समिधा -53

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समिधा – 53

हंसते खिलखिलाते बातों में कब समय बीतता गया उन लोगों को पता ही नहीं चला। रात नर्स ने आकर उन लोगों को याद दिलाया कि रात के समय एक बहुत जरूरी गोली वरुण को देनी है... और याद दिला कर वह चली गई । जाते जाते उसने अपने मोबाइल पर टाइम अलार्म सेट कर लिया।

उस कमरे में मरीज के बेड के अलावा एक बेड अटेंडर के लिए था और इसके साथ ही एक सिंगल सोफा लगा हुआ था….

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“मैंने गलती कर दी पारो!! मुझे तुम्हें रोकना नहीं चाहिए था अब तुम यहां सोओगी कहां?”

प्रशांत की चिंता में उसके अंदर छिपा बड़ा भाई नजर आ रहा था , जो पारो के लिए चिंतित हो रहा था। उसके मन में यह संशय भी घूम रहा था कि उन दोनों के साथ अकेले पारो को संकोच होगा।
लेकिन पारो तो जैसे अपने मन की हर चिंता हर संशय और हर ग्लानि को भूल चुकी थी। अभी उसके मन में सिर्फ एक ही बात घूम रही थी, कि जैसे भी हो वरुण स्वस्थ हो जाएं। वरुण के सामने उसे बाकी सारी बातें बेमानी लग रही थी। उसके मन में एक बार भी यह नहीं आया कि आश्रम की महिलाएं उसके इस तरह अस्पताल में रुक जाने को लेकर बातें भी बना सकती हैं। पद्मजा दीदी के चेहरे का गुस्सा उसने खुद देखा था बावजूद वह वरुण के स्वास्थ्य के अलावा कुछ भी सोच पाने में अभी खुद को असमर्थ पा रही थी।
वरुण थक कर सो गया था लेकिन पारो की आंखों में नींद कहाँ? प्रशांत भी कुछ देर जागने के बाद अपने बेड पर सो गया। लेकिन पारो उस कुर्सी में बैठी जागती रही । रात में जिस वक्त पर नर्स ने दवा देने को कहा था, ठीक उसी वक्त पर वह उठकर वरुण को दवा दे रही थी कि नर्स कमरा खोल कर अंदर आने लगी। जैसे ही उसने पारो को दवा देते हुए देखा वह मुस्कुरा कर वापस मुड़कर बाहर चली गई।
उसी समय आहट से प्रशांत की नींद खुली और उसे भी समझ में आ गया की नर्स के अलार्म से पहले ही पारो ने वरुण को दवा खिला दी।
मुस्कुरा कर उसने भी करवट बदली और अपनी आंखों पर हाथ रख कर सो गया।

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अगली सुबह से ही पारो चाक-चौबंद सारे काम जल्दी जल्दी निपटाती बार-बार दरवाजे को ताक रही थी । वरुण और प्रशांत दोनों की समझ से परे था कि पारो की नजरें दरवाजे पर किसके लिए टिकी हैं? और वह किसका इतनी शिद्दत से इंतजार कर रही है।
हॉस्पिटल के उस कमरे में एक तरफ छोटे-मोटे किचन जैसी व्यवस्था भी थी… जहां पर एक इंडक्शन कुकटॉप के साथ ही जरूरत भर के बर्तन कॉफी परकॉलेटर टी बैग आदि मौजूद थे।
जाने कहां से क्या-क्या व्यवस्था करके पारो ने इंडक्शन कुकटॉप पर ही सब्जियां डालकर दलिया बना लिया और वरुण और प्रशांत के सामने परोस भी दिया। वरुण को खाली पेट खिलाने वाली दवा के बाद ही उसने नाश्ता दिया था , उसी समय नर्स वरुण की दवाई लेकर उस कमरे में दाखिल हुई। उसने वरुण को नाश्ता करते देखा की उसका दिमाग ठनका वो तुरंत ही आगे बढ़कर उसे टोकने को थी कि उसके पहले ही पारो ने दवा का पत्ता दिखाते हुए कह दिया …..

