शादी.कॉम- 30

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   शादी डॉट कॉम-30

    मैं तो ना चला था दो कदम भी तुम बिन
    फिर भी मेरा बचपन यही समझा हर दिन
    छोड़कर मुझे भला अब कहां जाओगे तुम
    ये ना सोचा था कभी इतने याद आयोगे तुम
    रूठ के हमसे कभी जब चले जाओगे तुम…

राजा– दोस्त ज़रा गाने को बन्द कर दो यार!! मन नही कर रहा,अभी कुछ सुनने का।।

  हाऊ शाहेब बोल कर ड्राईवर ने टैक्सी में चलते गाने को बन्द कर दिया।।

“काय पुणे चा नही हे का तुमि” ड्राईवर बातुनी था उसके इस सवाल का जवाब देना मतलब उसके अगले सवाल के लिये तैयार होना था।।
  राजा ने धीरे से ना बस बोल दिया ,पर तभी ड्राईवर ने कुछ और राग छेड़ दिया।।
  किसी सूरत में बचने की राह ना देख राजा ने आखिर उसे गाना चलाने के लिए बोल ही दिया।।
 
    “बजा ले भाई गाना ही बजा ले।।”

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  एफएम रेडियो को ट्यून कर गाने में मगन ड्राइवर गाड़ी चलाता रहा, मुंबई पुणे हाईवे पर टैक्सी भागती रही ,,दो रातों से जगे राजा को धीरे-धीरे ठंडी हवा ने थपकी देकर सुला दिया।।।
      नींद में सोए राजा ने प्रिंस को लेकर कोई भयानक सपना देखा,,, कहते हैं ना दिमाग में जो चल रहा होता है अक्सर कच्ची नींद में वही सपने के रूप में नजर आता है…. पुणे में टैक्सी में बैठने के साथ ही राजा प्रिंस के बारे में ही सोच रहा था इसीलिए उसे ही सपने में देखा और घबरा कर उसकी नींद खुल गई तभी गाड़ी एक झटके के साथ ब्रेक के लगते ही मुंबई एयरपोर्ट के सामने रुक गई।।

    टैक्सी में बैठने के बाद और युवराज भैया से बात होते ही राजा ने अपने टिकट बुक कर ली थी किस्मत की बात थी कि मुंबई एयरपोर्ट में उतरते ही आधे घंटे में उसकी चेक-इन, थी टैक्सी वाले को पेमेंट देकर राजा अपना सामान लेकर तुरंत अंदर की ओर भागा।
       सिक्योरिटी चेक के बाद राजा को अपना फोन चार्ज करना याद आया लेकिन आसपास उस वक्त उसे कोई चार्जिंग पॉइंट नहीं मिला उसकी फ्लाइट का अनाउंसमेंट हुआ और राजा अपनी फ्लाइट में सवार दिल्ली के लिए उड़ गया।।

  एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही राजा को प्रेम मिल गया प्रेम उसे लिए तुरंत अस्पताल की ओर निकल गया।।

   इतनी देर से खुद को संभाले हुए राजा ने जैसे  ही युवराज भैया से मिलने के बाद आईसीयू में बेहोश पड़े प्रिंस को देखा उसकी आंखों से आंसू बहने लग गए,,, उसके लिए खुद को संभालना मुश्किल हो रहा था प्रिंस को देखकर उसे प्रिंस का हंसता मुस्कुराता चेहरा सताने लगा।।
  
      राजा वहां काफी देर तक प्रिंस का हाथ अपने हाथों में थामे बैठा रहा,, उसे पता भी नहीं चला कि कब मिनट घंटों में बदल गये लगभग तीन-चार घंटे बीतने के बाद युवराज भैया आए और उसे उठाकर बाहर ले गए, वैसे इस तरह प्रिंस के साथ किसी को बैठने की चिकित्सकीय अनुमति नहीं थी परंतु क्योंकि प्रिंस का प्राइवेट आईसीयू वार्ड था और दूसरा राजा की हालत देखते हुए चिकित्सकों ने उसे बिना कुछ कहे चुपचाप बैठने के लिए अनुमति दे दी थी।।

