दिल से…

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बॉक्सर आमिर खान  अक्षय कुमार से पूछते हैं ” हे ब्रो!! एंजॉइंग? और खिलाड़ी कुमार अपने मस्तमौला अंदाज में जवाब देते हैं येह एंजॉइंग ! बेटर लक नेक्स्ट टाइम!!!
   ये सारा स्पोर्ट्समैनशिप इमानदारी की हार बेईमानी की जीत, अलाना फलाना सब कुछ हम भूल जाते हैं जब इंडिया पाकिस्तान के खिलाफ मैच खेलती है।

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   इतना तो कल दिन भर व्रत रखने के बाद औरतों का खून कम नहीं हुआ होगा जितना इंडिया की हार से हो गया।
  

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अगली बार जीत के आना है बता देती हूं( फ्रॉम अनुष्का)

#दिल से देसी❤️
#छोटी सी भड़ास

खुरापातें….

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Son :- मॉमा s e r लिखुँ या s r e ? सर की स्पेलिंग के लिए?

मॉम:- sir …..😡😡😡

#online classes rocks

#kids rockstars…

Originally mine u can share it…😂😂

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aparna …

कुछ खुरापातें…

She posted a ‘roti aloo ki sbji and dal ki thali ” photo on her wall and wrote …

Friday lunch….

खुरापाती ख्याल आया कि लिख दूँ

–चल finally तुझे खाना तो मिला।

पर मन की मन में रह गयी,नही लिख पायी, संस्कार बहुत है न मुझमें।

Next day she again posted her photo and wrote .. gain half kg after eating my favorite panipuri…

एक और खुरापात आई दिमाग में …

अच्छा हुआ बहन कुछ तो गेन किया वरना जिस ढंग से तू डाइट कर के पतली हो रही है, यूनेस्को वाले तुझे देख हमारे यहाँ अकाल न घोषित कर दें।

पर कह नही पायी क्योंकि संस्कार बहुत है ना मुझमें।

बहुत नाइंसाफी है…

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मनचाहा पति पाने के लिए –
हरतालिका, तीज, करवाचौथ, सावन सोमवार, शिवरात्रि व्रत आदि।।

और मनचाही पत्नी पाने के लिए —
CAT, UPSC, NEET, GRE, GMAT आदि।।

बहुत नाइंसाफी है ।।।

🤔🤔🙄🙄

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Once in a blue moon!!!

Once in a blue moon – रिश्ता.कॉम

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    डिनर की प्लेट इन्हें थमा कर मैं वापस रसोई की ओर मुड़ गयी, रसोई साफ़ करने और बरतन धोने।।…..
 
     हम औरतें काम भी सारा ऐसे करती हैं जैसे कोई जंग लड़ रही हों, हाथ काम निपटाते हैं और दिमाग में युद्ध चलता रहता है, कभी सामने वाली पड़ोसन की लाल लपटें मारती नयी साड़ी, कभी सास बहू का ना देख पाया सिरियल, कभी सखी सहेलियों का फॉरेन ट्रिप तो कभी किसी खास मौके पर मायके ना जाने पाने की पीड़ा….

    लेकिन अभी तो वक्त ऐसा चल रहा कि हर औरत के दिमाग में एक ही शमशीर लहरा रही है__ हे प्रभु और कितना काम करवाओगे?? कब खुलेगा लॉकडाऊन? कब दर्शन देगी वो जिसे देखने की राह तकते तकते आंखें पथराने लगी हैं।। इतना ढ़ेर सारा काम तो अपनी आज तक की जिंदगी में कुल जमा नही किया होगा जितना इन एक महिने में कर लिया, भगवान जाने ये कोरोना हम औरतों से किस जनम का बदला ले रहा है??

    यही सब सोचते हुए मैं भी काम में लगी रहती हूँ, लेकिन इसके साथ ही पतिदेव को आराम से सोफे पर पैर पसारे हाथ में थामे रिमोट के साथ मटरगश्ती करते देख अन्दर से सुलग जाती हूँ __ इन्हीं का जीवन सही है, कोई फेर बदल नही हुआ, उल्टा वर्क फ्रॉम होम के नाम पर जल्दी उठने और भागादौड़ी से राहत मिल गयी, कोई मदद नही करेंगे बस सोफे पर लेटे लेटे ऑर्डर पास करतें जायेंगे__” मैडम समोसे खाये बहुत दिन हो गये ना? तुम बनाती भी अच्छा हो, आज शाम ट्राई कर लो फिर!!

  कभी कहेंगे __” सुनो इतना बड़ा सा तरबूज़ ले आया हूँ, सड़ा कर फेंक मत देना, ना खा पाओ तो सुबह शाम मुझे जूस बना कर दे देना”

   अब झाड़ू पोन्छा बरतन कपड़े से कुछ राहत मिले तब तो कोई एक्स्ट्रा काम करे, उस पर इनकी फ़रमाइशें…..

बेचारे फ़रमाइश एक दिन करतें हैं और उसे पूरी कर मैं सात दिन तक उसको पूरा करने की पीड़ा में सुलगती हूँ …..

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  ऐसी ही किसी बिल्कुल ही फ़िज़ूल सी इनकी इच्छा पर मेरे दिल दिमाग में द्वंद चल रहा था और मैं समेट कर सारे धोने लायक बरतन सिंक में जमा कर चुकी थी कि  साहब अपनी प्लेट थामे रसोई में चले आये__ “पनीर पसन्दा बनाने में तुम्हारा कोई जवाब नही, बहुत यमी था, अरे इतने बरतन , लाओ आज मैं साफ़ कर देता हूँ “

   पहला तो खाने की तारीफ कर दी और दूजा मेरे हाथ से धोने के लिये थामी कटोरी छीन ली…..

