्षिण भारतीय व्यंजन की रेसिपी और उसके पोषक तत्वों की व्याख्या संदर्भ सहित बांसुरी को समझाती रही।
     सिद्धार्थ को कब क्या खाना पसंद है ,कब ब्लैक कॉफ़ी पीता है कब दूध वाली ,ये सब कुछ सिलसिलेवार बांसुरी को महा उत्साह से बताती उसकी माँ चह्कती रहीं।।बांसुरी के अपने मन में राजा चल रहा था,आगे के दो दिन राजा के साथ कैसे गुजरेंगे उसी खुशी में अपने में मगन बांसुरी भी पूरी लगन से उनकी बातें सुनती रही और कहीं उन्हे ये ना लगे की वो कहीं और खोयी है इसलिये बीच बीच मे अपनी तरफ से सवाल भी करती गयी।।

    जब सारे लोग बैठक में खाने पीने में लगे हुए थे बांसुरी ने इशारे से राजा को बालकनी मे बुलाया और अपनी घबराहट, और उसके दो दिन बाद साथ साथ निकलने वाला प्रस्ताव भी रख दिया, जिसे राजा ने सहर्ष स्वीकार कर लिया__

राजा– बस इतनी सी बात !! राजा ने मोबाईल निकाल और अपनी शाम की फ्लाइट कैन्सिल कर दी ।।

राजा– अब आज रात को सुकून से बैठ कर दो दिन बाद की तुम्हारी हमारी टिकट बुक कर लेंगे।।अब खुश!!

बांसुरी– बहुत बहुत खुश!!

   बैठक में धीमी धीमी आवाज़ में बजते गाने को सुन अपने धड़कते दिलों  को काबू करते दोनों ही अलग अलग जाकर बैठ गये।।

       ख़्वाब है तू, नींद हूं मैं
        दोनों मिले रात बने
        रोज़ यही मांगूं दुआ
     तेरी मेरी बात बने, बात बने

        मैं रंग शर्बतों का
     तू मीठे घाट का पानी
       मैं रंग शर्बतों का
    तू मीठे घाट का पानी
    मुझे खुद में घोल दे तो
   मेरे यार बात बन जानी

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क्रमशः

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aparna..

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

6 विचार “शादी.कॉम-27” पर

  1. शब्दों की कमल की जादूगरी। इस भाग में बाँसुरी का ये कहना कि )”बाँसुरी सिर्फ राजा की है)”, मुझे बहुत पसंद है। आपके गानों के सेलेक्शन की फैन हु, कभी कुछ समझ न आये क्या सुनूँ तो आपकी कहानियों के भाग से निकाल लेती हूं। खूबसूरत भाग mam।

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