मायानगरी -6

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   मायानगरी-6

    होस्टल के कमरे में रंगोली रोती बैठी थी और झनक की समझ से बाहर था कि आखिर ऐसी कौन सी बात हो गयी जो रंगोली ऐसे धुंआधार रोये पड़ी है।

” अरे कुछ बता भी दो यार रंगोली! हुआ क्या? क्या रैगिंग वाली बात से परेशान हो ? ये सब बहुत कॉमन है यार। इसके लिए इतना टेंशन लेने की ज़रूरत नही है। बस कुछ दिनों की बात है फिर यही सीनियर्स खूब हेल्प करेंगे। ले पानी पी और अब चुप हो जा।”

   पानी पीकर रंगोली थोड़ा संभली और अपनी परेशानी उसने कहनी शुरू की…-“झनक यार इस लड़के ने मुझे कहीं का नही छोड़ा।”
  झनक चौन्क कर रंगोली को देखने लगी, उसे रंगोली की बात एकदम से समझ में नही आई…-” किस की बात कर रही है तू ?”
“वही इंजीनियरिंग वाला। कहाँ से आकर गले पड़ गया यार। अब क्या करूँ। ये तो हर जगह मुझे बदनाम करने में लगा हुआ है। सीनियर्स पर प्रोफेसर्स पे मेरा कितना खराब इम्प्रेशन पड़ेगा, सोच तो!”
” अरे यहाँ ये सब कोई नही सोचता!”
“सभी जगह सोचते हैं यार! बस कहने की बात है कि नही सोचते। आज तक मेरे स्कूल में मेरी इतनी अच्छी इमेज थी इसने सब सत्यानाश कर दी। एक नम्बर का बेवकूफ है , अरे भई मैंने मांगी तुझसे हेल्प तो तू क्यों हर जगह मेरा गार्जियन बनकर घूम रहा  है।”
” गार्जियन नही पति!” झनक ने चुटकी ली और रंगोली एक बार फिर नाराज़ होकर रोने लगी…-“यार प्लीज़ मत बोल ऐसा। इस लड़के से ऐसी नफरत हो रही है ना कि सामने आ जाये तो गला दबा दूँ। इसने सब जगह मेरा नाम खराब किया है।”.
” तो अब कर भी क्या सकते हैं यार। छोड़ ना। तू क्या उससे माफी मंगवायेगी?”
” हाँ ! बिल्कुल मंगवाऊंगी। जिस जिस से जाकर उसने खुद को मेरा पति बोला है उस हर एक के सामने जाकर हाथ जोडकर माफी मांगेगा और माफी जब तक नही मिलेगी हमारे सीनियर्स के पैरों पड़ा रहेगा।”
” तेरी मर्ज़ी! लेकिन मुझे नही लगता वो हीरो तेरी बात मानेगा।”
” झनक तू बस ये सोच की हम उससे कहाँ मिल सकतें हैं । मुझे उससे अकेले में बात करनी है।”
” हम्म इंजीनियरिंग वाला बंदा है, कैंटीन में सुट्टा मारते मिल ही जायेगा। नाम गांव कुछ पता है उसका?”
” नाम अभिमन्यु बताया था और मैकेनिकल पांचवे सेम का स्टूडेंट है। यार एक तो मुझे पढ़ाई की इतनी ज्यादा टेंशन हो गयी है कि हर वक्त पेट में अजीब सी गुड़गुड़ होती रहती है ऊपर से इस ने और नाक में दम कर दिया।”
” पढ़ाई की टेंशन अभी से क्यों?”
” बुक्स देखीं हैं। इतनी मोटी मोटी की लगता है मुझे खा जाएंगी। ये फिजियो की “गायटन एंड हाल” और ये ग्रे की एनाटॉमी। पता नही कुछ मेरे पल्ले भी पड़ेगा कि नही। मुझे तो ये सब पढ़ने के लिए डिक्शनरी लेकर बैठना पड़ेगा यार। मेरी स्कूलिंग हिंदी मीडियम थी ना!”
” अबे ये बात! इसलिए इतना डर रही तू। सुन किताबें तो यहीं हैं जो तीर्थ है हमारा ! लेकिन हमें तीर्थ पूरा करवातें हैं चौरसिया जी और जैन साहब।”
” मतलब?”
” मतलब फिजियो की हम पढेंगे जैन और एनाटॉमी में पढ़ेंगे बी डी चौरसिया। ये हमारी भाषा की किताबें हैं। यानी है तो इंग्लिश में लेकिन हमारी आसान सी इंग्लिश में। और फिर जो समझ न आये उसके लिए मैं हूँ ना। “
” हम्म ! मैं पास तो हो जाऊंगी ना!”
” तुझे रंगोली बस रोने की बीमारी है क्या? अब तक उस छछूंदर के नाम पर आँसू बहा रही थी, अब पढ़ाई के नाम पर।”
” यार झनक क्या करूँ? यहाँ रैगिंग के सिवा कुछ होता ही नही तो मज़ा कैसे आएगा। मुझे तो हॉन्टेड कैसल लग रहा है ये मायानगरी।”
” चल नीचे चलते हैं। कुछ अच्छा सा खाएगी तो दिमाग काम करेगा और फिर तुझे उस रितिक रोशन से लड़ने भी तो जाना है ना?”
” छोड़ यार! किसी ने उससे बात करते देख लिया तो और मुसीबत हो जाएगी। जाने दे। बस भगवान से प्रार्थना है अब मेरी पढ़ाई पूरी होते तक उसकी शक्ल न देखने को मिले।
“आमीन !! नही मिलेगी।”

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  रंगोली जो कुछ देर पहले अभिमन्यु को पानी पी पीकर कोस रही थी, अब उसे भूलभाल कर नीचे होस्टल मेस में जाने की तैयारी कर रही थी।
    झनक के साथ रंगोली नीचे पहुंची तो पता चला आज किन्हीं कारणों से मेस बंद रहेगा। उन लोगों के पास ऊपर कमरे में भी कुछ खाने को नही था। झनक के कहने पर दोनों हॉस्टल के बाहर बनी कॉमन कैंटीन में आ गईं।
   
