शादी.कॉम- 28

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  शादी डॉट कॉम-28

     खाना खा कर सब एक साथ बैठे गप्पे मारते रहे ,इसी बीच सिद्धार्थ की माँ सबके लिये दक्षिण भारतीय फिल्टर कॉफ़ी बना कर ले आईं ।
   स्टील की छोटी छोटी ग्लास में सबको सर्व करती वो जब राजा के सामने पहुंची तब बांसुरी अचानक कह उठी__

बांसुरी– आँटी ये कॉफ़ी नही पीते।।

   बांसुरी की बात सुन उन्होनें मुस्कुरा कर कॉफ़ी का गिलास राजा के हाथ मे थमा दिया __” ये कोई ऐसा वैसा कॉफ़ी नही है बेटा ये हमारा साऊथ का स्पेशल फिल्टर कॉफ़ी,,एक बार पी कर तो देखो,,अमृत है अमृत ।सिड के नाना (पिता) तो डेली सुबह एक बड़ा गिलास भर के पीते थे।।

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बांसुरी– अंकल को क्या हुआ था आंटी  हमारा मतलब क्या उनकी तबीयत खराब थी।।

  बांसुरी की बात सुन सिद्धार्थ की मां मुस्कुराते हुए बांसुरी की तरफ देखने लगी उसे देखते हुए उन्होंने ना में सिर हिलाते हुए कहा
      “ओह नो नो  उनका तबीयत ठीक है वह दिल्ली में अपना प्रैक्टिस कर रहे हैं वकालत की।।
  एक्चुली हम सेपरेट हो गए।। सिड के होने के बाद मुझे और सिड  को उनकी जितनी जरूरत थी वह उतना समय हम दोनों को नहीं दे पाते थे उनका सारा समय उनके केस और अदालत ही ले जाते थे घर पर आने के बाद भी सारा समय केस से जुड़ी फाइलें पढ़ना उस पर काम करना यही उनका काम था।।
     मैं अकेले घर और बच्चे को संभालते हुए फ्रस्ट्रेट होने लगी थी इसीलिए हमारे बीच झगड़े बढ़ने लगे और लड़ झगड़ के साथ रहने से हमने अलग हो जाना ज्यादा सही समझा।। वह वहां रहते हैं ,, मंथ में कभी एक दो बार हमसे मिलने आते हैं अभी भी लीगली हम हस्बैंड वाइफ ही हैं।।।

    उनकी बात सुन बांसुरी झेंप के रह गई क्योंकि अब तक वो यह सोचा करती थी कि सिद्धार्थ के पिता किसी रोग या बीमारी के कारण चल बसे हैं।। आज सिद्धार्थ की मां से यह सच्चाई सुनकर उसे अपने उतावले पन पर शरम सी आ गई इस शर्मिंदगी से बचने के लिए उसने घड़ी की तरफ देखा और सिद्धार्थ की मां से घर वापस जाने की गुजारिश कर दी।।

    शाम के 5:00 बज रहे थे राजा बांसुरी और माला सिद्धार्थ से विदा लेकर उसके घर से निकल पड़े घर से निकलने के पहले बांसुरी ने जैसे ही सिद्धार्थ की मां के पैर छूने चाहे उसी समय राजा भी उनके पैर छूने को झुका दोनों को एक साथ ही अपने दोनों हाथ से आशीर्वाद देते हुए सिद्धार्थ की मां ने कहा “हमेशा खुश रहो”

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    वहां से निकलने के बाद माला का विचार फ्लैट पर वापस जाने का था लेकिन बांसुरी ने उसे भी अपने साथ ले लिया तीनो के तीनो वहां से कैब बुक करके फिनिक्स मॉल के लिए निकल गए।

