Poetry

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  • यूँ ही…

    एक तारा भी नज़र आता नही मुम्बई के आसमान पर यूँ कहने को मुम्बई सितारों की नगरी है….. aparna ..

  • ओ स्त्री!!!

    पुरुष के मन मस्तिष्कशब्द हृदयहर जगह छाई हो।ओ स्त्री!!!तुम कहाँ से आई हो? वो कहता हैमैंने तुझे पंख दिए।परवाज़ दिएउड़ लो, जितना मैं चाहूंओ स्त्री !!!क्या तुम उसकी मोहताज हो? उसका घरौंदा बनायातिनका तिनका सजायापर जब वक्त आया तुम्हाराउसने तुम्हेंअपने पैरों पे गिरायाओ स्त्री!!!तुम कैसे उसकी सरताज हो? वो बेबाक है बिंदास हैजो जी में … “ओ स्त्री!!!”पढ़ना जारी रखें

  • लड़कियाँ

    आंसूओं को छिपाने के लिए जबरन मुस्कुराती लड़कियाँ…. दिल के दर्द को, बस यूं ही हंसी में उड़ाती लड़कियाँ… दिन भर खट कर पिस कर तुम करती क्या हो सुन कर भी चुप रह जाने वाली लड़कियां बाप की खुशी के लिए अपना प्यार ठुकराती लड़कियां…. भाई की सम्पन्नता के लिए जायदाद से मुहँ मोड़ … “लड़कियाँ”पढ़ना जारी रखें

  • मैं मैं हूँ!! जब तक तुम तुम हो!

    मैं,मैं हूँ! जब तक तुम,तुम हो ! तुमसे सारे रंग रंगीलेतुमसे सारे साज सजीले,नैनों की सब धूप छाँव तुम,होठों की मुस्कान तुम ही हो।मैं,मैं हूँ! जब तक तुम,तुम हो ! तुमसे प्रीत के सारे मौसमतुमसे सूत,तुम ही से रेशमतुमसे लाली,तुमसे कंगन,मन उपवन के राग तुम ही होमैं,मैं हूँ! जब तक तुम,तुम हो ! जीवन का … “मैं मैं हूँ!! जब तक तुम तुम हो!”पढ़ना जारी रखें

  • शुभकामनाएं … हिंदी दिवस की

    महादेवी वर्मा जो तुम आ जाते एक बार जो तुम आ जाते एक बार कितनी करूणा कितने संदेशपथ में बिछ जाते बन परागगाता प्राणों का तार तारअनुराग भरा उन्माद राग आँसू लेते वे पथ पखारजो तुम आ जाते एक बार हँस उठते पल में आर्द्र नयनधुल जाता होठों से विषादछा जाता जीवन में बसंतलुट जाता … “शुभकामनाएं … हिंदी दिवस की”पढ़ना जारी रखें

  • जब तुम बूढ़े हो जाओगे…..

    मैं बन जाऊंगी फिर मरहमवक्त के ज़ख्मों पर तेरे औरमुझे देख हौले हौले सेफिर तुम थोडा शरमाओगे।जब तुम बूढे हो जाओगे।। सुबह सवेरे ऐनक ढूंडकानों पे मै खुद ही दूंगी ,अखबारों से झांक लगा केतुम धीरे से मुस्काओगे।जब तुम बूढे हो जाओगे ।। दवा का डिब्बा तुमसे पहलेमै तुम तक पहुँचा जाऊंगी,मुझे देख फिर तुम … “जब तुम बूढ़े हो जाओगे…..”पढ़ना जारी रखें

  • मैं हूँ…..

    मैं खुशबू से भरी हवा हूँमै बहता जिद्दी झरना हूँकठिन आंच मे तप के बना जोमै ऐसा सुन्दर गहना हूँ ।। छोटा दिखता आसमान भी,मेरे हौसलों की उड़ान पे,रातें भी जो बुनना चाहे,मैं ऐसा न्यारा सपना हूँ ।। हरा गुलाबी नीला पीलामुझसे हर एक रंग सजा है,इन्द्रधनुष भी फीका लगताप्रकृति की ऐसी रचना हूं ।। … “मैं हूँ…..”पढ़ना जारी रखें

  • बस यूं ही….

    भीड़ से निकले तो सिग्नल ने पकड़ लिया,ज़िन्दगी स्पीड ब्रेकर की नुमाइंदगी हो गयी….

  • रोज़ी …by अमृता प्रीतम जी

    नीले आसमान के कोने मेंरात-मिल का साइरन बोलता हैचाँद की चिमनी में सेसफ़ेद गाढ़ा धुआँ उठता है सपने – जैसे कई भट्टियाँ हैंहर भट्टी में आग झोंकता हुआमेरा इश्क़ मज़दूरी करता है तेरा मिलना ऐसे होता हैजैसे कोई हथेली परएक वक़्त की रोजी रख दे। जो ख़ाली हँडिया भरता हैराँध-पकाकर अन्न परसकरवही हाँडी उलटा रखता … “रोज़ी …by अमृता प्रीतम जी”पढ़ना जारी रखें

  • तेरे रंग

    मैं धूप सी निखरी तुझमे फिरऔर शाम सी ही ढल जाऊंगीतू मुझे बना ले बाँसूरीकान्हा तेरे रंग, रंग जाऊंगी।।। तेरी अंखियों से जग देख लियाअब नही कहीं कुछ भाता हैतू एक कदम भी बढ़ा ले तोतेरे पीछे पीछे आऊंगी।। मैं जानू ये जग तेरा हैहर छल कपट पर मेरा हैतेरी तान मधुरतम मुझे लगेतेरे स्वरों … “तेरे रंग”पढ़ना जारी रखें

  • मेरे संग शहर भी बड़ा हो गया है..

    जो चलता था घुटनों के बल इस कदर   सरकता था गलियों में यूं दर बदर   मैं जो बढ़ने लगी वो भी बढ़ने लगा   बस  मेरा हाथ थामे खड़ा हो गया है   मेरे संग शहर भी बड़ा हो गया है…. aparna …

  • बस यूं ही…

    हमें लिखने का शौक है, उन्हें पढ़ने का क्यों नही.. हमें रुकने की आरज़ू, उन्हें थमने का क्यों नही…

  • महादेव

    समुद्र मंथन का था समय जो आ पड़ा, द्वंद दोनो लोक में विषामृत पे था छिड़ा.. अमृत सभी में बांट के प्याला विष का तूने खुद पिया…..

  • मृत्युंजय

    मृत्युंजय तू गर्व था,तू गान था,तू  रश्मियों की खान था ।सबल सकल प्रभात था,हे कर्ण तू महान था॥    अटल तेरी भुजायें थी ,अनल तेरा प्रवाह था ।कनक समान त्वक मे भी,तू लौह का प्रताप था । तू सूतों का भी दर्प था,राजाओं में आकर्श थाप्रचण्ड भी अमोघ भी,तू खुद में एक आदर्श था। तू मैत्री … “मृत्युंजय”पढ़ना जारी रखें

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