जीवनसाथी

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  • जीवनसाथी पार्ट -1

               मेरी कहानी shaadi.com को आप सब ने बहुत पसंद किया उस कहानी को एक बहुत सामान्य से विचार के साथ शुरू किया था कि एक साधारण रंग-रूप की सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार की लड़की कैसे अपनी बुद्धि के बल पर अपनी सफलता का आयाम रचती है कहानी का नायक जो गोरा सुंदर है, नायिका की … “जीवनसाथी पार्ट -1”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी पार्ट-2

    अब तक आपने पढ़ा बाँसुरी पढ लिख कर मुम्बई में नौकरी करने लगती है और अपनी ऑफिस कुलीग माला और उसकी दोस्त पिंकी के  साथ एक फ्लैट में रहने लगती है, अब आगे…डेढ़ साल से साथ रहते रहते तीनों में पक्की दोस्ती  के तार बंध चुके थे….     माला का एक कॉलेज के जमाने का दोस्त … “जीवनसाथी पार्ट-2”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी पार्ट -3

        जीवनसाथी– 3   अब तक — भास्कर की पुणे ट्रंसफार की खबर पर भास्कर के कहने पर बांसुरी और भास्कर के घर वाले एक दूसरे से मिल कर सगाई की तारीख निश्चित कर देतें हैं, पर उसी तारीख पर माला अपने पति के साथ नीदरलैंड्स चली जाती है और पिंकी को भी अपने क्रैश … “जीवनसाथी पार्ट -3”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी पार्ट-4

     जीवन साथी–4        सगाई निपटते ही सारे मेहमान एक एक कर चले गये ,शाम गहरी ढ़ल चुकी थी,काम वाली रेखा को चाय चढ़ाने को बोल कर प्रमिला अपनी जेठानी के साथ सामान समेटने में लग गयी__    ” बड़ी सुंदर अंगूठी पहनाई है ना जिज्जी!!”   ” हाँ प्रमिला,,लाड़ो की सास ने भी चोखा हार पहनाया … “जीवनसाथी पार्ट-4”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी पार्ट-5

      ” श्योर!! थैंक यू सो मच सर आपने सीट देकर मैडम पर बहुत आभार किया,, मैडम आप किसी तरह यही एडजस्ट कर लीजिए सुबह तक में, मैं देखता हूं अगर कहीं कोई सीट खाली होती है मुंबई से पहले, तो मैं आपको आकर जरूर इन्फॉर्म कर दूंगा , आप तब वहां शिफ्ट हो जाएगा … “जीवनसाथी पार्ट-5”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -6

      सुबह खिड़की पर चिड़ियों की ची ची सुन बांसुरी की नींद खुल गयी, मुस्कुराते हुए एक अंगडाई ले वो  उठ बैठी, खिड़की पे चहचहाती चिड़ियों को कुछ देर देखने के बाद वो अपने कमरे का दरवाज़ा खोल अपने लिये सुबह की कॉफ़ी बनाने रसोई में जा ही रही थी कि हॉल के सोफे पर सोये उस अनजान अजनबी पर नज़र पड़ते हो वो उलटे पैरों अपने कमरे की ओर भाग गयी,  जल्दी जल्दी हाफ पैंट बदल कर पूरी लम्बाई वाली लोअर के साथ श्रग पहन कर वो रसोई की ओर चल दी, अपने लिये कॉफ़ी बना रही थी कि बाहर से आने वाली आवाज सुन उसने हॉल में झांक के देखा, वो अपने अनाड़ी हाथों से चादर को तह करने की कोशिश में लगा था_

  • जीवनसाथी- 7

    जीवनसाथी – 7 जब सभी कैन्टीन को निकल गये तब उसने भास्कर का फ़ोन मिला लिया__ ” कैसे हैं आप ?? हाँ मैं तो एकदम ठीक हूँ, सुनो मुझे आपको कुछ बताना था।” ” हाँ बोलो ना, वैसे मुझे भी तुम्हें कुछ बताना था, बंसी तुम्हें मेरा वो दोस्त याद है सनी ?” ” हाँ … “जीवनसाथी- 7”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -8

    जीवन साथी– 8     राजा की नींद कुछ जल्दी ही खुल गयी, अभी सुबह पूरी तरह हुई नही थी, बाहर हल्का उजाला अन्धेरे की गोद में अब भी छिपा था, वो मुस्कुराते हुए उठ बैठा, सबसे पहले उसने बालकनी के पर्दे खोल कर स्लाइडिंग डोर खोल दिया, देखा तो बांसुरी बालकनी की कुर्सी पर बैठी … “जीवनसाथी -8”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -9

      जीवन साथी – 9    बांसुरी अपने कमरे में जाने के बाद सीधे नहा कर तैयार होकर ही बाहर निकली, उसके बाहर आते तक में राजा ने अपना बिस्तर समेट कर बाहर का कमरा साफ़ सुथरा कर लिया था….   ” अरे वाह !! तुमने तो पूरा कमरा समेट दिया।।”   ” हम्म्म्म पर मुझे … “जीवनसाथी -9”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी – 10

    जीवनसाथी -10 मौसमी के फ्लैट से निकले बांसुरी और राजा कैब में बैठे आगे निकल गये, बांसुरी अपना फ़ोन निकाल कर भास्कर को मौसमी के घर जाने के बारे में बताने लगी और राजा कैब में चलते गाने को सुन एक बार फिर किन्हीं यादों में खो गया, बांसुरी ने एक बार राजा को देखा … “जीवनसाथी – 10”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -11

    जीवन साथी-11   अगले दिन बांसुरी बाकी दिनों की अपेक्षा और जल्दी उठ कर काम पर लग गयी, उसकी रसोई में चलती उठा पटक सुन राजा की भी नींद खुल गयी, उसने रसोई में झांक कर देखा तो बांसुरी पूरी तन्मयता से खाने की तैयारी करने में लगी थी, उसे जागा हुआ देख पूछ बैठी__ … “जीवनसाथी -11”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -12

    जीवन साथी – 12        देर होती देख बांसुरी को उसकी सोसाइटी के मेन गेट पर ही उतार कर भास्कर और उसके परिवार ने बांसुरी से बिदाई ले ली…..   घर पहुंचने की खुशी में बांसुरी ने अपनी मौसी सास और उनकी सास ननंद के पैर एक बार फिर छुए और चिंकी को बाय बोल कर … “जीवनसाथी -12”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-13

    जीवन साथी- 13    और राजा ने अपनी शर्ट में बड़ी कुशलता से छिपा कर रखी छोटी सी टाईटेनियम गोल्ड सुपर ईगल निकाल कर सामने रख दी, अपनी आंखों के सामने चमकती इतनी महंगी राजसी गन को देखते ही प्रिंस ने राजा को वापस देखा__    ” काहे कानपुर ए से हो का?”    ” … “जीवनसाथी-13”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी- 15