     मॉल में एक जगह से दूसरी जगह घूमते ,हर दुकान के चक्कर लगाते  और गप्पे लड़ाते तीनों घूमते रहे माला ने उन दोनों से कहा कि “जब हम मॉल आए ही हैं तो तुम दोनों अपनी शादी की शॉपिंग भी क्यों नहीं कर लेते,, माला का यह आइडिया राजा को भी जँच  गया और दोनों के दोनों मान्यवर और मोहि में घुस गए।।
       हालांकि वहां अंदर जाने से पहले बांसुरी ने एक बार राजा से कहा भी कि तारीख तय होने के पहले हमारे यहां कोई भी तैयारी नहीं की जाती तब राजा ने हंसकर कहा__” शादी तो हम दोनों की तय हो चुकी है एकदम पक्की ही समझो !!और तारीख 2 दिन बाद निकलने ही वाली है तो शॉपिंग करने में कोई बुराई तो नहीं ।।”

   राजा की बात पर बांसुरी मुस्कुरा कर रह गई ।।

   राजा के बहुत इसरार करने के बाद भी बांसुरी ने शादी का जोड़ा नहीं खरीदा और ना ही राजा को शेरवानी लेने दी,, पर उसकी जिद मानकर तीन-चार भारी भरकम साड़ियां और राजा के लिए कुछ कपड़े जरूर खरीद लिए।। उसने एक बहुत सुंदर गुलाबी सी साड़ी माला के लिए भी खरीद ली।।

     इतना सब दिलवा कर भी राजा का तो जैसे मन ही नहीं मान रहा था यहां से निकल कर जूते चप्पलों की दुकान में वह बांसुरी को लिए घुस गया।।
     कई जोड़े फुटवियर्स दिलवा कर भी उसे चैन नहीं मिला।।
      एक-एक कर ब्राइडल खरीदारी की सभी दुकानों पर राजा बारी-बारी से बांसुरी को ले जाता गया और शॉपिंग करवाता गया।।

   हर एक साड़ी से मैचिंग सैंडल बालों में लगाने का क्लच, चूड़ियां ,कंगन ,झुमके और भी बहुत कुछ।।

    और सबसे आखिर में वह बांसुरी को लिए गहनों की सबसे बड़ी दुकान में घुस गया बांसुरी के लाख मना करने पर भी उसने एक बहुत सुंदर  जड़ाऊ कंगन खरीद लिया………….और तभी उसकी नज़र माणिक की एक अँगूठी पर चली गयी,,छोटे छोटे माणिको से सजा एक मोर अँगूठी मे बना था,राजा ने उसे भी लपक के बांसुरी के लिये खरीद लिया।।
      बांसुरी ने भी एक सॉलिटियर राजा के लिये खरीद लिया।।

     राजा तो वो अँगूठी वहीं बांसुरी को पहना देना चाहता था,पर  अपने राशिरत्न को बिना सिद्ध किये पहनने को बांसुरी का मन नही माना।।
    राजा ने अपने लिये बांसुरी द्वारा ली गयी अंगूठी भी उसके ही सामान में रखवा दी।।

राजा –बांसुरी अब घूम घूम के बहुत थक गये हैं,कहीं बैठ के कुछ खा लिया जाये।।

माला — गुड आइडिया!! वैसे भी तुम दोनों तो अपनी शादी की तैयारी कर रहे और मेरे पैर बिना मतलब को कबड्डी कबड्डी खेल रहे हैं,यहाँ घुसो वहाँ निकलो बस।।

  माला की बात पर दोनो हंसने लगे।।तीनो वही नीचे बने एक कैफे में चले गये,उसी मे एक तरफ म्युज़िकल नाइट चल रही थी,जिसमें कोई भी जाकर गाना गा सकता था,,एक एक कर वहाँ बैठे लोग उठ के जाते और कुछ भी आड़ा टेढा गा कर आ जाते,,आखिर इन सब को देखने के बाद बांसुरी ने राजा से भी गाना गाने की गुजारिश कर ही दी__

बांसुरी– जाओ ना राजा,प्लीज़ गाओ ना।।देखो कोई भी मख्खीमार यहाँ गा ले रहा है तुम तो सच में बहुत ही अच्छा गाते हो,,जाओ ना ।।
     बांसुरी की बात पर मुस्कुराते हुए राजा उस तरफ बढ गया।।