   ” जाओ जाओ तुम भी खाना खा लो, मैं ये सब निपटाता हूँ ।”

   हाय कहाँ संभालू इतना प्यार……. मैंने प्यार भरे गुस्से से इन्हें देखा और कटोरी वापस ले ली__

  ” आप भी ना!!! जाओ आप न्यूज़ देखो मैं ये ज़रा से तो बरतन हैं , निपटा कर आती हूँ “
   एक तरह से धकिया कर मैने इन्हें रसोई से बाहर कर दिया….. ये काउच पे मैं रसोई में , कुछ देर पहले दिमाग में जो ज्वालामुखी फटने को तैयार था वहाँ मनभावन सावन की बूंदे बरस कर उसे शांत कर चुकी थी, अपने मोबाईल पर अपने पसंदीदा गानों को सेट कर मैंने चलाया और मुस्कुराते हुए काम पर लगा गयी__

   ” मेरे यारा तेरे सदके इश्क सीखा,
         मैं तो आई जग तज के इश्क सीखा,
               जब यार करे परवाह मेरी…..”

  मधुर रोमांटिक गानों के साथ बरतन धोने का मज़ा ही अलग है, बरतन धो कर पोंछ कर करीने से जमा कर , सारा सब कुछ यथावत कर अपनी चमकीली रसोई की नज़र उतार ली।

       चेहरे पर एक मुस्कान चली आयी, काम कुछ किया नही बस मुझे रिझा कर सब करवा लिया…… साहब भी ना पक्के मैनेजर हैं , इन्हें अच्छे से पता है किस लेबर से कब और कैसे काम  निकलवाना है , अब प्राईवेट सेक्टर के बंदे लेबर से कम तो होते नही और उनके सर पर बैठे मैनेजर ठेकेदार!! खैर …..

मैंने  अपनी प्लेट लगाने के लिये केसरोल खोला कि देखा रोटी तो है ही नही__उस समय ये सोच कर नही सेंकी थी कि काम निपटा कर गरमा गरम फुल्के सेंक लूंगी, पर अब मन खट्टा सा हो रहा था, एक ही तो रोटी खानी है , सेंकू या रहने दूँ, दूध ही पीकर सो जाऊंगी…..दिमाग का ज्वालामुखी वापस प्रस्फ़ुटित होने जा ही रहा था कि साहब वापस रसोई में चले आये__
      ”  लाओ ये बेलन दो मेरे हाथ में ” मैं इनकी बात समझ पाती कि तब तक ये मेरे हाथों से बेलन ले चुके थे….

” अब तुम जाओ मैडम!! जाकर सोफे पर आराम फर्माओ, मैं तुम्हारी थाली परोस कर लाता हूँ ।”
    मेरे कुछ कहने से पहले एक तरह से जबर्दस्ती धकिया के इन्होंने मुझे अपने आसन पर बैठा दिया और खुद गुनगुनाते हुए रसोई की ओर चल पड़े

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  ” रोज़ तो तुम्हारा खाना ठंडा हो जाता है, आज मेरे हाथ से गरमा गरम फुल्के खा ही लो।”

  ” पर सुनो एक ही बनाना!!”

  ” क्यों?? आज के लिये ये कैलरी काउंटींग छोड़ो, एक की जगह तीन रोटियाँ ना खा ली तो मेरा नाम बदल देना।”

   कुछ इनकी रसीली बातें और कुछ गरम स्वाद भरा खाना , मैं सच थोड़ा ज्यादा ही खा गयी, चेहरे पर बिल्कुल वही संतुष्टी थी जो दिन भर थक हार के काम से लौटे मजदूर के हाथ में रोटी होने से होती है…..

    पर दिल के आगे एक दिमाग भी है, जिसने तुरंत सोचना शुरु कर दिया था, पर उसी समय मैंने मन ही मन एक छोटी सी कसम ले ली कि ऐसी शानदार थाली परोसने के बदले में पतिदेव ने किचन स्लैब और गैस चूल्हे का जो सत्यानाश किया होगा चुपचाप बिना किसी हील हुज्जत के झेल लूंगी, एक बार फिर सफाई कर लूंगी लेकिन इनके इतने ढ़ेर सारे प्यार के बदले कोई ज़हर नही उगलूंगी…..
     अपनी कसम मन ही मन दुहराती प्लेट रखने रसोई में आयी की मेरी आंखे फटी की फटी रह गईं…….

…..ये क्या मेरे स्वामी तो लिक्विड सोप स्प्रे कर कर के स्लैब को रगड़ रगड़ कर साफ़ कर चुके थे, सारा काम समेट कर गुनगुनाते हुए वो हाथ धो रहे थे, पूरे 20 सैकेण्ड से और मैं उन्हें देखती सोच रहीं थी__

   हाय मैं वारी जांवा , शायद इसे ही कहतें हैं once in a blue moon……….

aparna…..

घरवाली

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            “अरे कहाँ व्यस्त हो भाई लोग ,,सब के सब ऐसा क्या देख रहे कम्पयूटर पे…जरा हम भी तो देखें ।।””
    ” अरे कुछ नही रवीश ,ये मेरी एक दोस्त है ,उसने अपनी पार्टी की फोटो पे मुझे टैग किया है ,फेसबुक पे,तो बस वही देख रहे ,हम दोनो।”
     रवीश भी देखने लगा। कुछ आठ दस लड़कियों का ग्रूप फोटो था,सबने अजीब आढे टेढे मुहँ बना रखे थे,सबसे बीच मे एक निहायत ही खूबसूरत लड़की खड़ी थी ,फ्लाइंग किस करती।
 
       रवीश की आंखे अटक गई ,घूम फिर के बार बार वही चेहरा देखने का मन कर रहा था।
     रवीश एक 25  26साल का सॉफ़्टवेयर इंजीनियर है ,पुणे मे वाकड़ मे खुद का फ्लैट ले चुका है,दिखने मे भी ठीक है,घर वाले अब चाहते हैं,वो शादी कर ले……आज तक उसे अपनी आजादी बहुत प्यारी थी,हफ्ते मे 5दिन काम करो,और 2दिन आराम से दोस्तों के साथ पार्टी करो
  घर मे पानी की बोतल से ज्यादा बीयर की बोतलें पड़ी होती हैं, कोई टोकने वाली तो है नही।
  सामने वाली करंजकर आंटी की बाई आकर साफ सफाई कर जाती है।खाना कभी कैंटीन मे खा लेता है,कभी मैगी से काम चल जाता है।बिल्कुल राजा महाराजा सा जीवन है……पर आज एक अदद फोटो ने सारा खेल बिगाड़ दिया।

