गुल्लक-3 ……

मेरी नजर से….. समीक्षा

आजकल के कानफोड़ू गाली गलौज और वीभत्स रस के स्पष्ट उदाहरण कहीं जा सकने वाली भयंकर एक्शन से सजी महा पकाउ और बोरिंग एक जैसी ढेर सारी वेब सीरीज के बीच मिडल क्लास फैमिली की सौम्य शांत और सभ्य कहानी गुल्लक आपके मन को मोह लेगी…

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गुल्लक टीवी पर चलती ढेर सारी सीरीज के बीच में बिल्कुल वैसी ही लगेगी जैसी तेज गर्मी में गन्ने के रस की रसवती फुहार या फिर बादलों की ओट से झांकती रिमझिम बारिश…

निखिल विजय की कहानी पर अमृत राज गुप्ता के निर्देशन में सजी गुल्लक सीजन 3 को tvf ने प्रस्तुत किया है सोनी लाइव पर 7 अप्रैल से यह सीजन ऑन एयर हो चुका है…

कहानी एक महा मिडल क्लास फैमिली की है। कानपुर का रहने वाला मिश्रा परिवार।

जहां एक पिता है संतोष मिश्रा, जो विद्युत विभाग में कार्यरत हैं… इनके दो बेटे हैं बड़ा अन्नू मिश्रा..जो इस सीजन में नौकरी पा चुका है और नौकरी भी उसने टिपिकल मध्यमवर्गीय पाई है। एमआर की पोस्ट पर काम करने वाला अन्नू मिश्रा तरह-तरह की जुगत लगा कर अपने कंपनी की सेल्स बढ़ाना चाहता है, और इसमें उसका साथ देते हैं उसके तीन और दोस्त! कहानी के तीसरे मुख्य किरदार है अन्नु मिश्रा के छोटे भाई अमन मिश्रा। जिन्होंने दसवीं में तीसरी रैंक कमाई है, और इसी कमाई के कारण इनके गुरु जी और परिवार वाले इन्हें साइंस दिलवाना चाहते हैं …लेकिन अमन मिश्रा जी की दिली ख्वाहिश है कि वे आर्ट स्ट्रीम को चुने और उपन्यासकार बने। कहानी की सबसे मुख्य पात्र है घर भर को अपने तानों से अशांत बनाए रखने वाली हमारी गृहिणी शांति मिश्रा जी, जिन्हें जब अपनी परेशानियों से निकलने का कोई रास्ता नहीं नजर आता तभी बड़े मंदिर के पंडित जी को बुलवाकर शांति पाठ रखवा लिया करती हैं….

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गुल्लक एक साधारण से सामान्य से परिवार की कहानी है जो देखते हुए आप बिल्कुल ऐसा महसूस करते हैं कि यह तो हमारे अपने घर की कहानी है… किरदारों के बीच के डायलॉग बहुत सिंपल से हैं लेकिन भाव से भरे हुए हैं…

सीजन 3 के पहले एपिसोड में अमन के स्कूल की लंबी चौड़ी फीस देखकर परेशान मिश्रा दंपति जब अपने बड़े कमाऊ पूत से पैसों के बारे में बात करने में हिचकते हैं तो उन्हें टीवी पर देखते हुए कई जोड़ा मां-बाप की आँखें उनकी उस पीड़ा को देख बरस पड़ती है..जब बड़ी मुश्किल से वह दोनों अपनी पूरी हिम्मत जुटाकर अन्नू से अमन की फीस के बारे में बात करते हैं तो अन्नू अपने महंगे ब्रांडेड जूते खरीदने के सपने को 1 महीने के लिए पोस्टपोन करके अमन के लिए अपनी जेब खाली कर देता है, लेकिन इसका बदला वो जल्दी ही अमन के बालों को नाई के पास ले जाकर कटवा कर पूरा भी कर लेता है… लेकिन इस सारे सीन में दोनों भाइयों के बीच की केमिस्ट्री बहुत लाजवाब ढंग से निखर कर आती है.. इसी के बाद किसी एपिसोड में जब छोटा भाई अमन अपने केमिस्ट्री लैब के फेलियर को अपने बड़े भाई के सामने स्वीकार करता है और साथ ही उसके सामने अपने मन की यह बात रखता है कि वह विज्ञान नहीं पढ़ना चाहता बल्कि आर्ट्स लेना चाहता है तब उसके सामने बैठा बड़ा भाई अन्नू अपने चेहरे के भावों से यह स्पष्ट कर देता है कि “कोई बात नहीं छोटे तुझे जो करना है वह कर तेरे ऊपर मेरा हाथ हमेशा था, है…और रहेगा।