      चाहे बना दो,चाहे मिटा दो,
      मर भी गये तो देंगे दुआयें ।
      उड़ उड़ के कहेगी खाक सनम
      ये दर्द ए मुहब्बत सहने दो
      मुझे तुमसे मुहब्बत हो गयी है
      मुझे पलकों की छाँव में रहने दो
      एहसान तेरा होगा मुझ पर
      दिल चाहता है जो कहने दो…

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राजा के गाने को खतम करते ही लोगों की तालियाँ गूँज उठी पर बांसुरी का मन जाने कैसा तो हो गया__

बांसुरी– ये मरने जीने वाला गाने की क्या ज़रूरत थी,कुछ और ढंग का नही गा सकते थे।।

राजा– अरे बुद्धू गाने मे प्यार छिपा है वो नज़र नही आया ,बस एक शब्द पकड़ के बैठ जाओगी!  वहमी औरत!! अच्छा तुम्हारे लिये कुछ और भी गा देते हैं,, रुको।।

          सांसो की सरगम ,धड़कन की वीणा
          सपनों की गीतांजली तू
          मन की गली में महके जो हरदम
          ऐसी जुही की कलि तू
          छोटा सफर हो लम्बा सफर हो
          सूनी डगर हो या मेला।।
          याद तू आये मन  हो जाये
          भीड़ के बीच अकेला
         बादल बिजली चंदन पानी जैसा अपना प्यार
         लेना होगा जनम हमें कई कई बार…..
          इतना मदिर इतना मधुर तेरा मेरा प्यार..

************
   अलग अलग बैग्स में ढ़ेर सारा सामान समेटे तीनों वहाँ से निकल गये।।
    मॉल से बाहर निकलते ही माला फ्लैट में जाने के लिये कैब बुक करने लगी__

माला– गाईस मैं बहुत थक गयी हूँ , तुम दोनों का मन तो भरा नहीं होगा ……तो ऐसा करो तुम दोनों साथ साथ घूमो मैं यह सारा सामान लेकर फ्लैट पर जाती हूं, जब तुम लोग घूम कर थक जाओगे तब फ्लैट पर आ जाना।।

   राजा और बांसुरी माला की बात सुनकर मुस्कुराने लगे राजा ने माला को मुस्कुरा कर हामी भर दी।।
    उन दोनों को वहीं छोड़ माला सारा सामान समेटे कैब लेकर फ्लैट के लिए निकल गई राजा और बांसुरी एक बार फिर पिछली रात की तरह हाथों में हाथ डाले सड़क के किनारे किनारे चलते रहे  …..     उनके पास दुनिया जहान की बातें थी जो इतनी जल्दी खत्म नहीं होने वाली थी ,,अभी वह दोनों चल ही रहे थे कि बाजू से दो बाइक पर तीन लड़के गुजरे उन्होंने आगे जाकर बाइक घुमाकर राजा और बांसुरी के सामने लाकर रोक दी।

   उनमें से एक लड़के ने कड़क के उनसे कहा जो जो सामान तुम्हारे पास है जल्दी से निकालो,, तब तक में बाकी दोनों लड़के भी बाइक से उतर के उनके पास चले आए ।। एक तरह से राजा और बांसुरी को तीनों तरफ से उन तीनों मुस्टंडो  ने घेर लिया राजा ने चुपचाप अपने जेब में हाथ डाला वॉलेट निकाला और उन लड़कों के हाथ में रख दिया।
         उनमें से एक लड़के ने बांसुरी की तरफ देखा और उससे कहा
          “तुझे समझाने के लिए क्या अंग्रेजी में बोले जो जो है पर्स में निकाल गले की चेन कानों के टॉप्स अंगूठी सब कुछ हमारे हवाले कर दे।”
 
