शादी.कॉम- 30

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   शादी डॉट कॉम-30

    मैं तो ना चला था दो कदम भी तुम बिन
    फिर भी मेरा बचपन यही समझा हर दिन
    छोड़कर मुझे भला अब कहां जाओगे तुम
    ये ना सोचा था कभी इतने याद आयोगे तुम
    रूठ के हमसे कभी जब चले जाओगे तुम…

राजा– दोस्त ज़रा गाने को बन्द कर दो यार!! मन नही कर रहा,अभी कुछ सुनने का।।

  हाऊ शाहेब बोल कर ड्राईवर ने टैक्सी में चलते गाने को बन्द कर दिया।।

“काय पुणे चा नही हे का तुमि” ड्राईवर बातुनी था उसके इस सवाल का जवाब देना मतलब उसके अगले सवाल के लिये तैयार होना था।।
  राजा ने धीरे से ना बस बोल दिया ,पर तभी ड्राईवर ने कुछ और राग छेड़ दिया।।
  किसी सूरत में बचने की राह ना देख राजा ने आखिर उसे गाना चलाने के लिए बोल ही दिया।।
 
    “बजा ले भाई गाना ही बजा ले।।”

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  एफएम रेडियो को ट्यून कर गाने में मगन ड्राइवर गाड़ी चलाता रहा, मुंबई पुणे हाईवे पर टैक्सी भागती रही ,,दो रातों से जगे राजा को धीरे-धीरे ठंडी हवा ने थपकी देकर सुला दिया।।।
      नींद में सोए राजा ने प्रिंस को लेकर कोई भयानक सपना देखा,,, कहते हैं ना दिमाग में जो चल रहा होता है अक्सर कच्ची नींद में वही सपने के रूप में नजर आता है…. पुणे में टैक्सी में बैठने के साथ ही राजा प्रिंस के बारे में ही सोच रहा था इसीलिए उसे ही सपने में देखा और घबरा कर उसकी नींद खुल गई तभी गाड़ी एक झटके के साथ ब्रेक के लगते ही मुंबई एयरपोर्ट के सामने रुक गई।।

    टैक्सी में बैठने के बाद और युवराज भैया से बात होते ही राजा ने अपने टिकट बुक कर ली थी किस्मत की बात थी कि मुंबई एयरपोर्ट में उतरते ही आधे घंटे में उसकी चेक-इन, थी टैक्सी वाले को पेमेंट देकर राजा अपना सामान लेकर तुरंत अंदर की ओर भागा।
       सिक्योरिटी चेक के बाद राजा को अपना फोन चार्ज करना याद आया लेकिन आसपास उस वक्त उसे कोई चार्जिंग पॉइंट नहीं मिला उसकी फ्लाइट का अनाउंसमेंट हुआ और राजा अपनी फ्लाइट में सवार दिल्ली के लिए उड़ गया।।

  एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही राजा को प्रेम मिल गया प्रेम उसे लिए तुरंत अस्पताल की ओर निकल गया।।

   इतनी देर से खुद को संभाले हुए राजा ने जैसे  ही युवराज भैया से मिलने के बाद आईसीयू में बेहोश पड़े प्रिंस को देखा उसकी आंखों से आंसू बहने लग गए,,, उसके लिए खुद को संभालना मुश्किल हो रहा था प्रिंस को देखकर उसे प्रिंस का हंसता मुस्कुराता चेहरा सताने लगा।।
  
      राजा वहां काफी देर तक प्रिंस का हाथ अपने हाथों में थामे बैठा रहा,, उसे पता भी नहीं चला कि कब मिनट घंटों में बदल गये लगभग तीन-चार घंटे बीतने के बाद युवराज भैया आए और उसे उठाकर बाहर ले गए, वैसे इस तरह प्रिंस के साथ किसी को बैठने की चिकित्सकीय अनुमति नहीं थी परंतु क्योंकि प्रिंस का प्राइवेट आईसीयू वार्ड था और दूसरा राजा की हालत देखते हुए चिकित्सकों ने उसे बिना कुछ कहे चुपचाप बैठने के लिए अनुमति दे दी थी।।

   जब राजा प्रिंस के पास बैठा था तभी प्रिंस के फोन पर किसी का कॉल आया,,प्रिंस का फोन  प्रेम के पास ही था,अनजाने नंबर से फोन आने पर प्रेम फोन लिए बाहर चला गया लगभग 10 मिनट बाहर बात करने के बाद प्रेम वापस आकर चुपचाप खड़ा हो गया।
  उस वक्त ना उसे किसी ने पूछा कि किसका फोन था और ना ही उसने किसी को बताया।।

   डॉक्टर से पता चला कि कुछ मात्रा में आंतरिक रक्तस्त्राव फिर से शुरू हो गया था तथा दिमाग को जाने वाली रक्त वाही नलिका में रक्त की आपूर्ति नहीं होने के कारण दिमाग का एक हिस्सा काम नही कर पा रहा था,, डॉक्टर अपनी तरफ से प्रयासरत थे लेकिन प्रिंस कब तक होश में आएगा?? और उसका दिमाग वापस कब तक दुरुस्त हो पाएगा, यह कहना डॉक्टरों के लिए अभी फिलहाल असंभव था।।

युवराज ने धीरे से राजा को उठाया और अपने साथ लिए आईसीयू से बाहर आ गया।। सब आईसीयू के बाहर थे, तभी युवराज के फोन पर किसी नंबर से फोन आया युवराज ने नंबर देखा और उसकी आंखों मे एक क्षण को चमक आ गयी,वो फ़ोन उठाये वहां से बाहर निकल गया कुछ देर बाद वापस आ कर उसने राजा और प्रेम से सारी बातें बताई__
    ” राजा तुम्हें अपनी भाभी की मौसी याद है जिन्होंने बचपन में रेखा को गोद लिया था हीरे जवाहरात वाली मौसी, हमारी शादी में भी आई रही।”

” हां भैया याद है हमें, अभी पिंकी की शादी में भी तो आई थी”

” हां हां वही उनके सगे  देवर पास के शहर के नेता जी हैं,, हमें पता तो पहले से था लेकिन कभी ध्यान नहीं दिया ।।अभी जब तुम्हारा यह केस हुआ तब हमें अचानक उनका ध्यान आया हमने सबसे पहले उन्हीं  को फोन लगाया पर उनके सेक्रेटरी ने बताया कि नेता जी सपरिवार विदेश घूमने गए हुए हैं … तब हमने अपने और बाकी के जान पहचान वालों से तुम्हारे केस की फाइल को दबवा दिया, हमने नेताजी के सेक्रेटरी को यह नहीं बताया था कि हम नेताजी के रिश्ते में क्या लगते हैं।। अभी नेताजी जब वापस आए तब उन्हें  उनके सेक्रेटरी ने हमारे फोन के बारे में बताया।।
   बड़प्पन देखो उनका हमारा नाम सुनते ही पहचान गए और तुरंत हमें फोन लगा लिया,, अभी हमारे फोन उठाते ही कहने लगे राधेश्याम जी के लड़के बोल रहे हो ना!! हमने  जैसे ही कहा हां तो कहते हैं,, अरे दामाद बाबू सेक्रेटरी से बोले काहे नहीं कि आप फोन किए हैं हमको विदेश में ही नंबर मिला देते हुआं ही आप से बात हो जाती कुछ हमारे लायक सेवा हो तो बताइए,, हम तुम्हारे नाम से थोड़ा बहुत बता ही रहे थे की तुम्हे भी चीन्ह डाले ,कहते हैं तुम्हरा वही भाई ऑफीसर बन गया क्या जो हीरो टाईप दिखता है,,हम बोले हाँ एक ही तो भाई है हमारा!! कहते हैं दामाद बाबू तुरंते चले आओ, आमने सामने बैठ के सब बात कर लेंगे,आपके भाई को हम कुछ ना होने देंगे।।

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     युवराज के चेहरे की प्रसन्नता देख प्रेम और राजा के मन से भी एक बोझ उतर गया वैसे प्रिंस की हालत को देखते हुए राजा का ध्यान अपने केस की तरफ गया ही नहीं था,,, पर युवराज तो 2 दिन से इसी उधेड़बुन में व्यस्त था आज राजा को वहां देखते ही उसे थोड़ी तसल्ली हुई उसने राजा और प्रेम को हॉस्पिटल में सब संभाल लेने को कह कर अपने पास पड़े कुछ रुपये और चेक बुक राजा के हाथ में रख दी, और अपनी वापसी की टिकट देखने लगा।।
     ” राजा तुम्हारा फोन देना हमारे फोन पर नेट नहीं चल रहा है।”

   युवराज के ऐसा कहते ही राजा को अपने फोन का होश आया उसने जेब में से फोन निकाला जो कब से बंद पड़ा था तुरंत प्रेम से चार्जर लेकर वही हॉस्पिटल में चार्जिंग पिन में लगा दिया।। युवराज वापस अपने टिकट के लिए कोशिश करने लगा 2 मिनट बाद फोन के थोड़ा चार्ज होते ही राजा ने फोन को जैसे ही ऑन किया एक साथ कई  बीप बजने लगी
   “इतना किसका मैसेज आ रहा है राजा ??”

   “मैसेज नहीं भैया यह तो मिस कॉल अलर्ट आ रहा है” प्रेम के ऐसा बोलते ही राजा को एकदम से बांसुरी का होश आया,उसने तुरंत फ़ोन उठाया उसमें बांसुरी की 70 मिस्ड कॉल थी।।

    एक ही रात में कितना कुछ बदल गया था कल की रात जहां वह और बांसुरी साथ-साथ अपने भविष्य को लेकर सपने बुन रहे थे वही आज सुबह से दोपहर हो गई थी और उसकी बांसुरी से बात तक नहीं हो पाई थी उसने समय देखा दोपहर के 3 बज गए थे तभी युवराज भैया ने उसे और प्रेम को कैंटीन में खाना खाने के लिए भेज दिया वो और प्रेम उठकर जा ही रहे थे कि उसके फोन पर रिंग बजने लगी….. एक बार फिर बांसुरी का फोन था,,, उसने जैसे ही फोन उठाया__

” राजा कहां हो?? कल रात से फोन लगा लगा कर परेशान हो गए,, तुम्हारा कोई अता पता ही नहीं है!! दिल्ली पहुंच गए कि नहीं, हमें बताने तक की जरूरत नहीं समझी,,, हम यहां रो-रोकर हलकान हुए जा रहे हैं तुम हो कहां अभी??”

” अरे बाबा सब बताते हैं ,रुको तो सही!! कल फोन डिस्चार्ज हो गया था, और जब हम होटल से सामान लेकर निकले तो जल्दी में फोन का चार्जर और बैटरी बैंक रूम पर ही भूल गये,, बस उसके बाद अभी तो फोन चार्ज हुआ है और बस तुम्हारा फोन आ गया।।”

” कैसे अचानक दिल्ली जाना पड़ा?? क्यों किया था भैया ने फोन?? अभी तुम हो कहां पर??”

” अरे मेरी मां इतने सारे सवाल ??सब बताते हैं एक-एक करके,,, हम अभी दिल्ली एम्स में है।

” एम्स में कहां हो?”

” पूछ तो ऐसे रही हो जैसे पलक झपक के हमारे सामने खड़ी हो जाओगी कैंटीन में है।”

” फिर झपको अपनी पलकें।।”

” क्या बोल रही हो यार बांसुरी मूड थोड़ा ऑफ है हमारा।”

” तो ठीक है पीछे पलटो  फिर तुम्हारा मूड ठीक कर देते हैं।।”

    राजा ने जैसे ही पलट के देखा सामने कंधे पर बैग पैक टांगे बांसुरी मुस्कुराती खड़ी थी।

” अरे तुम यहां कैसे प्रकट हो गई?? कोई जादू चमत्कार जानती हो क्या??

” तुम्हारा नंबर बंद आ रहा था तुम्हें बार-बार फोन लगाने पर भी जब तुम्हारा फोन नहीं लगा तब हमने युवराज भैया के नंबर पर फोन लगाया पर उनका भी फोन बंद आ रहा था ।।तब हमारा एकमात्र सहारा हमारा सबसे प्यारा दोस्त प्रिंस!! हमने उसके नंबर पर फोन लगाया।।
     आज सुबह प्रिंस का फोन लग गया फोन उठाया प्रेम ने ।। हमारे पूछने की देर थी कि प्रेम ने हमको प्रिंस की सारी परिस्थिति बता दी हम समझ गए कि युवराज भैया ने इसीलिए तुम्हें अचानक बुलाया है तुम्हारा फोन नहीं लग रहा था इसिलिए हम भी सुबह-सुबह मुंबई पहुंच गये थे,रास्ते से ही पन्द्रह दिन की छुट्टी का मेल सिद्दार्थ सर को भेज दिया।। हमें तो दिल्ली निकलना ही था प्रेम से बात होते ही हमने अपनी टिकट बुक की और हम यहां पहुंच गए।।

  बांसुरी मुस्कुराने लगी उसे मुस्कुराते देखकर राजा के चेहरे पर भी मुस्कुराहट वापस लौट आई “तुम चिंता मत करो राजा तुम्हारे प्रिंस को कुछ नहीं होगा हम सब मिलकर उसे बचा लेंगे।”

” बंसी तुम आ तो गई हो पर तुम यहां रुकोगी कहां?”

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राजा के इस सवाल का जवाब दिया प्रेम ने “भैया जी आपका फ्लैट तो है ही,, हम और युवराज भैया भी वही तो रुके हैं ।।वही आप और बंसी भी रुक जाइएगा ।”
   
   ” तुम कह तो ठीक रहे हो प्रेम, लेकिन बंसी का ऐसे अकेले हम तीनों के साथ रहना हमें कुछ सही नहीं लगता।। बंसी अब तुम मिल चुकी हो हमसे,, शाम की फ्लाइट से  वापस लौट जाओ।”

“हम तुम्हें यहां ऐसे अकेले छोड़कर अब नहीं जाएंगे”

” अरे पर भैया क्या सोचेंगे तुम समझती क्यों नहीं?”

   ” कौन क्या सोचेगा राजा किसकी बात कर रहे हो भाई?? अरे बंसी तुम?? तुम कब चली आई?? कहां रहती हो आजकल और क्या चल रहा है ??तुम तो बड़ी दुबला गई हो भाई??

  युवराज को अचानक कैंटीन में देखकर तीनों के तीनों चौक गए।।

” नमस्ते भैया!! हम पुणे में रहते हैं, वही बैंक में नौकरी कर रहे हैं।। राजा अभी पुणे आए थे तब उनसे मिलना हुआ था फिर यह अचानक आपके फोन से यहां चले आए ,,तो हमें थोड़ी घबराहट हुई प्रिंस के फोन पर कॉल  किया तो प्रेम से सारी बात पता चली प्रिंस की ऐसी हालत सुनकर हम से रहा नहीं गया और हम भी उसे देखने चले आए,, क्या हम कुछ दिन आप लोगों के साथ यहां रह सकते हैं।”

“हां-हां क्यों नहीं बन्सी!! बचपन से तुम्हें देखा है हमारे लिए तो छोटी बहन जैसी हो,, हमारी बहन मतलब  इन लोगों की भी बहन!!बिल्कुल आराम से रह सकती हो लेकिन अपनी अम्मा को बता देना कि तुम दिल्ली आई हुई हो।”

   युवराज की बहन वाली बात सुनते ही राजा के गले में चाय अटक गई और उसे हल्की खांसी आ गई, और वह उठकर वहां से बाहर चला गया।।

   राजा ने चुपके से बांसुरी को समझा दिया कि घर पे सिर्फ युवराज भैय्या ही थे जिन्हे उन दोनों के बारे में कुछ भी नही पता था।।

  कैंटीन से निकलकर सब एक बार फिर प्रिंस के पास चले आए प्रिंस की हालत में कोई सुधार नहीं था वह अब भी बेहोश था उसे देखते ही एक बार फिर राजा का चेहरा मुरझा गया राजा वही आईसीयू के बाहर लगी कुर्सी पर बैठ गया उसके पास ही बांसुरी भी बैठ गयी,युवराज अपना फ़ोन लिये बाहर निकल गया।।

युवराज की रात की टिकट हो गई थी, आईसीयू में मरीज के साथ किसी को भी  रुकने की अनुमति नहीं थी,प्रिंस को वैसे भी सारी दवा आई वी चढाई जा रही थी,इसलिये वो सभी लोग एक बार प्रिंस को देख कर घर के लिये निकल गये।।।

  राजा का प्रिंस को इस तरह अकेले छोड़कर घर जाने का बिल्कुल मन नहीं कर रहा था लेकिन बांसुरी के कारण अस्पताल में दोनों का रुकना भी सही नही था।। इसिलिए वह सभी लोग वहाँ से निकल गये और युवराज भैया को एयरपोर्ट में उतारते हुए फ्लैट के लिए निकल गए।।

   राजा और युवराज का अक्सर दिल्ली में काम पड़ता  रहता था जिसके लिए दोनों ही अक्सर दिल्ली आया करते थे,,इसीलिए युवराज ने कभी बहुत पहले एक फ्लैट लेकर यहां पर डाल दिया था अभी उसी फ्लैट में इन लोगों ने अपने रुकने की व्यवस्था कर रखी थी रसोई में एक-दो ब्रैड के पैकेट और मैगी के पैकेट पड़े थे काम चलाऊ दो चार बर्तन थे और चाय और कॉफी बनाने की सामग्री पड़ी हुई थी।।

     उन लोगों के वहां पहुंचते ही प्रेम ने घर की थोड़ी बहुत सफाई की और राजा नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया नहाकर निकलते ही राजा प्रेम को लिए कुछ जरूरी सामान लेने घर से निकल गया।।। जाते-जाते दरवाजे को अंदर से लॉक करने के लिए बांसुरी को कह गया,उन लोगों के वापस लौट कर आने तक में बांसुरी ने एक बार फिर से पूरे घर की साफ-सफाई करी और नहा कर चाय चढ़ा दी।।

    राजा बाहर से ही आलू के पराठे पैक करवा कर ले आया था,तीनों ने चाय और पराठे खाये,पर खाते हुए एक बार फिर राजा को प्रिंस की याद ने भावुक कर दिया।।
      खाने के बाद तीनों साथ ही हॉल मे बैठे प्रिंस को और अपने पुराने समय को याद करते रहे,,प्रेम ने भी उन बातों को याद करते समय बांसुरी से अपनी गलती की माफ़ी मांग ली।।
    राजा जब रसोई में पानी की बोतल भरने गया हुआ था,तभी प्रेम ने बांसुरी को यह सच्चाई भी बता दी कि वो राजा का पत्र लेकर बांसुरी के पास गया ही नही था,और वापस आ कर राजा से सब कुछ झूठ बोल गया था।
    प्रिंस की हालत देख कर सभी भावुक हो गये थे, सभी को अचानक ही आभास हो गया था की ज़िदगी कितनी क्षणभंगुर है,इसी सब में प्रेम को भी अपने किये का पश्चाताप हो रहा था,,वो पहली बार बांसुरी को राजा के साथ देख कर प्रसन्न था।। उसे अपनी गलती का एहसास था और इसिलिए उसने सच्चे दिल से बांसुरी से माफी मांग ली थी।।

    रात गहराती चली गयी पर बातों में भिड़े तीनो दोस्तों की आंखों से नींद गायब थी।।आधी रात बीत जाने पर राजा ने बांसुरी को अन्दर के कमरे में सोने भेज दिया और खुद प्रेम के साथ बाहर हॉल मे ही लेट गया।।

दूसरे दिन सुबह सुबह ही तीनो वापस अस्पताल पहुंच गये,,पूरा दिन तीनों का वहीं बीत गया,शाम होते होते राजा को वापस बांसुरी की चिंता सताने लगी,उसे बांसुरी का इस तरह उनके फ्लैट पर रुकना पसंद नही आ रहा था,आखिर उसने एक उपाय निकाल ही लिया।।उसने बन्टी से बात की,बन्टी की एक पुरानी दोस्त दिल्ली में रहती थी ,राजा ने बन्टी से कह कर बांसुरी के रहने का इन्तेजाम उसकी दोस्त के घर पर करा दिया।।
    शाम मे राजा बांसुरी को छोड़ने निकल गया,अभी दोनो आधे रास्ते भी नही पहुँचे थे कि प्रेम का फोन आ गया” भैय्या जी तुरंत वापस आ जाइये प्रिंस को होश आ गया है।।”

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   खुशी से राजा ने टैक्सी को वापस घुमवा लिया।।
राजा और बांसुरी भागे भागे प्रिंस के कमरे में पहुँचे,, उन दोनों को साथ देख प्रिंस इतनी पीड़ा में भी हल्के से मुस्कुरा दिया,,राजा ने दौड़ कर प्रिंस का हाथ पकड़ लिया__” पगला गये थे क्या?? क्या ज़रूरत थी इत्ता बड़ा कदम उठाने की….आइंदा ऐसा किया ना जान ले लेंगे साले तुम्हारी।।”
    राजा प्रिंस के गले से लग के रो पड़ा,बांसुरी राजा के पीछे खड़ी उसके कंधे पर हाथ रखे उसे ढाँढस बंधाती रही,,कुछ समय बाद डॉक्टर ने उन लोगों को बाहर इन्तजार करने कह कर बाहर भेज दिया।।

” राजा ,सुनो!!”

” हाँ कहो ना बंसी !!”

” हमें अपने से दूर मत भेजो ना,हम बन्टी भैया की उन दोस्त को जानते तक नही,,हम तुम्हे बिल्कुल परेशान नही करेंगे,,सच्ची!!

” अरे यार !! तुम समझती नही हो ना,,यही तो मुसीबत है।।कल जब हमारे  या तुम्हारे घर पे पता चलेगा तब ?? सब क्या सोचेंगे तुम्हारे बारे मे।

” वो सब हम नही जानते,हमे बस इतना पता है कि हम इस मुसीबत के समय तुम्हें अकेले नही छोड़ सकते,,प्लीज़ राजा,,मान जाओ ना।।”

    तभी नर्स ने इशारे से उन लोगों को बुलाकर घर से प्रिंस के लिये दाल का पानी और पतले फुल्के लाने को कहा,वैसे तो सभी मरीजों के लिये अस्पताल से ही खाना आता था,पर आई सी यू के मरीज़ों के लिये अलग से खाने की विशेष व्यवस्था नही हो पाने के कारण ही प्रिंस के लिये घर से खाना लाने कहा गया था।।

‘ देखा भगवान भी यही चाहतें हैं हम तुम्हारे साथ रहें,चलो अब हमारे साथ घर चलो ,हम जल्दी से खाना बना लेंगे।”

  राजा प्रेम को वहाँ छोड़ कर बांसुरी के साथ फ्लैट पर वापस आ गया।।
   हाथ पैर धोकर बांसुरी रसोई में  आ गयी,,एक दिन पहले ही राजा ने कुछ तीन चार तरह की दालें,कुछ मसाले ,थोड़े चावल ,आटा, आलू सब्जियां और तेल वगैरह खरीद लिया था।।
    वो जब रसोई मे आया तो सारा सामान फैलाये बांसुरी कभी किसी तो कभी किसी दाल को उठा कर देख रही थी।।

” क्या हुआ? अब तक तुम्हारी दाल चढ़ी नही??”

” हम बस देख रहे थे राजा की कौन सी दाल बनानी है।”

” ऐसा करो बन्सी मूँग की दाल बना लो।”

  राजा को कुछ कुछ समझ तो आ गया था पर जान बूझ कर अंजान बनते हुए उसने बांसुरी को भर नज़र देखा और बाहर जाते जाते उसे चाय भी बनाने कहता गया।
” क्या हुआ बन्सी जी!! आपके कुकर की तो सिटी ही नही बज रही ??”

बांसुरी ने राजा की बात सुनी और बाहर चली आयी

” क्यों तुम्हारे घर मे चाय कुकर में पकाते हैं??”

  अपने रेशमी बालों को बेतरतीबी से क्लच किये सामने के बालों को हाथो से हटाती हैरान परेशान बांसुरी को देख राजा की हँसी छूट गयी।।

” मैडम जी चाय तो पतिली में ही बनाते हैं,पर हाँ हमारे यहाँ दाल कूकर में बनाई जाती है, अब तक तो चढ़ा दी होगी ना।”

बांसुरी को समझ ही नही आ रहा था कि वो अपनी बात कैसे कहे,बडे संकोच से उसने राजा से कहा__ राजा बस एक छोटी सी मदद कर दो,हमें ना दाल बनानी नही आती,बस वो बनाना बता दो प्लीज़।”

” अभी तो बड़ी बड़ी डीँगे हांक रही थी हॉस्पिटल में,,,और हाँ एक मिनट,पुणे में तो तुम्हे देख बिल्कुल ऐसा लग रहा था जैसे कोई बहुत सुव्यवस्थित गृहिणी हो,वहाँ तो रसोई में बहुत कुछ कर रही थी।”

” हम कहाँ कुछ कर रहे थे राजा,इन दो दिनों में याद कर के बताओ,हमने अपने हाथ से चाय के अलावा और क्या खिलाया पिलाया।”

” हां यार!! चाय बस तो पिलाई तुमने ,,तो तुम तीन साल से पुणे मे क्या खा के जिंदा थी मेरी माँ??”

” पुलाव” बांसुरी खिलखिला उठी।।

” बस ” राजा की आंखे फटी रह गयी,तभी ऐसी कमज़ोर हो गयी

” नही , कभी कभी मैगी और ब्रेड भी खा लेते थे,और हाँ पोहा भी। असल मे तुम्हारे साथ साथ हमारा खाना पीना भी छूट गया राजा,,बस तुम्हे याद करते और चाय बना बना के पीते रहते।

” वाह इससे अच्छा तो हमे याद कर कर के कचौड़ियाँ बनाना सीख लेतीं कम से कम हमें बना के तो खिला पाती।।”

” वो अब तुम सीखा देना।।”

” हम्म चलो हटो,अब तुम ऐसा करो चाय चढाओ तब तक हम दाल पका लेते हैं,,वैसे दाल बनाना कोई रॉकेट साईंस भी नही है यार।

” हमें पता है राजा पर हमारे साथ एक छोटी सी समस्या है,,जैसे लोगो के साथ होता है ना किसी एक रंग को नही देख पाते,या सीधी और आड़ी रेखाओं को एक साथ नही समझ पाते,बस वैसा ही कुछ हमारे साथ है।।”

” मतलब क्या बन्सी??

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” मतलब हम मूँग की दाल और उरद की दाल मे अन्तर नही कर पाते।”

  राजा का हँस हँस के बुरा हाल था,उसने पूछा तुअर दाल तो पहचानती हो, हाँ मे सर हिलाते हुए बांसुरी अन्दर गयी और अपने हाथ मे कुछ पकड़े बाहर ले आयी,राजा के सामने आकर उसने अपनी मुट्ठी खोल दी __” ये देखो !! ये रही तुअर दाल।”

राजा पेट पकड़ के हँसते हँसते बांसुरी के सामने हाथ जोड़ कर खड़ा हो गया__ ” ये चने की दाल है मैडम।।”
   उसे हँसते देख बांसुरी भी हंसने लगी,तभी कूकर ने सीटी दे दी।।

   चाय छान कर बांसुरी दो कप में ढाल कर ले आई ।।
” चाय पीकर रोटियाँ बना ली जायेँ ।”

” जो हुक्म मेरे आका ।” बाँसुरी के ऐसा कहते ही एक बार फिर राजा हंसने लगा।।

क्रमशः

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aparna..
 

शादी.कॉम – 29

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शादी डॉट कॉम-29

       जब इन्सान के मन में कोई संशय घर कर जाता है तब वो अपने जीवन मे उस समय घटित हर घटना को किसी ना किसी रूप में अपने उसी संशय से जोड़ के देखने लगता है।।
      बांसुरी ना तो अन्धविश्वासी थी और ना ही लकीर की फकीर!!! हर एक क्यों? को अपने तथ्यों पे नाप तौल कर ही निर्णय लेती थी पर ये भी सत्य है कि बहुत बार प्रेम इन्सान को कमजोर बना देता है।।
     प्रेम में पड़ा इन्सान वो सब करने को बाध्य हो जाता है जिसका पहले कभी उसके व्यक्तित्व से कोई संबंध भी ना रहा हो।।

     पहले की तेज़ तर्राट,बात बात पर अपनी ज़बान से आग उगलने वाली बंसी राजा से प्रेम और वियोग के बाद एक अलग ही बंसी बन चुकी थी,उसकी धीरता, सहिष्णुता उसकी उम्र से कहीं अधिक थी।।
     माला का उसके इसी एकमात्र रूप से परिचय था,,माला की नज़र में बंसी एक धीर गम्भीर शान्ति प्रिय लड़की थी,जो ऑफिस में भी सिर्फ उतना ही बोलती जितना आवश्यक होता था,,पर अब राजा के साथ बांसुरी को देख माला को उसके और राजा के रिश्ते की गहराई का आभास हो गया था।।

     बांसुरी तब तक वहां खड़ी रही जब तक राजा की टैक्सी धूल उड़ाती आंखों से ओझल ना हो गई , उसके बाद भारी मन और भारी कदमों से बांसुरी अपने फ्लैट की ओर बढ़ चली।।।

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    रूम का दरवाजा खोलते ही बांसुरी को अकेले सामने खड़े देख माला के माथे पर सवालिया निशान उभर आए उसने तुरंत पूछा _” सर कहां चले गए?”

बांसुरी– युवराज भैया का अचानक फोन आ गया और उन्हें तुरंत दिल्ली के लिए निकलना पड़ा अभी तो टैक्सी से मुंबई जा रहे हैं वहां से फ्लाइट लेकर दिल्ली जाएंगे।

   इतना कहते ही बांसुरी सोफे पर निढाल होकर गिर पड़ी और रोते-रोते उसकी हिचकियां बन्ध गई।।   माला ने तुरंत उसे संभाला दौड़ कर पानी का गिलास ले आई और बांसुरी को पकड़कर उसे शांत कराते हुए उसके पास बैठी रही।।

माला– अरे इतना रोने की क्या बात है बंसी । संभालो अपने आप को अब आजकल फोन इंटरनेट के जमाने में कोई दूरी तो बीच में रह नहीं गई है ,फोन लगा लो ना सर को।।

बांसुरी- जब से टैक्सी में बैठे हैं उसके 10 मिनट बाद से लगातार उन्हें फोन लगा रही हूं उनका फोन लग ही नहीं रहा।।

माला– अरे नेटवर्क नहीं होगा यार तुम तो जबरदस्ती परेशान हो रही हो।। चलो चल कर कुछ खा लो।।

बांसुरी– अभी तो हमसे कुछ खाया नहीं जाएगा    माला,, जब तक राजा मुंबई पहुंच कर हमें  एक बार फोन नहीं कर लेते।।
        तुम परेशान मत हो,, तुम सो जाओ हम अपने कमरे में जा रहे हैं।।

     बांसुरी जैसे ही अपने कमरे में गई पलंग पर रखें सुबह के सारे शॉपिंग के सामान को देखकर उसका दिल एक बार फिर से डूबने लगा।
       उसने सारा सामान उठाकर अलमारी में सलीके से रख दिया और दोनों अंगूठियों को अपनी अलमारी के लॉकर में रख कर उसे लॉक कर दिया।।

   कपड़े बदल कर ,हाथ मुंह धोकर अपने बेड पर बैठ कर उसने एक बार फिर राजा को फोन मिलाया,, राजा का फोन नहीं लगा!!

**************

इधर टैक्सी में बैठने के बाद राजा ने तुरंत युवराज भैया को फोन लगाया।।
        भैया ने जो कुछ भी उसे बताया उसके बाद उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।।

********
 
       प्रिंस इधर कुछ समय से जमीन की दलाली का काम  कर रहा था।। इसी सिलसिले में अक्सर उसका कई तरह के लोगों से मिलना जुलना हुआ करता था शहर में जमीन का कारोबार धीरे-धीरे बहुत ज्यादा पांव पसार चुका था। यह काम देखने में जितना सीधा साधा था अंदर से उतना ही काला था जमीन माफिया एक तरह से पूरे शहर को अपने अंदर समेट चुका था।।
     हर नए व्यक्ति को यही लगता की भूमि क्रय विक्रय करने वाले अपना स्वतंत्र कारोबार कर रहे हैं ऐसे एकाध नहीं कई बिल्डर कई ठेकेदार शहर में अपना अपना ऑफिस डाले पड़े

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थे।।
       प्रिंस के रिश्ते के मामा भी इसी तरह जमीन की ठेकेदारी का काम किया करते थे उन्हीं की संगत में प्रिंस ने इस काम को शुरू किया था।। शुरू शुरू में उसे यह काम बहुत आसान लगा,, कोई भी अच्छी जमीन देख कर उसके लिए ग्राहक जुगाड़ना और फिर जमीन के मालिक से ग्राहक की अच्छी डील करवा कर जो बीच में फायदा मिलता उसका पूरा पूरा लाभ उठाना।।
        इस काम में मेहनत तो जरूर थी लेकिन पैसा भी उतना ही था,, दूसरा शिक्षा दीक्षा और डिग्री कि इस काम को करने के लिए कोई आवश्यकता नहीं थी ।इसलिए भी प्रिंस को यह काम बहुत भा गया था
शुरू में जितने उत्साह से वह इस काम से जुड़ा था उतने ही उत्साह से वह आगे बढ़ता जा रहा था।।
     प्रिंस के उत्साह को हवा देने में मामा जी पूरी तरह आगे थे हालांकि  मामा जी को भी इस व्यवसाय से जुड़ी बड़ी कठिनाइयों का उतना पता नहीं था ,,पर फिर भी इतना समझते थे कि तालाब में रहते हुए मगरमच्छों से बैर नहीं किया जा सकता।। इसलिए वह अपने ऊपर काम कर रहे हैं भूमि ठेकेदारों को गाहे-बगाहे तोहफे के रूप में कुछ ना कुछ भेंट चढ़ाते रहते थे और खुश रखते थे।।
        राजा नौकरी लगने के बाद से अपने बैंक में व्यस्त था इसलिए प्रिंस के कामों का लेखा-जोखा उसे भी कुछ अधिक मालूम नहीं था।।। इधर अचानक एक दिन मामा जी ने प्रिंस को एक जमीन का टुकड़ा दिखाया जो एक किसी पुरानी बनी कॉलोनी के बीचों-बीच स्थित था,, उसके आजू-बाजू दो घर थे और वह जमीन का टुकड़ा लगभग 40- 50 साल से अनाथ की तरह पड़ा हुआ था।।
      पटवारी कार्यालय से लेकर जिन जिन कार्यालयों में जो जो जानकारियां मिल सकती थी प्रिंस ने उस जमीन के बारे में सारी जानकारियां निकलवाई , और उस जमीन का कोई भी अधिपति पकड़ में नहीं आया इस प्रकार उस बेनामी जमीन को प्रिंस ने अपने मामा के कहने पर एक फर्जी नाम से रजिस्टर करवा कर उस नाम को उस जमीन का मालिक साबित कर दिया।।
         और फिर उस मालिक से खुद जमीन खरीदने के फर्जी पेपर तैयार करके उस जमीन को अच्छी ऊंची कीमतों पर किसी दूसरे व्यक्ति के हाथों बेच दिया।।
      इस पूरे वाकये में राजा का नाम इस प्रकार दाखिल हुआ की जमीन को पहले मालिक से खरीदने और बाद में दूसरे व्यक्ति को बेचने के लिए जहां पर गवाहों की जरूरत थी वहां पर राजा ने भी दस्तखत किए थे ,,हालांकि कुछ गलती राजा की भी थी क्योंकि उसने दस्तखत करते समय ना तो पेपर की तफ्तीश की और ना ही इस फर्जीवाड़े के बारे में कोई भी पूछताछ की,  उसे बातों बातों में प्रिंस ने बस यह कहा कि यह उसके मामा की एक पुरानी जमीन थी जिसे वह उनसे खरीद कर किसी दूसरे को बेच रहा है।। बात प्रिंस की थी इसलिए राजा ने कोई अविश्वास नहीं किया और अपना सील साइन कर दिया।।
     प्रिंस को भी अपने मामा जी के ऊपर पूरा भरोसा था उसे लगा कि यह वाकई  चारों तरफ की नाप जोख में छूटी हुई बची जमीन का टुकड़ा है जिसका असल में कोई भी स्वामी नहीं है और इसीलिए उसने भी राजा को कुछ ज्यादा बताने की जरूरत नहीं समझी और  उससे दस्तखत ले लिए।।

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      राजा इन सभी बातों से अनजान था अपनी नौकरी में व्यस्त राजा को जब पुणे एक टीम के साथ भेजे जाने का प्रस्ताव आया तो वह उस टीम का हिस्सा बनने के लिए पुणे के लिए निकल गया इसी बीच में एक दुर्घटना घट गई।।

       राजा के मोहल्ले के दूसरी तरफ एक और मोहल्ला था जहां निरमा रहा करती थी वहां पर चौक की पंचायत को पूरा करने के लिए जो पंचों की सभा थी गुड्डा उनका सरदार था।। गुड्डा सालों से मन ही मन राजा से जला करता था ।।बहुत पहले जब निरमा और प्रेम के बारे में पता चला था तब गुड्डा अपनी फौज के साथ जिम चला आया था राजा से लड़ने… और राजा के हाथों एक झापड़ खा कर ही उसे सौ आसमानो के दर्शन हो गए थे और उसके बाद से ही उसने मन ही मन कसम खा ली थी कि कैसे भी हो वो राजा की हस्ती मिटा कर रहेगा।।

    समय बीतता गया राजा की मित्र मंडली भी कहीं ना कहीं किसी न किसी काम में व्यस्त हो गई,, राजा खुद अपनी पढ़ाई लिखाई के बाद बैंक में व्यस्त हो गया।।।
          गुड्डा और उसकी मित्र मंडली भू माफिया के साथ मिलकर काम करने लग गए गुड्डा खुद भी जमीन की ठेकेदारी के काम और शराब के ठेके से जुड़ गया अपने सारे व्यसनों को पूरा करते हुए भी उसने अपने मन से राजा के प्रति बैर को मिटने नहीं दिया….. बल्कि पाल पोस कर अपने मन में पलती दुश्मनी को उसने तिल से ताड़ बना लिया।।।।

      प्रिंस की बेगानी जमीन की खरीद-फरोख्त वाली बात नहीं खुलती अगर प्रिंस खुद पी पिलाकर गफलत में किसी दिन अनजाने में गुड्डा के किसी दोस्त से सब कुछ बोल ना बैठता,, पर कहते हैं ना विनाश काले विपरीत बुद्धि प्रिंस के साथ भी वैसा ही कुछ हुआ।।
        काम के अतिरिक्त दबाव और मिलने वाली अति अतिरिक्त पैसों की गर्मी से प्रिंस ने  अपने व्यक्तित्व को भुला दिया।। किसी शाम गुड्डा के किसी चेले के साथ ठेके के बाहर पी  पिलाकर उसने वह सब बातें भी बक दी जो उसे कभी नहीं बोलनी चाहिए थी।।

     गुड्डा शुरू से ऐसे ही किसी मौके के इंतजार में था गुड्डा के चेले ने जैसे ही गुड्डा को सारी बातें बताई  वह खुशी से झूम उठा इस सारे कारनामे में राजा का हस्ताक्षर होना ही बहुत था।। रिजर्व बैंक के पदाधिकारी का इतना गैरज़िम्मेदाराना व्यवहार सहज में क्षम्य नही था।।
 
     गुड्डा ने उस जमीन की खरीद-फरोख्त से संबंधित दस्तावेजों के खिलाफ पटवारी कार्यालय में शिकायत दर्ज कर दी….
        और यह शिकायत मुख्य रूप से की गई थी रिजर्व बैंक के ऑफिसर राजकुमार अवस्थी के खिलाफ।।
       पटवारी कार्यालय में रोज-रोज के मिलने जुलने के कारण प्रिंस के कई गुर्गे भी थे जिन्होंने प्रिंस को इस बाबत तुरंत ही सूचना दे दी प्रिंस ने जैसे ही यह सब सुना अपना सिर धुन के रह गया ।
….वह तुरंत भागा भागा युवराज भैया के पास गया और उन्हें सब कुछ बता दिया युवराज ने अपने व्यापारिक और छुटपुट नेताओं से संधि संबंधों का फायदा उठाते हुए पटवारी कार्यालय पर दबाव डलवा कर कुछ समय के लिये उस शिकायत की फाइल को दबवा दिया,लेकिन भविश्य में इस समस्या का समाधान क्या हो सकता है इससे आशन्कित प्रिंस रातों रात अपने घर से गायब हो गया।

     दो दिन तक भी जब प्रिंस घर नही पहुंचा तब उसकी खोज मचनी शुरु हुई,, राजा तो तब वहां था नहीं, प्रेम भागा भागा युवराज भैया के पास ही पहुंचा और प्रिंस के गायब होने की खबर दी युवराज तुरंत प्रेम के लिए प्रिंस को ढूंढने निकल पड़ा।।
     
        युवराज का भी असल काम तो ब्याज का ही धंधा था जिसकी वसूली के लिये भी उसके पास कुछ दो तीन लोग अलग से मौजूद थे,, यह ऐसे लोग थे जिन्हें पूरे शहर के चप्पे-चप्पे की खबर थी युवराज को इस चीज का फायदा मिला दो से तीन फोन करते में ही उसे प्रिंस कहां है इस बात की खबर मिल गई वह प्रेम को लिए शहर से बाहर की पुरानी सी खंडहर हवेली में पहुंच गया ।।प्रिंस लगभग 2 दिन से वहां बिना खाए पिए छुपा बैठा था उसकी यह हालत देख युवराज को उस पर तरस आ गया।।

     युवराज को शुरू से ही प्रिंस की कोई गलती नहीं लगी थी लेकिन अपने ही मन में सोच सोच कर प्रिंस ने स्वयं को गुनाहगार मान लिया था उसे यह लगने लग गया था कि उसके कारण ही राजा के बने बनाए कैरियर पर धब्बा लग सकता है ।।
    अपने ही मन से परेशान अपने आप से दुखी प्रिंस अपने आप को सजा दे रहा था युवराज और प्रेम को एक साथ आते देख उसे लगा यह लोग उसे पकड़कर मारेंगे पीटेंगे डरा धमकाएन्गे, और फिर पुलिस के हवाले कर देंगे…. इन सब से बचने के लिए वह वहां से उठकर भागने लगा युवराज ने उसे आवाज दी और लगातार समझाने की कोशिश की कि वह उसे माफ कर चुका है और वह इस प्रकरण में प्रिंस कि कहीं पर भी गलती महसूस नहीं करता,, और भागकर आखिरकार प्रेम और युवराज ने प्रिंस को पकड़ लिया रोते-रोते प्रिंस ने युवराज के पैर पकड़ लिये और माफी मांगने लगा।।

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    युवराज ने अपने संबंधों का हवाला देते हुए प्रिंस को किसी से भी ना घबराने की सलाह दी और घर वापस लौट जाने को कहा।। बहुत देर बाद रो धोकर अपने मन का बोझ उतारने के बाद प्रिंस भी घर वापसी के लिए तैयार हो गया ।।प्रिंस प्रेम और युवराज वहां से निकले ही थे कि गुड्डा अपने कुछ गुंडों के साथ उधर से निकला और  युवराज और प्रिंस प्रेम को देखकर वहीं रुक गया , युवराज को उसने वहीं खड़े-खड़े धमकी दे डाली __

” कान खोल कर सुन लो प्रिंस जो कांड किए हो ना तुम बहुते बढ़िया किए हो ,,,अब इसके बाद तुम्हारे राजा भैया को तुम्हारे युवराज भैया क्या ब्रह्मा भी नहीं बचा सकते अभी भले  केस को दबा दिया तो क्या हुआ,, क्या हम बहरे गूंगे हैं जो कुछ ना कर सकेंगे ।।2 दिन के अंदर अंदर उ केस हम फिर नहीं खुलवा दिए तो हमारा नाम गुड्डा नहीं,, समझे “”

  प्रिंस शुरू से ही कमजोर दिल था उसने हमेशा से ही अपना सहारा राजा में ही ढूंढा था।। उसकी हर कमजोरी को राजा ने संबल बनकर सहारा दिया था।। और आज पहली बार उसके कारण उसके प्रिय नायक के व्यक्तित्व पर करारी चोट लग रही थी प्रिंस  ये सब सह नहीं पाया ,उसने गुड्डा की शर्ट में छिपा कर रखी कटार छीनी और उस से अपनी गरदन की नस काट ली।।

     यह सब इतना अकस्मात हुआ कि किसी को कुछ सोचने का अवसर ही नहीं मिला गुड्डा और उसके साथी यह सब देखते ही वहां से अपनी-अपनी गाड़ियों में भाग खड़े हुए।। शहर से इतनी बाहर युवराज और प्रेम अकेले प्रिंस को तड़पता देख परेशान हो गए,, उन्होंने उसे तुरंत युवराज की गाड़ी में लादा और अस्पताल की ओर भाग चले प्राइवेट अस्पताल में उसे भर्ती करने से मना करते हुए तुरंत ही मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।। वहां से युवराज और प्रेम उसे ले एक  सरकारी हॉस्पिटल की तरफ भाग चलें, सरकारी हॉस्पिटल में डॉक्टर सर्जन सब ने तुरंत ही प्रिंस को भर्ती कर लिया और गहन शल्य चिकित्सा कक्ष में उसकी शल्य चिकित्सा प्रारंभ कर दी,, लेकिन बाहर आकर यह भी कह दिया की स्थिति गम्भीर है इसलिए अभी कुछ भी कह पाना मुश्किल है ।।प्रिंस के घर पर उस वक्त कोई नही था,सभी किसी शादी में सम्मिलित होने गांव गये हुए थे इसलिए प्रेम ने युवराज भैया से गुजारिश की कि अभी कुछ समय तक उसके घर पर कुछ नहीं कहा जाए ।।।2 घंटे की मशक्कत के बाद डॉक्टर बाहर आए और कहा कि खून बहना तो बंद हो गया है, ऑपरेशन भी सफलतापूर्वक हो गया है लेकिन फिर भी एक बार अगर दिल्ली एम्स में  दिखा दिया जाए तो बेहतर होगा क्योंकि अभी भी,  कभी अचानक  आंतरिक रक्तस्त्राव शुरू हो सकता है जो मरीज के लिए खतरनाक साबित हो सकता है यहां पर सुविधाओं का अभाव होने से इसे दिल्ली एम्स में दिखाना बेहतर होगा।। अगले 72 घंटे बहुत ही क्रिटिकल है लेकिन इन्हीं  घंटों में उसका एम्स पहुंचना भी जरूरी था युवराज ने बिना समय गंवाये प्रेम और एक डॉक्टर को साथ लिये दिल्ली की ओर प्रस्थान कर दिया ।।

      सब कुछ इतना आनन-फानन हुआ कि युवराज ने अपने घर पर भी किसी को कुछ भी नहीं बताया सबको बस यह कह कर कि दिल्ली कुछ आवश्यक कार्य से जा रहा हूं ,,पैसे एटीएम और चेक बुक लेकर प्रेम के साथ दिल्ली के लिए निकल गया दिल्ली पहुंचने के बाद उसने राजा को फोन किया।।

    युवराज को यह मालूम था कि राजा का पुणे में 5 दिन का काम है और छठवें दिन वह मुंबई से रात की फ्लाइट लेने वाला है उसी समय पर युवराज ने राजा को फोन किया और यह कहा कि कानपुर की जगह वह दिल्ली चला आये।। फोन पर प्रिंस की हालत बताना युवराज को सही नहीं लगा इसलिए उसने राजा से  अधिक कुछ भी नहीं कहा।।

     पुणे से टैक्सी में बैठने के बाद राजा ने जब युवराज को फोन किया और उससे यह सारी बातें और प्रिंस की गंभीर अवस्था के बारे में पता चला तो राजा के पैरों तले जमीन खिसक गई।।।

    राजा ने प्रिंस को सदैव एक छोटे भाई की तरह ही प्रेम किया था।। अभी भी उसे अपना नाम जमीन में फंसने से कहीं ज्यादा चिंता प्रिंस के स्वास्थ्य को लेकर थी ,भगवान से बार-बार यही मनाते हुए कि किसी भी तरह प्रिंस की जान बच जाये वो मुंबई की ओर कूच कर गया ।।
     युवराज भैया से बात करने के बाद थोड़ी देर तक राजा को किसी बात का होश ही नही रहा,,उसे पता ही नही चला की भैया से बातें करते कब वो रोने लग गया।।
      बचपन से लेकर अभी तक की सारी बातें राजा की आंखों के सामने से घूम गई।।
     प्रिंस का हर बात में राजा की तरफदारी करना, हमेशा उस का साथ देना, उसके हर कष्ट से स्वयं  दुखी होना,, राजा की आंखे भिगो गया।।

     बचपन में भी कभी जब राजा अपने पिता के कोप का भाजन बनता था तो अनिवार्य दंड स्वरूप मिलने वाले चप्पलों के प्रसाद में राजा के साथ प्रिंस का भी बराबर का हिस्सा होता था।।
    प्रिंस का निस्वार्थ अबाध प्रेम राजा की आंखों से अविरल बहता चला गया।।

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    सारी बातें सोचते सोचते उसे प्रिंस की उन बातों की भी याद आने लगी जब वह जिम में आने वाली बांसुरी का पूरा पूरा सहयोग किया करता था।। असल में तो प्रिंस ही था जिसने शुरू से बांसुरी को सम्मान की दृष्टि से देखा था…. राजा तो बहुत बाद में बांसुरी का मित्र बना पर जिम में आने के बाद बांसुरी और प्रिंस की दोस्ती  ही पहले हुई थी ।।
    यह सब सोचते ही अचानक उसे बांसुरी की याद आ गई उसे याद आया कि उसने टैक्सी में बैठने के बाद से बांसुरी से बात ही नहीं की,, ऐसा ध्यान आते ही उसने सीट में पड़े अपने मोबाइल की तरफ देखा और बांसुरी को फोन लगाने के लिए मोबाइल उठा लिया।।

      सुबह से घूमते फिरते इधर-उधर उधर डोलते उसे फोन को चार्ज करना याद ही नहीं रहा था।। फोन पूरी तरह से डिस्चार्ज होकर बंद पड़ा था ,,उसे बैटरी बैंक का ध्यान आया अपने बैग में उसने बैटरी बैंक को ढूंढा पर वह मिला नहीं ,,उसे समझ आ गया एक रात पहले उसके होटल के कमरे में ही चार्जिंग प्लग में लगा पड़ा बैटरी बैंक छूट गया है।।।

    टैक्सी वाले से फोन मांग कर बांसुरी को फोन करना उसे सही नहीं लगा ।।अब तो एक ही उपाय था मुंबई के एयरपोर्ट में पहुंचने के बाद ही फोन को चार्ज किया जा सकता था,, और फोन के चार्ज होने के बाद ही बांसुरी से बात की जा सकती थी।।
      फिलहाल और कोई उपाय ना देख राजा ने सीट में पीछे सिर टिकाया  और आंखें बंद करके प्रिंस को याद करने लगा।

  क्रमशः

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aparna….

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शादी.कॉम- 28

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  शादी डॉट कॉम-28

     खाना खा कर सब एक साथ बैठे गप्पे मारते रहे ,इसी बीच सिद्धार्थ की माँ सबके लिये दक्षिण भारतीय फिल्टर कॉफ़ी बना कर ले आईं ।
   स्टील की छोटी छोटी ग्लास में सबको सर्व करती वो जब राजा के सामने पहुंची तब बांसुरी अचानक कह उठी__

बांसुरी– आँटी ये कॉफ़ी नही पीते।।

   बांसुरी की बात सुन उन्होनें मुस्कुरा कर कॉफ़ी का गिलास राजा के हाथ मे थमा दिया __” ये कोई ऐसा वैसा कॉफ़ी नही है बेटा ये हमारा साऊथ का स्पेशल फिल्टर कॉफ़ी,,एक बार पी कर तो देखो,,अमृत है अमृत ।सिड के नाना (पिता) तो डेली सुबह एक बड़ा गिलास भर के पीते थे।।

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बांसुरी– अंकल को क्या हुआ था आंटी  हमारा मतलब क्या उनकी तबीयत खराब थी।।

  बांसुरी की बात सुन सिद्धार्थ की मां मुस्कुराते हुए बांसुरी की तरफ देखने लगी उसे देखते हुए उन्होंने ना में सिर हिलाते हुए कहा
      “ओह नो नो  उनका तबीयत ठीक है वह दिल्ली में अपना प्रैक्टिस कर रहे हैं वकालत की।।
  एक्चुली हम सेपरेट हो गए।। सिड के होने के बाद मुझे और सिड  को उनकी जितनी जरूरत थी वह उतना समय हम दोनों को नहीं दे पाते थे उनका सारा समय उनके केस और अदालत ही ले जाते थे घर पर आने के बाद भी सारा समय केस से जुड़ी फाइलें पढ़ना उस पर काम करना यही उनका काम था।।
     मैं अकेले घर और बच्चे को संभालते हुए फ्रस्ट्रेट होने लगी थी इसीलिए हमारे बीच झगड़े बढ़ने लगे और लड़ झगड़ के साथ रहने से हमने अलग हो जाना ज्यादा सही समझा।। वह वहां रहते हैं ,, मंथ में कभी एक दो बार हमसे मिलने आते हैं अभी भी लीगली हम हस्बैंड वाइफ ही हैं।।।

    उनकी बात सुन बांसुरी झेंप के रह गई क्योंकि अब तक वो यह सोचा करती थी कि सिद्धार्थ के पिता किसी रोग या बीमारी के कारण चल बसे हैं।। आज सिद्धार्थ की मां से यह सच्चाई सुनकर उसे अपने उतावले पन पर शरम सी आ गई इस शर्मिंदगी से बचने के लिए उसने घड़ी की तरफ देखा और सिद्धार्थ की मां से घर वापस जाने की गुजारिश कर दी।।

    शाम के 5:00 बज रहे थे राजा बांसुरी और माला सिद्धार्थ से विदा लेकर उसके घर से निकल पड़े घर से निकलने के पहले बांसुरी ने जैसे ही सिद्धार्थ की मां के पैर छूने चाहे उसी समय राजा भी उनके पैर छूने को झुका दोनों को एक साथ ही अपने दोनों हाथ से आशीर्वाद देते हुए सिद्धार्थ की मां ने कहा “हमेशा खुश रहो”

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    वहां से निकलने के बाद माला का विचार फ्लैट पर वापस जाने का था लेकिन बांसुरी ने उसे भी अपने साथ ले लिया तीनो के तीनो वहां से कैब बुक करके फिनिक्स मॉल के लिए निकल गए।

     मॉल में एक जगह से दूसरी जगह घूमते ,हर दुकान के चक्कर लगाते  और गप्पे लड़ाते तीनों घूमते रहे माला ने उन दोनों से कहा कि “जब हम मॉल आए ही हैं तो तुम दोनों अपनी शादी की शॉपिंग भी क्यों नहीं कर लेते,, माला का यह आइडिया राजा को भी जँच  गया और दोनों के दोनों मान्यवर और मोहि में घुस गए।।
       हालांकि वहां अंदर जाने से पहले बांसुरी ने एक बार राजा से कहा भी कि तारीख तय होने के पहले हमारे यहां कोई भी तैयारी नहीं की जाती तब राजा ने हंसकर कहा__” शादी तो हम दोनों की तय हो चुकी है एकदम पक्की ही समझो !!और तारीख 2 दिन बाद निकलने ही वाली है तो शॉपिंग करने में कोई बुराई तो नहीं ।।”

   राजा की बात पर बांसुरी मुस्कुरा कर रह गई ।।

   राजा के बहुत इसरार करने के बाद भी बांसुरी ने शादी का जोड़ा नहीं खरीदा और ना ही राजा को शेरवानी लेने दी,, पर उसकी जिद मानकर तीन-चार भारी भरकम साड़ियां और राजा के लिए कुछ कपड़े जरूर खरीद लिए।। उसने एक बहुत सुंदर गुलाबी सी साड़ी माला के लिए भी खरीद ली।।

     इतना सब दिलवा कर भी राजा का तो जैसे मन ही नहीं मान रहा था यहां से निकल कर जूते चप्पलों की दुकान में वह बांसुरी को लिए घुस गया।।
     कई जोड़े फुटवियर्स दिलवा कर भी उसे चैन नहीं मिला।।
      एक-एक कर ब्राइडल खरीदारी की सभी दुकानों पर राजा बारी-बारी से बांसुरी को ले जाता गया और शॉपिंग करवाता गया।।

   हर एक साड़ी से मैचिंग सैंडल बालों में लगाने का क्लच, चूड़ियां ,कंगन ,झुमके और भी बहुत कुछ।।

    और सबसे आखिर में वह बांसुरी को लिए गहनों की सबसे बड़ी दुकान में घुस गया बांसुरी के लाख मना करने पर भी उसने एक बहुत सुंदर  जड़ाऊ कंगन खरीद लिया………….और तभी उसकी नज़र माणिक की एक अँगूठी पर चली गयी,,छोटे छोटे माणिको से सजा एक मोर अँगूठी मे बना था,राजा ने उसे भी लपक के बांसुरी के लिये खरीद लिया।।
      बांसुरी ने भी एक सॉलिटियर राजा के लिये खरीद लिया।।

     राजा तो वो अँगूठी वहीं बांसुरी को पहना देना चाहता था,पर  अपने राशिरत्न को बिना सिद्ध किये पहनने को बांसुरी का मन नही माना।।
    राजा ने अपने लिये बांसुरी द्वारा ली गयी अंगूठी भी उसके ही सामान में रखवा दी।।

राजा –बांसुरी अब घूम घूम के बहुत थक गये हैं,कहीं बैठ के कुछ खा लिया जाये।।

माला — गुड आइडिया!! वैसे भी तुम दोनों तो अपनी शादी की तैयारी कर रहे और मेरे पैर बिना मतलब को कबड्डी कबड्डी खेल रहे हैं,यहाँ घुसो वहाँ निकलो बस।।

  माला की बात पर दोनो हंसने लगे।।तीनो वही नीचे बने एक कैफे में चले गये,उसी मे एक तरफ म्युज़िकल नाइट चल रही थी,जिसमें कोई भी जाकर गाना गा सकता था,,एक एक कर वहाँ बैठे लोग उठ के जाते और कुछ भी आड़ा टेढा गा कर आ जाते,,आखिर इन सब को देखने के बाद बांसुरी ने राजा से भी गाना गाने की गुजारिश कर ही दी__

बांसुरी– जाओ ना राजा,प्लीज़ गाओ ना।।देखो कोई भी मख्खीमार यहाँ गा ले रहा है तुम तो सच में बहुत ही अच्छा गाते हो,,जाओ ना ।।
     बांसुरी की बात पर मुस्कुराते हुए राजा उस तरफ बढ गया।।

      चाहे बना दो,चाहे मिटा दो,
      मर भी गये तो देंगे दुआयें ।
      उड़ उड़ के कहेगी खाक सनम
      ये दर्द ए मुहब्बत सहने दो
      मुझे तुमसे मुहब्बत हो गयी है
      मुझे पलकों की छाँव में रहने दो
      एहसान तेरा होगा मुझ पर
      दिल चाहता है जो कहने दो…

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राजा के गाने को खतम करते ही लोगों की तालियाँ गूँज उठी पर बांसुरी का मन जाने कैसा तो हो गया__

बांसुरी– ये मरने जीने वाला गाने की क्या ज़रूरत थी,कुछ और ढंग का नही गा सकते थे।।

राजा– अरे बुद्धू गाने मे प्यार छिपा है वो नज़र नही आया ,बस एक शब्द पकड़ के बैठ जाओगी!  वहमी औरत!! अच्छा तुम्हारे लिये कुछ और भी गा देते हैं,, रुको।।

          सांसो की सरगम ,धड़कन की वीणा
          सपनों की गीतांजली तू
          मन की गली में महके जो हरदम
          ऐसी जुही की कलि तू
          छोटा सफर हो लम्बा सफर हो
          सूनी डगर हो या मेला।।
          याद तू आये मन  हो जाये
          भीड़ के बीच अकेला
         बादल बिजली चंदन पानी जैसा अपना प्यार
         लेना होगा जनम हमें कई कई बार…..
          इतना मदिर इतना मधुर तेरा मेरा प्यार..