” यह खाली पेट खाने वाली गोली मैंने इन्हें दे दी है। अस्पताल में आप लोग नाश्ते में जो सैंडविच देते हैं वह कच्ची ब्रेड इनसे खाई नहीं जाती। इसलिए मैंने यहां पर जो इंडक्शन कुकटॉप था उस पर इनके लिए दलिया बना लिया। बिल्कुल ही बिना तेल और कम नमक में बना दलिया है, जो मरीजों को दिया जा सकता है। “,

“लेकिन आपने बिना हम लोगों से पूछे ऐसे कैसे नाश्ता दे दिया? इन्हें हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों का खाना नाश्ता सब अस्पताल की तरफ से ही दिया जाता है! उनकी कैलरीस काउंट करके ही हमारे यहां के डायटिशियन इन का खाना तैयार करती है , और आपने उन्हें दलिया दे दिया। अगर डॉक्टर साहब कुछ कहेंगे तो इसकी जिम्मेदारी आपकी होगी?”

” जी सिस्टर!! मैं सारी जिम्मेदारी लेने को तैयार हूं। लेकिन डॉक्टर साहब आए तब तो। मैं कल से आकर यहां रुकी हूं लेकिन मैंने अब तक डॉक्टर को देखा ही नहीं।”

” डॉक्टर साहब व्यस्त रहते हैं। उन्हें ओपीडी देखनी होती है और इंडोर भी देखना होता है! इसके अलावा उनकी सर्जरीज़ भी शेड्यूल होती हैं, वह अपने समय पर ही आते हैं।”

” जी आप सही कह रही हैं, लेकिन सुबह और शाम दो बार तो उनके राउंड के बारे में कमरे के बाहर लिखा ही हुआ है। इसके बावजूद वह कल शाम को आए ही नहीं इसलिए बस मैंने पूछा।”

हो गया कबाड़ा! यह लड़की हर जगह शुरू हो जाती है। भगवान ने इसे बुद्धि तो दे दी लेकिन कहाँ बोलना है कहाँ नही ये नही सीखा पाए। ये इतना बोलती क्यों है? एक बार शुरू हुई कि फिर इसे रोकना मुश्किल हो जाता है।
वरुण मन ही मन सोचता परेशान होता रहा और पारो नर्स से उलझी रहीं।

“पारोमिता!! डॉक्टर साहब अपने समय से आ ही जाएंगे… इतना परेशान होने की ज़रूरत नही है। उनका समय बहुत कीमती है। संजीदा मरीजों की खोज खबर पहले ली जाती है।” वरुण से नही रहा गया और उसने पारो को टोक दिया।

“मैं आप सब की बात समझती हूं,बस यही कहना चाहती हूं, कि हम जैसों यानी मरीज़ के परिजनों के लिए तो हमारा मरीज भी संजीदा ही है। और देखा जाए तो अस्पताल में भर्ती हर एक मरीज संजीदा है, जब तक उसकी छुट्टी नहीं हो जाती। क्योंकि कब क्या हो जाए कहा नहीं जा सकता। तो अगर डॉक्टर साहब अपने तय समय के अनुसार हर एक मरीज को देखें तो इसमें कोई बुराई तो नहीं है। “

नर्स पारो की बात का अभी कोई कड़ा जवाब देने की सोच ही रही थी, कि दरवाजा खोल कर एक युवा सा दिखने वाला डॉक्टर अंदर चला आया।

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उसके आते ही नर्स ने एकदम से तत्परता दिखानी शुरू की और तुरंत वरुण की फाइल निकालकर उसका दैनिक रूटीन का चार्ट निकाल कर डॉक्टर को दिखाने लगी। इस सबके बीच कहीं पारो कुछ बोल ना दे इसलिए वरुण की निगाहें पूरी तरह से पारो पर टिकी थी, लेकिन पारो चुपचाप शांत खड़ी डॉक्टर को ही देख रही थी।

डॉक्टर ने सारा चार्ट अच्छे से पढ़ने के बाद एक बार वरुण का खुद बीपी चेक किया और चार्ट से मिलाकर राइट टिक करने के बाद नर्स से कुछ थोड़ी बहुत धीमी आवाज में बातचीत की और वरुण की तरफ मुड़ गया..