     ” भाई तमीज से भी तो बोल सकते हो हम तो वैसे ही सब कुछ तुम्हारे हवाले कर रहे हैं बांसुरी दे दो यह जो मांग रहे हैं ,”।।
      उसकी बात सुन राजा ने बांसुरी की तरफ देख कर कहा।
   बांसुरी ने राजा की तरफ देखा राजा ने आंखें झुका के उसे वैसा ही करने के लिए कहा बांसुरी  ने एक-एक कर अपने कान के टॉप्स अंगूठी यहां तक की अपनी घड़ी भी उतार कर राजा के हाथ में  रख दी।।

   राजा ने सारा का सारा सामान उनमें से एक लड़के के हवाले कर दिया सामान लेते समय उस लड़के ने  राजा का हाथ पकड़ लिया __
               “वाह बच्चू सबसे कीमती सामान छुपा ले गए यह घड़ी भी हमारे हवाले करो जो तुमने अपने हाथ में बांध रखी है।”

   राजा ने अपनी घड़ी की तरफ देखा और बालों को झटका देकर घड़ी निकालने लगा पर बांसुरी ने राजा का हाथ पकड़ कर रोक दिया __
          “नहीं राजा यह घड़ी तुम नहीं दोगे”

” अरे ओ मैडम बैंडिट क्वीन जब राजा जी खुद अपना खजाना लुटाने को तैयार हैं तो आपको मिर्ची काहे लग रही है जब इतना कुछ दे दिया तो एक घड़ी भी दे दो।”

   उनमें से एक बदमाश ने बांसुरी से कहा।

” राजा हम कह रहे हैं ना तुम किसी भी कीमत पर इस घड़ी को नहीं दोगे। और हां हम हैं बैंडिट क्वीन बोलो क्या करोगे दे तो दिया इतना कुछ,, काफी नहीं है क्या ??चुपचाप लो और रफा दफा हो जाओ वरना तुम जानते नहीं कि हम कौन हैं??

  बांसुरी की बात पर उनमें से एक बदमाश आगे बढ़कर आ गया और डरने के हावभाव  दिखाते हुए हाथ जोड़कर बांसुरी से कहने लगा__
      ” मैं तो डर गया मैडम!! बहुत डर गया अब क्या करूं भाग जाऊं? या तुम्हें भगा के ले जाऊं??

   जब तक वह अपनी बात पूरी करता एक जोर का झन्नाटेदार  तमाचा उसके गाल पर पड़ा ।। वो जब तक अपने गाल को सहलाता तब तक में दूसरे बदमाश के पेट पर एक जोर  का घूंसा पड़ा और तीसरे बदमाश के पैर में बांसुरी की हील वाली सैंडल।।
       
       अभी तीनों लड़खड़ा कर उठ पाते की बांसुरी ने उनके हाथ से जमीन पर गिरा अपना पर्स उठाया और उसमें से एक स्प्रे निकालकर तीनों की आंखों पर जोर से मार दिया तीनों अपनी-अपनी आंखों को मलते जैसे तैसे उठे और बाकी का  सारा का सारा सामान वहां पर पटक कर अपनी अपनी बाइक पर सवार होकर भाग निकले।।
       बांसुरी ने मुड़कर राजा को देखा राजा हाथ बांधे खड़े बांसुरी को मुस्कुराते हुए देख रहा था।।

बांसुरी– तुमने उन बदमाशों को मारा क्यों नहीं ऐसे तो खुद कानपुर  के ईतने बड़े गुंडे हो,, यहां पुणे में आकर सारी हेकड़ी निकल गई।।

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राजा– हम झगड़ा करना ही नहीं चाहते थे बन्सी इसीलिए।।
     हम खुश थे,तुम्हारे साथ…….. इसीलिए लगा वो तीनों भी खुश हो लें ।।अरे हमारा सामान ले जाकर हमें कौन सा गरीब कर जाएंगे पर उन गरीबों का ही थोड़ा भला हो जाता यह सोचकर हम चुप रहे।। पर तुम्हें अचानक क्या हो गया?? इस घड़ी के लिए इतना काहे इमोशनल हो गई??
     और इतना सारा फाइटिंग वाइटिंग कहां से सीख गई??