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      आज अचानक रवीश को अपने आप पर बहुत तरस आने लगा,कोई नही है ,जो फ़ोन करके पुछे,घर कब आ रहे…..अच्छा सुनो खाने मे क्या पका लूं ….बेचारा! इतवार की रात का कितना भी हैंगओवर हो अगले दिन सुबह खुद ही उठ के नीम्बू पानी बनाना पड़ता है।
      अब उसकी भी उमर हो रही है,उसे भी अब शादी कर के घर बसा लेना चाहिये,हर चीज़ वक्त पे हो जाये तभी अच्छा है….
           आज रवीश को अपनी आज़ादी बहुत खल रही है ।
        एक बार फिर तस्वीर पे उड़ती सी नज़र डाली और अपने क्यूबिक मे आके बैठ गया।

       ऐसा नही था की रवीश की जिन्दगी मे कभी कोई लड़की नही आई,स्कूल कॉलेज मे छोटे मोटे अफेयर हो चुके थे,पर दोनो ही पक्ष बहुत सीरियस नही थे….हाँ दो साल पहले ऑफ़िस मे एक नई लड़की आई थी,रूही…..वो उसे बड़ा भा गई थी।
         वो अक्सर अपने काम के लिये रवीश की राय लेती थी,कभी कभी दोनो साथ ही लंच भी किया करते थे…..उसे रूही अच्छी लगने लगी थी।
     एक शाम तो वो बाँका ज्वेलर्स भी पहूंच गया था,हीरे की अंगूठी लेने,सोचा अंगूठी देके ही प्रोपोस करूंगा ,पर तभी नासपीटे लोकेश का फ़ोन आ गया।
     “यार कहाँ है तू,जल्दी आ जा,,आज तेरी भाभी अपनी बहन के घर रुकेगी….अमित और विक्की भी आ रहे…party करेंगे।”
     “बस यही  ‘पार्टी करेंगे’ एक ऐसा शब्द है जिसे सुन के मरता हुआ लड़का भी जी उठे,और यमराज से लड झगड़ के अपने मित्रों के पास पहुंच जाये।
     बस वही रवीश के साथ हुआ,,हीरे की अंगूठी तो कभी भी आ जायेगी,पर भाभी जी रोज रोज तो मायके जाती नही,बेचारा लड़का पार्टी की तैय्यारियो मे चला गया।
         फिर एक शाम टी ब्रेक मे रूही और रवीश कैन्टीन मे थे -“अरे रवीश तुम्हे मैने बताया नही ना….मेरे मॉम डैड मक्का जा रहे”।
     “मक्का ! वहाँ क्यों? वहाँ तो मुस्लिम जातें हैं ना ?”
    “हाँ तो ! मैं मुस्लिम ही तो हूँ,मेरा पूरा नाम नही पता क्या?  रूही अंसारी।”
   “या अल्लाह! रवीश त्रिपाठी जी किस दुनिया मे रहतें हैं आप ! “
       रवीश चुपचाप मुस्कुराता रहा,चाय पीता रहा।उसे एक महिने मे कभी पता ही नही चला की रूही मुसलमान थी,,अच्छी बहुत लगती थी पर इतना भी नही की अपने घर वालों से शादी के लिये लडता झगड़ता।
     “यार लोकेश बचा लिया यार तूने, 38000बह जाते अंगूठी मे।”
        अभी 6महिने पहले हंसती खिलखिलाती रूही उसे अपने निकाह का कार्ड थमा गई तब उसकी जान मे जान आई,हालांकी रूही के मन मे ऐसा कभी कुछ नही था,फिर भी कार्ड पाके उसे बहुत खुशी हुई।

        पर इस बार बात हर बार से अलग थी,लड़की ऐसी थी की जिसके लिये सारे संसार से लड़ा जा सकता था,इस बार उसे जाति धर्म कुछ नज़र नही आ रहा था।
         बड़ी हिम्मत करके उसने अमित से उस लड़की के बारे मे पूछ ही लिया।
    “मुझे नही पता यार,वो तो रेणू मेरी स्कूल की दोस्त है,उसिने फोटो भेजी थी।”
    “हाँ तो उसी रेणू से पूछ ले”।
“पागल हो गया है क्या,,मरवायेगा तू….रेणु मेरी और मेरी बीवी दोनो की दोस्त है,उससे कुछ पूछा ना तो मेरे घर जाके आग लगा आयेगी।”
   “यार अमित अपने भाई के लिये इतना नही कर सकता तू।”
“और कहीं फिर से लड़की मुसलमान या किरिस्तांन निकली तो?? तेरे अन्दर का पण्डित फिर जाग जायेगा।”
    “नही भाई ,इस बार मुझे सच मे प्यार हो गया है,प्लीज उसका पता कर दे,तेरा अहसान जिंदगी भर नही भूलूंगा।”
       दो दिन बाद अमित ने रवीश को एक फ़ोन नम्बर दे दिया।
     “देख यार,रेणु खुद उस लड़की के बारे मे कुछ नही जानती,रेणु की पार्टी मे उसकी किसी सहेली के साथ ही ये आई थी,,नाम तक नही पता।अब तू जान ,कैसे बात करेगा,क्या करेगा।”