    जीवनसाथी – 15   कुछ ही देर में राजा और बांसुरी वापस विवाह स्थल पर पहुंच चुके थे….     ” मैं एक बार मौसमी से मिल कर आती हूँ, फिर निकलतें हैं।”   राजा ने बांसुरी की बात पर हाँ में सिर हिलाया और प्रिंस से विदा लेने चल पड़ा __ ” अरे ई का बोल … “जीवनसाथी- 15”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -16

    जीवन साथी –16     “अगर तुम बताना सही समझो तो बता दो पिंकी कि आखिर वो क्या तकलीफ है जो राजा अपने दिल में दबाये है, एक दो बार कुछ इशारा तो दिया लेकिन कभी कुछ खुल के बताया नही।”    ” अच्छा!! वैसे तो राजा भैया सबसे अपने मन की बात कहते नहीं हैं, … “जीवनसाथी -16”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी – 17

    जीवन साथी -17   पिंकी ने सवालिया नजरों से राजा की तरफ देखा   ” भाई सच बताना , आप अब भी गाते हो?”   ” हाँ छुटकी, कभी कभी गा लेता हूँ, वो देख उधर क्या रखा है?”   दीवार के सहारे लगी गिटार देख पिंकी की आँखे चमकने लगीं …..   वो राजा … “जीवनसाथी – 17”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी – 18

    जीवन साथी – 18 ” अरे नही नही राजा तुम गलत सोच रहे हो… “अच्छा जी मैं गलत सोच रहा हूँ, अरे बुद्धू हम पिछ्ले पांच दिनों से अकेले ही थे घर पे, कुछ गलत करना होता तो कब का कर के निकल चुका होता, तुम रोक पाती मुझे? पागल लड़की।”   अपनी बात पूरी कर … “जीवनसाथी – 18”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी – 19

    जीवन साथी -19        इन सपनों की तस्वीरों से            इन यादो की जंजीरो से      अपने दिल को कैसे, हम आज़ाद करेंगे       ये मौसम चले गये तो, हम फरियाद करेंगे      ये लम्हे, ये पल हम बरसो याद करेंगे…….. टैक्सी में चलते गाने को गुनगुनाती बांसुरी खिड़की से बाहर उगते सूरज को देखती खोई रही, तभी … “जीवनसाथी – 19”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी – 20

    जीवन साथी- 20           तुझे ऐसे रखूँ कभी खोए नहीं         किसी और का तू कभी होए नहीं            तुझे पाऊँ तो खो जाऊँ मैं          फिर खुद को कहीं ढूँढू तुझमें            तू बन जा गली बनारस की          मैं शाम तलक भटकूँ तुझमें……. गाने में खोयी बांसुरी देर तलक साथ वाले बजरे को देखती रही, जब … “जीवनसाथी – 20”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -21

    छिप कर हँसने की कोशिश में पान्डे की आवाज़ सुमन तक पहुंच गयी, बांसुरी भी लाख छुपाने की कोशिश में भी हँसी रोक नही पायी इसलिये आँख में कुछ गिरने का अभिनय करती वो अपने दुपट्टे से आंखों को पोंछने लगी, पर एक अकेला राजा चुपचाप खड़ा पूरी कविता सुन गया, अभी उसने ताली बजानी शुरु की तभी कहीं से एक गोली चली और राजा के कंधे से गुज़र गयी।

  • जीवनसाथी -22

    ओटी के ठीक बाहर के रूम में राजा को शिफ्ट कर दिया गया था, कांच के दरवाज़े के बाहर खड़ी बांसुरी ने उसे देखा। सुबह के साढ़े चार बज रहे थे।              उत्तर भारत के शहर बनारस के अस्पताल के मन्दिर में ठेठ दक्षिण भारतीय अंदाज़ में भगवान को जगाने की प्रार्थना ” सुप्रभातम ” सुब्बलक्ष्मी की आवाज़ में शुरु हो गयी थी।

  • जीवनसाथी – 23

    बांसुरी ने पिंकी को पानी के लिये पूछा और उठ ही रही थी कि उसका ध्यान गया इतनी देर से उसने राजा का हाथ थामा था जिसे नीम बेहोशी में राजा ने ज़ोर से पकड़ रखा था। अपने हाथ को देख कर उसका ध्यान पिंकी पर गया, पिंकी के चेहरे पर कुछ रंग आये और चले गये, उसने खुद उठ कर पानी पी लिया , उसके चेहरे के बदलते रंगों को देख बांसुरी ने राजा के हाथों से अपना हाथ धीरे से अलग कर लिया……

  • जीवनसाथी -24

    जीवनसाथी – 24      राजा के आंखें बन्द करने के कुछ देर बाद बांसुरी  खिड़की के पास लगे सोफे पर ही बैठ गयी, और कुछ देर बाद वहीं सोफे के हत्थे पे सिर टिका कर दो दिन की जागती आंखें सो गईं।     सुबह खिड़की से छन कर आती रोशनी उसके चेहरे पर पड़ कर … “जीवनसाथी -24”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-25

    जीवन साथी – 25           जैसे हरियाली और सावनजैसे बरखा और बादलतेरे लिए मैं, मेरे लिए तू तू जाने या मैं जानूँ…..  प्यार में होता है क्या जादू तू जाने या मैं जानूँ…..    बांसुरी के गीत समाप्त करते ही राजा ने उसे आंखों आंखों में शुक्रिया अदा किया और वापस सामने मुड़ कर प्रेम को … “जीवनसाथी-25”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-26

    जीवन साथी–26          पिंकी ने आंखों के इशारे से उसे फ्रिज के बाजू में बने लकड़ी के रैक की ओर इशारा कर दिया, जहां गरम पानी की इलेक्ट्रिक केतली के साथ ही अलग अलग चांदी के बरतनों में दूध चिनी, टी बैग्स और कॉफ़ी पड़ी थी और साथ ही रखा था एक कॉफ़ी पर्कोलेटर!   जिसे … “जीवनसाथी-26”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-27

    जीवनसाथी- 27 बांसुरी!!                ये सामान तुम्हारे किसी एहसान का बदला नही है और ना ही ये तुम्हारे आत्मसम्मान पर कोई चोट है क्योंकि अब हम दोनो उस मोड़ से थोड़ा आगे बढ़ चुके हैं।   पहले मैं तुम्हारी सहेली का भाई था पर अब तुम्हारा भी दोस्त हूँ। और दोस्तों के बीच लेन देन कोई … “जीवनसाथी-27”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -28

      जीवन साथी- 28 बांसुरी  अपने कमरे में जाने के लिये पलटी ही थी कि सामने ही रूपा से टक्कर होते होते बची__ ” नजरें ज़मीन पर रखिये तो सही होगा वर्ना ऐसे ही इधर उधर टकराती रहीं तो भगवान भी आपको गिरने से नही बचा पायेंगे।”   रूपा के कटाक्ष को समझ ना पाने … “जीवनसाथी -28”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-29

    जीवन साथी- 29 राजा मुस्कुरा कर उठ गया, और बिना देर किये वहाँ से बाहर निकल गया…… राजा की खुशी और पिंकी के मन की बात के बीच उलझी बांसुरी इसी उधेड़बुन में खोयी थी कि अब पिंकी को राजा से हुई बात कैसे बताये कि इसी बीच रूपा भाभी ने अपने स्वभाव के अनुरूप … “जीवनसाथी-29”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-30