कहानी के छोटे छोटे हिस्से इतनी बारीकी से रचे गए हैं जो बाप बेटे भाई भाई और माता पिता के आपसी संबंधों की मजबूती को बहुत अच्छे से और सुंदर तरीके से चित्रित करते हैं। कहानी में एक और मुख्य किरदार है बिट्टू की मम्मी जिन्हें इस ढंग से रचा गया है कि उनकी एंट्री पर ही हम और आप हंसने को मजबूर हो जाते हैं…

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सुनीता राजधर एक लाजवाब एक्टर है… बहुत बार वह बिना डायलॉग बोले सिर्फ अपने चेहरे के एक्सप्रेशन और अपनी बॉडी लैंग्वेज से ही दर्शकों को गुदगुदा जाती हैं। बिट्टू की मम्मी का किरदार एक बहुत खास किरदार है जो अक्सर गली मोहल्लों में हमारे अड़ोस पड़ोस में देखने को मिल ही जाता है…

कहानी की एक खास बात और है कि इस कहानी में घर की गृहिणी कभी अड़ोस पड़ोस में ताका झांकी करके गॉसिप नहीं करती। इस काम का भार पूरी तरह से घर के बड़े लड़के अन्नू के कंधों पर है… जैसे ही कोई भी घर का सदस्य किसी बात को जानना चाहता है और गलती से भी पूछ लेता है ,तो हमारे अन्नु मिश्रा जी पूरी तरह से तैयार होकर रामायण बांचने का काम शुरू कर देते हैं… अपने गली मोहल्ले के बारे में उनका नॉलेज अगाध है और अपने इस अभूतपूर्व नॉलेज को वह समय समय पर अपने परिवार के सदस्यों से बांटते रहते हैं…

सीजन 3 का मुख्य प्लॉट था मध्यमवर्गीय परिवार की इमानदारी!!! उस ईमानदारी के वास्ते अपने रास्ते पर सीधे चलते संतोष मिश्रा जी को जब सस्पेंशन लेटर थमा दिया जाता है तब घर के सभी सदस्य यह सोचना छोड़कर कि संतोष मिश्रा जी मन में क्या सोच रहे होंगे? यह सोचने लगते हैं कि अब घर का खर्च कैसे चलेगा? इतनी ढेर सारी प्रैक्टिकैलिटि भरी है इस सीरिज में की आनंद आ जाता है..

बाकी मध्यमवर्गीय परिवारों में ऐसा ही तो होता है, लोग भावुक बहुत ज्यादा होते हैं लेकिन प्रैक्टिकल होना उनकी मजबूरी हो जाती है । कहानी के अंतिम एपिसोड में जब घर का मुखिया कमरे का दरवाजा बंद कर बेहोश हो जाता है तब उस वक्त उनके दोनों बेटे और पत्नी भावुकता में बहते कैसे उन्हें अस्पताल तक लेकर जाते हैं भर्ती करवाते हैं और किस ढंग से उनका उपचार करवाते हैं यह देखने वालों को हर बार रुला जाता है…. उसी एपिसोड में जब अन्नू अपने पिता को गोद में उठाकर बाहर की तरफ भागता है और उसके पीछे उसकी मां भी उस कमरे से बाहर निकल जाती है, तब चुपचाप खड़ा अमन धीरे से जाता है और अपने पिता की चप्पले उठाकर अपने सीने से लगाए घर से बाहर निकल जाता है इस छोटे से सीन में अमन ने इतना भावपूर्ण अभिनय किया है कि हर बेटा अपने पिता की चप्पलों की तरफ देख कर एक बार को नतमस्तक जरूर होता है…