     अभिमन्यु भी अधीर को साथ लिए रंगोली को ताड़ने के बहाने हैं मेडिकल कॉलेज की तरफ पडने वाली कैंटीन में आकर बैठा था कि उसी वक्त रंगोली झनक के साथ कैंटीन में दाखिल हुई।
   उसे देखते ही खुशी से चौक कर वो खड़ा हो गया और तुरंत रंगोली के पास पहुंच गया ” हेलो कैसी हैं आप? मैं अभिमन्यु!”
   अभिमन्यु को वहां आया देख रंगोली के तन बदन में आग लग गई। उसे पिछले चार-पांच दिन से जो चल रहा था वह सब एकदम से याद आ गया और वह बुरी तरह से अभिमन्यु पर भड़क उठी।
” तुम समझते क्या हो खुद को और मुझे क्या समझ रखा है? यह कोई फिल्म चल रही है कि तुम हीरो और मैं हीरोइन बन गई।
  देखो मिस्टर अच्छे से इस बात को समझ लो, कि मैं सिर्फ और सिर्फ पढ़ाई करने यहां आई हूं! तुम मेरे नाम के साथ अपना नाम इस तरह से जोड़ दोगे तो मैं तुम्हारी डायरेक्ट कंप्लेन अपनी डीन से कर दूंगी। डीन से यह बात सीईओ मैडम तक पहुंची तो तुम्हें सीधे रस्टिकेट कर दिया जाएगा। अब तुम फोर्थ सेमेस्टर में रहो चाहे फिफ्थ सेमेस्टर में, तुम्हारी पूरी की पूरी पढ़ाई डब्बा हो जाएगी। समझ में नहीं आता  की तुम्हें कॉलेज में पढ़ाई करना है या बस हीरोगिरी करने आए हो। क्या इधर-उधर घूम घूम के लड़कियों को परेशान करना , सिर्फ यही काम है तुम्हारा।
मेरी सारी इमेज खराब कर दी । पता नहीं मेरे सीनियर क्या सोचेंगे कि कल कि आई जूनियर अफेयर चला रही है।
   देखो तुम होगे किसी रईस बाप की बिगड़ी औलाद , तुम्हारे लिए पढ़ाई करना एक शौक होगा। तुम्हें रुपए पैसे कमाने से कोई लेना-देना नहीं होगा लेकिन मैं ऐसी नहीं हूं। मैं हद दर्जे की मिडिल क्लास लड़की हूं। रुपए पैसों से भी और फैमिली वैल्यूज से भी।
    मैं इतनी मिडिल क्लास हूं कि मेरे विचार भी मेरे जैसे ही मिडिल क्लास हैं। मेरे लिए मेरा कैरेक्टर सबसे बड़ी बात है, मैं यहां सिर्फ और सिर्फ पढ़ने आई हूं । पढ़ाई करके मुझे एक अच्छा डॉक्टर बनना है। अपना क्लीनिक डालना है खूब पैसे कमाने हैं। अपने मम्मी पापा को खुश रखना है। उनके आज तक के जो सपने पूरे नहीं हो पाए उन्हें पूरा करना है। मेरे पास प्यार इश्क मोहब्बत करने के लिए बिल्कुल वक्त नहीं है।
    तुम सोच भी नहीं सकते कि तुमने मेरा कितना बड़ा नुकसान किया है। मैं माफी मांगती हूं मुझसे गलती हो गई कि मैंने रैगिंग से बचने के लिए आकर तुम्हें गलती से प्रपोज कर दिया और वह सिर्फ और सिर्फ रैगिंग थी उसके लिए मुझे माफ करो। और प्लीज मेरी जिंदगी से दूर हट जाओ।
   हो सके तो अब जब तक मैं इस कॉलेज में हूं मुझे अपनी शक्ल मत दिखाना । प्लीज तुम्हारे हाथ जोड़ती हूं, क्योंकि तुम मेरे लिए यह तो करोगे नहीं कि मेरे सारे सीनियर से जाकर यह बात कहो कि तुम जो भी कह रहे थे वह गलत था, झूठ था, मजाक था। पहले मेरी सारी सीनियर्स मैडम के सामने तुमने मेरी इमेज खराब की, बाद में मेरे सीनियर सर लोगों के सामने भी तुमने वही कर दिया। अब मेरे पूरे कॉलेज में सब मुझे तुम्हारी गर्लफ्रेंड समझ रहे हैं। जबकि ऐसा कुछ है नहीं और तुम शायद नहीं जानते प्रोफेशनल कॉलेज में कैरेक्टर बहुत ज्यादा मैटर करते हैं।
   तुम्हें शायद नहीं पता होगा लेकिन मेरे मार्क्स पर भी इस बात का असर पड़ेगा । मेरे प्रैक्टिकल मार्क्स तो ज़ीरो ही हो गए क्योंकि प्रोफेसर एक कैरक्टरलेस लड़की को कभी भी अच्छे मार्क्स नहीं देते।”

   बोलते बोलते रंगोली की आंखों से आंसुओं की धार बहने लगी झनक उसे संभाली हुई थी। और बार-बार शांत करवा रही थी लेकिन अभिमन्यु रंगोली के इस रूप को देखकर दिल से घबरा गया था। रंगोली के आंसू उसकी आंखें भिगो गए थे । उसने सोचा भी नहीं था कि जिस बात को वह आज तक इतना कैजुअल ले रहा था वो रंगोली के लिए इतनी बड़ी बात हो सकती है, उसने तुरंत अपने दोनों हाथ जोड़  दिए।

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“मुझे माफ कर दो रंगोली मैं तुम्हारे हर एक सीनियर से मिलकर माफी मांग लूंगा। और तुम बेहिचक पढ़ाई करो मैं अब तुम्हें कभी डिस्टर्ब करने नहीं आऊंगा।”