************
   अलग अलग बैग्स में ढ़ेर सारा सामान समेटे तीनों वहाँ से निकल गये।।
    मॉल से बाहर निकलते ही माला फ्लैट में जाने के लिये कैब बुक करने लगी__

माला– गाईस मैं बहुत थक गयी हूँ , तुम दोनों का मन तो भरा नहीं होगा ……तो ऐसा करो तुम दोनों साथ साथ घूमो मैं यह सारा सामान लेकर फ्लैट पर जाती हूं, जब तुम लोग घूम कर थक जाओगे तब फ्लैट पर आ जाना।।

   राजा और बांसुरी माला की बात सुनकर मुस्कुराने लगे राजा ने माला को मुस्कुरा कर हामी भर दी।।
    उन दोनों को वहीं छोड़ माला सारा सामान समेटे कैब लेकर फ्लैट के लिए निकल गई राजा और बांसुरी एक बार फिर पिछली रात की तरह हाथों में हाथ डाले सड़क के किनारे किनारे चलते रहे  …..     उनके पास दुनिया जहान की बातें थी जो इतनी जल्दी खत्म नहीं होने वाली थी ,,अभी वह दोनों चल ही रहे थे कि बाजू से दो बाइक पर तीन लड़के गुजरे उन्होंने आगे जाकर बाइक घुमाकर राजा और बांसुरी के सामने लाकर रोक दी।

   उनमें से एक लड़के ने कड़क के उनसे कहा जो जो सामान तुम्हारे पास है जल्दी से निकालो,, तब तक में बाकी दोनों लड़के भी बाइक से उतर के उनके पास चले आए ।। एक तरह से राजा और बांसुरी को तीनों तरफ से उन तीनों मुस्टंडो  ने घेर लिया राजा ने चुपचाप अपने जेब में हाथ डाला वॉलेट निकाला और उन लड़कों के हाथ में रख दिया।
         उनमें से एक लड़के ने बांसुरी की तरफ देखा और उससे कहा
          “तुझे समझाने के लिए क्या अंग्रेजी में बोले जो जो है पर्स में निकाल गले की चेन कानों के टॉप्स अंगूठी सब कुछ हमारे हवाले कर दे।”
 
     ” भाई तमीज से भी तो बोल सकते हो हम तो वैसे ही सब कुछ तुम्हारे हवाले कर रहे हैं बांसुरी दे दो यह जो मांग रहे हैं ,”।।
      उसकी बात सुन राजा ने बांसुरी की तरफ देख कर कहा।
   बांसुरी ने राजा की तरफ देखा राजा ने आंखें झुका के उसे वैसा ही करने के लिए कहा बांसुरी  ने एक-एक कर अपने कान के टॉप्स अंगूठी यहां तक की अपनी घड़ी भी उतार कर राजा के हाथ में  रख दी।।

   राजा ने सारा का सारा सामान उनमें से एक लड़के के हवाले कर दिया सामान लेते समय उस लड़के ने  राजा का हाथ पकड़ लिया __
               “वाह बच्चू सबसे कीमती सामान छुपा ले गए यह घड़ी भी हमारे हवाले करो जो तुमने अपने हाथ में बांध रखी है।”

   राजा ने अपनी घड़ी की तरफ देखा और बालों को झटका देकर घड़ी निकालने लगा पर बांसुरी ने राजा का हाथ पकड़ कर रोक दिया __
          “नहीं राजा यह घड़ी तुम नहीं दोगे”

” अरे ओ मैडम बैंडिट क्वीन जब राजा जी खुद अपना खजाना लुटाने को तैयार हैं तो आपको मिर्ची काहे लग रही है जब इतना कुछ दे दिया तो एक घड़ी भी दे दो।”

   उनमें से एक बदमाश ने बांसुरी से कहा।

” राजा हम कह रहे हैं ना तुम किसी भी कीमत पर इस घड़ी को नहीं दोगे। और हां हम हैं बैंडिट क्वीन बोलो क्या करोगे दे तो दिया इतना कुछ,, काफी नहीं है क्या ??चुपचाप लो और रफा दफा हो जाओ वरना तुम जानते नहीं कि हम कौन हैं??

  बांसुरी की बात पर उनमें से एक बदमाश आगे बढ़कर आ गया और डरने के हावभाव  दिखाते हुए हाथ जोड़कर बांसुरी से कहने लगा__
      ” मैं तो डर गया मैडम!! बहुत डर गया अब क्या करूं भाग जाऊं? या तुम्हें भगा के ले जाऊं??

   जब तक वह अपनी बात पूरी करता एक जोर का झन्नाटेदार  तमाचा उसके गाल पर पड़ा ।। वो जब तक अपने गाल को सहलाता तब तक में दूसरे बदमाश के पेट पर एक जोर  का घूंसा पड़ा और तीसरे बदमाश के पैर में बांसुरी की हील वाली सैंडल।।
       
       अभी तीनों लड़खड़ा कर उठ पाते की बांसुरी ने उनके हाथ से जमीन पर गिरा अपना पर्स उठाया और उसमें से एक स्प्रे निकालकर तीनों की आंखों पर जोर से मार दिया तीनों अपनी-अपनी आंखों को मलते जैसे तैसे उठे और बाकी का  सारा का सारा सामान वहां पर पटक कर अपनी अपनी बाइक पर सवार होकर भाग निकले।।
       बांसुरी ने मुड़कर राजा को देखा राजा हाथ बांधे खड़े बांसुरी को मुस्कुराते हुए देख रहा था।।

बांसुरी– तुमने उन बदमाशों को मारा क्यों नहीं ऐसे तो खुद कानपुर  के ईतने बड़े गुंडे हो,, यहां पुणे में आकर सारी हेकड़ी निकल गई।।

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राजा– हम झगड़ा करना ही नहीं चाहते थे बन्सी इसीलिए।।
     हम खुश थे,तुम्हारे साथ…….. इसीलिए लगा वो तीनों भी खुश हो लें ।।अरे हमारा सामान ले जाकर हमें कौन सा गरीब कर जाएंगे पर उन गरीबों का ही थोड़ा भला हो जाता यह सोचकर हम चुप रहे।। पर तुम्हें अचानक क्या हो गया?? इस घड़ी के लिए इतना काहे इमोशनल हो गई??
     और इतना सारा फाइटिंग वाइटिंग कहां से सीख गई??

बांसुरी– काहे तुम भूल गए क्या ये घड़ी तुम्हें कब मिला था?? यह घड़ी तुम्हारे बाबूजी लेकर आए थे जिस साल तुम 12वीं पास किए थे,,, याद है, तुम जिम में कितने खुशी के साथ आए थे ये घड़ी हमें दिखाने।।
       हमें याद है जब तुम हमें ये घड़ी दिखा रहे थे तुम्हारी आंखों में आंसू आ गए थे हमको पता है राजा तुमको घड़ियों का कलेक्शन करने का शौक है और तुम्हारे पास नहीं नहीं में  26 घड़ियां तो होंगी ही,, लेकिन इस घड़ी की कीमत तुम्हारे लिए क्या है यह हम से ज्यादा कौन समझ सकता है??

राजा– क्या बात है!! हमारी बंसी को तो हम से जुड़ी सारी बातें याद है।

बांसुरी– भूला तो उन्हें जाता है जो कोई याद हो!! तुम तो हमारे अंदर ही बसे हुए हो राजा हमसे अलग थोड़े ही हो कि तुम्हें भूल जाएं हमें तो अपने आप को देख कर भी तुम्हारी ही याद आती थी।।।
     और यह फाइटिंग भी तुम्हारे ही चक्कर में सब सीखे।। जब से पुणे आए जिम जाना 1 दिन भी नहीं छोड़ा,  रोज नई कसरत करते थे….. कभी किक बॉक्सिंग कभी वजन उठाना,, और यही सब की प्रैक्टिस करते करते हमारा हाथ साफ हो गया।।। हालांकि आज तक किसी गुंडे मवाली के ऊपर अपना हाथ साफ किया नहीं,, लेकिन आज तुम्हारी इस घड़ी के लिए हमारे अंदर की पुरानी वाली लड़ाकू बांसुरी बाहर निकल आई।।

राजा बांसुरी की बात सुनकर जोर जोर से हंसने लगा उसे देख बांसुरी भी खिलखिलाने लगी दोनों हंसते खिलखिलाते वापस आगे बढ़ गये।।

   दोनों ने कुछ आगे पहुंच कर टैक्सी ली और बांसुरी के फ्लैट की ओर निकल गये,थोड़ा आगे ही बढ़े थे कि राजा का फ़ोन घनघना उठा__

राजा– हेलो कौन??

” राजा हम बोल रहे हैं युवराज!! कहाँ हो तुम?? बॉम्बे पहुंच गये होगे ना?? अभी एक घन्टे बाद की तो तुम्हारी फ्लाईट होगी ना?”

युवराज की आवाज़ सुन राजा ने एक बार फिर फोन की स्क्रीन देखी,पर वहाँ भैया का नम्बर तो नही दिखा रहा था__

” भैय्या ये किसके नम्बर से बोल रहे हैं आप?”

” वो सब हम बाद में बताएंगे,पहले तुम बताओ बॉम्बे एयरपोर्ट मे हो ना।”

” नही भैया !! हम वो पुणे ही रुक गये थे ,असल मे कुछ काम आ गया था,दो दिन बाद यहाँ से निकलेंगे, हम आप को फ़ोन करने ही जा रहे थे कि आपका फोन आ गया।।”

” अरे ऐसे कैसे! ऐसा कौन ज़रूरी काम आ गया? खैर वो सब छोड़ो तुम अभी के अभी बॉम्बे पहुँचो और वहाँ से दिल्ली की फ्लाईट पकड़ कर चले आओ।।हम भी दिल्ली पहुंच गये हैं ।।

” भैया का  बात हो गयी,कुछ तो बताइये ।”

” बस इतना समझ लो,कुछ बहुते जरुरी काम है, अभी किसी को कुच्छो बोलने बतियाने का ज़रूरत नही है,तुरंत जहां हो वहाँ से गाड़ी लो और बाम्बे भागो।”

” पर भैया….”

” राजा समझो बात को ,तुरंत निकलो !अभी और कुछ नही बता पायेंगे ,,बॉम्बे निकलते ही इसी नम्बर पे हमे फोन कर लेना।”

    बांसुरी को भी भैया की कुछ कुछ आवाज़ आ तो रही थी लेकिन कुछ समझ नही आ रहा था,उसने राजा की तरफ देखा__” क्या हो गया।”

” पता नही बंसी !! पर भैया बोले हैं तो हमे अभी के अभी निकलना पड़ेगा,कुछ समझ नही आ रहा कि हुआ क्या है।।”

” सबकी तबीयत तो ठीक है ना??”

” पता नही बंसी पर भैया ने किसी से भी बात करने मना किया है अभी ,तो हम घर पे भी नही पूछ सकते,और तुम तो जानती हो बड़के भैय्या का आदेश हमारे लिये सबसे बड़ा है,तुमको तुम्हारे फ्लैट में उतार कर हमको बॉम्बे निकलना पड़ेगा बंसी ।”

” हमारा दिल बहुत घबरा रहा है राजा !! आज मत जाओ!!”

” अब नही रुक सकते बंसी ,,भैया का कहा किसी हाल मे नही टाल सकते।”

” पर राजा सुबह गणपति मन्दिर मे भी दर्शन नही हुआ ,फिर सोचे थे की परसो मुम्बई में सिद्धिविनायक के दर्शन कर लेंगे उसके बाद फ्लाईट पकड़ेंगे पर तुम अभी निकलोगे तो वो भी नही हो पायेगा।।”

” अरे यार !! तुम भी कहाँ की बात कहाँ जोड़ने लगती हो ।।सुनो निश्चिंत रहो,सिर्फ दर्शन ना कर पाने से भगवान हमसे गुस्सा होके अपने पास नही बुला लेंगे।”

” फिर बकवास शुरु कर दिये,,तुमको मना किये हैं ना राजा ऐसी मरने वरने की बात ना किया करो,,अच्छा सुनो मुम्बई पहुंचते तक पूरे रास्ते हमसे बात करते हुए जाना और जब फ्लाईट पकड़ लोगे तब भी बताना जब दिल्ली मे उतर जाओगे तब भी बताना, समझ गये।”

” हाँ समझ गये बंसी !! इत्ता परेशान ना हो !! तुम तो यार अभी से बिवियों जैसे जासूसी करने लगी।।”

” हाँ तो!! बस फेरे होने से ही बीवी बनूँगी क्या ,मन से तो पति मान ही लिया तुम्हें ।”

          तेरे संग संग राह सारी कट जानी ए
      मै ता तेरे नाल रहना, मान इन्ना मेरा कहना
     मेरी अखियो से होना कदी दूर ना
           तेरे बिन …….तेरे बिन …….
      तेरे बिन नई लगदा दिल मेरा ढोलना
       तेरे बिन नई लगदा दिल मेरा ढोलना
          सब छड जाये तू ना मेनू छोडना
      तेरे बिन नई लगदा दिल मेरा ढोलना….

   टैक्सी में बजते गाने के साथ ही बांसुरी की आंखों से आंसू भी बहते रहे,,उसके फ्लैट के नीचे उसे उतारने के बाद राजा ने उसे एक बार फिर अपनी  बाहों मे भर लिया,,,कुछ देर ऐसे ही रहने के बाद राजा ने बांसुरी को खुद से अलग किया और वापस टैक्सी में बैठने मुड ही रहा था कि बंसी ने उसका हाथ पकड़ उसे रोक लिया__” मत जाओ राजा!! अब तुमसे अलग होकर जी नही पायेंगे।”

   राजा ने अपने आंसू छिपाते हुए बाँसुरी का चेहरा अपने हाथों मे भर लिया__” हम जल्दी वापस आ जायेंगे बंसी ,हमारा रस्ता देखना।।”
     राजा ने एक बार बंसी के माथे को चूमा और वापस टैक्सी में बैठ गया।।

     बांसुरी तब तक वहाँ खड़ी रही,जब तक टैक्सी उसकी आंखों से ओझल नही हो गयी।।

क्रमशः

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aparna..


      

शादी.कॉम-27

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शादी डॉट कॉम-27

बांसुरी– नही ,पहले हमारी बात सुनो!! क्या कह रहे थे सिद्धार्थ सर ,मुझसे शादी करेंगे,हो चुकी तब तो।।तुमने कहा नही उनसे कि बांसुरी सिर्फ और सिर्फ राजा की है,और राजा से ही बांसुरी की शादी होगी।।

राजा– नही कहा!! लेकिन कल उनके घर जायेंगे ना तब कह देंगे,,अब खुश!!

बांसुरी– हाँ बहुत बहुत खुश ।।

राजा– तो फिर आओ इधर।

बांसुरी– कब से देख रहे हैं,घूम फिर के एक ही जगह तुम्हारा कांटा अटक जा रहा

राजा– इत्ते साल से इन्तजार भी तो किया है तुम्हारा बन्सी!!!
      मुस्कुराती हुई बांसुरी आगे बढ़ कर राजा के गले से लग गयी,और राजा उसके चेहरे पे झुकता चला गया।।

    आंखो में खो जाये आंखे
    बोले हाथों से हाथ
    बाहों में छिप कर
    सांसों से जैसे डोले रात
    उंगलियों को उंगलियों से
     मौसमों को शोखियों से बात करने दो
     चुप तुम रहो,चुप हम रहें
    खामोशी को खामोशी से
    जिंदगी को जिंदगी से बात करने दो।।

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बांसुरी में धीरे से राजा को अपने से अलग कर दिया

राजा– क्या हुआ बन्सी??

बाँसुरी — कुछ नही बस ऐसे ही।।
   अच्छा सुनो तुमने यहां पर कुछ भी नहीं देखा है ना 4 दिन से तो सिर्फ काम में ही भिडे हो बैंक से होटल होटल से बैंक।। चलो तुम्हें पुणे घूमाती हूं यहां ऐतिहासिक महत्व की बहुत सी चीजें हैं पुराने अंग्रेजों के जमाने के स्मारक हैं शिवाजी महाराज के जमाने के किले हैं बाजीराव मूवी देखी थी ना ,उसमें दिखाया काशीबाई का महल भी यही है शनिवार वाडा में।। पांच नदियां हैं कई ब्रिज है बहुत बड़े-बड़े कॉलेजेस हैं चलो सब तुम्हें दिखाऊं।

राजा– हम जो देखने आए थे वह तो देख लिया बंसी

बांसुरी राजा की बात सुन मुस्कुराने लगी।।

राजा– सुनो अब देखना वेखना छोड़ो यार जोर की भूख लगी है चार-पांच दिन से कुछ ढंग से खाया नहीं कुछ अच्छा सा खिलाओ तो कोई बात बने।।

बांसुरी– कानपुर सी कचौड़ीयां और पकौड़ीयां  तो यहां मिलने से रहीं फिर भी एक अच्छी जगह है एफसी रोड पर वहां चलते हैं वहां की चाट  खिलाती हूं तुम्हें।।

राजा– यहां की चाट से तो तौबा कर ली बंसी हमने। उस दिन तुम्हारे सिद्धार्थ सर तुम्हारी कैंटीन में बड़ी शान से हमारे सामने लेकर आए कहा सर यह चख कर  देखिए हमारे यहां का रगड़ा पेटिस आपके कानपुर की चाट ना भूल गए तो हमारा नाम बदल दीजिएगा।
     वो  चाट खाकर जो जबान का स्वाद बिगड़ा है तो आज जाकर सुधरा है,, अब तब से हम सोच रहे हैं कि तुम्हारे सिद्धार्थ सर को क्या नया नाम दें।।

बांसुरी– तुम नही सुधर सकते।।

राजा– हाँ तो सुधरे भी क्यों,,जैसे हैं अच्छे हैं ।।

बांसुरी– राजा हम चाहते हैं ,यह रात कभी खत्म ना हो बस ऐसे ही चलती रहे और हम दोनों एक दूसरे का हाथ हाथ थामे आगे बढ़ते रहें।

राजा– बंसी हम तो अब तुम्हें एक पल के लिए नहीं खोना चाहते ।।हम तो चाहते हैं __हम कल जल्दी से घर पहुंचे और सबसे, तुरंत अपनी शादी की बात कर ले, और बस एक हफ्ता बीतते  बीतते तुम हमारी दुल्हन बनकर हमारे घर आ जाओ हमेशा के लिए।।

बांसुरी– बड़े बेसबर हो  रहे तुम तो।

राजा– हां तो क्यों ना हो?? इतने साल इंतजार भी तो किया है तुम्हारा….. हमारा बस चले तो अभी यहीं फेरे ले ले तुम्हारे साथ।।
    हम तो कहते हैं बंसी तुम भी हमारे साथ कानपुर चलो ,तुम तुम्हारे घर बात कर लेना…. हम हमारे घर और सब मान गए तो अगले दिन ही शादी कर लेंगे।।

बांसुरी– अरे इतनी शॉर्ट नोटिस पर छुट्टी कहां मिलेगी राजा ऐसे कहां जा पाएंगे हम,, ऐसा करो अभी तुम ही जाओ दो-तीन दिन में सर से बात करके छुट्टियां लेकर हम भी आ जाएंगे और जैसा तुम चाहते हो …भगवान ने चाहा तो 1 हफ्ते में ही तुम्हारी दुल्हन बनकर तुम्हारे घर आ जाएंगे।।

राजा– सोच लो अब हमारे बिना रह पाओगी??

  दोनों इसी तरह हंसते बोलते एक दूसरे का हाथ थामे रास्ते के किनारे किनारे चलते रहे।। इतने सालों के ताने उलाहने, प्यार भरी मीठी झिड़कियां,, सवाल जवाब और ढेर सारी बातें …..न सुलझने वाली समस्याएं और उलझने वाली मीठी-मीठी बातें करते करते दोनों जाने कहां तक चलते चले गए……… जब कहीं थक जाते तो रास्ते के किनारे पड़ी बेंच पर बैठ जाते हैं जो ठेला मिला उससे कुछ खा लिया कहीं चाय मिली वहां पी ली…….. एक पानी की बोतल पकड़े दोनों सारी रात पूरे शहर की खाक छानते रहे।।

     रात के अंधियारे से सुबह हल्की हल्की सी उगने  लगी।।। तब राजा ने बांसुरी को उसके फ्लैट पर छोड़ा और अपने होटल चला गया दोनों ने विदा होते समय सिद्धार्थ के घर एक ही समय में पहुंचने का वक्त तय कर लिया।।।

********

माला– बंसी अरे उठ जा कब तक सोती रहेगी सुबह का 10:00 बज गया है तू कल रात पार्टी में अचानक गायब हो गई रात भर पता नहीं कहां भटकती रही किस समय फ्लैट पर आई मुझे तो कुछ पता ही नहीं चला ??यार यह चल क्या रहा है ??

बांसुरी– सब बता देंगे थोड़ा तो धैर्य रखो पहले 1 कप प्यारी सी चाय पिला दो।।

माला– जो आज्ञा मैडम जी मैं जा रही हूं ,आपके लिए चाय चढ़ाने …..आप ऐसा कीजिए हाथ मुंह धो लीजिए।।

बाँसुरी उठ कर बाथरुम में घुसने ही वाली थी कि दरवाजे पर किसी ने घंटी बजाई, दूध वाला दूध दे चुका,पेपर वाला आ चुका,फिर ये कौन आ गया,,सर को झटक कर बांसुरी बाथरूम में घुस गयी।।

   नहा धोकर निकलकर बालों को झटकते हुए बांसुरी जब बैठक में आई तो वहाँ राजा को बैठे देख आश्चर्यचकित रह गई।।

बांसुरी– अरे तुम!! तुम यहाँ कैसे??

माला– सर बस अभी कुछ देर पहले ही यहां आए हैं बांसुरी,, तुम यहां बैठो मैं सर के लिए कॉफी बना कर लाती हूं।।

राजा– माला जी अगर आपको तकलीफ ना हो तो चाय बना दीजिए कॉफी हमें जरा कम पसंद है।।

माला–  हाँ  बिल्कुल!! तकलीफ क्यों होगी मैं चाय ही बनाकर ले आती हूं।।

   माला अन्दर जाते जाते बांसुरी को भी साथ में खींच ले गयी।।

माला– चल क्या रहा है मैडम कुछ बताइन्गी  आप?? यह आरके सर आखिर हैं कौन?? तुम्हें कैसे जानते हैं?? यह सुबह-सुबह हमारे घर पर क्या कर रहे हैं ??
     और सुन यार तू कॉफी फेंट ले तब तक मैं थोड़ा चेहरे का रंग रोगन कर लूँ  वरना बंदा सोचेगा कैसी वाहियात लड़की है भूतनी बनी घूम रही है घर पर।। सारा इंप्रेशन खराब हो जाएगा।।

बांसुरी– तुमने सुना नहीं उन्हें कॉफी नहीं चाय पीनी है तुम जाओ आराम से तैयार हो जाओ हम तब तक चाय चढ़ातें हैं ।।

दस मिनट में माला तैयार होकर आ गयी,बांसुरी चाय चढ़ा कर राजा के साथ बैठी बातें कर रही थी और चाय खौल खौल कर काढ़ा बन चुकी थी।।

माला– बंसी चाय को छान दूं या थोड़ी और जलानी है।।

बांसुरी माला की आवाज सुन भागती हुई रसोई में आई और चाय को झांक कर देख हंस पड़ी।।

” कुछ ज्यादा ही खौल गई ना” उसने हंस के माला से पूछा

माला– चाय तो जो पकी सो पकी ,,, तुम दोनों के बीच क्या पक रहा है ??अब तो सब सच सच बता दे।

बांसुरी ने तीन कप में चाय छानी एक प्लेट में कुकीज निकाली और माला को साथ लिए बैठक में चली आई।।

बांसुरी– राजा इनसे मिलो यह है हमारी प्यारी सहेली माला।।

राजा — अच्छे से जानते हैं हम।।

मुस्कुराते हुए बांसुरी ने राजा को देखा और कहा

बांसुरी– माला हमारे बारे में सब जानना चाहती है।

राजा– क्यों तुमने आज तक कुछ बताया नहीं चलो कोई बात नहीं…. आइए माला जी आपको हम ही बता देते हैं हमारी और बांसुरी की कहानी।।

माला–  कुछ कुछ समझ तो आने लग गया है कि बांसुरी की अलमारी का वह स्पेशल कोना आप ही हैं।।
जहां  कुछ अजीबोगरीब सामान रखती है ये ।।

राजा– अच्छा!! जैसे क्या क्या रखती है??

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माला– एक रुद्राक्ष की माला,एक जेंट्स परफ्यूम,, एक टूटी से पैन रखी हुई है, एक छोटी सी नोटबुक पड़ी है, एक टी-शर्ट भी है ।।।रुद्राक्ष की माला को कभी-कभी निकाल कर अपने हाथ में लपेट लेती है और फिर वापस निकाल कर वही रख देती है।

राजा– टी-शर्ट कौन सी रखी है तुमने??
 
ऐसा बोलते में उसके हाथ से छलक कर चाय उसकी शर्ट पर गिर गयी।।

बांसुरी– वाह टी शर्ट रखी है,ये सुनते ही शर्ट खराब कर ली।।लायो उतार कर हमे दो,हम साफ करके ले आते हैं ।।

राजा– क्या बात है बंसी !! हमें शर्ट लेस देखने की बड़ी जल्दी है तुम्हें ।।

बांसुरी– बकवास बन्द करो ,और लाओ इधर दो

राजा– पर ये टी शर्ट तुम्हें मिली कहां से??

बांसुरी– और कहां से मिलेगी तुम्हारी जिम से।। जिस दिन हम जॉइनिंग के लिए निकल रहे थे उस दिन जिम गए थे तब प्रिंस से बोलकर तुम्हारे लॉकर से तुम्हारी यह टीशर्ट निकलवा ली थी हमने,, और अपने साथ ले आए इसमें तुम्हारी खुशबू बसी है आज तक वैसी की वैसी रखी है।।

राजा–  छी फिर मैं नहीं पहनूंगा  बिना धुली गंदी टीशर्ट।।

बांसुरी– अरे अपने कपड़ों के साथ इसे भी धोते थे बाबा !! और फिर से तुम्हारा परफ्यूम डालकर आयरन करके वापस रख देते थे,साफ है पहन लो।

राजा ने हंसते हुए कपड़े बदले और माला को अपनी कहानी सुनाने बैठ गया।
      प्रिंस प्रेम और निरमा, पिंकी और रतन, बंटी और रानी,रेखा और लल्लन युवराज भैया रूपा भाभी अम्मा बाबूजी दादी बुआ जी जितने लोग उनकी प्रेम कहानी का हिस्सा थे प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से सबको दोनों ने याद किया।।। पूरी कहानी में दोनों जाने कितनी बार पागलों की तरह हंसे और बहुत बार दोनों की आंखें  भीग गई।।

बांसुरी– प्रिंस कैसा है राजा?? कानपुर छोड़ने के बाद से तो उसने हमसे कभी बात ही नहीं की!!

राजा– तुम से सब नाराज जो हो गए थे,, तुम उनके हीरो को छोड़कर जो चली आई थी।।

बांसुरी मुस्कुरा कर रह गयी__” बात तो करी जा सकती थी ना!!”

राजा– हां बात तो करी जा सकती थी पर एक-एक कर ऐसी छोटी-छोटी बातें जुड़ती चली गई कि सब का गुस्सा बढ़ता ही चला गया।। उस दिन तुम्हारे जाने के बाद तुम्हारे एग्जाम वाले दिन हमने चिट्ठी लेकर प्रेम को तुम्हारे सेंटर भेजा था तुमने कोई जवाब नहीं दिया बल्कि उल्टे पैरों उसे बिना हमारी चिट्ठी पढ़े ही वापस भेज दिया…. इस बात के बाद से हमें तेज बुखार आ गया हमें बुखार में पड़े देखकर अम्मा पसीज गई और तुम्हारे घर गई बंटी को लेकर तुम्हारे और हमारे बारे में बात करने चली गयी।। तुम्हारी बुआ ने हमारी अम्मा को भी खोटे सिक्के सा वापस भेज दिया।।उसके बाद हम बीमार पड़ गए बहुत बीमार पड़ गए थे बंसी !!इतने बीमार कि हमें लेकर युवराज भैया को मुंबई तक दौड़ लगाना पड़ा पर इसके बाद भी तुमने हमारी कोई खोज खबर नहीं ली इस घटना के बाद घर में सब टूट गए हर किसी ने अलग-अलग हमें कसम दे दी कि हम अब तुमसे कोई संबंध ना रखें तुम्हें भूल जाए पर क्या हमारे लिए यह संभव था कि हम तुम्हें भूल जाते ।।

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    अविश्वास से राजा को देखती बांसुरी की आंखों से आंसुओं की अविरल धारा बहती रही जिसे पोंछने की उसने कोई कोशिश नहीं की उसने बहुत धीमी सी आवाज में राजा से पूछा “क्या अम्मा जी खुद हमारे घर आई थी”?

राजा– हाँ अम्मा खुद गयी थी।।

बांसुरी– राजा हमारा विश्वास करो किसी ने इस बारे में हमें कुछ नहीं बताया !!हमें समझ नहीं आ रहा कि हमारी मम्मी तक ने हमें कुछ  क्यों नहीं बताया।। हमसे सच में बहुत भूल हुई हमें दोबारा तुम्हें फोन करना चाहिए था,, कानपुर से निकलने के बाद जब हम पहली बार ज्वाइन करने गए तो हमने एक ही बार तुम्हें फोन किया रूपा भाभी से थोड़ी बहस हो गई…… और फिर हमारा दिमाग गरम हो गया उसके बाद कई बार सोचा और फोन भी उठाया लेकिन हिम्मत ही नहीं पड़ी तुमसे बात करने की….
     हमें माफ कर दो राजा अब तुम रूपा भाभी अम्मा जी कोई हमें कुछ भी कह ले कितना भी सुना ले हम अब तुम्हें छोड़कर कभी नहीं जाएंगे।।

    बांसुरी सर झुकाए रोती रही राजा अपनी जगह से उठकर बांसुरी के पास आया और उसने उसे गले से लगा लिया।। इन दोनों को अपने आंसुओं में भीगा देख माला वहां से उठकर चुपचाप चली गई कुछ देर बाद एक ट्रे में दो गिलास  में पानी और तीन कप चाय लिए वह वापस चली आई।

माला– मुझे लगता है अब हमारे लव बर्ड्स की सारी शिकायतें दूर हो गई होंगी,अब ऐसा करो आंसू पोछो ,चाय पियो और बंसी तैयार हो जाओ ,सिद्धार्थ सर के घर भी तो जाना है।।

  बांसुरी आंखें पोंछ कर तैयार होने अंदर चली गई माला ने रेडियो पर एक गाना ट्यून किया और फोन पर कैब बुक करने दरवाजा खोलकर बाहर निकल गई राजा वहीं सोफे पर दोनों हाथ सीने पर रखें आंख बंद करके लेट गया__

       मोहे लगे प्यारे सभी रंग तिहारे
       सुख दुख में हर पल रहूं संग तिहारे
       मगन अपनी धुन में रहे मोरा सैयां
       पग पग लिए जाऊं मैं तोहरी  बलैया।।

राजा आंखें बन्द किये लेटा रहा और बांसुरी वही खड़ी उसे देखती रही।।गाना खतम होते ही राजा ने आंखें बन्द किये हुए ही कहा__

राजा– मन भर कर निहार लिया हो हमें तो अब जाकर तैयार भी हो जाओ वरना तुम्हारे सिद्धार्थ सर गोली मार देंगे हमें ।।
    बांसुरी लजा कर तुरंत अन्दर चली गयी।।

   कुछ देर बाद तीनो कैब में सवार सिद्धार्थ के घर की ओर निकल पड़े,,रास्ते मे बांसुरी को अचानक कुछ याद आ गया__

बांसुरी– राजा एक बात बोलूं नाराज तो नहीं होंगे

राजा– हां बोलो

बांसुरी– यहां एक गणपति मंदिर है बहुत मानता ( मान्यता) है उनकी!!  बहुत दिनों से हमारी इच्छा थी की कभी जब हमारे बीच सब सुलझ जाए तब तुम्हारे साथ हम उनके दर्शन को जाएंगे क्या हम वहां चल सकते हैं??

राजा– इसमें पूछने की क्या बात है बंसी उन्हीं के कारण तो आज हम एक हो पाए हैं।। हमने भी बड़े हनुमान जी के पास अर्जी लगा रखी थी,, अब जब तुम कानपुर आओगी ना ,तो तुम्हें वहां भी लेकर जाना है।।

   कुछ आगे जाकर उन्होनें कैब छोड़ दी और तीनों मन्दिर के लिये मुड़ गये। तीन चार छोटी छोटी गलियां पार करने के बाद आखिरी गली के छोर पर बड़ा सा गणपति मंदिर था।। तीनों ने वहां के सदर दरवाजे से अंदर प्रवेश किया ,,प्रांगण को पार करते जब वह मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंचे तभी पंडित जी ने आगे बढ़कर कपाट बंद कर दिया।।

माला– अरे यह क्या हो गया यह तो अच्छा नहीं माना जाता है।। मंदिर पहुंचो और दर्शन भी ना मिले।। है ना बंसी अपशकुन होता है ना यह।।

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बांसुरी– पंडित जी थोड़ा सा कपाट खोल दीजिए ना हम बस झांक कर ही  दर्शन कर लेंगे और तुरंत चले जाएंगे।
   बांसुरी की बात पर पंडित जी ने कान तक नहीं दिए और अपने काम में लगे रहे। भीड़ एक-एक कर प्रसाद और फूल समेटे छन्टने लगी ।।
      तीनों बहुत देर तक इधर-उधर कोशिश में रहे कि शायद कोई पंडित कपाट खोल दे पर वह बंद कपाट फिर नहीं खुले।।
     ना चाहते हुए भी बांसुरी के मन में अजीब सा संशय घर कर गया,, उसे वह अपशगुन वाली बात अच्छी नहीं लगी।। बार-बार उसके मन में यह डर बैठने लगा कि कहीं फिर से वह राजा को खो ना दे।।

   तीनों वहां से निकल कैब बुक कर सिद्धार्थ के घर पहुंच गए।।
       उनके वहां पहुंचने तक में लगभग सभी मेहमान आ चुके थे ।।अपने साथ के लोगों के साथ राजा भी बातचीत में व्यस्त हो गया।।

नायर– क्या बात है आरके!! तुम तो बहुत पंक्चुअल हो आज कैसे लेट हो गए??

राजा– सर हम निकल तो टाइम पर गए थे पर एक बिल्ली रास्ता काट गई।।

    हँसते हुए राजा ने बांसुरी को देखा और वापस अपने साथियों के साथ बातों में लग गया।।
    बनावटी गुस्सा दिखाते हुए बांसुरी भी माला के साथ रसोई में सिद्धार्थ की माँ की मदद करने चली गयी।।

     रसोई मे तीनों औरते खाने की तैयारियों मे लग गयी,वहीं बातों बातों मे माला ने सिद्धार्थ की माँ को मन्दिर वाला किस्सा भी कह सुनाया जिसे सुन उन्होनें भी माला की अपशगुन वाली बात पर अपनी मोहर लगा दी,इस सब को सुन कर बांसुरी का मन और बुझ गया,अब वो किसी भी हाल में राजा से अलग नही होना चाहती थी….आखिरकार उसने सोच लिया कि किसी तरह आज राजा रुक जाये,क्योंकि ऐसे अपशगुन के साथ यात्रा करना कहीं से भी सही नही रहेगा,,अगर दो दिन राजा रुक जाये तो वो भी छुट्टी लेकर उसके साथ ही कानपुर चली जायेगी।।
    ऐसा सोचने के बाद उसके मन को तसल्ली मिली और एक बार फिर वो पूरे उत्साह से अपने काम में लग गयी।

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        सिद्धार्थ की मां को बांसुरी पहली ही नजर में बहुत भा गई थी वो रसोई में बहुत उत्साह से हर एक दक्षिण भारतीय व्यंजन की रेसिपी और उसके पोषक तत्वों की व्याख्या संदर्भ सहित बांसुरी को समझाती रही।
     सिद्धार्थ को कब क्या खाना पसंद है ,कब ब्लैक कॉफ़ी पीता है कब दूध वाली ,ये सब कुछ सिलसिलेवार बांसुरी को महा उत्साह से बताती उसकी माँ चह्कती रहीं।।बांसुरी के अपने मन में राजा चल रहा था,आगे के दो दिन राजा के साथ कैसे गुजरेंगे उसी खुशी में अपने में मगन बांसुरी भी पूरी लगन से उनकी बातें सुनती रही और कहीं उन्हे ये ना लगे की वो कहीं और खोयी है इसलिये बीच बीच मे अपनी तरफ से सवाल भी करती गयी।।

    जब सारे लोग बैठक में खाने पीने में लगे हुए थे बांसुरी ने इशारे से राजा को बालकनी मे बुलाया और अपनी घबराहट, और उसके दो दिन बाद साथ साथ निकलने वाला प्रस्ताव भी रख दिया, जिसे राजा ने सहर्ष स्वीकार कर लिया__

राजा– बस इतनी सी बात !! राजा ने मोबाईल निकाल और अपनी शाम की फ्लाइट कैन्सिल कर दी ।।

राजा– अब आज रात को सुकून से बैठ कर दो दिन बाद की तुम्हारी हमारी टिकट बुक कर लेंगे।।अब खुश!!

बांसुरी– बहुत बहुत खुश!!

   बैठक में धीमी धीमी आवाज़ में बजते गाने को सुन अपने धड़कते दिलों  को काबू करते दोनों ही अलग अलग जाकर बैठ गये।।

       ख़्वाब है तू, नींद हूं मैं
        दोनों मिले रात बने
        रोज़ यही मांगूं दुआ
     तेरी मेरी बात बने, बात बने

        मैं रंग शर्बतों का
     तू मीठे घाट का पानी
       मैं रंग शर्बतों का
    तू मीठे घाट का पानी
    मुझे खुद में घोल दे तो
   मेरे यार बात बन जानी

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क्रमशः

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शादी.कॉम – 26

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शादी डॉट कॉम-26


      
     “मल्टीनेशनल बैन्क्स की तर्ज पर खालिस देसी बैंक भी अपने कर्मचारियों को इस तरह की पार्टी और आयोजन का झुनझुना पकड़ा कर अत्यधिक परिश्रम  कार्य से होने वाली  मानसिक और शारीरिक थकान को दूर करने का सरल उपाय सिखाने की आड़ में उन पर क्षमता से अधिक कार्य थोप रहे हैं,” उस विषय पर प्रस्तावित अन्तिम दिन की कार्यशाला में सारे आयोजन उसी हिसाब से रखे गये थे।।

   पांचवे दिन के ट्रेनिंग सेशन के अंत में सभी की डिनर की व्यवस्था पास के ही एक फाईव स्टार होटल  में की गयी थी,हल्की फुल्की साज सज्जा के साथ ही बैंक कर्मियों में से कुछ एक द्वारा गीत संगीत पेश करने की भी तैयारी थी,इसके अलावा सवेरे के विषय को अनुपूरक करने कुछ एक छोटे मोटे सहभागिता गेम्स का भी आयोजन किया गया था।।
ये पार्टी पूरी तरह से पारिवारिक थी जिसमे कर्मचारी चाहें तो अपने परिवार को भी लेकर आ सकते थे।

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     तीसरे दिन के अपने सेशन के बाद लंच किये बिना ही राजा जो गया था वो चौथे दिन भी बांसुरी को नही दिखा था,ये कैसा बदला ले रहा था वो,जब तक लिस्ट मे बांसुरी का नाम नही था वो मौजूद था और उसका नाम जोड़ने के बाद खुद गायब हो गया था।।
     पर अन्तिम दिन सारी टीम की उपस्थिति अनिवार्य थी,इसीसे बांसुरी को उम्मीद थी,कि आज तो वो आयेगा और हुआ भी वही,राजा आ गया।।

     ऐश ग्रे साड़ी में धागे से बने गुलाबी बूटे बहुत सुंदर लग रहे थे,और उस साड़ी में संवरी बांसुरी भी।।
    माला और बांसुरी साथ ही बैठे थे कि माईक हाथ में लिये सिद्धार्थ ने गाना शुरु कर दिया

        कब कहाँ सब खो गयी
      जितनी भी थी परछाईयाँ
      उठ गयी यारों की महफ़िल
         हो गयी तन्हाईयाँ
       क्या किया शायद कोई
         पर्दा गिराया आपने

      दर्द-ए-दिल, दर्द-ए-जिगर
         दिल में जगाया आपने……….

  हर एक अंतरे पर बांसुरी को निहारता सिद्धार्थ बडे लय में अंदाज में  गा रहा था…..
    बांसुरी सोच ही रही थी कि अच्छा है राजा नही है,वरना सिद्धार्थ की इस बेशर्मी पर जाने उसके बारे में क्या कुछ सोच बैठता,अभी ऐसा सोच के उसने अपने बालों को पीछे किया ही था कि उसके पीछे थोड़ा हट के एक टेबल से टिक के खड़े राजा पर उसकी नज़र पड़ गयी।।
      गहरे ग्रे रंग की शर्ट और काली पैंट में खड़े राजा पर से उसकी आंखें एकाएक हट नही पायीं।।
     तब तक में राजा ने भी उसे देख लिया लेकिन तुरंत ही दुसरी तरफ मुहँ फेर किसी से बातों मे लग गया।।

      पहले दूसरे दिन तो ऐसी निर्लिप्तता नही दिखा रहा था,अचानक ऐसा क्या हो गया ….
     आज अन्तिम दिन था,आज के बाद राजा वापस चला जायेगा,आज ही का दिन है और यही कुछ पलछिन जिनमें वो अपनी बिगडी बना सकती है,पर क्या करे?? कैसे कहे?? कि राजा आज भी हमे फर्क नही पड़ता कि तुम बैंक अधिकारी हो गये!! तुम्हारी नौकरी लग गयी!!
    हमारे लिये तो आज भी तुम हमारे कानपुर के हमारी गलियों के वही राजा हो,कभी जिसकी ज़ुल्फों के साथ हमारी सांसे ऊपर नीचे होती थी।।

    अपनी सोच मे गुम बांसुरी को अचानक स्टेज की तरफ जाते राजा दिखा और तभी सिद्धार्थ ने राजा को गाने के लिये माईक थमा दिया,थोड़ी ना नुकुर के बाद राजा ने माईक संभाल लिया__


       बावरा मन राह ताके तरसे रे
      नैना भी मल्हार बन के बरसे रे
    आधे से अधूरे से, बिन तेरे हम हुए
    फीका लगे है मुझको सारा जहां
     बावरा मन राह ताके…

     ये कैसी ख़ुशी है, जो मोम सी है
    आँखों के रस्ते हँस के पिघलने लगी
      मन्नत के धागे, ऐसे हैं बाँधे
   टूटे ना रिश्ता जुड़ के तुझसे कभी
     सौ बलाएँ ले गया तू सर से रे
          नैना ये मल्हार…

गाने के प्रवाह में खोयी बांसुरी की नज़र राजा पर से हट ही नही पा रही थी,और वो था कि गाते समय उसने एक बार भी उसकी तरफ देखना ज़रूरी नही समझा।।

     डिनर के लिये कर्मियों के परिवारों का भी निमन्त्रण था,बहुत से कर्मचारी अपने बीवी बच्चों के साथ आये हुए थे।।
     
   राजा ने अपना गीत समाप्त किया और स्टेज पर से उतर ही रहा था कि उसकी नज़र सिद्धार्थ पर पड़ गयी और एक बार फिर उसके मुहँ मे एक कड़वाहट घुल गयी,सिद्धार्थ अपनी माँ को सबसे मिलवाते हुए बांसुरी की तरफ ही बढ रहा था।
     दक्षिण भारतीय पोचमपल्ली साड़ी में एक साधारण सा जूड़ा बनाई हुई सिद्धार्थ की माँ चेहरे से ही बेहद सुलझी हुई समझदार गृहिणी लग रही थी, अकेले ही ज़माने की ठोकरें खाती बेटे की अकेले परवरिश ने उनके चेहरे को एक दिव्य तेज़ से रंग दिया था।।

     बांसुरी स्टेज के दूसरी तरफ अकेली ही खड़ी थी कि सिद्धार्थ वहाँ पहुंच गया__

सिद्धार्थ- बांसुरी इनसे मिलो,ये मेरी मॉम है,and mom she is bansuri ,I’ve already told u about her..

  सिद्धार्थ की माँ ने मुस्कुरा कर बांसुरी का अभिवादन किया कि अपने उत्तर भारतीय संस्कारों में लिपटी बांसुरी ने झट आगे बढ कर उनके पैर छू लिये।।
     बांसुरी का लपक के इस तरह पैर छूना उन्हें मोहित कर गया,उन्होँने आगे बढ़ कर उसे गले से लगा लिया,अपनी टूटी फूटी अन्ग्रेजी मिश्रित हिन्दी में उन्होनें अगले दिन सुबह के सह्भोज पर उसे भी आमन्त्रित कर लिया।।

    अगले दिन महीने का दूसरा शनिवार होने से बैंक की छुट्टी थी,इसीसे टीम की वापसी के पहले जितने लोग आज रात की फ्लाईट से नही वापस हो रहे थे उन सब को बड़े इसरार के साथ सिद्धार्थ ने अपने घर सुबह के खाने पर बुला लिया था।।
      राजा ने सिद्धार्थ के आग्रह को सिरे से नकार कर अपने आने की असमर्थता प्रकट कर दी थी।।
     कभी किसी आयोजन का हिस्सा ना बनने वाली सिद्धार्थ की माँ एक तरह से टीम को स्वयं आमंत्रण देने ही आयी थी।।

    बांसुरी से जब तक उनकी बातें होती रही,राजा उन्हें  ही देखता रहा,पर जब उसने देखा की वो बांसुरी को साथ लिये उसी की तरफ आ रही हैं, तो वो एकाएक पलट कर दूसरी ओर देखने लगा।।

    ” हेलो ,कैसे हैं आप??”

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  राजा- जी नमस्कार!!! मैं ठीक हूँ,आप कैसी हैं।

” देखिए आप हमारे घर आये बिना नही जा सकते, मैं स्पेशली आप को इन्वाईट करने ही यहाँ  तक आयी हूँ ,कल का लंच आपको हमारे घर पर ही लेना है।”
    पता नही ये उनका स्नेह भरा आग्रह था या आश्चर्यजनक रूप से उनके व्यक्तित्व की अम्मा से समानता पर उस भद्र महिला के आग्रह को फिर राजा ठुकरा नही पाया, आखिर उसने भी झुक कर उनके पैर छू ही लिये।।

   तभी माला हाथ में स्टार्टर की प्लेट थामे वहाँ चली आयी,चार लोगों के बीच अकेली प्लेट पकड़ी खड़ी खुद को देख उसे अपनी भूल का आभास हुआ,और उसने अपनी प्लेट राजा की तरफ बढ़ा दी__

” सर लिजिये ना,आप कुछ ले ही नही रहे।”

” आप इतने प्यार से देंगी तो कोई लेने से कैसे मना कर सकता है।”
   बांसुरी एक बार फिर बुझ के रह गयी,आखिर हुआ क्या है राजा को।।

    पर बांसुरी को अब हर पल यही लग रहा था कि कैसे भी करके इस गलतफहमी को दूर करना ही पड़ेगा,चाहे इसके लिये उसे किसी भी हद तक जाना पड़े ।।

    माला ने उसी समय माईक बांसुरी के हाथ थमा दिया,बहुत सहम के आखिर उसने गाना शुरु किया

    मैं कागज़ की कश्ती, तू बारिश का पानी
           ऐसा है तुझसे अब ये रिश्ता मेरा
          तू है तो मैं हूँ, तू आए तो बह लूँ
            आधी है दुनिया मेरी तेरे बिना
           जी उठी सौ बार तुझपे मर के रे
                 नैना भी मल्हार…

बांसुरी ने बहुत मन से राजा के गाये हुए गाने को ही आगे बढ़ाया,पर उसके गीत को समाप्त करते में राजा वहाँ से जा चुका था।।

     राजा के जाने के बाद फिर बांसुरी का मन भी उस पार्टी से उचाट हो गया,जैसे तैसे समय काटती आखिर वो भी सर दर्द का बहाना बनाये वहाँ से निकल पड़ी ।।

  पार्टी हॉल में नेटवर्क ना होने से कैब बुक नही हो पा रही थी,इसीसे पैदल मेन रोड पर आगे बढ़ती बांसुरी अपने मोबाइल पर सर झुकाये कैब बुक करने में ही लगी हुई थी__

” अरे सम्भल के,ऐसे चलोगी तो गिर पड़ोगी!!

   राजा की आवाज़ सुन बांसुरी ने झटके से ऊपर देखा,सामने से उसीकी तरफ आते राजा को देख उसका चेहरा खिल उठा__

बांसुरी– ऐसे बीच में पार्टी छोड़ कर कहाँ निकल गये।।

राजा– बहुत बेचैनी सी लगने लगी थी अन्दर, इसिलिए बाहर खुली हवा में सांस लेने निकल गया।

राजा– तुम यहाँ कैसे?? पार्टी तो अभी चल ही रही होगी।।

बांसुरी– हाँ हमें भी थोड़ा अच्छा सा नही लग रहा था,इतनी भीड़ भाड़,हल्ला गुल्ला रास नही आ रहा था।तुमने खाना खाया राजा ??

राजा — खा लेंगे….तुम्हें अचानक हमारी फिक्र कैसे होने लगी।।

बांसुरी– अरे ऐसे क्यों बात कर रहे ,,हम फिक्र नही करेंगे तो और कौन करेगा तुम्हारी??

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राजा — जो हमारे लिये बनी होगी वो करेगी।।

बांसुरी– अच्छा !!! कौन है वो ज़रा हम भी सुनें,तुमने बताया ही नही कि शादी के लिये लड़की भी ढूँढ लिये।।

राजा– हाँ जैसे तुमने तो मिलते साथ ही सब बता दिया।।

बांसुरी– क्या बोल रहे हो तुम?? हमे समझ नही आ रहा,कभी भी साफ साफ बोलने की आदत भी तो नही है तुम्हारी।।

राजा– जैसे तुम सब साफ साफ बोलती हो,जब इतनी ही सफाई है बातो में तो अब तक बताई काहे नही कि उससे शादी करने जा रही हो।।

बांसुरी– पगला गये हो क्या?? किससे शादी करने जा रहे हम??

राजा — बनो मत बांसुरी!! सिद्धार्थ ने हमे सब कुछ बता दिया है।।

बांसुरी– अरे बाबा क्या बता दिया उसने,,हमें भी तो बताओ।।

राजा– यही कि तुम दोनों शादी करने वाले हो।।

बांसुरी– पगला गये हो क्या तुम?? एक बात बोले चाहे तुम कितने बड़े ऑफीसर बन जाओ ,
रहोगे गधे के गधे ,,  उसने कहा और तुमने मान लिया,अरे एक बार हमसे पूछना तो था।।

राजा — सवाल पूछने और जवाब देने का कोई रस्ता पीछे छोड़ गयी थी क्या ,जो हम कुछ पूछ पाते।।

बांसुरी– तुमने भी तो आवाज़ नही दी पीछे से….क्या इतनी सी बात पे कोई ऐसा जीवन भर का बैर मोल लेता है।।कहते कहते बाँसुरी की आंखें भीग गयी

   राजा ने आगे बढ़कर बांसुरी के दोनो हाथ अपने हाथों में ले लिये एक हाथ से उसके बहते आँसूं पोंछ उसकी आंखों में झांकते हुए उसने कहा__

राजा– आज भी तुमसे उतना ही प्यार करते हैं बांसुरी, कभी भूल ही नही पाये तुम्हें ।।
हमारे अनपढ़ होने से हमे छोड़ गयी यही सोच सोच कर पागल हो गये,और तुम्हारे जाने के बाद पढ़ने की ऐसी लत लगी की पागलों के समान किताबों में  ही घुसे रहने लगे,किताबें ही जीवन हो गयी थी हमारे लिये…..तुम्हारे बिन सब कुछ कितना फीका हो गया था ,कितना बेरंग !! चाय भी अच्छी नही लगती थी, फिर भी पीते थे,सिर्फ और सिर्फ तुम्हें याद करने के लिये…..जिम छूट गया!! दोस्त छूट गये!! यहाँ तक की हमारी खुद की तबीयत हमसे रूठ गयी पर तुम नही छूटी,कितना याद किया ये कैसे बताएँ क्योंकि तुम तो हमारे अन्दर ही समा गयी थी,इस कदर हमसे जुड़ गयी थी कि सोते जागते दिमाग में एक ही नाम चलता था ….बांसुरी!!

   बांसुरी के आँसू रूकने के बजाय बहते चले जा रहे थे,और अब राजा के आँसू भी उसका साथ दे रहे थे।।

बांसुरी– तुम्हें क्या लगता है,हम यहाँ बहुत खुश थे,किसी से तुम्हारे बारे में पूछ नही पाते थे,प्रिंस प्रेम सबने हमसे बात करना बन्द कर दिया,यहाँ तक की निरमा ने भी,,बस बुआ की चिट्ठी में कभी कोई हाल तुम्हारा मिला तो मिला,वर्ना कुछ नही।।

राजा– एक बार फोन भी तो कर सकती थी ना, राजा जिंदा है या मर गया,जानने की भी इच्छा नही हुई तुम्हारी ।।

बांसुरी–तुम तो फिर भी अपने अम्मा बाऊजी के साथ थे युवराज भैय्या के साथ थे,,हम तो यहाँ एकदम अकेले हो गये थे!! कभी तुम्हें नही लगा कि अकेले क्या कर रही कैसे जी रही एक बार फोन ही कर लूँ ।।
      कभी कहीं से गुजरते और तुम्हारे पर्फ्यूम की खुशबू आ जाती तो पागलों जैसे इधर से उधर भटकते फिरते,तुम्हें ढूंढते रहते थे,जबकि जानते थे की तुम यहाँ नही हो।।
     हमारे पागलपन की हद बताएँ राजा,तुम्हें हमेशा अपने पास महसूस करने के लिये लड़की होते हुए भी तुम्हारा जेंट्स पर्फ्यूम लगाते हैं,माला जाने कितनी बार इस बात पर हमारा मजाक भी बना चुकी है,पर हमे अपने कपडों से आने वाली तुम्हारी खुशबू ही भाती है ,क्या करें।।

     दोनो एक दूसरे का हाथ थामे एक दूसरे की आंखों में इतने सालों के अपने पलछिन देखते हुए सवाल जवाब में लगे थे कि अचानक राजा बांसुरी के चेहरे पे झुकने लगा__

बांसुरी– क्या कर रहे हो ये राजा ??

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राजा– उस शाम एक काम अधूरा रह गया था बंसी …… आज वही पूरा करने जा रहे …..

मुस्कुराते हुए बांसुरी ने राजा को पीछे धकेल दिया

बांसुरी– इतनी सारी शिकायतें जमा कर रखी है हमने,उन्हें सुनने की फुरसत नही है?? आये बड़े प्यार करने वाले….

राजा– कर लेना बाबा, शिकायतें भी कर लेना,,सब सुन लूंगा……
      राजा ने अपने दोनो हाथों में बड़े प्यार से बांसुरी का चेहरा पकड़ा और….
   ” पहले उस रात का हिसाब तो पूरा कर लेने दो।”

बांसुरी– नही ,पहले हमारी बात सुनो!! क्या कह रहे थे सिद्धार्थ सर ,मुझसे शादी करेंगे,हो चुकी तब तो।।तुमने कहा नही उनसे कि बांसुरी सिर्फ और सिर्फ राजा की है,और राजा से ही बांसुरी की शादी होगी।।

राजा– नही कहा!! लेकिन कल उनके घर जायेंगे ना तब कह देंगे,,अब खुश!!

बांसुरी– हाँ बहुत बहुत खुश ।।

राजा– तो फिर आओ इधर।

बांसुरी– कब से देख रहे हैं,घूम फिर के एक ही जगह तुम्हारा कांटा अटक जा रहा

राजा– इत्ते साल से इन्तजार भी तो किया है तुम्हारा बन्सी!!!
      मुस्कुराती हुई बांसुरी आगे बढ़ कर राजा के गले से लग गयी,और राजा उसके चेहरे पे झुकता चला गया।।

क्रमशः

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aparna..

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शादी.कॉम-25

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शादी डॉट कॉम-25

     दो दिन कब पलक झपकते बीत गये बांसुरी को पता भी नही चला,तीसरे दिन से टीम द्वारा एक ट्रेनिंग सेशन का आयोजन किया जाना था जिसमें
टीम के अलग अलग सदस्यों द्वारा विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिया जाना था,हालांकि बैंक के रूटीन कार्य में व्यवधान ना हो इसलिये कुछ चुने हुए बैंक कर्मियों को ही इस ट्रेनिंग सेशन का हिस्सा बनाया जाना था।
      बांसुरी बस इसी चिंता में थी कि उसे इसका हिस्सा बनने मिलेगा या नही।।

*************

टीम के द्वारा बैंक के सीनियर कर्मचारियों की लिस्ट तैयार कर सिद्धार्थ को दे दी गयी थी जिनमें बांसुरी का नाम नही था ,,पर सिद्धार्थ चाहता था कि बांसुरी भी इस प्रशिक्षण का हिस्सा बने।।बाकी तीन मेंबर्स काफी सीनियर थे इसलिये उसने राजा से ही बात करने की सोची__

” सर आपकी लिस्ट से मेरी सबसे अच्छी एम्प्लायी का नाम गायब है,,,आप एक बार फिर से देख लेते तो अच्छा रहता।।”

” सिद्धार्थ साहब!! ये लिस्ट नायर सर ने बनाई है और मैं उनके निर्णय के खिलाफ नही जा सकता , हमसे काफी सीनियर हैं वो।।”

” मैं समझ सकता हूँ,,पर क्या आप एक बार ट्राई कर सकते हैं प्लीज़,असल मे बांसुरी बहुत कुशल कर्मी है,उसे ये ट्रेनिंग मिलेगी तो वो और चमक जायेगी।

राजा– समझा सकता हूँ,लेकिन……

राजा ने अपनी बात पूरी भी नही की थी कि सिद्धार्थ फिर शुरु हो गया।।

सिद्धार्थ– वो सर बात दरअसल ये है,  की असल में हम शादी करने वाले हैं,,क्या है उसकी भी ट्रेनिंग हो जाये तो हम दोनो के लिये ही अच्छा रहेगा।।

   राजा के हाथ से चाय उसके कपडों पर छलक गयी,उसने सिद्धार्थ की तरफ देखा__

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राजा — कब ?? I mean कब करने वालें  हैं??

सिद्धार्थ- बस जल्दी ही!! हमारी तरफ से तो सब ओके ही है,मेरी माँ को तो बांसुरी बहुत पसंद भी है, जल्दी ही वो शुभ दिन भी आ जायेगा।।

     गलतफहमी!!!ऐसी ही जटिल वस्तु होती है,जिसे हो जाती है वो फिर सामने वाले की प्रत्येक बात को अपने विशिष्ट चश्में से देखने लगता है।।
    हमारी तरफ से सब ओके है में सिद्धार्थ का तात्पर्य उसके और उसकी माँ की तरफ से था,पर राजा ने सोच लिया बाँसुरी और सिद्धार्थ की तरफ से।।
     इस चर्चा के बाद उसे सिद्धार्थ से कोई बात करने का मन नही किया।।

   क्या क्या नही किया था उसने बांसुरी के लिये…..
उस शाम के बाद पलट के देखा भी नही बांसुरी ने , कितनी देर वहाँ बैठा रह गया था,वो तो बाद में बन्टी जबर्दस्ती उठा कर घर ले गया,,पूरे दो दिन ना कुछ खाया ना पिया।।
    तीसरे दिन कैसा तेज़ बुखार आ गया था उसे… सारा सारा दिन एक ही बात तो दिमाग मे चल रही थी,माँ को समझाए या बांसुरी को!!
    दोनो में से एक ने भी उसका साथ दे दिया होता तो क्या ऐसे घुल घुल के रोग पाल लिया होता उसने।।
     इसके बावजूद उसने बांसुरी के इम्तिहान वाले दिन एक चिट्ठी देकर प्रेम को उसके पास भेजा था, फोन करने का तो सवाल ही नही था,ऐसे बुखार मे तप रहा था कि माँ सारा समय उसके सर के पास ही बैठी थी।।।

      प्रेम को कैसा खोटे सिक्के सा फिरा दिया था बांसुरी ने,ना ही उसके खत को पढ़ा और ना जवाब ही भेजा।।
     
     वो तो उसे खुद को पता भी नही चल पाया था कि ज्वर की तीव्र पीड़ा में वो रात भर बाँसुरी का नाम जपता रहा था,और उसकी उसी तड़प ने आखिर अम्मा का कलेजा भी मरोड़ के रख दिया था।।

     बेचारी दिन निकलते ही बन्टी को साथ लिये अपने सारे मान को ताक पर रख बांसुरी के घर भी पहुंच गयी,पर क्या लाभ हुआ आखिर??
     वहाँ उसकी बुआ ने क्या क्या नही सुनाया था अम्मा को___
        ” माफ करना दुल्हीन हमरी बांसुरी की तो नौकरी लग गयी, पढ़ी लिखी जो ठहरी।।देखो बुरा ना मान जाना पर सिर्फ सकल सूरत ही सब कुछ ना होवे है,सोने की प्रतिमा को घर मे सजाया जा सकता है पेट की आग नही बुझाई जा सकती।।छोरी ने तो कह दिया है…सादी करेगी तो अपने जैसे पढ़े लिखे लड़के से वर्ना कन्वारी रह जायेगी।।

अम्मा– क्या सच!! उसने खुद ऐसा कहा??