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कहानी के तीसरे एपिसोड में अगुआ की कहानी भी बताई गई है .. अगुआ गांव का वह पुरुष होता है जो अपने नाते रिश्तेदारों दोस्तों यारों के बीच किसी भी निर्णय को लेने के लिए सर्वाधिक सक्षम होता है और बाकी सभी लोग उसके निर्णय को सर्वमान्य मानकर उसकी कहीं बात पर अपनी मुहर लगा देते हैं… संतोष मिश्रा का कोई भूला बिसरा मित्र अपनी बेटी की शादी की बातचीत मिश्रा जी के घर से करने के लिए उनके घर में बेटी पहुंच जाते हैं और इस पूरे आयोजन में संतोष मिश्रा जी की धर्मपत्नी और उनके मित्र की बेटी के बीच एक बहुत ही ममतामई रिश्ता बन जाता है जिसमें शांति मिश्रा जी फुर्तीली से स्पष्ट रूप से कहती हैं फुर्तीली भी इस रिश्ते में अपने मन की बात जरूर रखें….

अभीनय की बात करें तो सभी कैरेक्टर लाजवाब है… संतोष मिश्रा के रोल में जमीन खान हो या शांति मिश्रा जी के रोल में गीतांजलि कुलकर्णी हो, अनु के रोल में वैभव राज गुप्ता या अमन के रोल में हर्ष मायरो सभी ने अपने अभिनय से हंसाया भी है और रुलाया भी है… कुल मिलाकर यह एक फैंटास्टिक फोर सीरीज है जिसे अगर आपने अब तक नहीं देखा तो जरूर देखिए इसके पिछले 2 सीजन भी बेहद शानदार है और अगर आपने पिछले दोनों नहीं देखे तो गुल्लक फर्स्ट सीजन से शुरू कीजिए….

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दो आने ,चार आने ,आठ आने की पुलक

छोटे-छोटे किस्सों से भर गयी ये गुल्लक।।

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aparna…..

होली है….

हरिवंशराय बच्चन

तुम अपने रँग में रँग लो तो होली है।
देखी मैंने बहुत दिनों तक
दुनिया की रंगीनी,
किंतु रही कोरी की कोरी
मेरी चादर झीनी,
तन के तार छूए बहुतों ने
मन का तार न भीगा,
तुम अपने रँग में रँग लो तो होली है।

शेन वार्न…..

धुंआधार बॉलर जिन की बॉल से दुनिया का हर बैट्समैन खौफ खाता था शेन वार्न..

महज 52 साल की उम्र में 4 मार्च 2022 को थाईलैंड के अपने विला में शेन ने अंतिम सांस ली… मौत का कारण हार्ट अटैक बताया जा रहा है… दुनिया भर के बल्लेबाजों के दिल को अपनी तेज गेंद से धड़का कर रख देने वाले शेन वार्न आखिर मौत की नींद सो गए…

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लंबे चौड़े सुंदर और प्रभावशाली व्यक्तित्व के शेन वॉर्न ने इंडिया के खिलाफ 1992 में क्रिकेट मैच खेलना स्टार्ट किया था। अपने खेल जीवन में जितना वह अपनी क्षमताओं के कारण जाने गए उतना ही विवादों के कारण भी…

विवाद और वार्न:-

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1996 में शेन पर ड्रग्स लेने का आरोप लगा, जिसके बाद उन्हें अपनी उप कप्तानी से हाथ भी धोना पड़ा, कुछ सालों बाद सन 2000 में जब वह एक अस्पताल में भर्ती थे तब किसी नर्स को आपत्तिजनक संदेश भेजने का आरोप लगा ।

उन्होंने स्टीव वा पर स्वार्थी इंसान होने का आरोप लगाया तो वही रिकी पोंटिंग को असफल कप्तान बताया…