” सो अब कैसा फील कर रहे हैं आप?”

” पहले से काफी बेहतर हूं। “

” लेकिन रिवर्स कंजेशन ना हो जाए, इसलिए अभी एक-दो दिन आपको अस्पताल में ही रहना पड़ेगा। वैसे मेरे ख्याल से आप अपनी तकलीफ जानते ही होंगे तो इसलिए कुछ बातों का आपको हमेशा ध्यान रखना होगा और वह मैं आपकी डिस्चार्ज टिकट में मेंशन कर दूंगा। “

” डॉक्टर साहब इनकी तकलीफ क्या है, मेरा पूछने का मतलब है इनकी बीमारी क्या है? और उसका सही इलाज क्या हो सकता है?”

पारो ने बहुत संयमित और धीमें शब्दों में अपना सवाल डॉक्टर से पूछ लिया और वरुण प्रशांत को देखने लग गया। वरुण को नहीं मालूम था कि प्रशांत पारो से पहले ही सब कुछ बता चुका है बावजूद पारो डॉक्टर के मुंह से सब कुछ जानना और सुनना चाहती थी।

” जी मैं इनकी सारी समस्या आपको बताता हूं। वैसे इन्हें डॉक्टर मुरली राव देख रहे हैं। मैं जूनियर डॉक्टर हूं डॉक्टर नंदकिशोर। इनकी समस्या मैं सीधे और साफ शब्दों में आप को समझाने की कोशिश करता हूं!
ह्रदय हमारे शरीर का एक ऐसा जरूरी अंग है, जिसके कारण ही हमारे पूरे शरीर को रक्त की आपूर्ति होती है। हर एक अंग को रक्त की सप्लाई करने के साथ ही हृदय की अपनी एक स्वयं की भी परिसंचरण प्रणाली होती है। क्योंकि हृदय को भी अपना कार्य करने के लिए रक्त की आवश्यकता होती है।
हमारे ह्रदय में तीन मुख्य वाहिनीयों में अगर रक्त में गाढ़ापन आता है तो ब्लॉकेज होने लगता है। जिसके कारण ह्रदय अवरोध या हार्टअटैक जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है।
इस समस्या में रोगी की बीमार या दूषित वेन को रिपेयर कर के या स्टंट डाल कर दुरुस्त किया जा सकता है। एक बार अगर उस दूषित नली में स्टंट डाल दिया जाए तो रोगी 10 से 15 साल के लिए सुरक्षित हो जाता है। आजकल के जमाने में यह एक सामान्य और सुरक्षित प्रक्रिया है जिसमें बहुत ज्यादा खर्च भी नहीं आता।
लेकिन वरुण जी की समस्या थोड़ी अलग है।
हार्ट की पेरिफेरी में जो वेंस होती हैं वह अपेक्षाकृत काफी बारीक और पतली होती हैं। और अगर उनमें ब्लॉकेज की समस्या आती है तो उनमें स्टंट डालकर उन्हें रिपेयर करना काफी ज्यादा मुश्किल होता है। ये एक जटिल शल्य क्रिया है, जो अब तक हमारे शहर में उपलब्ध नहीं है।
ईस में रोगी वैसे तो सामान्य होता है, और उसे कोई ज्यादा समस्या नहीं होती लेकिन कभी अचानक ही उसकी समस्या बढ़ भी सकती है।
वरुण जी के हार्ट के एक वॉल्व में भी समस्या है। और उसे भी रिपेयर करना जरूरी है । उनके वॉल्व की समस्या का निराकरण हमारे अस्पताल में हो सकता है। लेकिन उनकी दूसरी समस्या थोड़ी बड़ी है और जिससे निपटना फिलहाल हमारे अस्पताल के बस में नहीं है । इसलिए जो आवश्यक जीवन रक्षक दवाएं हैं, वह हम उन्हें देकर स्टेबल करने की कोशिश में है। और दवाओं के असर से वो स्टेबल हो भी चुके हैं।
दवाये रुकने के बाद कहीं उन्हें वापस वही लक्षण आने शुरु ना हो जाए इसलिए उन्हें 2 दिन अस्पताल में रखकर दवाए हटाकर हम उनकी जांच करते रहना चाहते हैं । जिससे बिना किसी संशय के हम उन्हें यहां से डिस्चार्ज कर सके।
इसके बाद भी मैं कुछ दवाइयां उन्हें लिख कर दूंगा जो आप उन्हें अगले 1 महीने तक रोज दीजिएगा। एक महीने बाद उन्हें वापस लाकर अस्पताल में दिखाने के बाद हम निर्णय लेंगे की ये दवाइयां आगे कंटिन्यू करनी है या बंद करनी है। “