  अभिमन्यु अपनी आंखें पोंछता वहां से बाहर निकल गया अधीर भी उसके पीछे भागता चला गया।

  वह तो अच्छा था कि इस कैंटीन में ज्यादा भीड़ भाड़ नहीं थी और यह लोग दरवाजे पर ही टकरा गए थे इसलिए किसी ने भी इन लोगों पर ध्यान नहीं दिया लेकिन रंगोली को अब बस यही महसूस हो रहा था कि हर किसी की निगाहें उसी की तरफ़ है। उसने झनक का हाथ पकड़कर धीमे से कहा कि “अब मैं अंदर नहीं जा सकती मुझे वापस कमरे में जाना है” झनक उसकी हालत समझ गई थी इसलिए उसे साथ लेकर वह हॉस्टल वापस चली आई।

   लुटा पिटा सा अभिमन्यु भी अपने हॉस्टल पहुंच गया अधीर ने उससे खाने के लिए भी पूछा लेकिन अब उसकी भूख प्यास सब उड़ गई थी।
   उसने अपने कमरे का दरवाजा खोला तो देखा सामने सीपी सर बैठे हैं।
“सर आप यहां? मुझे बुला लिया होता।”

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“अब का कांड कर दिए हो मिसिर जी?”

“क्या बात हो गई सर मैं समझा नहीं?”

“मेडिकल में जाकर कुछ हंगामा किए हो भाई?”

“आपसे किसने कहा?”

“ऋषि खुराना की टीम सीईओ मैडम के पास गई थी! तुम्हारी शिकायत लेकर। बुलावा आया है, वाशिंग पाउडर के ऑफिस में।
      कल मैडम ने तुमको याद किया सुबह सुबह पहुंच जाना नौ बजे। हम भी चलेंगे तुम्हारे साथ हम जानते हैं तुम कुछ गलत काम तो कर नहीं सकते। पर यार थोड़ा तो सोचा करो निरमा मैडम के पास हम ही लोग गए थे यह फरियाद लेकर कि स्टूडेंट्स का अपनी परिधि को लांघना बंद करवा दीजिए। उन्होंने बंद करवाने की कोशिश शुरू की कि हमारा यह लड़का मेडिकल में पहुंच गया। “

अभिमन्यु को बीते दिन वाली सारी बातें याद आ गई और उसने अपने सर पर अपना हाथ मार लिया

“अब याद आया! तो वह साला इस चक्रव्यूह में फंसाने की बात बोल रहा था। उस कमीने को तो मैं देख लूंगा सिपी सर।”

“अरे हटाओ छोड़ो यार ! उसको तो हम एक साथ सब देख लेंगे, उसकी चिंता छोड़ो। फिफ्थ सेम के एग्जाम की डेट आ गई है। उस पर भी फोकस करो। इस बार तुम्हारा चांस है अगर इस बार टॉप कर लिए तो अगले सेमेस्टर बुक बैंक फ्री मिलेगा तुमको।

“यह बढ़िया बात बताएं सर आप। एग्जाम कब से हैं?”

“2 हफ्ते बाद की डेट आई है बेटा! कभी थोड़ा लाइब्रेरी के बाहर लगे नोटिस बोर्ड पर भी नजरें फिरा लिया कीजिए। वैसे तो आप दोनों बहुत ही ज्यादा व्यस्त रहते हैं! लेकिन अपने व्यस्त शेड्यूल से थोड़ा टाइम निकाल कर नोटिस बोर्ड पर भी नजर डाला कीजिए।”

  अभिमन्यु और अधीर झेंप कर इधर-उधर देखने लगे।
सीपी उठकर अभिमन्यु के बालों पर हाथ रख कर बाहर निकल गया दरवाजे से पलट कर एक बार फिर उसने अभिमन्यु को आवाज लगा दी…- घबराओ मत ऋषि खुराना की तो खबर हम सब मिल कर लेंगे! अभी फिलहाल कल जाकर मैडम के पैर पकड़ लेना कि तुम को सस्पेंड ना करें! 2 हफ्ते बाद एग्जाम हैं। इस बात की भी दुहाई दे देना जिससे तुम्हें माफ कर दें। आई बात समझ में?”

  अभिमन्यु ने झुक कर सीपी सर के पैर छू लिये। और सीपी  ने उसे ऊपर उठा कर अपने कलेजे से लगा लिया…-” छोटे भाई हो बे हमारे।’

******

   अगली सुबह निरमा के ऑफिस के बाहर अभिमन्यु इधर से उधर चक्कर काट रहा था कि तभी निरमा के ऑफिस का दरवाजा खुला और एक लंबे चौड़े डील डौल वाला स्मार्ट सा बंदा एक बच्ची का हाथ पकड़े बाहर निकल आया…
   हड़बड़ी में अभिमन्यु उससे टकराते टकराते बचा…-” सॉरी सर! वो ज़रा दिमाग घुमा हुआ है ना। इसलिए कुछ सूझ नही रहा और आपसे टकरा गए।”
” कोई बात नही। “
वो व्यक्ति आगे बढ़ने को था कि उस बच्ची ने अभिमन्यु के हाथ में थमा गुलाबों का बुके देख उसे पाने की ज़िद शुरू कर दी।
   और अभिमन्यु उस लड़की से बचाने के लिए गुलाब इधर उधर छुपाने लगा…
  ” नो मीठी! अभी यहाँ से चलो तुम्हें शाम में पापा रोज़ेज़ दिलवा देंगे।”
” आप भूल जातें हैं पापा।”