    जीवन साथी – 30     पहले कुछ दिल से…..    अभी कहानी के पिछ्ले एक या दो भाग आपको शायद कुछ दुखी कर गये, आगे आने वाले एक दो भाग आपको विचलित भी कर सकतें हैं, लेकिन विश्वास रखिये सारी कठिनाइयाँ पार कर के एक प्यारी सी प्रेम कहानी उभर के आयेगी।    कहानी में मुख्य … “जीवनसाथी-30”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -31

    जीवन साथी- 31    “कहाँ तक पैदल जायेंगी, महल पहाड़ी पर बना है , यहाँ से पैदल उतरने में ही आपको रात हो जायेगी। आईये गाड़ी में बैठिए, आपको सही समय पर भोपाल एयरपोर्ट तक छोड़ देंगे।     समय खराब मत किजीये, आईये बैठ जाइये।”   बांसुरी ने गाड़ी का दरवाज़ा खोला और बैठ गयी, उसके … “जीवनसाथी -31”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-32

    जीवन साथी- 32               पता नही कैसी बिना मौसम की बारीश थी कि पानी के साथ  उतनी ही तेज़ बिज़ली भी चमक रही थी। कहीं बहुत ज़ोर की बिज़ली गिरी और बादलों की तेज़ गड़गड़ाहट के साथ महल के एक हिस्से की बत्तियां बुझ गईं।          हमेशा की जानी पहचानी सीढिय़ां थी, इसी से … “जीवनसाथी-32”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -33

    जीवन साथी- 33      जिस में जवान हो कर, बदनाम हम हुए    उस शहर, उस गली, उस घर को सलाम     जिसने हमें मिलाये, जिसने जुदा किया    उस वक़्त, उस घड़ी, उस गज़र को सलाम    ऐ प्यार तेरी पहली नज़र को सलाम सलाम…..     शाम ऑफिस से लौटने के बाद बांसुरी को कई दिनों बाद एकान्त … “जीवनसाथी -33”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-34

    जीवन साथी–34     इधर अपनी बालकनी में बैठा राजा किसी बहुत ज़रूरी काम को निपटाने की रूपरेखा बनाता बीच बीच में बांसुरी को याद कर मुस्कुराता जाता था।    अपने साथ मुम्बई चलने के लिये उसने प्रेम से भी कह दिया था।    सामने वाली बालकनी को देखती राजा की थकी आंखें कब मूंद गईं उसे … “जीवनसाथी-34”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -35

    जीवनसाथी -35    बांसुरी ने घूर कर एक नज़र राजा को देखा__” क्या”   ” बताता हूँ, दो मिनट ठहर कर सांस तो ले लूँ। भाग भाग कर थक गया हूँ।”    राजा वहीं दीवार के सहारे टिक कर खड़े हुए बांसुरी को देख मुस्कुराता रहा, बांसुरी धीमे कदमों से चलती उसके पास चली आयी, … “जीवनसाथी -35”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी – 36

      जीवन साथी – 36      सुबह !          हर एक सुबह अपने साथ कई नई उमंगे आशायें,सपने उनको पूरा करने की कोशिश, उस कोशिश की सफलता असफलता जाने कितना कुछ खुद में समेटे आती है।     उन सपनों और कोशिशों के बीच की जद्दोजहद है ज़िंदगी ! सब अपने सपनों सा साकार हुआ तो खुशनुमा वर्ना … “जीवनसाथी – 36”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -37

    जीवन साथी- 37 प्रिंस से बिदा लेकर वो सभी बांसुरी के घर की ओर निकल गये।     ” बंसी वो अपना कुल्फ़ी वाला तो अभी भी उसी स्क़्वेयर पर अपना खोमचा लगाता होगा ना?”   ” हाँ, वो तो सदियों से वहीं लगाता आ रहा है।”    ” तो चलें पहले कुल्फ़ी खा लें? पिंकी … “जीवनसाथी -37”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-38

    जीवन साथी- 38      रुको मैं ले कर आती हूँ, तुम्हारी एक शर्ट मेरे पास भी रखी है।” बांसुरी अपनी बात कह कर उठ कर कमरे में चली गयी और पिंकी रतन प्रेम सभी राजा को देखने लगे   ” अरे ऐसे मत देखो तुम लोग। उस समय बांसुरी के साथ रहा था ना कुछ … “जीवनसाथी-38”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-39

    जीवन साथी- 39 ……………..        राजा ने पहली बार प्रेम को ऐसे अपना आपा खोते देखा था, वर्ना सदैव शांत और सयंत रहने वाला लड़का बड़ी से बड़ी आपदा में आज तक राजा के आगे ढाल बना खड़ा रहा था, लेकिन आज जैसे किसी सूखे ठूंठ सा ढह जाने को आतुर हो गया था।    उसके … “जीवनसाथी-39”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-40

    जीवन साथी–40         शनिवार की रात थी, भास्कर को सिंगापुर निकलना था, सारी तैयारियाँ निपटा कर उसने अपने फ़ोन का चार्जर ऊपर हैण्ड लगेज में रखने के बाद उसने बांसुरी को फ़ोन लगा लिया__    ” कैसी हो?”   ” ठीक हूँ। आप कैसे हैं?”    ” मैं भी एकदम बढ़िया। बस निकल ही रहा … “जीवनसाथी-40”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-41

    जीवन साथी –41      भास्कर की फ्लाईट लगभग सुबह साढ़े चार पर सिंगापुर लैंड हुई।  अपना सामान समेट के बाहर आने के बाद वो टैक्सी के लिये देख ही रहा था कि अदिती का फ़ोन आ गया__   ” पहुंच गये सेफली?”   ” यस मैम! आप इतनी सुबह सुबह जाग गईं।”   ” हम्म … “जीवनसाथी-41”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-42

    जीवन साथी-42        सुबह सवेरे जल्दी उठ कर गणेश जी के सामने दीपक जला कर उन्हें प्रणाम कर बांसुरी अपने घर के लिये निकल गयी। अगले दिन दीवाली थी….आज रूप चौदस थी, बचपन से उसकी माँ आज के दिन उन दोनो बहनों को सुबह चार बजे ही उठा देती थी ….     अगरु चंदन का लेप … “जीवनसाथी-42”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-43

    जीवन साथी–43             वो घर पहुंच कर निरमा को फ़ोन करना भूल भी तो गयी थी, आजकल वैसे भी उसे राजा के अलावा और याद ही कौन रहता है?   पर चार चार कॉल? निरमा ठीक तो होगी ना?   उसने तुरंत निरमा को फ़ोन किया ….रिंग पे रिंग जाती रही, निरमा ने फोन नही … “जीवनसाथी-43”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-44

    जीवनसाथी–44    प्रेम के मोबाइल पर राजा का फ़ोन आ रहा था, जिसे उठाये प्रेम टहलते हुए राजा से बात करने लगा, लेकिन बात खतम होते होते प्रेम के चेहरे पर खुशी की जगह चिंता की लकीरें खिंच गईं__   ” हुकुम आप इतने सब के बाद भी खुश हैं?”   ” ये बहुत बड़ी … “जीवनसाथी-44”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-45