   जब राजा प्रिंस के पास बैठा था तभी प्रिंस के फोन पर किसी का कॉल आया,,प्रिंस का फोन  प्रेम के पास ही था,अनजाने नंबर से फोन आने पर प्रेम फोन लिए बाहर चला गया लगभग 10 मिनट बाहर बात करने के बाद प्रेम वापस आकर चुपचाप खड़ा हो गया।
  उस वक्त ना उसे किसी ने पूछा कि किसका फोन था और ना ही उसने किसी को बताया।।

   डॉक्टर से पता चला कि कुछ मात्रा में आंतरिक रक्तस्त्राव फिर से शुरू हो गया था तथा दिमाग को जाने वाली रक्त वाही नलिका में रक्त की आपूर्ति नहीं होने के कारण दिमाग का एक हिस्सा काम नही कर पा रहा था,, डॉक्टर अपनी तरफ से प्रयासरत थे लेकिन प्रिंस कब तक होश में आएगा?? और उसका दिमाग वापस कब तक दुरुस्त हो पाएगा, यह कहना डॉक्टरों के लिए अभी फिलहाल असंभव था।।

युवराज ने धीरे से राजा को उठाया और अपने साथ लिए आईसीयू से बाहर आ गया।। सब आईसीयू के बाहर थे, तभी युवराज के फोन पर किसी नंबर से फोन आया युवराज ने नंबर देखा और उसकी आंखों मे एक क्षण को चमक आ गयी,वो फ़ोन उठाये वहां से बाहर निकल गया कुछ देर बाद वापस आ कर उसने राजा और प्रेम से सारी बातें बताई__
    ” राजा तुम्हें अपनी भाभी की मौसी याद है जिन्होंने बचपन में रेखा को गोद लिया था हीरे जवाहरात वाली मौसी, हमारी शादी में भी आई रही।”

” हां भैया याद है हमें, अभी पिंकी की शादी में भी तो आई थी”

” हां हां वही उनके सगे  देवर पास के शहर के नेता जी हैं,, हमें पता तो पहले से था लेकिन कभी ध्यान नहीं दिया ।।अभी जब तुम्हारा यह केस हुआ तब हमें अचानक उनका ध्यान आया हमने सबसे पहले उन्हीं  को फोन लगाया पर उनके सेक्रेटरी ने बताया कि नेता जी सपरिवार विदेश घूमने गए हुए हैं … तब हमने अपने और बाकी के जान पहचान वालों से तुम्हारे केस की फाइल को दबवा दिया, हमने नेताजी के सेक्रेटरी को यह नहीं बताया था कि हम नेताजी के रिश्ते में क्या लगते हैं।। अभी नेताजी जब वापस आए तब उन्हें  उनके सेक्रेटरी ने हमारे फोन के बारे में बताया।।
   बड़प्पन देखो उनका हमारा नाम सुनते ही पहचान गए और तुरंत हमें फोन लगा लिया,, अभी हमारे फोन उठाते ही कहने लगे राधेश्याम जी के लड़के बोल रहे हो ना!! हमने  जैसे ही कहा हां तो कहते हैं,, अरे दामाद बाबू सेक्रेटरी से बोले काहे नहीं कि आप फोन किए हैं हमको विदेश में ही नंबर मिला देते हुआं ही आप से बात हो जाती कुछ हमारे लायक सेवा हो तो बताइए,, हम तुम्हारे नाम से थोड़ा बहुत बता ही रहे थे की तुम्हे भी चीन्ह डाले ,कहते हैं तुम्हरा वही भाई ऑफीसर बन गया क्या जो हीरो टाईप दिखता है,,हम बोले हाँ एक ही तो भाई है हमारा!! कहते हैं दामाद बाबू तुरंते चले आओ, आमने सामने बैठ के सब बात कर लेंगे,आपके भाई को हम कुछ ना होने देंगे।।