   उस व्यक्ति ने मुस्कुरा कर अभिमन्यु की तरफ देखा…-“तुम परेशान मत हो। जाओ अंदर मैं इसे सम्भाल लूंगा। “
  अभिमन्यु विनम्रता से दुहरा होता उसी आदमी से अपने मन की बात कहने लगा….
” ये असल में मैडम के लिए लेकर आया हूँ।”
  सामने खड़े आदमी की भौहें ज़रा तन गयीं। उसके चेहरे के भाव देख अभिमन्यु को लगा ये आदमी भी अंदर बैठी औरत से परेशान ही होगा , वो अपनी लय में कहता चला गया।
  ” क्या बताऊँ सर। इतनी कड़क हैं ये मैडम की आपकी गलती न भी हो तो भी आपको सॉरी बुलवा कर रहेंगी।”
   सामने खड़े उस आदमी ने अभिमन्यु का कंधा थपथपा दिया…-“समझ सकता हूँ। और ये बात मुझ से बेहतर कौन जानेगा।”
” सर इतनी स्ट्रिक्ट है मैडम की पहला तो इन्हें देखते ही हम क्या कहने आये थे वो भूल जातें हैं। दूसरा ये अपनी मीठी ज़बान से हमें ऐसे लपेटतीं हैं कि जो वो करवाना चाहतीं हैं फिर वही होता है।
   आप कितने पापड़ बेल लो होगा वही जो इन्होंने सोच रखा होगा। इन्हें कोई फर्क नही पड़ता की पढ़ने में कैसे हैं? आपके एम्बिशन क्या हैं? हम सब इनके लिए सिर्फ गधे हैं। बल्कि इन्हें यह लगता है कि इनके इस केबिन के बाहर हर कोई गांव है यह अकेली हिटलर है।
   हिटलर नहीं बल्कि यह तो मुझे तुगलक लगती है। बिना सर पैर के फरमान जारी कर दिया तो कर दिया। अब तुम फॉलो करते हो तो ठीक और अगर नहीं की तो तुम्हारा सर कलम कर दिया जाएगा।
   अच्छा सदियों से यह परंपरा रही है कि कितना भी खडूस राजा रहा हो,सर कलम करने से पहले आप की आखिरी इच्छा जरूर पूरी करने के लिए पूछता था। लेकिन यह ऐसी है कि आप की आखिरी इच्छा भी नहीं पूछेंगी सीधे खटाक।

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“बहुत सताए हुए लग रहे हो इनके।”

” क्या करें इनसे ज्यादा हम अपनों के सताए हुए हैं।अपने कॉलेज के लौंडो की मदद करने के चक्कर में बुरी तरह से फंसे बैठे हैं। पता है अंदर जाएंगे तो मैडम सूली पर चढ़ा ही देंगी।”

“एक बार बात करके देखो दोस्त ! हो सकता है तुम्हारी सुन ले।”

अभिमन्यु ने लाचारगी से ना में से सिर हिला दिया…

“अभी 2 दिन पहले तो इनसे बात करके गए हैं सर जी। कैंपस में इधर-उधर लड़के ना घूमे उसके लिए आकर बड़े प्यार से इन से बात की कि आर्ट्स एंड स्पोर्ट्स वाले लड़कों का इधर-उधर घूमना बंद करवा दें। वह लड़के वैसे भी वाहियात हैं। अब कल तो हम किसी काम से मेडिकल गए थे अब वहां के कुछ लड़कों ने आकर आग लगा दी! अब मैडम जी हमारे नाम से फतवा जारी कर चुकी हैं। हमें इसीलिए बुलवाया गया है कि हमारे नाम का सस्पेंशन लेटर हमारे हाथ में रख दिया जाए ,क्योंकि मैडम ने आदेश पारित कर दिया था। और वह आदेश भी ऐसा वैसा नहीं कि दो से तीन बार वार्निंग दी जाएगी फलाना ढिकाना। बल्कि आदेश यह था कि अब से अगर कोई भी लड़का किसी दूसरे कैंपस में नजर आया तो उसे तुरंत सस्पेंड कर दिया जाएगा। एक महीना के लिए। अब बोलिए 15 दिन बाद हमारे एग्जाम होने हैं। यह हमें सस्पेंड कर देंगी तो हम तो पूरा एक सेमेस्टर पीछे हो जाएंगे ना। “

“बात तो चिंता की है! पर तुम ऐसा करना, जाते साथ पहले मैडम से यह सारी बातें बोल देना। हो सकता है सुन ले, वैसे कभी-कभी सामने वाले की भी सुन लेती हैं। स्ट्रिक्ट तो हैं लेकिन अगर कोई अपनी सच्चाई पर अडिग रहे तो उसे माफ भी कर देतीं हैं।’

“पापा चलो न देर हो जाएगी। फिर मम्मी आपको डांट लगाएंगे कि मीठी को लेट करवा दिया।”

अभिमन्यु ने प्यार से उस बच्ची के सर पर हाथ फेरा और मुस्कुरा कर उसके पास झुक कर बैठ गया …-“हां बेटा जाओ घर पर आपकी मम्मी वेट कर रही होगी ना।”

“नहीं भैया! मम्मी तो अंदर बैठी हैं ।यह मम्मी का ही ऑफिस है। और स्कूल ले जाने के पहले पापा मुझे मम्मी से मिलवाने लाते हैं।”

   अभिमन्यु खट से खड़ा हो गया। उसने घबराते हुए सामने खड़े आदमी की तरफ देखा…-” आई एम सॉरी सर। मुझे पता नहीं था कि आप….”
    वह कहते कहते रुक गया कि प्रेम ने उसके सामने हाथ बढ़ा दिया…-” मैं प्रेम सिंह चंदेल हूँ। अंदर आपकी जो हिटलर मैडम बैठी हैं हमारी ही शरीक-ए-हयात हैं।
   और वैसे इतनी भी खडूस नहीं है वो। नाम क्या बताया तुमने अपना?”