      खुशी से अमित को गले से लगा लिया रवीश ने ,घर जाते समय उसकी कार मे ‘लम्बोर्गिनी ‘बज रहा था,उसने ट्रैक बदल दिया और सोनू निगम का “अब मुझे रात दिन तुम्हारा ही खयाल है” सुनते सुनते घर पहुँचा।
          घर पहुच्ंते ही नम्बर सेव किया और वॉट्सएप्प पे तुरंत डी पी देखा।
     उफ्फ ,कैसा सलोना चेहरा है,कितनी मासूम है,
कितनी प्यारी मुस्कान है,,चेहरे से तो ब्राम्हण ही लग रही,पर चलो नही भी हुई तो भी कोई बात नही।
    अब शादी तो इसी से करनी है,चाहे दुनिया इधर की उधर हो जाये……बहुत हिम्मत कर के अपने दिल को समेट के रवीश ने उसे मैसेज किया
  “हेल्लो ,कैसे हो आप।”
   “Sorry …who is this ?
” hi ,myself Raveesh …मै अमित का दोस्त हूं ।”
   “कौन अमित “?
“आपकी दोस्त है ना रेणु ,,उसी रेणु का दोस्त है अमित।”
“ओह्ह्ह्ह अच्छा आप रेणु के दोस्त हैं।”
“हांजी ,ऐसा ही समझ लिजिये,,क्या मै आपसे कुछ देर बात कर सकता हूँ,आप फ़्री हैं अभी?”
  “असल मे मै,मेरे बेटे का होमवर्क करा रही हूँ,तो अभी तो बात नही कर पाऊंगी।”
   “अच्छा ,बेटा भी है आपका।”और पति ?
  उफ्फ घबराहट मे ये क्या बोल गया….
“Obviously, पति भी है,और बेटा भी।आपको अगर कोई ज़रूरी काम नही है तो हम बाद मे बात करते हैं।”
   रवीश बेचारा रो पड़ा,तुरंत फ़ोन काटा और नम्बर डिलीट किया…..
      उसे बहुत बहुत ज़ोर का गुस्सा आ रहा था,थोड़ा सा रोना भी आया,पर हद है…..लड़कियों को शादी करने  का भी बड़ा शौक है,और शादीशुदा नही दिखने का भी।
         कहीं से भी फोटो मे समझ ही नही आ रहा की कम्बख्त बाल बच्चों वाली है…..पहले का समय अच्छा था कम से कम देख के समझ तो आता था की लड़की शादीशुदा है,किसी की घरवाली है।
            बेचारा रवीश !अपना गम गलत करने एक बार फिर अपने दोस्तों के साथ पार्टी करने चल दिया।।।।

aparna ….

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हमारे दरमियां….

   ऑफिस से आकर सुप्रिया रोज़ की तरह अपने लिये एक कप कॉफ़ी बनाकर अपने फ्लैट की सबसे पसंदीदा जगह अपनी बालकनी में जा बैठी…
    उसकी रोज़ की यही दिनचर्या थी ,एक कप कॉफ़ी और रेडियो पर रफी साहब के गाने सुनते हुए मोबाईल पे आये दिन भर के मेसेज पढना और जवाब देना।रेडियो पर उसका मनपसंद गाना बजने लगा।

   सुहानी रात ढल चुकी ,ना जाने तुम कब आगे।

    वह कॉफ़ी पीते हुए मोबाइल पर मेसेज देखने लगी।
    वॉट्सएप्प पर एक नये नम्बर से आया हुआ पिंग देख सुप्रिया ने उसे खोला,जया का मेसेज था।।
  ” हाय सुप्रिया !! मैं जया,हम स्कूल मे साथ थे, पहचाना।”

सुप्रिया के चेहरे पे एक मुस्कान खिल गयी।।

” ओफ्कोर्स पहचाना,कैसे भूल सकती हूँ जया,भले ही हमारे सेक्शन अलग थे,पर स्कूल की यादें कभी भूली जा सकती हैं क्या?”

” ग्रेट!! सुप्रिया हम कुछ लोगों ने मिलकर स्कूल रियुनीयन प्लान किया है,सभी अपने बैचमेट को ग्रुप में जोड़ते जा रहें हैं,क्या तुझे भी उस ग्रुप में जोड़ लूँ, ग्रुप में हमारी क्लास के बॉयस भी हैं।कोई प्रॉब्लम तो नही है ना?

” बिल्कुल जया ,मुझे भी ग्रुप में जोड़ लो,कोई प्रॉब्लम नही।।

“30 दिसंबर को स्कूल में सुबह सारे शिक्षकों के साथ मनाएंगे और शाम को होटल में डिनर है अपनी अपनी फैमिली के साथ।”
  सभी कंट्री कर रहें हैं,मैं बाकी डिटेल्स बाद में बताऊँगी अभी तुझे जोड़ देती हूं ।

इसके कुछ 30 सेकेंड में ही एक नये ग्रुप में सुप्रिया को जोड़ लिया गया,ग्रुप का नाम था _ reunion 2005 DPS

   ग्रुप में जुड़ते ही सुप्रिया ने उसमें जुडे लोगों को देखना शुरु कर दिया,मन मे अजीब उथल पुथल मची थी,अजीब कश्मकश थी,किसी का चेहरा पहचाना सा लगता तो उसका नाम याद नही आ रहा था, किसी का नाम याद था तो चेहरा भूल गयी थी, उसे खुद पर ही हँसी आ रही थी__ और कर लो टॉप बेटा,पढ़ाई में यूँ खोये रहे कि साथ पढ़ने वालों का चेहरा भी भूल गये…तभी रेडियो पर अगला गाना बजा__

  भूल सकती नहीं आँखें वो सुहाना मंज़र
  जब तेरा हुस्न मेरे इश्क़ से टकराया था
  और फिर राह में बिखरे थे हज़ारोँ नग़में
   मैं वो नग़में तेरी आवाज़ को दे आया था      साज़-ए-दिल को उन्हीं गीतों का सहारा दे दे मेरा खोया हुआ रंगीन नज़ारा दे दे,मेरे महबूब तुझे...

हँसते हँसते उसकी आंखें एक चेहरे पर जाकर अटक गयी__ हाँ वही तो था कार्तिकेय चतुर्वेदी!!
    उसकी क्लास का सबसे शैतान नकारा निकम्मा बैक बेंचर।।
    बचपन से एक ही सेक्शन में थे दोनो,पर कभी दोनो की बात नही हुई,वो  अक्सर सबका मज़ाक बनाया करता ,कोई टीचर उसके लिये”डॉ वाशिंग पाउडर “था तो कोई ” हमारा बजाज “।

    सुप्रिया के चेहरे पर मुस्कान चली आयी ,,बारहवीं में थे तब अक्सर वो जीरो पीरियड़ में अपनी सहेलियों के साथ लाइब्रेरी चली जाया करती थी,
एक दिन लाइब्रेरी के ब्लैक बोर्ड पर उसे एक गाना बहुत ही सुंदर अक्षरों में लिखा दिखा

   चेहरे में घुल गया है हसीं चाँदनी का नूर
   आँखों में है चमन की जवाँ रात का सुरूर
    गरदन है एक झुकी हुई डाली गुलाब की
   अब क्या मिसाल दूँ  मैं तुम्हारे शबाब की।।