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     युवराज के चेहरे की प्रसन्नता देख प्रेम और राजा के मन से भी एक बोझ उतर गया वैसे प्रिंस की हालत को देखते हुए राजा का ध्यान अपने केस की तरफ गया ही नहीं था,,, पर युवराज तो 2 दिन से इसी उधेड़बुन में व्यस्त था आज राजा को वहां देखते ही उसे थोड़ी तसल्ली हुई उसने राजा और प्रेम को हॉस्पिटल में सब संभाल लेने को कह कर अपने पास पड़े कुछ रुपये और चेक बुक राजा के हाथ में रख दी, और अपनी वापसी की टिकट देखने लगा।।
     ” राजा तुम्हारा फोन देना हमारे फोन पर नेट नहीं चल रहा है।”

   युवराज के ऐसा कहते ही राजा को अपने फोन का होश आया उसने जेब में से फोन निकाला जो कब से बंद पड़ा था तुरंत प्रेम से चार्जर लेकर वही हॉस्पिटल में चार्जिंग पिन में लगा दिया।। युवराज वापस अपने टिकट के लिए कोशिश करने लगा 2 मिनट बाद फोन के थोड़ा चार्ज होते ही राजा ने फोन को जैसे ही ऑन किया एक साथ कई  बीप बजने लगी
   “इतना किसका मैसेज आ रहा है राजा ??”

   “मैसेज नहीं भैया यह तो मिस कॉल अलर्ट आ रहा है” प्रेम के ऐसा बोलते ही राजा को एकदम से बांसुरी का होश आया,उसने तुरंत फ़ोन उठाया उसमें बांसुरी की 70 मिस्ड कॉल थी।।

    एक ही रात में कितना कुछ बदल गया था कल की रात जहां वह और बांसुरी साथ-साथ अपने भविष्य को लेकर सपने बुन रहे थे वही आज सुबह से दोपहर हो गई थी और उसकी बांसुरी से बात तक नहीं हो पाई थी उसने समय देखा दोपहर के 3 बज गए थे तभी युवराज भैया ने उसे और प्रेम को कैंटीन में खाना खाने के लिए भेज दिया वो और प्रेम उठकर जा ही रहे थे कि उसके फोन पर रिंग बजने लगी….. एक बार फिर बांसुरी का फोन था,,, उसने जैसे ही फोन उठाया__

” राजा कहां हो?? कल रात से फोन लगा लगा कर परेशान हो गए,, तुम्हारा कोई अता पता ही नहीं है!! दिल्ली पहुंच गए कि नहीं, हमें बताने तक की जरूरत नहीं समझी,,, हम यहां रो-रोकर हलकान हुए जा रहे हैं तुम हो कहां अभी??”

” अरे बाबा सब बताते हैं ,रुको तो सही!! कल फोन डिस्चार्ज हो गया था, और जब हम होटल से सामान लेकर निकले तो जल्दी में फोन का चार्जर और बैटरी बैंक रूम पर ही भूल गये,, बस उसके बाद अभी तो फोन चार्ज हुआ है और बस तुम्हारा फोन आ गया।।”

” कैसे अचानक दिल्ली जाना पड़ा?? क्यों किया था भैया ने फोन?? अभी तुम हो कहां पर??”

” अरे मेरी मां इतने सारे सवाल ??सब बताते हैं एक-एक करके,,, हम अभी दिल्ली एम्स में है।

” एम्स में कहां हो?”

” पूछ तो ऐसे रही हो जैसे पलक झपक के हमारे सामने खड़ी हो जाओगी कैंटीन में है।”

” फिर झपको अपनी पलकें।।”

” क्या बोल रही हो यार बांसुरी मूड थोड़ा ऑफ है हमारा।”

” तो ठीक है पीछे पलटो  फिर तुम्हारा मूड ठीक कर देते हैं।।”

    राजा ने जैसे ही पलट के देखा सामने कंधे पर बैग पैक टांगे बांसुरी मुस्कुराती खड़ी थी।

” अरे तुम यहां कैसे प्रकट हो गई?? कोई जादू चमत्कार जानती हो क्या??