” जी बहुत-बहुत धन्यवाद आपका डॉक्टर साहब!! आपने मेरे मन की काफी सारी शंकाएं दूर कर दी। मैं जानना चाहती हूं , कि जो सीनियर डॉक्टर इन्हें देख रहे हैं क्या वह सर्जरी नहीं कर सकते? “

सत्यानाश ये लड़की कहां से कहां पहुंच जाती है। कहां तो मैं अस्पताल ही नहीं आना चाहता और कहां यह मेरी सर्जरी प्लान करने लग गई। कोई इस लड़की को रोकता क्यों नहीं?
वरुण ने बहुत लाचारगी से प्रशांत की तरफ देखा और प्रशांत ने मुस्कुरा कर अपनी आंखें पारो पर टिका दी।

” जी जो इनका केस देख रहे हैं वह हमारे यहां के काफी सीनियर डॉक्टर है। हमारे यहां के सबसे प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट हैं, यह हार्ट सर्जरी भी करते हैं। बड़े-बड़े शहरों से इन्हें सर्जरी के लिए बुलाया भी जाता है। लेकिन वह भी ये सर्जरी परफॉर्म नहीं कर सकते जिसकी जरूरत वरुण को है। “

” वो सर्जरी कौन से डॉक्टर कर सकते हैं और वह हमें कहां मिलेंगे?”

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” एक बार आप लोग दिल्ली के बड़े अस्पताल जेम्स में पता कर सकते हैं। लेकिन मेरी जानकारी में अब तक वहां पर भी ऐसी कोई सर्जरी परफॉर्म नहीं की गई है। दिल्ली के अलावा अगर कहीं पता करना है तो वेल्लोर मेडिकल कॉलेज में भी आप लोग पता कर सकते हैं।
यू एस के एक डॉक्टर साहब हैं जो कार्डियक सर्जन है और स्पेशली पेरिफेरल सर्जरी के लिए ही फेमस है। वह दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में बुलाए जाने पर आकर इस सर्जरी को परफॉर्म कर चुके हैं। लेकिन सिर्फ एक सर्जरी के लिए उनको बुलाना बहुत ज्यादा महंगा पड़ सकता है। क्योंकि इसमें उनके आने-जाने रहने के खर्चे के साथ ही उनकी फीस भी देनी होगी इसके अलावा इस सर्जरी के बाद मरीज की पोस्ट ऑपरेटिव देखभाल के चार्जेस भी जुड़े हुए रहते हैं। “

पारो कुछ और पूछ पाती इसके पहले ही वरुण ने उसे रोक दिया…

” नहीं डॉक्टर साहब मैं कोई सर्जरी नहीं करवाना चाहता हूं। मुरली मनोहर ने चाहा तो मैं ऐसे ही सारी जिंदगी गुजार लूंगा। “