फिर तो ये रोज़ का सिलसिला ही बन गया,रोज़ जब सुप्रिया लाइब्रेरी जाती वहाँ ब्लैक बोर्ड पर एक गाना लिखा मिलता।

हुस्न वाले तेरा जवाब नही,
कोई तुझसा नही हजारों में

सुप्रिया से सभी सखियाँ कहतीं कि ये गाने उसीके लिये लिखे जातें हैं क्योंकि ऊपर सुप्रिया का s लिखा होता था ,और गाने के अंत में k

   आप के हसीन रूख पे आज नया नूर है,
   मेरा दिल मचल गया ,तो मेरा क्या कसूर है।।

सुप्रिया बनावटी गुस्सा दिखा कर रह जाती….
कार्तिक की स्कूल में जैसी छवि थी,लड़कियाँ तो क्या शरीफ पढ़ने लिखने वाले लड़के भी उससे दूर ही रहना पसंद करते थे,पर वो मनमौजी अपने मे मगन अपनी मस्तियों में खोया रहता।।
    ऐसे ही एक दिन बोर्ड पर लिखा मिला_

  हम आप की आंखों में इस दिल को बसा ले तो।

जाने सुप्रिया को क्या सुझी उसने उसके नीचे लिख दिया__
  हम मूंद के पलकों को इस दिल को सज़ा दे तो

अब तो लिखने वाले की हिम्मत और बढ गयी, और सुप्रिया की धड़कन भी ,ये सोच सोच कर कि आज जाने क्या लिखा मिलेगा, और अगले दिन_

   इतना है तुमसे प्यार मुझे मेरे राज़दार
   जितने के आसमान पर तारे है बेशुमार।।

बड़े ही अजीबोगरीब तरीके से ही सही कार्तिक ने अपने मन की बात लिख दी, इस गाने को पढ़ने के बाद सुप्रिया की लाइब्रेरी जाने की हिम्मत भी चूकने लगी,,वो कुछ दिनो तक स्कूल ही नही गयी,चार पांच  दिन बाद गयी तो पता चला किसी दूसरे सेक्शन के बच्चों से हुई मार पीट में कार्तिक के हाथों किसी को बहुत चोट लग गयी और इसिलिए कार्तिक को स्कूल से कुछ दिनों के लिये डिटेन कर दिया गया था।।
     उसके बाद बोर्ड की परीक्षा की तैयारियों में खो गयी,,इम्तहान होने के बाद कॉलेज की पढ़ाई के लिये वो अपने मामा जी के पास चली गयी और अपने शहर से नाता ही छूट गया।
   
    पिता की असामयिक मृत्यु और अनुकम्पा नियुक्ति में नौकरी के साथ मिली घर भर की जिम्मेदारियों ने फिर उसे खुद अपने बारे में कुछ सोचने का मौका ही नही दिया।।
    अपने से छोटी बहन को पढ़ा लिखा कर उसकी शादी निपटाने के बाद  वो अकेली ही अपनी माँ  का आसरा थी,इसलिये आजीवन शादी ना करने का निश्चय कर बैठी ,पर छै महीने पहले जब माँ भी उसे अकेले छोड़ गयी तब ये अकेलापन उसे काटने लगा था,पर अब उसके पास उपाय भी क्या बचा था,, 32 की उमर में अपनी शादी का खुद प्रयास करना कितना हास्यास्पद था…

   आज जया से बात होने के बाद वो एक बार फिर अपनी जिन्दगी की सबसे मीठी यादों में चली गयी थी।।
      अपनी सोच में डूबी ही थी कि उसी ग्रुप में किसी का उसे लेकर मेसेज आया__ स्वागत है सुप्रिया।

उसने भी स्माइली भेज दी,,तब दुसरी तरफ से फिर एक सन्देश आया__ अरे हमारा नम्बर तो सेव कर लो,वर्ना तुम्हारा डीपी कैसे देखेंगे।।

सुप्रिया ने मेसेज किया__ “किस नाम से तुम्हारा नम्बर सेव करुँ। ” अब वो बेचारी कैसे कहती की चेहरा तो दिख रहा लेकिन वो उसे पहचान ही नही पा रही

सामने वाले ने तुरंत जवाब दिया–” राघव सिंह ,,याद आया।।”अब तो भई तुम्हें बचपन की बातें याद नही दिल सकते वर्ना तुम्हारे मियाँ जी खफा हो जायेंगे ।।”

सुप्रिया ने वापस एक स्माईली भेज दी,,राघव !! कार्तिक का सबसे खास दोस्त!! अक्सर सुप्रिया के घर के चक्कर कार्तिक राघव के साथ ही लगाया करता था।।सबकी तो शादियां हो चुकी थी,राघव भी अपनी डीपी में अपनी खूबसूरत बीवी और प्यारे से बच्चे के साथ मुस्कुरा रहा था,,तो क्या कार्तिक की भी??
    और क्या?? कार्तिक ने भी शादी कर ही ली होगी, उन दोनों के बीच कोई बातचीत कोई करार तो हुआ नही कभी।।
    फोन बन्द कर वो अपने रात के खाने की तैयारी करने चली गयी।।
   
इसके बाद का एक हफ्ता ऑफिस में बहुत व्यस्त गुज़रा,उसे ठीक से सोने खाने का समय नही मिला, मोबाइल पर मेसेज देखना तो बहुत दूर की बात थी।

   फिर भी बीच में जब कभी समय मिलता वह अपना मोबाइल देख लेती उस ग्रुप में सभी आपस में एक दूसरे को संदेश भेजते पर उसमें कार्तिक का कभी कोई संदेश उसने नहीं देखा,  वह महीना गुजर गया और रीयूनियन वाला दिन आ गया।।

