साबूदाना : स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद है या नही?

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  साबूदाना:-



    साबूदाना नाम लेते ही हमारे सामने उपवास से भरे दिन के बाद की सजी हुई थाली नजर आने लगती हैं साबूदाना हमारे हिंदुस्तान का एक बहुत प्रचलित खाद्य पदार्थ है।
     उत्तर भारत हो मध्य भारत हो या महाराष्ट्र उपवास में मुख्य रूप से खाए जाने वाले आहार का हिस्सा है साबूदाना। साबूदाना से तरह-तरह की चीजें बनाई जा सकती हैं चाहे वह साबूदाना की खिचड़ी हो साबूदाना के बड़े हो या खीर ।
यह सारे ही भोज्य पदार्थ पोषकता के मानकों पर खरे उतरते हैं।

   व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी में इधर कुछ दिनों से साबूदाने के ऊपर लंबे चौड़े वीडियोज़ रहे हैं कि इन्हें पशुओं की चर्बी से पॉलिश किया जाता है या साबूदाना बनाने में एनिमल फैट प्रयोग किया जाता है तो इन्हें उपवास में प्रयोग में कैसे लाया जाए?

सबसे पहली बात तो यह है कि बिना किसी विश्वसनीय साइट के आप सिर्फ व्हाट्सएप के वीडियोस के आधार पर कोई भी भ्रांति मन में ना पाले यह एक तरह से अफवाहों का अड्डा ही है कोई अफवाह चल गई तो ट्रेंड में आ जाती है और लगातार लगातार उस वीडियो को देखते हुए आप अपने मन में एक धारणा तैयार कर लेते हैं।

  साबूदाना का इतिहास खंगाला जाए तो यह मालूम पड़ता है कि यह हमारे परंपरागत आहार का हिस्सा नहीं था। यह मुख्य रूप से अफ्रीका में होने वाली टैपिओका की प्रजाति है।
    भारतवर्ष में इसे लाने का श्रेय त्रिवेंद्रम के राजा जी को जाता है। कई जगह इतिहास में यह भी वर्णित है कि साबूदाना की खेती सबसे पहले तमिलनाडु में शुरू की गई लेकिन बहुत सी जगह पर इसकी खेती सबसे पहले केरल में किए जाने के सबूत भी मिलते हैं।

साबूदाना पूरी तरह से वानस्पतिक आहार है। वनस्पतियों के रस से बनाया आहार उपवास के लिए पूरी तरह शुद्ध और सात्विक होता है।

  आइए देखते हैं साबूदाना बनता कैसे हैं…

भारतवर्ष में साबूदाना मुख्य रूप से टेपियोका की जड़ से बनाया जाता है सबसे पहले खेती वाली जगह से सारी टेपियोका की जड़ों को एक साथ निकाल लिया जाता है। यह जड़ें निकालते समय कुछ-कुछ मूली की तरह नजर आती हैं। बड़ी-बड़ी मशीनों में इन्हें डाल कर अच्छे से इनकी मिट्टी साफ कर ली जाती है तेज पानी की धार में धुली हुई यह जड़ें मशीन में आगे पहुंचती हैं। जहां पर इन्हें पील कर दिया जाता है, यानी कि इनके ऊपर का छिलका उतार दिया जाता है। छिलका उतारने के बाद एक बार फिर इन जड़ों को तेज पानी की धार से निकाला जाता है जिससे इन में लगी थोड़ी बहुत भी मिट्टी हो तो वह साफ हो जाती है। इसके आगे मशीनों में लगे चौपर से गुजरते हुए टेपियोका कि यह जड़ें छोटे-छोटे टुकड़ों में कट जाती हैं आगे एक बार फिर इन टुकड़ों को क्रश किया जाता है जिससे इन जड़ों का दूध पूरी तरह से निकाला जा सके। टेपियोका की जड़ों से निकाला गया यह दूध फिर सेट होने के लिए रख दिया जाता है।
क्योंकि यह दूध टैपिओका की जड़ से निकाला हुआ स्टॉर्च है कुछ देर तक स्थिर रखने से यह जम जाता है। अच्छी तरह जम जाने के बाद इसे वापस बड़े बड़े टुकड़ों में तोड़ लिया जाता है अब इन बड़े टुकड़ों को बहुत बारीक पीस लिया जाता है। इस पाउडर को वापस मशीनों की सहायता से आगे बढ़ाया जाता है कि यह छोटे-छोटे पारदर्शी गोलों में बदल जाते हैं।

  इस सारी तकनीक के बाद साबूदाना के दाने तैयार हो जाते हैं साबूदाना की यह मोती जैसे दाने मुख्य रूप से 2 तरह की साइज में उपलब्ध होते हैं।
    अब बाजार में तो वही बिकता है जो दिखता है इसीलिए साबूदाना के इन दानों को पॉलिश कर लिया जाता है। इस तरह यह साबूदाना के दाने आप की प्लेट में आने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाते हैं। आइए अब देखते हैं कि साबूदाने की न्यूट्रीशनल वैल्यू क्या होती है?