“सर अभिमन्यु! अभिमन्यु मिश्रा मेकेनिकल 5th सेमेस्टर में पढ़ता हूं।”

“अरे जन्मकुंडली नहीं पूछी भाई । जाओ जाओ अंदर जाओ । मैडम ने ग्रीन बत्ती जला दी है।”

  अपने बालों पर हाथ फेरता झूमता हुआ सा अभिमन्यु निरमा की केबिन में दाखिल हो गया और प्रेम मीठी का हाथ  थामे उसके स्कूल के लिए निकल गया।

******

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    कैंटीन से लौटती रंगोली और झनक हॉस्टल पहुंचे कि देखा एक पुलिस की गाड़ी उनके कम्पाउंड में खड़ी है, और आसपास काफी सारी भीड़ भाड़ जमा हो रखी है।
    वो लोग भी धीमे से घुस कर भीड़ का एक हिस्सा हो गए। आसपास खुसफुसाहट चल रही थी,ध्यान लगा कर सुनने में भी कुछ समझ नही आ रहा था। झनक ने साथ खड़ी एक लड़की से ” माज़रा क्या है?”पूछ ही लिया।
  उसने जो बताया वो सुन कर रंगोली और झनक के होश उड़ गए।
    उन्हीं के हॉस्टल में किसी लड़की ने फंदे से लटक कर आत्महत्या कर ली थी……

क्रमशः

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aparna..

मायानगरी -5

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मायानगरी – 5

      मेरे पास आओ मेरे
     दोस्तों एक किस्सा सुनो
       मेरे पास आओ मेरे
     दोस्तों एक किस्सा सुनो

    कई साल पहले की ये बात है
      बोलो ना चुप क्यों हो गए
         भयानक अंधेरी
        सी यह रात में
       लिए अपनी बन्दूक
             मैं हाथ में……

   ” अबे सालों बस सुनने आये हो क्या? साला आज कल के लड़कों को कोई तमीज ही नही है। हम सीनियर होकर हम ही गाना भी सुनाए। शर्म करो कुत्तों। ये मैं गुनगुना रहा था कमीने कान गड़ाए खड़े हैं।”

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     इंजीनियरिंग कैम्पस में कंप्यूटर साइंस के जूनियर्स को मैकेनिकल के सीनियर्स धरे बैठे थे कि कंप्यूटर वाले सीनियर्स वहीं चले आये…

” अरे सीपी यार इन लोगो को काहे दबोच रखे हो, हमारे वाले हैं ये। “

” निशांत यार हम भी जानते हैं । लेकिन देखो, शुरू से ही हमारे कॉलेज में फैकल्टी वाइज कभी फसाद नही हुआ। हम अगर तुम्हारे बंदों को रैंग करते है तो तुम्हे भी तो खुल्ली छूट है यार हमारे बंदों को नोचने की।

“भाई वो बात नही है यार। इस बार की बैच में ज़रा हाई फाई लड़के भी हैं। मैनेजमेंट कोटा खूब भरा है।”

” अरे तो क्या हुआ? मैनेजमेंट कोटा से आने वालों को क्या हम तमीज नही सिखाएंगे। भाई ये हमारी ही नैतिक जिम्मेदारी है कि लड़कों को लड़का बनाया जाए। अब स्कूल से ये क्या सिख पढ़ कर आते हैं। कुछ नही। सिर्फ होर्लिक्स पी लेने से टॉलर स्ट्रॉन्गर और स्मार्टर नही बना जाता। हम ही हैं जो इन टोडलर्स को चलना सिखाते हैं।
  कायदे से यही वो जगह है जहाँ इन जाहिलों को इंसान बनाया जाता है।”
  तभी सीपी की नज़र एक जूनियर पर पड़ी जो थर्ड बटन से सर ऊपर कर के देखने की कोशिश कर रहा था कि सीपी का जोरदार तमाचा उसके चेहरे को लाल कर गया।
   जोश ही जोश में तमाचा इतना ज़ोर का पड़ा की लड़का घूम कर ज़मीन पर गिरा और बेहोश हो गया…

  वहीं चबूतरे पर बैठे अभिमन्यु और बाकी लड़के भी भाग कर देखने चले आये।
  लड़कों में हड़कंप मच गया। कम्प्यूटर वाले लड़के डर के मारे अपनी बिल्डिंग को खिसक लिए। सीपी को लगा नही था कि उसका पंजा ऐसा फौलाद का है। आश्चर्य से वो कभी उस बेहोश जूनी को तो कभी अपने हाथ को देख रहा था कि अभिमन्यु ने लड़के को उठाया और अपने कंधे पर डाल मेडिकल की तरफ भाग चला।
   अधीर भी उसके पीछे हो लिया।

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   लंबा चौड़ा अभिमन्यु उस नाजुक दुबले पतले से जूनियर लड़के को कंधे पर लिए बिल्कुल साक्षात सती को कंधो पर लिये महादेव सा चला जा रहा था।

  मेडिकल में गेट पर  से घुसते ही बायीं ओर कॉलेज का हॉस्पिटल था। अभि उसी तरफ निकल गया…

“ला यार थोड़ी देर मैं भी पकड़ लूँ। “

  अधीर के इस प्रोपोजल के आते में ही मेडिकल कैम्पस में खड़ी स्ट्रेचर लिए वार्डबॉय भागा चला आया…

” क्या हुआ है लड़के को? “

  डॉक्टर के सवाल पर अभिमन्यु ने ही जवाब दिया..

” बेहोश हो गया है। “

” वो तो दिख रहा है। बेहोश कैसे हुआ? “

  अभि और अधीर एक दूसरे को देखने लगे। डॉक्टर के सामने ये बताना कि रैगिंग में पड़े थप्पड़ ने ये हाल किया है महंगा पड़ सकता था।

” इसने ब्रेकफास्ट नही किया था डॉक्टर!”