” तुम्हारा नंबर बंद आ रहा था तुम्हें बार-बार फोन लगाने पर भी जब तुम्हारा फोन नहीं लगा तब हमने युवराज भैया के नंबर पर फोन लगाया पर उनका भी फोन बंद आ रहा था ।।तब हमारा एकमात्र सहारा हमारा सबसे प्यारा दोस्त प्रिंस!! हमने उसके नंबर पर फोन लगाया।।
     आज सुबह प्रिंस का फोन लग गया फोन उठाया प्रेम ने ।। हमारे पूछने की देर थी कि प्रेम ने हमको प्रिंस की सारी परिस्थिति बता दी हम समझ गए कि युवराज भैया ने इसीलिए तुम्हें अचानक बुलाया है तुम्हारा फोन नहीं लग रहा था इसिलिए हम भी सुबह-सुबह मुंबई पहुंच गये थे,रास्ते से ही पन्द्रह दिन की छुट्टी का मेल सिद्दार्थ सर को भेज दिया।। हमें तो दिल्ली निकलना ही था प्रेम से बात होते ही हमने अपनी टिकट बुक की और हम यहां पहुंच गए।।

  बांसुरी मुस्कुराने लगी उसे मुस्कुराते देखकर राजा के चेहरे पर भी मुस्कुराहट वापस लौट आई “तुम चिंता मत करो राजा तुम्हारे प्रिंस को कुछ नहीं होगा हम सब मिलकर उसे बचा लेंगे।”

” बंसी तुम आ तो गई हो पर तुम यहां रुकोगी कहां?”

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राजा के इस सवाल का जवाब दिया प्रेम ने “भैया जी आपका फ्लैट तो है ही,, हम और युवराज भैया भी वही तो रुके हैं ।।वही आप और बंसी भी रुक जाइएगा ।”
   
   ” तुम कह तो ठीक रहे हो प्रेम, लेकिन बंसी का ऐसे अकेले हम तीनों के साथ रहना हमें कुछ सही नहीं लगता।। बंसी अब तुम मिल चुकी हो हमसे,, शाम की फ्लाइट से  वापस लौट जाओ।”

“हम तुम्हें यहां ऐसे अकेले छोड़कर अब नहीं जाएंगे”

” अरे पर भैया क्या सोचेंगे तुम समझती क्यों नहीं?”

   ” कौन क्या सोचेगा राजा किसकी बात कर रहे हो भाई?? अरे बंसी तुम?? तुम कब चली आई?? कहां रहती हो आजकल और क्या चल रहा है ??तुम तो बड़ी दुबला गई हो भाई??

  युवराज को अचानक कैंटीन में देखकर तीनों के तीनों चौक गए।।

” नमस्ते भैया!! हम पुणे में रहते हैं, वही बैंक में नौकरी कर रहे हैं।। राजा अभी पुणे आए थे तब उनसे मिलना हुआ था फिर यह अचानक आपके फोन से यहां चले आए ,,तो हमें थोड़ी घबराहट हुई प्रिंस के फोन पर कॉल  किया तो प्रेम से सारी बात पता चली प्रिंस की ऐसी हालत सुनकर हम से रहा नहीं गया और हम भी उसे देखने चले आए,, क्या हम कुछ दिन आप लोगों के साथ यहां रह सकते हैं।”

“हां-हां क्यों नहीं बन्सी!! बचपन से तुम्हें देखा है हमारे लिए तो छोटी बहन जैसी हो,, हमारी बहन मतलब  इन लोगों की भी बहन!!बिल्कुल आराम से रह सकती हो लेकिन अपनी अम्मा को बता देना कि तुम दिल्ली आई हुई हो।”

   युवराज की बहन वाली बात सुनते ही राजा के गले में चाय अटक गई और उसे हल्की खांसी आ गई, और वह उठकर वहां से बाहर चला गया।।

   राजा ने चुपके से बांसुरी को समझा दिया कि घर पे सिर्फ युवराज भैय्या ही थे जिन्हे उन दोनों के बारे में कुछ भी नही पता था।।