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उनके दिमाग में हमेशा एक कीड़ा कुलबुलाता चलता था, जो कहीं ना कहीं उनकी अपार क्षमता और अथक ऊर्जा को भी दिखाता था। उनका एकमात्र नाइट मेयर सचिन तेंदुलकर रहे। कहा जाता है कि जब बल्लेबाज सपने में शेन वॉर्न की बॉल को देखकर घबराया करते थे, उस वक्त शेन सपने में यह देखा करते थे कि सचिन तेंदुलकर उनकी हर बॉल को हिट कर रहे हैं। हालांकि ग्राउंड के बाहर उनकी और सचिन की दोस्ती देखने लायक थी, दोनों ही एक दूसरे के प्रति बहुत ही आत्मीय और इमानदार मित्र थे…..

सचिन और शेन

2008 में राजस्थान रॉयल्स की तरफ से पहली आईपीएल ट्रॉफी बटोरने वाले शेन वॉर्न आज हमारे बीच नहीं है… लेकिन वह जहां भी होंगे वहां से अपने हरफनमौला अंदाज मे मुस्कराते नजर आयेंगे…

ईश्वर आपको खुश रखें शेन

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Rest in peace शेन वार्न….

दिल से….

dear दोस्तों

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कैसे हैं आप सब ..? बहुत दिनों से ब्लॉग पर कोई हलचल नहीं थी , मैं जानती हूं आप लोग भी परेशान हो रहे होंगे कि अचानक ऐसा क्या हुआ कि मेरी कहानियां मैंनें ब्लॉग से हटा ली..तो आज मैं इसका कारण आप सभी से शेयर करना चाहती हूं…

जैसा कि आपमे से ज्यादातर लोग जानते ही हैं कि मैं ने प्रतिलिपि से ही लिखना शुरू किया था ..फिर बाद में मुझे लगा कि मुझे मेरा ब्लॉग भी शुरू करना चाहिए और आप सब की मदद से मेरा ब्लॉग बस कुछ ही महीनों में चल प़डा …

लेकिन प्रतिलिपि ने मेरी कुछ कहानियों को अनुबंधित करना चाहा और उसके लिए मैंने भी स्वीकृति दे दी , उसी अनुबन्ध के कारण अब उन कहानियों को मैं प्रतिलिपि के अलावा कहीं और प्रकशित नहीं कर सकती ..और इसी कारण मुझे “जीवनसाथी “, “शादी.कॉम ” और “समिधा ” को यहां से हटाना पड़ा….

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मायानगरी हालांकि अब तक अनुबंध मे शामिल नहीं है लेकिन जल्दी ही हो भी सकती है ….

लेकिन आप सभी के लिए भी मेरे पिटारे में बहुत कुछ है…. मेरी नयी कहानियां जो प्रतिलिपि पर नहीं है उन्हें यहां शुरू करूंगी …और जल्दी ही एक नयी कहानी ” वापसी ” की शुरुआत मेरे ब्लॉग पर होगी..

आप सभी ने हमेश मेरा साथ दिया है इसलिए उम्मीद है हमारा साथ यूँ ही बना रहेगा ….और पढ़ते लिखते ये सफर कट जाएगा …..

मुझे पढ़ने और सराहने के लिए हृदय से आपका आभार धन्यवाद ….

aparna

खूबसूरत…..

लता जी को श्रद्धांजलि

   जब जब देखूं मैं ये चाँद सितारे
   ऐसा लगता है मुझे लाज के मारे
   जैसे कोई डोली जैसे बारात है
  जाने क्या बात है जाने क्या बात है
  जाने क्या बात है जाने क्या बात है.
   नींद नहीं आती बड़ी लंबी रात है…..