बुआ– हाँ तो,जो हम झूठ बोलेंगी तो जे जीभ अभी के अभी गल के गिर जाये…..
     जाते जाते एक बात और सुन लो दुल्हीन ,जितना दहेज का लिस्ट तुमने हमे थमाया था ना उतना तो छोरी दो साल में कमा के तुम्हारे चरणों में डाल देती पर सबर कहाँ था तुममें,जाओ अब सम्भालो अपने लल्ला को,कहीं ज़हर वहर ना खा ले।।

    ये सारी बातें और किसी ने कही होती,तो एक बार को राजा अविश्वास कर भी लेता पर वापस लौटने के बाद अम्मा ने ही बन्टी के सामने हर एक बात उसे बता दी थी,,कितना रोयी थी अम्मा उसे गले से लगा के……
      जिस लाड़ले के लिये अम्मा ने अपने स्वाभिमान को नही देखा उस माँ के लिये फिर बेटा कैसे इतना निष्ठुर हो सकता था।।

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    उसे भी समझ आ गया था,बांसुरी कभी उसके जैसे अनपढ़ गंवार से ब्याह नही कर सकती।।
    बांसुरी से ब्याह का उसे भी कहाँ कोई उत्साह रह गया था,बस उसके पीछे से रह गयी थी अम्मा के अपमान की कड़वी घूंट।।
    वो भी पढ़ा लिखा होता बड़के भैया की तरह तो मजाल थी कि बुआ उसकी अम्मा पर इतना कीचड़ उछाल पाती।।

     ठीक है बुआ जी ने जो कहा वो उनकी बुद्धि के हिसाब से कहा __ पर पढ़ी लिखी समझदार बांसुरी को क्या हो गया था,मान लिया की जब बुआ और अम्मा की भेंट हुई तब वो वहाँ नही थी,नौकरी करने दूसरे शहर चली गयी थी,पर क्या उसकी मां या दीदी ने उसे इस बार में कुछ भी नही बताया,, और अगर बता दिया तो क्या दोस्ती के नाते भी एक बार बांसुरी का फर्ज नही बनता था कि हमें फोन कर ले,अम्मा के अपमान के लिये माफी मांग ले।।
    कौन सा पहाड़ टूट जाता,इसे स्वाभिमान नही अभिमान कहा जाता है।।
   ये भी मान लिया कि हो सकता है उसकी माँ और बहन ने ना बताया हो,तो क्या इतना प्रेम भी दोनो के बीच नही था कभी,कि एक बार खुद ही हाल चाल पूछ ले।।

     उसने बांसुरी से जुड़ी किस वस्तु को खुद से अलग किया था ….ना उसने अलग होने की कोशिश की और ना हो पाया।।

    उसे पढाते समय के सारे छोटे छोटे नोट्स जो बांसुरी ने अपनी लेखनी से उकेरे थे,आज भी उसकी कॉपी में वैसे के वैसे दबे पड़े थे।।
     उसे याद है बांसुरी हर दिन पढ़ाना शुरु करने के पहले पन्ने पर सबसे ऊपर ‘राम ‘ लिखा करती थी, क्या उसकी वही आदत आज राजा के जीवन का हिस्सा नही हो गयी थी।।
      उसे खुद को चाय कभी पसंद नही थी,वो तो घर पे हमेशा दूध लस्सी या छांछ ही पिया करता था,वो तो बांसुरी की संगत में चाय की ऐसी लत लगी कि आज तक नही छूटी  और ना वो छोड़ना चाहता है।।

   उसे आज भी याद है ,जब पहली बार बांसुरी को अपनी बुलेट पे बैठाए वो हनुमान जी के मन्दिर गया था,,वहाँ मन्दिर से बाहर निकलते समय एक बूढ़ी अम्मा ने कुछ प्रसाद और फूल के साथ एक रक्षा सूत्र भी उसके हाथ में रख दिया था,उस रक्षासूत्र को बांसुरी ने उसकी कलाई पर बड़े प्यार से बांध दिया था…..
      आज इतने सालों में भी रोज़ रोज़ अपने खुशबूदार साबुन से उसे सुवासित कर उसके जीर्ण शीर्ण कलेवर के बावजूद अपने हाथ में बांधे रखा है।
एक से एक महंगी ब्रांडेड कमीज़ों से होड़ लगाता वह धागा आज भी उसके हाथ में वैसे ही बंधा है जैसा वो बांध गयी थी।।

    उस शाम के बाद सिर्फ उसी के बारे में सोच सोच के कैसा भयानक राज रोग पाल लिया था उसने…..
    दस दिन के ज्वर ने बुरी तरह से तोड़ कर रख दिया था,जब कुछ स्वस्थ अनुभव हुआ तो धीरे धीरे उसने अपने आसपास की दुनिया पर गौर करना शुरु किया,वापस अपना काम शुरु किया ,हालांकि मन तो किसी काम में नही लग रहा था,उस पर सदा सर्वदा बने रहने वाला गरदन का दर्द….
        पूरे छह महिनों तक उसने अपने दर्द को नज़र अंदाज कर दिया था…..
      नज़र अंदाज किया या शायद समझ ही नही पाया कि दर्द शारीरिक अधिक है या मानसिक!! उस पर उसके जाने के बाद किताबों से मोहब्बत सी हो गयी थी,,हर किताब में वही तो नज़र आने लगी थी, चाहे इतिहास हो या भूगोल,उससे इतर कुछ भी कहाँ दिखता था….
     पता नही उसे भूलने के लिये या उसकी यादों में और ज्यादा डूब जाने के लिये वो किताबों में समाता चला गया।।
   
     ऐसी ही एक दोपहर अपने कमरे में एक किताब में सर झुकाये पढ़ते में ऐसी तीव्र पीड़ा उठी की कराह के रह गया,बड़े भैय्या परेशान से उसे लिये डॉक्टर के पास भागे भागे गये थे।।
     सी टी स्कैन,एम आर आई और भी जाने कितनी जांचे हुई थी,और डॉक्टर साहब की बात ने घर भर को कितना डरा दिया था__सर्वाइकल में ब्लैक पैच दिख रहे हैं,या तो टी बी हो सकता है या फिर….. कैन्सर!!!

       अम्मा तो सुनते ही महामृत्युन्जय जाप मे बैठ गयी थी,दादी का रो रो के बुरा हाल था,भैया रात दिन एक कर मुम्बई के सबसे बड़े अस्पताल का अपोइंटमेंट जुगाड लिये थे …..
      कैसा बुरा समय था,जैसे हर तरफ सिर्फ और सिर्फ अन्धेरा ही अन्धेरा छा गया था।।
     उस समय भी एक मन कहता था कि काश बांसुरी वापस आ जाये पर दूसरा मन कहता कि अच्छा ही हुआ जो वो पहले ही चली गयी क्योंकि अगर जिंदगी इतनी छोटी ही थी तो उसके साथ गुजारने के बाद उसे छोड़ कर मरना भी कहाँ आसान होता।।

    ऐसे ही बुरे वक्त में तो लोगों की पहचान होती है, कोई ऐसा दोस्त नही बचा था,जो गले लग के ना रोया हो,वो तो बड़े भैया ने डपट के रोक दिया था वरना प्रेम प्रिंस के साथ साथ लगभग मोहल्ले के 40 लड़के खड़े थे मुम्बई तक साथ जाने के लिये।।
     इतना सब होने पर भी क्या बांसुरी के घर वालों को कोई खबर नही पहुंची थी,और अगर पहुंची भी तो क्या वो लोग इतने निर्दयी थे कि उसे कुछ बताया तक नही!! और अगर इस सब के बाद उन लोगों ने उसे सब बता दिया तो फिर वो इतनी निष्ठुर कैसे हो गयी।।

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     तीन दिन की लगातार एक के पीछे एक हो रही जांचों ने कितना थका दिया था उसे,पर बड़े भैय्या किसी पहाड़ की तरह अडिग उसे संभाले खड़े रहे थे, हर जांच की रिपोर्ट के लिये एक जगह से दूसरी जगह भागते भैया का खुद का वजन एक हफ्ते में गिर गया था,पर उनके चेहरे पे उसने कोई खीज कोई झुन्झलाहट नही देखी थी।।
       कहीं जांच में कैन्सर आ गया तो इस बात से वो खुद कांप रहा था पर भैया का चेहरा आत्मविश्वास से दमक रहा था जैसे उसे बार बार आंखो ही आंखो मे दिलासा दे रहे हों__” छोटे तुझे कुछ नही होने दूंगा, यमराज की गोद से भी तुझे संजीवनी चखा के खींच लाऊँगा।।”
     आखिर भैया के विश्वास की ही जीत हुई,रिपोर्ट्स में बोन टी बी ही निकला।।घर के लोगों ने राहत की सांस ली….
     डॉक्टर की छै महीने की दवा के साथ ही अम्मा जाने कहाँ कहाँ के मन्नत के धागे भभूत क्या क्या नही ले आयी।।
     ऐसा लगने लगा था घर का बेटा नही पूरा घर बीमार है।।
      सभी की साधना सफल हुई,छै महीने की दवा के बाद एक बार फिर सारी जांच हुई और सब कुछ सामान्य आ गया।।
   पर इस पूरे समय अन्तराल में क्या कोई भी एक दिन एक क्षण ऐसा गया जब उसने बांसुरी को याद ना किया हो,,घर वालों के अपार प्रेम के सामने वैसे बांसुरी का कोई मह्त्व नही बचता था पर पागल मन को ये छोटी सी बात सम्झानी बड़ी मुश्किल थी,वो तो अपने पर ही अड़ा था।।

     पढ़ाई और किताबों में उसे दिन रात घुसे देख युवराज भैया ने ही बैंक की तैयारी को कहा और फॉर्म भी भर डाला ।।
     पता नही बांसुरी के जाने के बाद ऐसा क्या हुआ जो वो जब कभी कोई भी इम्तहान देने बैठता ऐसा लगता जैसे बांसुरी का साया उसके ऊपर सवार है, पेपर हाथ में आते ही बांसुरी की आत्मा जैसे उसके अन्दर समा जाती और वो सारे प्रश्न बड़ी आसानी से हल कर जाता,पूरे आत्मविश्वास के साथ।।

     ये आत्मविश्वास असल मे बांसुरी का नही उसका खुद का था,उसके प्रेम का था।।

    उसे खुद को भी नही पता था की अपने आप को रात दिन किताबों में डूबा कर उसने अपने लिये प्रतियोगी परीक्षाओं को कितना आसान कर लिया था।
     ग्रेड बी निकालने के बाद उसे युवराज भैया से उसके मह्त्व का पता चला था।।

  अपनी बिमारी से उठने के बाद उसने कभी बांसुरी के बारे मे पता करने की ज़रूरत नही समझी थी,।।
  बस उसे इतना ही पता था की वो महाराष्ट्र मे कहीं रहती है।।

    पुणे के लिये निकलते समय उसे भैया ने एक बार याद भी दिलाया था__ ” राजा तुम्हारी बिमारी के समय सिद्धिविनायक मन्दिर में नारियल रख आये थे हम कि अब जब भी इधर आयेंगे उनके दर्शन को ज़रूर जायेंगे,अब जब पुणे तक जा ही रहे हो तो एक बार मुम्बई जाकर गणपति बप्पा को धन्यवाद भी बोलते आना।।”

    भैया की बात पहले भी उसके लिये पत्थर की लकीर थी पर अब जैसे उन्होनें उसे अपने बेटे की तरह संभाला था उनकी किसी बात को काटने का सवाल ही नही उठता था।।
     वैसे भी 5 दिन की कार्यशाला में दो दिन ऑडिट और तीन दिन ट्रेनिंग के थे,उसके बाद अगले दिन मुम्बई मे दर्शन कर वही से लौटने के लिये फ्लाईट की टिकट उसने करा रखी थी।।

****

   आज सिद्धार्थ के मुहँ से उसके और बांसुरी के रिश्ते के बारे में सुन अनजाने ही उसे अपने बीते साल याद हो आये थे ।।
      भले ही बांसुरी उसे छोड़ कर बहुत आगे बढ़ गयी थी पर क्या आज भी वो वहीं उसी मोड़ पर खड़ा उसका इन्तजार नही कर रहा था।।

       ये साथ गुज़ारे हुए लम्हात की दौलत
    जज़्बात की दौलत ये ख़यालात की दौलत
कुछ पास न हो पास ये सौगात तो होगी बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी…..

यही गाना तो था जो जब कभी रेडियो पर बजता झट अम्मा आकर बन्द कर दिया करती थी,जैसे इस गाने को बन्द कर देने से राजा उन सभी लम्हों से बाहर निकल आयेगा।।

   खैर उसके नौकरी में आते ही घर वालों को लगने लगा था कि वो सामान्य होने लगा है…..
    उनका सोचना किसी हद तक सही भी था,वो सामान्य हो चला था ऐसा तो उसे खुद को तब तक लगता रहा जब तक उसने बांसुरी को देखा नही था।

  पहले दिन जब वो दरवाजा खोल के अन्दर आकर खड़ी हुई,उसे देखने के बाद क्या चाह कर भी वो उससे नजरें हटा पा रहा था…..
     उसे देखते ही सारी रंजिशे कैसे छू मंतर हो चली थी,अपना खुद का हृदय भी अदृश्य रूप से उसीके चरणों में जा बैठा था,,कितनी प्यारी लग रही थी और उतनी ही मासूम!! उसे देख लगा ही नही कि राजा की कोई भी तकलीफ उसे पता थी,क्योंकि अगर उसकी एक भी तकलीफ का पता बांसुरी को होता तो वो कभी उसे छोड़ कर नही जाती ।।

     लंच में उसे दूर अपने दोस्तों के साथ बैठा देख कैसे मन मसोस के रह गया था,कैसी जलन सी उठ रही थी हृदय मे,लग रहा था एक बार गले से लगा लूँ तो सारी जलन दूर हो जाये,ठन्डक पड़ जाये कलेजे में ।।
      पर हाय रे मन!!!होता भले अपना है पर सोचता दुनिया के बारे मे है।।
     अगर मैंने ऐसा किया तो लोग क्या सोचेंगे ,दुनिया क्या सोचेगी ।।और हम रह जाते हैं अपने विचारों के साथ अकेले,एक शून्य में!!
      जिस शून्य से हमें उबारने उसी दुनिया से कोई नही आता जिसके बारे में सोच कर हम अकेले पड़  जाते हैं।

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*********

  सिद्धार्थ के जाते ही नायर सर से बात कर उसने बांसुरी का नाम भी लिस्ट में जोड़ दिया।।
    ट्रेनिंग शुरु हुई,,नारायण सर के लेक्चर के बाद उसे ही वैश्विक अर्थव्यवस्था और मुद्रा के स्थिरीकरण के बारे में बोलना था।।

    बोलना शुरु करने के पहले उसने अपनी वॉलेट में एक बार झांक के उसमें लगी तस्वीर को देखा और राजा से वापस आर के बन अपनी स्पीच बोलने में लग गया।।

     लगातार 3 घन्टे बोलने के बाद वो वापस अपनी सीट पर आ गया,लंच के बाद के सेशन में लोग अपनी क़्वेरीस पूछने वाले थे।।

    लंच में कैन्टीन में माला और राहुल के साथ बैठी बांसुरी  की निगाहें दरवाजे पर ही टिकी थी कि कब राजा आयेगा,,,उसकी टीम  के सद्स्य एक एक कर आते गये,पर वो नही आया।

   क्रमशः

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aparna…

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शादी.कॉम – 24

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  शादी डॉट कॉम:- 24
                   

                  रिवॉलविंग चेयर पे वही तो बैठा था,  अपनी सफेद कमीज की बाहों को कुहनीयों तक मोड़ कर दाहिने हाथ मे ऑडिटर वाली पेन्सिल पकड़े टेबल पर पड़ी फाइल को देखता,,बिल्कुल वैसे का वैसा।। पर बुआ सही कह रही थी ,कुछ दुबला हो गया था,और ये चश्मा कब लग गया जनाब को।।
       अपने इस अवतार में तो और भी लुभावना हो गया था राजा!!
      राजा को देख ही रही थी कि राजा से उसके किसी साथी ने कुछ कहा,जिसे सुन वो खिलखिला के हँस पड़ा और तभी उसकी नज़र दरवाजे पे खड़ी बांसुरी पर पड़ गयी।।

      कितनी दुबली हो गयी थी बांसुरी!! पहले से कुछ अलग भी लगने लगी थी,अपने लम्बे बालों को सदा बांधे रखने वाली बंसी के बाल कितने करीने से कटे संवरे उसने खुले छोड़ रखे थे,एकदम एक सीधी लाइन मे सतर सीधे बाल ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने गर्म लोहा चला दिया हो ,उसपर सामने की कुछ लटें हवा से उड़ कर बार बार आंखों के आसपास आ उसे परेशान कर रही थी,जिन्हें उतनी ही शालीनता से अपनी उंगलियों से कान के पीछे संवारती बांसुरी कितनी प्यारी लग रही थी….
     खुले बाल ,आंखों मे लगा काजल,कानों में छोटे-छोटे हीरे के कर्णफूल,और गले में सोने की पतली सी चेन,उसी से मैच करती रागा की घड़ी, स्मार्ट तो पहले ही थी अब महानगरीय छवि को इतनी आसानी से आत्मसात कर और भी मोहक हो चली थी…..

      दोनों ने अभी एक दूसरे को भर नज़र देखा भी नही था कि सिद्धार्थ की आवाज़ उनके कानों में पड़ी

सिद्धार्थ -“सर ये मेरी एम्प्लायी हैं बांसुरी!!,ये आपको इस फाइल की सारी डिटेल्स समझा देंगी, कम बांसुरी!!”

राजा-” हेलो!! प्लीज़ बी सीटेड!!

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बांसुरी- ” थैंक यू” बोल कर बांसुरी राजा की सामने की कुर्सी पर बैठ तो गयी पर उसे खुद अपने आप पर बड़ी शर्मिंदगी सी हो रही थी,,राजा को देखने के बाद उसकी हृदय गति जिस तीव्रता से बढ़ती चली जा रही थी ,ऐसा लग रहा था शताब्दी से होड़ लगा रही है।।
         कांपते पैरों को यथासम्भव संयत कर उसने झुक कर फाइल उठा ली,,ऑफिस की सबसे होनहार एम्प्लायी का सारा तेज़ आज चूक गया,वहाँ की सबसे धुरंधर खिलाडी का हर दांव टेढ़ा पड़ गया.. बांसुरी उसे देख चकित थी,उसे बार बार देखने का मोह त्याग नही पा रही थी,लेकिन वो अपने पूरे आत्मविश्वास के साथ मुस्कुराता उसके सामने बैठा एक के बाद एक हर साल का हिसाब उससे बड़े आराम से मांगता चला जा रहा था।

     इसी हड़बड़ी में किसी एक जगह पे गलती से छूट गये दस्तखत करने जैसे ही बांसुरी ने टेबल से पेन उठानी चाही,वहीं रखा पानी का गिलास लुढ़क गया, वो ज़मीन पे गिर के चकनाचूर होता उसके पहले ही राजा ने उसे पकड़ लिया __

  राजा– रिलैक्स बांसुरी!! आराम से बताती जाओ ,हमें कोई जल्दी नही है,हम पूरे पांच दिन यहाँ रुकने वाले हैं।।

   पूरे पांच दिन पर राजा ने सच में ज़ोर दिया था या बांसुरी के ही मन का वहम था,पर जो भी था उसका दिल तो बार बार यही कह रहा था कि ये पांच दिन उसके जीवन से कभी समाप्त ना हों।।

    इसके बाद करीबन तीन घन्टे दोनो फाइलों पर सर गड़ाये काम करते रहे,बीच में जितनी भी बातें हुई सिर्फ बैंक और बैंक के काम को लेकर ही हुई।।

    ऑडिटर टीम का लंच फाईव स्टार होटल में प्रस्तावित था,जहां सिद्धार्थ उन सब को लेकर जाने वाला था,पर टीम के सीनियर के साथ अन्य लोगों ने भी वही बैंक के कैन्टीन में ही खाने की इच्छा जाहिर की जिससे एक पल को सिद्धार्थ भी सोच में पड़ गया कि कहीं ये भी टीम की इंटर्नल ऑडिट का हिस्सा तो नही?
      पूरी टीम को लिये सिद्धार्थ कैन्टीन में पहुंच गया, वहाँ पहले से बैठे सभी कर्मचारी सतर हो गये, पर टीम पूरी तन्मयता से मेन्यू देखने में ही व्यस्त थी,जब सभी को समझ आ गया कि ये उनके काम का हिस्सा नही है तब एक बार फिर सभी अपने खाने पीने और बातों में लग गये ।।
 
      उसकी टेबल से कुछ दूर हट कर जिस टेबल पर सिद्धार्थ ने सब को बैठाया वहाँ जान बूझ कर राजा ने ऐसा किया या अनजाने में बांसुरी समझ नही पायी पर जिस कुर्सी को सिद्धार्थ ने राजा के बैठने के लिये खोला उसे छोड़ राजा उस कुर्सी पे जा बैठा जिससे वो ठीक बांसुरी के आमने सामने पड़ गया।।

     वो तो बड़े मज़े से सबसे हँसता बोलता खाता रहा पर बांसुरी के गले से फिर एक निवाला भी नीचे नही उतरा….सभी का साथ देने वहाँ बैठना भी ज़रूरी था,पर अपनी प्लेट और चम्मच से निरर्थक खेलती बांसुरी को बार बार यही लग रहा था की सामने बैठे वो उसे देख रहा है,और इत्तेफाक से जब जब बांसुरी की नज़र राजा पर पड़ी हर बार उसने उसे खुद को देखता हुआ ही पाया….शरमा कर कभी बाल ठीक करती कभी पहले से जमे आंचल को सही करती बांसुरी वहाँ से निकल भागने को तड़प उठी।।

    इतने सालों में मन ही मन जिसका नाम जपती चली जा रही थी ,आज उसी से ऐसे आमना सामना हो गया कि सारा प्रेम सरल संकोच में बदल गया।।
  
      लंच समाप्त कर टीम वापस अपने काम में लग गयी,उन लोगो के रुकने की व्यवस्था बैंक की तरफ से मैरियट में की गयी थी।।
     लंच के बाद बांसुरी वापस अपने डेस्क पर आ गयी थी,कुछ थोड़े बहुत काम निपटा के टीम वहाँ से निकल गयी तब एक बार फिर सिद्दार्थ ने मीटिंग बुला ली।।

“गाईज़ आज का तो काम निबट गया,पर कल ये लोग सारे इंटरनल आडिट शुरु करेंगे, कल का दिन हमारे लिये थोड़ा मुश्किल हो सकता है ,सो बी रेडी”

  सिद्धार्थ के जाते ही माला दो कॉफ़ी के कप पकड़े बांसुरी की डेस्क पर आ गयी।।

” बंसी !! यार देखा तूने क्या हैंडसम बंदा आया है, हाय!!! ऐसे बंदे आयें तो मैं रोज़ ऑडिट करा लूँ ।”

राहुल- ” सुना है ग्रेड बी क्लियर किया है उसने ,वो भी एक बार में।।सही है बॉस ….. भगवान जिसे देतें हैं छप्पर फाड़ के देतें हैं ।”

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माला- ” सही है !!! क्रीम जॉब है,फुल ऐश!! बंदा शकल से ही पैदाईशी ब्रिलीयन्ट दिख रहा,स्कूल कॉलेज टॉपर टाईप,है ना बंसी ।।

   माला की बात सुन बांसुरी को ज़ोर की हँसी आ गयी,वो कैसे मुहँफट होकर राजा को गधा बोल देती थी ,और आज देखो उसके ही ऊपर पहुंच गया।।

माला– नाम क्या था राहुल ,उस बंदे का?? और है कहाँ का??

‘राजकुमार ‘ बोलते बोलते बांसुरी चुप रह गयी

राहुल- तुझे बड़ी माख लगी है पता करने की,,शादी करने का विचार है क्या??

माला– और क्या ? ऐसा सही प्रपोसल मिले तो क्यों ना शादी कर लूँ,तेरे जैसे बन्दर से तो फार बेटर है।

राहुल- आर के बोल रहे थे सब के सब ,हम तो भाई आर. बी.आई. वालों को सर ही बोलतें हैं,क्या पता कल को आठ दस साल बाद ये गवर्नर बन जायें और इनके दस्तखत वाले नोट से हम अपना राशन खरीदें ।
माला– हम्म पर जो भी हो,बंदा तो दिल ले गया मेरा, चल यार बांसुरी अब घर चलें,आज तो थकान भी बड़ी मीठी सी लग रही।।

   सब के सब हँसते हुए घर को निकल पड़े ।।

************

     बांसुरी बाथरूम से हाथ मुहँ धो कर निकली तब तक में माला चाय बना कर ले आयी और रेडियो ट्यून करने लगी__

           मन ये साहेब जी, जाणे हैं सब जी
              फिर भी बनाए… बहाने
          नैना नवाब जी, देखें हैं सब जी
              फिर भी न समझे… इशारे

          मन ये साहेब जी, हाँ करता बहाने
            नैना नवाब जी, न समझे इशारे
              धीरे-धीरे नैनों को धीरे-धीरे
                  जीया को धीरे-धीरे
                     भायो रे साएबों

धीरे धीरे कहाँ वो तो बहुत तेज़ी और मजबूती से हृदय में अपना आसन जमाये बैठा है…..
      बांसुरी एक बार फिर सोच मे पड़ गयी__ इतना लम्बा समय तो नही बीत गया था फिर ये कैसा संकोच दोनो के बीच पसर गया था।
     “चलो मैं तो लड़की हूँ,लड़कियाँ स्वभाव से ही संकोची होती हैं,पर वो तो आगे बढ कर बात कर सकता था,पूछ सकता था__ कैसी हो बांसुरी ?
   पर उसने भी कहाँ ज़रूरत समझी हालचाल पूछने की,अरे इतने साल कहाँ रही,कैसे रही,कुछ जानने का मन नही किया??
   कैसे बना रहा जैसे कोई जान पहचान नही ,सारा वक्त बस फाइल्स और बैंक की ही बातें करता रहा, जैसे बहुत ही गम्भीर हो अपने काम के लिये, क्या मै नही जानती,एक एक रग से वाकिफ हूँ,और मेरे सामने ही इतना दिखावा!!”

    दिखावे वाली बात सोच बांसुरी को खुद पर ही हँसी आ गयी__ कहाँ किया उसने दिखावा?? कोई दिखावा बनावटीपन ना उसे पहले कभी छू पाया था ना अभी!! वो तो बिल्कुल सामान्य बना हुआ था, ना उसे बांसुरी से कोई शिकवा था ना शिकायत!!
   और शायद इसी बात से बांसुरी ज्यादा परेशान हो उठी थी।।
     अगर कभी भी दोनो के बीच प्रेम था तो उसे वापस मिलने के बाद शिकायत करनी चाहिये थी ना, पूछना चाहिये था मुझे अकेला छोड़ कर कहाँ  चली गयी थी बांसुरी पर नही वो तो बिल्कुल तटस्थ बना हुआ था,ऐसे मुस्कुरा रहा था जैसे असल में उसे अब कोई फर्क ही नही पड़ता बांसुरी रहे या ना रहे।।
      पर जब फर्क ही नही पड़ता तो ऐसे घूर घूर के देख क्यों रहा था।।

माला- मैडम जी कहाँ खोयी हुई हो!!! इतनी देर से देख रही हूं बाई गॉड,खुद से बातें कर रही हो, क्या हो गया भई ,,सिद्धार्थ की याद सता रही क्या??

   माला बांसुरी को देख ज़ोर से हंसने लगी

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माला– नही नही अच्छा है,लगे रहो!! बेटा शादी तो करनी ही है एक दिन,और बॉस अगर आप पे फिदा है तो इससे अच्छा तो कोई ऑप्शन हो ही नही सकता ।।।

बांसुरी- चुप करो यार!! ऐसा कुछ नही है,हम तो कुछ और सोच रहे थे…..

माला — अब तो लग रहा जैसे इस आर.के. के चक्कर में मुझे भी तेरे जैसे सोचने की आदत पड़ जायेगी।।
     क्या महक रहा था यार बंदा ,जाने कौन सा पर्फ्यूम लगाया था उसने।

बांसुरी– डेविडॉफ

माला– क्या?? क्या कहा तूने,,तुझे कैसे पता??

बांसुरी– हमें कैसे पता होगा,तुम खुद ही सोचो …. अरे यार हमने तो ऐसे ही मजाक मे कह दिया,और तुम सीरियस होकर बैठ गयी।।

माला– हम्म सही कहा ,पर यार राहुल कह रहा था बंदा तेरे ही शहर का है….यार इसी बहाने बात करवा दे मेरी ,कुछ तू अपने शहर की बात पूछ लियो और उसी बहाने मैं उसे ताड़ लूंगी।।

   बाँसुरी मुस्कुरा कर रसोई में चली गयी__” पुलाव बनाने जा रही हूँ,चलेगा ना।”

माला- दौड़ेगा मेरी जान!! तेरे हाथ के मटर पुलाव पर तो ‘ मैं वारी जावाँ,’।।

***************

अगले दिन सुबह से ही बैंक में अफरा तफरी मची थी, सभी टीम मेंबर्स बहुत गम्भीरता से हर एक फाइल का मुआयना कर रहे थे।।
     टीम के सीनियर तीनो लोग ऑडिट में व्यस्त थे , सभी किसी ना किसी काम को करने में लगे थे बस एक वो ही कहीं नही था।।
   
          चारों तरफ बार बार देखने पर भी बांसुरी को राजा नज़र नही आ रहा था,पहले उसे लगा शायद सिद्धार्थ की केबिन में होगा इसिलिए एक बार वो बहाने से वहाँ भी हो आयी,पर वहाँ भी नदारद।।
     दूसरे ऑफिस रूम में भी नही था,यहाँ तक की हार कर बांसुरी एक बार लॉकर रूम भी झांक आयी, आखिर आज गायब कहाँ हो गया??

         अपने डेस्क पे वापस आ कर बाँसुरी ने फाइल खोली ही थी कि उसे अपने पीछे से वही आवाज़ सुनाई दी__ ” हमें ढूँढ रही थी??”

   चौंक कर बांसुरी ने पीछे देखा,,,राजा खड़ा मुस्कुरा रहा था,वो भी मुस्कुरा उठी…..

सिद्धार्थ– सर!!आईये आईये ,आप ही का वेट कर रहे थे,,अब तबीयत कैसी है आप की,is everything alright?”

राजा- yeah everything is fine,,चलिये आगे का काम देखा जाये।।

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    बांसुरी पे एक के बाद एक बम फोड़ा जा रहा था, पहले आर.बी.आई. की टीम के हिस्से के रूप मे, फिर ऐसी धुआँधार अन्ग्रेजी बोल के…..
    कितना बदल गया था वो,,पर मन से आज भी वही कानपुर का अपने मोहल्ले का राजा भैय्या ही था…..
       जी में तो आ रहा कि एक बार गले से लग के इतने दिनों के सारे ताने उलाहने माफ कर लिये जाये,पर सामने पड़ने पर तो हाथ भी मिलाने की हिम्मत नही हो रही थी।।

**************

    लंच के समय एक बार फिर बांसुरी ने सोचा __ “अगर आज सामने की कुर्सी पर बैठा तो बिना किसी लाज शरम के मैं भी आँखे खोल के देखूँगी….कुछ ज्यादा ही फ्रैंक हो रहे हैं जनाब!!

   पर हाय रे मन!! जो सब सोच सोच के भावी रूपरेखा तैयार की जाती है ,ज़रूरी नही कि ये मन उस समय आपका साथ दे और आपको सब अपने मन का पूरा करने दे।।
      बांसुरी का मन खुद हर बार उसे धोखे पे धोखे दिये जा रहा था,बेचारी कुछ सोच के रखती पर राजा के सामने पड़ते ही हो कुछ जाता।।

     एक बार फिर वही हुआ!!,वो बड़ी शान से अपनी टीम के साथ आया और ठीक उसके सामने की कुर्सी खींच बैठा गया….एक बार फिर बांसुरी कट के रह गयी,ना उसके बाद वो माला से कोई बात कर पायी और ना ही ढंग से कुछ खा पायी।।

    टीम के सदस्यों के खाने की व्यवस्था देख सिद्धार्थ बांसुरी की टेबल पे चला आया ,और एकदम उसकी कुर्सी के पास ही खड़ा हो कर उन लोगों को आगे के बारे में कोई जानकारी देने लगा….
       सिद्धार्थ पहले भी ऐसा करता था या आज ही कर रहा था पर बांसुरी को उसका इतना घुल मिल के  बात करना रास नही आ रहा था….

     बात करते करते सिद्धार्थ ने बांसुरी की प्लेट से एक इडली उठा ली और बड़े मज़े से चटनी लगा कर खाने लगा,पर उसकी इस हरकत पर बांसुरी तिलमिला कर रह गयी,मन ही मन प्रार्थना करती हुई कि राजा ने ना देखा हो उसने जब राजा की तरफ देखा तो वो उसे ही देख रहा था।।
    अब इतनी दूर से वो उसे समझाती भी कैसे कि सिद्धार्थ की इस हरकत में बाँसुरी की कोई जिम्मेदारी नही थी….पता नही आज ही वो क्यों इतना फ्रेंडली हो रहा था।।

    बाँसुरी ने अपने सूखते गले को तर करने पानी पीकर गिलास नीचे रखा और सामने देखा तब तक राजा वहाँ से जा चुका था।।

***************

   राजा को सिद्धार्थ का इस तरह बांसुरी से घुलना मिलना पसंद तो नही आ रहा था,पर वो भी कॉरपोरेट जगत की सभ्यता को समझता था,इस बात को जानने लगा था कि साथ काम करते हुए अक्सर ऐसे रिश्ते बन जाते हैं  ।।
     तभी राजा को फोन बजने लगा उसे उठाये वो बाहर निकल गया।।

   बाँसुरी ने जब राजा को अपनी कुर्सी पर नही पाया तो वो भी लपक के बाहर निकल गयी….

माला– क्या हुआ बंसी ?? कहाँ चल दी तुम?

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बांसुरी– बस अभी आयी……बिना उन लोगो की तरफ देखे वो जल्दी से कैन्टीन से निकल ही रही थी कि बाहर गैलरी में इधर से उधर घूमते हुए फोन पर बात करते राजा पर उसकी नज़र पड़ गयी,राजा ने भी उसे देख लिया,वो मुस्कुराते हुए उसकी तरफ बढ़ आया__
 
   ” बन्टी का फोन था,उसकी पोस्टिंग मुम्बई में ही है, आज शाम मुझसे मिलने पुणे आ रहा है।।

” अच्छा” बांसुरी को इससे अधिक कुछ सूझा ही नही कि क्या कहे।।

राजा– तुम भी चलोगी डिनर पर?? यहीं कहीं आस पास चले जायेंगे जिससे तुम्हें लौटने मे देर ना हो।।

    उफफ!! कितना औपचारिक निवेदन था ये,,अरे पूरे रौब से भी तो कह सकता था,कि बांसुरी रात मे हमारे साथ तुम भी डिनर पर चलना पर नही….
       बांसुरी को अपने विचारों में खोये देख राजा कुछ बोलने ही जा रहा था की उसने तुरंत ही हामी भर दी,बांसुरी को लगा अगर उसने जल्दी से जवाब नही दिया तो कहीं राजा अपनी योजना ही ना बदल दे।।

” हाँ हम आ जायेंगे,पर आना कहाँ हैं??”

” रुके तो हम मैरियट में हैं,, चाहें तो वहाँ डिनर कर सकते है पर वापसी में तुम्हें थोड़ा दूर पड़ेगा।।”

” कोई बात नही,हम आ जायेंगे।।

” ठीक है ,ऐसा करना अपनी सहेली को भी लेते आना जिससे अकेले ना लौटना पड़े ।।”

  बांसुरी ने हाँ में सर हिलाया और मुस्कुरा के वापस चली गयी पर ये आखिरी बात दिल में फांस की तरह चुभ गयी….माला को लेकर आने क्यों बोला आखिर राजा ने??

*************

    वैसे हमेशा सिर्फ दस मिनट में झट से तैयार होने वाली बंसी को आज क्या पहनूँ क्या ना पहनूँ सोचने में ही आधा घंटा लग गया…..
     आधे घन्टे से तैयार हो कर बैठी माला ने जब हर एंगल से अपनी सेल्फी खींच ली तब झल्ला के उसने ही आलमारी से एक मैरून कुर्ता निकाल उसके हाथ में पकड़ा दिया__
    ” बन्सी अब और देर की ना तूने,तो मैं अकेली ही चली जाऊंगी।”

  बांसुरी तैयार होकर आयी तो माला उसे देखती ही रह गयी__
    ” क्या बात है बन्सी!! आज तो मतलब खूब जम रही हो ,,दिन भर जिसके गाने सुनती हो ना तुम्हारी प्यारी सुचित्रा सेन उनकी नवासी रायमा जैसी ही लग  रही हो, भई अब तो बता दो ,हम जा कहाँ रहे हैं ।।

” सरप्राइस है आपके लिये,चलिये तो सही।।”
  मुस्कुराती हुई बंसी दरवाजा खोल बाहर निकल आयी।
 
    दोनों के वहाँ पहुंचने तक राजा और बन्टी भी हॉल में आ चुके थे,और उन्हीं दोनो का इन्तजार कर रहे थे।।

माला–उफ अल्ला!! बन्सी तू वापस चल घर,फिर बताती हूँ तुझे,,एक बार तो बताती की हम आर के से मिलने आ रहे हैं,यार मैं भी कुछ ढंग का पहन लेती, कैसी बेकार सी जीन्स डाल ली मैंने।।

  दोनों को देखते ही राजा ने खड़े होकर दोनो का मुस्कुरा के अभिवादन किया और माला का बन्टी से परिचय करवा दिया_
” ये मेरे कजिन है रविवर्मा,मुम्बई एक्सेंचर में काम कर रहे हैं,मेरा काम पुणे में है पता चला तो मुझसे मिलने आ गये।।
    और बन्टी ये हैं माला जी,ये भी उसी बैंक में काम करती हैं जहां बांसुरी ।।

बन्टी– हेलो जी!! आप दोनो से मिल कर बड़ी खुशी हुई,,क्या हाल है बंसी !!तुम तो यार और दुबली हो गयी हो,वैसे अच्छी लग रही हो।।

माला को कुछ भी समझ नही आ रहा था वो कभी बांसुरी को देखती कभी अपने सामने बैठे दोनो लड़कों को।।

  बांसुरी ने दो दिन से राजा को फॉर्मल कपडों में ही देखा था,उसे अभी ब्लू डेनिम और टी शर्ट में देख थोड़ा संकोच कम होने लगा।।
   इत्तेफ़ाक़ से राजा ने भी मैरून टी शर्ट ही पहनी थी

बांसुरी– कैसे हैं आप बन्टी भैया,क्या हाल चाल हैं ।

बन्टी–हाल तो फिलहाल ए सी है,और चाल चलन के तो हम बचपन से बड़े पक्के हैं।।

राजा– हाँ ये मुझसे बेहतर कौन जानता है,,अरे बन्टी अकेले ही आये तुम रानी को भी लेते आना था।।

बन्टी– मैं ले तो आता लेकिन उनका चौथा महीना चल रहा है,इसिलिए इतनी लम्बी ड्राइव के लिये उसने मना कर दिया।।

बांसुरी– एक मिनट !! किसने मना कर दिया?? क्या चल रहा है?? मुझे कुछ समझ नही आ रहा ,साफ साफ बताईये।।

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राजा– अरे तुम्हें पता नही शायद!! हमारे बन्टी भाई की शादी हो चुकी है,पूरे दो साल हो गये शादी को।।

  ये सुनकर बांसुरी ने बन्टी की तरफ खुशी से चहक के देखा कि बन्टी पहले ही बोल उठा__

बन्टी– यार बन्सी तुम ना तो एफ बी पे हो ना इंस्टा पे , मैं ढूँढता भी कैसे,वैसे मैने राजा को बोला था,तुम्हे बताने के लिये…पता नही इस नामुराद ने बताया क्यों नही।।

बांसुरी– वो सब बाद में,पहले आप अपनी शादी की कहानी तो बताइये।।

बन्टी– हाँ बिल्कुल!! वो तो सबसे ज़रूरी है।।
देखो भई हुआ ये कि दिल्ली में मेरी एक नई गर्लफ्रैंड बन गयी,जिसको खाने का बड़ा शौक था,वो रोज़ सुबह फोन पे यही प्लान करती की किस नये रेस्तराँ को आबाद किया जाये,और बस इतने से पेट नही भरता था उसका,,मेरा दिमाग भी बराबर खाती थी, जाने उसे कौन सी ऐसी गलतफहमी थी कि अंबानी मेरे बाप का नौकर है।।रोज़ नही फरियाद,रोज़ नयी गुजारिश ,अच्छा और फोन इत्ते प्यार से करती ‘ हेलो बाबू’ की मैं एकदम पिघल जाता था।।
     वैसे घंटो बात करती फिर जब उसका रखने का  मन करता तो बहाना मार देती ‘ बेबी मॉम आ रही है’
पहले तो साला मैं गधे पे गधा बनता गया,फिर एक दिन शाम को जब हम लौट रहे थे मैनें कहा घर तक छोड़ देता हूँ,कम्बख्त कहती है-‘ नो बेबी !! होस्टल वॉर्डन  ने देख लिया तो मुसीबत हो जायेगी!!
  मैं सोच में पड़ गया कि होस्टल में मम्मी कैसे आ जाती है पर मैनें कुछ कहा नही।।
   फिर बाद में समझ आया मम्मी वम्मी नही आती वो तो उसके दूसरे बॉयफ्रेंड का फोन आता था,,बेमुराद, बेमुरव्वत, बेवफा !! मैनें लाखों उड़ा दिये उसके गोलगप्पो के पीछे।।
    उसी चक्कर में तो रानी से मिलना हुआ।।

बांसुरी– अच्छा कैसे??

बन्टी– मेरी एक्स को एक दिन गोलगप्पे की तलब लगी,जो उसे हर दो दिन के बाद लग ही जाती थी,तो हम दोनो गली मुहल्ले ढूँढ ढाँढ के उसके पसंदीदा गोलगप्पे वाले तक पहुंच गये …..अब इनका शुरु हुआ ,एक पे एक खाना और उसपे तुर्रा देखो__” भैय्या मिर्ची तो डाली ही नही,थोड़ा और तीखा करो ना” वो गोलगप्पे वाला बेचारा कई बार मिर्ची डालने के बाद अपना एवरेस्ट का पैकेट निकाल चेक करने लगा __ साले टी वी पे बोलते हैं सही तीखा सही लाल ।।और ये धुरंधर यहाँ ‘ ना ही तीखा ना ही लाल’ कर रही है।।
      भर पेट खाने के बाद जब आगे बढ़े तो उसकी पेट में कोहराम मच गया,,एवरेस्ट के तीखालाल ने अपना कमाल दिखाया।।
      मैं  उसको लेकर सीधा एम्स भागा,वहाँ मैडम को तुरंत ऐडमिट कर लिया गया…..
   वहीं हमारी मुलाकात हुई रानी से!! रानी को तो जानती हो ना??

बाँसुरी ने राजा की तरफ प्रश्न पूछती निगाहों से देखा उसने आंखों से ही हाँ कह कर समाधान कर दिया

बन्टी– रानी वहाँ सर्जरी में एम एस कर रही थी,मैने उसे प्रिया से मिलवाया और दोस्ती का वास्ता देकर प्रिया की एक्स्ट्रा केयर लेने को कह ऑफिस निकल गया।
   अब जब जब मैं ऑफिस से फोन करुँ प्रिया का फोन बिज़ी आये,बाद मे उसने कहा मम्मी से बात कर रही थी।।
   पर डिस्चार्ज के समय प्रिया को बाहर भेज रानी ने मुझे सारी सच्चाई बता दी उसके दूसरे बॉय फ्रेंड के बारे में ।।
   बस यही से रानी से दोस्ती शुरु हुई और घर वालों के आशीर्वाद से दो साल पहले शादी भी हो गयी।।

माला– वॉव मज़ा आ गया सुन के!! अब प्लीज़ कोई मुझे ये बतायेगा कि आप सब एक दूसरे को कैसे जानते हैं ।।

बन्टी– क्यों इन दोनों ने तुम्हे कुछ बताया नही।।

बांसुरी ने घबरा के बन्टी की तरफ देखा ही था की राजा की आवाज़ कानों में पड़ी __

राजा- हम दोनो एक ही शहर से हैं,बल्कि एक ही मोहल्ले के हैं,इसिलिए अच्छी जान पहचान है!!बस!!

   मैरियट के बड़े से हॉल में एक तरफ गज़ल सन्ध्या का आयोजन किया गया था,जहां कोई एक साहब गुलाम अली जी की गज़ल गा रहे थे__

  इस शहर में किस से मिलें हम से तो छूटी महफिलें
    हर शख़्स तेरा नाम ले, हर शख़्स दीवाना तेरा।
    कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तेरा।
    कुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा तेरा।।

  डिनर होते होते ग्यारह बज चुके थे ,,इतना समय हो गया देख कर राजा थोड़ा परेशान होने लगा__

राजा — हम साथ चलें क्या बांसुरी,तुम लोगों को वहाँ ड्रॉप कर हम वापस आ जायेंगे।।

बांसुरी– नही नही !! आप परेशान मत होईये,,पुणे तो जागता शहर है,वैसे भी सदाशिव पेठ में भीड़ भाड़ रहती है।।

राजा ने उनके लिये कैब बुक करी और  बांसुरी के
बार बार मना करने के बावजूद गाड़ी में उन दोनों को पीछे बैठा कर खुद ड्राईवर के बाजू वाली सीट पर बैठ गया,दुसरी कैब लेकर बन्टी भी मुम्बई निकल गया।।
 
     उनकी कैब सदाशिव पेठ की तरफ भाग चली, एफ एम में चलते गाने के साथ बांसुरी एक बार फिर कानपुर की गलियों में और राजा में खो के रह गयी…..

         मेरी साँस साँस महके
              कोई भीना भीना चन्दन
         तेरा प्यार चाँदनी है
               मेरा दिल है जैसे आँगन
         हुयी और भी मुलायम
                मेरी शाम ढलते ढलते
        हुयी और भी मुलायम
                मेरी शाम ढलते ढलते
         ये कहाँ आ गये हम
                 यूँ ही साथ साथ चलते………

क्रमशः

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aparna…
    
      

शादी.कॉम -23

मुलाकात : राजा और बांसुरी की

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   शादी डॉट कॉम:- 23

     समय!!! समय को किसी से लेना देना नही होता, उसे सिर्फ चलना है ,चाहे कोई लाख चाहे की वो रुक जाये ठहर जाये ,पर नही समय अपनी गति से ही भागेगा।।

      इन पांच साढ़े पांच सालों में राजा और बांसुरी के घरों में परिवारों में मुहल्ले में बहुत कुछ बदल गया।
   युवराज भैया ने दो नयी एजेंसी डाल दी,सिर्फ रुपयों पैसों मे ही उनका रुतबा नही बढ़ा बल्कि घर परिवार में भी बढ़ गया,जहां पहले वो घर के सबसे बड़े लड़के थे अब एक छोटे से बालक के पिता हो गये, रूपा पहले ही अभिमानिनी थी अब पुत्र की जननी होकर उस अभिमान के सोने पे सुहागा चढ़ गया।।
     खाता पीता परिवार सदा मधुमक्खियों के छत्ते सा होता है,छत्ते में एकत्र मधु के लालच में जैसे मक्खियां भिनकती हैं ऐसे ही नाते रिश्तेदार घेरे रहते हैं ।।
   
    राधेश्याम जी के घर पर भी बेला कुबेला कुछ ना कुछ होता ही रहता था,कोई तीज त्योहार,मुंडन छेदन,सीक सुहागिल हो,इसी बहाने घर परिवार की औरतों को बहाना मिल जाता,पहले तो सब दबी ढकी आवाज़ में ही राजा के ब्याह के प्रगति पत्र का जायजा लेती थी,पर अब वही ज़बान खुलने लगी थी।।
     जब घर की माल्किन ही मुहँ मे दही जमा के बैठी हो तो बोलने वालियों को मौका तो मिल ही जायेगा ना।।
    
” काये हो सुशीला बहन?? कब खिला रही हो रजुआ के ब्याह का लड्डू।”
     पड़ोस की बिन्नी काकी अपनी मित्र मंडली में अपने मुहँफट स्वभाव के लिये जानी जाती थी

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” अरे बिन्नी जिज्जी हम तो सुन रहे रजुआ कहीं का बड़ा आफीसर बन गया है,,क्यो सुसीला  तुम नही बताई कभी ,अरे कहाँ का लार्ड कमिस्नर हो गया है राजा।”

” अरे तुम लोग  भी ना!! अपने अपने कोच के पेड़े को निहारो ना,सुहागिल तो निबटने दो तब हम बताएंगे कहाँ का लार्ड गवर्नर बना है हमारा राजा।”

“चाची जी!! लल्ला जी के लाने ही तो अम्मा जी सुहागिल खिला रही हैं,जो मन्नत मानी थी वो पूरी जो हो गयी।।”

” हां भई रूपा !! अब तो जैसे तुम्हरे कन्हैय्या को गोद खिला रही ऐसे ही एक और बहुरिया आ जाये उसका भी एक आध लड़का लड़की कुछ हो जाये बस फिर तो सुसीला और भाई साहब के सब तीरथ हुई जायें।”

” तुम्हरे मुहँ मा घी सक्कर।।”

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         जी में आता है, तेरे दामन में सर झुका के हम
               रोते रहें, रोते रहें…….
        तेरी भी आँखों में, आंसूओं की, नमी तो नहीं
        तेरे बिना ज़िन्दगी से कोई, शिकवा, तो नहीं..
       तेरे बिना ज़िन्दगी भी लेकिन, ज़िन्दगी, तो नहीं
       ज़िन्दगी नहीं, ज़िन्दगी नहीं, ज़िन्दगी नहीं……

माला– ओ मैडम !! और कोई गाना नही है आपके पास!!क्या यार,सुबह सुबह यही मनहूस गाना बजा देती हो।।

   माला की बात पर बांसुरी मुस्कुरा के वापस तैयार होने लगी….

माला– बस यही तो है!! आपसे हम कुछ भी कह लें आप बस अपनी कातिल मुस्कान फेंक दीजिये हम पे

बांसुरी- चलो चलो जल्दी से तुम भी तैयार हो जाओ, आज  बॉस ने तो सुबह सुबह ही मीटिंग बुलाई है।

माला- हाँ जी मुझे पता है, सुनने में आ रहा था की आर.बी.आई. की टीम आने वाली है।।

  बाँसुरी ने हाथ पे घड़ी बांधते हुए हामी में सर हिला दिया।।

     अम्बा जी गढी से एक साल पहले ही बांसुरी को अपनी दुसरी पोस्टिंग पुणे में मिल गयी थी, पहले पहल वर्किंग वीमेंस हॉस्टल मे  रहने के कुछ समय बाद सदाशिव पेठ में बांसुरी अपने ऑफिस की कुलीग माला के साथ शेयरिंग फ्लैट में  रहने चली आयी थी…..
        दोनों सखियाँ साथ ही ऑफिस आती जाती,
मस्तमौला और हंसमुख स्वभाव की माला बेहद बातूनी थी इसीसे उसके स्कूल कॉलेज घर परिवार ,पास के दूर के नाते रिश्तेदार हर किसी के बारे में बांसुरी को सब कुछ पता था,पर माला के बार बार पूछने पता करने पर भी जाने क्यों बांसुरी ने उससे उतनी ही बातें बताईं जितनी ना बताती तो भी कोई फर्क नही पड़ता।।

      बांसुरी का अपने घर जाना बहुत कम हो गया था,हर रविवार वो अपनी मम्मी को फोन कर घर परिवार का हाल समाचार लेती रहती थी, गाहे बगाहे बड़ी बहन वीणा भी उसे फोन कर शादी कर लेने का उलाहना सुनाती रहती थी।।

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     मम्मी पापा से बात कर घर की ,अपने मोहल्ले की अपने शहर की याद जब हद से ज्यादा सताने लगती तब वो अपनी छोटी सी टाउनशिप में बने बड़े से जिम पहुंच जाती,माला इस बात पे अक्सर उसे आड़े हाथों लिया करती __ ‘ अरे कभी समय भी तो देख लिया कर,,रोज़ तो सुबह सुबह जिम पहुंच ही जाती है,फिर अचानक क्या होता है तुझे जो कभी शाम मे कभी रात में 9 बजे जिम भाग जाती है, यार फिटनेस फ्रीक होना अच्छी बात है पर तू तो साइको होती जा रही है,अपने आप को देख ….बिल्कुल जीरो फिगर हो गयी है,कहीं कुछ समय बाद गायब ना हो जाना।।

      ” तेरी तो हर बात अजीब ही लगती है बन्सी!! अब इस मोबाइल के ज़माने में चिट्ठियां कौन लिखता है तुझे,,किसी दिन तेरे इस पेन फ्रेंड को पकड़ के रहूंगी।”
   पर माला बस ताने मार के अपनी बात खुद भूल जाती,इतने महिनों से आने वाली चिट्ठियों को ना कभी उसने पढ़ने की कोशिश की और ना चिट्ठी भेजने वाले को पकड़ने की।।
      हर पन्द्रह बीस दिन में आने वाली इन चिट्ठियों में जैसे बांसुरी की जान बसती थी,, बुआ की लिखी इन चिट्ठियों में सारे रिश्तेदारों का हाल समाचार रहता था,पर कहीं किसी कोने में बुआ हमेशा उसके बारे में भी एक लाइन लिख ही जाती थी और उसी एक नाम की अमृत बूंद पूरे महीने के लिये बांसुरी को जीने का बहाना दे जाती।।
      ” क्या बताऊँ छोरी!! तेरे पीछे से रजुआ ने तो घर से निकलना ही छोड़ दिया है।।”
  
    ” बिटिया सुनने मे आ रहा सुसीला का छोरा भी कोई परीक्षा दे रहा।।”
  
      ऐसे ही समय समय पर बिना बांसुरी के पुछे भी बुआ जी राजा के बारे में यत्न पूर्वक हर खबर उसे दे जाती।
    
      “कितना दुबला गया है का बताएँ लाड़ो,लम्बा तो पहले ही भतेरा था,अब तो पूरा ताड़ लगने लगा है।”
   
      ” सुना है सुसीला ने जहर खाने की भी धमकी दे डाली सादी कराने,,,पर मजाल लड़के के कान में जूं भी रेंग जाये।”
    
      “बिटिया कोई कोई तो जे भी कह रहा की रजुआ दीछा उक्छा (दीक्षा) लेने वाला है।”
     
       ” मुझे तो कभी कभी डर लागे है छोरी,जे छोरा किसी कनफड़े गुरू की शरण में हिमालय ना निकल जाये।”

    ऐसे ही बताने योग्य-अयोग्य हर बात बुआ जी बिना किसी आडम्बर के लिख जाती और मात्र उस एक पंक्ति में छिपे अपने जीवन की सार्थकता को बड़े यत्न से बांसुरी अपनी इत्र से सुवासित हाथी दांत की बनी डिबिया में सहेज लेती ।
      जैसे उसके जीवन में अब दो ही महत्वपूर्ण बातें बची थी,एक रोज़ का जिम और दूसरा बुआ जी की चिट्टीयां।।

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     दोनों भागती दौड़ती स्टॉप पे लगभग समय से पहुंच ही जाती थी,उनके बैंक की गाड़ी उन्हें लेने और छोड़ने आया करती जिसमें उनके अलावा आस पास के और भी एम्प्लायी हुआ करते।
     और दिनों की तरह उस दिन भी गाड़ी में सब होने वाली मीटिंग की चर्चा में लगे थे।।

” बांसुरी यार तू संभाल लियो ज़रा।। उस बड़बोले सिद्धार्थ की तेरे सामने ही बस बोलती बन्द रहती है,वर्ना हम सब को तो वो आंखो से ही गोली मार देता है हिटलर!।।

” शट अप राहुल!! फिजूल में बांसुरी को परेशान ना करो,और बॉस के बारे में ऐसा बोलते शरम नही आती।।”

” नो माला!! बिल्कुल शरम नही आती,उस खबीस बॉस को शरम आती है,इतनी सारी लड़कियों के सामने मुझ जैसे हैण्डसम बन्दे को यूँ लताड़ देता है, फिर!!! मुझे तो उसे कमीना बोलने मे भी शरम नही आती।।

” कम ऑन राहुल!! जब तुम बॉस बनोगे तब तुम भी ऐसे ही हो जाओगे,क्यों है ना बांसुरी ।।”

  बांसुरी मुस्कुरा के रह गयी

” बांसुरी यार कहाँ खोयी रहती है तू,बस हर बात का एक ही जवाब,तेरी स्माईल !! कोई लड़की इतना कम भी बोल सकती है मैनें कभी सोचा भी ना था,चलो यार भागे,,जल्दी से तैयारी कर लेते हैं,सिद्धार्थ आता ही होगा।।”

   कॉर्पोरेट जगत को कई मायनों में अन्ग्रेजी सभ्यता का अनुगामी माना जा सकता है,व्यवसायिक पाठ्यक्रमों में जहां सीनियर्स के लिये सर और मैडम बोलना प्रारंभ हुआ वही कॉरपोरेट में चाहे आपका सीनियर आपसे 30 साल भी बड़ा हो पूरे आदर के साथ उनका भी नाम ही लिया जाता है।

  बांसुरी के बैंक में भी कई सहकर्मी थे हर आकार प्रकार के,अलग अलग धर्म -जाति और उम्र के।।
    बांसुरी का ऑफिस का कार्य लोन इत्यादी से सम्बंधित था जहां उसे सिद्धार्थ को रिपोर्ट करना होता था,सिद्धार्थ 29-30 साल का नौजवान था जिसने बैंकिंग में कई श्रेणियाँ उत्तीर्ण कर अपने लिये यथोचित स्थान और सम्मान कमा लिया था।।

सिद्धार्थ- हेलो फ्रेंड्स ,जैसा की आप सभी जानतें हैं, आर बी आई का दौरा होने वाला है,और हमे इस बार उनकी हर बात उनकी हर चुनौती के लिये तैयार रहना है।।
     उनकी सबसे ज्यादा नज़र लोनधारकों से जुड़ी है,तो मैं चाहता हूँ बांसुरी,राहुल और नेहा आप तीन लोग टीम बनाकर इस काम में लग जायें।
    किसी भी खाता धारक के पेपर्स अधूरे नही होने चाहिये,कोई भी रैंडम पेपर्स वो लोग मांग सकते हैं।
         बड़ी सरकारी डील्स,एन जी ओ के साथ हुई डील्स और बड़ी ज़मीनों के लीज वगैरह के कोई पेपर कच्चे ना रहे,और हो सके तो आप लोग एक बार क्या क्या पूछा जा सकता है उनके जवाबों की रिहर्सल भी कर लेना,,ओके गाईज़।


 
   इसी तरह की कई अति महत्वपूर्ण चर्चाओ को निबटा कर सिद्धार्थ अपने केबिन में चला गया।।

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  ” भई हम तो सिर्फ टाईम पास कर रहे यहाँ,काम तो बस दो ही बन्दे करते हैं एक सिद्धार्थ दूसरा बांसुरी।”

  ” क्यों राहुल,ऐसा क्यों बोल रहे।”

   ‘” और क्या ,सही तो कह रहा हूँ,बन्दे को और कोई तो नज़र ही नही आता,सारी प्लानिंग्स बस एक ही को बताईं जाती हैं बांसुरी मैडम को,अमा यार हम भी खड़े हैं,जब हमारा नाम ले रहे हो तब तो हमें देख लो, यार बांसुरी इसने तुझे अब तक प्रपोज़ कैसे नही किया।।”

   बांसुरी- बकवास मत करो राहुल!! सिद्धार्थ को लगता है कि हमें जल्दी से कुछ समझ नही आता इसिलिए हमे ही सब कुछ एक्सप्लेन करते हैं।”

   राहुल- वॉव ग्रेट!! अच्छी जोड़ी है तुम दोनो की,सच कहता हूँ बांसुरी तुम सोच सकती हो बन्दे के बारे में,अरे दक्षिण भारतीय है तो क्या हुआ है तो वेदुला ब्राम्हण।।नार्थ वेद्स साऊथ,बेहतरीन जोड़ी जमेगी।”
      राहुल की बात अनसुनी कर बांसुरी अपने डेस्क पे चली गयी,राहुल की हमेशा की ही आदत थी जिसे बांसुरी ही क्या कोई भी गम्भीरता से नही लेता था, पर यही हँसी मजाक की बातें सिद्धार्थ के कानों में भी पहुंचने लगी थी।।

      29 साल का सिद्धार्थ तेलुगू ब्राम्हण परिवार का इकलौता लड़का था,इंजिनीयरिंग की पढ़ाई के दौरान ही विदेशों में आगे की पढ़ाई के लिये की जाने वाली टफेल में सफल नही हो पाने के बाद उसने प्रथम प्रयास में ही बैंक पी.ओ.का इम्तिहान पास कर लिया था,और उसके बाद सिलसिलेवार अपनी मेहनत और बुद्धि के बल पर अच्छे खासे सिनियर्स को पीछे छोड़ते हुए वो उच्च पद पर आसीन था।

       पढ़ा लिखा नये ज़माने का सिद्धार्थ जो पहले बात बात पे शादी का माखौल उडाया करता था,उसके लिये उसके कैरियर से अधिक कोई बात महत्वपूर्ण नही रही थी,पर अब इधर कुछ दिनो से शादी ब्याह को लेकर गम्भीर होने लगा था,एक दिन हँसी मजाक में उसने अपनी माँ से पूछ भी लिया__ कि अगर वो किसी उत्तर भारतीय कन्या से विवाह करना चाहे तो क्या उसकी माँ को आपत्ति हो सकती है के जवाब में उसकी माँ ने आगे बढ़कर अपने बेटे का माथा चूम लिया और उसकी खुशी में ही अपनी खुशी का ठप्पा लगा दिया था।।
         
       दुबली पतली सांवली सलोनी चुप चाप अपने काम में लगी रहने वाली बांसुरी पहली ही नज़र में उसे बहुत भा गयी थी,पर आज तक किसी बहाने भी सिद्धार्थ उससे अपने दिल की बात नही कह पाया था…..
     नये साल की पार्टी में जब उसे जबर्दस्ती माईक पकड़ा दिया गया था तब कितने मन से उसने बांसुरी की तरफ देखते हुए गाया था__

    एक अजनबी हसीना से यूँ मुलाकात हो गयी
  फिर क्या हुआ ये ना पूछो कुछ ऐसी बात हो गयी।

   उसी के बाद से राहुल और ऑफिस के कुछ एक उसके हमउम्र सहकर्मी बांसुरी को उसके नाम से छेड़ने लगे थे,उसे अपने केबिन से ये सब हल्की फुल्की गपशप सुनना बड़ा पसंद आता था पर आज तक उसके नाम पे बांसुरी को चहकते उसने कभी नही देखा था,बल्कि नये साल की पार्टी वाले दिन भी जब सबने उसे गाने का इसरार किया तब भी कैसा तो मनहूस सा गाना गाया था उसने__

     तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा तो नही…

पर जो भी हो ,उसे धीर गम्भीर सी चुप चाप सी रहने वाली बांसुरी ने मोह लिया था। इसिलिए इतना ध्यान रखने पर भी कोई ना कोई चूक उससे हो ही जाती थी, जब कभी बांसुरी के साथ बाकी लोगो को वो काम के बारे में कुछ भी बताया करता उसकी नज़रे सिर्फ और सिर्फ बांसुरी पर ही टिकी होती।
 
    आज की इतनी महत्वपूर्ण मीटिंग में भी यही हुआ।

    इस मीटिंग के पूरी होते ही सारे लोग अपने अपने क्यूबिक पे जाकर काम पर जुट गये।।
     वैसे तो आर बी आई की टीम इसके पहले भी विज़िट पे आ चुकी थी,पर वो विजिट तकरीबन 8 साल पहले हुई थी,इसीसे इस बार तैयारियाँ कुछ अधिक ही उफान पर थी,इस बार 3 लोगों की टीम आ रही थी जो पूरे पांच दिन रह कर अलग अलग विषयों पर बैंकर्स को ट्रेनिंग देकर और उनका ऑडिट कर जाने वाली थी,जिनमें शुरु के दो दिन ऑडिट के थे और बाकी के दिन ट्रेनिंग के।।

    सभी को ऑडिट का ही डर सता रहा था,जितनी भी इमानदारी बरती जाये कही ना कहीं कोई ना कोई फाइल ऐसी कच्ची रह ही जाती है जिसपे ऑडिटर की पैनी नज़र पड़ ही जाती है।
     
   अपना काम जल्दी निपटा कर बांसुरी माला के क्यूबिक में पहुंची__

बांसुरी-” क्या हुआ माला मैडम?? अभी तक समेटा नही ,सब का सब फैला पड़ा है।।”

माला- अरे नही यार!! ये कहाँ कहाँ से आते है धारक!!बोल बोल के हम बैंकर्स मर जायेंगे पर मजाल है जो ये लोग सारे के सारे पेपर्स एक बार में जमा कर दें,खैर तूने कर लिया क्या सारा काम।

बांसुरी- हाँ डाटा हैंडलिंग तो कर ली सारी,बाकी भी फाइल्स कर ली है ,कुछ थोड़ा सा चेक करना है वो रूम पे हम कर लेंगे,तुम्हें और कितना समय लगेगा।

माला- क्यों तुझे निकलना है क्या??