    जीवन साथी–45          राजप्रसाद किसी मायनों में एक सुपर सेवन स्टार होटल से कम नही था….ठाकुर साहब के परिवार के साथ साथ बांसुरी के परिवार के रहने का प्रबंध भी महल के एक तरफ बने मेहमानखाने में किया गया था।     भव्यता में महल का कोई हिस्सा कम नही था। राजमहल  की भव्य मीनारों के … “जीवनसाथी-45”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -46

    जीवनसाथी-46        कहा जाता है जीवन मृत्यु और विवाह हमारे पैदा होने के पहले ही ईश्वर हमारे भाग्य में लिख जातें हैं…..और जब जो होना होता है वही होता है, उसमें फिर कहीं कोई रुकावट कोई रोड़ा नही आता।    बहुत बार भले ही मनुष्य अपने प्रारब्ध को समझ ना पाये लेकिन नियती उससे वो … “जीवनसाथी -46”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-47

    जीवन साथी – 47     महल में शादी की तैय्यारियाँ ज़ोरों पर थीं। भले ही महल दुखी था कि कुछ दिन पहले ही महल की राजकुमारी नही रही थी, लेकिन महल के अपने कायदे होतें हैं जिनकी कीमत इन्सान की ज़िंदगी से कहीं अधिक कीमती होती है….     उस पर तुर्रा ये था कि पण्ड़ित के … “जीवनसाथी-47”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -48

    जीवन साथी — 48       महल से भोपाल की दूरी ऐसे तो ज्यादा नही थी लेकिन निरमा को साथ ले कर चलते हुए प्रेम जैसे एहतियात बरत रहा था, और जितनी धीमी गति से एस यू वी चला रहा था, उससे ऐसा लग रहा था शाम तक तो वो लोग भोपाल ही पहुंच पायेंगे__   … “जीवनसाथी -48”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-49

    जीवन साथी -49              तू बिन बताए, मुझे ले चल कहीं           जहाँ तू मुस्कुराए, मेरी मंज़िल वहीं…..     नीचे उतरती बांसुरी सीढियों पर थी कि उसका फ़ोन बज उठा, रिंग टोन सुन कर उसके होंठों पर मुस्कान चली आयी, राजा के नम्बर पर ये ट्यून असाइन कर रखी थी उसने__   ” माँ तुम … “जीवनसाथी-49”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-50

    जीवन साथी–50                  ” सगाई “       रानी साहेब ने सुरक्षा कारणों से राजा को स्टेशन जाने के लिये मना कर दिया….चाह के भी राजा,  बांसुरी और उसके परिवार के स्वागत के लिये नही पहुंच पाया लेकिन स्वागत में कोई कमी नही थी।        स्टेशन पर ट्रेन के रुकते ही बांसुरी और उसके परिवार के … “जीवनसाथी-50”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-51

    जीवन साथी–51     सगाई के अगले दिन राजपरिवार को कुल देवी का आशीर्वाद लेने जाना था…. राज पुरोहित के द्वारा मन्दिर में करायी जाने वाली पूजा के बाद ही सभी मांगलिक कार्यक्रम शुरु होने थे, प्रेम भी निरमा को बांसुरी के पास छोड़ कर राजा के साथ निकल गया।     बांसुरी का परिवार मायन और … “जीवनसाथी-51”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-52

    जीवन साथी -52       शाम के चार साढ़े चार हो रहे थे…रतन अपनी सीटिंग्स में बहुत मज़बूत था, एक बार पढ़ने बैठ जाने के बाद उसे ना वक्त का होश रहता ना खाने पीने का लेकिन पिंकी उससे थोड़ी उलट थी…   वो लगातार बैठ नही पाती थी, लगभग हर आधे एक घण्टे में उसे उठ … “जीवनसाथी-52”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-53

    जीवन साथी –53       बिदाई एक ऐसा भावुक पल होता है कि जिसे देख कर हर औरत हर लड़की की आंखे भीग जाती हैं, अपनी विदाई याद कर।     बांसुरी भी विदा हो गयी….अपने गठजोड़ और नारियल को गोद में रख कर राजा के बाजू में सिमटी सी बैठी अपने जीवन अपने माता पिता अपनी ताई … “जीवनसाथी-53”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-54

    जीवन साथी–54      महल अभी भी मेहमानों से भरा था, रात के खाने की व्यवस्था इसलिये बगीचे में ही की गयी थी…जो वहाँ आना चाहे उनके लिये और जो थकान से ना आ पाये उनके कमरों तक ही रात्रिभोज पहुंचा दिया गया था।युवराज भैय्या समर के साथ सारी व्यवस्था खुद देख रहे थे, पर लगभग … “जीवनसाथी-54”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-55

    जीवन साथी –55    गुस्से में फ़ोन वापस अपने पर्स में डाल उसने अपना लम्बा सा घूंघट पीछे किया और चैन की सांस ली….   लड़कियों का जीवन इसिलिए कठिन होता है…. अपने प्रेमी पति को बिना देखे भी चैन नही मिलता और ना मायके वालों का मोह छूटता है, दो पाटों के बीच पिस … “जीवनसाथी-55”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-57

    जीवन साथी –57   “चिंता ना कर, दीर्घायु है तेरा पति।” एक बार फिर वो अपना सामान समेटे वहाँ से निकल गया।   मन्दिर की ओर बढ़ते राजा और बांसुरी दोनो के ही दिमाग से लेकिन वो निकल नही पाया।   मन्दिर की पूजा अर्चना के समय कहीं से विराज भी पहुंच ही गया….   दोनो … “जीवनसाथी-57”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -58

    जीवन साथी –58    चार दिन पलक झपकते बीत गये….दोनो की वापसी का दिन आ गया …     मन में उत्साह था उमंगे थी, नये जीवन नये रिश्ते की भावभीनी शुरुवात हो चुकी थी, लेकिन बांसुरी के मन में कहीं ना कहीं एक टीस रह गयी थी कि काश कुछ नही तो एक बार मन्दिर … “जीवनसाथी -58”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -59

    जीवन साथी 59        वक्त किसी के लिये नही रूकता, उसे अपनी गति से चलना होता है और वो अपनी गति से ही चलता है , अगर आपकी ज़रूरत है तो आप भागिये वर्ना वो आपको पीछे छोड़ जायेगा।       रतन के लैपटॉप में कुछ समस्या आने से उसने बनने दिया हुआ था….   फ़ोन पर … “जीवनसाथी -59”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-60

    जीवन साथी –60           जहां हद से ज्यादा प्यार होता है वहाँ हर बात बेहद होने लगती है।   प्यार करने वाले अक्सर ये सोच बैठते हैं कि उनके इशारे भी समझ लिये जायेंगे और यहीं से शुरु होता है नाउम्मीदी और बेकसी का सिलसिला।  सामने वाला समझ जाये तो खैर और ना समझे तो … “जीवनसाथी-60”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-61