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   अपनी म्यूजिक क्लास में चांदी अपनी संगीत गुरु कला दीदी के सिखाए सुगम संगीत के अभ्यास में मगन थी…
.. कला दीदी का वह 4 कमरों का घर बिल्कुल ही मेन रोड पर था और उसके सबसे बाहरी कमरे में ही उनकी म्यूजिक की कक्षाएं चला करती थी …
  शाम के समय अक्सर जिस वक्त पर चांदी और बाकी लड़कियां क्लास किया करती थी उसी समय पर स्कूल छूटने के बाद रजत और उसके दोस्त  घर के बाहर से गुजरा करते थे। बाकी लोग तो बात करते अपनी साइकिल घसीटते निकल जाते लेकिन रजत जाने क्यों उस आवाज को सुनकर अक्सर वहां ठहर जाता और जब तक चांदी अंदर गाया करती तब तक बाहर खड़े हो सुनता रहता।  चांदी का गाना खत्म होते ही वह चला जाया करता।
    उसे खुद भी नहीं पता चला कि कब से यह सिलसिला चल रहा था लेकिन यह सिलसिला चलता रहा। लगभग छह सात महीने बाद शाम के वक्त गुजरने पर चांदी की आवाज सुनाई देनी बंद हो गई, तब रजत का माथा ठनका कि अचानक ऐसा क्या हुआ ?
    चार दिन तक जब आवाज नहीं सुनाई दी तो एक दिन शाम को उसने ही आगे बढ़कर कला दीदी का दरवाजा खटका दिया…

” बोलो क्या काम है? “
24-25 साल की लता दीदी ने जब अपने सामने खड़े एक सोलह सत्रह साल के किशोर को देखा तो उनके माथे पर शिकन उभर आई..

” जी यहां कोई संगीत की कक्षाएं चलती हैं?”

” हां मैं ही लेती हूं, वह कक्षाएं लेकिन सिर्फ लड़कियों को सिखाती हूं…

” हां जी, मुझे मेरी बहन के लिए पूछना था, क्या अभी भी आप कक्षाएं ले रही हैं?”

” हां कक्षाएं ले तो रही हूं, लेकिन अभी फाइनल एग्जाम का वक्त होने से लड़कियों ने आना बंद कर दिया है। लगभग महीने भर बाद कक्षाएं वापस शुरू हो जाएंगी, तब आप चाहे तो अपनी बहन को भेज सकते हैं..!

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रजत को अपना मनचाहा जवाब मिल चुका था। उसे समझ आ गया था कि फाइनल एग्जाम का महीना आ जाने से शायद वह लड़की भी एग्जाम की तैयारियों के कारण म्यूजिक क्लास आना बंद कर चुकी होगी… वह मुस्कुराते हुए अपने बालों पर हाथ फेरता वहां से बाहर निकल गया। रास्ते पर खड़ा उसका दोस्त रोमी उसे देख रहा था…

” मिल गई जिसे ढूंढने गया था?

” नहीं वह तो नहीं मिली लेकिन कारण मिल गया कि क्यों आजकल उसकी आवाज सुनाई नहीं देती।

” एक बात बता,  तूने आज तक सिर्फ उसकी आवाज सुनी है कहीं वह तुझ से दुगनी उमर की निकली तब?

” तब की तब देखी जाएगी अभी तो तू चल हमें भी एग्जाम की तैयारियों में जुटना है।

एक महीना अपनी अपनी व्यस्तताओं मैं बीत गया ….

तुम जो कह दो तो
आज की रात चाँद डूबेगा नहीं
रात को रोक लो
रात की बात है
और ज़िन्दगी बाकी तो नहीं
तेरे बिना ज़िन्दगी से…
तेरे बिना ज़िन्दगी से कोई
शिकवा तो नहीं, शिकवा नहीं, शिकवा नहीं
तेरे बिना ज़िन्दगी भी लेकिन
ज़िन्दगी तो नहीं, ज़िन्दगी नहीं, ज़िन्दगी नहीं
तेरे बिना ज़िन्दगी से…

  एक बार फिर उसी मखमली आवाज में रजत  डूब कर रह गया..
  आखिर कौन थी यह लड़की जो इतने खूबसूरत गानों को अपनी इतनी खूबसूरत आवाज से और भी खूबसूरत कर जाती थी। आज रजत का मन नहीं माना और उसने सोच लिया कि आज तो वो उसे देख कर ही जाएगा।
     अपनी साइकिल को थामे हुए वह कुछ दूर आगे बढ़कर रास्ते के एक तरफ खड़ा हो गया।  लगभग आधे घंटे के बाद कुछ तीन चार लड़कियां घर से बाहर निकली और बातें करते हुए उसके सामने से होते हुए आगे बढ़ गई, लेकिन वह उनमें से उस मखमली आवाज की परी को ढूंढ नहीं पाया….