बांसुरी- हां ….वो आज मंगल है ना हमे मन्दिर जाना है।

माला- अरे हाँ यार!! मैं भूल कैसे गयी?? तेरा तो हर मंगलवार एपॉइंटमेंट रहता है ना हनुमान जी के साथ, तो तू निकल ले,मैं सीधे रूम पे ही पहुंचती हूँ ।।और बन्सी यार आज कुछ अच्छा सा पका लेना खाने में,बॉस ने आज कुछ ज्यादा ही पका दिया ऑफिस में ।

बांसुरी- नाम भी बता दो डिश का ,क्या खाना है।।
  हँसते हुए बाँसुरी अपना बैग लटकाये माला से विदा लेकर मन्दिर के लिये निकल गयी।।

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   ऑफिस से मन्दिर दूर था,जल्दी जल्दी भागती दौड़ती बांसुरी ने बस पकड़ी और आरती शुरु होने के पहले पहुंच गयी।।
     मंदिर की भीड़-भाड़ में उसे आज काफ़ी पीछे खड़े होना पड़ा,अपनी जगह पर खड़ी दोनो हाथ जोड़े वो वापस अपने शहर पहुंच गयी थी।
    इसिलिए तो शायद हर मंगलवार वो यहाँ आया करती थी,यहाँ पहुंचते ही कितना सुकून मिलता था, सब कुछ सिलसिलेवार याद आने लगता था,हर मंगल के लिये एक ही स्मृति उसके मानस पटल पर अंकित थी,पर वही एक स्मृति हर बार उसे पुलकित कर जाती थी,जब वो राजा के पीछे उसकी बुलेट पे बैठी पहली बार बड़े हनुमान मन्दिर गयी थी, दोनो ने साथ ही हाथ जोड़े थे और उसके बाद लगभग दस मिनट तक आँख बन्द किये राजा के होंठ धीरे धीरे कुछ बुदबुदाते रहे थे और वो निर्निमेष उसे देखती खड़ी थी।।
      लोग कहतें हैं वस्तुएं बेजान होती हैं,पर वही किसी की स्मृति से जुड़ कर कैसी सजीव हो उठती हैं।
  इसी मन्दिर से पहली बार निकलते समय बाहर की छोटी सी फूलों की गुमटी में लटकी रुद्राक्ष की माला उसे कैसे मोह गयी थी,और उसने झट उसे खरीद लिया था,वैसा ही रुद्राक्ष तो वो सदा अपने दायें हाथ में पहना करता था।
       गोरे चौड़े से मणिबंध में कसा रुद्राक्ष कितनी ही बार उसकी धड़कनों में उथल पुथल मचा चुका था।।
 
    राडो की उसकी घड़ी,रे बैन के ग्लास ऐसा कौन सा उसका स्मृति चिह्न था जो बांसुरी ने सहेज के ना रखा हो,ये सारी वस्तुएं अपनी कमाई से खरीद खरीद कर उसने अपनी आलमारी के एक हिस्से में ऐसे सजा रखी थी जैसे खुद राजा ही उस हिस्से में आकर बस गया था।

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      अपने विचारों मे मगन बांसुरी ने आंखें खोली तो एक बारगी उसका दिल धक से रह गया…..
      उसके सामने खड़े लोगों में थोड़ा आगे राजा से डील डौल वाला कोई खड़ा था ।।

   हाँ वही तो लग रहा है,वही चौड़े कंधे,वही घने बाल!! फिर अपनी ही सोच पे बांसुरी को हँसी आ गयी__ ‘वो आकृति हृदय में ऐसी छप गयी है कि हर जगह वही नज़र आता है’  यहाँ कहाँ से राजा प्रकट हो जायेगा।।
        पांच साल से अधिक समय बीत चुका उसे देखे ,,उस शाम के बाद तो गुस्से में उसका नम्बर भी  फ़ोन से हटा दिया था,पर दिल से कहाँ  हटा पायी।।

     इसिलिए कभी कहीं कोई छै फुटिया गोरा चिट्टा नज़र आता तो मुस्कुरा के रह जाती,अपने आप को समझा के __ नही ये वो नही है।।
    उसके यहाँ दूध देने आने वाला गोपाल अलाहाबाद का ही तो है,उसकी आवाज़ और बोलने का तरीका कितना मिलता है राजा से,, इसिलिए आगे पीछे जब समय मिल जाये बांसुरी उससे दो बातें कर ही लेती है।।

     कई बार अपने मन को समझा चुकी,इतना सब उसके लिये कर के भी उसी से बात करने में इतना संकोच क्यों।।
     उस शाम के बाद कितना इन्तजार किया था बांसुरी ने कि एक बार वापस राजा फोन कर ले,तुरंत दौड़ कर उसके पास चली जाऊंगी ,उसकी माँ के भी
पांव पकड़ लूंगी…पर वो राह तकती रह गयी,कोई फ़ोन नही आया,और फिर इम्तिहान पास कर वो दूसरे शहर चली आयी ,,पर हर दफा उसकी आंखे और कान फोन की रिंग पर ही बने रहे।।
     एक फ़ोन तक करना राजा ने ज़रूरी नही समझा।।

    अपने मन को कितना मारा था उसने और आखिर अपनी सारी हिम्मत जुटा के अपनी पहली पोस्टिंग के बारे में बताने राजा को खुद ही फ़ोन लगा लिया।
      पर हाय री किस्मत!! फोन उठाया भी किसने, रूपा भाभी ने,,कैसी कड़वी थी वो बात चीत __ ” अच्छा तो नौकरी लग गयी तुम्हारी,चलो अच्छा हुआ, वर्ना जैसा रंग है ऐसे में लड़का मिलना बहुते मुस्किल होता,है ना बांसुरी!!! अब वहीं अपने बैंक में ही कोई ठीक ठाक छोकरा पकड़ ब्याह कर लेना,तुम्हारे लिये भी वही अच्छा रहेगा।”

” हमारे ब्याह की चिंता करने की आप को ज़रूरत नही है भाभी,हमारे मम्मी पापा हैं ये सब देखने के लिये।”

” मम्मी पापा को भी कहाँ मौका दे रही हो,तुम तो खुदे खोजे पड़ी हो,सोभा देता है का लडकियों का ऐसे उज्जडपना ,आप ही बता रहीं कि अम्मा हमारे फेरे फिरा दो अब…अब हमें मायके में नींद नही आती, वैसे तुम्हें बता दे कि हमारे लल्ला जी ने तो अम्मा के चरणों की सौगन्ध उठा ली है कि उनकी पसंद की लड़की से ही ब्याह करेंगे चाहे भले कानी लूली क्यों ना हो।।”

अपमान से बांसुरी के कान जलने लगे….

” आपकी रेखा से तो ठीक ही हैं,उसने तो बताने की भी ज़रूरत ना समझी ,खुद ही मन्दिर में माला बदल आयी,और सीधे आशीर्वाद लेने पहुंच गयी।”
   बोल कर तड़ाक से फोन काट दिया था उसने, बिस्तर पर पड़ी कितनी देर तक रोती रह गयी थी….
पता नही रूपा भाभी की बात में कितनी सच्चाई थी पर उस दिन के बाद से उसने कभी राजा को फ़ोन नही लगाया,,बहुत बार उठा कर फिर वापस रख दिया था।।
     आज मन्दिर में उस लड़के को पीछे से देख बिल्कुल ऐसा लगा जैसे मानो राजा ही दोनो हाथ जोड़े आंखे बन्द किये होंठो में कुछ बुदबुदाता खड़ा है,एक बार को मन किया कि उस तक पहुंच जाये,बाजू में जाकर कम से कम चेहरा तो देख ही सकती है,पर फिर अपनी ही बुद्धि पे हँसी आने लगी, कैसी बचकानी हरकत होगी ये,कहीं वो कोई और निकला तो?? क्या कहेगी ,कि क्यों उसे देख रही थी।।और चलो मान लिया कहीं राजा ही निकल गया तो???
     इस तो का कोई जवाब बांसुरी के पास नही था, ऐसा होना सर्वथा असम्भव था,मुस्कुरा के एक बार और प्रणाम कर वो मन्दिर से बाहर निकल गयी।।

***********

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     रोज़ सुबह 9 बजे खुलने वाला बैंक आज सुबह 6 बजे से ही खुल गया था,पूरे बैंक को झाड़ पोंछ कर चमका दिया गया था,बैंक ऐसा दिख रहा था जैसे ताजी बनी काजू कतली पे लगा चांदी का वर्क।
      और दिनों की तरह सरकारी बैंक वाला ठप्पा आज यहाँ कही नज़र नही आ रहा था,बिल्कुल किसी शानदार प्राईवेट मल्टीनेशनल बैंक की तरह चमकते अपने बैंक को देख बांसुरी और माला की आंखें भी खुशी से चमक उठी थी।।
     वैसे उन लोगो का कोई फॉर्मल ड्रेस कोड नही था,पर आज सारे ही लोगों को समरसता दिखाने की ताकीद की गयी थी,इसीसे सभी पुरूष सफेद शर्ट में और महिलाएं केरला ओणम वाली क्रीम कलर की साड़ी में थी।।
       आर बी आई की आने वाली टीम के दो सीनियर मेंबर चेन्नई से आ रहे थे और एक मेंबर कोच्ची से था।।
        अपने निर्धारित समय से दस मिनट पहले ही टीम वहाँ पहुंच गयी, सभी कर्मचारी अपने क़्युबिक में अपने अपने काम पर लगे हुए थे, लोगों की भी भीड़-भाड़ बढ़ चुकी थी,ऐसे में टीम धीरे-धीरे सब जायजा लेती एक से दूसरी जगह तफरीह कर रही थी,पहले बताया गया था 3 लोग आने वाले हैं,पर कुल 4 लोग आये थे,जिनमें से 2 अन्दर वाले हॉल में ऑडिट शुरु करने चले गये थे…बाकी दो लोग कर्मचारियों से मिलते जुलते उनकी डेस्क पर ही किसी भी फाइल को पूछ ले रहे थे।।

     कुछ थोड़ी ही देर में सिद्धार्थ हडबडाया सा बांसुरी के डेस्क पे आया__” बाँसुरी वो लीज़ वाली फाइल ले कर तुम आ जाओ ,एक्सप्लेन करना पड़ेगा,असल में वो काम मैनें देखा ही नही था,और उसीकी फाइल मांग रहे हैं,तुम आ जाओ जल्दी!!

    बांसुरी फाइल लिये सिद्धार्थ के केबिन में पहुंची ही थी कि टीम में से किसी ने कॉफ़ी की फरमाइश कर दी __” हमें तो सिद्धार्थ जी चाय ही पिलवाइये, कल जब से पुणे आये हैं,ढंग की एक भी चाय नही मिली।”
 
     बांसुरी का दिल उछल कर मुहँ को आ गया,ये आवाज़ तो राजा की थी,हाँ उसी की थी….अपनी  आखिरी सांस तक भी कभी इस गहरी आवाज़ को भूल पायेगी क्या, आवाज़ की तरफ उसने मुड़ कर देखा, रिवॉलविंग चेयर पे वही तो बैठा था,अपनी सफेद कमीज की बाहों को कुहनीयों तक मोड़ कर दाहिने हाथ मे ऑडिटर वाली पेन्सिल पकड़े टेबल पर पड़ी फाइल को देखता,,बिल्कुल वैसे का वैसा।। पर बुआ सही कह रही थी ,कुछ दुबला हो गया था,और ये चश्मा कब लग गया जनाब को।।
       अपने इस अवतार में तो और भी लुभावना हो गया था राजा!!
      राजा को देख ही रही थी कि राजा से उसके किसी साथी ने कुछ कहा,जिसे सुन वो खिलखिला के ज़ोर से हँसा और तभी उसकी नज़र दरवाजे पे खड़ी बांसुरी पर पड़ गयी।।

क्रमश:

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aparna..

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शादी.कॉम – 22

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      आँधी की तरह उड़कर इक राह गुज़रती है
       शरमाती हुई कोई क़दमों से उतरती है
           इन रेशमी राहों में इक राह तो वो होगी
         तुम तक जो पहुंचती है इस मोड़ से जाती है                                                              इस मोड़ से जाते हैं……  
      कुछ सुस्त कदम रस्ते,कुछ तेज़ कदम राहें…

  अपने कमरे में बैठी बांसुरी को समझ ही नही आ रहा था कि उसने सही किया या गलत….अपनी माँ का मुरझाया चेहरा वो कभी भी सहन नही कर पाती थी,उस समय भावावेश में आकर उसने राजा की अम्मा को खरी खोटी सुना तो दी पर अब रह रह के राजा का बुझा बुझा सा चेहरा ,जाते समय उसे रोकती हुई राजा की आंखें सब याद आ रहा था, बांसुरी जैसे खुद से ही बातें कर रही थी__ अच्छे से जानती हूँ,मेरे सामने तक तो मुहँ खोल नही पाता अपनी अम्मा के सामने क्या बोलेगा,बस नाम का राजा बाबू है,सारी होशियारी प्रिंस और प्रेम तक ही सीमित है,,बातें इनकी निकलेंगी जब वसूली करने जातें हैं,बाकी समय तो बस सर हिला के ही काम चला लेंगे….अरे पर एक बार तो अपनी अम्मा को टोक सकता था।”

  बांसुरी का मन राजा से बात करने के लिये व्याकुल हो उठा,

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          पर हाय रे मन!! मन की भी शायद अपनी आत्मा होती है, देह होता है ,तभी तो हर बड़ी छोटी बात को खुद से लगा लेता है,हाड़ मांस से बने शरीर को जितनी चोट नही पहुंचती उससे कहीं अधिक मन चोटिल हो जाता है….
         ऐसे समय जब कोई अपने प्रेम को  सर्वोपरी रख अपनी या सामने वाले की गलती पे झुक जाना चाहे ये मन देवदार बन जाता है,अकड़ के तन जाता है,और हर एक इच्छा को अपने नैनों से तोल कर निर्णय लेता है।।
    यही बांसुरी के साथ हुआ!!उसे मन्दिर में जो सही लगा उसने कर दिया पर अभी उसका मन राजा के लिये रो पड़ा,कैसे भी किसी भी हाल में उससे मिलने को वो तड़प उठी…..पर जैसे ही उसे मेसेज करने उसने फोन उठाया उसके अन्दर से एक आवाज़ आयी __ वो भी तो कर सकता है फ़ोन,,ठीक है शायद हमने बात बिगाड़ दी पर शुरु तो उसी की अम्मा ने किया था,और दोनो भाई मुहँ में कुल्फ़ी जमाये बैठे थे,हम भी आखिर क्या करते।। हम जाने लगे तब आगे बढ़ कर रोक भी तो सकता था,ठीक है अपनी अम्मा के सामने नही बोल सकता पर हमें तो बोलते समय रोक सकता था,हमे भी कोई शौक तो है नही की दूसरों का अनादर करें,बस हो गया जो होना था,अब एक बार फोन तो कर ले ,पूछ तो ले ,कैसी हो बांसुरी ।।पर नही जनाब तो अकड़ के बैठे होंगे,ये विचार आते ही बाँसुरी का दिल कसमसा के रह गया, उसे राजा का मासूम सा चेहरा याद आ गया,भला आज तक कब और किस बात पे वो अकड़ के खड़ा रहा था,वो तो बेचारा फलों से लदा ऐसा तमाल तरु था जिसकी छाँव से उसकी पूरी बिरादरी सुवासित थी।।

    बांसुरी ने फ़ोन करने को फ़ोन उठाया ही था की राजा के नम्बर से कॉल आ गया,थोड़ी देर पहले का क्षुब्ध स्वाभिमान एक बार फिर करवट ले खड़ा हो गया,बांसुरी ने तुरंत उचक कर फोन नही उठाया __ वो भी तो जाने हम बांसुरी  है।।
       हाय रे ये मिथ्या अभिमान!! जिसके लिये दिल टूक टूक रो रहा था,सामने से उसे ही उद्विग्न देख अपनी रोग और पीड़ा भूल गया,और उसके घावों पे मलहम देने की जगह नमक की बोरी उठा ली।।

    बांसुरी जब तक फोन उठाती फोन कट गया, उसके चेहरे पर एक मुस्कान खिल गयी__ अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे,अच्छा मज़ा चखाया!

    एक बार फिर फोन घनघना उठा__

बांसुरी- हेलो

राजा- बांसुरी!!
 
अपना नाम राजा के मुहँ से सुनना था की रहा सहा धैर्य गुस्सा सब भाटे की तरह उतर गया,वेगवती नदी सा बह गया।।

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बांसुरी-” इत्ती देर से याद आयी हमारी,सुबह से कहाँ मर रहे थे,एक बार को नही सोचा कि हम कैसे जी रहे होंगे।”

राजा- अरे सोचा नही होता तो अभी फ़ोन क्यों करते, सुबह से मौका ही नही मिला,सब हमी को घेरे खड़े थे,मन्दिर से आने के बाद अम्मा ने घर पर सब को सब बता दिया है,घर में कर्फ्यू वाली स्थिति हो गयी है।

बांसुरी- तो हमारे घर कौन सा हालात कन्ट्रोल में हैं, मन्दिर से आने के बाद बुआ ने ऐसा हंगामा मचाया है कि हमारे घर में भी इमरजेन्सी के से हालात हो गये हैं,,राजा एक बात बोलें

राजा- घर से भाग चलने बस मत बोलना।

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बांसुरी- हम वही बोलने वाले थे जादुगर सैंया।।

राजा- हम दोनो तरफ सब कुछ संभाल लेंगे बस तुम अपने आप को संभाले रखना,हमे ती समझ नही आता की हम किसे किसे देखे,बाकी सब को या तुम्हें ।कभी भी तमक जाती हो।।

बांसुरी– क्या करें?? हम अपनी अम्मा के लिये कुछ भी सुन नही पाते,,पर अब ध्यान रखेंगे,अच्छा सुनो!! कल कहीं मिल सकते हैं क्या?? अकेले?

राजा- क्या हो गया,अकेले काहे मिलना चाह रही??

बांसुरी- ऐसा कुछ नही,जैसा तुम सोच रहे,और सुनो!! सोचना भी मत!! हम तो प्लान बनाना चाह रहे कि आखिर ऐसा क्या हो सकता है कि तुम्हारी अम्मा की बात माननी भी ना पडे और पूरी भी हो जाये।

राजा- वही तो हम भी सोच रहे,क्या ऐसा किया जाये कि सब सही हो जाये और किसी को तकलीफ भी ना हो,चलो फिर यही ठीक रहा,कल रॉयल पेलेस चलते हैं,वहाँ बैठ के सोचेंगे ।।

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  बांसुरी- सुनो,एक बात बोलें ।

राजा- मना कर देंगे तो नही बोलोगी।

बांसुरी- तब तो और ज़ोर से चिल्ला के बोलेंगे,कान फाड़ के बोलेंगे,तुम्हें सता के बोलेंगे।।

राजा- तो बोलो ना,पूछती क्या रहती हो,सुनो सुनो सुनो!! जैसे बड़ा सम्मान दे देती हो।।

बांसुरी– कल तुम अपनी नीली शर्ट पहन के आना  और हम भी अपनी नीली कुर्ती ही पहनेंगे,ठीक है।

राजा बांसुरी की बात पर खिलखिला के हँस दिया, तभी अचानक किसी के आने की आहट से दोनो ही चौकन्ने हो गये_

राजा- बांसुरी बन्टी ऊपर आ रहा है,हम फोन रखते हैं ।।

बांसुरी- अरे रुको !! सुनो तो….

राजा– अरे रख रहे हैं यार,तुम तो पिटवा कर ही मानोगी लग रहा।।
   हँसते हुए दोनो ने अपना अपना फोन रख दिया।।

            पास बुला के गले से लगा के
             तुने तो बदल डाली दुनिया
             नए हैं नजारे नए हैं इशारे
           रही ना वो कल वाली दुनिया

           सपने दिखाके ये क्या किया
                 ओ रे पिया
           तुने ओ रंगीले कैसा जादू किया
          पिया पिया बोले मतवाला जिया।।

   रेडियो पे बजते गाने ने बांसुरी के चेहरे पे एक लाज भरी मुस्कान बिखेर दी।।

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              *********************

    अगले दिन दोनो परिवार अपनी अपनी दिनचर्या में लीन थे,सुशीला जहां खुश थी कि चलो उस लड़की से पीछा तो छूटा वही अपनी लाड़ली के दुख से प्रमिला दुखी थी,पर दोनो ही महिलाओं ने आम हिन्दुस्तानी औरतों की तरह ही अपने मन को पूर्ण रूपेण अपने नियन्त्रण में रखा हुआ था,एक दुखी थी एक सुखी थी पर दोनो में से किसी की दिनचर्या में कोई व्यवधान नही था।।
        घर के किसी सदस्य की किसी भी आवश्यकता को अधूरा नही रखा गया था,सब समुचित व्यवस्था थी।।
 
     बांसुरी कुछ गुनगुनाती सीढियों से नीचे उतरी, रसोई की खिड़की से झांक लगा के प्रमिला ने उसे आवाज़ लगायी

प्रमिला- लाड़ो!! नाश्ता ले आऊँ तेरा!!

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बांसुरी- नही मम्मी ,हम कुछ काम से बाहर जा रहे हैं, वापस आकर खा लेंगे

प्रमिला- अरे कम से कम दो पूड़ी तो खा ले।

बांसुरी ने मुस्कुराते हुए प्रमिला को देखा,__”पूड़ी तो हमने कब से खाना छोड़ रखा है मम्मी ,भूल जाती हो ,अभी 2 किलो और कम करना है,चलो हम जा रहे वर्ना देर हो जायेगी।।”

” अरे पर जा कहाँ रही छोरी?”

” कहीं नहीं बुआ,जल्दी आ जायेंगे।।

बांसुरी के निकलते ही बुआ जी ने प्रमिला को पृश्नवाचक निगाहों से भेद दिया__” परमिला कहीं उस रजुआ का बुखार फिर तो नही चढ़ गया छोरी को,कल तो बड़ा पांव पटकती निकली रही मन्दिर से।।

प्रमिला– नही पता जिज्जी,वैसे बांसुरी ऐसी है तो नही,ज़बान की बड़ी पक्की है मेरी बेटी।।

      यही तो लोग नही समझ पाते कि ना प्यार का भरोसा,ना प्यार करने वालों का।।जब एक बार इन्सान प्यार में पड़ जाये तब वो सिर्फ एक ही काम सलीके से और शिद्दत से कर सकता है वो है प्यार,
इसके अलावा हर एक काम बेमानी हो जाता है, ना तो फिर अपना वचन याद रहता है और ना मान सम्मान।।

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        रॉयल पैलेस जाते हुए बांसुरी ने निरमा को भी साथ ले लिया,वहाँ पहुंचने पे देखा राजा और बन्टी पहले से बैठे उनका रास्ता देख रहे थे।।

    बांसुरी को देखते ही राजा की आंखे मुस्कुरा पड़ी,
बन्टी ने आगे बढ़कर दोनो को अपने सामने की कुर्सियों पर बैठा दिया।।

बन्टी- देखो बांसुरी और राजा,तुम दोनो को ऐसा कोई हल निकालना पड़ेगा जिससे सांप भी मर जाये और लाठी भी ना टूटे।।

बांसुरी– भैय्या हम तो चाहतें हैं,ना सांप ही मरे ना लाठी ही टूटे,क्यों राजा!!

राजा– तो क्या सोचा ?? ऐसा क्या करें कि सब मान जायें,  बोलो बांसुरी!!

बांसुरी- राजा तुम हमारे तुम्हारे बारे में सब कुछ अपने पापा को बता दो,हमे यकीन है वो मान जायेंगे।

बन्टी- इत्ता आसान नही है बांसुरी पण्डित जी को भोग लगाना,वो भी परले दर्जे के जट्ठर हैं,बल्कि मौसी ही कुछ मुलायम हैं,जब वही इत्ती भरी बैठी हैं तो मौसा जी का सोचो भी मत,उसपे इनके घर के सब पुरखे अमृत पीकर आये हैं,90 की हो चुकी दादी अब तक अपने पसंद की मोहनथाल बनवाती है बहुओं से।।

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राजा- फिर करें तो क्या करें बन्टी,हमे तो समझ ही ना आ रहा??

बांसुरी– तुम्हें कभी कुछ आसानी से समझ आया भी है? भला हो ये समझ आ गया कि हमसे प्यार है।

बन्टी- देखो बिना दान दहेज ये शादी ना हो पायेगी, बांसुरी तुम भी अच्छे से जानती हो,कुछ काम समाज और दुनिया को दिखाने भी किया जाता है,है ना?

बांसुरी- हाँ तो?

बन्टी- तो ये कि मौसी जी ने जितना बोला उतना तो करना ही पड़ेगा,अब कुछ तो अंकल जी की भी तैयारी होगी ही,बाकी कमी बेसी को हम पूरा कर देंगे, मतलब हम नही हमारा भाई राजा!! क्यों राजा?

राजा ने बन्टी की बात पर बांसुरी को देखा,उसके चेहरे पर भी कोई भाव नही था,जैसे उसे समझने में दिक्कत आ रही थी कि ऐसा करना सही रहेगा या नही।।

बांसुरी– हमारे पापा को शायद अच्छा नही लगेगा राजा

बन्टी- लेकिन कुछ तो रास्ता निकालना ही पड़ेगा ना
तुम अपने पापा को समझा भी तो सकती हो।

बांसुरी- हां समझा सकते हैं,पर एक बात बताइये भैय्या ,हम पापा को ये समझायें की राजा से रुपये उधार ले कर हमारी शादी उसी से करा दे इससे कहीं ज्यादा आसान ये नही रहेगा कि  राजा अपनी अम्मा को ये समझा दे कि वो दहेज नही लेना चाहता।

राजा- बांसुरी तुम्हें क्या लगता है हमनें अम्मा से बात नही की,जितना कह सकते थे कह चुके हैं,,अब देखो यार अम्मा भी अपनी जगह कहाँ गलत है बताओ।

बांसुरी- तुम्हारी आँख मे ना तुम्हारी अम्मा भक्ति का चश्मा चढ़ा है,उस चश्मे को उतारो तब नज़र आयेगा की कौन गलत है और कौन सही,,हमे बन्टी भैय्या की बात अच्छी नही लगी।
      भले ही एक साधारण नौकरी में हैं हमारे पापा पर आज तक हमे किसी चीज़ की कमी नही महसूस होने दी,राजकुमारी बना के पाला पोसा,और आज हम अपने स्वार्थ के लिये अपने पापा के आत्मसम्मान को आग लगा दे,ये नही हो पायेगा राजा।।
     तुमसे प्यार करते हैं इसिलिए तुम्हारे आगे हमारा मान अपमान हम नही देखते पर अपने पापा को तुम्हारे पैरों में रुपयों के लिये झुकते नही देख पायेंगे।

राजा- यार तुम बात को कहाँ से कहाँ मोड़ दी,,काहे तुम्हारे पापा झुकेंगे?? हम चुपचाप जितने की उन्हें ज़रूरत होगी लाएंगे और तुम्हारे घर छोड़ जायेंगे। अब कल को हम उनके दामाद बन जायेंगे तो एक तरह से उनके बेटे जैसे हुआ ना,बेटे से कुछ लेने में कैसा संकोच?

बांसुरी- सही कह रहे हो ,बेटे से कैसा संकोच?? फिर चुपचाप आने का संकोच काहे कर रहे,डंके की चोट पे आना,अपने अम्मा बाऊजी को बोल कर आना की अपने होने वाले ससुर के लिये रुपये लिये जा रहे, उनके ज़रूरत है।।

राजा-बांसुरी तुम कोनो कसम खा कर आयी हो का कि लड़े बगैर नही जायेंगे

बांसुरी- हाँ बिल्कुल!! वैसे ही जैसे कल तुम्हारी अम्मा कसम खा के आयी रही ।।

राजा — बांसुरी!! हम कुछ कहते नही इसका मतलब ये नही कि तुम कुछ भी कहती जाओगी,,अम्मा है हमारी,उन्होनें जितना सहा है ना तुम उनकी पैर की धूल बराबर भी नही हो।। एक बात तो सुन के सही नही जाती तुमसे अम्मा से बराबरी करने चली हो।  अरे बचपन से अपने घर परिवार पड़ोस समाज सब जगह उन्होनें जो देखा है वही उनके दिमाग में बैठा है।। तुम्हारी तरह पढ़ी लिखी होती तब तो उनकी अपनी समझ होती ना,उनके खुद के ब्याह में दहेज मिला,सभी मौसियों का ब्याह ,चाचा का ब्याह फिर बुआ का ब्याह सभी जगह यही देखी है हमरी अम्मा इसे ही सही समझती है,तो इसमे उनकी क्या गलती।।
    जिस उम्र में तुम अपनी माँ के आंचल में दुबकी पड़ी थी उस उमर से घर गृहस्थी का बोझ उठा रही हमारी अम्म्मा।।बारह साल की उमर से ददिया सास चचिया सास और खुद की सास की सेवा में प्राण दिये जा रही हैं,और आज तक उनके सर का पल्लू कभी खिसका तक नही और तुम उनकी दो बातें सुन उन्हें पलट के चार बातें सुना गयी।।
       मजाल है जो आज तक हमारी अम्मा ने दादी को कभी पलट के जवाब दिया हो,ऐसा तो नही है कि हर बार बड़े बूढ़े सही बात ही बोलतें हों,पर जो भी बोला सुनाया हो दादी ने हमारी अम्मा ने उन्हें या बाऊजी को कभी जवाब नही दिया।।

बांसुरी– हम क्या बोल रहे और तुमने क्या समझ लिया।।

राजा- क्या समझ लिया,सही ही समझा।। हमारी ही आँख में चश्मा चढ़ा था,पर अम्मा का नही तुम्हरा,अब उतार फेंकने पर साफ साफ दिख रहा कि तुम्हारा ज्ञान कितना कोरा और उथला है बांसुरी ।।
   एक बात और कह दें,जो लड़की हमारी अम्मा का सम्मान नही करेगी ,इज्जत नही करेगी हम किसी जनम में उससे शादी नही करेंगे।।

बांसुरी– राजा तुम धमकी दे रहे हो हमे।।

राजा– हम सच बोल रहें हैं,,हमारी अम्मा से ज्यादा हम किसी से प्यार नही कर सकते,,तुम अपनी बताओ ,हमारी अम्मा के हिसाब से ढल सकती हो।तो ठीक है वर्ना जाओ,हमें भी तुम्हारी कोई ज़रूरत नही है।

बन्टी और निरमा चुपचाप बैठे दोनो की बातें सुन रहे थे,कुछ देर पहले की साधारण बातें अचानक ही ऐसे मोड़ ले लेंगी किसी ने सोचा भी ना था।।
     किसी ने सही कहा है__ बन्दूक से निकली गोली और ज़बान से निकली बात कभी वापस नही हो सकती।।

  काश दोनो में से एक ने भी अपनी जिह्वा पे समय रहते नियन्त्रण पा लिया होता तो स्थिति इतनी विकट ना होती।यहाँ गलती किसकी थी किसकी नही ये पक्ष विचारणीय रह ही नही गया,दोनों में से किसी ने उस समय झुकना अपनी शान के खिलाफ समझा।।

           ***************************

      इस पूरे वाकये को कई दिन बीत गये।। बांसुरी ने इम्तिहान पास कर लिया और एक महीने की ट्रेनिंग के लिये पुणे आ गयी,बन्टी भी वापस दिल्ली लौट गया, सभी अपने अपने कामों मे लग गये,जीवन का नाम ही चलना है,वो कभी किसी के लिये रुकता कहाँ है।।

     बांसुरी की ट्रेनिंग पूरी हो गयी और पहली नियुक्ति में उसे अम्बा जी गढी जाना पड़ा, उसने अपना कार्यभार संभाल लिया,कभी कुछ दिनों के लिये उसकी अम्मा या बुआ जी आ जाते हैं ।
     बन्टी की जिंदगी में एक बार फिर कोई लड़की आ गयी,वो अपने जीवन अपने बॉस और नयी नयी बनी गर्लफ्रैंड में व्यस्त रहने लगा।

    सभी का जीवन व्यस्त था,सभी अपने आप में लगे थे,बस एक राजा था जिसका जीवन उस शाम रुक गया,,उसने पहले की तरह जिम जाना छोड़ दिया, भैय्या के वसूली के काम में भी अब प्रिंस और प्रेम ही जाते ।।
    घर के लोग जैसे अम्मा,बाऊजी बड़े भैय्या चाचा जी सभी अपने लाड़ले के व्यवहार से क्षुब्द थे दुखी थे,पर वो खुश था अपने आप मे,अपने कमरे में अपनी किताबों के साथ।।
    अम्मा को लगा बांसुरी का भूत उतर गया,अम्मा को इस बात का कई एक बार प्रमाण भी मिल चुका था,, आखिर माँ थी कैसे अपने बेटे के जीवन से अनभिज्ञ रहती,उन्हें समझ आ चुका था की अब बांसुरी और राजा की हल्की फुल्की भी बातचीत नही होती।।
   खूब खोद कुरेद के उन्होनें बन्टी से भी सारी सच्चाई उगलवा ली थी,कि उस शाम के बाद दोनों में कभी कोई बात नही हुई ।।
      उस शाम को बीते पूरे पांच बरस गुज़र गये……बांसुरी चली गयी सिर्फ राजा के जीवन से ही नही उसके शहर से भी दूर ।।
  
   पर जब वो चली ही गयी थी राजा के जीवन से तो ऐसा क्या था जो राजा ने खुद को किताबों में इस कदर गुम कर लिया था…..

क्रमशः

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अपर्णा।।

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शादी.कॉम – 21

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शादी डॉट कॉम: 21

       तेरे बिना चांद का सोना खोटा रे
          पीली पीली धूल उड़ावे रे
            तेरे संग सोना पीतल
             तेरे संग कीकर पीपल
              आजा कटे ना रतिया………
         ओ हम दम बिन तेरे क्या जीना
      तेरे बिना बेस्वादी बेस्वादी रतिया ओ सजना…

   ” लगे रहो बेटा!!! सही जा रहे हो,,एक एक लक्षण प्रेम मे पागल प्रेमी का दिख रहा तुममे।”

” क्या यार बन्टी,,अब ऐसा क्या देख लिये तुम?”

” जैसे गाने सुन रहे हो ना आजकल बेटा मैं ही क्या कोई अन्धा भी तुम्हारी आंखों में देख पढ लेगा कि बच्चा प्यार में है,,,मैं तो फिर भी पढा लिखा हूँ,और वो भी अच्छी खासी दिल्ली युनिवर्सिटी से…..तुमने ये तो ना सोच लिया कि झुमरितलैया से पढ कर भाई इतना ज्ञान बघार रहा है…” अपनी ही बात पे बन्टी ज़ोर ज़ोर से हंसने लगा

” पता है एक बार हमारा बॉस अड़ गया कहता है __ लड़कों कुछ अच्छा करना है मुझे,जिससे मेरे बाद मेरा नाम हो,मैनें धीरे से कहा _ ट्रेन के टॉयलेट  में अपना नाम नम्बर लिख आईये,,सदियों तक लोग गंदे टॉयलेट की फ्रस्ट्रेशन में गालियाँ आपके नाम की निकालेंगे।।”

” तुमने ऐसा कह दिया बॉस से।”

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” अबे नही यार!! ऐसी पते की बातें तो मेरे मन में ही दफन रह जाती हैं,ऊपर से मैनें कहा __ क्या सोच रहे हैं आप बताइये सर जिससे आपकी कुछ मदद की जा सके,,कम्बख्त कहता है बाइजूज़ जैसा कोई काम का एप बनाना चाहता हूँ कि लोग उसमें बच्चों को पढ़ा कर मेरा नाम लें लाइक ‘ साहूज़’ ।।
    मैनें कहा सर एप सही नही है, मैनें एक बार बाईजूज में इतिहास पढ़ना चाहा,कम्बख्त इतना अनाप शनाप हड़प्पा की खुदाई में निकलवा दिया इन लोगों ने कि ‘साहनी साहब’ की आत्मा भी कलप गयी कि यार ये सब इन लोग कहाँ से निकाल निकाल ला रहे मुझे तो ना मिला आज तक….

” फिर मान गया बॉस??”

” जो अपने मातहत की बात मान जाये वो बॉस ही कैसा?? उसके बाद एप का भूत उतरा तो अब अपने क्लाइंट और खुद की प्रोजेक्ट डिस्कशन की विडियो यू ट्यूब पे लॉन्च करने की प्लान कर रहा है कमीना।।कुल मिला के ना खुद चैन से जियेगा,ना हमे जीने देगा….खैर मेरी बातें छोड़ और जल्दी से तैयार हो जा फिर मौसी को लेकर मन्दिर भी तो जाना है।”

दोनों भाई बातों में लगे थे कि सुशीला एक बड़ी सी ट्रे में दो प्लेट में नाश्ता और चाय लिये ऊपर चली आयी।।

” अरे मौसी जी हम नीचे ही आ रहे थे,आप यहाँ नाश्ता क्यों ले आईं ।”

” 9 बज गया अभी तक तुम लोग नीचे आये नही तो हम यहीं ले आये,चलो जल्दी से नाश्ता कर लो,तुम्हारी पसंद का आलू का पराठा और मूँग की दाल का हलुआ बनाये हैं बन्टी।।”

” अरे वाह!! मौसी जी इसी बात पे चलिये मन्दिर घूम आते हैं ।”

” मन्दिर?? अभी !! मतलब सुबह सुबह।।”

” मन्दिर तो सुबह सुबह ही जाया जाता है ना मौसी।”

     इतनी देर से चुप बैठे राजा ने अपनी माँ का हाथ पकड़ कर उन्हें कुर्सी पर बैठाया और माँ की आंखों में देखते हुए अपनी बात उनके सामने रख दी__

” माँ आज बांसुरी और उसकी माँ तुमसे मिलने आने वाली हैं शिव मन्दिर मे!! एक बार मिल लो उन लोगों से।”

सुशीला कभी राजा कभी बन्टी को भौचक नजरों से देखने लगी

” कर ली आखिर अपने मन की,जब हमसे पूछे बिना ही मिलनी तय कर आये तो टीका बरिक्षा भी तय कर आओ।।”

” अम्मा नाराज काहे हो जाती हो….बिना तुम्हरी मर्ज़ी कुछ नही करेंगे भई ,,कम से कम एक बार मिल तो लो,।।”

” का फायदा मिलने जुलने का ,जब हमरी राय कोनो मायने ही नही रखती तो का फायदा बोलो।”

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” कैसी बात कर रही हो मौसी,राजा को बचपन से देखे हैं,आज तक आपसे पूछे बिना तो पानी भी नही पीता लड़का,शादी तो बहुत दूर की बात है।”

” पानिये भर नही पीता है,बाकी सलगे काम अपन मर्ज़ी का ही कर रहा आजकल।”

” एक बार मिलने में कोई बुराई नही मौसी,मिल तो लो पहले,बाद की बाद में देखी जायेगी।”

   आखिर दोनो लड़कों की बहुतेरी जद्दोजहद ने सुशीला को मिलने जाने की हामी भरने मजबूर कर ही दिया…..
      सभी समय से तैयार हो कर मन्दिर पहुंच गये।।

” कहाँ हैं भई तुम्हरे मेहमान ?? अभी तक मन्दिरे नई पहुँचे, बड़ा लड़की ब्याहने चले हैं ।।”
    सुशीला की बड़बड़ जारी थी कि बुआ जी मन्दिर के अन्दर से निकल वहाँ उन लोगों के बीच धम्म से कूद पडीं …..

   ” कैसन हो सुसीला, पहले पहल तो मोहल्ले के सब कार्यक्रम में दिख भी जाती थी,आजकल तो दरसनों दुर्लभ है,अब तो बहु वाली हो फिर भी बाहर फिरे को टैम नही निकाल पाती ।”

” अरे हम बाहर घूमै फिरै लागें तो हुई जाये सब काम धाम।।बहु तो आन गयी पर आजकल की छोरियां ना काम की ना काज की….अपने मरे बिना सरग कहाँ दिखता है जिज्जी,लगे रहत हैं दिन भर काम मा, हम ना सकेलें तो पूरा घर पड़ा रहे,बचपना से एही करते आ रहे बस,अपनी मर्ज़ी से तो आज तक एक साड़ी भी नही ली,अब आजकल के बच्चे हैं सादी ब्याह भी अपनी मर्ज़ी से करना चाहतें हैं ।”

” का कहें सुसीला,आज कल के बच्चो में लाज शरम तो रह नही गया,एक हमारा जमाना था,हम सास के भी सामने अपने इनसे बात नही कर पाते थे,और आजकल के लड़िका लोग पहले ही कहे देते हैं ए अम्मा इन  संग हमर फेरे फिरा,लुगाई बना दो।”

” खाली लड़कों को काहे दोस दे रहीं,लड़कियाँ कम है का आजकल की,ऐसा तो चटक मटक बनी घूमेन्गी ,और फिर कहीं कोनो लड़का कुछ बोल भर दे तो उसके सर जूतियाँ बरसायेंगी….आजकल की लड़कियाँ बड़ी जब्बर हैं,इनसे पार पाना मुस्किल है बल्कि लड़के सीधे हो गये है इनके सामने।”

   बांसुरी ने राजा को देखा,वो सर नीचे किये जमीन पर पड़े छोटे से पत्थर के टुकड़े को अपने पैरों से इधर उधर करता बैठा था,बन्टी ने बांसुरी को देखा फिर उसकी माँ को और आखिर बीच बचाव करने कूद पड़ा …..

” इस चर्चा का तो कोई उपाय और कोई फल नही मौसी जी,,आप दोनो विदुषीयां जब बात कर रहीं तो मुझे बीच मे बोलना तो नही चाहिये,पर मैं कहना चाह रहा था कि राजा और बांसुरी के बारे में अगर बात कर लेते तो…..”

” तो और किसके बारे में बात कर रहे।” मौसी के कठोर जवाब पे बन्टी एक बार फिर मुखर हो उठा

” नहीं मेरा मतलब कि,इनकी शादी के बारे में बात कर लेते तो ….”

” अब यही तो तुम बच्चों के दिमाग मे नही आता, कैसे ये ब्याह सम्भव है?? कोई मेल मिलाप ही नही है दोनों घरों का,, आप ही बताइये जिज्जी!! आप बड़ी हैं घर की,,आप ठहरे सरजूपारी हम के के,,कैसे हो पायेगा,नही नही राजा के बाबूजी बिल्कुल नही मानेंगे।”

” देखो दुल्हीन हम का कह रहे कि एक बार दुनो के बाबूजी लोगो को बात करने देते हैं,हम भी जानते हैं, की रीत रीवाज, दान दहेज,मिलनी पूछनी सब अलग है ,पर हैं तो दुनो परिवार ब्राम्हण ।।तो एक बार बात बढाने मे हर्ज का है।”

” बुज़ुर्गवार हो कर कैसी बात कर रही जिज्जी,,पूरा समाज थू थू करेगा,कहेगा हमारे पास नही रही का लड़की जो बाहर से धरे लायी,और सही बोले अब कोई दुराव छिपाव भी नही रह गया,हमारे राजा के लिये 50-50 लाख का भी रिस्ता आ रहा है।।”

बहुत देर से चुप बैठी प्रमिला ने अपनी बात रखी__

” मैं कह रही थी,हमाई भी तो अकेली ही लड़की है अब शादी के लिये,इसके पापा ने जो जोड़ जाड़ के रखा है,सब इसी का तो है,हमलोग भी अपनी तरफ से बहुत अच्छी शादी ही करेंगे दीदी।”

” देखो मैं किसी को कम जादा नही आंक रही भाई,,बुरा मत मान जाना पर हमरे बड़के के में भी बिना मांगे पूछे ही सब कुछ आ गया था,अब ये हमारा आखिरी लड़का है,रुखा सूखा ब्याह देंगे तो समाज ताना मारेगा_ कहेगा लड़के में कोनो खोट रहा होगा जभी बिना लेन देन के हो गयी सादी।”

प्रमिला- हम पूछ तो रहे जिज्जी,आप अपनी बात रखिये ना ,हम कोसिस पूरी करेंगे कि आपको कोई असुविधा ना हो।

सुशीला- अरे का का करेंगी?? बरीक्षा ही सात आठ लाख की पड़ जायेगी,फिर तिलक कम से कम इक्कीस का तो चढायेंगी,जेवर जट्टा आप अपन बिटिया को जो दे वो आपकी मर्ज़ी पर पांव पखारते समय दामाद को चेन तो पहनाएंगी की नही….
    फिर तिलक बारात हर मौके पे मेहमानों को लिफाफ़ा पकडायेंगी,अब आजकल 20-50 रुपया का लिफाफ़ा भी तो नही चलता ,कम से कम 100 रुपैय्या तो डालना ही पड़ेगा और लड़के के ताऊ ,चाचा फूफा मौसा लोगो को 500 का ।।सास की पिटरिया रीति तो ना भेज देंगी,रूपा 3 तोले का हार लायी रही ,आप उतना ना सही पर कुछ तो डालेंगी,फिर सास के साथ जेठानि को एक आध कर्णफूल अँगूठी कुछ तो पकड़ाना पड़ेगा ही।।
   सामान के लिये चलो हम मना भी कर देंगे पर पार्टी तो देंगे ना आप लोग,कम से कम ग्यारह सौ बराति का खाना खरचा हो जायेगा ।।

प्रमिला- हाँ अब इतना तो करना ही पड़ेगा,,लड़की हमारी है आखिर।।
   प्रमिला के धीमे से शब्द जैसे गले में ही रुंध गये

बांसुरी- इतना कुछ नही करना पड़ेगा मम्मी ।।माफ कीजियेगा आँटी जी,पर बेटी पैदा करने का जो पाप हमारी मम्मी ने किया उसकी अच्छी खासी सज़ा आपने सुना दी,पर हमे ये सज़ा मंजूर नही है।
  राजा तुम अच्छे तो बहुत हो,हमे बहुत प्यारे भी हो पर अब हम तुमसे शादी नही कर पायेंगे ,चलिये मम्मी।।
    और आँटी आपको एक बात और बता दें,हम आगे पढ़ाई और नौकरी दोनो करना चाहतें हैं,पर शायद आपको ये भी पसंद नही आयेगा,वैसे आपकी पसंद का हममे कुछ भी नही है,आपको यहाँ आकर हमारे कारण जो भी परेशानी उठानी पड़ी उसके लिये माफी चाहतें हैं ।नमस्ते।।

बन्टी- अरे ऐसे कैसे!! बांसुरी बड़ों की बात चीत अभी चल रही है,ऐसे बीच मे तुम्हारा बोलना ठीक नही है,,ये सब तो शुरुवाती बाते हैं,धीरे धीरे सब सुलटाएंगे,तुम काहे इतना टेंशन ले रही हो।

बांसुरी- नही बन्टी भैय्या,जहां बातों की शुरुवात ही गलत नींव पर हो वहाँ हमारा सपनों का महल खड़ा नही हो पायेगा,चलिये मम्मी।

   बांसुरी को जाने कौन सी बात इतनी परेशान कर गयी,राजा की अम्मा का हद से ज्यादा बोलना या राजा की गम्भीर चुप्पी !! पर इसके बाद बिना रुके वो अपनी माँ का हाथ पकड़े मन्दिर से बाहर निकल गयी,उनके पीछे बुआ जी अपने पुरखों को कोसती दहेज लोभियों पे भाषण देती धीरे धीरे चल पडी,जाते जाते उन्होनें आखिरी व्यंग सुशीला पे भी दे मारा_

” अच्छा नही किया दुल्हिन!! जितना तुमने कहा उतनी सब की तैयारी रही हमारे भाई की,पर ऐसे इस ढंग से बच्चो के सामने…..का सोच रही अब खुस रह पाओगी तुम?? कर सकती हो तो हमरी बांसुरी के पहले राजा का ब्याह कर के दिखा दो, बड़ी खुसी से तुम्हरे द्वारे आयेंगे तुम्हरे राजकुमार के ब्याह का लड्डू खाने,और हम भी तुम्हें न्योत रहे एक महीना के अन्दर अन्दर तुम्हे बंसी के ब्याह का लड्डू खिला के रहेंगे।।”

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  आंखों से आग बरसाती बुआ जी अपने घुटने संभालती चली गयी।।

          ************************

              एक सौ सोलह चाँद की रातें,
               एक तुम्हारे काँधे का तिल
               गीली मेहंदी की खुशबू,
                झूठमूठ के शिकवे कुछ
          झूठमूठ के वादे भी, सब याद करा दो
         सब भिजवा दो, मेरा वो सामान लौटा दो……

  रेडियो पर बजते गाने के बोल सुन अनजाने ही दो आंसू बांसुरी के गालों पे लुढ़क आये,,खिड़की पर खड़ी वो अपनी सोच में गुम कहीं खो गयी।।

क्रमशः

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aparna..

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शादी.कॉम-20

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           अगर लैला मजनूँ,हीर राँझा के घर वाले एक बार में ही उनके प्यार को कबूल लेते तो शायद ही ऐसी सफल प्रेम कहानियाँ रची जातीं।।

   अम्मा की ना ने दोनो के मन में छिपा रहा सहा संकोच भी समाप्त कर दिया,दोनो को ही समझ आ गया कि एक दूसरे के बिना जीना व्यर्थ है,और अब वो दोनों सिर्फ दोस्त से कहीं आगे निकल चुके हैं ।।

  ” राजा!! ऐसे क्यों देख रहे ,जैसे पहली बार देखा हो।।”

बांसुरी की बात पर राजा मुस्कुराने लगा।।।

” सुनो !! हम तुम्हें छूना चाहते हैं,तुम्हें छू कर तसल्ली करनी है कि हम सपना नही देख रहे,राजा बाबू सच में हमारे घर के सामने खड़े हैं ।

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” अच्छा!! सच में ??” और मुस्कुराते हुए राजा ने बांसुरी को अपनी तरफ खींच कर गले से लगा लिया।।

   दोनों एक दूसरे के गले से लगे एक दूसरे में डूबे खड़े थे कि __

   ” बांसुरी !!इत्ती रात गये यहां का कर रही हो।”

  दोनो इस आवाज़ को सुन झटके से अलग हो गये

  ” पापा आप!! ये ….वो राजा हैं,हमारे जिम इंस्ट्रक्टर,जिन्हें हम पढाते भी थे।” राजा ने लपक के बांसुरी के पिता के पैर छूने चाहे,पर उन्होनें हाथ बढ़ा कर उसे रोक दिया__” हाँ ठीक है ठीक है,तुम अभी घर चलो ।”

” हां पापा चल रहे!! ” बांसुरी ने आंखों ही में राजा से बिदा ली और अपने पापा के पीछे सर झुकाये घर चली गयी।।

  राजा अपने बालों पे हाथ फेरता रह गया,अपनी बुलेट वापस  उसने घर की तरफ मोड़ ली __

  पूरे रास्ते मुस्कुराते हुए राजा घर पहुँचा ,हालांकि बांसुरी के पिता ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया था,पर इस बात से डरने की जगह उसे एक सुखद एहसास था कि बताना तो आखिर सभी को है,चाहे किसी ढंग से पता चला पर खुशी की बात है कि बंसी के घर पे भी पता तो चल ही गया।।

बांसुरी के पिता पढ़े लिखे सरकारी मुलाजिम थे, इसीसे उन्हें कितनी भी गम्भीर विषय से जुड़ी बात हो उसपे अनावश्यक हाय तौबा मचाना पसंद नही था,साधारण तबीयत के साधारण पुरूष थे।।

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       बांसुरी से ना उन्होनें कुछ पूछा ना बांसुरी ने ही आगे बढ़ कर कोई कैफियत दी,पर अपने धीर गम्भीर पिता की आवाज़ से ही उसने भांप लिया कि उसका यह कार्य पिता को कहीं अन्दर तक कष्ट दे गया है।।

    अगले दिन सुबह और दिनों की तरह बांसुरी जिम नही गयी,उसे घर पे ही इधर उधर निरर्थक डोलते देख उसकी अम्मा से रहा नही गया__

  ” का हुआ?? आज जिम नही जाओगी का बंसी ?”

प्रमिला के सवाल का जवाब बंसी की जगह उसके पिता ने दिया__

” नही! आज के बाद ये कभी जिम नही जायेगी, वर्मा से बात हुई है,कल लड़के वालों को घर बुला लिया है….सोच रहा हूँ अब इसी साल इसके भी हाथ पीले कर दूँ ।”

   बांसुरी ने अपनी माँ को देखा और उन्होनें बांसुरी को,आंखों ही आंखों में दोनो ने एक दूसरे की पीड़ा पढ़ ली।।

  ” हुआ क्या?? कुछ बताएंगे भी!!! ऐसे कैसे तुरंत हाथ पीले कर देंगे।”

   ” देखो प्रमिला,मेरा यही मानना है कि हर काम अपने समय पर हो जाना चाहिये,चाहे विद्या ग्रहण हो या पाणिग्रहण!! बहुत पढ लिख ली बांसुरी,अब इसका भी ब्याह कर दूँ तो मुझे भी चैन मिले।”

   ” मर गयी रे,ये जोड़ गठान का दर्द मुआ मेरे परान लेकर ही जायेगा…..” अपने घुटने हाथों से सहलाती बुआ जी ने घर में प्रवेश किया_” ठीके तो कह रहा है मेरा भाई,अब इत्ता सारा तो पढ़ लिख ली है,कौन सा हमें छोकरी को कलेक्टर कमिस्नर बनाना है,अब निबटो इससे भी,उमर हुई जा रही इसकी भी।”

” परनाम करते हैं जिज्जी!! छोटा मुहँ बड़ी बात हो जायेगी,पर अभी बाईस की तो हुई है और अगले हफ्ते इसका बैंक का पेपर भी है,एक बार चुन ली जाये फिर अपने पैर पे खड़ी हो जायेगी फिर निबटाते रहेंगे ब्याह।।”

” हम तुमसे पूछ नही रहे,तुम्हे बता रहे कल शाम को खाने पे बुला लिया है उन लोगों को,तुम अपना सब तैयारी ठीक-ठाक रखना।”

” जी अच्छी बात है!!” प्रमिला ने एक बार बांसुरी को देखा और रसोई में वापस चली गयी,बांसुरी भी सर झुकाये ऊपर अपने कमरे में चली गयी।।

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            **************************


   ” सांसों में बड़ी बेकरारी आंखों में कई रतजगे
कभी कही लग जाये दिल तो,कहीं फिर दिल ना लगे
अपना दिल मैं ज़रा थाम लूँ,जादू का मैं इसे नाम दूँ
जादू कर रहा है,असर चुपके चुपके …….”

    
      जिम में चलता गाना असल में राजा भैया के मन में चल रहा था,रह रह के नज़र दरवाजे पे जा कर अटक रही थी……..सब आ रहे थे जा रहे थे पर ना उसे आना था ना वो आई।।

    आखिर इन्तजार की घडियां पहाड़ बनने लगी और राजा ने बांसुरी को फ़ोन लगा दिया, पूरी रिंग बजती रही पर फ़ोन नही उठा,अब कल रात की एक एक बात किसी फिल्म की रील की तरह आंखों के सामने से गुजरने लगी।।।

     और समझ में आ गया कि बांसुरी क्यों नही आयी , उसने फोन क्यों नही उठाया।।राजा की मोटी अकल को आखिर समझ आ ही गया की बांसुरी के पापा को उन दोनों का यूँ मिलना रास नही आया, अजीब बेचैनी से राजा व्याकुल हो उठा,उसने एक बार फिर बांसुरी को फोन लगाया,इस बार थोड़ी देर में ही फ़ोन उठा लिया गया।।

” फोन क्यों नही उठा रही थी बांसुरी??”

” पापा थोड़ा गुस्से में लग रहे राजा,अब हमे जिम आने नही मिलेगा,अगले हफ्ते हमारा पेपर है,पता नही दे पाएँगे या नही?”

   दोनो अभी अपनी बातों में लगे थे कि राजा की अम्मा किसी से बात करती राजा के कमरे तक आ गयी__

” ए राजा!! देखो कौन आया है??आओ बेटा बन्टी, तुम राजा के कमरे में आराम करो हम तुम्हरा सामान ऊपरे भिजाये दे रहे।”

” जी मौसी जी।”



  राजा की मौसी का बेटा बन्टी राजा का ही हमउम्र था और पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली में रह कर नौकरी कर रहा था,वही अचानक बिना किसी पूर्वसूचना के अपना बैग टाँगे राजा के घर टपक पड़ा था।

” तुमसे बाद में बात करते हैं बांसुरी अभी मेहमान आ गये हैं,रख रहे फोन।”

राजा ने आगे बढ़ कर भाई को गले से लगा लिया__

” का हो गुरू!! एकदम दाढ़ी वाढी बढ़ाए बैठे हो, क्या हो गया ??”

” क्या बताऊँ राजा!! ब्रेक अप हो गया यार,दिमाग एकदम खराब हो गया,दिल्ली में मन नही लग रहा था साला,और मम्मी पापा के पास जाता तो शादी शादी रट लगा देते इसिलिए छुट्टी लेके यहाँ आ गया।”

” ब्रेक अप हो गया ,पर काहे,हमारा मतलब कैसे?”

” वो तो मैं बाद में बताऊंगा,पहले तुम बताओ,किससे इतना घुस घुस के बात कर रहे थे,जो मुझे और मासी को देखते ही फोन रख दिया।”

” अरे वो ?? वो कोई नही ,,बस ऐसे ही ,,तुम अपनी कहानी बताओ पहले।”

” अच्छा !! तो हमारी कहानी सुनने के बाद साहब अपनी सुनायेंगे।अबे कुछ नही रखा यार मेरी कहानी में,बस एक लड़की थी ,पसंद आ गयी थी ….

” फिर?”

” फिर क्या??फिर भाई ने प्रपोस कर दिया,और किस्मत खराब थी साला ,उसने भी एक बार में हाँ कह दी।।”

” इसमें किस्मत का क्या दोष बन्टी,ये तो अच्छा ही हुआ।”

” खाक अच्छा हुआ!!! राजा कानपुर से बाहर निकल के देखो,लोग कितना फॉरवर्ड हो गये हैं,अच्छा एक बात बताओ क्या पढ़ाई करी है मैनें?”

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” तुमने वो क्या कहते हैं …..

” हाँ हाँ बताओ बताओ,निसंकोच बोलो बे।”

” बन्टी वो इंजीनियरिंग वाली पढ़ाई…”

” हाँ वही बी टेक किया है मैनें ,एम बी ए करने वाला हूँ,अच्छी खासी नौकरी कर रहा हूँ,है की नही?”

” हाँ भाई सौ टका!!”

” अब इसके बाद सुनो ,,इतना सब करने के बाद भी मैं मैडम को गंवार लगता हूँ,कहती है तुम्हारी प्रनन्सियेशन सही नही है।।”

” क्या ??क्या सही नही है??”

” अबे उच्चारण यार!!! कहती है बेबी तुम ना सही से बोल नही पाते हो,मैनें कहा यार सेक्रेड हार्ट इंग्लिश मीडियम स्कूल से पढ़ा हूँ,कहती है_ होगा पर तुम्हारा एक्सेन्ट सही नही है,तुम ना ब्रिटिश इंग्लिश नही बोल पाते…..हिन्दुस्तानी हूँ यार अपनी इंग्लिश बोलूंगा ना भाई।।अब मैं तुझे शुरु से अपनी कहानी सुनाता हूँ ।”

” तो अभी तक क्या सुना रहे थे गुरू!!”

” दिमाग ना खराब कर भाई का यार,वर्ना नही सुनाऊंगा।”

” मजाक कर रहे थे भाई ,तुम सुनाओ यार अपनी राम कहानी।”

“जानते हो ,पहली बार कहाँ मिला उससे,,अरे वहीं यार!!!आजकल का प्रेम तीर्थ !! आज कल वही एक जगह है जहां रोज़ हजारों प्रेम कहानियाँ सुबह शुरु होती हैं और शाम होते होते खतम!! मेरी तो फिर भी तीन महीना चल गयी…..

” अबे ऐसी कौन जगह है दिल्ली में??”


“अबे दिल्ली नही ,,,,फेसबुक पे!! बन्दी ने ऐसी ऐसी खूबसूरत फोटो डाल रखी थी कि बस पूछ मत भाई!!! भाई बहक गया,,मैनें फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी उसने मान ली ,,गप्पे शप्पे शुरु हो गयी…..अब तो बन्दी  रोज़ नया प्रोफाइल पिक लगाये ,कभी लेफ्ट से कभी राईट से ,कभी सामने से,ऊपर से ,नीचे से…मतलब ये की फोटो देख देख के ही मैनें तो यार बच्चों के नाम तक सोच लिये,फिर एक दिन धीरे से प्रपोज़ भी कर दिया,उसने झट मान भी लिया,फिर मैनें मिलने को बुलाया,तब नखरे चालू हुए।।फिर भी आखिर मान गयी…..अच्छा उसके ऊपर भी पहली डेट कैसी होनी चाहिये पर भी घुमा फिरा के खूब क्लास ले ली मेरी,कहती है __ ‘मेरी हर फ्रेंड को उसके बी एफ ने पहली मुलाकात में कोई ना कोई गिफ्ट दिया है,जैसे टॉमी हाईफ्लायर की वॉच या रिंग..लायक दैट यू नो!!’ अब मैं इतना भी नासमझ नही हूँ यार एक सोने की अँगूठी खरीद के ले गया।”

” फिर क्या हुआ??”