    जीवन साथी — 61          राजा ज़रूर इस बात को महसूस कर रहा था कि वो बांसुरी को पहले की तरह वक्त नही दे पा रहा लेकिन , बांसुरी राजा के प्रेम में मगन थी….          औरतें स्वभाव से ऐसी ही होती हैं शायद, उन्हें पति के साथ साथ पति के घर की ईंटों … “जीवनसाथी-61”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -62

    जीवन साथी– 62   पहली होली वो भी उनके बिना ! वो सोच रही थी कि दरवाज़े पर बेल बजी….उसने झांक कर देखा, माँ रसोई में चाय चढ़ा रही थी, पापा शायद वॉक पर गये थे, वीणा अपने कमरे में गोलु के साथ सो रही थी, इतनी सुबह सुबह न्यूज़ पेपर वाले के अलावा कौन हो … “जीवनसाथी -62”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-63

    जीवन साथी-63    ”  हुकुम! एक बात और कहनी है,  ये कुछ तोहफे भी माननीय नेता जी की ओर से आए हैं,  कृपया इन पर भी एक नजर कर लीजिए। ”   ” उन पर तो पहले ही नजर जा चुकी है समर! अब तो मेरी नज़रों की हद नेता जी पर जाकर ही ठहरेगी।” … “जीवनसाथी-63”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-64

    जीवन साथी-64       वक़्त का पहिया अपनी गति से घुमता है, ना किसी के लिए थमता है ना किसी खास के लिए बढ़ता है, उसकी अपनी गति है, जिससे उसे चलना ही है..    रतन के ट्रेनिंग में जाने की तारिख आ चुकी थी,  वो अपनी पैकिंग में व्यस्त था….   ” रतन! सुनो एक बात … “जीवनसाथी-64”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-65

    जीवन साथी–65             राजा से पहले भी जितने महाराज हुए थे सभी रियासत में प्रसिद्ध थे लेकिन राजा का राजपाठ अलग था, वो हर चीज़ से हर बात से जुड़ा था।  ऐसा नही था कि वो करने वाला अकेला था लेकिन फिर भी अपने हर काम को खुद करना ही उसे भाता था, बांसुरी … “जीवनसाथी-65”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -66

    जीवनसाथी –66                  बाँसुरी की बातें सुनती केसर की आंखें शेड्स के अंदर से राजा पर ही टिकी थी, और राजा उन आँखों से बेखबर कुलपति से होनहार गरीब विद्यर्थियों की निशुल्क शिक्षा के लिए दिए जाने वाले चेक पर अपने हस्ताक्षर कर रहा था……      पत्नि कितनी भी सीधी और भोली क्यों न … “जीवनसाथी -66”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-67

    जीवन साथी — 67         रूपा ने सबके लिए खाना मंगवा तो लिया था लेकिन बाँसुरी से कुछ खाया नही जा रहा था, उसकी नज़र राजा पर ही थी, आखिर उसने उससे कहा जो था साथ खाने के लिए। शादी के बाद से आज तक कोई दिन ऐसा नही गया था जब वो उससे … “जीवनसाथी-67”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-68

    जीवन साथी –68       निरमा की सामान्य डिलीवरी थी, बावजूद एक दिन अस्पताल में रखने के बाद ही उसे छुट्टी मिलनी थी।    रात भर उसके कमरे में उसके साथ रुका प्रेम भी ठीक से सो नही पाया था।  जब दोनों को नींद लगती, मीठी कुनमुना कर उन्हें जगा जाती। वो खुद तो थोड़ा सा हल्ला … “जीवनसाथी-68”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-69

    जीवन साथी –69            बहुत बार वक्त को भी वक्त देना पड़ता है , वरना बहुत सी ऐसी बातें घट जातीं हैं जो ना घटती तो कहीं ज्यादा अच्छा होता ! लेकिन बाद में पछताने के सिवा कोई चारा नही रह जाता।             गाने बजाने की महफ़िल सजी थी, केसर का गीत अभी खत्म ही … “जीवनसाथी-69”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-70

    जीवनसाथी –70                तेरी झोरी डारूँ, सब सूखे पात जो आये         तेरा छूआ लागे, मेरी सूखी डार हरियाए             दिल हूम हूम करे…      जिस तन को छुआ तुने, उस तन को छुपाऊँ     जिस मन को लागे नैना, वो किसको दिखाऊँ        ओ मोरे चन्द्रमा, तेरी चांदनी अंग जलाए         तेरी ऊँची अटारी, मैंने पंख लिए कटवाए         … “जीवनसाथी-70”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-71

    जीवनसाथी –71                 बात बिगड़ी है इस कदर              दिल है टूटा, टूटे है हम        तेरे बिन अब ना लेंगे एक भी दम            तुझे कितना चाहें और हम             तेरे साथ हो जाएगे खतम             तुझे कितना चाहें और हम…..     राजा की जान ही गानों में बसती थी, उसकी और बाँसुरी की पहली मुलाकात भी तो … “जीवनसाथी-71”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -72

    जीवनसाथी -72 जीवनसाथी –72       समय का पहिया कब किसके लिए थमा है,ना वो राजा के लिए रुकता है ना रंक के लिए।हम कितना भी सोच लें कि काश ऐसा हो जाये काश वैसा हो जाये लेकिन बहुत बार वो नही होता जो हमने सोच रखा होता है, और हो जाता है कुछ ऐसा जिसकी … “जीवनसाथी -72”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-73

    जीवनसाथी  –73         जिसे जो मिलता है वो उसे भाता नही और कोई दूसरा उसी को पाने कि चाहत में बेकरार हुआ जाता है।    बाँसुरी के मन में राजा से प्रेम और उससे बिछड़ने का दुख इतना हावी हो गया था कि उसे अभी परीक्षा की तैयारियां सिर्फ राजा की यादों से दूर भागने का … “जीवनसाथी-73”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-75

    जीवनसाथी  75                 गाना बजाना खत्म होते ही क्लास शुरू हो गयी।हरि सर की क्लास वैसे तो घंटे भर की होती थी लेकिन कुछ उनका पढ़ाने का निराला स्टाइल कुछ पढ़ाकू विद्यार्थियों का जुनून क्लास खत्म होते होते कभी तीन तो कभी साढ़े तीन घंटे बीत जाते थे।    क्लास खत्म कर सर ढेर सारा … “जीवनसाथी-75”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-76

    जीवनसाथी –76                राजा के लिए महल में परेशानियां समाप्त नही हुई थीं। हर मोड़ पर उसे नई चुनौती का सामना करना पड़ रहा था।     अलग अलग राजनैतिक पार्टियां अपने मतलब के लिए लोगों को प्रलोभन दे देकर अपनी तरफ घुमाने के प्रयास में थी।।   भोली भाली जनता कहीं किसी प्रकरण में अपनी ज़मीन … “जीवनसाथी-76”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-77

    जीवनसाथी — 77           रात और दिन अपनी गति से ही चलते हैं, हर दिन के बाद रात होती है तो रात के बाद सुबह भी।   प्रेम की चिरप्रतीक्षित रात भी बीत गयी, और एक सुहानी उजली सुबह प्रेम और निरमा के जीवन में प्यार का एक अनोखा रंग भर गई।      दोनो के समर्पण … “जीवनसाथी-77”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-78