   रीयूनियन की तैयारी करने वाले ग्रुप ने बहुत सलीके से और बहुत जोरदार शानदार तैयारियां की थी लड़के तो यूनिफॉर्म की कलर के ही पेंट और शर्ट पहने हुए थे, लड़कियों ने यूनिफॉर्म की कलर की कुर्तियां डाली हुई थी ।।
वह भी नियत समय पर स्कूल पहुंच गई।।
    जया ने उसे देखते ही आगे बढ़ कर  गले से लगा लिया,, हाथ पकड़ के सभी के पास सुप्रिया को ले गई सारी लड़कियां एक एक कर आकर उसे गले मिलती रही ।
     अपने साथ की लड़कियों को अब एक्स एल और डबल एक्स एल साइज में देख देख कर सुप्रिया को उनके सुखी संतुष्ट वैवाहिक जीवन का परिचय मिलता गया,सबसे मिल कर वो भी प्रसन्न थी।।
” यार सुपी तू तो बिल्कुल नही बदली,अभी भी वैसी की वैसी है ,स्कूल ट्यूनीक पहन के आयेगी तो लगेगा स्कूल मे ही पढ़  रही।।

   अपने शिक्षकों सहेलियों सखियों सब से मिलकर भी सुप्रिया की आंखें किसी को इस भीड़ में तलाश रही थी।। उसकी क्लास के सभी लड़के बारी-बारी से उन लोगों की तरफ आए और मिलकर बातें करके चले गए।।
     स्कूल की प्लेज,प्रेयर सबने एक साथ गायी, सारे टीचर्स को कुछ गिफ्ट दिए गये ,स्कूल को 2005 बैच की तरफ से एक तोहफा दिया गया,,फिर कुछ टीचर्स ने अपने वक्तव्य वहां प्रस्तुत किए इसके साथ ही विद्यार्थियों में से भी कुछेक ने सामने आकर एक आध गीत और वक्तव्य प्रस्तुत किया।।।
     वह तालियाँ  बजा ही रही थी कि उसकी कुर्सी के ठीक पीछे कोई आकर बैठा उसने धीरे से सामने की तरफ झुक कर कहा __ सुप्रिया मुझे पहचाना मैं कार्तिक कार्तिकेय चतुर्वेदी!! कैसी हो?

  सुप्रिया ने झट से पलट कर देखा वह भी तो वैसा ही था जैसा स्कूल में दिखता था बस पहले से लंबा हो गया था और चौड़ा भी, वह उसे देख कर मुस्कुरा दी।।
“सुप्रिया तुमसे कुछ बात करनी है जरा बाहर आओ ।”

” कैसे हो कार्तिक ?? क्या कर रहे आजकल,बीवी बच्चे फैमिली सब कैसे हैं ।।”

” पहले तुम बताओ कैसी हो?? वैसे तुमने शादी नही की ये मुझे पता है,,मेरे बारे में तुम भले ही कुछ ना जानती हो पर तुम्हारे एक एक पल की खबर मुझे थी सुप्रिया,तुम्हें कॉलेज की पढ़ाई के बाद नौकरी करनी पड़ी,तुम आगे पढ़ना चाहती थी,सिविल सर्विस में जाना चाहती थी,पर घर की जिम्मेदारी ने तुम्हें तुम्हारे सपनों को पूरा करने नहीं दिया, यह सब मैं जानता हूं।।
   अभी वो दोनो बात् कर ही रहे थे कि राघव आ गया, उसी समय एक फोन आ जाने से कार्तिक अभी आया का इशारा कर के वहाँ से फोन पर बात करते हुए निकल गया।

” क्या सोच रही हो सुप्रिया,,कार्तिक को कैसे सब पता है यही ना,क्योंकि वह तुम्हारे हर संघर्ष में तुम्हारे पीछे खड़ा था पर तुमने कभी मुड़कर देखा ही नहीं तुमने कभी सोचा  जिस अनुकंपा नियुक्ति को पाने के लिए लोगों को एड़ियां रगड़नी  पड़ती है वह तुम्हें घर बैठे कैसे मिल गयी, इसके अलावा तुम्हारे पिता के नाम का ना तो कोई पैसा रुका और ना कोई और व्यवधान आया,, सब कुछ तुम्हें आसानी से मिलता गया,, क्योंकि वह  जानता था तुम्हारे जीवन में वैसे ही भगवान ने बहुत कष्ट दिए हैं कम से कम इन सबके लिए तुम्हें ज़माने से लड़ना ना पड़े।।
     वह तुम्हारे पीछे तो था पर तुम्हारे सामने कभी नहीं आ पाया उसके घर का तो तुम जानती हो उसके पिता का जमा जमाया कारोबार था  उसने उसी को आगे बढ़ाने की सोची,  उसके पिता को उसके दिमाग पर कुछ ज्यादा ही भरोसा था उन्होंने उसे विदेश एमबीए करने भेज दिया एमबीए करके आने के बाद उसने उनके बिजनेस को और चमका दिया और सिर्फ इसी शहर में नहीं इस देश के कई शहरों में उसका बिज़नेस फैला हुआ है,और वो  बिज़नेस ग्रुप का सी ई ओ है,क्लास का सबसे शैतान लड़का आज शहर का जाना माना बिज़नेस टाईकून है ।
” और शादी ?”

” हां शादी भी कर ली। उसकी मां ने ऐसा इमोशनल ब्लैकमेल किया कि उसे शादी के लिए हां कहना पड़ा ,,उसके पापा के बिजनेस पार्टनर की लड़की दिव्या से उसकी शादी हो गई लेकिन वो उसमें भी कहीं ना कहीं कुछ ऐसा ढूंढता रहा जो उस में था ही नहीं,, आखिर वो दोनो  साथ नहीं निभा सकें और शादी के 1 महीने में ही दिव्या उससे रूठ के अपने घर चली गई बस उसके बाद उन दोनो  तलाक हो गया,  तब से बस वो और उसका बिजनेस।। अब अंकल भी नहीं रहे सिर्फ आँटी  है घर पर,, अभी भी कहती हैं कि शादी कर ले कार्तिक!! मरने से पहले अपने नाती पोते का मुंह देखना चाहती हूं पर वो आँटी  को कैसे समझाये कि जिससे वो शादी करना चाहता है,वो तो कभी शादी ना करने की कसम खा कर बैठी है।।
    यकीन मानो आज भी वो तुम्हारा रास्ता देख रहा है।

   दोनों बात कर रहे थे कि कार्तिक जया और बाकी लोग भी वहां चले आए सबके आते राघव खामोश हो गया ,,सबने शाम को सही समय पर आने का वादा लिया और अपने अपने घर की ओर चले गए।।

   शाम को 7 बजे से होटल ऑर्किड में जो उन सब की महफिल सजी कि समा बन गया।।कार्तिक तो पहले से ही रफी साहब के गानों का जबर्दस्त प्रशंसक था,उसने इसिलिए रफी नाईट का आयोजन कर डाला,स्थानीय गायकों ने एक एक कर रफी साहब के गीत गाने शुरु किये

   इक हसीन शाम को दिल मेरा खो गया
पहले अपना हुआ करता था अब किसीका हो गया…..