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” फिर क्या ,जब मैं वहाँ पहुँचा और उसकी शकल देखी!!! कसम से भाई ,दिल का दौरा आते आते बचा,,भगवान बेड़ा गर्क करे इन चीनियों का ऐसे ऐसे फोन बनाये है ना,ओपो-विवो कि साला इस मोबाईल से अपनी ही फोटो खींच के बंदा ना पहचान पाये,जन्मजात कोयला भी इनमें फिरंगी लगे।। खैर मैनें अपना दिल सम्भाला और जाकर बैठ गया,अब उसके आत्मविश्वास की इन्तेहा देखो,पूछती है__ कैसी लग रही हूँ मैं? मैनें कहा_ तुम हूर हो परी हो, इस दिल्ली की नही लगती,शिमला मसूरी हो। मेरे इस भद्दे जोक पे भी हंसने लगी ,कहती है _ शुक्रिया !! खैर अँगूठी ले आया था तो मैनें निकाल लिया देने के लिये, कहती है __ omg ridiculous! तुम गोल्ड रिंग लाये हो ,मैं तो सिर्फ diamonds पहनती हूँ,,फिर सोच क्या हुआ।।”

” ब्रेकअप??”

” नही यार!! इतना झल्ला भी नही है तेरा भाई ,, बहुत सबर है भाई में….दिल में  तो आवाज़ उठी कि जाहिल औरत किसी भी एंगल से तू डायमन्ड के लायक नही लगती पर ऊपर से मैनें कहा__ चलो बेबी शॉपिंग चलतें हैं,ले लेना अपनी पसंद का कुछ!!
    अब भाई मैं तो उसे ‘ शाह जी’ ,’ अनोपचंद तिलोकचंद’ टिकाने वाला था,कम्बख्त ‘ गीतांजली’ ले गयी यार!!! पूरे बहत्तर हज़ार खरचे तब जाके मैडम के चेहरे पे स्माइल आयी।।
    फिर पूरा दिन घुमाती रही ,कभी यहाँ कभी वहाँ, शाम को जब उसे घर छोड़ने गया,तो मैने बाय बाय के साथ सोचा एक छोटी सी किस ले लूं,कहती है __ नो बेबी !! ये सब शादी के बाद!! मैनें कहा हमारे यहाँ भी गहने शादी में ही चढाये जाते हैं ।।पर मेरा ये खून्खार जोक भी उस नामुराद के पल्ले ना पड़ा ।।
    फिर तो बस सिलसिला ही चल निकला,हर वीकएंड पे शॉपिंग मूवी डिनर!! अब यार इतना भी नही कमा रहा था तेरा भाई!!!

” तो इस बात पे ब्रेकअप हुआ।”

” अबे नही यार!! इतना सब कर के देने के बाद मैडम को ये समझ आया की मैं केयरलेस हूँ मैं उससे रीलेटेड महत्वपूर्ण तारीखें भूल जाता हूँ,जैसे उसके कुत्ते का जन्मदिन, उसकी फुफी की शादी की सालगिरह,हम पहली बार कब एफ बी पे दोस्त बने, इसी तरह के कई बिल्कुल ही भुला देने योग्य तारीखों को कैसे कोई याद रखे।।कहने लगी_ ” तुम मुझसे सच्चा प्यार नही करते,तुम बस मेरी खूबसूरती से प्यार करते हो।।” माँ कसम भाई कलेजा मुहँ को आ गया,जी मे आया चिल्ला चिल्ला के कहूं __ कम्बख्त किसी अच्छे आंखों के डॉक्टर से इलाज करा अपना।।पर मैं फिर ज़ब्त कर गया।।फिर उसकी लाईफ मे आ गया एक एन आर आई बंदा!! बिल्कुल फिल्मी स्टाइल में!! उसके पापा के दोस्त का लड़का !! और भाई विदेशियों ने सदियों हम हिन्दुसतानीयों पे राज किया ही है,वही हुआ ।।मैडम भी उड़ गयी सात समंदर पार,और तेरा भाई पी पिला के गम गलत करने लगा।।”

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” अरे दारु की लत लगा ली तुमने गुरू।”

” अबे दारु की लत लगाये मेरे दुश्मन।।दारु तो बेटा ऐसा है कि भाई के खून में घुली है,इन्जीनियरिंग फर्स्ट ईयर में रैगिंग में कमीने सीनियर्स ने जब पहली बार पिलायी,हमने फुल एक्टींग करी जैसे हमे बिल्कुल नही जन्ची ।।उन्होनें और पिलायी,हमने भी खूब ढकोल के पिया,,तो दारु तो अब ऐसा है कि चढ़नी ही बन्द हो गयी बे।।हम तो चाय पीने पिलाने की लत की बात कर रहे थे।।
    तो बेटा इस तरह हमारी प्रेम कथा शुरु हुई और अपने अंजाम तक पहुंच भी गयी अब तुम बताओ,ये तुम्हारा क्या चक्कर चल रहा है।”

” क्या बताएँ बन्टी,हमारा ऐसा कुछ चलने लायक चल ही नही रहा!! एक लड़की है बांसुरी!! पहले हमारी दोस्त बनी, धीरे धीरे अच्छी लगने लगी…अब तो यार आदत सी पड़ गयी है उसकी,पर हमने पहले ही उसे कह दिया कि अम्मा से पूछ कर ही आगे कदम बढ़ाना है।”

” तो मान गयी मासी जी।”

” अबे कहाँ यार!! अम्मा तो अलगे राग छेड़े बैठी हैं सरजूपारी है तो ब्याह नही हो सकता।।”

” अरे तो सरजूपारी भी तो ब्राम्हण ही है,यहाँ तो हमारे पिता श्री ने हमारा नाम ही अजीब रख दिया __ ‘ रविवर्मा’ इसिलिए बन्टी नाम चलाते हैं ।।कोई बहुत फेमस पेंटर बाबू थे रवि वर्मा साहब!! तुम्हारे कला पारखी मौसा जी यानी मेरे पिताजी को और कोई नाम नही मिला…..पहले पहले तो मुझे कॉलेज में सब वर्मा समझते थे फिर जब पूरा नाम बताया तो खासा मजाक भी बन गया__ रविवर्मा उपाध्याय!!!
हां तो बेटा आगे क्या हुआ?”

” क्या होना था? कुच्छो नही हुआ,ना हो पायेगा,,हम सोच रहे अम्मा के एकदम पैर पकड़ लेते हैं,क्या बोलते हो तुम?”

” क्यों लड़की वाले तैयार बैठे हैं क्या?”



” अबे कहाँ यार!! पहले अम्मा तो तैयार हो जायें ।”

” और अम्मा के तैयार होने के बाद कहीं लड़की वाले मुकर गये तब,क्या करोगे।”

” ये तो सोचे ही नही भाई”

” हमारी मानो तो एक बार लड़की के घर वालों से मिल आओ!! अपने मन की बात बता दो उन्हें,,फिर वो लोग मां गये तो अम्मा तो यार मान ही जायेंगी, आत्महत्या की धमकी चमकी दे डालना और क्या।”

” हम्म!! तो मतलब हम पहले बांसुरी के घर वालों से मिल लें और बात कर लें ।”

” बिल्कुल!! और किसी तरह जुगत लगा के दोनो घर की औरतों की मीटिंग करा दो,किसी मन्दिर में!! घर की औरतें तैयार हो जायें ना तो आदमियों को मानना ही पड़ता है बंधु ।”

” बात तो पते की बोले हो बन्टी भाई ,तो फिर निकलते हैं हम बांसुरी के घर के लिये,तुम अपनी तलब मिटाओ चाय पीकर!!”

” अबे रुको यार!! बड़ी हडबडी में हो क्या बात है?? चाय पीकर मैं भी चले चलता हूँ,,देखूँ तो ज़रा कौन सी बांसुरी बजा रहे हो तुम।”


        **************************


            मेरी हर मन मानी बस तुम तक                         बातें बचकानी बस तुम तक
           मेरी नज़र दीवानी बस तुम तक
तुम तक तुम तक।।

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    दोनो भाई चाय खतम कर बाँसुरी के घर की ओर निकल चले।।

   ” क्या बात है राजा!!! तुम तो बेटा सच में प्यार में पड़ गये हो जभी रान्झणा के गाने सुन रहे हो।”

” क्यों ज़रूरी है प्यार में पड़ने पर रान्झणा के गाने ही सुने जाये।।”

” नही बिल्कुल नही!! मैं तो ब्रेकअप के बाद ‘ लम्बी जुदाई’ सुनने लगा तो एक दोस्त ने कहा ,कौन से जमाने में जी रहे हो यार,मैने कही क्यों__ तो कहता है आजकल लड़कियाँ ब्रेकअप के बाद दिल पे पत्थर रख के मुहँ पे मेक’प कर लेती हैं,और तुम्हारा बावरा मन जाने क्या चाह रहा,सम्भालो यार खुद को।मैनें संभाल लिया और तबसे जस्टिन बीबर सुनने लगा।।”

” वो क्या गाता है गुरू??”

” पता नही भाई!! मैं तो फैशन के मारे सुनता हूं, लोगो को भले गाने का एक शब्द ना समझ आये पर बनेंगे ऐसे जैसे बहुत बड़े अन्ग्रेजी संगीत के ज्ञाता हो,  आस पास इम्प्रेशन मारने एक आध गाना पता होना चाहिये ना।”

   कुछ देर पहले अपने दिल से दुखी राजा के मन का कुहासा बन्टी की बातों से छन्ट गया,अपनी पूरी ऊर्जा के साथ वो गाड़ी भगाता अगले ही पल बांसुरी के दरवाजे खड़ा था।।

   दरवाजे को प्रमिला ने खोला,और पूरे आदर के साथ दोनो लड़कों को अन्दर बिठाया।।।

    अपने पापा के ऑफिस निकलते ही माँ बेटी में सारी बातें हो चुकी थी,बांसुरी ने पापा की नाराजगी का कारण माँ को बता ही दिया था,प्रमिला को वैसे भी पहले से ही राजा पसंद था पर पति की खिलाफत करने की उस भारतीय नारी ने आज तक।कल्पना भी नही की थी,इसीसे अपनी सोच में गुम प्रमिला ने बांसुरी को आवाज़ लगाई।।
    इस वक्त पे माँ और बेटी दोनो यही चाहती थी की कोई भी बाहरी व्यक्ति ना आये और वो लोग राजा के साथ बैठ कर आगे क्या करना है कैसे करना है कि रूपरेखा पर चर्चा कर सकें….पर भगवान को भी कभी कभी अपने प्रियजनों से हँसी मजाक करने का मन करता है इसिलिए वो बुआ जी जैसे लोगों की सृष्टि करतें हैं ।।

    बांसुरी अपने कमरे से उतर कर आयी ही थी कि दरवाजे को भड़भड़ाती बुआ जी का आगमन हुआ।।

” अरे कौन मेहमान बैठे हैं परमिला?”

  बुआ जी का अक्समात आगमन सभी को चकित कर गया।।

“राधेश्याम जी गैस वाले हैं ना,, उन्ही के लड़कें हैं जिज्जी राजकुमार!! “

” हाँ हाँ!! मिले रहे उस दिन !! याद आ गया । औ बेटा कहो कैसन आना हुआ,सब कुसल मंगल घर में,कभी ऐसने अपन अम्मा को भी ले के आओ, अवस्थीन का भी चरन धूलि पड़े घर मा, ये कौन लड़का है जो साथ मे बैठा है।।”

” प्रणाम बुआ जी,ये हमारे भाई हैं मौसी के लड़के _ रविवर्मा नाम है।”

” हैं,तुम्हरी मौसी का सादी(शादी) वर्मा में हुआ रहा का,कायस्थों को ब्याह दिये लड़की।”

” नही नही बुआ जी इनका नाम ही रविवर्मा है सरनेम उपाध्याय लिखते हैं ।”



” तो बेटा तुम ऐसा उजबक नाम काहे रक्खे।”

” बुआ जी अब क्या बताएँ,ऐसे ही उटपटांग शौक हैं हमारे।”

  बुआ जी ने बहुत ही बुरा सा मुहँ बना के मुहँ फेर लिया __” परमिला चाय वाय पिलाओगी कि खुदै आके बना लें।।”
    वापस मुहँ घुमा के बन्टी से पूछा__” पढ़ते लिखते भी हो कुछ??”

” जी दिल्ली में नौकरी करते हैं ।”

नौकरी की बात सुनते ही बुआ जी की आंखों में चमक आ गयी,उन्हें बांसुरी के लिये घर बैठे चमचमाता रिश्ता दिखने लगा।।
” अरे वाह बचुआ!! कितना नोट कमा लेते हो ।।”

” बस बुआ जी आपके आशीर्वाद से अस्सी हज़ार महीना बना लेते हैं ।”

  बन्टी भी बुआ जी की गिद्ध दृष्टी को ताड़ चुका था इसिलिए वो भी मज़े लेने लगा

” और कौन कौन है घर में,मतलब भाई बहन ,दादी चाचा??”

” बस हम ,मम्मी और पापा!! इकलौते हैं ।।”

बुआ जी के चेहरे पे बिल्कुल ऐसे भाव थे जैसे कई दिनो से खिचड़ी का पथ्य सेवन करते पीलिया के रोगी के सामने छप्पन व्यंजनों से सजी थाल परोस दी गयी हो।।हर एंगल से देखने पर भी इस सजीले नौजवान मे उन्हें कोई कमी नज़र नही आयी।।

   वो अभी अपनी बात आगे बढ़ाती कि राजा ने अपनी बात कहनी शुरु की__

  ” बुआ जी ,हमें जादा घुमा फिरा के कहने की आदत तो है नही,हम साफ साफ ही कहेंगे।”

  अभी तो बस मन में आया था कि इस दिल्ली वाले से बात चलाऊँ और ये राजा समझ भी गया,जो दहेज की बात शुरु कर रहा,बुआ जी ऐसा सोच ही रही थी कि राजा ने विस्फोट कर दिया__

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” हम बांसुरी से शादी करना चाहते हैं ।”

प्रमिला और बांसुरी चुप बैठे रहे पर बुआ जी पर जैसे बिजली सी गिरी

” हैं!! क्या करना चाहते हो??”

” शादी करना चाहतें हैं बांसुरी से।”

बुआ जी कभी राजा को कभी बांसुरी को देखने लगी, उन्हें अपनी आंखों पर विश्वास ही नही आ रहा था,जिस छोरी को उसके सांवले रंग के लिये आज तक वो माफ नही कर पाई थी आज उसके लिये साक्षात रामरतन पंचाग के श्री राम की छवि सा सुन्दर लड़का बाहें पसारे खड़ा था।
     बोलो इसे कहतें है किस्मत!! है क्या इस छोकरी मे,भले ही अपने सगे भाई की बेटी है पर ना रूप ना रंग,पर इसे ही किस्मत कहते हैं ।।
      बुआ जी को अपने रूप रंग पे इस बुढऊती आने तक भी नाज़ था,उनके अनुसार उनकी शादी किसी कलेक्टर से होनी थी ,वो तो कंजूस भाई ने दहेज बचाने को ऐसी सुन्दर गुलाब की कलि को एक अदना से क्लर्क से ब्याह दिया।।
        अपने सारे भावों को समेट कर उन्होनें राजा से पूछा __” काहे राजा बाबू तुम्हरे घर सब तैयार है का?

” नही अभी तो नही,पर हो जायेंगे।।”

” पर बेटा तुम ठहरे कान्यकुब्ज,हम सरजूपारी !! बडी मुस्किल आयेगी।।

बुआ जी की बात पर बन्टी उचक पड़ा __” बुआ जी मुश्किल सलटाने के लिये आप हैं ना,,देखिए बुआ जी,अब आपको ही तारणहार बन कर इन दोनो की नैया को पार लगाना पड़ेगा,,चाहे जो हो जाये।”

” हम !! हम ठहरे अनपढ़ ,तुम पढ़ो लिखो के बीच हम का बोलेंगे बेटा ।।”

” अरे बुआ जी खुद को कम ना समझिये!!! आप जितनी सुन्दर है उससे कहीं ज्यादा आप सुलझी हुई और समझदार लगती हैं हमे।।

” कह तो ठीके रहे हो बेटा पर बांसुरी का बाप भी कम ज़ीद्दी नही है,बचपन से अपने छोटे होने का फायदा उठाता रहा है,और आज तक उठा रहा है,एक बार उसने कह दी फिर कोई उसकी बात नही काट सकता।।”

” वो बाद में निबटाएंगे बुआजी,पहले ऐसा किजीये ना एक बार आप और आंटी जी चल कर राजा की अम्मा यानी हमारी मौसी से मिल लेते,देखिए शादी ब्याह तो असल में घर की औरतों को ही तय करना होता है,,है ना…जब घर में दामाद आता है सेवा जतन कौन करता है सास!!! बहू जब ससुराल जाती है,किसके साथ सबसे अधिक समय बिताती है,सास के साथ ना!! दोनों तरफ ही औरतों को ही सब बखेड़ा देखना समझना है तो सही यही रहेगा की एक बार आप लोग आपस में मिल लो,, फिर यदि आप लोगों को सही ना लगे तो ना करना दोनो का ब्याह।।

” ठीक है बेटा तो यहाँ लेते आओ अपनी मौसी को भी।”

” नही बुआ जी घर पर नही,,कल घाट वाले शिव मन्दिर पर आप दोनों आ जाईये बाँसुरी को लेकर, हम दोनों आ जायेंगे मौसी जी को लेकर।।पूरी बात वहीं तय कर लेंगे,,एक बार आप लोगों का मन मिल जाये,फिर तो जय शिव शंभू!!भोलेनाथ चाहेंगे तो भाई की बारात मे नागिन डांस करने के बाद ही अब दिल्ली जाऊँगा।।”

  बन्टी की बात पर सभी खिलखिला उठे….प्रमिला हँसते हुए मिठाई लेने अन्दर चली गयी और राजा और बन्टी वापस जाने उठ खड़े हुए।।

   बांसुरी दोनों को दरवाजे तक छोड़ने आयी।।मुस्कुराती हुई दरवाजे को पकड़ी खड़ी बांसुरी को देख राजा ने पूछा __

   ” क्या हो गया!! बहुत मुस्कुरा रही हो।”

   ” हम्म बना दिया ना अपने जैसा,कहाँ हम सोचते थे तुम्हें पढना लिखना सीखा देंगे उल्टा तुमने ही हमे हमारी पढ़ाई से दूर कर दिया।।”

” ऐसे काहे बोल रही हो,हमने कब मना किया पढ़ने से।।”

” जब दिमाग से बाहर जाओगे तब तो पढ़ पायेंगे, अगले हफ्ते पेपर है हमारा,सेलेक्शन हो गया तो एक महीना ट्रेनिंग करने बाहर चले जायेंगे यहाँ से।”

” ओह हो एक मिनट ,ये नया पेंच क्या है भाई!! बांसुरी नौकरी भी करने की सोच रही हो क्या!! लगता है राजा ने तुम्हें बताया नही,मैं बता देता हूँ,हमारी मौसी जी औरतों की नौकरी के तो सख्त खिलाफ हैं,तो कल जब मन्दिर आना अपनी पढ़ाई नौकरी पेपर इत्यादी से सम्बंधित कोई चर्चा वहाँ ना करना,वर्ना बनती बात बिगड़ जायेगी।।
    यार देखो !! तुम लोग ना धीरे धीरे घर में विस्फोट करो,ऐसा ना कर देना कि सब घनघोर विरोधी हो जायें तुम्हारे।”

” अच्छी बात है रविवर्मा जी,हम कल कुछ नही कहेंगे।।” बांसुरी और राजा फिर मुस्कुराने लगे।

” बना लो बेटा!! मेरे नाम का तुम भी मजाक बना लो, पर यही नाम तुम दोनो के शादी के कार्ड मे शुभाकांक्षी में छपने वाला है,समझे।।”

” समझ गये गुरदेव,चलें अब।।

       मैं ना मांगूंगा धूप धीमी धीमी……
              मैं ना मांगू चाँदनी
     मेरे जीने में तुझसे हो इश्क दी चाशनी।।

  दोनों भाई गाड़ी में गाने को ट्यून करते हँसते मुस्कुराते घर की ओर चल पड़े ।।

क्रमशः

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aparna…

















    



 

शादी.कॉम-19

             “अरे ए फूलमनी जा तो ओ रखिया को घीस घास के रख !! राजा के बाऊजी भी ,बस काम फैलाना जानते है,इत्ता बड़ा पेठा उठा लाये,अब इसकी बरी तोड़ने के लिये उत्ता सारा उरद भी तो पीसे पड़ी,का का देखें हम,अब हमारा भी उत्ता जी नही चलता।।”

  “हो जायेगा अम्मा जी ,सब काम हो जायेगा,काहे इत्ता परेसान हुई जा रही हैं।”

  ” काहे ना हो !! हम तो अपना किस्मत मे लिखा के लाये हैं परेसान होना,,पन्द्रह के हुए थे कि सादी हो गयी उसके बाद मजाल है ये घर के लोगो की, कि  कभी हमको चैन से अपना मायका में चार दिन रुकने दिये हों,जैसी महतारी वैसने लड़का!!
    भगवान झूठ ना बुलवाये,,बड़के की जचकी में अम्मा जी भेजी रही तब भी एक महीना नही पूरा की वापिस बुला ली,वही हाल राजा के मे रहा,अब का- का बताएं,अच्छा भी नही लगता ,सब सोचेंगे अपनी सास की बुराई गा रही ,पर हम जितना झेले हैं ना कोई ना झेल सकता,,ये आज कल की लड़कियाँ जरा सा कुछ बोल भर दो इत्ता बड़ा मुहँ फूला लेंगी।”

स्वगत भाषण में आकन्ठ डूबी सुशीला बीच बीच मे कनखियों से देखती भी जाती कि कहीं उसकी अग्निगर्भा बहु रसोई से आंगन में टपक तो नही पड़ी।।
    
        शन्नो मौसी और प्रेमा बुआ का इन सब बतकही में खूब मनोरंजन होता था।।सुशीला की सास जीवित थी और अभी भी अपने सास वाले पूरे रूतबे के साथ मौजुद थी,हालांकि वो पुराने ज़माने की न्यायप्रिय महिला थी फिर भी थी तो सुशीला की सास ही।।
     अपने जमाने में उन्होनें ढेरों दुख देखे थे।। छोटी उमर में वैधव्य का दंश और अकेले बच्चों का पालन पोषण वो भी सिर्फ खेती खार के भरोसे उन्होने किया था,इसीसे हर छोटी से छोटी वस्तु पे उनकी अपार ममता थी जो स्वाभाविक भी थी पर सुशीला को यही उनकी कंजूसाई लगा करती थी।
    
   सुशीला ठीक ठाक खाते पीते घर की नौ भाई बहनों में सबसे बड़ी बहन थी,जब ब्याह के आयी तब भले ही उमर से कम परन्तु सीख समझ में चतुर थी,बनाने खिलाने में उसकी अटूट भक्ति थी,कोई मेहमान घर से बिना मीठा खारा लिये निकल नही सकता था,यही यजमानी सास को कष्ट दे देती थी,वो अक्सर बहु  को उसके खुले हाथ घर लुटाने की आदत पे खरी खरी सुनाती रहती थी,पर इतने साल बीत गये …..कल की नवेली बहु आज खुद सास बन गयी पर अपने खिलाने पिलाने के रुचिकर गुणों को आज भी त्याग नही पायीं ।।

   इतने सालों में रुपया पैसा भी जम गया पर सुशीला की सास नही बदली, और ना बदली सुशीला ।।
      वो प्रारम्भ से ही अपनी सास की अनुपस्थिती में उन्हें पानी पी पी के कोसा करती थी,वही आदत आज तक उसमें शुमार थी,हालांकि खुद की बहु आने के बाद शुरु शुरु में उसने सोचा भी कि मैं ऐसा करूंगी तो मेरी बहु क्या सीखेगी पर ये विचार बिल्कुल ‘ चार दिन की चान्दनी‘ साबित हुआ,और वो वापस अपने ढर्रे पे आ गयी।।

    सुशीला के साथ यही होता था,बात कोई भी हो वो घूम फिर के अपने प्रारब्ध को कोसती हुई अपनी सास की बुराई पे उतर आती थी ,और यही सुनना शन्नो मौसी जैसों के लिये अति रुचिकर होता था, ऐसे लोग अपने साथ एक अदृश्य दिया सलाई लेकर बैठते हैं और जब जैसे मौका मिलता है तीली लगाने से पीछे नही हटते।।
  
   शन्नो मौसी की संगत के लिये प्रेमा बुआ भी तैयार बैठी होती थी,प्रेमा राधेश्याम जी की दूर की बहन की बेटी थी,उन्हें भी अपनी मामी की बुराई का रस गुदगुदा जाता था।।

   ‘ तुमको बुलाऊं के पलकें बिछाऊँ,कदम तुम जहां-जहां रखो,ज़मीन को आस्माँ बनाऊं सितारों से सजाऊँ,अगर तुम कहो..…’

      राजा अपनी धुन में गुन गुनाता जा रहा था कि उसकी अम्मा ने आवाज़ लगा दी__
       ” अरे कुछ काम का भी काम कर लिया कर लल्ला!!! जब देखो मरे जिम में मूसल बेलन उठा उठा के वर्जिश करता फिरे है।”

    ” बोलो ना कुछ काम है तो कर के ही जायेंगे।”

   ” मेरा कोई काम ना है!!! अब कल रात इत्ती अबेर हो गयी वापस आते आते ,का ज़रूरत सुबह सबेरे उठ के जिम निकलने की।”

” अम्मा तुम भी तो लग गयी हो सुबह सुबह अपने काम में! फिर !! हम भी तुम्हारे ही बेटा हैं ।” हँसता हुआ राजा निकल गया और सुशीला वापस अपनी रामकथा में लग गयी।।

          ***************************

        दोपहर राजा की अम्मा खाना पीना निपटा कर अपने कमरे में ऊन और सलाई लिये बैठी स्वेटर बुन रही थी कि राजा पहुंच गया,उसे जितना कठिन बांसुरी से बात करना नही लगा था उससे कहीं अधिक कठिन अपनी अम्मा से बात करना लग रहा था……” अम्मा !!! क्या कर रही हो।”

   ” का करेंगें,तुम्हारे लिये स्वेटर बुन रहें हैं,बस पूरा होने को है उसके बाद तुम्हारे बाऊजी के लिये शुरु करेंगे।।”

    ” सारा दिन काम मे लगी रहती हो,थोड़ा तो अपने आपको भी आराम दिया करो,बस घर भर की चिंता में दुबला रही हो।”

    ” कहाँ से दुबला रहें हैं,अच्छे खासे तो हैं ।” सुशीला को ज़ोर की हँसी आ गयी…..अम्मा को हँसते देख राजा को भी थोड़ी हिम्मत आ गयी वो आगे बढ अम्मा के पैरों के पास ज़मीन में ही आलथी पालथी मार बैठ गया।।

     अम्मा की गोद में सर रखे राजा अपनी बात की भूमिका बना रहा था कि सुशीला का चचेरा भाई धर्मेश दौड़ा दौड़ा आया __

    ” जिज्जी बाबू( पिता जी) को फालिज मार गया है अभी अस्पताल ले जा रहे हैं,जल्दी चलो ।।”

   सुशीला हड़बड़ा कर उठ बैठी,और जल्दी जल्दी सीधी उल्टी चप्पल पैरों में डाल धर्मेश के साथ अस्पताल निकल गयी ,जाते जाते राजा को ताकीद कर गयी

   ” राजा अपने बाऊजी को फोन लगा दो,और बोलो तुरंत अस्पताल पहुँचे।”

    सुशीला के मायके में संयुक्त परिवार था,उसके पिता और चाचा दोनो ही के परिवार एक साथ ही रहा करते थे,बचपन से सब को साथ देखते सुशीला के मन में अपने चचेरे भाई बहनों के लिये भी अपने सगे भाई बहनों सा ही प्रेम अनुराग था,घर में सबसे बड़ी होने के कारण सारे छोटे भाई बहन हर बात में सुशीला जिज्जी की सहमती अवश्य लेते थे।और सुशीला भी पूरे मन से सबके सहयोग को सदा तैयार रहती थी।।
     
            कुछ आठ दस साल पहले सुशीला के पिता का निधन हुआ था इसीसे उसके चाचा ही अब उसके लिये पिता समान थे,चाचा की ऐसी नाज़ुक हालत सुन वो अपने भाई के साथ दौड़ पड़ी,उसके पीछे राजा भी भागा।।

      वो पूरा दिन दोनो माँ बेटे का अस्पताल में ही बीत गया,आई सी यू में भर्ती सुशीला के चाचा शाम होते तक खतरे से बाहर आ चुके थे……भाई भावज को सारी देखभाल के नुस्खे थमा के सुशीला राजा के साथ रात नौ बजते बजते घर पहुंची,,रूपा दोनो का रास्ता देखती भीतर वाले आंगन में बैठी कोई काम निपटा रही थी,जैसे ही सास को आते देखा झट घूंघट सर में खींच उठ कर चली आयी__

    ” कैसी तबीयत है अब चच्चू नाना की अम्मा जी।”

   रूपा भले ही ज़बान की तेज़ और कड़वी थी,पर मन ही मन अपनी सास का सम्मान करती थी,, और राजा के लिये तो उसे सच में ममता थी, इसिलिए दोनो को खाने के समय पर घर पहुंचा देख उसे संतुष्टी मिली, वो फौरन दौड़ कर चाय चढ़ा आयी और दोनो के लिये पानी लेती आयी।।

   राजा तो पानी पीकर अपने कमरे में चला गया पर सुशीला वही बैठी चाय पीते हुए अस्पताल का सब हाल समाचार रूपा को सुनाती रही।।।

   रात खाना पीना निपटने के बाद राजा एक बार फिर अम्मा के पास चला आया,उसे पता था बाऊजी रात के खाने के बाद चहलकदमी करते चौक के पान वाले तक चले जाते हैं,यही सुयोग उसे अपनी बात रखने के लिये उचित जान पड़ा __

    ” अम्मा!! सुनो तुमसे कुछ बात करनी थी।”

   ” हाँ कहो!! क्या हुआ बिटवा??”

    ” देखो पहले हमारी बात ध्यान से सुनना ,और पूरी बात सुनना ,उसके बाद अपनी राय देना।।”

” हां भई !! पर का बात हो गयी?? वो भी तो बताओ?”

   ” अम्मा !!! हमारी दोस्त है ना बांसुरी,तुम जानती हो उसे ,पिछली गली वाले तिवारी जी ,उनकी लड़की है।।”

” हाँ !! तो ??”

  सुशीला ने चेहरे पर एकदम ऐसे भाव रखे जैसे उसे बांसुरी या किसी भी अन्य से कोई फर्क नही पड़ता।।

   ” अम्मा वो हमारी बहुते अच्छी दोस्त बन गयी है, और ….और हम दोनों सोच रहे कि अगर तुम हाँ बोलो तो,,तो …..
        
  ” तो क्या??”सुशीला के कठोर शब्दों ने अचानक से राजा में हिम्मत भर दी

  ” हम बांसुरी से शादी कर सकते हैं क्या अम्मा??”

  सुशीला के चेहरे का रंग उड़ गया,आखिर इतने दिन से जिस बात का डर सता रहा था वही हुआ….. सुशीला इस बात से बेखबर तो नही थी पर एकाएक इतनी जल्दी राजा उससे बात करने आ जायेगा ऐसा भी नही सोचा था उसने,सामने सर झुकाये बैठे लाड़ले पर एकदम से ममता उमड़ आयी पर अपने आप को यथासम्भव कठोर कर उसने अपनी बात रखी__

    ” नही !!! तुम्हारे बाऊजी कभी नही मानेंगे।”

   ” अम्मा पहले तुम तो मान जाओ,फिर बाऊजी भी मान जायेंगे।।सुनो ना अम्मा,हम दोनो बहुत अच्छे दोस्त हैं,बांसुरी बहुत अच्छी लड़की है अम्मा।”

  ” राजा,अब क्या समझायें तुमको,यही तो करते हैं आजकल के लड़के लड़कियाँ,सब कुछ अपने मन का ।।अब हम का बोलें,जब सोच ही लिये तो जाओ कर आओ तुम दोनो भी किसी मन्दिर में सादी।”

  ” अम्मा ऐसे ही करना होता तो हम तुमसे काहे बात करते,विश्वास करो अम्मा,हम कुछ भी गलत नही किये,,आज तक हम उसे छुए तक नही।।”

  ” बहुत अच्छा किये,और छूना भी नही,बेटा तुम्हरी अम्मा है,अच्छे से जानते है हमारा लड़का कभी कोई गलत काम कर ही नही सकता ,पर बस एक बात पूछना चाहते हैं,ऐसा का दिख गया उस लड़की में,इससे कही सुन्दर लडकियों की लाइन लगा देंगे राजा,पर इस लड़की को भूल जाओ।”

” काहे ऐसा बोल रही अम्मा,तुम जानती हो तुम्हरी मर्ज़ी के बिना हम कुछ नही करेंगे।”

” उसी हक से बोल रहे बेटा,,समझा दो उसे वो भी अपने घर वालों के हिसाब से कर ले सादी ब्याह और तुम्हें भी करने दे,,कुछ नही रखा ये सब प्यार व्यार के चक्कर में,,एक बार सादी हो जाये फिर सब बराबर हो जाता है।।”

  ” मान जाओ अम्मा ,,काहे मना कर रही ,आखिर वो भी तो ब्राम्हण है।।

  ” कहाँ की बाम्हन?? सरजूपारिन है …..और हम कनौजिये कान्यकुब्ज ,,बीस बीसंवा है लल्ला हम लोग, ऐसे सरजुपारिन को ब्याह लाएंगे तो पूरा समाज पूछेगा नही कि हमारे “के के” में लड़की नही मिली का।।तुम्हारे बाऊजी किस किस को जवाब देंगे बेटा,इस बुढऊती में काहे उनका पगड़ी उछाल रहे हो।।

   ” अब आजकल ये सब कौन मानता है अम्मा,हम तो नही मानते।।”

” ना मानो!! हम तो पहले ही कहे रहे कि जाओ कर लो किसी मन्दिर मे सादी।।”

” तुम तो नाराज हो गयी अम्मा,अरे एक बार हमारे लिये उससे मिल तो लो!!”

” मिल तो चुके हैं,दो तीन बार !! हमें तो बिलकुले पसंद नही आयी,ना सकल ना सूरत ,रंग भी साँवला।

  ” अरे वो तो तुम इतनी ज्यादा गोरी हो ना इसिलिए सब तुम्हारे सामने सांवले ही लगते हैं,,वैसे दिखने में तो ठीक ठाक है अम्मा।।”

  ” हम अपने राजकुमार की सादी दिखने में  बस ठीके ठाक लड़की से काहे करें,इससे तो शन्नो जो रिस्ता बताई रही तुम्हारे लाने वही अच्छा है,और रूपा के बाबूजी भी बताये रहे ,,दुनो लड़की गोरी सुन्दर हैं और तुम्हे पसंद आ रही ये कलूटी।।”

   ” राजा अब हमें कोई बहस बात नही सुननी ना करनी,तुमने पहले ही कहा था कि तुम हम से पूछ कर करोगे,जो भी करोगे तो हम यही कह रहे लल्ला जाओ और उसे समझा दो कि हमारे घर में कोई उसके लिये तैयार नही है, जाओ मना कर दो उसे। जाओ बेटा हम थक गये हैं बहुत,सोने दो अब।।”

  ” अम्मा !!! काहे इत्ता गुस्सा रही हो ,सच में बहुत अच्छी लड़की है बांसुरी ।।”

  ” होगी लल्ला!! पर हमे नही पसंद ।।हम एक बिदेसिनी को अपन बहु ना बनाई, जो समझ आ गयी हमारी बात तो जाओ ,नही पड़े रहो ।।हम सोने जा रहे।।”

  सुशीला बिना काम के भी निरर्थक चप्पल पट पट कर बजाती कमरे से बाहर निकल गयी।
    कमरे में अकेले बैठे राजा का दिल कराह उठा, वो चुपचाप उठा और ऊपर अपने कमरे में चला गया, सीढिय़ां चढ़ रहा था कि रूपा ने आवाज़ लगायी

  ” लल्ला जी ये दूध लेते जाइये,पी लीजियेगा।”

  ” हमें नही पीना भाभी।।” बिना रुके राजा अपने कमरे में चला गया,पर उसकी आवाज़ सुशीला के कानों तक पहुंच गयी,उसने छिप कर अपने आंचल से अपनी आंखों की कोर पोंछ ली।।

    कितनी शालीनता से उसने बांसुरी को कहा था_” अगर अम्मा नही मानी तो हम पहले जैसे ही दोस्त बने रहेंगे।”
      अम्मा तो नही मानी और क्या अब उसका खुद का दिल वापस बांसुरी को सिर्फ दोस्त मानने को कर रहा?? 
     क्या कोई भी ऐसी बात है जो उसके और बांसुरी के बीच की जो वो भूल पा रहा है??
    चाहे बांसुरी का पूरी तन्मयता से उसे पढाना हो या उसके जिम के सारे लेखे जोखे को सहेजना हो,कहीं भी तो बांसुरी ने उसे अकेले नही छोड़ा,अपनी इतनी बुरी आदत डाल दी कि अब यही सोच सोच के कलेजा मुहँ को आ रहा कि यदि बांसुरी की कहीं और शादी हो गयी तो वो क्या करेगा??

      हर शाम आंखों पर तेरा आंचल लहराए
       हर रात यादों की बारात ले आये,
       मैं सांस लेता हूँ तेरी खुशबू  आती है
       इक महका महका सा पैगाम लाती है
       मेरे दिल की धड़कन भी तेरे गीत गाती है
       पल पल दिल के पास तुम रहती हो।।।

  ये गाना कहीं दूर किसी के रेडियो पे बज रहा था जिसे सुन राजा को अपनी और बांसुरी की प्रथम औपचारिक मुलाकात याद आ गयी,उस दिन भी जिम में यही गाना बज रहा था जब बांसुरी निरमा के साथ पहली बार जिम मे आयी थी।।

   अपनी पहली मुलाकात याद कर अचानक राजा के चेहरे पे मुस्कान आ गयी,कैसे उसे धडाधड़ गधा बुला रही थी …..और खुद कितनी गोल मटोल सी थी,अब तो आधी रह गयी बाँसुरी ।।और अब वो खुद भी कहाँ गधा रह गया।।

   एक बार फिर उसे ज़ोर की हँसी आ गयी,अचानक ध्यान आया कि कमरे में अकेले बैठा हँस रहा है,कहीं किसी ने देख लिया तो सोचेगा ,पागल हो गया है लड़का!!
     क्या सभी के साथ ऐसा ही होता होगा ,जैसा उसके साथ हो रहा है।।उसे खुद अपने ऊपर आश्चर्य हो रहा था,आज तक अम्मा की कोई बात कभी ना काटने वाला लड़का आज कैसे अपनी बात पे अड़ा रह गया…..वाकई ऐसा क्या जादू किया बांसुरी ने कि अम्मा के मना करने के बाद भी वो अम्मा को मनाने की कोशिश करता रहा….पर अब उसके सामने एक और कठिन चुनौती खड़ी थी,बाँसुरी को मना करने की।।

   उसने बहुत सोचा,,,सोचना कभी भी राजा का काम नही था!! बचपन से भले ही वो मनमौजी था पर घर पर किसी बड़े की बात उसने कभी नही काटी थी,इसीसे शायद उसकी मन की हर बात सभी मन मे आने से पहले ही पूरी कर जाते थे,अम्मा दादी बाऊजी चाचा जी, पिंकी ,बुआ जी मौसियां ,मामा लोग और इन सब के ऊपर बड़के भैय्या हर कोई उसे बच्चा ही समझते आये थे,जिद क्या होती है राजा ने जाना ही नही थी।।आज तक जो मांगा तुरंत ही मिल गया …..इसी से आज पहली बार मांगी हुई चीज़ ना मिलने की पीड़ा चेहरे पे छलक आयी।।

     बांसुरी के साथ समय कैसे पंख लगा कर उड़ जाता था,और बीच में जब उसने जिम आना बन्द कर दिया था,तब तो एक एक पल काटना मुश्किल हो गया था,कैसे कहे कि बांसुरी हमें भूल जाओ, हमारे घर वाले नही मानेंगे।।

  अपनी सारी हिम्मत जुटा के आखिर राजा ने अपना फोन उठाया और बाँसुरी को लिख भेजा__

   ” बंसी !!! अम्मा ने मना कर दिया,अभी और कोई बात नही कर पायेंगे ,बस यही कहना चाहतें हैं कि हमें भूल जाओ।।”

” ठीक है” ।।  बांसुरी का तुरंत ही जवाब आ गया,ऐसा ठंडा और थका सा जवाब देख कर राजा ने उसे फ़ोन लगा लिया।।

” क्या हुआ बांसुरी ( बांसुरी के त्वरित सन्देश से राजा की उसे बंसी पुकारने की हिम्मत नही हुई) कुछ नाराज़ हो गयी क्या??”

” नही,काहे की नाराजगी?? तुमने तो पहले ही कह दिया था कि अगर अम्मा मना करेंगी तो बात आगे नही बढ़ाएँगे।।”

” तो फिर ऐसा रुखा रुखा काहे बोल रहीं।”

” हे भगवान तो अब हम कैसे बोले कैसे बतियाएं ये भी तुमसे पूछना पड़ेगा।।”

” अरे यार!! तुम पूरा लड़ने की तैयारी से ही बैठी हो, हम क्या बोल रहे, तुम क्या समझ रही,,ऐसे ही वाद विवाद होता है,रहने दो हम रखते हैं फोन।

” हाँ रख दो,अब बात भी क्या बची ?? “

दोनों बात कर ही रहे थे कि बाँसुरी की अम्मा की आवाज़ राजा को सुनाई पड़ी,वो बांसुरी से खाने को पूछ रही थी जिसे बांसुरी ने नकार दिया,ये कह कर की सर मे दर्द है अम्मा आज नही खायेंगे।।

” अब खाना काहे नही खा रही?? ये अच्छा नौटंकी है ,हमसे शादी नही होगी तो जीवन भर नही खाओगी क्या।।”

  ” नही खायेंगे!! ऐसे ही भूखे मर जायेंगे,तुम्हे इससे क्या??”

” पगला गयी हो क्या?? कोई ऐसे करता है,,??फिर हम अभी तुम्हारे घर आ जायेंगे।”

” आ जाओ ,हम कब मना किये….ले जाओ हमे घर से भगा कर….

   ” बंसी कैसी बातें कर रही हो तुम?? जानती हो कि हम कभी ऐसा नही करेंगे,,अपने अम्मा बाऊजी को कभी दुखी नही कर सकते।”

  ” जानतें हैं राजा,सब जानतें हैं हम!! पर हम भी क्या करें,,।।हम भी तो अपने मम्मी पापा को दुखी नही देख सकते,पर तुम्हारे बिना भी तो नही जी सकते,,तुम हमारे लिये चिंता मत करो,ये सब हमारा थोड़ी देर का गुस्सा है,अभी सो जायेंगे सुबह तक ठीक हो जायेंगे।।”

  राजा का दिल कसमसा के रह गया,उसे उसी वक्त बांसुरी से मिलने उसे एक झलक देखने का मन करने लगा__

   ” बंसी !! सुनो तुमसे मिलना है।।”

   ” कल जिम आयेंगे ना तब मिल लेना।”

   ” नही अभी मिलना है,तुम्हें देखने का मन कर रहा है।”

  ” अब तुम पगला गये हो,रात के दस बजे तुमको हमे देखने का मन कर रहा,,हमारे बाहर वाले दरवाजे पे पापा ताला भी डाल दिये हैं,पीछे आंगन वाला दरवाजा भी बन्द हो गया है, घर में सब सो चुके हैं,ऐसे में कैसे आओगे??”

  ” तुम तो ऐसे मना कर रही कि लग रहा चोरी से बुला रही हो,कि सब सो गये हैं,अब आ जाओ।”

  ऐसे बोलते ही राजा को हँसी आ गयी ,उसकी हँसी सुन बांसुरी भी खिलखिला उठी….दोनो को बातें करते दो घन्टे से ज्यादा बीत चुके थे,,राजा का मन बांसुरी को देखे बिना मानने को तैयार ही नही था, आखिरकार सबकी नज़रे बचाता राजा चोरी छिपे धीमे धीमे कदम बढ़ाता घर से बाहर निकला,अपने घर का ताला खोलते हुए उसे एक बार खटका सा लगा कि दादी जाग गयी,पर वो उसका अन्देशा ही था,,अपनी बुलेट को खींचते हुए गेट से बाहर निकाला और उसपे सवार राजा बांसुरी के घर उड़ चला

  मासूम चेहरा नीची निगाहें भोली सी लड़की भोली अदायें
  ना अप्सरा है,ना वो परी है,लेकिन ये उसकी जादुगरी है
  दीवाना कर दे वो,एक रंग भर दे वो,शरमा के देखे जिधर
घर से निकलते ही कुछ दूर चलते ही रास्ते में है उसका घर।।

   मोबाईल पे गाने सुनता राजा बांसुरी के घर के सामने वाले रास्ते पे पहुंच गया,अपनी रॉयल एनफील्ड से उतर उसके सहारे खड़े होकर उसने बांसुरी को मेसेज भेजा__

  ” आ गये हैं !!!,तुम्हारी खिड़की के सामने वाली सड़क पे खड़े हैं ।”

राजा ने मेसेज पे नज़र जमाई हुई थी,पहले एक राइट का निशान हुआ,फिर दो हुए और तुरंत ही दोनो निशान नीले हो गये,राजा के चेहरे पे एक मुस्कान उभर आयी ,मतलब उसने मेसेज पढ़ लिया,तभी राजा के पैर के पास कुछ आ कर गिरा,नीचे देखा तो बालों में लगाने वाला क्लचर था,जिधर से आकर गिरा उधर राजा ने सर उठाया तो सामने छत पर बांसुरी खड़ी मुस्कुरा रही थी।।

  दोनो एक दूसरे को कुछ देर तक देखते रह गये…. फिर राजा ने इशारे से बांसुरी को हाथ हिला के कहा कि वो जा रहा है,बांसुरी ने ना में सर हिला दिया।।

   राजा देख ही रहा था कि बांसुरी छत पर से अपने कमरे में चली गयी,राजा इधर उधर झांकता रहा,ताकता रहा कि अब आयेगी छत पर,,अपनी आंखे छत पे जमाये राजा टकटकी लगाये खड़ा था कि बाँसुरी उसके सामने आ कर खड़ी हो गयी।।

   दोनो एक दूसरे की आंखों में देखते रह गये,,दोनो को ही ऐसा लग रहा था जैसे आज ही पहली बार एक दूजे को देखा है …….
   
      ….सही कहा है किसी ने, अगर किसी बात के लिये टोका जाये रोका जाये तो दिल ही क्या शरीर का हर हिस्सा उस चीज़ को पाने तरसने लगता है,और ये अनुभव सर्वाधिक होता है प्रेमियों के साथ।।
     अगर लैला मजनूँ,हीर राँझा के घर वाले एक बार में ही उनके प्यार को कबूल लेते तो शायद ही ऐसी सफल प्रेम कहानियाँ रची जातीं।।

   अम्मा की ना ने दोनो के मन में छिपा रहा सहा संकोच भी समाप्त कर दिया,दोनो को ही समझ आ गया कि एक दूसरे के बिना जीना व्यर्थ है,और अब वो दोनों सिर्फ दोस्त से कहीं आगे निकल चुके हैं ।।

  ” राजा!! ऐसे क्यों देख रहे ,जैसे पहली बार देखा हो।।”

बांसुरी की बात पर राजा मुस्कुराने लगा।।।

” सुनो !! हम तुम्हें छूना चाहते हैं,तुम्हें छू कर तसल्ली करनी है कि हम सपना नही देख रहे,राजा बाबू सच में हमारे घर के सामने खड़े हैं ।

” अच्छा!! सच में ??” और मुस्कुराते हुए राजा ने बांसुरी को अपनी तरफ खींच कर गले से लगा लिया।।

क्रमशः

aparna..
   

शादी.कॉम-18

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      ” नैना नु पता है, नैना दी खता है
       सानु किस गल दी फिर मिल दी सज़ा है
       नींद उड़ जावे, चैन छड  जावे
       इश्क़ दी फ़क़ीरी जद लग जावे
                 ऐ मन करदा है ठगी ठोरिया
                 ऐ मन करदा हैं  सीना ज़ोरियां
                 ऐने सिख लियाँ दिल दियां चोरियां
                 ऐ मन दियां ने कमज़ोरियाँ “

   एक के बाद एक गाने बजते रहे,गानों की ताल पे ताल मिलाता राजा गाड़ी चलाता रहा,बांसुरी पीछे से राजा को देख देख मुस्कुराती रही,पर राजा के ठीक बाजू में बैठी सुशीला का फिर किसी काम में मन नही लगा।।

     ऐसा नही था कि सुशीला को “लव मैरिज” से शिकायत थी ,अपनी बेटी जैसी पिंकी के लिये भी कुछ हल्की फुल्की ना नुकुर के बाद उसने खुद ने हामी भर दी थी……पर बेटों के नाम पर जाने क्यों उसका हृदय एक अजीब सी ममता से छलक उठता था,इस भाव में प्रेम था तो आधिपत्य भी था,स्नेह था तो एकाधिकार भी था।।
        वैसे भी शादी के बाद लड़का उतना माँ का कहाँ रह जाता है,और अगर शादी  खुद की मर्ज़ी से की हो तब तो पूछो मत !! माँ तो ऐसी शादियों में अमूमन ललिता पवार का किरदार निभाने लगतीं हैं।    

 

    वैसे सुशीला को पारंपरिक बहुओं को सताने वाली सास बनने का शौक भी नही था,इसीसे वो रूपा के लिये बिल्कुल माँ जैसी सास ना होकर भी एक  अच्छी सास तो थी ही, पर राजा के केस में बात अलग थी,यहाँ राजा किसी लड़की को पसंद करने लगा था,हालांकि अभी तक बांसुरी के लिये ऐसी कोई इच्छा उसने अपनी माँ के सामने जाहिर नही की थी पर पूरे नौ महीने अपने पेट में रख के अपने ही रक्त मांस से सींच कर उसे पैदा करने वाली जननी क्या अपने बालक के हृदय की अधीरता से इस हद तक अंजान रह सकती थी।।
       छठी इंद्रि के एंटीना द्वारा बार बार भेजी जा रही सूचनाओं को व्यर्थ भी नही माना जा सकता था ।।

       बिदाई के नियत मुहूर्त से कुछ पहले ही अवस्थी परिवार मय बांसुरी शास्त्री जी के घर पहुंच गया, आवश्यक आवभगत के बाद दोनो समधिने यहाँ वहाँ की तैयारियों में जुट गयी,रूपा बांसुरी को साथ लिये रेखा को सजाने में लग गयी,,सभी किसी ना किसी कार्य में व्यस्त थे।।

     घर के बीचो बीच बने बड़े से दालान में लोगों की आवाजाही लगी हुई थी,रूपा का कमरा ऊपर था जहाँ बांसुरी थी…..काफी देर से बांसुरी को राजा का कोई हाल समाचार नही मिला था,बांसुरी के भेजे सन्देश भी राजा ने व्यस्तता के कारण नही देखे थे, ऐसे में अपनी अधीरता से स्वयं परेशान बांसुरी ने रूपा से पानी पीने के बहाने नीचे जाने की आज्ञा ली और कमरे से निकल चली,लोगो से बचते बचाते नीचे को जाती गोलाकार सीढ़ियाँ उतर ही रही थी कि किसी काम से ऊपर को जाते राजा से टकरा गयी__

  ” कहाँ गायब हो सुबह से?? नज़र ही नही आ रहे,, और इतना काहे में बिज़ी हो गये की मेसेज तक देखने का समय नही मिला।”

  ” क्या मेसेज करी रही।”

  ” खुद ही देख लो,बताना होता तो लिखने में आँख काहे फोड़ते।”

  ” ये भी बात सही है,,यार इत्ता भन्नायी काहे हो,देख तो रही हो शादी ब्याह का घर है,अब भैय्या तो ठहरे जमाई ,उनको कोई काम नही बता रहा,हम ही सबसे छोटे हैं,हमी पेराते हैं हर जगह।।”

  ” हम काम करने मना कर रहे क्या?? पर एक तो हम किसी को जानते नही,तुम एकदम ही छोड़ कर चल दिये तो गुस्सा तो आयेगा ना,का करें बोलो।”

  ” हम तो सोचे थे आराम से तुम और हम कहीं बैठ के बातें करेंगे पर यहाँ तो इत्ता काम फैला रखा है इन लोगों ने,ऐसा लग रहा सारा काम हमारे लिये ही बचा रखा था कि राजा आयेगा और करेगा सब।।”

” अच्छा वो सब छोड़ो,ये बताओ अम्मा जी से बात हुई क्या??”

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” अजीब बात करती हो यार तुम!! देख रही हो मरने का भी फुर्सत नही है राजा के पास ,और पूछ रही अम्मा से बात हुई का!! अरे कहाँ से करे,अम्मा यहाँ वहाँ उड़ती जो फिर रही हैं ।”

” ना करो!! हम कौन सा मरे जा रहे कि तुम अम्मा जी से बात करो और उसके बाद हमको आई लव यू बोल दो।”

” रुको रुको! क्या बोली तुम!! क्या बोल दें।”

” हम कहाँ कुछ बोले?? हम तो कुछ नही बोले।।”

” अच्छा बाबू!! हम से चालाकी,अभी अभी तो बोली ना कि अम्मा से बात करके…..

दोनों एक दूसरे की आंखों में खोये एक दूसरे को ताने उलहने दे रहे थे कि राजा की अम्मा की गगनभेदी आवाज़ हवाओं में घुल गयी

” राजा ए राजा!! तुम हियाँ खड़े हो,वहाँ तुम्हारे बाबूजी कब से तुम्हें आवाज़ लगा रहे,,लड़के वाले निकले की नही पता करो जरा,उसके बाद जनमासा भी देखे आओ एक बार,सब ब्यब्स्था ठीक ठाक है की नही??”

” अम्मा बिदाई ही तो है,उसमें जनमासा की का ज़रूरत।”

“काहे अब तुम हमें बताओगे कि का नियम करना है और का नही।।कुंवर कलेवा करने के पहले दूल्हा का हाथ मुहँ नौआ कहाँ धुलायेगा,ईहे घर मे?? बिदाई के पहले दोनो का कोहबर पुजाई कहाँ  होगा?? बोलो? औ सबसे बड़ा बात कि यहाँ से रेखा को जनमासा  तक बिदा करके बापस ले आयेंगे औ एक बार फिर बिदाई कर देंगे तो गमना भी संगे संग निपट जायेगा। नही तो इतना महंगाई के जमाना में बिदाईये मा दुई तीन लाख रुपिया बकील बाबू का निपटा जायेगा, समझे।।हमसे बाते बनाएँगे ,जाओ हो लाला जल्दी करो,और ए सुनो तुम ,का नाम है तुम्हारा??”

  सुशीला ने बिल्कुल ऐसा अभिनय किया जैसे उसे सच में बांसुरी का नाम याद नही आ रहा हो,बांसुरी ने सिर झुका कर धीरे से अपना नाम बता दिया__” बाँसुरी “

  ” हाँ  हाँ बांसुरी!! जाओ देखो दुलहीन तैयार भई की नही।उसे नीचे लाना ,तब तक वहीं बैठो।।”

  बहुत प्यार से हां मे सिर हिला के बांसुरी ऊपर को वापस मुड गयी पर जाते जाते उसने आंखों के इशारों से राजा को अम्मा जी से बात करने को बोल ही दिया,जिसे राजा ने सर झुकाकर मान लिया,इस सारे प्रसंग को देख कर सुशीला के तन बदन में आग लग गयी।।
     उसे अपने लाड़कुंवर और इस छोकरी के बीच चल रही “आंखो की गुस्ताखियाँ ” माफ करने का बिल्कुल भी जी नही किया।।

   बिदाई के पहले होने वाली छोटी मोटी  रस्में चलती रहीं,सब रस्मों रिवाजों का आनंद ले रहे थे पर प्रेमी युगल अपने में ही मगन था,भले ही राजा पुरूषों की तरफ और बांसुरी औरतों के तरफ बैठी थी पर रह रह कर दोनो की आंखें आपस में टकरा ही जाती थी, और इस टकराहट में निपट जाते थे दुनिया भर के उलाहने,ताने,मान मनौव्वल,रूठना मनाना।।और इन सब बातों की साक्षी बनती जा रही थी सुशीला।।

    बरातियों के स्वागत सत्कार भोजन पानी के बाद बिदाई कार्यक्रम प्रारंभ हुआ__
    
“कैसे भूल पाऊँगी मैं बाबा ,सुनी जो तुमसे कहानियाँ छोड़ चली आँगन मैं मैय्या ,बचपन की निशानियाँ
सुन मेरी प्यारी बहना, सजाये रहना ये बाबुल की गली, सजन घर मैं चली ……”

     बरातियों के साथ आयी धुमाल पार्टी ने ऐसा मर्मस्पर्शी गीत पृष्ठभूमि में बजा दिया कि वहाँ खड़े कई उम्रदराज पुरूष भी अपनी अपनी दुहिताओं की बिदाई याद कर सिसक पड़े …..
        रेखा को शादी ब्याह की हर रस्म से बहुत प्यार था, पर उसकी शादी जिन हिसाबो में हुई उसे अपनी कल्पनाओं को साकार करने का कोई अवसर नही मिल पाया था,इसीसे आज उसने अपने एक मात्र सुख स्वप्न को पूर्ण करने शहर की सबसे बड़ी और महंगी चर्चित ब्युटिशियन “नीता जी “को अच्छी मोटी धनराशि दे कर बुक कर लिया था।।

    रेखा के पीछे पीछे रूपा भी ब्यूटी सलून की गंगा नहा आयी__” बस हमारा ज़रा सा जूड़ा सेट कर देना, ये कौन सी लिपस्टिक है थोड़ा सा हमें भी लगा देंगी नीता दीदी,ज़रा सा आपका वाला फेस पाउडर भी मार दो ना चेहरे पे।”
     इस तरह की टुच्ची हरकतों से परेशान होकर डिग्निफाईड,वेल मैनर्ड सुपर स्मार्ट ब्युटिशियन नीता जी ने अपनी असिस्टेंट को रूपा का टच’प करने का इशारा किया और खुद रेखा को सजाने में लग गयी।

      अपने कुशल चितेरे हाथों का कौशल दिखाती
ब्युटिशियन ने रेखा के साधारण रूप को ऐसे असाधारण रंगो से सजा दिया कि रूपा भी चकित हो देखती रह गयी….अब ग्यारह हज़ार खरच कर कराये इत्ते सुन्दर मेक’प को क्या बिदाई के आँसूओं में बहाया जा सकता था।।
       भले ही सारी मोहल्ले की औरतें ज़ार ज़ार रो रही थीँ पर दोनो बहनों के आंसू नदारद थे,,,जग दिखायी को दो एक आंसू रूपा ने बहा भी लिये,बहन को गले से लगाये बचपन की यादों को दुहराती रूपा ने धीमे से रेखा के कान में मन्त्र फूंक दिया__” दो आंसू बहा दो,बिदाई मे नही रोने से अपसकुन होता है।”

  ” मेक’प सारा बह जायेगा जिज्जी।”  रेखा की बात पर बन्सी ने चुपके से उसके कान के पास मुहँ ले जाकर कहा__
           ” वाटर प्रूफ मेक’प है ‘मैक’ का,आपकी ब्युटिशियन बोल रही थी,विदेशी कंपनी है,जा के नहा भी लेंगी ना तब भी चेहरा ऐसे का ऐसा ही दिखेगा।। बेझिझक रो लिजिये।”

  रेखा ने इशारे से बन्सी से पूछा ” पक्का??”
  
   बंसी ने आंखों से ही रेखा को आश्वस्त किया,और रेखा अपनी जिज्जी के गले से लगी रो पड़ी ।।

  लल्लन के पट से बंधी अपनी चुनरी की गांठ सहेजती रेखा अपने दोनों हाथों से लावे उलीचती आगे बढ़ कर कार में जा बैठी,उसके पीछे सभी को सादर नमन करता लल्लन भी अपनी नवेली पत्नि के बाजू में जा बैठा,,उनकी कार अपने पहिये से नारियल को दबाती धीरे धीरे आगे बढ़ धूल उड़ाती चली गयी।।।

     बिदाई के बाद सभी मेहमान खाना पीना निपटाने में लग गये, रूपा के साथ बैठी बांसुरी भी बिना मन आड़े टेढे कौर जैसे तैसे निगल रही थी।।

   जिसने भी ये कहा है कि प्यार होने के बाद भूख प्यास मर जाती है ,नींदे उड़ जाती है  …शत प्रतिशत सत्य कहा है,,उस बन्दे को वाकई ये सुखद अनुभूति ( पहले और सच्चे प्रेम की) कई कई बार हुई होगी।।

   अब इस आनंद उदधि में राजा और बांसुरी डुबकी लगा रहे थे ,जहां उनकी भूख प्यास सुख चैन सब खो चुका था,और कुछ बचा था तो बस एक सुकून __ एक दूसरे की आंखों में खोने का।।

   राजा अपनी प्लेट सजाये बांसुरी की तरफ बढ़ ही रहा था कि सुशीला ने आकर बीच में ही उसे रोक लिया__” लाला जा बेटा अपने बाऊजी को थाली दे आ!! वो कहाँ यहाँ बुफे उफे में घुसेंगे,और सुन पानी का गिलास भी रख आना,खाने के बीच उन्हें पानी लगता है,और सुनो मिर्ची का भजिया ना ले जाना , खाने को खा तो लेंगे फिर रात भर पेट मा जलन बोल के परेसान करेंगे,मीठा उठा अच्छे से ले जाना,वही तो चाव से खाते हैं मिठखौवा बामण ।।”

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   अम्मा की बात सुन राजा वापस मुड़ के अपने बाऊजी की तरफ चला गया,उन्हें थाली पकड़ा के निकल ही रहा था कि शास्त्री जी ने उसका हाथ थाम वही बैठा लिया__
 
    ” आज एक और जिम्मेदारी से मुक्त हो गये हम! अब हमारे सलगे लड़िका बच्चा अपने अपने ठौर को लग गये,,अवस्थी जी आप जैसा समधि पाकर सच हमने गंगा नहा ली ,, युवराज बाबू जैसा दामाद, आपका जैसा परिवार किस्मत से मिलता है भई !! अब देखो !! राजा ने कितना भाग दौड़ किया है,हमको तो लगता है जैसे राजा हमारे ही कोनो जनम का लड़का है।।
      अब एक पते की बात बताते हैं,हमारे एक साढू हैं, बलिया के रहवासी है,खूब खेती खार है,पुराने गोंटिया है जमीन जायदाद की कोनो कमी नही ,,इत्ता रुपया जोड़े रक्खे हैं कि सात पुश्ते आराम से बैठ के खा सकतीं हैं ……एक इकलौती लड़की है बस !! मालती!! अपने राजकुमार के लिये एकदम फिट रहेगी।।खूब माल दबा के रक्खा है मिसिर( मिश्रा) जी ने,मोटे आसामी है….इक्कीस लाख तो तिलके चढ़ा देंगे,पांच – सात में बरीक्षा निपटाएंगे।।
      गिरस्ती का पूरा समान,कार और पांच एकड़ का खेती भी देने बोल रहे।।हमरी बड़की के ब्याह में उन्होनें राजा को देखा रहा,अब जब वो देखे कि हमरी रेखा भी निपट गयी तब अपने मन की बात रक्खी हमारे सामने।।
      समधि जी इससे बढ़िया रिस्ता नही मिलेगा।”

” पापाजी लड़की पढ़ी कहाँ तक है।”

” दामाद बाबू अब ईहे मत पूछो,लड़की गोरी नारी सुन्दर है,अब बचपन से राजकुमारी बना के पाले, स्कूल में एक दिन कुछ जबाब गलत दे दी रही तो गणित की बहन जी ने वहीं दो लप्पड़ धर दिये अब लड़की डर गयी और घर आके ऐसा कोहराम मचाई कि फिर कोनो उसको स्कूल नही भेज पाया।”

“दसवीं तो पास होगी??”