  कैंटीन से निकलकर सब एक बार फिर प्रिंस के पास चले आए प्रिंस की हालत में कोई सुधार नहीं था वह अब भी बेहोश था उसे देखते ही एक बार फिर राजा का चेहरा मुरझा गया राजा वही आईसीयू के बाहर लगी कुर्सी पर बैठ गया उसके पास ही बांसुरी भी बैठ गयी,युवराज अपना फ़ोन लिये बाहर निकल गया।।

युवराज की रात की टिकट हो गई थी, आईसीयू में मरीज के साथ किसी को भी  रुकने की अनुमति नहीं थी,प्रिंस को वैसे भी सारी दवा आई वी चढाई जा रही थी,इसलिये वो सभी लोग एक बार प्रिंस को देख कर घर के लिये निकल गये।।।

  राजा का प्रिंस को इस तरह अकेले छोड़कर घर जाने का बिल्कुल मन नहीं कर रहा था लेकिन बांसुरी के कारण अस्पताल में दोनों का रुकना भी सही नही था।। इसिलिए वह सभी लोग वहाँ से निकल गये और युवराज भैया को एयरपोर्ट में उतारते हुए फ्लैट के लिए निकल गए।।

   राजा और युवराज का अक्सर दिल्ली में काम पड़ता  रहता था जिसके लिए दोनों ही अक्सर दिल्ली आया करते थे,,इसीलिए युवराज ने कभी बहुत पहले एक फ्लैट लेकर यहां पर डाल दिया था अभी उसी फ्लैट में इन लोगों ने अपने रुकने की व्यवस्था कर रखी थी रसोई में एक-दो ब्रैड के पैकेट और मैगी के पैकेट पड़े थे काम चलाऊ दो चार बर्तन थे और चाय और कॉफी बनाने की सामग्री पड़ी हुई थी।।

     उन लोगों के वहां पहुंचते ही प्रेम ने घर की थोड़ी बहुत सफाई की और राजा नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया नहाकर निकलते ही राजा प्रेम को लिए कुछ जरूरी सामान लेने घर से निकल गया।।। जाते-जाते दरवाजे को अंदर से लॉक करने के लिए बांसुरी को कह गया,उन लोगों के वापस लौट कर आने तक में बांसुरी ने एक बार फिर से पूरे घर की साफ-सफाई करी और नहा कर चाय चढ़ा दी।।

    राजा बाहर से ही आलू के पराठे पैक करवा कर ले आया था,तीनों ने चाय और पराठे खाये,पर खाते हुए एक बार फिर राजा को प्रिंस की याद ने भावुक कर दिया।।
      खाने के बाद तीनों साथ ही हॉल मे बैठे प्रिंस को और अपने पुराने समय को याद करते रहे,,प्रेम ने भी उन बातों को याद करते समय बांसुरी से अपनी गलती की माफ़ी मांग ली।।
    राजा जब रसोई में पानी की बोतल भरने गया हुआ था,तभी प्रेम ने बांसुरी को यह सच्चाई भी बता दी कि वो राजा का पत्र लेकर बांसुरी के पास गया ही नही था,और वापस आ कर राजा से सब कुछ झूठ बोल गया था।
    प्रिंस की हालत देख कर सभी भावुक हो गये थे, सभी को अचानक ही आभास हो गया था की ज़िदगी कितनी क्षणभंगुर है,इसी सब में प्रेम को भी अपने किये का पश्चाताप हो रहा था,,वो पहली बार बांसुरी को राजा के साथ देख कर प्रसन्न था।। उसे अपनी गलती का एहसास था और इसिलिए उसने सच्चे दिल से बांसुरी से माफी मांग ली थी।।

    रात गहराती चली गयी पर बातों में भिड़े तीनो दोस्तों की आंखों से नींद गायब थी।।आधी रात बीत जाने पर राजा ने बांसुरी को अन्दर के कमरे में सोने भेज दिया और खुद प्रेम के साथ बाहर हॉल मे ही लेट गया।।