ड़ॉक्टर ने अजीब सी नज़रों से अभि को घूर कर देखा और लड़के को साथ लिए अंदर चला गया।

  अभी और अधीर के पीछे सीपी और उसके 1-2 चेले भी भागते हुए मेडिकल चले आए। सीपी और चेले वहीं बाहर बैठ गए।

   अभि और अधीर इधर उधर भटकते उस लड़के के होश में आने का इंतज़ार कर रहे थे कि कहीं से मधुर सी गाने की आवाज़ चली आयी। दोनों उसी दिशा में बढ़ चले…

  मेडिकल प्रथम वर्ष के छात्रों का आज अस्पताल विज़िट करने का पहला दिन था और आज ये नन्हे-मुन्ने बच्चे रेजिडेंट डॉक्टर्स के हत्थे चढ़ गए थे।
   असल में इन्हें इनके कुछ सीनियर्स ने अस्पताल की ओपीडी से कुछ आवश्यक सामान लाने का बेइंतिहा गैरजरूरी काम दिया था।
   इसी चक्कर में ये चार पांच लड़के लड़कियां यहाँ फंस गए थे।
वैसे रेजिडेंट डॉक्टर्स इतना व्यस्त होते थे कि वो जूनियर्स की रैगिंग लेते नहीं थे। लेकिन पिछले दिन की हेक्टिक शेड्यूल की थकान उतारने के लिए आज उनके पास जूनियर्स नाम का एंटरटेनमेंट मौजूद था। और बस इस एंटरटेनमेंट की बहार देखते हुए रेजिडेंट डॉक्टरों का भी उ ला ला करने का मन करने लगा।
  डॉक्टर्स ड्यूटी रूम में इन जूनियर्स की रैगिंग चल रही थी।
  इत्तेफाक से रंगोली ही उस रैगिंग की सबसे पहली शिकार बनी थी। सीनियर से उसे गाना सुनाने को कहा था और वह अपने गले को साफ कर गाना शुरू कर चुकी थी।

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देख लो हमको करीब से
आज हम मिले हैं नसीब से
     यह पल फिर कहां
    और यह मंजर फिर कहां
  गजब का है दिन सोचो जरा
   यह दीवानापन देखो जरा
तुम भी अकेले हम भी अकेले मजा आ रहा है कसम से…..

   कमरे के ठीक बाहर खड़े अभिमन्यु और अधीर के कानों तक भी यह स्वर लहरी पहुंच चुकी थी। आवाज का नशा अभिमन्यु पर ऐसा छाया कि बेहोशी के आलम में उसने दरवाजा धीरे से खोल दिया…
उसके दरवाजा खोलते ही सारे सीनियर्स अपनी जगह से उठकर खड़े हो गए। जूनियर्स पहले ही खड़े थे जो थर्ड बटन में थे   वह लोग भी दरवाजे की तरफ देखने लगे । अभिमन्यु और अधीर को ऐसे सामने खड़े देख एक सीनियर रेजिडेंट ने उन लोगों से पूछ लिया…-” आप लोग कौन हैं यहां क्या कर रहे हैं?”

“हम इंजीनियरिंग के हैं ,एक मरीज लेकर आए थे।”

“मरीज लेकर आए थे? क्या हुआ तुम्हारे मरीज को?”

“जरा चक्कर आ गया था।”

“हां तो ठीक है! लेकिन यहां क्या कर रहे हो? मरीज को भर्ती करवा दिया है ना ड्रिप चढ़ेगी शाम तक बंदा अपने पैरों पर चलकर इंजीनियरिंग कैम्पस वापस आ जाएगा इसलिए अब  फुटो यहां से।”

अभिमन्यु ने रंगोली को देखा रंगोली ने अभिमन्यु को और अभिमन्यु के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कुराहट आ गई!  पास खड़ी झनक ने रंगोली को तुरंत कोहनी मारी….-” देख आखिर तेरा पति  तुझे ढूंढता यहाँ तक चला आया।
“चुप कर बकवास मत कर।”
रंगोली  जितना धीमा बोल सकती थी उतना धीमा बोली लेकिन उसने इतना धीमा बोल दिया कि पास खड़ी झनक तक को सुनाई नहीं दिया और झनक ने इतनी जोर से “क्या” कहा कि सारे रेजीडेंट डॉक्टर उन दोनों को देखने लगे।

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  उसी वक्त बाहर से गुजरते मृत्युंजय की नजर डॉक्टर्स ड्यूटी रूम पर पड़ गई। वह अभिमन्यु और अधीर को हाथ से हटा कर दरवाजे से भीतर चला आया…-” क्या हो रहा है यहां पर?”
सारे जूनियर रेजीडेंट डॉक्टर घबराकर एक तरफ खड़े हो गए …-“कुछ नहीं सर! वह बस जरा यह फर्स्ट ईयर जूनियर्स हैं इन्हें एनाटॉमी पढ़ा रहे थे।”
“एनाटॉमी पढ़ाना है, तो लैब में पढ़ाया करो। यहां बिना बोन और बिना किसी ऑर्गन के तुम लोग एनाटॉमी कैसे पढ़ा रहे हो?”
मृत्युंजय ने जूनियर की तरफ देखा और उन्हें वहां से जाने की इजाजत दे दी।