” चौथी के बाद पाठसाला का दरसनो नही पायी लड़की पर काम काज में एकदम चतुर!! हमरी रूपा  का दूजा रूप समझो ।।।

” तब तो गये काम से ” युवराज की चिकोटि पे बिना ध्यान दिये उसके ससुर भावी पुत्रवधु के गुणों का व्याख्यान करते रहे।।

   महिलायें बिना वजह ही बतकही के नाम पे अधिक बदनाम है वर्ना पुरूष भी इधर उधर की गप्पे हाँकने में कहीं से पीछे नही रहते,,दस मिनट में समाप्त होने वाली पूरी कचौरी पूरे डेढ़ घन्टे तक थाली में अपने उदरस्थ होने की प्रतीक्षा करती रही।।
   
    तभी छन छन पायल छनकाती सुशीला वहाँ आयी और थोड़ी दूर से ही आवाज़ लगा दी__

   ” अजी सुनिये!! अब निकलना भी पड़ेगा,घर पहुँचते पहुँचते रात हो जायेगी,,बो तो अच्छा है फूलमणि को घर छोड़ आये थे तो सांझ का दिया बाती हो जायेगा।।”

” हाँ हाँ!! ठीके कह रही हो,चलो युव की अम्मा,निकलते हैं अब।।”

  अबकी बार सुशीला पूरी तैयारी में थी,कौन किस गाड़ी में सवार होगा,कहाँ बैठेगा उसने मन ही मन पूरा खाँचा खींच रखा था,उसने महिलाओं के बीच खड़ी बांसुरी और रूपा को ठेल ठाल के युवराज की गाड़ी में बैठा दिया,और खुद प्रिंस प्रेम और एक दो नौकरों को लिये राजा की गाड़ी में जा बैठी।।

    राजा जब शास्त्री जी की चरण वन्दना कर अपनी गाड़ी पे आया तो बाँसुरी को वहाँ ना पा कर असमंजस में प्रिंस को देखा,प्रिंस ने त्वरित गति से बड़े भैय्या की गाड़ी की ओर इशारा कर दिया, बड़े भैय्या की गाड़ी में बांसुरी को बैठे देख राजा को आश्चर्य हुआ __ :कि ये वहाँ कैसे चली गयी: पर प्रत्यक्ष में बिना कुछ कहे चुपचाप आकर ड्राईविंग सीट पर बैठ गया।।

   उधर अम्मा जी के कड़े तेवर देख बिना ना नुकुर किये बांसुरी चुपचाप युवराज भैय्या की गाड़ी में जा बैठी थी,रूपा भाभी से भी कम ही मिलना हुआ था उसका और उसे उनकी स्वप्रशंसा की बातें पसंद भी कम ही आती थी इसीसे मन ही मन उदास बांसुरी अपने ही मन के आगे लाचार हुई जा रही थी।।

    कैसा द्वंद उसके मन में चल रहा था,दो दिन पहले तक जिस राजा से सिर्फ जिम मे एक डेढ़ घन्टे की मुलाकात ही काफी होती थी आज उसके बिना पांच मिनट भी काटना कितना मुश्किल लग रहा था।। उसे पता था कि राजा की गाड़ी भी उसके आगे या पीछे ही चलेगी फिर भी कैसा खालीपन सा मन में भर गया था,जैसे बहुत सारे बादल छा तो गये हैं,पर बरस नही रहे…..तभी गाड़ी का सामने का दरवाजा खोल राजा अन्दर आकर बैठ गया__

  ” अरे राजा तुम यहाँ कैसे?? तुम्हारी गाड़ी कौन चला रहा बाबू??”

  ” भैय्या वो प्रिंस चला रहा,हमारा हाथ में ज़रा दर्द था तो प्रिंस को चलाने बैठा दिये,बाऊजी को उसी गाड़ी में बैठाए,काहे अम्मा नही तो अकेली हो जाती ,अम्मा बोली भी कि बाऊजी आपकी गाड़ी में बैठेंगे,तो हम बोल दिये हम चले जाते हैं भैय्या के पास,और यहाँ चले आये…अम्मा आवाज़ भी दी ,हम बोले चिंता ना करो अम्मा ,हम दोनो भाई समय से पहुंच जायेंगे घर।।ठीक है ना भैय्या।।”

   ” ठीके है छुटके ।चलो फिर गाड़ी भगायी जाये।।तुम्हरी भौजाई को अपना मायका गावँ का चाट भी खिलाना है,और उनको यहाँ तालाब पार शिव मन्दिर का दर्शन भी करना है,तो ये सब करते चलते हैं….काहे बांसुरी तुमको कोनो जल्दी तो नही है ना?”

  ” नही भैय्या जी कोई जल्दी नही,,हम मम्मी को फोन करके बता देते हैं ।”

    गाड़ी चारों को लिये सरपट कानपुर की ओर दौड़ चली।।

     तैनु ले के मैं जावांगा,दिल दे के मै जावांगा
      तेरे नाल मैं आवान्गी,ससुराल मैं जावान्गी।।।

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क्रमशः

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aparna …

शादी.कॉम-17

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  “ तुम सिखा रहे हो,तुम सिखा रहे हो
   जिस्म को हमारे रूहदारियां……
   काफिराना सा है,इश्क़ है या क्या है।।”

  गाने के बोलों के साथ ही राजा के मन में भी बांसुरी बजने लगी।।
    कॉफ़ी खतम कर बाँसुरी और निरमा उठ खड़े हुए घर वापसी के लिये।।
    राजा और प्रेम दोनों को छोड़ने बाहर तक आये_

” बंसी आज तुम्हें मेसेज करेंगे,फोन अपने पास ही रखना,तुम इधर उधर रख कर भूल जाती हो।”

  राजा की बात का जवाब बाँसुरी की मुस्कान ने दिया,उसने हँस के सिर हिला के हामी भर दी,और हाथ हिला के बाय करती हुई चल दी।

    घर पहुंचते ही बांसुरी ने फोन को चार्ज पे लगा दिया।।नीचे माँ के साथ रसोई का काम निपटाते भी उसका पूरा ध्यान फोन पर ही था,उसने दो तीन बार अपनी अम्मा से पूछा भी__” अम्मा हमारा फोन बजा क्या”

” नही लाड़ो हमें तो ना सुनाई दिया।”

आखिर सब्र की इन्तिहा हो गयी,बाकी दिनों में  रात के खाने के बाद भी घंटों अपनी माँ के साथ इधर उधर की बतकही करने वाली बांसुरी आज खाना निपटते ही तुरंत ऊपर अपने कमरे में चली गयी।।

  रात के नौ बज चुके थे,पर राजा का कोई मेसेज अब तक नही आया था__” हद दर्जे का भुलक्कड़ है, खुद ही बोला मेसेज करूंगा और गायब है।”
   बांसुरी ने राजा का लास्ट ऑनलाइन चेक किया वो भी शाम का 5 बजे दिखा रहा था,मतलब उसके बाद से राजा ने फोन छुआ तक नही।दिल बहलाने के लिये बंसी ने एक किताब खोल ली,और बिना रूचि के भी उसे पढ़ने के लिये प्रयास करने लगी।पर घूम फिर कर दिमाग फ़ोन की तरफ ही जा रहा था।।
   उसने एक बार फिर फोन उठाया ,साधारण टेक्स्ट मेसेज चेक किया,वॉट्सएप्प चेक किया,कहीं कुछ नही था,समय देखा नौ बजकर दस मिनट हुए थे।।
     ऐसा कैसे हो सकता है ,क्या सिर्फ दस मिनट पहले ही फ़ोन देखा था,पर ऐसा लग रहा जैसे एक घंटा बीत गया हो,उफ्फ आज घड़ी ही पिछड़ गयी है या मैं ही कुछ ज्यादा उतावली हो रही। ऐसा सोच के बंसी को खुद पर थोड़ी शर्म सी आयी और उसने यही सोचा कि इस द्वंद से बचने का उपाय है कि चादर को तान कर आराम से सो लिया जाये,जब मेसेज आयेगा देखा जायेगा।।

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   बांसुरी खिड़की की ओर करवट किये लेट गयी,पर आंखों में नींद कहाँ __ जिन आंखों में सपने बसते हैं उनमें फिर नींद नही रुकती।।
    खुली आंखों से पूर्णमासी का चांद देखते हुए मन ही मन कोई गाना गुनगुनाती बन्सी बड़ी देर तक चंदा को निहारती रही,फिर उसे महसूस हुआ कि अब बहुत रात बीत चुकी है,अब कोई मेसेज नही आने वाला,अब उसे सच में सो जाना चाहिये,पर सोने से पहले पानी पीने को उठी बांसुरी ने सोचा मेसेज तो नही पर हाँ समय कितना हो रहा ये जानना आवश्यक है,उसने मोबाईल पे दिखा रहे समय पे नज़र डाली__ साढ़े नौ

    अरे ऐसे कैसे चमत्कार हो रहा,इतनी देर तक लेटी पड़ी रही और अब समय देख रही तो बस साढ़े नौ!!
क्या उसे लेटे हुए सिर्फ बीस मिनट ही बीता है,उसे लगा मोबाईल की घड़ी सही वक्त नही दिखा रही,उसने दीवार घड़ी पर नज़र डाली,संयोग से वही समय उस घड़ी ने भी दिखाया।।अब क्या किया जाये,,बंसी को खुद पर खीझ भी हो रही थी और गुस्सा भी आ रहा था,ऐसा इतना बेताब होने की क्या ज़रूरत है,ऐसा लगा जैसे खुद से ही कोई युद्ध लड़ रही हो,बन्सी ने उठ कर रेडियो पे एफ एम ट्यून किया और खिड़की पर बैठ गयी__

       “नमकीन सी बात है हर नई सी बात में
        तेरी खुशबू चल रही है जो मेरे साथ में
        हल्का-हल्का रंग बीते कल का
        गहरा-गहरा कल हो जाएगा (हो जाएगा)
       आधा इश्क़, आधा है, आधा हो जाएगा
        कदमों से मीलों का वादा हो जाएगा।।

  गाने को सुनते हुए बंसी के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गयी,वहीं लेटे लेटे वो जाने कब सो गयी।।

   अगले दिन सुबह उठते ही सबसे पहले उसे याद आया रात राजा का मेसेज आने वाला था,पर रात जब तक वह जाग रही थी कोई मेसेज नही आया था,उसने लपक के फ़ोन उठाया फ़ोन बन्द पड़ा था….मेसेज देखने की हड़बड़ी में फोन चार्जिन्ग पे लगाना ही भूल गयी।।सुबह सुबह खुद पर ही गुस्सा आने लगा__
       पता नही क्या मेसेज करने वाला था,राजा को भी आजकल क्या हो गया है,क्या ज़रूरत थी ऐसे सस्पेंस क्रियेट करने की,अरे ना बोलता कि रात मेसेज करूंगा,सीधे मेसेज ही कर देता।।

” बंसी ! अरी का बड़बड़ा रही हो सुबह सुबह!! आज तुम नही उठी तो हम ही तुम्हारे लाने चाय बना लाये।।लो पी लो और तैयार हो जाओ,जिम नही जाना का??”

  ” हाँ जायेंगे ना अम्मा!! “

” दस बजे तक तो आ जाओगी ना,तुम्हें नाश्ता करा के फिर हमें गुड्डन के घर जाना है,दस दिन बाद उसका तिलक चढ़ना है,तो आज उसकी अम्मा बुलाई है,सारी तैयारी जोड़ने।।”

” हाँ दस तक तो आ जायेंगे, तुम चले जाना अम्मा  ,हम नाश्ता कर लेंगे, इतनी चिंता ना किया करो।”

  ” अरे काहे ना करे!! अब कुछ दिन में तुम भी बियाह कर चली जाओगी,फिर कहाँ तुम्हारी देखभाल कर पायेंगे,फिर ससुराल वाली हो जाओगी, उनकी मर्ज़ी से आना उनकी मर्ज़ी से जाना, फिर हमारे हाथ में का रहेगा।। अभी अपनी मन मर्ज़ी से तुम्हे खिला पिला तो सकते हैं ।”

” तुम तो ऐसे इमोशनल हो रही हो अम्मा जैसे कल ही हमारा ब्याह हुआ जा रहा??”

  ” सब सकुन साइत सही रहा तो एक महीना में तुम्हरा ब्याह भी हुये जायेगा,तुम्हरे पापा के दोस्त हैं ना वर्मा अंकल उन्होनें एक बहुत अच्छा लड़का बताया है,लड़का रेल्वे में नौकरी करता है,दू जन भाई हैं बस.. ये छोटा है,माँ बाप बड़के  के साथ गांव में रहते हैं ,और ये लड़का यहीं इसी सहर मे रहता है,हमरे लिये भी अच्छा रहेगा तुम यहीं के यहीं बिदा होगी तो।।”

   बाँसुरी सिर झुकाये बैठी चाय पीती रही,अभी इस मौके पे कुछ भी बोलने का उसका जी ना किया,बस बिना किसी कारण के मन खट्टा हो गया।।,उसे चुपचाप देख उसकी अम्मा नीचे गयी और एक फोटो लिये वापस आयी और उसके सामने रख दी…

    ” कैसा है?”

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   बांसुरी का इस बारे में बात करने का बिल्कुल मन नही था पर बात टालने के लिये उसने ” ठीक है” बोलकर पीछा छुड़ाना चाहा और वहाँ से उठ गयी।।उसके बाथरूम में घुसते ही प्रमिला के चेहरे पे हल्की सी मुस्कान दौड़ गयी और फोटो उठाये वो नीचे चली गयी।

             ************************

   इधर बाँसुरी से जाने कैसे राजा बोल तो गया कि मेसेज करेंगे पर रात में अपने कमरे में बैठे जाने कितनी बार हुआ कि राजा  ने मोबाइल उठाया और कुछ लिखा फिर डिलीट किया,फिर लिखा और मिटाया,,यही सिलसिला चल रहा था कि उसकी अम्मा ऊपर चली आयी।।

  ” अरे राजा तुम हियाँ बैठे हो,चलो नीचे तुम्हरी भौजी के बाऊजी आये हैं,रेखा के गमना पे विचार करने ।”

” रेखा के बिदाई से हमारा का लेना देना अम्मा?? हम का करेंगे बड़े बुजुर्गों के बीच??”

   ” तुमको कोनो सलाह मसवीरा के लिये नही बुला रहे,तुम जाओ भाग के पाड़े जी (पण्डित जी) को बुला लाओ।”

  बिल्कुल ही बिना मन के राजा उठा और नीचे उतर गया।
     पाड़े जी को सादर लेकर आया,उन्हें सम्मान पूर्वक घर की बैठक में बैठा कर लम्बे लम्बे डग अपने कमरे की तरफ बढा ही रहा था कि पीछे से बाऊजी ने आवाज़ लगायी __
  
    ” अरे राजा सुनो!! ज़रा चौक से सब के लिये कुल्हड़ वाली रबड़ी ले आओ,समधि जी को बड़ी पसंद है।”

   दिमाग के अन्दर एक ज़ोर का ज्वालामुखी फूटा ज़रूर पर गुस्से का लावा किसी को दिखा नही, चुपचाप अपने मन को समेट राजा वहाँ से जाने लगा तो भाभी के बाऊजी ने उसे आवाज़ लगायी __

   ” राजकुमार!! बेटा रुपये तो हमसे ले जाओ,भई खुशी राजी का मौका है,मुहँ तो मीठा हम ही करायेंगे ना।।”

  ” कैसन बात कर रहे समधि जी, रेखा का हमार बिटिया नही है,जाओ जाओ राजा ,तुम ले आओ।”

  हम रुपये देंगे,हम रुपये देंगे कर के  दोनो समधि उलझे ज़रूर रहे पर पूरे पन्द्रह मिनट भिड़ने के बाद भी किसी की अंटि से अधन्ना भी नही निकला, उन्हें बहस में उलझा छोड़ राजा अपनी बाईक उठा कर निकल लिया,और कुल्हड़ वाली रबड़ी के साथ साथ चौरसिया के यहाँ से बनारसी पान बीड़े का बंडल भी बंधवा लाया,क्योंकि कहीं ना कहीं वो समझ गया था कि इस गोष्ठी का समापन पान के साथ ही होगा।।

    सब कुछ सही हाथों में यानी अपनी अम्मा के हाथों में सौंप के जब राजा ऊपर अपने कमरे में पहुंचा तो देखा बड़े भैय्या उसके कमरे में अपने ब्याज के रुपैये के देयक लोगों की लिस्ट थामे राजा का ही इन्तजार कर रहे थे,उसे देखते ही उसके सामने हिसाब का बही खाता शुरु कर दिया,किसने कितना चुका दिया,किसने कुछ और समय की गुजारिश की ,सब कुछ बड़े भैय्या को समझा बुझा के संतुष्ट करने में लगभग डेढ़ घन्टे और बीत गये।।

” चलो फिर ठीक है,थोड़ा अपने लड़कों को भेज वसूली करा लेना टाईम पे,,हम अब जाते हैं रात बहुत हो गया है,तुम भी सो जाओ,हम देखे ज़रा ससुर जी का क्या व्यवस्था करना है।”

राजा ने हाँ में सिर हिला दिया,भैय्या के जाते ही समय देखा साढ़े ग्यारह हो चुके थे,फिर भी बड़ी आस से राजा ने मेसेज करने फ़ोन निकाला कि नीचे से बड़के भैय्या की आवाज़ आयी।।

” राजा गाड़ी निकालो ज़रा!! पापा जी अभी ही घर निकलने कह रहे,रुकने मना कर रहे,,चलो उन्हें छोड़ आते हैं ।।”

  ” आया भैय्या।”

      लक्ष्मण ने भी कभी राम को किसी काम के लिये मना किया है भला!!

           राजा को पता था कि भाभी का घर लगभग 45 किलोमीटर दूर था,आना जाना मिला कर डेढ़ दो घंटा तो लग ही जाना था,फिर भी बड़े भैय्या की आज्ञा शिरोधार्य कर दोनों भाई समधि जी को छोड़ने निकल गये।।
      वापस आने के बाद थकान से कब नींद लग गयी ध्यान ही नही रहा,सुबह नींद नही खुली और राजा जिम नही जा पाया।।

            ***********************

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    “पहले मैं समझा कुछ और वजह इन बातों की
    लेकिन अब जाना कहाँ नींद गयी मेरी रातों की
    जागती रहती हूँ मैं भी, चांद निकलता नही
    दिल तेरे बिन कहीं लगता नही,वक्त गुज़रता नही।    क्या यही प्यार है….. हाँ यही प्यार है।।”
  

    जिम में ट्रेड मिल पे चलते चलते बांसुरी को 20 मिनट हो गये,वो बार बार पलट कर दीवार घड़ी पे नज़र डाल लेती,समय गुज़रता जा रहा था,जिम की भीड़ बढ़ती ही जा रही थी,सब आ रहे थे बस एक वो ही नही था।।

     एक बार बंसी ऑफिस में भी झांक आयी,पर राजा वहाँ भी नही था,,कल शाम के बाद से कोई बात नही हुई थी,जाने कैसी बेचैनी थी जो रह रह कर गुस्से में बदलती जा रही थी।।
  
    ” क्या यही प्यार है” गीत को सुबह से जाने कितनी दफा प्रिंस से रिवाइंड करवा करवा के सुना जा रहा था,पर भीड़ बढ़ने के साथ ही बंसी ने गाने को वापस बजाने से मना कर दिया।।

  सिर्फ बीस मिनट में ही बंसी बेइंतिहा बोर होने लगी, और ट्रेड मिल से उतर कर ऑफिस रजिस्टर में अपने नाम के आगे साईन कर वहाँ से जाने लगी।।
       
    ” का हुआ बंसी ?? आज और कुछ नही करोगी का?? जल्दी निकल ले रही हो।।”

    ” हाँ प्रिंस!! तबीयत खराब लग रही,इसलिये आज मन नही कर रहा,घर जाकर आराम करेंगे।”
 
   बंसी दरवाजे तक पहुंची ही थी कि दरवाजा खोल राजा सामने खड़ा था।।

   ‘ ये बचपन का प्यार अगर खो जायेगा
     दिल कितना खाली खाली हो जायेगा
     तेरे ख़यालों से इसे आबाद करेंगे
     तुझे याद करेंगे जब हम जवां होंगे जाने कहाँ होंगे’

   गीत के बोल सुनने के साथ दोनो कुछ देर एक दूसरे को देखते रह गये।।

” कल मेसेज काहे नही किये।”

” काहे तुम रस्ता देख रही थी क्या??”

” हम !! तुम्हारे मेसेज का रास्ता देखेंगे,और कोई काम नही है क्या??”

” तो पूछी काहे?”

” ऐसे ही पूछ लिये भई ,कोई पाप हो गया क्या”

” नही नही,कोई पाप नही हुआ,तुम इत्ती जल्दी कहाँ चल दी,चाय तो पी लो।।”

” भैय्या जी बंसी का तबीयत खराब था,इसीसे घर जा रही बेचारी आराम करने।।आईये आपके लिये चाय तैय्यार है।”

राजा ने तबीयत की बात सुन बंसी को देखा और आंखों ही आंखों में हाल पूछा,बंसी ने भी सिर हिला के सब ठीक है कहा और राजा के पीछे पीछे ऑफिस में प्रवेश कर गयी।।

दोनो साथ साथ चाय पीते रहे….फिर राजा ने ही बात छेड़ी __

     “बंसी तुमको पता है ,जैसा तुम हमे सोचती हो ना हम वैसे सीधे सादे लड़के नही हैं ।।बहुत दुर्गुन हैं हममें ।।”

बाँसुरी राजा की बात सुन खिलखिला कर हँस पड़ी

” जैसे?? कोई एक आध दुर्गुण बताओ,हम भी तो जाने।।”

  राजा सिर नीचे किये थोड़ी देर अपना हाथ अपने बालों पे फिराता रहा फिर बड़ी हिम्मत जोड़ के बोलना शुरु किया__

    ” लोगों को डरा धमका के वसूली करते हैं,बड़के भैय्या के ब्याज के पैसों की।।और इस सब में कई बार गाली गलौच सब करना पड़ता है,जवान बुज़ुर्ग किसी को नही छोड़ते,हमारे लिये ब्याज की लिस्ट का एक एक आदमी हमारा दुसमन हो जाता है,।।
पढ़ाई लिखाई का हमारा हाल तो तुमको पता ही है,और इसके अलावा एक और बात है…..”

  ” बोलो राजा!! हम सुन रहे हैं ।”

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   ” हम जब स्कूल में थे ना तब एक लड़की हमे बहुत भा गयी थी,बहुते जादा,उस टाईम तो लगने लगा था उसके बिना जिंदा नही रह पायेंगे पर वो स्कूल बदल कर चली गयी,और हम यहीं रह गये……शायद हम अपनी स्कूल की जिंदगी छोड़ना ही नही चाहते थे इसिलिए फेल होते रहे और स्कूल में ही पड़े रहे,स्कूल में हर जगह उसकी यादें थी।। ,हमे तो अभी कुछ समय पहले तक यही लगता था कि हम अब भी उसिसे प्यार करते हैं,पर कुछ दिन पहले हमें समझ आ गया की वो बचपना था हमारा,,वो तो अपनी जिंदगी में बहुत आगे बढ़ चुकी है,और हमें भी बढ़ जाना चाहिये,तुम जानती हो हम तुम्हें ये सब क्यों बता रहे??”

बांसुरी ने बिना कुछ कहे ना में सिर हिला दिया

” क्योंकि हम चाहते हैं तुम्हारे हमारे बीच कोई बात छिपी ना रहे,तुम्हे सब मालूम होना चाहिये।।
    
        बाँसुरी तुम्हारी आदत सी पड़ गयी है हमें,तुम दो दिन भी जिम नही आती तो जिम ऐसा सुनसान लगने लगता है,जैसे कोई है ही नही यहाँ ।।हमें  पता है तुम्हारे घर वाले तुम्हारे लिये रिश्ता देख रहे,हमारे घर वाले भी!! हमने सोचा किसी अंजान से शादी करोगी उससे अच्छा है हमसे ही कर लो,हम तुम्हारी पढ़ाई लिखाई किसी चीज़ को नही रोकेंगे।।पर हम चाह रहे थे पहले हम अपनी अम्मा से तुम्हरे बारे में बात कर लें ।।
      अगर अम्मा हाँ बोल दी तो ठीक है वर्ना जैसे पहले दोस्त थे वैसे दोस्त ही बने रहेंगे,,क्या बुराई है इसमें ।।”

  बांसुरी अचरज से राजा का मुहँ देखती रह गयी,ये कैसा प्रपोसल था,अगर अम्मा हाँ बोली तो हाँ वर्ना फिर से दोस्त!!! एक बार एक दूसरे को अपने दिल की बताने के बाद क्या वापस पहले जैसी दोस्ती सम्भव है??

बांसुरी बिना कुछ कहे ही उठ गयी और ऑफिस से बाहर निकल गयी,राजा उसके पीछे भागता चला आया__
     ” क्या हुआ बांसुरी?? कोई बात बुरी लगी क्या??हम कुछ गलत बोल गये क्या??”

  ” नही राजा!! तुम्हारी भावनाओं की कद्र करते हैं,तुम बात कर लो अम्मा जी से,क्या बोलती हैं बताना!! हम आज रात तुम्हारे मेसेज का इन्तजार करेंगे।।आज भूलना मत मेसेज ज़रूर करना ।”

” अरे हम तो कल भी नही भूले थे,वो तो घर वाले एक के बाद एक काम पकड़ाते चले गये कि समय ही नही मिला,पर सुनो आज हम अम्मा से बात कर ही लेंगे।।”

दोनों बात कर ही रहे थे कि भैय्या जी का मोबाइल थामे प्रिंस दौडता चला आया__

” भैय्या जी रेखा दीदी का फोन आ रहा है।”

” हेलो!! हाँ रेखा,हाँ साथ ही है,हाँ बोल देंगे,अच्छा लो तुम्ही बोल दो।”

राजा ने फोन बांसुरी को पकड़ा दिया,लगभग पांच मिनट की बातचीत के बाद बांसुरी ने फोन वापस कर दिया__

  ” कल रेखा की बिदाई है,उसीके लिये बुला रही है।”

” तो चलो ना हम सब भी तो जायेंगे कल,तुम भी हमारे ही साथ चलो।”

” और अम्मा जी??” बांसुरी के सवाल पर राजा मुस्कुरा दिया__

” अम्मा तो जायेंगी ही,भई अब तुम्हें रहना तो उन्हीं के साथ है।”

” ओहो हीरो जी इतना उड़िये मत!! अभी उन्होनें हाँ नही की है,,अगर उनकी ना हुई तो हम पहले जैसे सिर्फ दोस्त ही रह जायेंगे,इसलिये थोड़ा जज्बात पे काबू रखिये।।”

   मुस्कुराती हुई बांसुरी घर चली गयी,राजा जिम की ओर पलटा तो प्रिंस खड़े खड़े मुस्कुरा रहा था और प्रेम हाथ बांधे खड़े राजा को घूर रहा था।।

  दोनो से नज़र बचाते हुए राजा अन्दर ऑफिस में चला गया,,कुछ ज़रूरी काम निपटाने के बाद बांसुरी को ” घर पहुंच गयी या नही?” का मेसेज किया और जैसे ही उधर से जवाब आया,एक नया सवाल भेज दिया……दोपहर हुई फिर शाम ढली और रात हो गयी पर राजा और बाँसुरी के सन्देशों का अथक आदान प्रदान चलता रहा।।

    जब एक बार किसी रिश्ते को प्यार की राह में कुछ आगे बढ़ा दिया जाये तब वो वापस दोस्ती के चौक पर पुन: वापसी नही कर पाता,,इस बात से अंजान दोनो नये नवेले प्रेमी शाम भर और फिर रात भर अपनी ही बातों में खोये रहे।।
     बचपन की बातें,घर परिवार की बातें,दोस्तों की बातें,अम्मा ,बड़के भैय्या,रूपा भाभी,वीणा जिज्जी, बुआ जी,पापा का ऑफिस, पिंकी की पढ़ाई, रतन का किस्सा ,निरमा और प्रेम की बातें …..उफ्फ कितनी सारी बातें थी दोनो के बीच।।रात में एक मौका ऐसा भी आया जब दोनों को ही फ़ोन को चार्जींग में लगाये लगाये ही बात करना पड़ा …..
    पर वो रात गुजरते गुजरते दोनो को एक नयी सुबह दे गयी।।

   दोनो में कितना कम सम सा था,और कितनी अधिक थी विषमताएं!! पर फिर भी एक वस्तु थी जो दोनों के पास लगभग बराबर थी!! एक दूसरे के लिये अपार प्रेम और असीम सम्मान!!उस एक कच्चे धागे ने ऐसी मजबूती से दोनों को बान्ध लिया कि अब हर स्वतंत्रता पे ये बंधन भारी पड़ गया।।

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  ” अब तक सोये पड़े हो लल्ला!! उठो राजू !! देखो समधि जी के घर जाना है आज रेखा का बिदाई है ना,उठो उठो बेटा आठ बज गया है,लो चाय पियो और जल्दी से तैयार हो जाओ।”

    भोर में चार बजे तो प्रेमी जोड़ा थक कर सोया था,आठ बजे अम्मा की आवाज़ सुनते ही राजा उठ बैठा।।आज सुबह भी अलग ही रंग में रंगी थी, मुस्कुरा के अम्मा के गले में बाहें डाले झुलते हुए राजा कुछ गुनगुनाने लगा।।

” बस बस ,लड़ियाओ नही,जाओ बिटवा नहा धो लो।”

” अम्मा तुमसे एक बात पूछनी थी।”

” हां पूछ लेना बाद में,हम जा रहे अभी तैयारी देखने।।” राजा की बात पूरी सुने बिना ही माता जी काम निपटाने भागती चली गयी।।

  नौ बजे तीन तीन गाड़ियों पे सवार अवस्थी परिवार समधियाने की ओर निकल पड़ा, राजा ने पहले ही रूपा को रेखा द्वारा बांसुरी को बुलाये जाने के बारे में बता दिया था,और रूपा को बांसुरी को अपने साथ बैठाने के लिये मना भी लिया था,अपनी गाड़ी में बांसुरी के लिये एक सीट रिसर्व रखे राजा ड्राईविंग सीट पर बैठा खुश था कि अम्मा जी बड़ी सी मिठाई की टोकरी संभाले राजा की गाड़ी के निकट चली आयी ।।

  ” खोलो दरवाजा,,ए राजा ,सुन नही रहे का।’

” अम्मा तुम इसमें बैठोगी क्या?? तुम उसमें भैय्या के साथ बैठ जाओ,बाऊजी भी उसिमे हैं।”

” हाँ पता है तुम्हरे बाऊजी उसमें बैठे हैं तभी तो तुम्हारी गाड़ी में आ गये,खाली तो है एक सीट ।”

  ” अरे अम्मा जी वो बांसुरी है ना लल्ला जी की सहेली वो भी जायेंगी हमारे साथ!! उन्ही के लिये लल्ला जी ….

” अरे बाँसुरी के लिये कब बोले हम भाभी,आप भी कुछ भी बोलती हैं,आओ बैठो अम्मा!! बाँसुरी पीछे भाभी के साथ बैठ जायेगी।।”

  तभी युवराज राजा की गाड़ी के पास चला आया__
” कोई परेशानी छोटे?? क्या बाँसुरी को भी लेना है क्या?? तो ऐसा करो ये रधिया और श्यामा को हम अपनी गाड़ी में ले लेते हैं,चलो तुम दोनो वो फल फुल की टोकरी में उठा के हमारी इनोवा में आ जाओ।”

  एक बार फिर  बड़के भैय्या  अपने लाड़ले छोटे भाई के लिये संकटमोचन बन अवतरित हुए और उसकी उलझन को निपटा चलते बने।।

   बांसुरी के घर के आगे अपनी गाड़ी रोके राजा ने बंसी को फ़ोन लगाया ही था कि प्रमिला दरवाजा खोले बाहर चली आयी,सबको सादर अभिवादन कर उसने बड़े प्रेम से राजा की अम्मा को प्यारा सा उलाहना दिया__
        ” बाहरे से चल देंगी जिज्जी,भीतर नही आयेंगी, सुदामा की  कुटिया में भी जरा चरण फिरा दीजिये।।”

   प्रमिला के स्वभाव में ही मिसरी घुली थी,इससे अंजान सुशीला को यही लगा कि ये अस्वाभाविक माधुर्य सिर्फ और सिर्फ उसके सजीले बेटे को फांसने के लिये ही है,इसिलिए उसने अपने चेहरे को यथासम्भव कठोर दिखाते हुए कड़े शब्दों मे अपनी व्यस्तता की दुहाई दे डाली__

   ” ऐसे जगह जगह रुकते रहे तो बडी अबेर हो जायेगी,आप जल्दी से लड़की को भेजिए,फिर हम निकले।”

  ” चाय पी लेती जिज्जी , बस 5 मिनट ही लगेगा।”

  प्रमिला की विनम्रता सुशीला के तन बदन को सुलगा रही थी

” नही ! अभी तो हो ही नही सकता।” इतने में बांसुरी आसमानी रंग के लहन्गे में सजी संवरी चली आयी, उसे देखते ही राजा के चेहरे पे लजीली मुस्कान चली आयी,होंठों की नाचती कोर अम्मा से कैसे छिपी रह सकती थी,आते ही बांसुरी ने सुशीला को प्रणाम किया __
” हाँ! बस बस!! खुस रहो,,पीछे बैठ जाओ।।

   एक दूसरे में खोये ताज़े ताज़े प्रेमियों को ये रुखाई नज़र नही आयी पर पीछे कोई और भी थी जिसे ये सारा सब कुछ समझ आने लगा था और जो भविष्य में घर में छिड़ने वाले महायुद्ध की प्रस्तावना को मन ही मन तैयार कर आनंदित हो रही थी।।

” हियाँ आ जाओ बंसी !! हमारे पास।” रूपा की चाशनी  पे सास की जलती हुई नज़र भी कडवाहट ना ला पाई

  बांसुरी ने आंखों ही आंखों में राजा से इजाज़त ली, राजा ने पलकें झपका कर इजाज़त दी और बांसुरी पीछे चली गयी…..कुछ देर पहले का पुत्र की बगल वाली सीट पर विराजमान होने का मातृ विजय गर्व चकनाचूर हो गया।।

    इत्ता सुन्दर गोरा चिट्टा सजीला सा लड़का!!!
  कुछ सोच समझ कर ही सुशीला ने अपने दोनों लाड़लों का नाम रखा था,दोनो ही तो दिखने सुनने में राजा राजकुमार ही लगते थे….जैसे उंचे पूरे वैसा ही गठीला कसरती बदन,उसपे बिल्कुल पिघले हुए सोने सा लपटें मारता रंग…..राजा को इस सांवली सी बित्ते भर की लड़की में क्या भा गया ऐसा,ठीक है बामण घर की छोकरी है,पर है तो सरजूपारीन, राजा के बाबूजी कभी ना मानेंगे,कहाँ हम कानपुरिया बीस बीसवां कान्यकुब्ज बामण और कहाँ ये लड़कोरि।।
  किसी भी कीमत पर अपने लल्ला को इस बिदेसिनी से बचाना ही पड़ेगा।।

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    सुशीला अपनी सोच में मगन थी,,राजा ने गाड़ी में गाने बजा दिये….

   ” जब से तुम्हारे नाम की मिसरी होंठ लगायी है
      मीठा सा गम है और मीठी सी तन्हाई है….
      रोज़ रोज़ आंखो तले एक ही सपना चले…”

    गाड़ी अपनी गति से गन्तव्य की ओर बढ़ती चली गयी।।।

क्रमशः

aparna..

शादी.कॉम- 16

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       ” ना मोहब्बत ना दोस्ती के लिये,वक्त रुकता नही किसी के लिये।।”

   जिसने भी कहा है या लिखा है,अटल सत्य है!! सब कुछ अपनी गति से चलता रहता है ,समय किसी के लिये नही रुकता,।।
     समय अपनी गति से चलता गया,बांसुरी को जिम जाते पूरे छै महीने बीत गये,अब वो पहली वाली गोल मटोल तबला सरीखी बांसुरी नही रही बल्कि वाकई दुबली सजीली बांसुरी बन गई,बिल्कुल अपने नाम को चरितार्थ करते हुए।।
       राजा भी अपनी परीक्षाओं से फारिग हो गया,इस बार उसने पेपर भी ठीक से लिखे।।पहले तो राजा के साथ ऐसा होता था कि जब वो पढ़ने बैठता था तो हर विषय एक दूसरे से होड़ लेता हुआ बकवास और बोरिंग लगता था,राजा हमेशा सोचा करता था,जब दिल को बहलाने वाले इतने साधन जीवन मे मौजूद हैं ( डम्बल,साईकल, ट्रेडमिल इत्यादी) तो कौन इन्सान होगा जो अपना जीवन किताबों में व्यर्थ करेगा,।
      वो जब कभी इतिहास पढ़ने बैठता तो आधा तो वो समय चक्र में उलझ के रह जाता ।।उसे  BC (before christ)और AD (anna domini) का झमेला बड़ा कठिन लगता,उसके ऊपर से अलग अलग आक्रमणकारी और अलग अलग सभ्यताएं ।
     वो हमेशा सोचा करता कि जब हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की सभ्यता की खुदाई मे सिक्के मिले तो तुगलक ने कौन से सिक्के बदले।।
     ये तो सिर्फ एक विषय था,इसी तरह के कई विषय थे जो पूरी तरह वक्त की बर्बादी थे,नागरिक शास्त्र,भूगोल इत्यादी,,पर धीरे धीरे इन जटिल विषयों की गुत्थि को बांसुरी ने बड़ी सरलता से सुलझा कर रख दिया,बिल्कुल जैसे किसी उलझे हुए ऊन के गोले को कुशल हाथों से एक गृहिणी सुलझा कर अलग अलग बंडल तैयार कर लेती है,वैसे ही।।

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     पहले राजा पेपर बनाने बैठता था तो उसके साथ ये होता था कि एक सवाल नही आ रहा,आगे बढो, अरे दूजा भी नही आ रहा,फिर आगे बढ़ो, तीसरा भी तो नही आ रहा,क्या करना है आगे ही बढ़ना है,,पर चौथा भी नही आ रहा,अब क्लास से ही निकल लो।।।
   पर अबकी बार बांसुरी ने पक्की तैयारी की थी,उसे पता था उसका छात्र अड़ियल है,और इसे अभ्यास के चाबुक से ही सही किया जा सकता है,इसीसे उसने हर विषय के कई कई पेपर तैयार कर राजा से समय अवधि के भीतर पूर्ण करवाये थे,इसीसे इस बार जब राजा परीक्षा मे बैठा तो उसे खुद भी मालूम नही था कि उसके साथ इतना चमत्कार होगा।।
   
                प्रथम प्रश्नपत्र का प्रथम सवाल उसने गणपति को शीश नवा के जब देखा तो उसके आश्चर्य की सीमा ना रही__ अरे ये सवाल तो बनता है,,अगला देखा,अरे ये भी आता है,तीसरा?? हाँ ये भी तो याद है,चौथा सवाल देखा,अरे इसका जवाब तो बहुत अच्छे से आता है,!! ज्ञान और आत्मविश्वास का संगम जहां हो जाता है वहाँ फिर कोई विपत्ति आड़े नही आती।
    
        तीन घन्टे के प्रश्नपत्र में जहां राजा पहले दो ही घन्टे में बाहर निकल जाता था,आज पूरे तीन घन्टे उसे ऊपर नज़र उठाने की भी फुर्सत नही मिली।।
  सिर अपनी उत्तर पुस्तिका मे गडाये हुए वो बस सारे उत्तर एक के बाद एक लिखता गया,पैंतालीस मिनट बीते होंगे कि उसे अतिरिक्त उत्तर पुस्तिका की आवश्यकता पड़ गई ।।
      अब इतने सालों में शिक्षकों से भी भला परिचय हो चुका था इसीसे जब राजा ने अतिरिक्त उत्तर पुस्तिका की मांग की तो शिक्षक महोदय को हार्ट अटैक आते आते बचा,वो एक हाथ से अपना हृदय थामे दूसरे हाथ से कॉपी लिये राजा की बैंच तक चले आये
     “का हुई गवा राजा?? ऐसा का लिख डारे बाबू की सप्लीमेंट्री  की जरूरत पड़ गयी।देखो सभी कहते जरूर हैं कि कापी कोई पढ़ता नही किसी फिलिम की कहानी लिख डारो,पर होता नही ऐसा बबुआ,,कोनो पिच्चर विच्चर का कहानी थोड़े ही लिख मारे हो।।”
    
         शिक्षक महोदय ने अपनी बात पूरी करते करते राजा की कॉपी पर सरसरी नज़र भी मार ली,और अबकी बार उन्हें दूसरा हार्ट अटैक आते आते बचा।

  ” ई कैसा चमत्कार भवा,,राजा ही हो ना,,उंगली ना दुखी इत्ता सारा लिख मारे हो,अरे अभी तक पास होने के लाले थे तुम्हारे,अबकी लाने तो तुम गुरू टॉप कर जाओगे ,लग रहा।।

” गुरुजी इस बार पूरी तैयारी कर के आये हैं ,अब चाहे जो हो जाये हमको पास होना ही है।”

और इस प्रकार हर एक विषय के पेपर में अपने गुरूजनों को हल्का फुल्का अटैक देते हुए भैय्या जी ने सारे प्रश्नपत्र बड़ी सुगमता से हल कर लिये।।

   अन्तिम पेपर दे कर राहत और सुकून की सांस लेते हुए जिम की राह पकड़ लिये।।
     जिम पहुंच कर जैसे ही बड़े कांच के लगे स्लाइडिंग डोर को खोल कर भैय्या जी ने भीतर प्रवेश किया,उनके ऊपर पुष्पवर्षा होने लगी।।।पूरा जिम बड़े बड़े गुब्बारों से सजा पड़ा था,दरवाजे के एक किनारे बहुत सुन्दर रंगोली सजी थी,उस गोल रंगोली में एक तरफ डम्बल बने थे और एक तरफ क्रॉसट्रेनर ।।
   
      प्रिंस और प्रेम दौडे चले आये,भैय्या जी ने दोनों को ऐसे गले लगा लिया जैसे अलाउद्दीन खिलजी से चित्तौडगढ़ का किला जीत लाये हो।।बिल्कुल किसी शहंशाह का सा स्वागत हुआ,जिम में आने वाली हर नाज़नीन उस दिन कुछ अलग ही सजी धजी सी मौजूद थी,सभी ने परीक्षाफल आने के पहले ही भैय्या जी की भावी सफलता को आंक लिया था और उसी का जश्न मनाने की तैयारी थी।


   
           ऑफिस के अन्दर से एक बड़ा सा गोल रसमलाई फ्लेवर का केक लिये बांसुरी आई,,राजा ने मुस्कुरा कर केक काटा और सबसे पहला टुकड़ा बांसुरी की ओर बढ़ा दिया ,केक थामते हुए बांसुरी का हाथ ज़रा लड़खड़ा गया और उसने दूसरे हाथ से राजा की कलाई थाम ली__
    ” अरे!! बांसुरी तुम्हारा हाथ तो तप रहा है,तुम्हें तो तेज़ बुखार है,ऐसे मे यहाँ क्यों आई,घर में आराम करना चाहिये था ना।।”

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  ” कुछ नही बस हरारत है,अभी घर जाकर दवा ले लेंगे तो ठीक हो जायेंगे,तुम हमारी चिंता ना करो,तुम्हारे पेपर अच्छे बन गये उसी खुशी में पार्टी है,समझे……”

   बांसुरी अपनी बात पूरी किये बिना ही चकरा के नीचे गिर गई,अचानक उसके शरीर में अकड़न सी होने लगी,शरीर पीछे की ओर झटके के साथ मुड़ने लगा,ऐसे जैसे कोई धनुष!!!

   राजा को समझते देर ना लगी,एक दिन पहले ही एलो वेरा जूस का टिन खोलते समय बांसुरी के हाथ में लगी चोट ही मांसपेशियों की जकड़न और दर्द का कारण बनी थी, बचपन से उसने धनुषटँकार नामक बीमारी का उल्लेख सुन रखा था,कि कैसे जंग लगी धातु से खरोंच लगने पर टीटनस हो जाता है अगर समय रहते टीका ना लगवाया जाये तो।।
    
    बांसुरी के चेहरे और गरदन की पेशियों पे कसावट बढ़ने लगी,सभी किसी ना किसी दिशा में दौड़ पड़े, ऐसा अक्सर होता है,जब भी कभी कही कोई आपातकालीन स्थिति बनती है तो अमूमन भगदड़ मच जाती है,और इन भागते चीखते लोगों में से पचास प्रतिशत लोगों को तो पता भी नही होता कि वो क्यों भाग रहे हैं,और उन्हें कहाँ जाना है,वैसा ही कुछ जिम में हुआ,जिन्होनें बांसुरी को गिरते देखा वो तो उसकी सहायता को भागे लेकिन जिन्होने नही देखा वे भी उतनी ही तत्परता से भागते हुए ,काम करने वालों के रास्ते में व्यवधान उत्पन्न करने लगे।।  तभी सहसा राजा भैय्या ने सबको बांसुरी से दूर किया,और उसे अपने दोनों हाथों से उठा कर जिम से बाहर की ओर चल दिये, किसी ने पीछे से आवाज़ भी दी_
       ” अरे कमजोरी से सर घूम गया होगा,इत्ती सी बात के लिये कहाँ लिये भाग रहे हो राजा??”

  ” कमजोरी तो नही लगती,हमे तो लगता है कोई भूत परेत का चक्कर तो नही ना है।”

  किसी की बात पे कान दिये बिना राजा बांसुरी को लिये बाहर निकल गया।।

  राजा बांसुरी को लिये जब तक अस्पताल पहुंचा तब तक में बाँसुरी का दर्द और एँठन और बढ़ चुका था,ज्वर की बेहोशी टूटी नही थी,,बिल्कुल अवधूत रुद्र जिस प्रकार सती की अचल देह लिये क्रोध में कांपते पृथ्वी को नापते चले,कुछ वैसे ही अवतार में राजा बांसुरी की देह समेटे अस्पताल पहुँचा।।
    बाँसुरी को तुरंत इमरजेन्सी में भर्ती कर लिया गया,सीनियर जूनियर डॉक्टरों की टीम अपने काम में जुट गई।।

    लगातार दो दिन तक डॉक्टरों के किये अथक प्रयास से आखिर तीसरे दिन बांसुरी ने आंखें खोल दी।।इन दो दिनों में बांसुरी के हैरान परेशान परिवार का संबल बना राजा जैसे खाना पीना भी भूल गया था,हर दवा हर इन्जेक्शन के लिये दौड़ लगाता राजा अपने नाम की पद गरिमा को जैसे भूला बैठा था।

       इसी बीच बेटा घर क्यों नही आ रहा ये जानने माता जी ने प्रिंस से चर्चा की तो उन्हें बांसुरी की बीमारी और राजा की अवस्था का पता चला,बेटे से मिलने अस्पताल पहुंची अवस्थिन को वहाँ बेटे का एक अनोखा ही रूप देखने मिला,,घर पे पानी का एक गिलास स्वयं ना लेने वाला उनका लाड़ला यहाँ तो हर काम खुद करने की जिद पे अड़ा था,डॉक्टरों से चर्चा करने से लेकर हर छोटे बड़े काम की जिम्मेदारी राजा की ही थी।।
       
          जिसे किसी वस्तु की ज़रूरत होती फट राजा की पुकार मचती,बांसुरी की अम्मा तो ऐसे घुली मिली सी राजा से सिर भिड़ाये चर्चा करती की एक बारगी लगा राजा इनकी नही उनकी ही संतान है।।
      अपने कोखजाये को उन परायों के लिये इतना घिसते देख माँ के सीने में सांप लोट गये,कैसे भी हो इस लड़की और इसके परिवार से अपने राजकुमार को उन्हें बचाना ही होगा,जाने क्या घुट्टी पिला दी है इन लोगों ने_

    ” काहे राजा घर दुवार भुला गये हो का,दू दिन से उधर फिरे ही नही,तुम्हरे बाऊजी परेसान हो रहे थे,तब आज प्रिंस से पूछताछ कर तुम्हें ढूंढते आये हैं हम।”

” काहे अम्मा बड़के भैया नही बताये का?? हम तो जिस दिन बांसुरी को यहाँ ले के आये,तुरंते भैय्या को फोन लगा के बता दिये रहे कि बांसुरी को टिटेनस हुआ है, हमको अस्पताल में  ही रुकना पड़ेगा।।”

   बात सत्य थी,युवराज ने अम्मा को कुछ नही बताया था,बल्कि उल्टा अपने किसी कर्मचारी के हाथ राजा के पास कुछ पैसे भिजवा दिये थे।।

  अब तो माताजी का पारा और उबल पड़ा,दोनो लड़के मनमर्जी कर रहे,अपनी अम्मा से बताने की जरुरत ही नही समझी।।पर समझदारी उनमें कूट कूट कर भरी थी,उन्हें भली प्रकार ज्ञात था कहाँ क्या बोलना,किस शब्द से कब घात की जा सकती है और कब चाशनी में लपेट के परोसना है__

       ” अच्छा है बाबू,अम्मा की कोनो चिंता ही नही, कम से कम एक बार हमें भी बोल देते, किसी बात के लिये मना तो करते नही हैं,उल्टा हम घर से खाना पीना भिजा देते,जाने यहाँ का मिला होगा खाने को।”

  राजा के प्राण अपनी माँ में बसते थे,इन दो दिनों में बासुँरी की तीमारदारी में राजा जैसे खुद को ही भूल गया था,माँ को कुछ बताना कहाँ याद रहता,पर माँ की कही भावुक पंक्तियों ने मन में क्लेश और अफसोस जगा दिया,उससे वाकई बड़ी चूक हो गई थी,वो वहीं माँ के पैरों के पास ज़मीन पर बैठ गया, अपना सिर माँ की गोद में टिका कर आंखें बन्द कर ली__
      ” बस माँ का बतायें??,सब कुछ इत्ता अचानक हुआ कि कुछ समझ ही ना आया,बस बचपन की तुम्हारी बताई बात ही याद रही,उसी के लाने बन्सी को उठाये दौडे चले आये,लगा कि नही लाये तो जान ना बचेगी बेचारी की।”

  माँ अपने बेटे के बालों में हाथ फिराती सुनती रही, मन में बवंडर उठ रहा था,बांसुरी बंसी कब बन गई? बित्ते भर की छोकरी ने उसके लल्ला का दिमाग फिरा दिया,पर ऊपर से कुछ ना बोली__

” राजा ! हियाँ बैठे हो,चलो ना उधर डाकटर साहब बुला रहे,बोल रहे कल बंसी की छुट्टी कर देंगे।। नमस्ते बहन जी!! हम बाँसुरी की अम्मा !! अगर आपका राजा ना होता तो हमारी बांसुरी भी ना होती,बेचारी के प्राणों पे संकट पड़ गया था,भला हो राजा बाबू का समय रहते अस्पताल ले आये,सारी भाग दौड़ कर के भर्ती करा दिया तब हमें खबर की।”

  राजा तो बांसुरी की अम्मा की आवाज़ सुनते ही झट उठ कर बांसुरी के कमरे की ओर लपक लिया,और राजा की अम्मा के कलेजे पे सांप लोट गये।।पहले से जली भुनी बैठी थी कि ताबूत पे आखिरी कील ठोंकने बांसुरी की अम्मा स्वयं उपस्थित हो गई।।।अरे साफ साफ तो दिख रहा कि लड़का हाथ से निकला जा रहा अब ई तिवारीन काहे जले पे नमक छिड़क रही।।
 
    बांसुरी की अम्मा प्रमिला के मन में शुरु से अवस्थी परिवार के लिये एक विशेष सम्मान की भावना थी,मौके बेमौके राजा की भलमनसाहत वो देख भी चुकी थी,अवस्थी परिवार का नाम भी बहुत था,इसीसे वो खुद से आगे बढ़ कर राजा की अम्मा से खुले दिल से राजा की स्तुति कर गई, पर ऐसा करने से पहले ये नही सोच पाई की उनकी इस प्रशंसा के अर्ध्य को सामने वाली कैसे लेगी।। साफ मन और स्वछ हृदय से की गई प्रशंसा को राजा की माँ ने किसी और ही ऐनक से देखा और चोट खा बैठी।।

          ***********************

  बांसुरी को स्वस्थ हुए दिन बीत गये,वापस जीवन अपने ढर्रे पर चलने लगा।।कॉलेज के इम्तिहान भी निपट गये,अब बांसुरी का अधिकतर समय घर पर ही गुजरने लगा।।
       ऐसे में बुआ जी वापस अपने पुश्तैनी काम में जी जान से जुट गई,,घर बैठी जवान लड़की उनकी नज़र में सबसे बड़ी बोझ थी,जैसे भी इस छोकरी को भी पार लगाना था और अपने भाई भावज के लिये गंगा स्नान का मार्ग प्रशस्त करना था।।
   
    पहले बांसुरी मोटी थी अब पतली हो चुकी थी,लेकिन उसकी इस अवनति  से बुआ जी पर कोई विशेष प्रभाव नही पड़ा,वो अभी भी चुन चुन के ऐसे ही रिश्ते सहेज के भाभी के सामने परोसती की प्रमिला को उबकाई आ जाती पर रिश्ते के सम्मान को निभाने वो ननंंद के सामने चुप रह जाती।


     
             बांसुरी अब पहले की तरह अपनी तीखी ज़बान के प्रहार से बुआ को लहू-लुहान नही करती, बल्कि जैसे ही उसका विवाह प्रसंग छिड़ता वो उठ कर अपने कमरे में किसी किताब को खोल उसमें दुबक जाती।।एक शाम ऐसे ही बांसुरी जब बुआ जी के वार्तालाप से ऊब कर ऊपर चली गई तो उसके कुछ देर बाद प्रमिला भी ननंद को चाय का कप पकड़ा कर बाँसुरी की चाय लिये उसके कमरे में चली आई

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” का हुआ बंसी ,देख रहे हैं आजकल ब्याह का बात सुन के बड़ी अनमनी हो जाती हो,,कुछ मन मे चल रहा का??”

” अरे नही अम्मा,हमारे मन में का चलेगा।।पहले सोचा करते थे बैंक की परीक्षा देंगे नौकरी करेंगे पर अब सोच रहे जैसा बुआ और तुम सब ठीक समझो वही कर लेंगे।”

” अरे काहे वही कर लोगी!!! तुम्हरी बुआ तो सादी कराने पीछे पड़ी हैं,तो कर लोगी किसी से भी सादी।।”
   
बांसुरी ने चुपके से हाँ में सिर हिला दिया,अपनी बड़बोली बांसुरी को ऐसे चुपचाप देख प्रमिला का कलेजा मुहँ को आने लगा__

   ” अगर मन में कोई और है तो बता दो बंसी ,हम तो माँ हैं तुम्हारी,,कभी तुम्हरे साथ कुछ गलत ना होने देंगे।।
     तुम कहो तो राजा के घर सन्देसा भिजाये का।”

” काहे का सन्देश माँ?? जैसा सोच रही हो वैसा कुछ नही है।।राजा और हम सिर्फ दोस्त हैं ।”

अभी माँ बेटी अपनी बातों में लगी थी कि निरमा ने कमरे में प्रवेश किया__” प्रनाम चाची।”

” खुस रहो बिटिया!! आओ बैठो,तुम लोग बातें करो हम चाय भेजते हैं तुम्हारे लिये।”

  निरमा हंसते हुए आकर बांसुरी के पास बैठ गई ।

  ” क्या बात है छुपी रुस्तम!! क्या बोल रही थी चाची?? राजा भैय्या के घर रिश्ता भेजा जा रहा है हमारी राजकुमारी का,वाह वाह क्या बात है।”

  ” पगला गयी हो क्या निरमा,कुछ भी बोलती हो?”

  ” अरे तो बुराई क्या है राजा भैय्या में?? तुम जबर्दस्ती का ये सीरियसनेस का चोला जो ओढे बैठी हो ना,उतार फेन्को।।बहुत हुआ समझी ,वो भास्कर सर का शोक मनाना बन्द करो अब।।”

   ” तुमसे किसने कहा हम शोक मना रहे।”

   ” तुम्हारी शकल बता रही,अभी नीचे तुम्हारी बुआ जी मिली थी,मुझे एक से बढ़कर एक वाहियात लड़कों के फोटो दिखाने लगी__ बोलती हैं ये देखो कैसे हीरा मोती छाँट के लायी हूँ अपनी बंसी के लिये।मेरा मन किया बोल दूँ कद्दू !! इत्ते पसंद आ रहे तो किसी एक को चुन के आप ही फेरे फिरा लो,,पर संस्कार रोक देते हैं हमें,कुछ जादा बोलने से।”

  निरमा की बात सुन बांसुरी हँस दी__” देखो निरमा शादी तो करनी ही है,पापा चाह रहे उनके रिटायर होने के पहले पहले हमारा ब्याह भी हो जाये,हमारे लिये चिंता करते रहते हैं बेचारे! इसिलिये हमने भी अम्मा को शादी के लिये हाँ कह दिया है।।अगर हमारी किस्मत में पढ़ना और नौकरी करना बदा होगा तो शादी के बाद भी पढ़ लेंगे और कर लेंगे नौकरी।”

” बंसी तुम तो एकदम ही बदल गयी हो!!,अच्छा सुनो बड़े दिनों के बाद हमें घर से निकलने का मौका मिला है,चलो ना जिम चलते हैं प्रेम हमारा रस्ता देख रहा वहाँ ।।”

    बांसुरी ने मुहँ धोया कपड़े बदले और फेयर ऐण्ड लवली लगा कर तैयार हो गयी

” क्या बात है बंसी ,,पहले तो ये सब क्रीम वीम तुम्हे ढ़कोसला लगता था,अब क्या राजा भैय्या के चक्कर मे,हैं??”

” जी नही हमारी अम्मा के चक्कर में ये पोत रहें हैं आजकल!! हमारी गोरी नारी अम्मा को अपनी कलूटी बिटिया पे बड़ा तरस आता है,इसिलिये ये खरीद लायी,अब वो लायी है प्यार से इसीलिये लगा लेते हैं,अब चलो,वर्ना तुम्हारी अम्मा तुम्हें ढूँढते यहाँ चली आयेंगी।”

     जिम में शाम के पांच बजे की रौनक पसरी हुई थी,राजा अपने ऑफिस में बैठा था कि निरमा के साथ बांसुरी ने प्रवेश किया।।बांसुरी और राजा में पहले से ही तगड़ी दोस्ती थी पर अब कुछ हल्का फुल्का दुराव छिपाव भी ना रहा था।।
  
      अपनी तबीयत फिर परीक्षाओं के कारण कुछ समय के लिये जिम से अवकाश लेने वाली बांसुरी अब तक जिम मे वापसी नही कर पायी थी।।

  ” हाँ तो जिम कबसे शुरु करने का विचार है बंसी। दुबली हो गयी तो छोड़ दिया जिम ??”