दूसरे दिन सुबह सुबह ही तीनो वापस अस्पताल पहुंच गये,,पूरा दिन तीनों का वहीं बीत गया,शाम होते होते राजा को वापस बांसुरी की चिंता सताने लगी,उसे बांसुरी का इस तरह उनके फ्लैट पर रुकना पसंद नही आ रहा था,आखिर उसने एक उपाय निकाल ही लिया।।उसने बन्टी से बात की,बन्टी की एक पुरानी दोस्त दिल्ली में रहती थी ,राजा ने बन्टी से कह कर बांसुरी के रहने का इन्तेजाम उसकी दोस्त के घर पर करा दिया।।
    शाम मे राजा बांसुरी को छोड़ने निकल गया,अभी दोनो आधे रास्ते भी नही पहुँचे थे कि प्रेम का फोन आ गया” भैय्या जी तुरंत वापस आ जाइये प्रिंस को होश आ गया है।।”

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   खुशी से राजा ने टैक्सी को वापस घुमवा लिया।।
राजा और बांसुरी भागे भागे प्रिंस के कमरे में पहुँचे,, उन दोनों को साथ देख प्रिंस इतनी पीड़ा में भी हल्के से मुस्कुरा दिया,,राजा ने दौड़ कर प्रिंस का हाथ पकड़ लिया__” पगला गये थे क्या?? क्या ज़रूरत थी इत्ता बड़ा कदम उठाने की….आइंदा ऐसा किया ना जान ले लेंगे साले तुम्हारी।।”
    राजा प्रिंस के गले से लग के रो पड़ा,बांसुरी राजा के पीछे खड़ी उसके कंधे पर हाथ रखे उसे ढाँढस बंधाती रही,,कुछ समय बाद डॉक्टर ने उन लोगों को बाहर इन्तजार करने कह कर बाहर भेज दिया।।

” राजा ,सुनो!!”

” हाँ कहो ना बंसी !!”

” हमें अपने से दूर मत भेजो ना,हम बन्टी भैया की उन दोस्त को जानते तक नही,,हम तुम्हे बिल्कुल परेशान नही करेंगे,,सच्ची!!

” अरे यार !! तुम समझती नही हो ना,,यही तो मुसीबत है।।कल जब हमारे  या तुम्हारे घर पे पता चलेगा तब ?? सब क्या सोचेंगे तुम्हारे बारे मे।

” वो सब हम नही जानते,हमे बस इतना पता है कि हम इस मुसीबत के समय तुम्हें अकेले नही छोड़ सकते,,प्लीज़ राजा,,मान जाओ ना।।”

    तभी नर्स ने इशारे से उन लोगों को बुलाकर घर से प्रिंस के लिये दाल का पानी और पतले फुल्के लाने को कहा,वैसे तो सभी मरीजों के लिये अस्पताल से ही खाना आता था,पर आई सी यू के मरीज़ों के लिये अलग से खाने की विशेष व्यवस्था नही हो पाने के कारण ही प्रिंस के लिये घर से खाना लाने कहा गया था।।

‘ देखा भगवान भी यही चाहतें हैं हम तुम्हारे साथ रहें,चलो अब हमारे साथ घर चलो ,हम जल्दी से खाना बना लेंगे।”

  राजा प्रेम को वहाँ छोड़ कर बांसुरी के साथ फ्लैट पर वापस आ गया।।
   हाथ पैर धोकर बांसुरी रसोई में  आ गयी,,एक दिन पहले ही राजा ने कुछ तीन चार तरह की दालें,कुछ मसाले ,थोड़े चावल ,आटा, आलू सब्जियां और तेल वगैरह खरीद लिया था।।
    वो जब रसोई मे आया तो सारा सामान फैलाये बांसुरी कभी किसी तो कभी किसी दाल को उठा कर देख रही थी।।

” क्या हुआ? अब तक तुम्हारी दाल चढ़ी नही??”

” हम बस देख रहे थे राजा की कौन सी दाल बनानी है।”

” ऐसा करो बन्सी मूँग की दाल बना लो।”

  राजा को कुछ कुछ समझ तो आ गया था पर जान बूझ कर अंजान बनते हुए उसने बांसुरी को भर नज़र देखा और बाहर जाते जाते उसे चाय भी बनाने कहता गया।
” क्या हुआ बन्सी जी!! आपके कुकर की तो सिटी ही नही बज रही ??”