बांसुरी– काहे तुम भूल गए क्या ये घड़ी तुम्हें कब मिला था?? यह घड़ी तुम्हारे बाबूजी लेकर आए थे जिस साल तुम 12वीं पास किए थे,,, याद है, तुम जिम में कितने खुशी के साथ आए थे ये घड़ी हमें दिखाने।।
       हमें याद है जब तुम हमें ये घड़ी दिखा रहे थे तुम्हारी आंखों में आंसू आ गए थे हमको पता है राजा तुमको घड़ियों का कलेक्शन करने का शौक है और तुम्हारे पास नहीं नहीं में  26 घड़ियां तो होंगी ही,, लेकिन इस घड़ी की कीमत तुम्हारे लिए क्या है यह हम से ज्यादा कौन समझ सकता है??

राजा– क्या बात है!! हमारी बंसी को तो हम से जुड़ी सारी बातें याद है।

बांसुरी– भूला तो उन्हें जाता है जो कोई याद हो!! तुम तो हमारे अंदर ही बसे हुए हो राजा हमसे अलग थोड़े ही हो कि तुम्हें भूल जाएं हमें तो अपने आप को देख कर भी तुम्हारी ही याद आती थी।।।
     और यह फाइटिंग भी तुम्हारे ही चक्कर में सब सीखे।। जब से पुणे आए जिम जाना 1 दिन भी नहीं छोड़ा,  रोज नई कसरत करते थे….. कभी किक बॉक्सिंग कभी वजन उठाना,, और यही सब की प्रैक्टिस करते करते हमारा हाथ साफ हो गया।।। हालांकि आज तक किसी गुंडे मवाली के ऊपर अपना हाथ साफ किया नहीं,, लेकिन आज तुम्हारी इस घड़ी के लिए हमारे अंदर की पुरानी वाली लड़ाकू बांसुरी बाहर निकल आई।।

राजा बांसुरी की बात सुनकर जोर जोर से हंसने लगा उसे देख बांसुरी भी खिलखिलाने लगी दोनों हंसते खिलखिलाते वापस आगे बढ़ गये।।

   दोनों ने कुछ आगे पहुंच कर टैक्सी ली और बांसुरी के फ्लैट की ओर निकल गये,थोड़ा आगे ही बढ़े थे कि राजा का फ़ोन घनघना उठा__

राजा– हेलो कौन??

” राजा हम बोल रहे हैं युवराज!! कहाँ हो तुम?? बॉम्बे पहुंच गये होगे ना?? अभी एक घन्टे बाद की तो तुम्हारी फ्लाईट होगी ना?”

युवराज की आवाज़ सुन राजा ने एक बार फिर फोन की स्क्रीन देखी,पर वहाँ भैया का नम्बर तो नही दिखा रहा था__

” भैय्या ये किसके नम्बर से बोल रहे हैं आप?”

” वो सब हम बाद में बताएंगे,पहले तुम बताओ बॉम्बे एयरपोर्ट मे हो ना।”

” नही भैया !! हम वो पुणे ही रुक गये थे ,असल मे कुछ काम आ गया था,दो दिन बाद यहाँ से निकलेंगे, हम आप को फ़ोन करने ही जा रहे थे कि आपका फोन आ गया।।”

” अरे ऐसे कैसे! ऐसा कौन ज़रूरी काम आ गया? खैर वो सब छोड़ो तुम अभी के अभी बॉम्बे पहुँचो और वहाँ से दिल्ली की फ्लाईट पकड़ कर चले आओ।।हम भी दिल्ली पहुंच गये हैं ।।

” भैया का  बात हो गयी,कुछ तो बताइये ।”

” बस इतना समझ लो,कुछ बहुते जरुरी काम है, अभी किसी को कुच्छो बोलने बतियाने का ज़रूरत नही है,तुरंत जहां हो वहाँ से गाड़ी लो और बाम्बे भागो।”

” पर भैया….”