” मैं तो यही कहूंगा कि अगर आपके पास इतना रुपया है कि आप उन डॉक्टर को अफोर्ड कर सकते है तो आप सर्जरी करवा लीजिए। वरना दूसरा उपाय यही है कि आप जिंदगी भर दवाइयां लेते रहिए। वैसे आप अच्छा इंप्रूव कर रहे हैं । अभी पिछले 7 घंटे से हमने दवाइयां विड्रॉल पर डाली हुई है, और आपकी बॉडी सही रिस्पांस दे रही है। गुड लक मिस्टर वरुण!!
वैसे मैं शाम को एक बार फिर राउंड पर आऊंगा। तब हम आपकी प्रोग्रेस को और ज्यादा सही ढंग से समझ पाएंगे। “

डॉक्टर ने वरुण को मुस्कुरा कर देखा उसके बाद पारो को देख कर बाहर निकल गया। पारो ने वरुण और प्रशांत की तरफ देखा और वह भी भाग कर उस डॉक्टर के पीछे कमरे से बाहर निकल गई….

” डॉक्टर साहब क्या आप मुझे सिर्फ 5 मिनट और दे सकते हैं। “

डॉक्टर ने मुड़कर पारो को देखा और फिर उसे हाथ के इशारे से गलियारे की तरफ इशारा कर दिया।

” हां!! यह मेरा केबिन है! वहां आराम से बैठकर हम बात कर सकते हैं।”

पारो ने मुस्कुराकर हां बोला और डॉक्टर के तेज कदमों से कदम मिलाते उसके पीछे पीछे केबिन की तरफ बढ़ गई।
केबिन में उसे कुर्सी पर बैठाने के बाद डॉक्टर अपनी सीट पर बैठ गया। उसने एक छोटी सी बेल बजाई और इसके साथ ही एक आया दरवाजा खोल कर एक कप कॉफी लिए हाजिर हो गई।

” इनके लिए भी एक कप ले आइए। “

“नही सर , मुझे ज़रूरत नही है। “

डॉक्टर ने आया को जाने का इशारा किया और अपना कॉफी का कप उठाकर पारो की तरफ देखने लगा

” हॉं तो पूछिये आप और क्या जानना चाहती थी?”

“सर आप डॉक्टर हैं?”

पारो के सवाल पर उस डॉक्टर को हंसी आने लगी उसने हंसकर पारो से कहा..

” जी बिल्कुल डॉक्टर ही हूं। “

” सर मैं यह जानना चाहती हूं, कि डॉक्टर बनने के लिए क्या करना पड़ता है? मतलब कि क्या पढ़ना पड़ता है? पढ़ाई कितनी लंबी होती है? और इसके अलावा बाकी सब कुछ.. जो भी डॉक्टर बनने के लिए जरूरी है?

” क्या आप डॉक्टर बनना चाहती हैं?”

” जी सर!! बचपन में मेरे बाबा अक्सर कहा करते थे, कि मेरी सोना बड़ी होकर डॉक्टर बनेगी… लेकिन बाबा ने ज्यादा साथ दिया नहीं!
हो सकता है अगर आज मेरे बाबा जिंदा होते तो मेरी भी शादी नहीं हुई होती और मैं भी शायद 12वीं के बाद डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही होती। लेकिन बाबा ने बहुत जल्दी साथ छोड़ दिया। उसके बाद मां से जितना हो सके मुझे पढ़ाने लिखाने के बाद मेरा ब्याह कर दिया।
उसके बाद मुझ पर ऐसी किस्मत की मार पड़ी कि मेरे ससुराल और मायके वालों ने मुझे इस आश्रम में लाकर छोड़ दिया। यहां इन्ही आचार्य वरुण जी के कारण मेरा आगे पढ़ने का सपना पूरा हो पा रहा है।
आज अब इस साल मैं 12वीं की परीक्षा दे पाऊंगी। तो बस यही जानना चाहती हूं कि क्या मैं भी डॉक्टरी पढ़ने के अपने बचपन के सपने को पूरा कर सकती हूं….

” बिल्कुल कर सकती हो। और इसमें मैं तुम्हारी पूरी मदद भी करूँगा। मेरी एक छोटी बहन है जो इस साल 12वीं में है, और वह पिछले 2 साल से मेडिकल एंट्रेंस के लिए तैयारी कर रही है। तुम चाहो तो अपना कोई नंबर दे दो , मैं उससे तुम्हारी पूरी बात करवा दूंगा कि तुम्हें कैसे और क्या पढ़ाई करनी है।
और बाकी की जानकारी कि मेडिकल की पढ़ाई क्या होती है कैसे होती है यह सब मैं तुम्हें बता देता हूं…….