राघव कहाँ चुप बैठने वाला था,उसने भी माईक पकड़ राग छेड़ दिया__

    गुनगुना रहे हैं भँवरे खिल रही है कलि कलि,।।

उसके बाद एक से एक गानों के साथ महफिल का रंग जमता चला गया , आखिर कार्तिक ने भी एक तराना सुप्रिया को देखते हुए छेड़ ही दिया__

    ऐसी ही रात, भीगी सी रात
हाथों में हाथ, होते वो साथ
कह लेते उनसे दिल की ये बात
अब तो ना सताओ, ओ हो …
खोया-खोया चांद खुला आस्माँ…

तभी एक वेटर ने सुप्रिया के हाथ मे एक पर्ची पकड़ा दी__” आज भी तुम्हारी राह देख रहा हूं,अगर तुम्हारी हाँ है तो कोई इशारा कर दो बस,,मैं आकर तुम्हारा हाथ थाम लूंगा….कार्तिक।।”

   सुप्रिया ने आगे बढ़ कर माईक अपने हाथ मे ले लिया और बहुत धीमे से शर्माते हुए गाना शुरु किया__

     बहार बन के आऊँ कभी तुम्हारी दुनिया मेगुज़र न जाएं ये दिन कहीं इसी तमन्ना में
तुम मेरे हो, हाँ तुम मेरे हो आज तुम इतना वादा करते जाना चुरा लिया … चुरा लिया है …

कार्तिक की खुशी का ठिकाना नही रहा ,वो तुरंत कूद कर सुप्रिया के पास पहुंच गया और उसके हाथ से हौले से माईक लेकर गाने को पूरा कर दिया__

   सजाऊँगा लुट कर भी तेरे बदन की डाली को
लहू जिगर का दूँगा हंसीं लबों की लाली को
  है वफ़ा क्या, इस जहाँ को एक दिन दिखला दूँगा मैं दीवाना चुरा लिया… चुरा लिया है …

और कार्तिक ने सुप्रिया का हाथ थाम लिया,सुप्रिया ने शरमा कर आंखे झुका ली ।।
   कार्तिक ने अपने जेब से एक रिंग निकाली और सुप्रिया से आंखों ही आंखों में पहनाने को पूछ लिया सुप्रिया के हाँ कहते ही उसने वो अंगूठी उसे पहना दी।।

   तभी किसी ने माईक लेकर एक नया तराना छेड़ दिया__

     इशारों इशारों में दिल लेने
वाले बता ये हुनर तूने सीखा कहाँ से
निगाहों निगाहों में जादू चलाना
मेरी जान सीखा है तुमने जहाँ से ….

aparna…


Yes I am spexcy …..

मासूम मुहब्बत ….
           ऐनक की…..

  आज का टॉपिक मासूम देख कर मुझे मेरी बचपन की मासूम मुहब्बत याद आ गयी…
बड़ी अजीब सी मुहब्बत थी ये … चश्मों की मुहब्बत…

  कॉलेज सेकंड ईयर में पहुंचते ही हम सब एकदम से सीनियर्स बन गए, और कॉलेज में आई जूनियर्स की बहार…

  एक सतर पंक्ति में सर झुकाये चलती फर्स्ट ईयर की लड़कियों में चौथे या पांचवे नम्बर पर उसे देखा मैंने…
  सुंदर सी मासूम सी लड़की और उसकी छोटी सी नाक पर टिका ब्लैक प्लास्टिक फ्रेम का बड़ा सा चश्मा..
पर सच कहूँ तो ये समझना मुश्किल था कि चश्मा लगा कर वो ज्यादा खूबसूरत लगने लगी या उसके लगाने से चश्मा सुंदर हो गया..
  मेरी एक दोस्त ने कहा भी” हाय कितनी सुंदर है और अभी से चश्मा चढ़ गया”
  ” अच्छी तो लग रही है। और चश्मा तो सुपर है। “

मेरी दोस्त ने मुझे अजीब नज़रों से घूर कर देखा…

  और मुझे मेरे बचपन का पागलपन यानी चश्मे से प्यार याद आ गया…

  घर पर कोई भी मेहमान आये मैं उनका टेबल पर रखा चश्मा चुपके से ले उड़ती…….
   फिर अपने कमरे में वो चश्मा अपनी नाक पर चढ़ाये आड़े तिरछे मुहँ बना कर खुश होती रहती…
  मेहमानों के जाने के पहले चुपके से वापस चश्मा रख आती…
   जिन्हें चश्मा लगा होता उनके लिए मन में एक अलग सा सम्मान पैदा हो जाता, यूँ लगता इनसे सिंसियर कोई हो ही नही सकता।
  घर पर मम्मी पापा दोनो को चश्मा लगा था…शायद इसलिए चश्मे के लिए आदर भाव था…
    स्कूल में पसंदीदा टीचर भी चश्मे पहनते थे, पर लाख कोशिशों के बावजूद मुझे चश्मा नही लग पा रहा था।

मम्मी अक्सर कहतीं “मोनी रात में लैम्प जला कर मत पढ़ा करो बेटा चश्मा लग जाएगा और मैं सोचती काश लग जाये…

पापा अक्सर सुबह सूरज की रोशनी में पढ़ने की सलाह देते…आंखों की ज्योति बढ़ती है सुबह उगते सूर्य के दर्शन करो, आंखों में पानी के छींटे डाला करो, सुबह सवेरे नंगे पैर गीली घास पर चलो, ओस से पैर भीगते हैं तो आंखों की रोशनी बढ़ती है।
    और मैं सोचती क्या पैर के तलुओं से ओस आंखों तक पहुंच पाएगी( इस बात पर भरोसा करना मुश्किल होता) लेकिन पापा ने कहा है तो कोई लॉजिक तो होगा इसलिए इस बात को पूरी तरह नकारा भी नही जा सकता था..
   यही सोच कर पापा के नेत्र ज्योति बढ़ाने वाले कोई उपाय नही करती, मुझे  चश्मा जो चाहिए था…