  ” अरे नही राजा,तुम्हें बताया तो था परीक्षाओं में लगे थे,अभी एक हफ्ता तो हुआ है सब निपटे,बस अब कल से शुरु कर देंगे,हम ज़रा एक राउंड घूम कर आते हैं,जिम का चक्कर लगा लें,तुम बैठो निरमा।”

  निरमा प्रेम और राजा को वहीं छोड़ बंसी बाहर निकल गयी।।

” राजा भैय्या आपसे एक बात कहें ,हमें लगता है अब बांसुरी ज्यादा दिन तक जिम नही आयेगी,उसके घर में तो उसके लिये खूब जोर शोर से रिश्ता देख रहें हैं ।”

  ” अच्छा,,तो?? बांसुरी भी तैयार है क्या शादी के लिये,वो तो पढ़ना लिखना नौकरी करना चाहती थी।”

” चाहती थी! पर अब शादी के लिये तैयार है,ये देखिये ये फोटो, बंसी की बुआ जी की नज़र बचा के हम ले उड़े ,कैसा उजड़ा चमन लड़का है!! तानपूरा भी नही लग रहा और हमारी बांसुरी से शादी करेगा।।”

  फोटो देख कर राजा का चेहरा लटक गया__” इससे तो अच्छे हम हैं ।”

  ” कुछ कहा राजा भैय्या आपने।” निरमा के सवाल पर हड़बड़ा कर राजा ने फोटो निरमा को वापस कर दिया

  ” नही! कुछ नही।”

” वैसे बंसी की अम्मा तो उससे आपके बारे में भी पूछ रही थी,कि आप बंसी को कैसे लगते हैं ।।”

  ” क्या बात कर रही हो निरमा?? “

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  ” हाँ हम सच कह रहें हैं,पर हमारी बंसी है एक नम्बर की गंवार , कुछ नही बोली मुहँ में कुल्फ़ी जमाई बैठी रही।।हम भी सोचे भुगतो फिर,,जब इत्ते अच्छे रिश्ते को सुन के भी चुप बैठी रहेगी तो मिलेगा ऐसा ही कोई साम्बा और कालिया,हम क्या करें।”

  राजा नीचे सिर किये कुछ सोचते हुए मुस्कुराता रहा

  ” भैय्या जी! अब बस मुस्कुराने से कुछ नही होना जाना है।।आपको ही पहल करना पड़ेगा वर्ना बाद में पछताने के कुछ हाथ ना लगेगा।”

  ” निरमा तुम तो पीछे ही पड़ गयी हो,अरे अगर भैय्या जी के मन मे कुछ होगा ही नही तो वो बेचारे का करें।।तुम तो जबरिया उतर आयी हो यार।।चुप भी करो अपना बांसुरी पुराण,भैय्या जी बस दोस्त समझते हैं,और कुछ नही समझीं।क्यों भैय्या जी ठीक कहे ना??”

   ” अच्छा ऐसा है तो काहे उस दिन जैसे ही बन्सी चक्कर खा के गिरी तो सीधा उसे लिये अस्पताल भागे,काहे इत्ता उसकी बात सुनते हैं,काहे उसकी हर बात मानते हैं ।”

   ” क्योंकि भैया जी किसी का एहसान भूलते नही इसलिये,वो पढ़ाई है ना भैय्या जी को इसलिये उसकी मदद करते हैं,और कोई बात नही है,प्यार व्यार बहुत दूर की बात है,भैय्या जी तो उस मुटल्लो से बात कर लेते हैं ढंग से,वही बड़ी बात है।।

  ” अरे झगड़ा बन्द करो तुम दोनो यार!! हम देख लेंगे क्या करना हमें ।।वैसे प्रेम हमें लगता है निरमा सही कह रही…..यार एक बात बोलें हमे लगता है हमे बांसुरी की आदत सी पड़ गयी है,वो जिम नही आती तो जिम मे मन नही लगता,हमारे हर काम में उसकी राय लेना हमें अच्छा लगता है,और ये भी लगता है कि वो कभी गलत राय नही देगी,,हम भी सोच रहे कि एक बार बंसी से बात कर ही लेते हैं ।”

राजा अपनी बात पूरी कर भी नही पाया था कि बन्सी अन्दर आ गयी।।

  ” किस बारे में हमसे बात करने की सोच रहे राजा?”

  ” कुछ नही बंसी बाद में बताएंगे,, आओ लो कॉफ़ी पी लो,,आज तुम सब के लिये इंडियन कॉफ़ी हाऊस से कॉफ़ी मँगवाई है।।”

  ” क्या बात है राजा !! आज बड़े खुश लग रहे जो कॉफ़ी पिला रहे हम सब को।”

  चारों मुस्कुराते हुए कॉफ़ी का मज़ा लेने लगे बाहर जिम में गाने की पंक्तियाँ सुनाई दे रही थी।।

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तुम सिखा रहे हो,तुम सिखा रहे हो,जिस्म को हमारे रूहदारियां …….काफिराना सा है ,इश्क़ है या क्या है।।”

क्रमशः

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aparna..

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शादी.कॉम -15

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  “ शाही जोड़ा पहन के आई जो बन ठन के वही तो     
मेरी स्वीटहार्ट है,  शरमाई सी बगल में जो बैठी है दुल्हन के….”

   जिम में  मस्ती के मूड़ में गाना बज रहा था,सभी अपने अपने क्रिया-कलापों में व्यस्त थे,राजा कभी किसी को कुछ बताता,कभी किसी को।।कभी किसी की स्पीड सही करता,कभी किसी के वेट सही करता इधर से उधर चक्कर लगा रहा था,साथ ही घड़ी पर भी नज़र डाल लेता,,आज 9.30 हो चुके थे पर समय की पाबंद बांसुरी अब तक जिम नही पहुंची थी।।
     ऐसा तो वो कभी नही करती थी,इन चार पांच महिनों में राजा इतना तो बन्सी को जान ही गया था, अगर कभी उसे ना आना हो,या कोई काम हो तो वो बाकायदे राजा को मेसेज कर के बता देती थी, पर आज बिना कुछ बोले बताये ही गायब थी।।

   एक एक कर पूरे दो घन्टे बीत गये,पर बांसुरी नही आई।।अब राजा सोच मे पड़ गया,कुछ तो बात है।।

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    वो पूरा दिन सिर्फ सोचने सोचने में ही बीत गया।
जब कभी दोस्ती प्यार में बदल जाती है तब दिल तो मजबूर होता है पर दिमाग कुछ अधिक कार्य करने लगता है,दिमाग का ध्यान सारा समय इसी बात पे रहता है कि दिल की कमजोरी किसी के पकड़ मे ना आ जाये,और इसी अतिरिक्त सतर्कता के कारण जो बात किसी ने सोची भी ना हो सब के सामने आ जाती है।।
    ऐसे किसी भी बात पे चट से बाँसुरी को फ़ोन करके पूछने वाले राजा भैय्या ने उस दिन बार बार चाहते हुए भी बांसुरी को फ़ोन नही लगाया।।

” का हुआ भैय्या जी आज बांसुरीया नही आई।” प्रेम के पूछते ही राजा भड़क गया

” अबे हमे का पता बे,तुम तो ऐसे पूछ रहे जैसे वो हमे सब बता के ही करती है,,कॉलेज वॉलेज में काम होगा,नई आ पाई,इतना काहे बखेड़ा बना रहे।”

” हमने कहाँ  बखेड़ा बनाया,हम तो पूछ रहे बस।आज तो कॉलेज भी नही गई रही।”

” तो हम का करे,नही गयी तो नही गयी।।तुम हमारा सर काहे खा रहे।।”

” नै भैय्या जी हम बता रहे बस,,आपने कहा ना कॉलेज वॉलेज में काम होगा,इसिलिए बता रहे कॉलेज तो गई ही नही।”

” प्रेम तुम्हें कैसे पता।” प्रिंस को राजा की हालत का कुछ कुछ आभास हो चला था

” अरे हम अपनी वाली के चक्कर में जाते तो हैं ही ना,तो आज वहीं कॉलेज में निरमा अकेली ही दिखी हमे,,बांसुरी कॉलेज गयी होती तो दोनो जनी साथ ही होतीं ।”

भैय्या जी ने सामने तो बिल्कुल यही दिखाया की उन्हें कोई विशेष फर्क नही पड़ा इस जानकारी से,पर मन ही मन में उथल पुथल मच गई कि आखिर ऐसा क्या हुआ जो बांसुरी ना ही जिम आयी और ना कॉलेज गई ।।

  इसी उधेड़बुन में वो दिन बीत गया,उसके बाद के दो और दिन बीत गये,पर इन कुल जमा तीन ही दिनों में राजा को ये समझ आ गया कि बांसुरी अब सिर्फ एक दोस्त,एक गाइड या एक जिम स्टूडेंट भर नही है, बल्कि वो उससे कहीं अधिक विशिष्ट स्थान रखती है।।जाने अनजाने राजा को पता ही नही चला कि कब सांवली सलोनी बांसुरी उसके हृदय आसन पर अपने समस्त आयुधों के साथ विराजमान हो गयी।

बहुत कठिनाई से खुद को समझा बुझा कर राजा ने रात मे निश्चित किया कि कल सुबह किसी बहाने से बांसुरी के घर जाना ही पड़ेगा,ऐसा सोचते ही एक सुखद अनुभूति के साथ राजा के चेहरे पे मुस्कान बिखर गयी और वो उसे याद करते करते सो गया।।

  जो काम दोस्ती के समय बहुत आसान होते हैं वही प्रेम का आभास होते ही अति दुष्कर होने लगते हैं ।
 
       जो राजा कभी किसी भी समय बांसुरी को फ़ोन कर लेता था,कभी भी मुहँ उठाये उसके घर पहुंच जाता था,वो आज ना तो उतनी आसानी से फ़ोन कर पा रहा था,और ना ही उसके घर जा पा रहा था।।
प्रिंस जो सदा राजा के साथ छाया सा लगा डोलता था,उसे राजा की अवस्था समझने में बिल्कुल भी देर नही लगी,वो अपनी बुद्धि अनुसार सब सही करने की कोशिश करने लगा।।

” भैय्या जी हमको लगता है बन्सी की तबीयत सही नही है,आपको क्या लगता है??”

” अरे हमे क्या मालूम,हम कोई ज्योतिष हैं जो बिना बताये सब जान ले।”

” नही भैय्या जी हमारे कहने का मतलब था कि एक बार क्यों ना बांसुरी के कॉलेज चल के उससे मिल लिया जाये,क्या है ना हम घर भी जा सकते हैं,पर बंसी की बुआ आपपे कुछ जादा ही फिदा है,इसिलिए हम कह रहे कॉलेज चलने की,हो सकता है थोड़ी बहुत बीमार हो ,जैसे सर्दी वर्दी तो उसमे कॉलेज जा रही हो,पर जिम नही आ रही।।”

” तुम्हें बड़ी चिंता हो रही मुटल्लो की,हैं काहे भई ?”

प्रेम के कटाक्ष पे प्रिंस भड़क उठा _ ” काहे नही होगी बे !! बहन मानते हैं उसको।।इत्ती अच्छी लड़की से बिना मतलब जले भुने बैठे हो, चले भैय्या जी।”

” अब तुम इत्ता जिद कर रहे हो प्रिंस तो चलो !! पर हमें काम बहुत सारा है,चलो कोई बात नही,अब तुम्हे चिंता हो रही तो देख ही आते हैं ।।”

रॉयल एनफील्ड में पीछे बमुश्किल प्रिंस और प्रेम को ऐडजस्ट कर राजा ने राजकीय कॉलेज की तरफ बुलेट भगा दी।।

फेडेड ब्लू डेनिम और सफेद शर्ट पे दोसा कबाना के गॉगल्स चढ़ाये राजा भैय्या ने जब कॉलेज के अन्दर बाईक पे एन्ट्री मारी तो बिल्कुल धूम वाला समा बान्ध दिया,ऐसा लगा जैसे बैकग्राउंड पे गाना बज रहा हो_

       “Dhoom again and run away with me on a roller coaster ride
        dhoom again and see your wildest dreams slowly come alive……dhoom machaale….”

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   लड़कों की आंखों मे जलन थी,तो लड़कियों की आंखों में तारीफ और उत्सुकता कि आखिर इतना हैंडसम बंदा मिलने किससे आया है।।

  प्रेम उस कॉलेज का ना होकर भी कॉलेज के चप्पे चप्पे से वाकिफ था,वो पार्किंग में गाड़ी खड़ी करवा कर भैय्या जी को लिये कैन्टीन में आ गया।।
   निरमा के मामा जी को नाना जी की बीमारी के कारण वापस जाना पड़ा,और निरमा एक बार फिर बांसुरी के साथ कॉलेज आने जाने लगी थी,पर कॉलेज के अलावा कहीं भी निकलने की मनाही के कारण निरमा जिम नही जा पा रही थी।।

  एक तयशुदा समय पर निरमा और बांसुरी कैन्टीन आते थे,पहले कैन्टीन में भकाभक समोसे आलू गुंडे पेलने वाली बांसुरी आजकल सिर्फ वर्जिन मोइतो ( नीम्बू पानी) से काम चला रही थी,आज भी दोनो अपने तय समय पर कैन्टीन को चल दी।।

इन्तजार का फल मीठा होता है,ये राजा को अपने जीवन मे उस दिन पहली बार समझ आया।।पूरे तीन दिन के बाद उसे बांसुरी दिखाई दी थी,दूर से पीले कुर्ते पे गुलाबी दुपट्टा ओढ़े नीचे सर किये चुपचाप आती बांसुरी को देख पहले पहल तो राजा को ज़ोर का गुस्सा आ गया__” कॉलेज आने का समय है,इधर उधर जा सकती हैं मैडम पर जिम आने का समय नही!!! अरे कुछ काम है ना आओ! पर एक फ़ोन करने में भी महारानी जी का हाथ दुख गया।”
पर प्रकट में राजा ने ऐसा कुछ नही कहा,हाँ ध्यान से देखने पर उसे बांसुरी बहुत थकी सी दुखी सी लगी।।

  बांसुरी और निरमा के वहाँ पहुंचते में प्रेम कूद कर निरमा तक पहुंच गया,दोनो आंखों ही आंखों मे मुस्कुरा उठे,उन्हें सादर अपनी सीट तक लाकर निरमा के लिये एक कुर्सी खींच प्रेम उसके बाजू वाली कुर्सी पर बैठ गया,तब जाकर कहीं बांसुरी ने राजा को देखा__” अरे राजा तुम यहाँ कैसे??कॉलेज में कुछ काम था क्या?”

” अरे कहाँ?? भैय्या जी तो तुम्हे ही…..” प्रिंस की बात को आधे मे ही काट कर राजा ने अपनी बात बांसुरी के सामने रख दी।।

” हाँ वो एक लड़के के एडमिशन की बात करने आये थे,तो सोचा तुम्हारा भी हाल चाल ले लें ।कैसी हो बाँसुरी ??”

राजा के “कैसी हो बांसुरी “पे जाने क्यों बांसुरी की आंखें छलक आईं जो राजा के सिवा कोई ना देख सका।।
     जब कोई रोता होता है तब उस समय अगर कोई सांत्वना से भरा हाथ कंधे पर रखे और चुप कराने की कोशिश करे तो आंसू और भी ज्यादा ज़ोर शोर से बहने लगते हैं,वैसे ही जब कोई सबसे बड़ा शुभचिंतक हितैषी ऐसे समय पर हाल पूछे जब वाकई हाल अच्छा ना हो तो दिल का दर्द आंखों के रास्ते बहना लाजिमी है।।बस वही बन्सी के साथ हुआ।।
   पर बांसुरी दिल की कच्ची लड़की नही थी,उसे अपना दुख दुनिया को दिखाना सख्त नापसंद था,इसिलिए उसने निरमा से भी अपने दिल का हाल नही बताया था,पर आज राजा को एकबारगी सब कुछ बताने को वो व्याकुल हो उठी,पर यहाँ कैन्टीन में सबके सामने उसके लिये कुछ भी बोलना बताना बहुत कठिन था,उसने एक पूरी नज़र राजा पे डाली,  राजा ने आंखों से ही बन्सी के मन की बात पढ़ ली,वो समझ गया कि बांसुरी उसे कुछ बताना चाह रही है।।
    
        इतनी देर में एक दूसरे में खोये प्रेम और निरमा अपनी बातों में लगे थे,निरमा अपने घर पर उसके ऊपर हो रहे अत्याचारों को बढ़ा चढ़ा कर प्रेम से बता रही थी,कि कैसे वो जब भी शाम को छत पर प्रेम की एक झलक पाने के लिये चढ़ती है तो पीछे से उसकी अम्मा ठीक उसी वक्त सूखे कपड़े निकालने छत पर पहुंच जाती है,कैसे जब निरमा रेडीयो पर__

    “ आते जाते हँसते गाते सोचा था मैंने मन में कई बार,वो पहली नज़र हल्का सा असर करता है क्यों इस दिल को बेकरार…..” सुनते हुए प्रेम को याद कर कर के मुस्कुराती है तो उसकी अम्मा आ कर रेडियो पे भजन वाला चैनल सेट कर जाती है__

  “ राधे राधे रटो चले आयेंगे बिहारी।।”
 
कैसे जब निरमा खिलती चांदनी में खिड़की पर खड़ी होकर चांद मे अपने प्रेम का चेहरा देख देख शर्माती है तब उसकी अम्मा आ कर खट से खिड़की बन्द कर जाती है, कैसे जब लौकी और तोरी की सब्जियों को देख कर निरमा मुहँ बनाती है तो अम्मा ताना मार जाती है कि ‘ हाँ अब हमरे हाथ का कुछु काहे भाये,जो बना रहे चुपचाप खा लो,जब अपना घर अपनी गिरस्ती होगी तो पका लेना अपने मन का।।”इसी तरह के तानों उलाहनो के बीच जीवन कैसा कठिन हुआ पड़ा है और अब प्रेम ही है जो निरमा के जीवन के बिखरे रंग समेट कर उसके जीवन के कैनवास को एक खूबसुरत तस्वीर मे बदल सकता है।।
  
   ये प्रेमी जोड़ा अपने में लीन, दीन दुनिया से बेखबर था,राजा भैय्या ने ये नोटिस कर लिया ,उन्होनें प्रिंस को पानी की बोतल लाने भेजा और अपनी कुर्सी बांसुरी की तरफ खींच ली।।

” अब बताओ क्या हुआ?? जिम क्यों नही आ रही आजकल??”

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राजा की गहरी आवाज़ और उससे भी गहरी ये बात सुन कर बांसुरी विहल हो गई

” यहाँ नही बता पायेंगे।।”

” फिर कहाँ?? बोलो,, कहीं बाहर मिलना चाहती हो।”

बांसुरी ने आंखें उठा कर राजा को देखा और हाँ मे सर हिला दिया

” कहाँ?? रॉयल पैलेस आ जाओगी अकेले??

बांसुरी ने फिर हाँ में सर हिला दिया।।बांसुरी की चुप्प्पी ने राजा के मन मे हाहाकार मचा दिया,आखिर ऐसी कौन सी गुम चोट खा ली जो इतनी चुपचाप सी हो गई,कहाँ तो बांसुरी को अधिक बोलने पर टोकना पड़ता था और कहाँ आज हाँ भी बोलने के लिये मुहँ नही खोल रही।।
       राजा का मन ऐसे कचोटने लगा कि कुछ भी कर के बांसुरी के दुख को दूर करना ही है,उसे ऐसी गुमसुम नही देख सकता।।प्रिंस के पानी की बोतल लेकर आते ही राजा उठ गया।

” ठीक है फिर हम चलते हैं अभी!! अपना ध्यान रखना बांसुरी ।।”

” अरे जिस काम से आये थे,वो तो कर लो।।एडमिशन ऑफिस उधर है।” बांसुरी ने एक तरफ को इशारा कर दिया,उसकी उंगली की दिशा में देखने के बाद मुस्कुराते हुए राजा ने बांसुरी को देखा_

” हम जिस काम से आये थे,वो हो गया बांसुरी,कल शाम 4 बजे मिलतें हैं फिर,,आ तो जाओगी ना।।”

हाँ मे सर हिला के बांसुरी चुपचाप खड़ी राजा को जाते देखती रही।।

रात में राजा अपने कमरे की खिड़की पे खड़ा बाहर खुले आसमान में चमकते चांद को देख सोच रहा था,हो सकता है बाँसुरी भी इस वक्त अपनी खिड़की पे खड़ी चांद देख रही हो,चलो अच्छा है इसी चांद के बहाने ही सही निगाहें तो मिल रही हैं ।।
   कहीं दूर एक गाना बज रहा था_

    “ सुनो किसी शायर ने ये कहा बहुत खूब ,
      मना करे दुनिया लेकिन मेरे मेहबूब
      ही जाता है जिस पे दिल आना होता है
       हर खुशी से हर गम से बेगाना होता है।
       प्यार दीवाना होता है मस्ताना होता है….”

 
       ******************************

  ” राजा!! उठो, आज बड़ी अबेर कर दी उठने में,ऐसे तो रोज़ भोरे उठ के दौड़ लगाने चले जाते हो आज सात बज गया ,अभी तक सो रहे,तबीयत तो ठीक है ।।” ऐसा कहते हुए राजा के माथे पर उसकी अम्मा ने हाथ रख कर ठेठ हिन्दुसतानी स्टाइल में बेटे का बुखार चेक किया।।

  शरीर का ताप हो तो पकड़ भी आये,मन के ताप का कहाँ निपटारा!!!

   रात बड़ी देर तक जागती आंखों के सपनों में विचरते हुए राजा को सोने में देर हो गई,सुबह सुबह रोज़ का अलार्म बन्द कर वो वापस सो गया,और सोता ही रह गया,वो तो अम्मा की आवाज़ से नींद टूटी,सुबह सुबह अम्मा को अपने कमरे में देख उसके चेहरे पे एक बड़ी सी मुस्कान आ गयी,अम्मा के हाथ से चाय लेकर वो चुपचाप पीने लगा।।

” का हुआ लल्ला? आज बहुते खुस लग रहे,कोई हड़बड़ी भी नही है तुम्हें जिम जाने की।।”

” जायेंगे अम्मा जायेंगे!!! सुबह सुबह तुम्हरे दरसन हुए, तुम चाय लिये सीधा कमरे में चली आयी ,ये सब खुशी का कारण नही हो सकता का??” हँसते हुए राजा पलंग से उतर बाहर निकल गया।।

  जिम में ऑफिस में अपना काम निपटाता राजा मन ही मन खुश था ,आखिर बांसुरी की उदासी का कारण पता चलेगा तो उसे दूर करने का कुछ उपाय भी कर पायेगा।।सुबह से जाने कितनी बार अपने हाथ में बंधी राडो पे समय देख चुका था,पर भई घड़ी चाहे रिको हो टाइटन हो या राडो दिखायेगी तो एक ही समय!!
      दिल ही दिल में एक हल्का सा डर भी था कि जाने क्या बात होगी जो बांसुरी जैसी दुरुस्त दिल लड़की ऐसी गुमसुम हुई पड़ी थी।।
    अपने विचारों में खोया राजा अपना काम निपटा रहा था कि दरवाज़े पे हल्की सी दस्तक हुई__

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” हम अन्दर आ जायें राजा!!”

राजा ने सर उठा के देखा सामने बांसुरी खड़ी थी

” अरे पूछने की क्या ज़रूरत ,,आओ आओ अन्दर आओ,,बैठो ।।”
  बाँसुरी आ कर राजा के सामने बैठ गयी,दोनो ही लोग बात शुरु करने का बहाना ढूँढ रहे थे,आखिर बांसुरी ने ही चुप्पी तोडी__

” राजा तुमसे कुछ कहना चाह रहे थे,कल तुमने पूछा था ना,उसी बारे में …..बस सोच रहे कि कैसे बोलें ।”

” कैसे मतलब? अरे जैसे बोलते हैं बतियाते हैं वैसे ही बताओ,,बात क्या है आखिर?? तुम इतनी उदास चुपचाप सी क्यों हो?”

” राजा तुम्हें भास्कर सर के बारे में बताया था ना? हमारे गणित के लेक्चरर!!जिन्हें हम पसंद करते थे।”

” हाँ हाँ!! क्या हुआ उन्हें ” राजा का दिल ज़ोर से धड़कने लगा

” उन्हें कुछ नही हुआ,,बिल्कुल ठीक हैं वो”

” फिर?”

” कैसे बतायेँ राजा!! वो भास्कर सर हैं  ना,वो असल में शादीशुदा निकले!!” ये बोलते ही बांसुरी का चेहरा मुरझा गया उसकी आँख से दो बूंद आंसू लुढ़क कर उसके गालों तक चले आये।।और राजा के दिल में सरगम बजने लगी।।

    “अपने आप को सम्भालो बांसुरी!! हमे तो नाम सुन कर ही ये लड़का तुम्हारे लिये ठीक नही लगा था,अब ऐसा भी क्या बन सँवर के कॉलेज आना कि मासूम नादान लडकियों को यही ना समझ आये कि सामने वाला शादीशुदा है,,ये तो सख्त बदतमीजी है नामुराद की।”

‘” अरे तो लड़कों का समझ भी कैसे आयेगा,वो ना तो सिन्दूर लगाते ना मंगलसूत्र पहनते।”

” तो क्या हुआ,पर चेहरा लटका हुआ तो रहता है ,घर से बीवी की डांट खा के जो निकलते हैं,,खैर वो सब छोड़ो,तुम खुद पे ध्यान दो ,इतनी अच्छी हो तुम्हे सच बहुत अच्छा लड़का मिलेगा।।” बांसुरी को समझाने के साथ ही राजा ने सामने लगे आदमकद आईने में खुद को देखा और मुस्कुरा दिया,,उसके मन में जलतरंग बज उठी।।
     
   
            “आ मैं तेरी याद में सबको भुला दूँ
    दुनिया को तेरी तसवीर बना दूँ
            मेरा बस चले तो दिल चीर के दिखा दूँ
    दौड़ रहा है साथ लहू के प्यार तेरा नस-नस में
ना कुछ तेरे बस में जूली ना कुछ मेरे बस में
      दिल क्या करे जब किसी को किसी से प्यार हो जाये।।”
 
  उसी समय दरवाजा खोल कर दो कप चाय लिये प्रिंस भीतर आया ,,अन्दर आते ही उसे आभास हुआ की जिम में  ‘ दिल क्या करे बज रहा है’ वो चाय रख वापस मुड़ गया_
         ” भैय्या जी अभी गाना बदल देतें हैं ।”

  ” काहे बे,,काहे बदलोगे गाना,इत्ता सुरीला गाना बदल दोगे,ससुरे तुम भी एक नम्बर के बकलोल हो।

  प्रिंस को कुछ समझ नही आया,वो अपना सर झटकता बाहर चला गया,राजा बाँसुरी की तरफ घूम गया,वो अभी भी गुमसुम सी थी,पर राजा की खुशी संभाले नही संभल रही थी,उसने अपने मन के भावों को मन तक ही सीमित रख अपनी ज़बान को भरसक उदास करते हुए बांसुरी को सांत्वना देना शुरु किया।।

” अरे तो का हुआ बांसुरी,शादीशुदा हैं तो इसमें कौन बड़ी बात हो गयी ।”

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” अच्छा तो ये तुमको बड़ी बात नही लग रही???” अरे बुद्धू राम ! अब जब उनकी अपनी घरवाली है तो वो हमे काहे देखेंगे,चाहे हम कितनी भी सज धज मचा लें, उन्हीं के लिये दुबली होना चाहते थे,इसिलिए जिस दिन पता चला उसी दिन से जिम आना बन्द कर दिये,पर ….”

” पर क्या बांसुरी??”

” पर ये कि अब हमको भी तुम्हारे जिम की थोड़ी थोड़ी आदत सी लग गयी है,,अब दो तीन दिन वर्क आउट नही करते हैं तो अच्छा नही लगता,,कल कॉलेज में तुमसे मिल कर घर लौटने के बाद हम सोचते रहे और फिर ये फैसला किया कि हम तुम्हारा जिम नही छोडेंगे।।”

” वाह बहुत ही अच्छा सोची,पर ये बताओ कि जिम नही छोड़ोगी या भैय्या जी का जिम नही छोड़ोगी?

प्रिंस के सवाल पर बांसुरी ने घूर के प्रिंस को देखा और __” ना तुम्हारे भैय्या जी को छोडूंगी ना उनका जिम ।।अब तो जब तक राजा लॉ पास कर के लॉयर ना बन जाये मैं ये जिम नही छोडून्गी।।

” ये हुई ना बात” प्रिंस की तालियों से ऑफिस गूँज गया।।।

राजा भैय्या के मन की खुशी पूरे उत्साह से उनके चेहरे को अबीरी कर गई ।।

” तो बाँसुरी फिर शाम का क्या प्लान है??”

” शाम का प्लान?? वही है 4 से 5 तुम्हें पढायेंगे,और क्या??”

” अरे नही!! हम तो होटल में मिलने के बारे में पूछ रहे थे।”

” अब यहीं तो सब कुछ बता दिये,अब क्या ज़रूरत होटल में मिल के पैसे उड़ाने की,अब तुम्हारे एग्ज़ाम को भी समय कम बचा है,,पढ़ाई पे पूरा पूरा ध्यान देना है,समझे!! ये घुमाई फिराई थोड़ा बन्द करो अब।।जब देखो तब फटफटी में उड़ते फिरते हो।।”

राजा  नीचे सर किये हाँ में सर हिलाता मुस्कुराता रहा,दोनो ने अपनी अपनी चाय उठाई और मुस्कुराते हुए पीने लगे।।

बाहर जिम में नया ट्रैक बज रहा था__

   “ शुद्ध देसी देसी देसी रोमांस …..हाय रे!!
      हाय रे क्रेज़ी क्रेज़ी क्रेज़ी रोमांस …..

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क्रमशः

aparna..

शादी.कॉम-14

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       फेरे पड़ गये,,भान्वर हो गई….वर वधु ने पण्डित जी का आशीर्वाद लिया और अपने गृहस्थ जीवन के शुरुवाती सोपान पर कदम रख दिया।।

     ब्याह निपटने के बाद मन्दिर से नीचे उतर के सभी विमर्श में जुटे कि अब आगे क्या किया जाये।।
  लड़कों का कहना था कि लल्लन के घर जाया जाये,परन्तु अब तक अँग्रेजो के खिलाफ लड़ने वाले क्रान्तिकारियों सी धमक दिखाने वाला लल्लन अब एकदम ही सहमी भीगी बिल्ली बना बैठा था,अब रह रह के उसको गुस्से में चीखते हाँफते अपने बाऊजी और रोती मिमियाती अपनी माँ का करुण चेहरा दिख रहा था,उसकी घर जाने की बिल्कुल हिम्मत नही हो रही थी,उसने प्रस्ताव रखा __

” हम सोच रहे लखनऊ निकल जाते हैं,दो दिन बाद वैसे भी हमारी जॉईनिन्ग है,अम्मा को कह देंगे प्रिंस के साथ कमरा खोजने और बाकी काम निपटाने आये हैं,और अब जॉईनिंग के बाद ही वापस आयेंगे।”

” और बाद में का कहोगे लल्लन?”

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” बाद में कह देंगे काम बहुते जादा है अम्मा,कुछ समय बाद ही घर आ पाएँगे।।”

” कानपुर लखनऊ में दूरी ही कित्ता है,जैसे मथुरा की लड़की वृंदावन ब्याही,बस वैसा ही।।।तुम नही गये तो तुम्हारी अम्मा आ जायेगी तो,तब का करोगे??”

प्रिंस के इस विचारणीय प्रश्न पर सभी सोच में पड़ गये।।

” हमें तो लगता है,लल्लन और रेखा तुम लोग पहले जाओ राजा के घर ,वहाँ सब का आशीर्वाद लो और वहाँ से युवराज भैय्या को साथ लेकर लल्लन के घर जाना,,बड़े भैय्या को सभी मानते हैं,वो जायेंगे तो लल्लन के घर भी कोई परेशानी नही होगी,क्यों ठीक बोले ना राजा।।”

बांसुरी के इस आइडिया पर राजा ने भी हामी भर दी

” ई पनौती फिर बोली,,ई जब जब अपना आइडिया देती है तब तब कोनो का बंटाधार होता है,लिखवा लो हमसे प्रिंस।” प्रेम फुसफुसाया

” अबकी ना होगा,,सही बोल रई बांसुरी!! लल्लन राजा भईया के साथ निकल लो गुरू,अब जादा सोच बिचार में ना पड़ो ।।”

बहुत सारी हिम्मत जुटा के लल्लन रेखा के साथ राजा के घर को निकला,राजा ने बांसुरी को भी साथ ले लिया,प्रिंस और प्रेम पीछे अपनी फटफटी फटफटाते चले आये।।

घर पे पहले ही रूपा के बाऊजी पधारे हुए थे,उनकी अगुआनी में रूपा ऊपर नीचे हो रही थी,तभी दरवाजा खोल के राजा अन्दर आया,आते ही दुबारा उसने भाभी के पिता को चरण स्पर्श किया,और एक कोने में खड़ा हो गया।।

” काहे लल्ला जी,रेखा कहाँ रह गई,आई नई आपके साथ।” रूपा की बात खत्म होते होते बन्सी भी अन्दर आ कर खड़ी हो गई

” अरे इसे ही तो सजाने गई रही,ये यहाँ खड़ी है तो रेखा कहाँ है भई ।।”

रूपा की पृश्नवाचक निगाहों को बांसुरी ने दरवाजे की तरफ घुमवा दिया,दरवाजे से बहुत धीमे से रेखा और उसके पीछे लल्लन आकर अन्दर खड़े हो गये।।

   कई सारे टी वी सीरियल और फिल्मों में नायक नायिका के भाग के शादी करने वाले सीन देख चुकी रुपा ने जब रेखा को फूलों की लम्बी वरमाला पहने और माथे पे पीला सिन्दूर लगाये देखा तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई।।।आज तक अपनी सास के सामने अपने खानदानी होने और संस्कारी होने की बड़ी बड़ी डीँगे हाँकने वाली रूपा का मुहँ रुआंसा हो गया।।

” रेखा!!!” बस इतना बोल कर अपने सर को पकड़े रूपा धम्म से नीचे गिर पड़ी,हालांकि इस गिरने में बराबर चोट ना लगे इस बात का ध्यान रखा गया, सोफे पर पसरने के बाद रूपा ने आंखे पलट दी,, आसपास के सभी लोग दौड़ पड़े,राजा की दादी जिनका दीवान खाने में एक ओर पर्मानेंट अड्डा था, घबरा कर चीखी__ ” अरे दांत ना जुड़ जई,देखो रे “

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  राजा की अम्मा और शन्नो मौसी पानी की कटोरी लिये दौडे ,जल्दी जल्दी रूपा की तीमारदारी मे लगी, घर की मुहँ लगी नौकरानी अपने राग मे थी __ ” अम्मा जी जूता सूंघा दौ,अब्भी उठ बैठेगी बहुरिया।”

” अरे मुह्नजली!! इन्ने मिर्गी ना आई है जो जूतो सूंघाने बोल रई,चकरा गई है तनिक, अभी पानी का छींटा से ठीक हो जायेगी।”

बेहोश पड़ी रूपा के कानों में जब जूता सून्घाने की बात पड़ी तो वो घबरा के थोड़ा कसमसाई पर दादी की बात कान में पड़ते ही उसे संतोष हुआ कि जूता नही सुन्घाया जायेगा,और वो फिर चित पड़ी रही।

इधर रूपा के पिता का बी पी रेखा के नये नवेले दूल्हे को देख बढ़ ही रहा था कि रूपा अचानक चक्कर खा गई,वो बेचारे जब तक कुछ समझ पाते ,समधन अपनी पायल चूड़ी बजाती दौड़ी चली आई और वो बेचारे रिश्ते के सम्मान के मारे एक किनारे खड़े रह गये,उतनी ही देर में घर के बड़े लड़के युवराज का पदार्पण हुआ।।
    अपने कमरे में आये दिन रूपा की ऐसी नौटंकी से परिचित युवराज ने आगे बढ़ कर रूपा की नब्ज थाम ली __
      ” अरे नब्ज तो बड़ी धीमी हो गई है,राजा वो क्या नाम है तुम्हारी डॉक्टर सहेली का?? हाँ रानी,ज़रा फ़ोन घुमाओ उसे,कहना बड़ा वाला विटामिन का इन्जेक्शन लेती आये,,इन्हें सुई ही लगवानी पड़ेगी।”

राजा को बड़े भैय्या की बात समझ नही आई,वो तुरंत अपनी जीन्स से मोबाइल निकालने लगा, उसका हाथ पकड़ बन्सी ने इशारे से उसे फोन करने से मना कर दिया,अपने पति की सुई वाली बात सुन रूपा को भी होश आने लगा,उसने धीरे से अपनी आंखें खोल दी__” कहाँ हैं हम?” हमेशा फिल्मों में होश मे आने के बाद नायिका द्वारा बोला जाने वाला पहला डायलॉग बोल कर आंखे फाड़ रूपा युवराज को देखने लगी,तभी उसे रेखा और लल्लन याद आ गये,और वो अपने पूरे फेफड़े फाड़ के दम लगा के चिल्ला के रो पड़ी ।।

  पूरे घर मे हाहाकार मच गया,ये ऐसा समय था जब लल्लन को अपने किये पे दिल से अफसोस होने लगा,उसे वहाँ से निकल भागने की राह नही सूझ रही  थी,जो महिला जैसे सुना सकती थी,वैसे सुना रही थी,चाहे राजा की दादी हो या रूपा,यहां तक की शन्नो मौसी को भी मौका मिल गया था,वो भी पानी  पी पीकर आज के नौ जवान छोकरे छोकरियों की विवाह प्रगती पे अपने विचार प्रकट कर रही थी,

” एक हमारा समय था,शकल सूरत तक ना देखी शादी होने तक,और एक आजकल के लड़के लड़कियाँ हैं,हद बद्तमीज़ी है।।”

” ठीके रहा तुम्हरे समय सकल ना देखे बनी ,नही तुम्हे कौन ब्याह  ले जाता सन्नो??” राजा की दादी के कथन पर शन्नो मौसी का पारा और चढ़ गया,सब नाराज थे,पर एक कोई ऐसी भी थी वहाँ जिसके मन में लड्डू फूट रहे थे!!!

   राजा की अम्मा थी जो बार बार रूपा को ना रोने और जो हुआ उससे समझौता करने की सीख दे रही थी,आखिर थक कर वो वहाँ से उठी और चुपके से अन्दर खिसक गई,दस मिनट बाद एक हाथ में पूजा की थाली और दूसरे हाथ में मिठाई का थाल उठाये राजा की अम्मा वापस आयी।।बांसुरी ने आगे बढ़कर उनके हाथ से एक थाल ले लिया।।
   रेखा रूपा के पैरों के पास उसे मनाने मे लगी थी,युवराज और राजा वकील बाबु को समझा रहे थे, दादी और शन्नो मौसी अपने राग दरबारी मे व्यस्त थे, वहीं प्रिंस और प्रेम में से एक दादी का तो एक मौसी का पक्ष ले आग मे घी डालने का काम कर रहे थे, इस पूरे सीन से विलग लल्लन एक किनारे खड़े खड़े अपने घर पे मिलने वाले सत्कार के बारे मे सोच सोच परेशान हुआ जा रहा था,,,उसे आज तक का अपना पूरा जीवन अपने सामने रील सा चलता दिख रहा था, बचपन में माँ को सताना,बाऊजी का मार मार के गिनती पहाड़ा रट्वाना,बड़े भईया की जेब से चुराये पैसों से पहली सिगरेट खरीद कर पीना,हर राखी पे दीदी के लिये कैसे भी कर के गिफ्ट खरीदना,इत्ती सारी खुशनुमा यादों को उसने खुद अपने हाथों कुएं में बहा दिया था,एकाएक उसे अपना निर्णय जल्दबाजी में किया गया फैसला लगने लगा था, पर अब समय उसके हाथ से रेत सा फिसल चुका था,वो अभी अपनी उधेड़बुन मे था कि राजा की अम्मा पूजा की थाली लिये आई ।।
     बाँसुरी ने आगे बढ़ दीवार से लग कर खड़े लल्लन को हाथ पकड़ कर आगे खींच लिया और रेखा के बाजू में बिठा दिया,अम्मा ने आगे बढ कर नवयुगल का तिलक किया और आरती उतारी,मुहँ मीठा करा दिया।।

    गुस्से मे बडबड करती रूपा रोती धोती अपने कमरे में चली गई,,युवराज ने लल्लन को बैठा कर उसके घर परिवार नौकरी चाकरी का हिसाब लेना शुरु किया,पढ़ाई लिखाई बताने के बाद जैसे ही लल्लन ने अपनी ताजा ताजा लगी सरकारी नौकरी का जिक्र किया,वहाँ उपस्थित सभी के चेहरों पर अलग अलग तरह की प्रतिक्रिया दिखने लगी,औरतों की खुसफुसाहत कुछ और मुखर हुई,वकील बाबु के चेहरे पर भी सन्तोष की झलक आ ही रही थी कि राजा के बाऊजी भी पिछले दालान से निकल बाहर आये,और आते ही उन्होनें अपना सबसे प्रिय सवाल छेड़ दिया__

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       ” किसके लड़के हो वैसे तुम,हमार मतलब कौन जात हो??”

   ” इरिगेशन में हमारे बाऊजी आफीसर है,बाबुलाल सूर्यवंशी।।”

लल्लन का ये वाक्य वकील बाबू के सीने मे घूंसे के समान लगा,उस समय उन्हें ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे किसी ने हाथ अन्दर डाल उनके फेफडों को जोर से मसल दिया हो,ऐसी प्राणान्तक पीड़ा मिली वो भी समधि के घर जहां ना वो खुल कर बोल पा रहे थे,और ना चिल्ला पा रहे थे।।आज तक वकील बाबू के लिये उनकी वकालत सबसे ऊपर थी,पर अदृश्य और अपरोक्ष रूप से उनकी वकालत के उपर था उनका ‘ ब्राम्हणत्व ‘।
     उन्हें सदा ही लगता आया था कि वो स्वयं ब्रम्हा की संतान हैं,इसीसे और कोई माने ना माने उन्होनें खुद को समाज में सबसे ऊपर स्थापित कर रखा था, उनके अनुसार उनके नीचे आने वाली हर जाति के लिये विभिन्न कार्य बनाये गये थे,और वो बने थे सबसे ऊपर बैठ कर सबके कार्यों का निर्धारण करने के लिये।।
      हालांकि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उनकी सोच और उनका स्थान बिल्कुल उलट हो चुका था,पर इसके बावजूद वो तन मन से इस नई व्यवस्था के खिलाफ थे,वो खिलाफ थे अन्तर्जातीय विवाह के।।उन्होनें अपने बच्चों के मन की मिट्टी को  भी सदा से जाति पाति के जटिल खाद और पानी से ही सींचा था,पर जाने कैसे ये कुलबोरनी अपने सारे संस्कार गंगा जी में बहाये आयी।अभी उनके हाथ में दुनाली होती तो ये नये नवेले जोड़े को सीधा परलोक पहुंचा देते पर एक तो समधि का घर दुजा वो मन ही मन युवराज का भी थोड़ा अधिक ही लिहाज करते थे,उनकी नज़र में उनकी जिंदगी भर की असली कमाई उनका दामाद युवराज ही था,लड़के तो शादी के बाद अपनी अपनी घर गिरस्ती में लीन थे,बस यही एक हीरा था जिसकी चमक से उन्होनें अपने तन मन को रोशन कर रखा था।।

   अपनी मर्मांतक पीड़ा को दबाते हुए उन्होनें बड़े कष्ट से युवराज को अपने पास बुलाया और तुरंत घर निकलने की इच्छा जाहिर की।।
      अपने श्वसुर के कट्टर स्वभाव से परिचित युवराज ने उनकी मंशा जानते ही राजा को गाड़ी निकालने का आदेश दिया और बैठ कर उन्हें सरकारी नौकरी के फायदे गिनाने लगा।।पर पल पल बदलते ससुर के चेहरे के रंगों का कुछ असाधारण होना युवराज को खटक रहा था कि वकील बाबू ने अपना सीना अपने हाथों सा पकड़ लिया__” क्या हुआ बाऊजी,कुछ तकलीफ है क्या??”

” हाँ,,कुंवर जी,लग रहा जैसे कोई कलेजा मरोडे दे रहा।।”
    बोलते बोलते ही वकील बाबू दर्द से कुम्हला कर एक ओर को झटक गये।

   युवराज और राजा ने आनन फानन उन्हें उठाया और बाहर गाड़ी में डाल तुरंत अस्पताल को दौड़ चले।। रूपा ने जैसे ही सुना की उसके बाऊजी को अस्पताल ले जाना पड़ा वो और हाथ नचा नचा के रेखा को सुनाने लगी_

  ” और कर लो लब मैरिज,अब पड़ गई कलेजे को ठंडक!! इत्ते में मत रुकना,बाऊजी को मार के ही दम लेना तुम,,कहे दे रहे रेखा ,आज के बाद हमे अपनी सकल ना दिखाना ,समझी।”

बहुत देर से चुप चाप खड़ी रेखा के लिये भी अब सब कुछ असहनीय हो गया,आखिर वो भी बिफर पड़ी

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” अरे शादी ही तो किये हैं,अपनी मर्ज़ी से कर लिये तो इतनी हाय तौबा काहे मचा रहे सब,और सुन लो दीदी बाऊजी भी अच्छे हो जायेंगे,तुम्हे ज्यादा चिंता करने की ज़रूरत नही है।” रेखा वहाँ से लल्लन का हाथ पकड़े बाहर निकली ही थी कि रूपा ने उसे रोक दिया__” कोई ज़रूरत नही तुम्हे अस्पताल जाने की।

” अरे अभी बखत नही है तुम दोनो का बिल्ली बन लड़ने का ,जल्दी अस्पताल चलो!! देखें वहाँ बकील बाबू को हुआ का है,भोले भंडारी रक्षा करे उनकी, समधन को भी खबर करना होगा।।”
  सबके सब बाहर निकले,प्रिंस और प्रेम अपनी बाईक में पहले ही राजा भईया की गाड़ी के पीछे निकल चुके थे,राजा के बाऊजी राजा लोगों के साथ निकल चुके थे,,अब बची थी घर की औरतें,बाँसुरी और लल्लन …..और बाहर खड़ी थी राजा की एस यू वी।।रेखा ने लल्लन को देखा __” हमें चलानी नही आती रेखा,हम बस आज तक वैगनार चलायें हैं,हम रोड पे एस यू वी नही उतार पायेंगे।”

  अभी लल्लन अपनी गाड़ी चलाने की योग्यता बता ही रहा था कि बांसुरी गाड़ी स्टार्ट कर गियर में डाल हॉर्न देने लगी,,

” चला तो लोगी ना,,बोज तो ना दोगी कहीं नाले वाले में ”  रूपा के सवाल पर बांसुरी ने मुस्कुरा कर नही में सर हिला दिया __” राजा सिखाये हैं हमें गाड़ी चलाना,बहुत सेफ ड्राइव करते हैं हम,,आप सब लोग  निश्चिंत होकर बैठिए।।

  सभी को लिये बांसुरी जब तक अस्पताल पहुंची तब तक वकील बाबू को इमरजेन्सी में भर्ती कर लिया गया था,कॉरिडोर में ही युवराज और राजा मिल गये,अभी सब मिल कर विचार विमर्श कर ही रहे थे कि डॉक्टर ने बाहर आकर एक परचा राजा को थमाया,और सारी दवाइयां जल्दी से जल्दी लाने की ताकीद की।।
   राजा के फोन पर रानी भी वहाँ पहुंच चुकी थी, वो भी अन्दर डॉक्टरों की टीम के साथ लगी हुई थी।।
  डॉक्टर और नर्सों की टीम भाग भाग कर अपने काम को अंजाम देने में लगी थी,लगभग दो ढाई घन्टे की मशक्कत के बाद एक सीनियर डॉक्टर बाहर आये __
         ” मरीज के साथ कौन है”  युवराज के आगे बढ़ते ही उन्होनें वकील बाबू के कमजोर हृदय का लेखा जोखा युवराज को थमा दिया

   ” देखिए इन्हें अटैक आया है,अभी तो हमने इमरजेन्सी दवाईयां दे दी हैं,पर आप लोग इनका एन्जियोग्राफ करवा लिजिये,जिससे ब्लॉकेज का परसेंटेज पता चल सके, अभी 4 दिन अस्पताल में ही रहना होगा,उसके बाद आप इन्हे लखनऊ मेडीकल कॉलेज ले जा सकते हैं ।”

इतना सुनते ही रूपा का पूर्वाभ्यासित रोने का कार्यक्रम शुरु हो गया,युवराज के बार बार समझाने पर भी उसने अपने राग तार सप्तक में ही छेड़े हुए थे, तभी वहाँ रानी आई__” अरे भाभी आप इतना परेशान मत होईये।।अभी अंकल ठीक है,आराम है उन्हें ।।लेकिन आगे चलकर कहीं वापस दुबारा अटैक आ गया तो बड़ी मुसीबत होगी इसिलिए डॉक्टर कह रहे कि एन्जियोग्राफी करवा लिजिये,उसमें अगर ज्यादा ब्लॉकेज आता है,तो आप एंजियोप्लास्टी करवा लीजियेगा,उसके बाद अंकल बिल्कुल स्वस्थ और सुरक्षित रहेंगे।।”

” ये सब का कारन ई कलमुही है,ना ये ऐसा भाग भगा के सादी करती ,और ना बाऊजी को हार्ट अटैक आता।”

” ऐसा नही होता भाभी,अंकल को शुरु से ब्लॉकेज रहा होगा,जो आज वेन्स को चोक कर गया और अटैक आ गया,आप बेवजह किसी को ब्लेम ना करें।”

” काहे ना करें,हमार बहिनी है,तुम्हारे पेट में काहे दरद हो रहा,ए लल्ला जी समझाओ अपनी डाक्टर्नी को,जादा चपर चपर ना करे,हम भी सब समझते हैं।।
बड़ी आई हमे समझाने वाली।”

कुछ ही देर में रूपा की माँ और भाई भी दौड़ा चला आया,अपनी माँ को देखते ही रूपा ने फिर एक बार रूदाली रूप धर लिया और आंखे और हाथ नचा नचा के रेखा के सर मत्थे सारा ठीकरा फोड़ दिया।।
  पर रूपा की माँ रूपा सी गंवार ना थी,समय की नज़ाकत को भांपते हुए उसने रूपा को समझा बुझा के शांत  कराया और रेखा के पास जाकर उसे अपने सीने से लगा लिया।।
    दुख की इस घड़ी मे,ऐसी अपार विपदा में जहां पति जीवन मृत्यु के बीच पीन्गे भर रहा था,बेटी का जात से बाहर जाकर शादी करना माताजी को कमतर दुखी कर पाया।।और शायद इसिलिए अपने दुख को दूर करने उन्होनें आगे बढ कर बच्चों को माफ कर दिया।।

  औरत ही औरत की पीड़ा समझती है,राजा की अम्मा ने आगे बढ़ कर समधन को गले से लगा लिया,दोनो औरतें साथ बैठी घंटों टन्सुये बहाती रहीं, अंत में रो धो कर फुर्सत पाई तो पति से मिलने की इच्छा जाहिर की,जिसे उस वक्त डॉक्टरों ने ठुकरा दिया।।

    शाम चार पांच बजे तक में मरीज की हालत स्थिर हुई,और सभी को उनके कक्ष में उनसे मिलने की इजाज़त मिल गई।।

   इतनी देर में राजा ने फ़ोन पे लल्लन के बड़े भाई को सारी जानकारी दे दी थी,राजा के फोन के बाद घर पे सोच विचार कर लल्लन का भाई,उसके बाबूजी और अम्मा भी अस्पताल चले आये।।
    आते ही लल्लन की अम्मा ने राजा की अम्मा से दुआ सलाम की और रेखा की अम्मा से मरीज का हाल पानी जानने लगी,वहीं लल्लन के पिता और भाई भी युवराज और बाकी पुरूषों से बाकी का हाल समाचार लेने लगे।।लल्लन को अपने पिता और भाई का तो उतना डर नही था जितना उसे अपनी अम्मा का डर सता रहा था,उसने आगे बढ़ कर पहले बाऊजी,भैय्या और फिर अम्मा के पैर छू लिये।।
   बाऊजी ने उसके सर पर हाथ फेरा तो लल्लन की आंखों की कोर भीग गई पर अम्मा ने आशीर्वाद की जगह दुसरी ओर मुहँ फेर लिया,और तो किसी को कुछ समझा नही पर कोखजाये ने अपनी जननी का दर्द उसकी पीड़ा समझ ली,पर अब क्या हो सकता था?? चुपचाप उठ कर लल्लन ने इशारे से रेखा को भी पैर छूने को कहा और एक तरफ खड़ा हो गया, रेखा ऐसी बातों को समझ कर भी कई बार नासमझ बन जाती थी,बांसुरी ने रेखा से मुहँ खोल कर कहा

” अपने सास ससुर की चरण धूलि तो ले लो रेखा, बड़ों का आशीर्वाद तुम्हारे भविष्य  को सफल बनाएगा,,चिंता ना करो सब ठीक हो जायेगा।।”

शाम ढलते ढलते सभी के चेहरों से चिंता की लकीरें भी छंट गई,रो के हँस के जैसे भी हो पर लल्लन और रेखा के विवाह को आखिर दोनो परिवारों की सहमती मिल ही गई।।
    वकील बाबू को भी हृदय मे उठी मर्मांतक पीड़ा  में जीवनरक्षक औषधियों ने ऐसा चमत्कार किया कि  अपने कष्ट से मुक्ति पाने के बाद वो यथासम्भव विनम्र होते चले गये,उन्होनें अपने मन की भावनाओं को समेट कर अपने नये जमाता को गले से लगा लिया।।

     वैसे भी मृत्यु के मुख से लौटे इन्सान को अपना जीवन और अधिक मूल्यवान लगने लगता है,वैसा ही कुछ वकील बाबू के साथ हुआ,और उन्होने हृदय से सबकी गलतियों को क्षमा कर दिया ।।

    रात मे अस्पताल में रूपा का भाई रुका,माँ को समझा बुझा कर रूपा अपने साथ ले गई,,शादी ऐसी जल्दी मे हुई परन्तु विदाई बिना परछन कैसे कर दे,ऐसा बोल रेखा को भी उसकी माँ अपने साथ ले गई,इधर लल्लन को उसके दोस्त बिना गाजे बाजे ही बाराती बने,, राजा भैय्या की गाड़ी में हँसी ठिठोली करते बिना दुल्हन ही उसके घर पहुँचा आये।।
    प्रेम प्रिंस और राजा भैय्या के साथ जैसे ही लल्लन अपने घर की चौखट लान्घने जा रहा था कि उसकी अम्मा की आवाज़ ने उसे वहीं रोक दिया, वो जल भरा कलश और आरती की थाल लिये चौखट पे आई,और पानी भरे कलसे को सात बार लल्लन के चारों ओर घुमा कर,बाहर निकल उस पानी को बहा आई__
       ” सादी बिना पूछे कर आये तो अब का हर जगह मनमानी चलेगी तुम्हारी,,अरे हल्दी नई चढ़ी तो का भवा,दूल्हा तो बनी गये,अब नैके दूल्हा का नज़र उतारे बिना,उसकी आरती उतारे बिना अन्दर कैसे ले लें,बोलो।।”

    नज़र उतार ,आरती कर,अम्मा ने लल्लन के मुहँ मे शगुन का गुड़ डाला और उसे अपने आंचल तले ढांप के घर के मन्दिर में ले चली।।
    कुल देवी के आगे प्रणाम कर लल्लन ने अपनी अम्मा के पांव छुए और अम्मा के आंसू लल्लन के चेहरे को भिगोते चले गये__” एक बार पूछने की ज़रूरत भी ना समझी लल्ला,आज तक किस बात के लिये रोका तुझे जो आज रोक लेती।।”

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” गलती हो गई अम्मा!! माफ कर दे।।” लल्लन अपनी अम्मा के गले से लगा रो पड़ा,,माँ बेटे के इस पावन मिलन के बीच घर के किसी सदस्य ने आने की जुर्रत नही की,राजा इसी बीच जाकर अपनी गाड़ी में बैठा प्रिंस और प्रेम का रास्ता देख रहा था,कि  बांसुरी का मेसेज आ गया ” वहाँ लल्लन के घर पे सब ठीक है ना??” जवाब में राजा ने भी लिख दिया _” हाँ सब ठीक!!”

  ” क्या भाई,चाय पीकर ही टरोगे तुम दोनो??” लल्लन की दीदी के सवाल पर प्रिंस हड़बड़ा गया

” नहीं दीदी!! बस जाते हैं हम दोनो।।” दोनो बाहर को भागे,देखा राजा भैय्या ड्राइविंग सीट पर अपना मोबाइल पकड़े मुस्कुरा रहें हैं ।।

” का बात है भैय्या जी,बड़ा मुस्कुरा रहे हैं,किसका मेसेज आ गया ??”

” अबे किसी का नही बे!! जल्दी चलो ,,घर जाये कुछु खाये पिये,,आज तो लल्लन की शादी के चक्कर में पानी तक नसीब नही हुआ,फिर भाभी के बाऊजी की तबीयत बिगड़ गई,,अब तो पेट मे चूहे रेस लगा रहे हैं,अम्म्मा जाते जाते इशारा कर गई थी कि आज हमारी पसंद की प्याज की कचौड़ी बना रही हैं,तो चलो जल्दी से चले और खाये पियें।”

” चलिये भैय्या जी फिर भगा लिजिये गाड़ी,किसका इन्तजार है।।”

तीनों साथ बैठे राजा के घर को निकल चले।।

क्रमशः

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aparna..

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शादी.कॉम-13

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   रूपा की बहन रेखा को आये पूरे दो दिन बीत गये, अपनी बड़ी बहन की चाक चौबंद चौकीदारी में रेखा दुबारा राजा की जिम का रुख नही कर पाई।।
    मिलने की आस जगा कर भी जब रेखा मिलने नही आई तो लल्लन की बेचैनी घड़ी की हर टिक टिक के साथ बढ़ती चली गई,अब तो राजा प्रिंस और प्रेम सभी को उसके बारे में पता था,सभी उसके लटके हुए चेहरे का कारण जानते थे,इसलिये उसे उस समय किसी ने नही छेड़ा ।।
    राजा ने घर जाते समय उसे साथ चलने की पेशकश भी की जिसे ठुकरा कर सबसे अंत मे जिम का ताला लगा कर बेचारा अपने घर को चल दिया।।
    लल्लन को नही पता था कि घर पे एक सरप्राइज़ उसका इन्तजार कर रहा था।।
लल्लन के पिता और भाई की अफसरी ने उसके घर को एक अलग अदब और शिष्टाचार में रंग दिया था, घर पे सभी के लिये पढ़ना लिखना सांस लेने जितना महत्वपूर्ण था,इसिलिए लल्लन भले ही राजा की चंडाल चौकड़ी का हिस्सा था पर उन के साथ घूमते फिरते भी उसने अपनी पढ़ाई का हरजा नही होने दिया था,,वो दिल्ली भी किसी सरकारी नौकरी के सिलसिले में ही गया था।।
      थके हुए तन और बुझे हुए मन से जब लल्लन ने घर में प्रवेश किया,तो लगा  जैसे सभी उसी का इन्तजार कर रहे थे।।उसके घर मे घुसते ही आगे बढ़कर उसकी दीदी ने उसके मुहँ में कलाकन्द ठूंस दिया,,बेचारा इस हमले के लिये तैयार नही था,इतने बड़े टुकड़े को जब तक गालों के दोनों तरफ सेट करता तब तक माँ हाथ में गुलाब जामुन की कटोरी लिये खड़ी हो गई ।।
     मुहँ में गुलाब जामुन की जगह बनाते हुए सर ऊपर नीचे ‘रुको माँ जरा सबर करो’की मुद्रा में हिलाते हुए लल्लन ने पुछा __” आखिर हुआ क्या है?? काहे की मिठाई खवा रहे।”
  ” रेल्वे का जो एग्ज़ाम तुम दिये रहे,उसका रिजल्ट आ गया है,,तुम पास हो गये हो।”

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  लल्लन के बड़े भाई ने आगे बढ़ उसकी पीठ थपथपा के कहा।।

  ” बस हमारी आखिरी चिंता भी दूर हुई,क्यों लता देखी खुश हो अब,,तुम्हारे तीनो बच्चे सरकारी अफसर बन गये,,भई जब सरकार हमें मौका दे रही तो हम काहे लाभ ना उठायें,,बहुत बढ़िया लल्लन,आज हमारा सब चिंता दूर हो गया,,बस अब तुम्हारे दीदी और भैय्या का शादी हो जाये तो एक बार तुम्हारी अम्मा को बद्रीनाथ ले जायेंगे।।”

लल्लन का लटका चेहरा खिल उठा,आखिर उसे भी अपने बड़े भाई और दीदी जैसे नौकरी मिल ही गई,, उसके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई जिसका परिणाम ये हुआ कि बिना किसी डर के लल्लन ने रेखा को ये खुशखबरी देने फोन लगा दिया__

” हेलो शो…,रेखा!!”

” तुम कौन बोल रहे??”

” भाभी जी चरण स्पर्श!! हम लल्लन बोल रहे।”

” बोलो”
रूपा की आवाज़ सुन लल्लन के प्यार का भूत भाग कर वापस बरगद पर लटक गया,वो जब तक हिन्दी वर्णमाला का जाप करना शुरु करता’ अ  ओ…’ तब तक में रेखा ने आकर अपना फ़ोन जिज्जी के हाथ से झपट लिया_ तुमको किचन में तुम्हारी मदर इन लॉ बुला रही हैं “
  और कमरे में भागी” हाँ!! बोलो हम हैं।”

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” थैंक गॉड!! तुम्हारी आवाज़ तो सुनने को मिली।। दो दिन से तुम्हारे बताये टाईम पर रस्ता देख रहे,जिम काहे नही आई।।”

” अरे क्या बताऊँ,मेरी दीदी के अन्दर हिटलर की आत्मा आ गई है,दिन भर तानाशाही,,मेरा फोन भी उन्हीं की निगरानी में रहता है,,कैसे करती फोन??