    जीवनसाथी  78      गंगा जी की लहरों के बीच खड़े राजा की आंखे खुली उसके ठीक सामने उसे देखती बाँसुरी खड़ी थी।  बाँसुरी की झलक सी मालूम हुई ही थी कि सिक्योरिटी ने राजा को चारों ओर स घेर लिया और उसे पूजा स्थल की ओर ले चले। शाम का धुँधलका भी फैलने लगा था।    … “जीवनसाथी-78”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-79

    जीवनसाथी –79          सुहाना हर दर्द है।        जो तू मेरा हमदर्द है….         नीचे कैफे में चलते गाने के बोलो के साथ शेखर नीचे कैफे में बैठा अब तक पांच कॉफी पी चुका था, रिदान उसका चेहरा देखता बैठा था। उसे और लीना को शेखर की अवस्था का कुछ ज़रा सा भान तो था लेकिन … “जीवनसाथी-79”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-80

          जीवनसाथी    …….       एक दूसरे की बाहों में समाने के बाद ना बाँसुरी के पास पूछने को कुछ बाकी रहा और ना राजा के पास कहने को…    अब तो बातें आंखों की आंखों से , हाथों की उंगलियों से , साँसों की साँसों से हो रहीं थीं।   पिघलती गर्मियां बरसते सावन ठिठुरती … “जीवनसाथी-80”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -81

      जीवनसाथी      एकेडमी में चलते रंगारंग कार्यक्रम के बीच चुपके से बाँसुरी उठ कर अपने कमरे में चली आयी।     कमरे में पहुंचते ही उसने अपने साहेब को कॉल लगा लिया…. उधर से फ़ोन उठते ही बाँसुरी चहक उठी….   ” मुझे ही याद कर रहे थे ना, और देखो मैंने कॉल भी कर लिया, … “जीवनसाथी -81”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी – 82

    जीवनसाथी –82     अपने लिए चाय चढ़ाती निरमा मुस्कुराने लगी थी   ” पता नही जनाब को याद भी होगा या नही कि आज उनकी शादी की सालगिरह है।  सही कहा था मैं बहुत अनरोमांटिक सा लड़का हूँ।”    मैं का करूँ राम मुझको बुड्ढा मिल गया… गुनगुनाते हुए निरमा अपनी चाय पीती बगीचे में … “जीवनसाथी – 82”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-83

    जीवनसाथी –83         शेखर और रिदान के आश्चर्य का ठिकाना नही था क्योंकि बाँसुरी और निरमा दोनो ने ही इत्तेफाक से मेहरून कुर्तियां पहन रखीं थीं   बाँसुरी के वहाँ पहुँचते ही उससे मिलने की बेसब्री में निरमा गेट पर ही भागती चली आयी थी। जब तक दोनो सखियां एक दूसरे के गले लगी सुख दुख … “जीवनसाथी-83”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी – 84

    जीवन साथी –84 बाँसुरी की बात पर रिदान चौक कर उसे देखने लगा   ” साहेब मतलब ?  राजा साहेब तुम्हारे यानी आपके हसबैंड हैं क्या?”   हड़बड़ाती सी अटकी हुई आवाज़ में उसने अपनी बात पूरी की।    हाँ में सर हिलाती बाँसुरी मुस्कुरा कर उन्हें देखती रही   “मतलब तुम सॉरी आप रानी … “जीवनसाथी – 84”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -85

    जीवन साथी –85           राजा का मसूरी आना फिर नही हो पाया था। लब्सना में होने वाली ट्रेनिंग का पहला चरण पूरा कर चुके रंगरूटों को ट्रेनिंग के अगले चरण को पूरा करने के लिए देश की राजधानी ले जाया जाना था।     संसद भवन के दर्शनों के बाद ही सबका भारत भ्रमण शुरू होना … “जीवनसाथी -85”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -86

       जीवनसाथी– 86          दिल्ली के अपने शानदार पंद्रह मंज़िली ऑफिस में आदित्य के पहुंचते ही जैसे हड़कम्प मच गया । हर कोई जो इधर उधर तफरीह करता नज़र आ रहा था अपने अपने डेस्क पर पहुंच गया…     अपने चमकीले ऑफिस से भी अधिक शानदार व्यक्तित्व के आदित्य में वो सारे गुण परिलक्षित थे जो … “जीवनसाथी -86”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -87

      जीवनसाथी 87      सुबह के छै बजे थे कि विराज के कमरे के दरवाज़े पर दस्तक हुई।     कुछ देर अंदर से कोई जवाब ना आने पर दस्तक तेज़ होने लगी। शराब के नशे में धुत्त विराज को दरवाज़े पर होने वाली खटखट समझने में भी वक्त लग गया।    बच्चा छोटा होने से रातों … “जीवनसाथी -87”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -88

    जीवनसाथी 88       समर रियासत के दौरे पर विराज के साथ एक जगह से दूसरी जगह घूम रहा था, दोपहर ढलने को थी कि उसके पिता का फ़ोन चला आया…   ” समर तुम्हारी माँ की तबियत कुछ ठीक नही लग रही, उन्हें अस्पताल लेकर चलना है, अगर तुम आ जाते तो…   ” जी … “जीवनसाथी -88”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -89

       जीवनसाथी 89              प्रेम निरमा को साथ लिए दिल्ली पहुंचा तब तक काफी रात हो चुकी थी, आधी रात में घर पहुंच कर वो राजा को जगाना नही चाहता था, इधर कुछ दिनों से वो भी इस बात पर ध्यान दे रहा था कि राजा की नींद समय असमय खुलती ही … “जीवनसाथी -89”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-90

    जीवनसाथी 90      आदित्य को पार्टी करने का कोई शौक नही था, लेकिन उसके पास कोई चारा भी नही बचा था, मन मार कर उसे नेता जी और उनके परिवार के साथ समय बिताना ही था।    राजा को वहाँ से जाते देख उसके मन में आया भी –” हमें अकेले फँसा के निकल रहे … “जीवनसाथी-90”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -91

        जीवनसाथी  91        आदित्य गाड़ी तेज़ी से ही भगा रहा था लेकिन साथ बैठी पिंकी का घबराना कम नही हुआ था।  पिंकी की गोद में बेटू गाड़ी के चलने के कुछ देर में ही लेटे लेटे सो गया था। और पता नही अपनी लाचारगी पर या समय पर रतन के न आ पाने के … “जीवनसाथी -91”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -92

    जीवनसाथी — 92       फ़ोन रख कर मुड़ते ही अपने आस पास अस्पताल और इधर उधर भागती दौड़ती नर्सो को देख कर राजा सोच में डूब गया कि आख़िर वो अस्पताल आया किस लिए है?    उसे लगा जैसे वो सोच ही नही पा रहा कि वो यहाँ क्यों आया और कैसे आया?    एक … “जीवनसाथी -92”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -93