  पर लगातार पढ़ने, टीवी देखने के बावजूद मुझे चश्मा नही लगा…
   लेकिन मेरी बहुत प्यारी सहेली को चश्मा लग गया और उस रात मैं फुट फुट कर रोई…
तब तक शाहरुख खान ने बताया नही था कि जिस चीज़ को शिद्दत से चाहो कायनात उसे आपसे मिलने…. वगैरह वाला डायलॉग..
    पर कुछ दिनों बाद एक चमत्कार हुआ…
, उस वक्त बारहवीं जमात में थी, शायद पढ़ाई या मेडिकल एंट्रेंस का टेंशन था।  हफ्ते भर से सर का दर्द जाने का नाम नही ले रहा था…
  आखिर पापा डॉक्टर के पास ले गए… आंखों की जांच हुई और डॉक्टर ने पापा को अगले दिन अकेले बुला लिया…

डॉक्टर से मिल कर पापा वापस आये और मुझे अपने पास बुला कर बिठा लिया, प्यार से सर पर हाथ फेरते मुझे समझाने लगे…

” बेटा परेशान होने की बिल्कुल ज़रूरत नही है!”

  मैं घबरा गई,लगा अभी तो एंट्रेंस दिया भी नही रिज़ल्ट भी आ गया…
  पापा फिर धीरे से आगे बढ़े, पापा को बहुत धीमी गति से बोलने की आदत है और उनकी स्पीड पर मैं कई बार इमपेशेंट हो जाती हूँ……

” देखो बेटा डॉक्टर ने कहा है….

  मेरा दिल शताब्दी से होड़ लगाने लगा, मुझे एक पल को लगा मुझे ब्रेन ट्यूमर तो नही हो गया जो पापा इतनी भूमिका बांन्ध रहे।
   मुझे ब्रेन ट्यूमर से ज्यादा चिंता ट्रीटमेंट के लिए मुंडाए जाने वाले बालों की होने लगी कि पापा ने बात आगे बढ़ाई…

” डॉक्टर का कहना है लगातार लगाओगी तो एनक उतर जाएगी।”

हाय! बस अब और कुछ नही चाहिए उस ऊपर वाले से। उसने मेरी झोली चश्मे से जो भर दी….
  इधर मेरी खुशी सम्भल नही रही थी, उधर पापा की समझाइश खत्म नही हो रही थी……

  फ़ायनली वो ऐतिहासिक दिन मेरे जीवन में भी आ गया जब मैं अपने शहर के सबसे बड़े चश्मे के शो रूम में खड़ी थी। चारो तरफ चश्मे ही चश्में देख कर मेरे चेहरे की मुस्कान जा नही रही थी और मुझे मुस्कुरातें देख पापा के चेहरे पर राहत थी…
हालांकि इतने शौक से बनवाया मेरा पहला सुनहरी फ्रेम का पतला सा चश्मा सिर्फ छै महीनों में उतर गया…
मैं तो उतारना नही चाहती थी पर पापा की ज़िद  थी आंखे चेक करवाओ…
   और एक बार फिर मेरा दिल हार गया और आंखें जीत गयी..
   और मेरी मासूम मुहब्बत मेरा चश्मा जाने कहाँ खो गया….

कभी कभी कुछ बेमतलब की बातें कुछ बेखयाली खयाल भी लिख लेने चाहिए….
    बस ऐसे ही लिख दिया… कुछ बेसर पैर का…

aparna

संविधान

” मैं नही खाती नॉनवेज !! मुझे पसंद नही।”

” जब कभी खाया ही नही तो कैसे पता कि पसंद नही आयेगा।”
   कुछ देर सोच कर मैने कहा__

” हिंदू हूँ,पंडिताईंन!! मेरे धर्म में  नही खाते ,इसिलिए नही खाती, समझे!!”

  अपनी ज्ञान भरी बात पर मैं इठला गयी,पर तभी उसने कुछ ऐसा कहा कि एक ग्लेशियर पिघल गया, एक पतझर झर गया और एक सावन बह गया ….

” मैं भी नही खाता,इसलिये नही क्योंकि मेरा धर्म कहता है मत खा! मै इसलिये नही खाता क्योंकि मैं किसी जीव को अपने मुहँ के स्वाद के लिये मार नही सकता…सिर्फ कुछ एक मांस पेशियों की मज़बूती के नाम पर एक लाश पका कर नही खा सकता,,मैं नही खा सकता क्योंकि मैं मानवता को सर्वोपरी मानता हूँ, वही है मेरा धर्म, मानव धर्म!!

   ये मेरे जीवन का संविधान लिखा था उसने ,जिसके बाद मैं उसकी हो गयी,, और हमेशा हमेशा के लिये मेरी स्वतंत्रता छिन गयी….
       उसके बंधन जो बंध गयी थी।।

aparna…

बेबात की बात:–

ये जो बात बात पर लोग स्टेटस अपडेट करतें हैं ना, बेबात की बात है….         सारी ज्ञान की बातें सोशल मीडिया पर बहातें हैं ना, बेबात की बात है…..      वक्त पड़ने पर वहीं बांटा ज्ञान भूल जातें हैं , बेबात की बात है…..   आजकल तो पोहा भी बनाये लड़कियाँ तो ऐसे स्टेटस अपडेट करेंगी जैसे उदयपुर की राजकुमारी हों और पहली बार अपने महल के खानसामा के हाथ से कलछी छीन कर कुछ बनाया हो, देखा जाए तो ये सबसे बड़ी बेबात की बात है…. अजूबी हेयरस्टाइल हो या नया हेयरकट, कोई डिश हो या नए जूते हर बात की अपडेट उफ्फ कतई बेबात की बात है….  तो दोस्तों आपस में स्टेटस का आदान प्रदान नही बल्कि बातें करों क्योंकि यही बातें आगे यादें बनने वालीं है बेबात की बात तो हर कोई भूल ही जायेगा….