  उस कमरे से बाहर निकलते ही जूनियर्स ने चैन की सांस ली… -“यहां तो यार हर मोड़ पर आतंक छाया हुआ है! वह गाना आज मेरी समझ में आ रहा है, यहाँ रोज-रोज हर मोड़ मोड़ पर होता है कोई ना कोई हादसा।  बस उन्हीं हादसों का अड्डा है हमारा कॉलेज। क्लास में बैठते हैं तो फँस जाते हैं। लैब में जाते हैं तो फँस जाते हैं। हॉस्पिटल आते हैं तो भी फँस जाते हैं। जहां देखो वहां सीनियर का आतंक है। आखिर कब बच पाएंगे हम लोग।”
   झनक की बात पर साथ चल रहा लड़का राहुल हंसने लगा…-” तुम लोग तो फिर भी लड़कियां हो यार! तुम बच जाती हो, हम लोगों के साथ हॉस्टल में भी इतनी ज्यादा अति होती है कि हम बता नहीं सकते।”
  “प्लीज बता ना क्या रैगिंग होती है तुम लोगों के साथ।”
  ” चुप कर! नहीं बताना।”
“अरे ऐसा क्या करते हैं भई सीनियर बता ना प्लीज।”
“होती है बॉयज वाली रैगिंग! जैसे तुम्हारी गर्ल्स प्रॉब्लम तुम हमसे शेयर नही कर सकती, हम भी नही कर सकते ।”
” बड़ा आया। मत बता।”
   वो लोग बातें करते अगर बढ़ ही रहे थे कि पीछे से उन्हें आवाज़ लगाते अभिमन्यु और अधीर चले आये…
” एक्सक्यूज मी गाइज़! आप लोग मेडिकोज हैं?
   अभिमन्यु के सवाल पर रंगोली के अलावा बाकी लोगों ने उसे घूर कर देखा..-” हां जी आपको क्या प्रॉब्लम है?”
“नो नो! कोई तकलीफ नहीं है । एक्चुली मैं कुछ जानना चाहता था मेडिकल टर्म्स में।”
राहुल ने उसे बिल्कुल ही हिकारत भरी नज़रों से घूर कर देखा।
” भाई मेरे! ऐसे घूर कर मत देख! मैं भी कोई ऐवें नहीं हूं। इंजीनियरिंग कर रहा हूं, मेकेनिकल से। और उम्र के लिहाज से देखा जाए तो तुम सबसे दो-तीन साल बड़ा ही हूंगा। और प्रोफेशनल कॉलेज के हिसाब से देखा जाए तो यूनिवर्सिटी सीनियर हूं तुम्हारा।”
अबकी बार जवाब राहुल की जगह अतुल ने दिया…-” जी कहिए क्या पूछना है आपको।”

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“दोस्त कहीं आराम से बैठ कर बात कर सकते हैं । ज़रा सीरियस मुद्दा है।”
“ओके बाय गाइज़। तुम लोग बैठ कर बातें करो मैं और रंगोली चलते हैं।” झनक रंगोली का हाथ थामे आगे बढ़ने लगी कि अभिमन्यु उन दोनों के सामने अचानक से जाकर खड़ा हो गया….-” अरे मैडम! प्लीज रूके ना आप चार डॉक्टर रहेंगे, तो मेरी समस्या को आप लोग आसानी से समझ कर सुलझा सकते हैं । आप मेडिकल की पढ़ाई करने आई हैं। आप लोगों का तो पेशा ही है लोगों के दुख दर्द सुनना।”
   झनक ने एक नजर अभिमन्यु को देखा और हां में सर हिला दिया।
   रंगोली का वहां रुकने का बिल्कुल मन नहीं था वह झनक का हाथ पकड़े बार-बार उसके हाथ पर दबाव बनाती वहां से निकल चलने की गुजारिश कर रही थी।
    उन चारों डॉक्टरों के साथ अभिमन्यु और अधीर मेडिकल कैंटीन में पहुंच गए।
  वह चारों अभी फर्स्ट ईयर में थे इसलिए कायदे से उन्हें कैंटीन जाना अलाउड नहीं था। और यह बात उन चारों को मालूम नही थी, अनभिज्ञता में वह चारों अभिमन्यु के साथ कैंटीन में प्रवेश कर गये।
   कैंटीन में काम करने वाला लड़का झाड़न अपने कंधे पर लटकाए उन तक चला आया…-‘ फर्स्ट ईयर के लगते हो आप लोग।”
  झनक ने उसे घूर कर देखा…-” हां तो!”
“तो यह कि अगर सीनियर्स ने देख लिया कि फर्स्ट ईयर में वेलकम पार्टी मिले बिना आप लोग कैंटीन चले आए हो तो…?”
“तो क्या बे? हम लोगों को सिखा रहा है!” अबकी बार राहुल उलझ पड़ा।
“मैं क्या सिखाऊंगा? आप लोगों को रात में वह सामने पीपल पर लटकी उल्टी चुड़ैल सब कुछ सिखा देगी।”
“अरे गुरु घंटाल! यह लोग खुद से नहीं आए मैं इन लोगों को लेकर आया हूं! और मैं फिस्थ सेमेस्टर में हूं यानी कि सीनियर बन चुका हूं यूनिवर्सिटी का । और यूनिवर्सिटी के हर कैंटीन में हमें जाना अलाउड है, आई बात समझ में।”

अजीब सा मुहँ बनाकर उनके टेबल पर झाड़न मार कर वह लड़का जाने लग गया….-” अबे जाते-जाते ऑर्डर तो ले जा।”
“क्या लोगे आप लोग?” उसने एक नजर सब को घूर कर फिर पूछा….
” तेरे यहां का सबसे स्वादिष्ट व्यंजन क्या है ?”
“इस वक्त सिर्फ मैगी और सैंडविच मिलेगा।”
“और पीने के लिए ?”
   अभिमन्यु ने मुस्कुराते हुए पूछा…
” आप जो पीते हो वो कतई नही मिलेगा।
उस लड़के ने एक नज़रअभिमन्यु को देखा और अपनी ही कही बात संभाल ली…-” स्ट्रौबरी शेक।”
अभिमन्यु का मुंह बन गया उसने कहा …-“इन चारों के लिए वही ले आ।”
“अब बोलो? कौन सी  मेडिकल इमरजेंसी के बारे में पूछना था तुम्हें? झनक के सवाल पर अभिमन्यु मुस्कुराने लगा।
“अबे ओए टॉम क्रूज दांत बाद में दिखाना पहले फटाफट बता तेरी प्रॉब्लम क्या है ?” अबकी बार राहुल लपका
“वह प्रॉब्लम यह है कि मेरा एक दोस्त है उसकी याददाश्त जरा गुम होने लगी है! सुबह ब्रश किया है कि नहीं उसे कुछ याद नहीं रहता।  कई बार रात में सोता है लेकिन सुबह उठने पर फिर कहता है मैं तो रात भर सोया ही नहीं। नहा कर आता है, और फिर नहाने चला जाता है। खाने का तो पूछो ही मत जितनी बार दे दो हर बार खा जाता है। क्योंकि वह यही भूल चुका होता है कि वह खा चुका है। और तो और कई बार यह भी भूल जाता है कि वह सुसु पॉटी करके आ चुका है। इस प्रॉब्लम का इस समस्या का कोई समाधान है आप लोगों के पास डॉक्टर?”
“अबे यार कौन है यह नमूना? “
अभिमन्यु ने अधीर की तरफ इशारा कर दिया अधीर ने उसे घूर कर देखा और अपनी जगह से खड़ा हो गया…
” शरमा गया बेचारा। क्या है ना ऐसी समस्या है कि बाहर किसी से डिस्कस नहीं कर सकते, आप लोगों को देखकर लगा जैसे दिल से आपसे रिश्ता है। इसीलिए आपसे यह तकलीफ कह गया।”