        जीवनसाथी — 93      विराज के तैयार होकर आते में समर ने सारे कागज़ वगैरह भी तैयार कर लिए।    विराज समर और युवराज सा नए आये जिलाधीश से मिलने पहुंच गए…   कलेक्टर ने जैसे ही सुना कि स्वयं राजा साहब मिलने आये हैं उसने तुरंत उन्हें अंदर बुलवा लिया…     कलक्ट्रेट परिसर काफी बड़ा … “जीवनसाथी -93”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -94

       जीवनसाथी –94 कलेक्टर परिसर में पहुंचने के बाद उसने मामा जी से अपने लाव लश्कर को बाहर ही छोड़ अकेले अंदर चलने की गुज़ारिश की लेकिन न मामा जी को मानना था न वो माने।   लगभग आठ दस आदमियों के साथ ठाकुर साहब केबिन में प्रवेश कर गए।   अंदर बैठी कलेक्टर साहिब पर नज़र … “जीवनसाथी -94”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-95

    जीवनसाथी– 95        आदित्य की गाड़ी रास्ते के उतार चढ़ाव देखे बिना बस भागती चली जा रही थी।   राजा ने अपनी गाड़ी उसी के पीछे भगा दी। मौसम भी साथ नही दे रहा था, तेज़ आंधी पानी ने रास्ते की भयावहता को और बढ़ा दिया था ।तेज़ी से आगे बढ़ती आदित्य की गाड़ी एक अंधे … “जीवनसाथी-95”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-96

    जीवनसाथी -96             बाँसुरी ऑफ़िस निकलने तैयार हो रही थी, राजा बाहर बाँसुरी के ड्राइवर के पास खड़ा उसके हाल चाल पूछ रहा था। आदित्य अपने कमरे में खिड़की पर खड़ा चाय पीते हुए बाहर खड़े राजा की सरलता को देख रहा था।    बताओ ये किसी रियासत के राजा जी हैं जो अपनी पत्नि की … “जीवनसाथी-96”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-97

        जीवनसाथी – 97        महाराज ने अपने मन की बात रख दी थी , और उस वक्त कमरे में मौजूद सभी लोगों ने राजा को राजगद्दी देने वाली बात पर मुहर भी लगा दी थी।        सब कुछ अच्छा होता सा लग रहा था लेकिन इस सब के बीच कुछ तो था जो … “जीवनसाथी-97”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-98

    जीवनसाथी 98 उन सब को दौड़ाने के बाद भी उसके मन में अभी भी हलचल मची थी कि किसी तरह केसर की जान बच जाए, आखिर इतनी सारी राज़ की बातें बताने के बाद अब और कौन सी ऐसी बात बची रह गयी थी जो वो उसे बताना चाह रही थी……     आदित्य ने फ़ोन … “जीवनसाथी-98”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी – 99

       जीवनसाथी — 99              महल पूजा पाठ में लगा हुआ था। पूजा का आज अंतिम दिन था। इक्यावन पंडित जाप में लगे थे । जाप सम्पन्न होने के बाद हवन होना था। हवन समाप्ति के बाद होने वाले प्रसाद वितरण के लिए पूरी रियासत की जनता को निमंत्रण दिया गया था।   पांच दिन … “जीवनसाथी – 99”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी- 100

                        जीवन साथी –100 राजा और बांसुरी के साथ प्रेम और निरमा भी रियासत वापस आ चुके थे। इतने दिनों की वापसी के बाद कुछ दिन तो निरमा को घर की साफ सफाई करने में ही निकल गए।     घर को एक बार फिर रहने लायक बनाने के बाद आज निरमा थोड़ी कम व्यस्त थी। निरमा … “जीवनसाथी- 100”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी – 101

       जीवनसाथी – 101 ” चाँद पाने की ज़िद तो हर बच्चा कभी न कभी ज़रूर करता है पर चाँद हर किसी को नसीब हो ये ज़रूरी तो नही? ”   शेखर के साथ बैठे आदमी ने उससे पूछ ही लिया” क्या हो गया कलेक्टर साहब ? ” कुछ नही बस ज़रा सा इश्क़ हो … “जीवनसाथी – 101”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-102

       जीवनसाथी — 102      बाँसुरी सहायिका की बस इतनी ही बात सुन पायी और पहले से दिमाग में चलती उसकी उलझनो ने एक कहानी सी बुन ली, उसने मन ही मन सहायिका की बात को आधा ही सुन ये सोच लिया कि राजा अजातशत्रु गिर गए हैं और बस इतना सुनते ही बाँसुरी खुद … “जीवनसाथी-102”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी – 103

    जीवनसाथी -103 घुटनों पर झुके ठाकुर साहब को अपने गन पॉइंट पर रखे प्रेम की आंखों में खून उतर आया था। वो गुस्से में वहीं शायद ठाकुर साहब को गोली मार चुका होता लेकिन इधर उधर फैले हाहाकार के बीच उसे बाँसुरी की चीख ‘साहेब ‘ सुनाई दी और वो ठाकुर को अपने आदमियों के … “जीवनसाथी – 103”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी – 104

    जीवनसाथी – 104        अपनी लाल लाल आंखों से खिड़की से बाहर दूर आकाश को देखते राजा अजातशत्रु की आंखों से ऑंसू बह चले, तभी आकर किसी ने उनके कंधे पर हाथ रख दिया।   राजा ने पलट कर देखा , सामने विराज खड़ा था।   राजा उससे गले लग सिसक उठा।दोनों भाई एक दूसरे को … “जीवनसाथी – 104”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी- 105

         जीवनसाथी –105     आप पर हत्या के प्रयास का आरोप है मैडम। मैडम आप भी जानती है। कि हम सब आपको कितना सम्मान देते हैं।   आपको इस तरह साथ लेकर जाते हुए अच्छा नही लग रहा मैडम लेकिन कानून आप भी जानती हैं और हमसे ज्यादा अच्छे से जानती हैं, इसलिए अगर आप।खुद चलेंगी … “जीवनसाथी- 105”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी – 106

      जीवनसाथी – 106        लीना की बात खत्म होने तक बाँसुरी सांस रोके उसकी सारी बातें सुनती रही। उसे यकीन नही था कि कोई आदमी ऐसा भी हो सकता है कि सिर्फ और सिर्फ अपने फायदे के लिए अपनी पत्नी तक को दांव पर लगा दिया।   सुबह से कुछ अधिक ही दौड़भाग हो चुकी … “जीवनसाथी – 106”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी- 107

    जीवनसाथी-107     राजा रियासत वापस लौट चुका था। उसे लग रहा था सारा मामला उलझता ही चला जा रहा है। वो एक गांठ सुधार कर खोलने निकालता की दूसरी गांठ उलझ जाती, अब सब कुछ ऐसा लग रह था जैसे उसके हाथों से बाहर होता जा रहा था।   उसने कुछ ज़रूरी बातचीत करने समर … “जीवनसाथी- 107”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी – 108