इधर कमरे में हैरान-परेशान वरुण प्रशांत की तरफ देख रहा था प्रशांत ने मुस्कुरा कर वापस कंधे उचका दिये…..

” अब ये बाहर क्यों चली गई प्रशांत? पता नहीं अब उन डॉक्टर साहब से क्या बोल बैठेगी?”

” अब तुम यह सब सोच सोच कर चिंता मत करो। चुपचाप आंखें बंद करके आराम करो। अगर जल्दी वापस लौटना है तो जल्दी से जल्दी तुम्हे ठीक भी होना पड़ेगा वरुण। “

उसी वक्त दरवाजा खुला और नर्स के साथ एक दोहरे शरीर वाली महिला भीतर दाखिल हुई…

” हेलो मिस्टर वरुण मैं हूं डॉक्टर काम्या आपकी डाइटिशियन। नर्स ने मुझे जाकर शिकायत की थी कि आपने सुबह नाश्ते में सैंडविच की जगह दलिया खाया है। मैंने आप की कटोरी भर दलिए की कैलरीज़ निकाली और साथ ही जो सैंडविच मैं आपको देने वाली थी उसका भी।
दोनों ऑलमोस्ट सेम ही था। एक और बात अगर आपको दलिया पसंद है तो आप अगले 2 दिन भी दलिया खा सकते हैं मैं हमारी किचन से आपके लिए सैंडविच की जगह दलिया ही भेजूंगी। “

” नहीं ऐसी कोई बात नहीं है डॉक्टर आप सैंडविच भी भेज सकती हैं। “

वरुण को पारो के इस कृत्य पर शर्मिंदगी सी महसूस हो रही थी । और उसे लग रहा था कि इतने बड़े अस्पताल के डॉक्टर और नर्स सब पारो की इस हरकत के कारण परेशान हो उठे हैं ।इसलिए वह अपनी तरफ से मामले को सुलझाने की कोशिश में था।

” नो, नो प्रॉब्लम!! आप दलिया ही खाइए मैं आपको दलिया ही भेजूंगी! आप ब्रेड मत खाइए!”

” अरे नहीं मैडम मुझ अकेले के कारण आप परेशान मत होइए। आप बाकी पेशेंट के लिए जो भेजती हैं, मैं भी वही खा लूंगा। मुझे भी आप सैंडविच ही भेज दीजिएगा। “

” अरे आप समझ क्यों नहीं रहे हैं, ब्रेड में यीस्ट पड़ी होती है और आपको जो दवाइयां दी जा रही है, उन के साथ यीस्ट प्रॉब्लम क्रिएट कर सकता है और आपको इससे नुकसान हो सकता है….

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वरुण की जिद के कारण आखिर डाइटिशियन बोलते बोलते बिना सोचे समझे अपनी रॉ में सच्चाई बोल गई । असल बात तो यह थी कि उसने वरुण को भी एक सामान्य ह्रदय रोगी समझ कर उसका डाइट चार्ट तैयार कर दिया था ।जबकि डाइट चार्ट तैयार करने के पहले उसे वरुण को दी जाने वाली दवाइयों को भी देखना चाहिए था जो कि उसने नहीं देखा था।
वरुण को दी जाने वाली दवाइयों के साथ ब्रेड का उपयोग नहीं किया जाता है। यह उस डाइटिशियन को मालूम था लेकिन अनजाने में उसने बिना दवाई देखे ही वरुण के लिए भी सैंडविच ही डाइट में शामिल कर दिया था।
इत्तेफाक से सुबह सैंडविच आने के पहले पारो ने वरुण के लिए गर्म दलिया तैयार कर लिया था।
पर यह बात नर्स को बहुत नागवार गुजरी थी, क्योंकि देखा जाए तो यह अस्पताल के नियमों के खिलाफ भी था और इसीलिए नर्स एक कटोरी दलिया लिए डाइटिशियन के पास पहुंच गई थी। जिससे सारे सबूतों के साथ वह अस्पताल मैनेजमेंट में पारो के खिलाफ शिकायत दर्ज कर सकें। लेकिन डाइटिशियन ने जब दलिए और सैंडविच की कैलरी काउंट करने के बाद वरुण का दैनिक रूटीन चार्ट चेक किया तब अचानक उसकी नजर वरुण की दवाइयों पर पड़ी और उस वक्त डाइटिशियन के दिमाग की बत्ती जल उठी।
हे भगवान!! ये कितनी बड़ी गलती करने जा रही थी वो। वो तो अच्छा हुआ मरीज़ ने ब्रेड नही खाई। अगर खा ली होती तो ?
बहुत बड़ा अनर्थ टल गया था…!