रेखा अभी भी धर्मसंकट में थी,,लुक्स और घर बार के हिसाब से राजा का पलड़ा ही भारी पड़ रहा था, पर वो जैसी अन्ग्रेज तबीयत की थी उसपे उसे रोहित का साथ भी भा जाता था।।।उसे इस बात पर भगवान से थोड़ी रुष्टता थी,कि क्यों भोले भंडारी उसे सही राह नही दिखा देते।।इसिलिए उसने अपने स्वयं के विवाह के लिये सोलह सोमवार व्रत करने का आज सुबह ही निश्चय किया था।।

” अच्छा शोना!! तुम्हे पता है हमारे लिये कितनी लकी हो तुम! देखो तुम हमारे शहर आई,और हमारा रेल्वे का जोइनींग लेटर भी आ गया,,हमारी नौकरी लग गई बाबु।””

सोलह सोमवार करने का संकल्प फलीभूत हुआ, रेखा को अपनी डगर दिख गयी,अपनी मंजिल मिल गई,अपना शुद्ध सात्विक प्रेम उसने चुन लिया।।

” हाय सच्ची!! मजाक तो नही कर रहे?? लव यू बाबु,,तुम्हें पता है तुम्हारी नौकरी के लिये भी व्रत करने का सोच रही थी मैं,अच्छा सुनो,अभी फोन रखती हूँ,कल कैसे भी कर के जिम आ जाऊंगी ,फिर बात करते हैं ।”

  रेखा ने हमेशा जागती आंखों से एक सुन्दर सपना देखा था,कि एक सजीले नौकरी पेशा लड़के से उसका ब्याह हो जाये,और वो अपने पति के साथ उसकी नौकरी वाले शहर में अपना छोटा सा घोंसला सजाये,जहां ना सास की चिकचिक हो,ना ससुर का दबदबा,,ना ननंद के तेवर हों ना जेठानी के नखरे।।।
अब लल्लन की नौकरी लग जाने से रेखा को उसका सलोना सपना पूरा होता दिख रहा था,,भले ही राजा हैंड्सम था,खानदानी रईस था,पर था तो सयुंक्त परिवार की कड़ी,,जो कभी किसी जनम में अपनी अम्मा का आंचल छोड़ कर बीवी को ले अलग घर नही बसा सकता था,,बस रेखा ने चुन लिया…..रोहित ही है जो उसका जीवनसाथी बनने के सर्वथा उपयुक्त है!!

अगले दिन सुबह रसोई का चाय नाश्ता निपटा के रूपा जब अपने कमरे में बैठी फेस बुक पे सुबह के नाश्ते आलू पूरी की फोटो अपलोड कर रही थी, तब चुपके से रेखा अपना फोन लिये निकल पड़ीं ।।
   जिम में लल्लन सभी का मुहँ मीठा करा रहा था।।

    रेखा को बाहर दरवाजे के पास ही प्रिंस और प्रेम मिल गये__” हाय डॉग्स!! वेयर इस रोहित??”

” अन्दर है।” गुस्से मे तमक के प्रेम ने जवाब दिया।
  अपनी सैंडल चटकाती रेखा भीतर चली गई

” इतना गुस्सा मे काहे जवाब दिये,कित्ता प्यार से पुछि रही बेचारी।।”

” इत्ता प्यार से शराफत से हम दोनों को कुत्ता बोली रही समझे!!”प्रेम के जवाब को सुन कर भी प्रिंस को भरोसा ना हुआ__” जो भी बोलो पर अन्ग्रेजी मे गाली भी बड़ी सुहानी लगती है,,नई??”

  रेखा के अन्दर बचपन से फिल्मी कीड़ा था,,वो भीतर जाते ही लल्लन के गले से लग गई,जिम में उपस्थित सभी की आंखें चौडी हो गई ।।

” आई रे आई रे,ले मै आई हूँ  तेरे लिये,तोड़ा रे छोड़ा रे हर बंधन वो प्यार के लिये”

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  जिम में बजने वाला गाना अचानक नायक और नायिका के लिये बैकग्राउंड म्युसिक बन गया….
 
  बाँसुरी ने धीमे से जाकर दोनो को आवाज़ दी और उन्हे अन्दर ऑफिस में चलने को कहा

ऑफिस के अन्दर राजा बांसुरी,प्रेम प्रिंस लल्लन और रेखा आगे क्या करना है पर सोच विचार में डूबे थे।।

  ” रोहित लिसन!! मेरे घर वाले कभी तुमसे शादी के लिये राज़ी नही होंगे,हमें कुछ और सोचना पड़ेगा।।”

” हाँ वैसे रेखा ठीके कह रही,हम भी तो जानते हैं,भाभी के बाऊजी बड़े जब्बर हैं,कभी ई सादी ना होने देंगे।।”

  ” तो अब क्या करना है शोना,,तुम जो बोलोगी हम सब मानने को तैयार हैं,वैसे हमारे घर में कोई दिक्कत नही होगी,बस एक ही छोटी सी परेशानी है,अभी तक हमारे बड़े भाई और दीदी की भी शादी नही हुई,तो बस ये हो सकता की अम्मा बाबूजी कम से कम दीदी की शादी तक हमको रुकने बोले।”

” पर हमारे पापा उतना नही रुकेंगे,,वो तो अभी पिंकी की इन्गेजमेंट  रतन से हो गई,तो थोड़ा चुप बैठे हैं,पर ज्यादा से ज्यादा एक महीना ,उसके बाद हमारी शादी कर ही देंगे।।”

  “तो बताओ क्या करें फिर।।”

   ” हमें मन्दिर में शादी करनी पड़ेगी रोहित,बाद में घर जाकर घर वालों का आशीर्वाद ले लेंगे, लेकिन अगर अभी जब तक हम दीदी के घर पे हैं हमारी शादी नही हुई तो समझ लेना कि हम तुम्हारा ब्यूटीफुल पास्ट बन जायेंगे,,फिर आ जाना हमारी शादी की दावत खाने।।”

   लल्लन से ज्यादा हडबडी इस शादी की राजा को थी,क्योंकि उसे भी पता था अगर रेखा की लल्लन से शादी नही हुई तो ये ढोल उसके गले ही बन्धेगा ।।

  ” हाँ रेखा एकदम ठीक कह रही,हम तो कहतें हैं कल ही शादी कर लो,हम सब तैयारी कर लेंगे,तुम दोनो बस समय से आ जाना।” राजा की बात सुन प्रिंस ने अपनी बात रखी__

  ” भैय्या जी ठीके कह रहे,कल हम कोर्ट पहुंच जायेंगे,वहीं बकील साहब के सामने साईन उन करके माला बदल लेना।”

   ” काहे प्रिंस!! क्राईम पैट्रोल बिल्कुल नही देखते हो क्या?? ऐसे कोर्ट में शादी के लिये ,एक महीना पहले अर्जी देना पड़ता है,वो अर्जी का आवेदन का फोटो अखबार में छपता है,अगर कोई दावा आपत्ति करना चाहे तो कोर्ट जा कर कर सकता है,फिर एक महीना बाद शादी की डेट मिलती है जिसमे शादी होती है।।”

  ” बन्सी हम भी देखते थे पहले,,हमको  तो एकदम झन्नाट लत लग गया था क्राईम पैट्रोल का, हम भी वैसे ‘ सहाय’ जैसे खुदरे पुलिस बनने का सपना भी देखे लगे थे,,पर हमारे साथ का होता था जानती हो,घर पे कूकर का सिटी भी बजता था तो हम चौंक जाते थे,घर पे किसी काम के लिये कोई मिस्त्री मास्टर आया तो हम उसको अपनी पैनी नज़र से घूरते रहते थे,,हमारे बाऊजी की सुनारी है,बेचारे जब चावड़ी निकलते हम रोज पीछे से टोकते ‘ बाऊजी सतर्क रहना,सुरक्षित रहना।’
    हमको तो सपने भी क्राईम पैट्रोले के आने लगे, छत पे खड़े हों और कहीं आजू बाजू की छत पर एक तरफ शुक्लाईन भाभी खड़ी हो,और दुसरी छत पे तिवारी भैय्या तो हमको लगता ज़रूर ई दोनों का कोई चक्कर चल रहा है,हमारे दिमाग में जासूसी घुस गया,अम्मा अलग चिल्लाती की उनका ये रिस्ता का कहलाता है छूटा जा रहा है,पूरा एक महीना निकल गया,उसके बाद एक दिन अम्मा हमारे हाथ से रिमोटवा को छीन डारी,और अपना सीरियल लगा ली,पर अम्मा के साथ गज़ब हो गया,उनको बेचारी को एक ही एपिसोड पूरा एक महीना झेलने का आदत था,पर उसी एक महीना में जाने का उलट फेर हुआ कि ‘ई रिस्ता का कहलाता है’ के सारे किरदार ही बदल गये,असली हीरोइन छोड़ दी रही सीरियल, और उसके लड़िका बच्चा बड़े हुई गये,,अम्मा अपन सिर धुन ली,बोली ‘ अब हमको नई देखना ई सीरियल,ये कोई तरीका होता है ?? इत्ता फास्ट भगायेंगे तो सिरियल नही ये लोग फिलिम बनायेंगे। और उसके बाद अम्मा ओ सीरियले देखना बन्द कर दी।।”

” फिर अब?? अब तुम्हारी अम्मा टी वी नही देखती?” बांसुरी के सवाल पर प्रिंस ने जवाब दिया

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” देखती है ना!! पर अब अम्मा रिस्ता उस्ता नही देखती अब अम्मा ‘ सावधान इंडिया ‘ देखती है।”

” ये तुम दोनो का अति महत्वपूर्ण टी वी परिचर्चा समाप्त हो गया हो,तो लल्लन और बहन जी का शादी डॉट कॉम पे विचार किया जाये।” प्रेम की इस बात पे राजा ने भी जल्दबाजी दिखानी शुरु की, उसे भी रेखा के साथ सम्भावित विवाह से बचने का यही एकमात्र उपाय दिखा ।।

” आई एम नॉट ए बहन जी,,कॉल मी रेखा ओनली, बोलो रोहित क्या करना है आगे।”

” करना क्या है,शादी करना है और क्या?? ऐसा करते हैं,लल्लन कल सुबह 9 बजे तुम गौरी शंकर मन्दिर पहुंच जाना, प्रिंस तुम बड़े तिवारी पण्डित को लेकर पहुंचना,और प्रेम फूल माला और बाकी पूजन सामग्री ले आयेगा,हम रेखा को लेकर आ जायेंगे, जितनी जल्दी सब निपट जाये उतना अच्छा।।

‘ बांसुरी कल तुम कॉलेज मत जाना,हम रेखा को लेकर तुम्हारे घर ही आयेंगे,तुम्हारे यहाँ ये शादी के लिये तैयार हो जायेगी और फिर वहाँ से तुम दोनो को लेकर हम मन्दिर चले जायेंगे।क्यों ठीक है ना??”

” ठीक है राजा,तो ऐसा करते हैं,हम अभी रेखा को साथ लिये बाज़ार निकल जाते हैं,कल पहनने के लिये रेखा को कुछ शॉपिंग भी तो करना होगा।”

हाय रि किस्मत!!! कहाँ 3 महीने की ब्राइडल सिटिंग,कहाँ हर एक फंक्शन में पहने जाने वाली अलग ड्रेस से मैचींग सैंडल और ज्वेलरी और कहाँ ये धूम फटाक शादी!!!
    पर इसका भी मज़ा है,,थोड़ा एडवेंचर तो इसमें भी है,रेखा ने अपने मन को समझा लिया,अरे हम आपके हैं कौन की माधुरी नही बन पाये तो क्या,दिल की माधुरी तो बन ही सकते हैं,उसमें भी तो आमिर खान के साथ भागना ही पड़ता है आखिर।।

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  राजा के साथ बांसुरी और रेखा ज़रूरी सामान खरीदने चली गई,प्रिंस और प्रेम तिवारी पण्डित को खोजने निकले और लल्लन अपनी तैयारी में लग गया।।

   अगले दिन सुबह राजा और रेखा निकलने ही वाले थे कि रेखा के बाबूजी का आगमन हो गया,वो जिस किसी काम से आये थे,उससे कहीं अधिक आवश्यक कार्य अपनी पुत्री को वापस लेकर जाना था,,इसीसे सुबह सुबह जल्दी जल्दी सारे काम निपटा के सीधे बिटिया की ससुराल पहुंच गये।।
    रूपा जहां पिता को देख कर प्रसन्न हुई वहीं रेखा का चेहरा लटक गया।।

‘ ए रेखा ठहरो!! सुबेरे सुबेरे लल्ला जी के साथ कहाँ चल दी तुम??’ और सुनो भले बाऊजी लेने आ गये तो क्या,हम इत्ता जल्दी तुमको जाने नई देंगे समझीं, एक तो पिंकी की सगाई में आई नई,और अब भागे की तैयारी।।”

” अरे जिज्जी हम कहाँ भाग रहे,यू डोंट वरी!! हम अभी रहेंगे तुम्हारे पास।।” दीदी से अपने मन का कहने के बाद रेखा अपने बाऊजी से मुखातिब हुई

” पापा हम बस यूँ गये और यूँ आये,राजा की बेस्ट फ्रेंड है बांसुरी,उस दिन मिली थी ना जिज्जी तुम ,आज उसके कॉलेज में कुछ फंक्शन है,तो हमें बुलाई है ,मेक’प में  हैल्प करने,बस हम उसे रेडी कर के अभी आये,,चले राजा?'”

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बड़ी मुश्किल से सबसे जान बचा के दोनों वहाँ से निकले और बांसुरी के घर पहुंच गये,बांसुरी पहले ही सारी तैयारी पूरी किये बैठी उन्हीं दोनों का रास्ता देख रही थी।।

” नमस्ते चाची जी!! हम राजा हैं,अवस्थी जी के लड़के,अगले मोहल्ले रहते हैं,बांसुरी कहाँ हैं??”

“ऊपर आ जाओ राजा ,,हम यहाँ अपने कमरे में ही हैं

” अच्छा अच्छा!! ऊ गैस वाले अवस्थी के लड़के हो?” बुआ जी के इस सवाल पे राजा ने सर ऊपर नीचे कर हाँ में जवाब दे दिया,बुआ जी ने बहुत इसरार कर राजा को वहीं बैठा लिया,बांसुरी नीचे आकर रेखा को अपने साथ ले गई ।।

” करते का हो बिटवा?? सादी ब्याह भया की नाही, हम बन्सी की बड़ी बुआ है,कोई अच्छा लड़का नजर में हो तो बताना,वैसे बच्चे कितने तुम्हारे?”

“बुआजी अभी हमारी शादी नही हुई।”
राजा के माथे पर लिखी उसकी जन्म कुंडली का ऐक्सरे निकालती बुआ जी ने अपनी आंखे छोटी छोटी कर बड़े आश्चर्य से कहा__” हैं अब तक ब्याह नही हुआ,,क्यों बेटा दिखने में तो अच्छे खासे हो।।”

” अब ये क्या बतायेंगे जिज्जी!! आप भी ना,लो बेटा चाय पियो,हम ऊपर बांसुरी को भी चाय दे आते हैं,अरे ये तो दोनो लड़कियाँ नीचे ही उतर आईं।”

  मैरून और गहरे हरे रंग के कॉम्बिनेशन लहन्गे में रेखा जितनी खिल रही थी,उतनी ही पीले सलेटी लहरिया लहन्गे में बालों को खुला छोड़ी सांवली सलोनी बांसुरी भी दमक रही थी।।राजा ने बांसुरी को देखा,बाँसुरी ने इशारे में उससे पुछा की ” मैं कैसी लग रही” आंखों से ही ” बहुत सुन्दर” बोल कर राजा ने शरमा कर चेहरा नीचे झुका लिया।।
   तीनों साथ साथ घर से निकल गये।।पर राजा और बांसुरी की इस आँख मिचौली को वहाँ और भी किसी ने देख लिया था।।

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” अरे बसुरीया कहाँ चली तू?? इत्ता सज धज कर तो कभी ना निकली घर से,ई छोरी जा कहाँ रई ।”

” इनकी शादी कराने जा रही बुआ” रेखा का हाथ अपने हाथ मे ले बांसुरी ने हँस के कहा और तीनो वहाँ से निकल गये।।

मन्दिर में पण्डित प्रिंस प्रेम और पूजन सामग्री सब पहुंच चुकी थी,बस कमी थी दूल्हा और दुल्हन की,।।
  राजा रेखा और बांसुरी के पहुंचते ही पण्डित जी अपनी तैयारियों मे लग गये,सब आस पास बैठ कर लल्लन का रास्ता देख रहे थे कि पण्डित जी ने राजा भईया के गले में पड़े स्टायलिश स्टोल को बांसुरी की चुन्नी से बांधा और आचमन कर मन्त्र पढ़ते हुए उन दोनो पर जल सिंचन किया ही था कि रेखा चीख पड़ी __ ओह माय गॉड!! पण्डित जी ये दोनो दूल्हा दुल्हन नही है!! दुल्हन मैं हूँ ।।

  ये सब इतनी हडबडी मे हुआ की बांसुरी या राजा कुछ बोल या समझ पाते कि जो घटना था घट गया, दोनों एक दूसरे को देख ही रहे थे कि रेखा ने झट बांसुरी की चुन्नी खोल दोनो को अलग किया,उतनी देर में लल्लन भी पहुंच गया।।

” कहाँ रह गये थे लल्लन!! अभी तुम्हारी जगह पण्डित जी भैय्या जी और बन्सी के फेरे फिराये दे रहे थे,,बच गये गुरू!! “प्रिंस की बात पे लल्लन ने माथे का पसीना पोछा और बोला_

  ” घर से निकल रहे थे कि अम्मा पीछे लपक ली, सत्ती माई में रोट चढाये गई,उनको वापस घर उतार के निकले कि गाड़ी का तेल खतम हो गया।।”

” वॉट तेल रोहित!! इट्स फ्युल!! चलो आ तो गये,अब आओ जल्दी यहाँ बैठो,फेरों का भी तो मुहूर्त होगा।।”

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” यस ऑफ़कोर्स ! फेरों का भी मुहूर्त है,पण्डित जी अब असली दूल्हा दुल्हन आ गये,शुरु कीजिए।।”

बांसुरी ने रेखा और लल्लन का गठजोड़ किया और मुस्कुराते हुए राजा की बाजू मे खड़ी हो गई ।।शुभ मुहूर्त और मंगल स्वस्तिवचनों के साथ सप्तपदी संपन्न हुई।।।

क्रमशः

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aparna..

शादी.कॉम -12

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   “पहला पहला प्यार है,,पहली पहली बार है,
     जान के भी अनजाना कैसा मेरा यार है।।”

” अबे कौन बजाया बे! बदलो ई पहला पहला प्यार को!!”

” तो का लगायें भैय्या जी।” राजा की दहाड़ सुनते ही प्रिंस लपक पड़ा ।।जिम में लोगों का आवागमन शुरु हो चुका था,ऐसे में प्रिंस वर्कआउट के लिये गाने सेलेक्ट कर रहा था।।

” अब ये भी हमी बताएँ!! तुम्हारी अकल में ना बिल्कुले पत्थर पड़े हैं प्रिंस।।यार कैसे बनिये हो तुम ,, हमरी अम्मा तो कहती हैं बनियों से जादा दिमाग किसी के पास नई होता,,पर तुम तो बिल्कुल बमपिलाट हो।।”

  प्रिंस सदा से बाँसुरी का तरफदार था,इसिलिए आजकल प्रिंस और प्रेम में  ज़रा तनातनी रहने लगी थी।।राजा भैय्या की बात सुन प्रेम चहक उठा __

” भैय्या जी आप हम ठहरे बामण के छोकरे,हमारा तो जन्म ही होता है अपने बाप की चप्पल से पिटने के लिये।।
     ऑफ़िस में बाऊजी को उनका बॉस चमकाया आके हमको धुन देंगे,,गांव में पड़ोसी से जमीन का चिल्ला चिल्ली हुआ आके हमको सून्त देंगे,घर में बहन की शादी नही लग रही पिटाई हमारी होगी,और तो और अम्मा ने लौकी बना दी तब भी हमी धरे जातें  हैं ।।।
    ई तो पुन्यात्मा हैं बनिया घर में पैदा हुआ है, जैसें इनके बाप दादा सोना सहलाते हैं,ऐसे ही फूल की छड़ी से अपना लड़का बच्चा को भी सुधारते हैं, तो भैय्या जी इनको किसी का डर है ये नई,काहे दिमाग दौड़ाएंगे।।”

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” अच्छा बे तुमको बहुत बड़ी बड़ी बात सूझ रही हैं,, देख रहें हैं आजकल कुछ ज्यादा ही टर्रा रये हो।”

प्रिंस राजा की घुड़की सुन चुपचाप वहाँ से सटक लिया,।। उसे असल में भैय्या जी के दिल का हाल मालूम नही था,उसने जाकर दूसरा रोमैंटिक ट्रैक बजा दिया__
             ‘ सदियाँ समा गईं इस एक पल में,दिखने लगा सुकून दुनिया की हलचल में ….’

  तभी हल्के से दरवाजा खुला,हमेशा सलवार और कुर्ती पे चोटी बना के आने वाली बांसुरी के सुर आज कुछ बदले से थे।।
     ट्रैक पैंट पे टी शर्ट पहनी बांसुरी ने खुले बालों की उँची सी पोनीटेल बना रखी थी।।

   बांसुरी के प्रवेश करते ही सब उसकी तरफ देखने लगे…राजा भैय्या ने सिर्फ एक उड़ती नज़र डाली और वापस अपने रजिस्टर में मिलाए हुए नामों को वापस मिलाने लगे।।प्रिंस बांसुरी के इस परिवर्तन पे अति प्रसन्न हुआ और उसे बधाई देने कूद कर उस तक पहुंच गया,थोड़ी देर के लिये प्रेम भी चकरा गया।।

” वाह बंसी तुम तो बहुत-बहुत बहुत इस्मार्ट लग रही हो,।”
  बाँसुरी मुस्कुरा कर राजा की तरफ देखने लगी,इस उम्मीद से कि राजा भी शायद उसके नवेले रूप पे कोई टिप्पणी देगा,पर राजा ने सर उठा कर भी नही देखा।।बांसुरी चुपचाप अपने ट्रेड मिल पे चली गई ।
    लगभग 10 मिनट बीत जाने पर भी जब राजा एक बार भी बांसुरी का हाल चाल पूछने नही आया तो बांसुरी ने वहीं से हांक लगाई__
     ” आज क्या स्पीड रखना है हमें,,कुछ बताओगे भी या ऐसे ही बस भागते रहें ।”

  6km/hrs पे आकर राजा ने ट्रेड मिल सेट किया और वापस जाने लगा।।उसे ऐसे वापस जाते देख बांसुरी ने प्रिंस से इशारे से पूछा कि ‘ आज क्या हो गया राजा को?”जैसे इशारे मे उसने पूछा वैसे कंधे ऊपर कर प्रिंस ने जवाब दे दिया कि हमे नही पता।

  ” कब तक चुप बैठें अब तो कुछ है बोलना,
     कुछ तुम बोलो कुछ हम बोलें ओ ढोलना।।”

जैसे ही गाने के बोल जिम में गूंजे राजा ने सर उठा के प्रिंस को देखा,और बस उतने ही मे__” बदल रहें हैं भैय्या जी,बस अभी बदले।।”
  राजा की घूरती आंखों को देख प्रिंस हडबडी में म्युसिक सिस्टम तक भागा,पर तभी बांसुरी के बोल गूंजे__
         ” ए प्रिंस रुको!! काहे बदल रहे,हमें अच्छा लगता है ये गाना।।”

  ” ऊ भैय्या जी को नही ना पसंद इसिलिए बदले दे रहे।”

” अबे हम कब बोले तुमको बदलने।” राजा की घुड़की से घबराया प्रिंस मुहँ लटकाये बाहर निकल गया,बांसुरी राजा के पास आ कर बैठ गई ।।

” क्या हुआ राजा?? कुछ मूड ऑफ़ लग रहा तुम्हारा, घर पे कुछ हुआ क्या।।”

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” इस बार भैय्या जी के बाऊ जी ने कसम ले ली है कि अबकी बार अगर राजा भैय्या पास नही हुए तो इनकी हत्या कर देंगे या खुद चूहा मार दवा पी के आत्महत्या कर लेंगे।।”लल्लन बोला

बांसुरी ने आंखे तरेर के लल्लन को देखा फिर पूरी सहानुभूति से राजा को निहारने लगी।।

” अरे इसमें इत्ता परेशान होने की क्या बात,इस बार  राजा सिर्फ पास नही होंगे बल्कि बोर्ड एग्ज़ाम टॉप भी करेंगे,,हम पर भरोसा रखो।।”
  बांसुरी के ऐसा बोलते ही प्रेम भी उछल पड़ा

” हम भी यही कह रहे,भैय्या जी क्यों परेशान हो रहे, अरे पास हो गये तो ठीक वर्ना हम पूरे शहर से चूहा मार दवा खरीद कर यहाँ से बहुत दूर ले जाकर फेंक आयेंगे।।जब बाऊजी को दवा मिलेगा ही नही तो का खा कर मरेंगे।।

राजा ने खा जाने वाली नजरों से प्रेम को देखा और उठ कर अपने में ऑफिस में चल दिया,उसके पीछे पीछे बाँसुरी भी भागी,जाते जाते प्रिंस को दो कप चाय लाने कहती गई ।।

” हमें तो बताओ हुआ क्या है राजा?? कल तो बड़े खुश लग रहे थे, हनुमान जी ने ऐसा क्या मन्त्र फूंक दिया कान मे जो उदासे बैठे हो।”

” काहे परेशान कर रही हो,हमने कहा ना कोई बात नही।।”

” जब कोई बात नही ,तो हमें देखा क्यों नही,??  , हमारी नई ड्रेस पे कोई टीका टिप्पणी नही,,देखो तुम्हारे जैसे हमने भी रीबॉक के जूते पहने हैं, सुबह से तुम्हारे आगे पीछे घूम रहे,पर तुम तो जैसे इस दुनिया में हो ही नही,जाने कहाँ विचर रहे हो।।”

” थोड़ा सर मे दर्द था,और कुछ नही!! बस इसिलिए थोड़े चुप चाप बैठे थे।वैसे अच्छी लग रही हो तुम।।

” थैंक यू!! अब बताओ कि हमारी ट्रेनिंग कबसे शुरु कर रहे,,भास्कर सर के बारे में बताया था ना तुम्हें ।।”

” देखो ट्रेनिंग का जहां तक बात है,हमने लड़की पटाने में कोई पी एच डी तो की नही है,जो हम तुम्हें कुछ सीखा सके बता सकें।।तुम तो हमसे जादा समझदार हो।”

” अरे बाबा कम से कम यही बता दो कि तुम किसी लड़की में क्या देख कर इंप्रेस होते हो।।”

” अब देखो ,जहां तक हमारा सवाल है,हमें ना सभ्य संस्कारी लड़कियाँ अच्छी लगती हैं,सीधी साधी,  भोली सी,,अपने बड़ों का बात मानने वाली,कम बोलने वाली,झगड़ा फसाद ना करने वाली।।”

” बस बस हम समझ गये,,मतलब बिल्कुल हमारे अपोजिट लड़की तुम्हें पसंद है,है ना??”

” अरे नही बाबा!! वो मतलब नही है हमारा,,पर देखो एक बात सच्ची बताएँ,लड़कों को ना बहुत ही जादा ज्ञानी लड़की नही पसंद आती,उन्हें वही भाती है जिसके सामने वो जादा ज्ञानी दिखे,,वो लड़को की इस आदत को का कहते हैं …… अरे वो बोलते हैं ना का ….

” ईगो!!! मेल ईगो!! यही कहते हैं,यही बताना चाह रहे ना।।”

” अब देखो सच्ची बात बताये तो तुम बुरा मान गई,अब यही थोड़ा घुमा फिरा के बोलते तो खुश हो जातीं।।अच्छा सुनो तुम कुछ बातों का ध्यान रखना अपने सर के सामने फिर देखना कैसे तुम्हारा जादू चलता है,,, पहला तो उनकी क्लास मे कभी उचक उचक के जवाब मत बताना , नही उन्हें लगेगा इसे पढ़ाने का कोनो ज़रूरत ही नही,,दूसरा जो सवाल बन रहा उसे भी उनसे पूछना क्योंकि इससे उन्हे अन्दर से खुशी मिलेगी कि तुम उनसे कम हो,और वो तुमसे कहीं जादा बुद्धिमान हैं।।
     धीरे से दोस्ती हो जाये,तब उनका हर बात का ध्यान रखना,जैसे हमारा रखती थी,कि कौन सी आंटी फीस भरी है कौन सी नही।”
  ये बोल कर राजा हंसने लगा,बांसुरी भी।।

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” हर छोटी छोटी बात उनसे पूछ कर करना ,भले तुम करो अपने मन की पर सामने वाले को ये लगे कि तुम उनके हिसाब से सब कर रही हो,,बस यही दो चार बातें आजमा लो,तुम्हारा काम हो जायेगा।”

” काम हो जायेगा तो ऐसे बोल रहे जैसे तुम कोई गुरू घंटाल हो,,एक घन्टे में मोहिनी,सौतन से छुटकारा,प्रेमी को वश मे करें,वाले विज्ञापन के बाबा जी की तरह।।”
  बाँसुरी की खिलखिलाने की आवाज़ सुन कर निश्चिंत हो प्रिंस चाय लिये अन्दर आया।।

” बताओ अब आये हो चाय लेकर,अब तो हमारा जाने का समय हो गया।।” बान्सूरी के ऐसा बोलते ही राजा ने  भी खबर ली

“ये पहले गौ माता के पास जाकर दूध निकलवातें हैं,उसके बाद ऊ दूध लिये चमन के पास लाते हैं तब जाके कहीं चाय बनती है,,क्यों हो प्रभु,सही बोले ना हम।।”

” अरे का भईया जी,कतना तारीफ करेंगे हमारा,  लिजिये चाय लिजिये आप दुनो,हम अपनी भी यहीं ले आये।।

अभी तीनों ने अपनी अपनी चाय पीनी शुरु की थी कि जिम में बाहर से किसी ने राजा भैय्या के नाम की पुकार लगा दी,प्रिंस हम देखते हैं बोलकर बाहर दौड़ा, जितनी द्रुत गति से बाहर गया था वैसी ही त्वरित गति से अन्दर भागा__
    ” भैय्या जी ऊ भौजाई आई हैं ।।”
 
  ” हमरी तो शादी ही नही हुई,कहाँ से तुम्हारी भौजाई पैदा हो गई  बे!! कुछ भी बकते हो।

  ” अरे भैय्या जी बड़की भौजाई आई हैं,उनके साथ एक और कोनो लड़की है।।”

राजा भैय्या ने अपना एक हाथ हल्के से अपने माथे पर मारा_ ” अरे यार !! हम भूल गये रहे,,आज भाभी की बहन को स्टेशन लेने जाना था……राजा भैय्या की बात पूरी भी नही हो पाई थी कि दरवाज़ा खोल रुपा भाभी कमर पर हाथ टिकाये खड़ी हो गई।

” काहे लल्ला जी,जब जाना ही नही रहा तो हमे पहले काहे नई बता दिये,,बेचारी रेखा स्टेसन में खड़े खड़े आधा घंटा बेट करी,तब बिचारी हमें फ़ोन करी और हम इसे लेने गये।।”

” काहे इत्ती अनपढ़ है कि अकेले रिक्सा में घर नही आ सकती।।” प्रेम ने धीरे से फुलजड़ी छोड़ी और प्रेम  प्रिंस बांसुरी खिलखिला पड़े

” का बोले तुम प्रेम” ।

” कुछ नही भौजी!! हम बोले तनिक बैठ जाओ,हम समोसा मँगा देते हैं,ए प्रिंस लगाओ यार लल्लन को फ़ोन लगाओ , कहाँ है आजकल??”

प्रेम की इस बात का सभी ने एक स्वर में समर्थन किया।।
रेखा राजा में अपने होने वाले पति को देख रही थी, इसलिये उसके चेहरे पर लज्जा का अभिनय था, शर्म की लुनायी थी।।

राजा अपने मन में त्रस्त था,उसके मन में कुछ समय पहले खिला प्रेम का फूल हवा पानी के अभाव में अकेला इधर उधर डोल रहा था,उसे जिस माली के स्नेह सिंचन की आवश्यकता थी,वो माली अवकाश ग्रहण कर दूसरे की बगिया संवारने में खुद को व्यस्त किये था।।

  बांसुरी रेखा को देख रही थी जो  लगातार राजा को ताड़ रही थी,,बांसुरी राजा भैय्या के चार्म से अपरिचित थी,ऐसा नही था।।वो आये दिन ही जिम में आने वाली अनोखी अलबेली वारान्गनाओं के लटकों झटकों का कारण भली प्रकार समझती थी,पर रेखा की दृष्टी उसे चुभ गई ।।

“कहाँ है भई तुम्हारा समोसा?? इत्ती देर लगा दी,ए प्रेम ऊ लल्लन को फोन घुमाओ की तली मिर्ची भी हमारे लिये अलग से लेता आयेगा।।”

रूपा की इस बात पे राजा ने फ़ोन लगाया__” भाभी औ कुछ मँगा दें,,जलेबी खाओगी??”

” जो मँगाना है जल्दी मँगा दो,,हम तो रेखा को लेके घर जा रहे थे,यही बोली कि राजा हमे लेने कैसे नही आया,चलो दीदी देखे क्या कर रहा ,इसिलिए आ गये,बस चाय पी के निकल जायेंगे हम,,पूरा काम बिखरा पड़ा है,,हम ना करें तो इस घर का एक पत्ता ना हिले,,बहू नही नौकरानी हैं हम….

” अरे का भौजी,नौकरानी नही आप रानी हैं रानी!! कभी रूप देखी हैं अपना,,एकदम किसी रियासत की महारानी सी लगती हैं ।”प्रिंस की बात पर रूपा का बिगड़ा मूड संभल गया

” ऊ तो हम खानदानी रईस जो ठहरे।”भाभी की इस बात को सुन राजा को हँसी आ गई,,वो कई बार अपनी माँ की बड़बड़ इस बाबत सुन चुका था,जब कभी घर पे सास बहु की महाभारत छिड़ती और रूपा अपने कोप भवन में प्रस्थान कर जाती तब पीछे से सासु माँ का रूपा के खानदान का जो बखान शुरु होता ” हूंह बड़ी आई रईस !! जैसे हम नई जानती कि इनके बाप मिट्टी का तेल ( क्रूड ऑयल) प्लाण्ट से चुरा चुरा के बेच बाच के तो रुपया जोड़े,किसके किसके हाथ पांव जोड़ के बकालत का डिग्री खरीदे,अब चार पैसा घर में आ गया तो बडे जमींदार बन रहे।” अम्मा की ये बात याद करके राजा मुस्कुरा रहा था कि रेखा ने उससे सवाल कर दिया_

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” ये लड़की कौन है राजा?? जो आपके साथ खड़ी है?” किसी को ऐसे रूखे सवाल की अपेक्षा नही थी

” मैं बाँसुरी हूँ,यहाँ राजा का जिम जॉइन किया हुआ है।।” बांसुरी को पता था कि राजा अपने पढ़ने वाली बात किसी को नही बताना चाहता था।।

” और हमारी टीचर जी भी,क्यों ठीक है ना बांसुरी ।”

राजा मुस्कुरा कर बांसुरी को देखने लगा,,पर उसका इस तरह किसी और लड़की को देख कर मुस्कुराना दोनो बहनों को अन्दर तक भस्म कर गया।।अभी रूपा कुछ कहने ही जा रही थी कि दरवाजा खोल कर लल्लन समोसों की खुशबू से हवा को महकाते अन्दर आया।।

  अन्दर आते ही सारा सामान सामने रखे टेबल पर रख उसने जैसे ही सर ऊपर किया उसकी नज़र रेखा पर पड़ी __” अरे शोना तुम?”

” रोहित तुम?? तुम यहाँ कैसे?? रेखा ने लल्लन से सवाल किया,दोनो के सवाल सुन रूपा ने रेखा को घूर के देखा__” तुम दोनो एक दूजे को कैसे जानते हो,और ये तुम्हारा शोना नाम कब से पड़ गया रेखा।”

रूपा भाभी के अलावा वहाँ बैठे सभी लोगों को सब समझ आ चुका था,,प्रिंस ने धीरे से चुटकी ली__

” तो ई हैं हमरे लल्लन की शोना बाबु।””प्रिंस चुटकी ले और प्रेम चुप बैठा रहे,ये असम्भव था,अगला वार उसका हुआ_
           ” जी हाँ और दढ़ियल लल्लन हैं इनके बेबी।।।”

” तुम दोनो का खुसर फुसर कर रहे हो हैं??” हम देख रहे ,लल्ला जी के जिम में आजकल यारी दोस्ती की महफिल जादा सज रही,,ए रेखा जल्दी जल्दी ई समोसा ठूसो और घर चलो,घर पहुंच के जानेंगे तुमसे सब ।।”

बाँसुरी सर झुकाये अपनी हँसी रोकने के प्रयास में थी,कि राजा ने सबसे पहले उसी के सामने समोसे बढ़ा दिये।

” पक्का बताओ हम खा लें,जब से तुमने मना किया , तबसे कचौड़ी और समोसा छुआ तक नही,, तीन महीने हो गये।।” हँसते हुए बांसुरी ने कहा।।

” बहुत कहा मानती हो लल्ला जी का,,ऐसा भी क्या हो गया।” रूपा के इस सवाल का जवाब दिया प्रिंस ने

” अरे भौजी ,,बांसुरी तो कम ही बात मानती है भैय्या जी की। पर भैय्या जी तो हर काम बांसुरी के मन का ही करते हैं, हम पे भरोसा ना हो तो पूछ लो भैय्या जी से।।” प्रिंस के बौड़मपने पे प्रेम ज़ोर से हंसने लगा और उसने आगे बढ़ कर बात संभाल ली__

” अरे आप लोग पहिले समोसा तो खाईये,ऊ भी चीख चीख कर कह रहा,हमरे ठन्डे होने से पहले हमे खा लो।”

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          रूपा रेखा को लेकर जब जिम की सीढिय़ां उतरने लगी,तब उसे कार में बैठा कर रेखा दो मिनट में आई कह कर वापस जिम में घुस गई __

” रोहित सुनो!! तुम से कुछ बहुत ज़रूरी बात करनी है,घर से फ़ोन नही कर पायेंगे,दीदी हमारे सर पे सवार रहेगी,,, तुम शाम को यहीं जिम मे हमसे मिलना,,हम किसी बहाने यहाँ आ जायेंगे,समझे।।”

” हाँ हम आ जायेंगे,शाम को 5 बजे जिम खुलेगा,  आज प्रिंस से चाबी हम ले जायेंगे,तुम समय से आ जाना बस।।”

रेखा लल्लन को बाय बोल कर बाहर निकल गई, हल्की सी मुस्कान के साथ जैसे ही लल्लन पलटा सांमने राजा और बाकी लोगों को खड़ा देख हडबडा गया।।

” तो ई है तुम्हरी नैकी जिसके लिये ‘ चदरिया झिनी रे झिनी ‘ सुना सुना के हमारे कान फाड़ दिये तुम?”

लल्लन नीचे सिर किये अपने बालों पे हाथ फिराता शर्माता खड़ा रहा।।

सभी मुस्कुराने हंसने खिलखिलाने लगे तभी राजा को जैसे कुछ याद आया_ ” अबे लल्लन तुम तो सूर्यवंसी लिखते हो ना।।अबे गज़ब कर दिये गुरू,,अब फिर पिंकी औ रतन वाला किस्सा दोहराना पड़ेगा।।”

” तो क्या हुआ,तुम हो ना सबके तारणहार!! तुम्हारे रहते किसी का बुरा हो सकता है,,,कभी कभी तो हमे लगता है,अगर तुम नही होते तो इन सब का क्या होता।।” बांसुरी की बात सुन राजा के मुहँ से निकल गया__” और तुम्हारा??”

” हाँ सही कह रहे,हमारा भी!! हम भी तो तुम्हारे कारण ही ऐसे दिखने लगे।।बाँसुरी खिल्खिलाती हुई वहाँ से बाहर चली गई,और बाकी सारे के सारे लल्लन को घसीटते हुए उसपे लात घूंसे चलाते हुए उसकी राम कथा सुनने लगे।।

क्रमशः

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aparna..

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शादी.कॉम-11

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   पिंकी और रतन की सगाई संपन्न हुई।।।सारे लोगों को व्यस्तता का जो बहाना मिला था चूक गया,, सारे रस भरे दिन चूक गये,रसोइये ने अपने साजो सामान को समेटा ,तगडा नेग लिया और चलता बना,एक एक कर मेहमानो ने भी जाना शुरु कर दिया।।
  पर ऐसे मौकों पे कुछ ऐसे मेहमान भी आते हैं,जो आते ही लम्बा टिकने के लिये हैं,,ऐसी ही एक मेहमान थी राजा की अम्मा की चचेरी बहन शन्नो मौसी।।।
     शन्नो मौसी का वहाँ टिकने का मुख्य उददेश्य था,राजा भैय्या की शादी।। एक तो कान्यकुब्ज ब्राम्हण परिवारों में मिलने वाला ऊँचा दहेज उसपे उनकी सहेली की ननंद की भतीजी जिसके फूफा स्वयं जज महोदय!!! अब ऐसा जानदार रिश्ता कोई हाथ से निकलने दे सकता है क्या,,कम से कम शन्नो मौसी जैसी व्यवहार कुशला और सामाजिक महिला तो बिल्कुल नही।।
   राजा की अम्मा पहले ही रूपा की बहन रेखा को लेकर परेशान थी,अब शन्नो जिज्जी एक नया फसाद लिये खड़ी थी,,पर इन सबसे बेखबर राजा भैय्या अपने में मगन थे।।।

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  राजा भईया का सारा दिन जिम मे पसीना बहाने बहवाने में निकल जाता और रात थोड़ा बहुत किताबें खोलने में ।।
    राजा भैय्या ऐसे जीव थे जिन्हें ज्यादा सोचने की आदत नही थी,जो बात उन्हें एक बार में समझ नही आती,उसे वो दुबारा पलट के भी नही देखते।। ऐसा नही था कि वो दिमाग से पैदल थे,पर बात ये थी कि उन्होनें आज तक ये नही जाना था कि दिमाग संभाल कर तिजोरी में रखने की वस्तु नही बल्कि दिल खोल कर खर्च करने की चीज़ है,और जितना ही उसे खर्चोगे उतनी ही बढेगी।।पर उनकी इस खूबी को बांसुरी ने पकड़ लिया।।।
   बांसुरी इतने दिनों की राजा की संगत में ये बात समझ गई कि राजा को पढ़ाई बोल कर पढ़ाने पर उसका डब्बा गोल ही होना है,इसिलिए उसने राजा को अलग ढंग से पढ़ाना शुरु कर दिया,,इतिहास में उसने सिलसिलेवार सन लिख कर उन उन काल में हुई घटनाओं दुर्घटनाओं की कहानी सी तैयार की और जिम में वर्क आउट करते हुए वो राजा को सतत उन कहानियों का स्मरण और पाठ कराती,जल्दी ही राजा  को सारा सब कुछ कंठस्थ होने लगा,कब प्रथम महायुद्ध हुआ,किसके बीच हुआ,,पहली सभ्यता का नाम,गान्धी जी का कब स्वदेश आगमन हुआ से लेकर कब गोलमेज सम्मेलन हुआ,और कब हमे आज़ादी मिली,कब हमारा संविधान तैयार हुआ।।
    जब एक बार किसी इन्सान को दिमागी मेहनत करने की आदत हो जाती है तो इससे इतर अन्य कोई कार्य रुचिकर नही लगता।।ये सब पढ़ते हुए राजा को ऐसी रूचि उत्पन्न हुई कि अब उसकी दिमागी खुराक के लिये बारहवीं के सिलेबस की रसद कम पड़ने लगी,अब राजा खोज खोज कर पढ़ने योग्य अयोग्य सभी कुछ पढ़ने लगा।।।

” हमको तो लगने लगा है,हम इत्ता पढ़ डाले हैं कि अगर हम कौन बनेगा करोड़पति खेलने गये तो हम पूरा एक करोड़ एके बार में जीत डालेंगे ऊ भी बिना लाईफ लाइन के,,क्यों गुरू जी।।”

राजा ने बांसुरी से हँसके पूछा,पर जवाब मिला प्रेम से…..

” बिल्कुल सही बोले भईया जी,औ ई बसुरीया इत्ता बजन कम कर डाली है की अगर मिस इंडिया बनने गई तो अकेली ही सब जीत डालेगी,ऊ का का होता है ना मिस वर्ड,मिस ब्रम्हाण्ड औ जाने का का।।”

” हमारे लिये काहे इतना कड़वे हो प्रेम,,हमने सुना था लड़के लड़कों से जलतें हैं,लड़कियाँ लड़कियों से,पर तुम तो हमी से जले कटे बैठे रहते हो,,दिमाग को थोड़ा ठंडा रखा करो।।”

बाँसुरी ऐसा बोल कर वहाँ से उठ गई,और दिनों की तरह उसके चेहरे पे वो उल्लास नही दिखा राजा को, जिसके कारण राजा भी उठ कर उसके पीछे पीछे चला आया।।

” क्या हुआ बांसुरी? कोई परेसानी है?? आज तुम थोड़ा चिंतित दुखी परेसान लग रही हो।।”

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” समझ गये कि हम परेशान लग रहे पर तुमको तीन पर्यायवाची बोलने की क्या ज़रूरत??आजकल हर जगह अपनी परीक्षा की तैयारी में ही भिडे रहते हो।।” ऐसा बोल कर बांसुरी मुस्कुरा पड़ी और राजा शरमा के नीचे देखने लगा।।

” बांसुरी हम बहुत दिनों से एक बात सोच रहे थे,तुम हमारी सबसे करीबी दोस्त बन गई हो,तुमने हमें इतना अच्छे से पढ़ाया है कि हमको अब पढ़ाई लिखाई अच्छी लगने लगी है।” बांसुरी खड़ी मुस्कुराती रही
” हम और कुछ तो दे नही सकते,,आज तुमको एक छोटा सा पार्टी देना चाहतें हैं ।””

” अरे अभी पास तो हो जाओ,,फिर हम तुमसे पार्टी भी ले लेंगे।।”

” हमारे पास होने की पार्टी तो तुम दोगी हमे,देखो ई दू  तीन महीना में तुम भी दुबला गई और हम भी पढ़ लिख लिये तो अब हमको लगता है पार्टी तो देना ही पड़ेगा।।”

बांसुरी के मन की उदासी राजा के पकड़ में नही आई, अभी वो दोनो खड़े बात कर ही रहे थे कि डॉ रानी वहाँ चली आई ।।

” कैसे हो राजा,क्या चल रहा आजकल!! बहुत दिन से तुम दिखे नही तो हमनें सोचा हम ही मिल आते हैं तुमसे ।।”
उन दोनों को बातों में उलझा छोड़ बाँसुरी वहां से निकल गई ,,रानी और राजा भईया वहीं जिम की सीढियों पर बैठ गये,,रानी दुनिया भर की तमाम बातें राजा को बताती रही,बीच बीच में ” सुन रहे हो ना”  ” अच्छा बताओ मैने अभी अभी क्या कहा था” जैसे क़्विज़ कॉंटेस्ट भी खेलती रही पर बाँसुरी का इस तरह चुपचाप चले जाना राजा को बुरी तरह खलने लगा,वो दूर तक बाँसुरी को जाते हुए देखता रहा,, बार बार राजा का मन हुआ कि जाकर बाँसुरी को रोक ले और पूछ ले कि ऐसे बिना कुछ बोले कैसे चली गई ,पर वक्त की नजाकत देखते हुए वो चुप चाप बैठा रानी की बातों को सुनता रहा।।

   लोग कहतें हैं पहला प्यार कभी नही भूलता,अब लोग कहतें हैं तो ऐसा होता ही होगा पर लोगों के साथ ही,, क्योंकि राजा के साथ ऐसा कुछ नही हुआ।।
     राजा ने जितनी शिद्दत से रानी से अपनी अल्हड़ सी उम्र में प्यार किया था,उतनी ही शिद्दत से आज वो उस प्यार को भूल बैठा।।रानी में आज भी कोई कमी नही थी,खूबसूरत तो पहले ही थी अब डॉक्टरी की पढाई के आत्मविश्वास ने चेहरे को एक अलग लुनायी से रंग दिया था,बावजूद इसके अब राजा को रानी में सिर्फ एक अच्छी सच्ची दोस्त ही नज़र आ रही थी।।
     प्यार मोहब्बत ऐसा एहसास होता है कि जो करता है और जिससे करता है,उसे बताने और जताने की ज़रूरत नही रह जाती,,और जब वही प्यार करने वाला प्यार नही करता है,तब तो लगता है जैसे सारा संसार चीख चीख कर आपको ये बताने पे अमादा है कि ‘ अब ये तुझसे प्यार नही करता’।।
रानी भी राजा की भावनाओं को समझ चुकी थी,पर उसे कोई शिकायत ना थी,या शिकायत करने कि अवधि वो पार कर चुकी थी।।अपने मन की दुविधा को खुद में ही समेटे उसने बहुत सारी बातें राजा से करी,ये जानते हुए भी कि राजा उसके पास बैठा हो कर भी बांसुरी के साथ उसके घर तक चला गया है।

” राजा एक बात पूछें तुमसे?अरे हमे सुन भी रहे हो या नही?? माना की बहुत पतली हो गई है तुम्हारी मुटकि पर अभी भी हमसे तो मोटी ही है।”  रानी अपनी ही बात पर हंसने लगी,राजा चौंक कर उसे देखने लगा__ ” क्या कहा तुमने रानी,अच्छा सुनो हमे कुछ काम से घर जाना है,चलो तुम्हें तुम्हारे घर उतार देंगे।।”

” जी मेहरबानी आप मुझे मेरे घर तक लिफ्ट देंगे,,एक बात पूछना चाहतें हैं आपसे राजा बाबु।”

” हाँ पूछो।” अपनी गाड़ी स्टार्ट करते हुए राजा ने कहा

” बुरा मत मान जाना,,हम कुछ दिन से जो नोटिस किये वही पूछ रहे हैं,,तुम्हें बाँसुरी कैसी लगती है।।”

” कैसी लगती है मतलब?? ठीके है,मेहनती है,होशियार है,जो ठान लेती है कर के रहती है,,अब देखो ,,जब जिम मे आई रही 68 किलो की रही ,और अभी 60 की हुई गई,,बहुत मेहनती है,एकदम जी जान से जुट जाती है,,पढ़ाई में तो पुछो मत,हमें सोचो हमार जैसे लठ को आदमी बना डाली( राजा भैय्या की नजरों में जिसे शिक्षा का मह्त्व पता हो और जो शिक्षित हो वही असली पुरूष संज्ञा है)
राजा भैय्या की बात को बीच में ही काट कर रानी ने कहना शुरु किया__

” हाँ समझ गये!! बस करो अब तारीफ ,,तो मतलब हम जो सोच रहे वो सच है।”

” अब हमे क्या पता तुम क्या सोच रही??”

” ये कि तुम्हें बांसुरी अच्छी लगने लगी है।।है ना?”

” अच्छी है तो अच्छी लगेगी ही??”

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रानी मुस्कुराने लगी ” हम्म अच्छी तो है,पर तुम्हें कुछ ज्यादा ही अच्छी लगने लगी है।।”

जब किसी की चोरी पकड़ी जाती है तो उस वक्त उस इन्सान का सारा प्रयास इसी ओर रहता है कि किसी तरह उसकी बेगुनाही साबित हो जाये,ऐसा ही कुछ राजा के साथ हुआ!!! अभी वो बेचारे स्वयं अपने मन की थाह नही पा पाये थे उन्हें स्वयं अपने हृदय के अन्दर बहने वाले इस प्रेमझरने का स्त्रोत पता नही था कि उस झरने को पहचान कर लोग बाग उसका रसास्वादन करने लगे।।।राजा भैय्या सोच में पड़ गये कि शाम को बांसुरी से मिलने जाना चाहिये या नही, उन्हें उस समय यही उचित लगा कि मिलने नही जाना ही ठीक रहेगा।।वो बार बार अपने मन को तरह तरह से यही समझाने में लगे रहे कि रानी को कुछ गलतफहमी हुई है,और उनके मन में बाँसुरी को लेकर कोई विकार नही है।।

  वो पूरा दिन बस यही सोचते निकल गया कि अगर मिलने चला गया तो सब क्या सोचेंगे,और अगर मिलने नही गया तो बांसुरी क्या सोचेगी!! आखिर बांसुरी सब पर भारी पड़ी ।।
    तरह तरह के विचारों को सोचते सोचते अंतत: राजा ने यही सोचा कि जब उनका मन साफ है स्वच्छ है बांसुरी से मिलने जाने मे कोई परहेज नही।।ऐसा सोचने के बाद मन फूल सा हल्का हो गया,सुबह से सोच सोच के जो पीड़ा के बादल राजा ने अपने दिमाग मे जमा कर लिये थे,सब एकाएक बरस गये,और उजली चांदनी छिटक गई ।।

  अपने आप को भली तरह से सजा संवार कर राजा बाबु बाँसुरी से मिलने जाने निकले,ये प्रथम अनुभव था जब राजा अपनी किसी महिला मित्र से मिलने जा रहा था,इसके पहले तो हमेशा अपने चेलों के साथ घूमने के लिये कभी कोई तैयारी नही लगी पर आज कुछ विशेष यत्न से सारी साज संवार की गई थी,,मन ही मन अपने आप पे खुश होते राजा भईया निकल ही रहे थे कि भाभी जी का स्वर सुनाई पड़ा

” किधर को चली सवारी लल्ला जी?? बड़े बन ठन के निकल रहे हैं ।”
   ‘काली बिल्ली रास्ता काट गई ‘ वैसे भैय्या जी ये सब बातों को नही मानते थे,उन्हें अपनी भाभी पर स्नेह भी था पर उनकी इस कदर की टॉन्ट वाली बातों पे अरुचि भी थी।।

” कुछ नही भाभी बस मन्दिर तक जा रहे थे।।”

” आज कौन से मन्दिर जा रहे लल्ला जी??”
भाभी तो एकदम ही पीछे पड गई,अब बेचारे राजा भैय्या क्या बोलते

” बड़े हनुमान जा रहे,,आप चलेंगी??” आप चलेंगी कुछ इस ढंग से पूछा गया कि इस सवाल का जवाब आपको ना में ही देना है कहीं गलती से हाँ कह दिया तो भईया जी कहीं गाड़ी सहित आपको गंगा जी में ना डूबा आयें।।

” ना ना आप ही जाओ,,बस आते बखत उधर जो सेंतराम हलवाई है ना उसकी चाट हमारे लिये लेते आना,और उसे बोलना छोले कम डालेगा,ज्यादा गीला ना करे,टिकिया को अलग से बाँधेगा नही क्या होता है ना टिकिया गल जाती है सारी की सारी।”

” और कुछ भाभी।।”

” नही बस इत्ता ही याद से ले आना,बहुत है।”

अब राजा बाबु को जाना था रॉयल पैलेस होटल और बड़े हनुमान पड़ते थे घड़ी चौक से दाहिना जाकर,बेचारे झूठ बोल कर बुरा फंसे।।चाट तो वो अपने अनुचरों से भी मँगा लेते पर हनुमान जी का नाम ले दिया,अब मन्दिर नही गये तो भगवान नाराज और होटल टाईम से नही पहुँचे तो बांसुरी ।।

उन्होनें बांसुरी को फ़ोन लगाया,,रिंग बजने पे फ़ोन उठाया उधर से बांसुरी की अम्मा ने__ ” हेलो कौन बोल रा।”

बेचारे राजा भईया पहली बार किसी लड़की के नम्बर पे फ़ोन किये वो भी उसकी माँ उठा ली,अब का करे का ना करें की स्थिति थी।।

” नमस्ते !! बांसुरी है क्या?”
” ऊ तो अभिचे कहीं निकल गई!! बोल के गई है आने में थोड़ा देरी हो जायेगा।।तुम कौन बोल रये बेटा…..इतने में फ़ोन कट गया,राजा भईया को बड़ा गुस्सा आया,अरे इतनी भी क्या हड़बड़ी,,थोड़ा देर में नही निकल सकती थी।।
  हर बात पे बांसुरी की राय लेने की ऐसी आदत हो गई की अब इस आड़े वक्त में क्या करें,राजा भैय्या को सूझ ही नही रहा था।।उन्होनें अपनी गाड़ी उठाई और चल दिये।।

कुछ 20 मिनट बाद राजा भैय्या रॉयल पैलेस होटल की पार्किंग में थे।।गाड़ी खड़े करते हुए जाने क्यों एक अजीब सी बेचैनी उन्हें घेरने लगी।।आज तक किसी काम को करने के पहले दुबारा ना सोचने वाले राजा की हालत खराब थी,इतना तो उसने अपने सारे जीवन मे नही सोचा जितना आज अकेले एक दिन मे सोच लिया।खैर अपने आप को मजबूत कर अन्दर बढ़ ही रहे थे कि__” सर क्या आप अपनी पहली डेट पर आये हैं,अगर हाँ तो हमारे पास आपके लिये कुछ है”

अचानक से दरबान के साथ खड़े होटल मैनेजर के इस सवाल पर राजा भईया घबड़ा गये,एकाएक उनसे बोल ना फूटा__”सर अगर ये आपकी फ़र्स्ट डेट है तो ये रहा आपके लिये एक गुलाब !! हमारी ओर से!! आप अपनी गर्लफ्रैंड को ये दीजिये।।

” पर भैय्या तुम काहे दे रहे फ़्री में गुलाब??”

” सर पॉलिसी है हमारी,आज की तारीख पे हमारे साहब की शादी हुई थी तो आज के दिन जो कपल डेट पे आते हैं उन्हें हम गुलाब और कोम्प्लिमेन्ट्री ड्रिंक और स्टार्टर खिलाते हैं ।”

राजा का ये प्रथम अनुभव था,आज तक अपने चेलों के साथ सेंतराम की कचौड़ियाँ पेली थी या टिक्की।। पीने पिलाने का ऐसा था कि कभी एक बार प्रेम कहीं  से पी पिला के लौटा तो उसकी लटपटाती जिव्हा और उठने वाली कड़वी गन्ध से भी राजा नही समझ पाया तब प्रिंस ने ही सहायता की” अरे ई प्रेम कहीं से पी के आ रहा है भैय्या जी” बस इतना सुनना था कि राजा ने उसे 2 थप्पड़ लगा दिये__
               ” अरे बस बियरे तो पिये हैं,ऊ हार्ड ड्रिंक थोड़ी होता है भैय्या जी,,पुराने सब दोस्त मिल गये रहे जबरिया पिला दिये,औ जो थोड़ी बहुत चढ़ी रही ऊ आपका थप्पड़ उतार दिया।।”
  हालाँकि बाद में राजा ने प्रेम को ताकीद करी की जिम में जहां महिलायें भी आती हैं,वहाँ इस तरह पी कर आना वर्जित है,माफ कर दिया।।
   
  अब आज इस तरह मैनेजर से डाइरेक्ट फ़्री ड्रिंक की बात सुन भैय्या जी ज़रा झेंप गये और सिर्फ गुलाब लिये अन्दर चल दिये।।

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   अन्दर बड़े से हॉल में हल्की-सी रोशनी में हल्का धीमा सा कर्णप्रिय संगीत गूँज रहा था।।रूम फ्रेशनर की खुशबू सारे माहौल को खुशनुमा कर रही थी, ऐसे में भईया जी चारों तरफ नज़र दौड़ाते बांसुरी को ढूँढ रहे थे।।
     राजा को बांसुरी दिख गई,,,वो एक बार फिर अजीब सी परेशानी में घिरने लगा,आज सुबह तक जिसे सिर्फ एक छोटी सी पार्टी समझ कर देना चाहता था, वो रानी से बात होने के बाद से एक छोटी सी डेट में बदल गई ।।कितना भी नादान हो पर राजा डेट का मतलब तो समझता ही था।।
   
” कब आईं बांसुरी?? हमको थोड़ा ट्रैफिक के कारण देर हो गया।”

आज सब कुछ बदला सा लग रहा था राजा को।।
रानी की बातों का असर था या मैनेजर की बातों का, या उस रोमैंटिक माहौल का असर आज बांसुरी वाकई बाकी दिनों से अलग लग रही थी।।
बहुत सुन्दर तो बांसुरी को नही कहा जा सकता था पर वो स्मार्ट थी,अपने आप को सलीके से रखना उसे आता था,अब आठ किलो वजन कम करने के बाद उसका आत्मविश्वास और चमक गया था।।
कुल मिलाकर आज के ज़माने में कही जाने वाली स्मार्ट प्रेजेंटेबल लड़की थी।।

” अरे तुम खड़े क्यों हो राजा बैठो ना।”

” क्या कर रही थी अब तक ” अपनी कुर्सी पर बैठते हुए राजा ने सवाल किया

” कुछ नही ,बस मेन्यू देख रहे थे कि तुम्हारे लायक क्या हेल्दी खाने को मिल सकता है।”

” अरे हमारे चक्कर में ना पड़ो,जो तुम्हें पसंद हो वो मँगा लो।।” राजा के ऐसा बोलते ही बांसुरी मुस्कुरा पड़ी

” अरे राजा अब हमें भी तुम्हारी तरह मूँग और चना ही भाने लगा है,पता है एक दिन तो अम्मा बेचारी रो पड़ी,बुआ से बोलती हैं” लगता है हमार बांसुरी को जिन ऊन पकड़ लिया है,आज कल खाने को देखती भी नही,सिर्फ फलाहार करे है छोरी जिज्जी।” मुझे तो ऐसी हँसी आई,मैनें कहा अम्मा उस जिन्न का एक नाम भी है ” राजा”

बांसुरी तो ऐसा बोल कर फिर हंसने लगी पर राजा बेचारा शरमा गया।।

” अच्छा राजा सुनो तुमसे एक बात पूछना चाहते हैं “

” हाँ पूछो”
” सच तो बोलोगे ना??”
धड़कते दिल से राजा ने कहा” बिल्कुल सच बोलेंगे।”
उसे लगा जाने क्या पूछने वाली है।असल में तो राजा को खुद ही समझ नही आया था,कि इन कुछ महिनों के साथ में कब बांसुरी उसके मन में रात दिन बजने लगी,हर काम उस से पूछ पूछ कर करने की ऐसी आदत हुई कि कई बार जिम के काम से भी कहीं जाना हो तो पहले बांसुरी का अप्रूवल लगने लगा।।राजा तो नही समझा कि ये क्या है लेकिन उसके आस पास के लोगों जैसे प्रेम रानी यहाँ तक की पिंकी को भी समझ आने लगा कि राजा को बांसुरी भा गई है।।

” हम कैसे दिखते हैं,देखो एकदम सच बोलना ,तुम्हें तुम्हारे भगवान की कसम।”

भगवान की कसम सुनते ही भैय्या जी को बड़े हनुमान याद आ गये,दोनों हाथ कान से लगा कर मन ही मन भगवान से माफी मांग कर राजा ने कहा__

” हम सच बोलें तो तुम बहुत ही प्यारी दिखती हो,मासूम सी ।। और होशिया