       जीवनसाथी -108    इतने महीने निकल चुके थे ,कुछ छोटी मोटी परेशानियों के अलावा कोई ऐसी बड़ी परेशानी तो हुई नही थी तो अब क्या होगा, यही सोच कर बाँसुरी राजा के साथ अस्पताल निकल गयी।   डॉक्टर ने उसकी जांच की और चिंता की लकीरें उनके माथे की सलवटों में उभर आयीं…. ” … “जीवनसाथी – 108”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी – 109

    जीवनसाथी-109 उन दो कमरों के घर मे रहते हुए उसे और केसर को कुछ दिन ही बीते थे और आदित्य समर को फ़ोन करने की सोच ही रहा था  कि केसर सीढ़ियों पर से गिर कर चोट लगवा बैठी।       भगवान जाने क्या किस्मत में लिखा बैठे थे कि वो चाह कर भी उस छोटी … “जीवनसाथी – 109”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी – 110

      जीवनसाथी – 110 कोई ट्रेन उसी वक्त स्टेशन से छूट रही थी। आदित्य और केसर प्लेटफॉर्म पर पहुंचे की उन गुंडों पर इन लोगों की और गुंडों की इन पर नज़र पड़ गयी…    उनमें से एक ने अपनी गन उठा कर उन लोगों की तरफ तानी ही थी कि चलती ट्रेन में भाग कर … “जीवनसाथी – 110”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी – 111

    बाँसुरी की गोद भराई

  • जीवनसाथी- 112

    जीवनसाथी – 112 मुस्कुराती हुई पिया अपनी गाड़ी उठाये महल की तरफ बढ़ गई उसे पता था कि समर इस वक्त अपने घर पर ही मिलेगा। महल में पहुंचने के बाद वह सीधे समर के कमरे की तरफ बढ़ गई। समर अपने कमरे में बैठा चार पांच लोगों से किसी बात पर सलाह मशवरा कर … “जीवनसाथी- 112”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -113

          जीवनसाथी – 113      समर कुछ देर को वहीं खड़ा रह गया। फिर खुद को और अपने  गुस्से को संभालते हुए पिया से कभी ना मिलने की कसम खाते हुए वहां से बाहर निकल गया।   गुस्से में समर मुड़कर जैसे ही आगे बढ़ा कि सामने से आते हुए वेटर से टकरा गया और … “जीवनसाथी -113”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -114

    कोर्ट केस

  • जीवनसाथी – 115

         जीवनसाथी 115    वकील साहब ने अपनी जिरह समाप्त करने के बाद एक सबूतों का लिफाफा न्यायाधीश महोदय की तरफ बढ़ा दिया, लेकिन सुबह से चल रही जिरह में कोर्ट का समय समाप्त हो चुका था। उन सबूतों को कोर्ट में ही संभाल कर रख लिया गया। और न्यायाधीश महोदय ने कोर्ट की समय … “जीवनसाथी – 115”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -116

       जीवनसाथी – 116         कोर्ट से मिले 2 दिन पलक झपकते कब बीत गए समर को पता ही नहीं चल पाया केस से संबंधित कागजों की तैयारी में ही उसके दिन और रात निकल गए।         अगले दिन सुबह की तारीख उन्हें कोर्ट की तरफ से मिली हुई थी। अगले दिन ही जज साहब बचाव … “जीवनसाथी -116”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-117

                जीवनसाथी -117            उनके सवाल पर समर एक किनारे खड़ा मुस्कुराता रहा… उसने पीछे देखा, कोर्ट रूम के दरवाजे पर एक आदमी अपना चेहरा आधा ढके खड़ा था उसने आंखों ही आंखों में समर को अभिवादन किया समर ने भी धीरे से बाकियों की नजर बचाकर उसके अभिवादन को स्वीकार किया और मुस्कुराकर ठाकुर … “जीवनसाथी-117”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी- 118

      जीवनसाथी – 118      अस्पताल में बांसुरी के कानों में चुपके से कुछ कह कर पिया वहां से बाहर निकल गई बांसुरी में समर की तरफ देखा वह पिया को ही देख रहा था पिया के जाने के बाद उसने सर झुका लिया। ” क्या हुआ समर सा कुछ उदास लग रहे हैं आप? … “जीवनसाथी- 118”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -119

      जीवनसाथी – 119          सगाई निपट चुकी थी सभी लोग इधर-उधर घूमते हुए आपस में बातें करते खाते-पीते मसरूफ थे, और समर और पिया बाकी लोगों से अलग एक दूसरे में खोए हुए एक किनारे बैठे थे। “अब बताइए डॉक्टर साहिबा! यह किस का आईडिया था?”“अब यह भी आपको बताना पड़ेगा! अब भी आप … “जीवनसाथी -119”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -120

       जीवनसाथी – 120      चुनाव के नतीजे आने लग गए थे रुझानों से साफ जाहिर था कि राजा और उसकी टीम ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था। राजा की जीत तो पहले ही 100% तय थी।समर अपने ऑफिस में बैठा हुआ इन्हीं सब जोड़ घटाव को देख रहा था कि मंत्री जी का फोन … “जीवनसाथी -120”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी-121

    विराज की गाड़ी में कौन था। क्या भगवान उसे उसकी गुनाहों की सज़ा दी रहे

  • जीवनसाथी- 122

        जीवनसाथी -122       गाड़ी खाई से निकाली जा चुकी थी। गाड़ी महल की ही थी, जो विराज के नाम से थी लेकिन उसमें विराज नही था।         गाड़ी में केसर थी, लेकिन उसके पिता नदारद थे। सड़क पर आते जाते लोगों का भी मजमा लगा हुआ था। पुलिस की गाड़ी के साथ ही एंबुलेंस भी … “जीवनसाथी- 122”पढ़ना जारी रखें

  • दिल से…. चिट्ठी आप सबों के नाम!

    प्यारे दोस्तों। सबसे पहले तो आप सभी का शुक्रिया अदा करती हूं कि मेरे एक बार बोलने पर आप सभी मेरे ब्लॉग पर चले आए। पर यहां मेरे ब्लॉग पर भी आप सब मुझे सपोर्ट कर रहे हैं। मैं जानती हूं आप सब के दिल में यह भी चल रहा होगा कि आखिर मैंने अपना … “दिल से…. चिट्ठी आप सबों के नाम!”पढ़ना जारी रखें

  • जीवनसाथी -123

      जीवनसाथी -123      अस्पताल से लौटने के बाद भी आदित्य को जाने क्यों इस बात पर यकीन नही हो रहा था कि वो बॉडी केसर की थी।    वो बिना किसी से कहे चुपचाप अपने कमरे में चला गया। ये पूरा दिन महल के लिए कठिनता भरा रहा था। केसर का इस तरह महल से … “जीवनसाथी -123”पढ़ना जारी रखें

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      जीवनसाथी-124        राजा साहब के कार्यालय में मीटिंग पर मीटिंग चल रही थी अब लगभग उनके मंत्रिमंडल का गठन हो चुका था और शपथ ग्रहण का समय भी आ गया था।      अगला दिन बहुत महत्वपूर्ण था राजा के लिए। राजनीति में उसकी पारी की शुरुवात होने जा रही थी। आज तक वो अपने … “जीवनसाथी-124”पढ़ना जारी रखें

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