इत्तेफाक से ही सही लेकिन मरीज को दिया गया नाश्ता दलिया ही मरीज के लिए बेहतर था और अगर गलती से वरुण सैंडविच खा लेता तो उसे ज्यादा नुकसान हो सकता था।
बस इसी बात को घुमा फिरा कर समझाने के लिए डाइटिशियन खुद उसके कमरे में आई थी लेकिन वरुण की जिद के कारण डाइटिशियन के मुंह से इतनी शिद्दत से छिपाई गई बात निकल गई और सच्चाई वरुण और प्रशांत के सामने आ गई।
पारो की शिकायत करने के मंसूबों पर पानी फिर जाने से और अपनी गलती पकड़ में आ जाने से नर्स चुपचाप उन सब से आंखें चुरा कर कमरे से बाहर निकल चुकी थी।
डाइटिशियन ने भी अपनी बात अधूरी ही छोड़कर वहां से खिसक लेने में ही भलाई समझी और वह भी वरुण को कुछ हेल्थ टिप्स दे कर जल्दी ही वहां से बाहर निकल गई।

उन दोनों के वहां से जाते ही कमरे में वरुण और प्रशांत ही रह गए। दोनों अचरज से एक दूसरे की तरफ देख रहे थे।

” मुझे तो लगता है वरुण , मुरली वाले ने तेरी रक्षा करने के लिए ही पारो को भेजा है। इसलिए अब चुपचाप आंख मुंह बंद करके वो जो कहती है मान लिया करो। “

” वह सब तो ठीक है लेकिन अभी वह डॉक्टर के साथ क्या बातें कर रही होगी? मैं तो यही सोच कर परेशान हूंआ जा रहा हूं…

” मत परेशान हो, वह आएगी तो वैसे ही सब कुछ बोल जाएगी….

हमेशा की तरह वरुण मुस्कुराने लगा कि तभी दरवाजे पर एक आहट सी हुई…

क्रमशः

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aparna…

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

13 विचार “समिधा -53” पर

  1. Superbbbb….

    Vaise bhi Varun se toh kch chupa bhi ni sakti paro….

    Pureee aashram me ye dono hi hai jinse paro sb kch bol sakti hai…..

    Ab ilaaz toh paro k haatho hi hoga…Varun ka….tb tak dwai ka pura dhyan rakhegi…..🥰🥰🥰☺️☺️☺️☺️😘😘😘😘😘

    Waiting for next part

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  2. बहुत खूब,👌👌 पारो ने क्या डॉक्टर क्या नर्स सबकी बोलती बंद कर दी। अब पारो ने तय कर ही लिया है कि वो डॉक्टर बनकर ही दम लेगी।

    Liked by 1 व्यक्ति

  3. बढ़िया पार्ट है अब पारो डॉक्टर बनेगी, शायद वरुण का ऑपरेशन पारो ही करेगी। बड़ा ही टफ रोग है वरुण को, आजकल ह्रदय से संबंधित बहुत से रोग और हार्ट अटैक हो रहे हैं इससे अच्छा है योग और व्यायाम से स्वस्थ रहें।

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