बांसुरी ने राजा की बात सुनी और बाहर चली आयी

” क्यों तुम्हारे घर मे चाय कुकर में पकाते हैं??”

  अपने रेशमी बालों को बेतरतीबी से क्लच किये सामने के बालों को हाथो से हटाती हैरान परेशान बांसुरी को देख राजा की हँसी छूट गयी।।

” मैडम जी चाय तो पतिली में ही बनाते हैं,पर हाँ हमारे यहाँ दाल कूकर में बनाई जाती है, अब तक तो चढ़ा दी होगी ना।”

बांसुरी को समझ ही नही आ रहा था कि वो अपनी बात कैसे कहे,बडे संकोच से उसने राजा से कहा__ राजा बस एक छोटी सी मदद कर दो,हमें ना दाल बनानी नही आती,बस वो बनाना बता दो प्लीज़।”

” अभी तो बड़ी बड़ी डीँगे हांक रही थी हॉस्पिटल में,,,और हाँ एक मिनट,पुणे में तो तुम्हे देख बिल्कुल ऐसा लग रहा था जैसे कोई बहुत सुव्यवस्थित गृहिणी हो,वहाँ तो रसोई में बहुत कुछ कर रही थी।”

” हम कहाँ कुछ कर रहे थे राजा,इन दो दिनों में याद कर के बताओ,हमने अपने हाथ से चाय के अलावा और क्या खिलाया पिलाया।”

” हां यार!! चाय बस तो पिलाई तुमने ,,तो तुम तीन साल से पुणे मे क्या खा के जिंदा थी मेरी माँ??”

” पुलाव” बांसुरी खिलखिला उठी।।

” बस ” राजा की आंखे फटी रह गयी,तभी ऐसी कमज़ोर हो गयी

” नही , कभी कभी मैगी और ब्रेड भी खा लेते थे,और हाँ पोहा भी। असल मे तुम्हारे साथ साथ हमारा खाना पीना भी छूट गया राजा,,बस तुम्हे याद करते और चाय बना बना के पीते रहते।

” वाह इससे अच्छा तो हमे याद कर कर के कचौड़ियाँ बनाना सीख लेतीं कम से कम हमें बना के तो खिला पाती।।”

” वो अब तुम सीखा देना।।”

” हम्म चलो हटो,अब तुम ऐसा करो चाय चढाओ तब तक हम दाल पका लेते हैं,,वैसे दाल बनाना कोई रॉकेट साईंस भी नही है यार।

” हमें पता है राजा पर हमारे साथ एक छोटी सी समस्या है,,जैसे लोगो के साथ होता है ना किसी एक रंग को नही देख पाते,या सीधी और आड़ी रेखाओं को एक साथ नही समझ पाते,बस वैसा ही कुछ हमारे साथ है।।”

” मतलब क्या बन्सी??

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” मतलब हम मूँग की दाल और उरद की दाल मे अन्तर नही कर पाते।”

  राजा का हँस हँस के बुरा हाल था,उसने पूछा तुअर दाल तो पहचानती हो, हाँ मे सर हिलाते हुए बांसुरी अन्दर गयी और अपने हाथ मे कुछ पकड़े बाहर ले आयी,राजा के सामने आकर उसने अपनी मुट्ठी खोल दी __” ये देखो !! ये रही तुअर दाल।”

राजा पेट पकड़ के हँसते हँसते बांसुरी के सामने हाथ जोड़ कर खड़ा हो गया__ ” ये चने की दाल है मैडम।।”
   उसे हँसते देख बांसुरी भी हंसने लगी,तभी कूकर ने सीटी दे दी।।

   चाय छान कर बांसुरी दो कप में ढाल कर ले आई ।।
” चाय पीकर रोटियाँ बना ली जायेँ ।”

” जो हुक्म मेरे आका ।” बाँसुरी के ऐसा कहते ही एक बार फिर राजा हंसने लगा।।

क्रमशः

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aparna..
 

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

3 विचार “शादी.कॉम- 30” पर

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