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    अभिमन्यु अपनी बात कहते हुए रंगोली को देखता रहा। रंगोली ने घबराकर पलके नीचे कर ली। वह झनक का हाथ इतनी जोर से पकड़ी हुई थी, कि अब झनक को हाथ में दर्द होने लगा था। झनक अपनी जगह से खड़ी हो गई…-” चल रंगोली अब हम वापस जाते हैं हॉस्टल के लिए लेट हो रहे हैं।’
   वह दोनों वहां से निकलने को ही थी कि चार पांच सीनियर लड़कों की टोली उनका रास्ता रोक खड़ी हो गयी…
” फर्स्ट ईयर? “उनमें से एक ने कड़क कर पूछा।
“यस सर!” मिमियाती सी आवाज़ में राहुल ने जवाब दिया
” वेलकम पार्टी के पहले कैंटीन जूनीज़ के लिए अलाउड नही है। तुम लोगो को मालूम नही था।”
” वी आर सो सॉरी सर। हमें वाकई मालूम नही था। “
” अच्छा बेटा! और फर्स्ट मन्थ में ही तितलियों को लेकर कैंटीन घूम रहें हो। “
  रंगोली के लिए तितली सम्बोधन सुन अभिमन्यु का खून खौल उठा…-“माइंड योर लैंग्वेज, व्हाटएवर इस योर नेम? “
” तू कौन है बे? बीच में बोलने वाला? मेडिको तो नही है!”
” मेकेनिकल इंजीनियरिंग थर्ड ईयर का स्टूडेंट हूँ,नाम अभिमन्यु है। “
” तो बेटा अभिमन्यु तेरे गुर्दो में दर्द क्यों हो रहा जब हम अपने बच्चों को डांट रहे। “
” डाँटो लेकिन तमीज से। अगर गर्ल्स के लिए कोई बदतमीजी करोगे तो मैं सहन नही करूँगा। “
” क्यों बे तेरी सेटिंग है क्या ये। ” उसने रंगोली की तरफ इशारा किया..
” हां है। और आज के बाद इसे परेशान किया तो नाम याद रख लेना अभिमन्यु से बुरा कोई नही होगा।”
  अभिमन्यु उसे धमका कर निकल गया,अधीर भी उसके पीछे गिरता पड़ता भाग गया।
   इतनी सारी बहस के बीच पीछे खड़े सीनियर्स के इशारे पर वो सारे जूनियर्स भी वहाँ से खिसक लिए।
” वेलकम बेटा अभिमन्यु! मेडिकल के चक्रव्यूह में तुम्हारा स्वागत है। जानते नही हो तुम, तुम्हारा पाला ऋषि खुराना से पड़ा है।”
   खून का घूंट पीकर ऋषि खुराना भी अपनी गैंग के साथ निकल गया।

   वहीं पीछे एक सबसे किनारे की टेबल पर गौरी बैठी अपनी नोटबुक में कुछ लिख रही थी।
  उसकी एकमात्र खास सहेली प्रिया किसी काम से स्टाफ रूम गयी थी। उसी का इंतज़ार करती गौरी अपनी नोटबुक खोली बैठी थी कि तभी विधायक नारायण दत्त का लड़का वेदांत वहाँ अपनी टोली के साथ चला आया।
   यही वो लड़का था जिसके इधर उधर तफरीह करने से परेशान सीपी सर अभिमन्यु और बाकियों को लिए निरमा से मिलने गए थे।
   कैंटीन में सारे टेबल भरे थे। गौरी के सामने तीन कुर्सियां खाली पड़ी देख वेदांत ने एक कुर्सी पकड़ कर पीछे खींची और बैठने को था कि मृत्युंजय आकर उस कुर्सी पर बैठ गया।
    मृत्युंजय ने वेदांत को देख उसे थैंक्स बोला और गौरी की तरफ देखने लगा।
  गौरी वेदांत के व्यवहार को देखते हुए अचरज में थी कि मृत्युंजय आ गया और उसे देख गौरी के चेहरे पर सुकून लौट आया।
   उन दोनों को एक दूसरे को देखते देख वेदांत वहाँ से हट गया कि तभी उसके एक चेले ने उसे आवाज़ लगा दी…-” गुरु यहाँ टेबल खाली है। आ जाओ।”
   एक नज़र गौरी को घूर कर वेदांत आगे बढ़ गया…

“, थैंक यू सर। आप हमेशा मेरी परेशानी में मेरा साथ देने खड़े रहते हैं।”
” इट्स माय प्लेजर गौरी। और बताओ कैसी हो तुम?”
“ठीक हूँ । अभी एक हफ्ते से मेडिसिन बंद की है। और मुझे नींद भी सही या रही है।”
” इट्स गुड! लेकिन एकदम से विड्रॉ नही करेंगे। धीरे धीरे ही मेडिसिन छोड़ना।”

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” जी सर। “
” कॉफी लोगी? “
गौरी ने हाँ में सिर हिला दिया…
दोनो साथ बैठे कॉफी पीते इधर उधर की बातें करते रहे।
     जय के साथ होने पर गौरी के चेहरे पर काफी समय बाद मुस्काने लौटने लगीं थीं…..

क्रमशः

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aparna…