” राजा समझो बात को ,तुरंत निकलो !अभी और कुछ नही बता पायेंगे ,,बॉम्बे निकलते ही इसी नम्बर पे हमे फोन कर लेना।”

    बांसुरी को भी भैया की कुछ कुछ आवाज़ आ तो रही थी लेकिन कुछ समझ नही आ रहा था,उसने राजा की तरफ देखा__” क्या हो गया।”

” पता नही बंसी !! पर भैया बोले हैं तो हमे अभी के अभी निकलना पड़ेगा,कुछ समझ नही आ रहा कि हुआ क्या है।।”

” सबकी तबीयत तो ठीक है ना??”

” पता नही बंसी पर भैया ने किसी से भी बात करने मना किया है अभी ,तो हम घर पे भी नही पूछ सकते,और तुम तो जानती हो बड़के भैय्या का आदेश हमारे लिये सबसे बड़ा है,तुमको तुम्हारे फ्लैट में उतार कर हमको बॉम्बे निकलना पड़ेगा बंसी ।”

” हमारा दिल बहुत घबरा रहा है राजा !! आज मत जाओ!!”

” अब नही रुक सकते बंसी ,,भैया का कहा किसी हाल मे नही टाल सकते।”

” पर राजा सुबह गणपति मन्दिर मे भी दर्शन नही हुआ ,फिर सोचे थे की परसो मुम्बई में सिद्धिविनायक के दर्शन कर लेंगे उसके बाद फ्लाईट पकड़ेंगे पर तुम अभी निकलोगे तो वो भी नही हो पायेगा।।”

” अरे यार !! तुम भी कहाँ की बात कहाँ जोड़ने लगती हो ।।सुनो निश्चिंत रहो,सिर्फ दर्शन ना कर पाने से भगवान हमसे गुस्सा होके अपने पास नही बुला लेंगे।”

” फिर बकवास शुरु कर दिये,,तुमको मना किये हैं ना राजा ऐसी मरने वरने की बात ना किया करो,,अच्छा सुनो मुम्बई पहुंचते तक पूरे रास्ते हमसे बात करते हुए जाना और जब फ्लाईट पकड़ लोगे तब भी बताना जब दिल्ली मे उतर जाओगे तब भी बताना, समझ गये।”

” हाँ समझ गये बंसी !! इत्ता परेशान ना हो !! तुम तो यार अभी से बिवियों जैसे जासूसी करने लगी।।”

” हाँ तो!! बस फेरे होने से ही बीवी बनूँगी क्या ,मन से तो पति मान ही लिया तुम्हें ।”

          तेरे संग संग राह सारी कट जानी ए
      मै ता तेरे नाल रहना, मान इन्ना मेरा कहना
     मेरी अखियो से होना कदी दूर ना
           तेरे बिन …….तेरे बिन …….
      तेरे बिन नई लगदा दिल मेरा ढोलना
       तेरे बिन नई लगदा दिल मेरा ढोलना
          सब छड जाये तू ना मेनू छोडना
      तेरे बिन नई लगदा दिल मेरा ढोलना….

   टैक्सी में बजते गाने के साथ ही बांसुरी की आंखों से आंसू भी बहते रहे,,उसके फ्लैट के नीचे उसे उतारने के बाद राजा ने उसे एक बार फिर अपनी  बाहों मे भर लिया,,,कुछ देर ऐसे ही रहने के बाद राजा ने बांसुरी को खुद से अलग किया और वापस टैक्सी में बैठने मुड ही रहा था कि बंसी ने उसका हाथ पकड़ उसे रोक लिया__” मत जाओ राजा!! अब तुमसे अलग होकर जी नही पायेंगे।”

   राजा ने अपने आंसू छिपाते हुए बाँसुरी का चेहरा अपने हाथों मे भर लिया__” हम जल्दी वापस आ जायेंगे बंसी ,हमारा रस्ता देखना।।”
     राजा ने एक बार बंसी के माथे को चूमा और वापस टैक्सी में बैठ गया।।

     बांसुरी तब तक वहाँ खड़ी रही,जब तक टैक्सी उसकी आंखों से ओझल नही हो गयी।।

क्रमशः

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aparna..


      

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

6 विचार “शादी.कॉम- 28” पर

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