  साबूदाना मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट का सोर्स माना जाता है। कार्बोहाइड्रेट के अलावा कैलशियम पोटैशियम और अन्य मिनरल्स और खनिज भी इसमें पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं।

  उपवास में क्यों है ये मुख्य आहार:-

साबूदाना उपवास का सर्वप्रमुख आहार है इसका मुख्य कारण साबूदाने का कार्बोहाइड्रेट रिच होना ही माना जाता है। जब पूरा दिन उपवास करने के बाद शरीर की शक्ति कम होने लगती है तब हमारे शरीर को कार्बोहाइड्रेट से मिलने वाली ऊर्जा की आवश्यकता होती है। पूरा दिन उपवास करने के बाद  अनाज नहीं लेना चाहिए और सिर्फ फलाहार करना चाहे तब ऐसे में साबूदाना सबसे अच्छा ऑप्शन माना जाता है। साबूदाना को अनाज में नहीं गिना जाता लेकिन बावजूद उसमें काफी मात्रा में कार्बोहाइड्रेट पाए जाते हैं जो उपवास से होने वाली थकान और ऊर्जा की क्षति को पूरा कर देते हैं।

वजन बढ़ाने में सहायक :– साबूदाना में पाए जाने वाला फैट और कार्बोहाइड्रेट दुबलेपन से ग्रस्त लोगों में वजन बढ़ाने के लिए उपयोग में लाया जाता है।  इसीलिए काफी समय पहले टीबी सेनेटोरियम में साबूदाने की खीर सभी मरीजों को आवश्यक रूप से बांटी जाती थी इसका मुख्य उद्देश्य टीबी के मरीजों में वजन को बढ़ाना ही होता था।

हड्डियों के लिए लाभदायक:-  साबूदाना में पाए जाने वाले पोषक तत्व हमारे शरीर की हड्डियों के वर्धन में सहायक हैं । साबूदाना में कैल्शियम आयरन और मैग्नीशियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। साबूदाना में पाए जाने वाला कैल्शियम जहां हड्डियों के वर्धन और विकास के लिए सहायता करता है । वही इस में उपस्थित आयरन ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने में भी सहायक होता है ।  इसके साथ ही साबूदाना में पाए जाने वाला मैग्नीशियम आज समय में होने वाले हड्डियों के रोगों से भी लड़ने में सहायक होता है । यह हड्डियों को मजबूत बनाता है और फिट रखता है।

ऊर्जा देने में सहायक:– साबूदाने में उपस्थित कार्बोहाइड्रेट आपके शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है अगर आप किसी काम से थके हुए हैं और आपके शरीर का एनर्जी लेवल नीचे गिरा हुआ है, तब ऐसे में साबूदाने का सेवन आपके एनर्जी लेवल को सुधार कर आपको तुरंत ताकत और बल प्रदान करता है।

मेटाबोलिज्म के संतुलन में सहायक :-   गर्मी के दिनों में जब हमारे शरीर को ग्लाइकोजन की अतिरिक्त आवश्यकता होती है उस समय साबूदाने में उपस्थित कार्बोहाइड्रेट और फैट ग्लूकोस में बदलकर हमारे शरीर को तुरंत शक्ति प्रदान करता है और शरीर में उपस्थित गर्मी को दूर करता है इसीलिए ताप से जुड़ी बीमारियों में भी साबूदाने को खीर के रूप में या पानी के साथ उबालकर रोगियों को दिया जाता है।

उच्च रक्तचाप में साबूदाना:–   साबूदाना में पोटैशियम और फास्फोरस प्रचुर मात्रा में पाया जाता है इसके कारण यह शरीर में बढ़ने वाले उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायता करता है साबूदाना में सोडियम की मात्रा काफी कम पाई जाती है जिसके कारण इसके सेवन से रक्तचाप बढ़ने की समस्या नहीं होती इसके अलावा इसमें पाए जाने वाले फास्फोरस और पोटेशियम के कारण बढ़ा हुआ रक्तचाप कम होता है तथा उच्च रक्तचाप के मरीजों के लिए यह एक उचित नाश्ते का विकल्प माना जाता है।

रक्ताल्पता में इसका प्रयोग:– शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी को एनीमिया माना जाता है। एनीमिया से ग्रस्त रोगी को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। साबूदाना में उपस्थित आयरन लाल रक्त कणिकाओं की वृद्धि कर खून की कमी को दूर करता है। शोध द्वारा यह मालूम चला है कि साबूदाने में बहुत अधिक मात्रा में आयरन नहीं पाया जाता इसलिए एनीमिया के लिए सिर्फ साबूदाने का सेवन पर्याप्त नहीं है , साबूदाने के साथ ही अन्य आयरन युक्त आहार अधिक लाभप्रद माना जाता है।


मस्तिष्क के लिए उपयोगी:- साबूदाना में प्राकृतिक रूप से फॉलिक एसिड भी पाया जाता है। इसमें पाए जाने वाला फॉलिक एसिड शारीरिक रोगों के साथ-साथ मानसिक रोगों में भी लाभप्रद है मस्तिष्क में उत्पन्न विकारों में साबूदाना एक उचित आहार होता है।


रक्त परिसंचरण में लाभप्रद:– साबूदाना में पाए जाने वाला आयरन और फोलिक एसिड रक्त धमनियों में जाकर रक्त के परिसंचरण को सुगम बनाता है।
   

अतिसार में लाभदायक :– किसी कारण से दस्त हो जाने या अतिसार में भी बिना दूध के पकाया हुआ साबूदाना बहुत लाभप्रद होता है।

गर्भावस्था में :- गर्भावस्था में गर्भ में पल रहे शिशु के पर्याप्त पोषण हेतु भी साबूदाना उपयुक्त आहार माना जाता है। साबूदाना में लौह और खनिज तत्व पर्याप्त मात्रा में पाए जातें हैं जो शरीर की बढ़त के लिए अति आवश्यक हैं।

   इसके अलावा साबूदाना का फेस पैक त्वचा में कसाव लाकर त्वचा को चमकदार बनाने में भी सहायक होता है।

   साबूदाना के इतने सारे लाभ जान कर अब आप भी इसे अपने रोजाना के आहार का हिस्सा बना सकतें हैं।  ये एक उच्च ऊर्जायुक्त सुपाच्य आहार है जिसके फायदे अनेक हैं।

  डॉ अपर्णा मिश्रा

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