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   उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह उन में से कैसे उस लड़की को ढूंढे आखिर अगले दिन उसने एक उपाय किया…
   एक पर्ची में उसने चांदी के पिछले दिन के गाए गाने को लिखने के साथ ही नीचे उस गाने की ढेर सारी तारीफ भी लिख दी..

” आप कौन हैं, मैं नहीं जानता लेकिन आप बहुत अच्छा गाती हैं।
      जबसे आपके मुंह से ‘तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा’ सुना है तब से यह मेरे पसंदीदा गानों में शुमार हो चुका है।
   मेरा एक और बेहद पसंदीदा गीत है, अगर कभी आप गा सकें तो बड़ी मेहरबानी होगी। गाना नीचे लिख कर भेज रहा हूं..

   आपका एक फैन

कोरा कागज था ये मन मेरा
लिख दिया नाम इसमें तेरा
सूना आंगन था जीवन मेरा
बस गया प्यार इसमें तेरा….

  उस पर्ची को उसने उन लड़कियों के क्लास में पहुंचने के कुछ समय पहले घर के दरवाजे के बाहर जाकर चिपका दिया और दूर अपनी साइकिल पर खड़ा उस दरवाजे पर नजर रखे रहा ,कुछ समय बाद एक-एक कर लड़कियां अंदर आने लगी उनमें से एक लड़की की नजर दरवाजे पर चिपकी उस पर्ची पर पड़ी और उसने उस पर्ची को निकाल लिया..
   रजत की धड़कन इतनी तेज भाग रही थी कि उसे अपने कानों में अपनी धड़कन साफ सुनाई पड़ रही थी। अपने दिल को समेटे वह कुछ देर बाद घर के सामने से गुजरने लगा कि तभी उसके कानों में वही मीठी सी आवाज पड़ी

चैन गवाया मैंने नींदिया गंवाई
सारी सारी रात जागूं दू मैं दुहाई
कहूँ क्या मैं आगे, नेहा लागे जी ना लागे
कोई दुश्मन था ये मन मेरा
बन गया मीत जाके तेरा
कोरा काग़ज़ था ये मन मेरा….

  रजत के दिल में फुलझड़ियां छूटने लगी उसके चेहरे की मुस्कान बता रही थी कि वह आज कितना खुश था। अपने बालों पर हाथ फेरते ही खुद में मगन वो अपनी साइकिल थामे  अपने घर की ओर निकल चला ..
  लेकिन अब यह रोज-रोज का सिलसिला बन गया!  रोज रजत उनकी क्लास से पहले एक पर्ची दरवाजे पर चिपका जाता और सुगम संगीत की क्लास में चांदी उसी गाने को गा कर सुना देती….

  और आखिर वह दिन भी आ गया जिसका रजत बेसब्री से इंतजार कर रहा था, उसका रिजल्ट आ चुका था और उसने बहुत अच्छे नंबरों से अपनी 12वीं की परीक्षा पास कर ली थी…
   आज उसने जो पर्ची लिखी उसमें उसने अपने रिजल्ट के बारे में लिखा था…

” मेरा रिजल्ट आ गया है, मैं पास हो गया हूं।और अब आगे की पढ़ाई के लिए मैं दूसरे शहर जा रहा हूं। पता नहीं अब कब तुमसे मिलना होगा? लेकिन तुम्हारी मीठी सी आवाज को अपने दिल में छुपा कर ले जा रहा हूं। मुझे विश्वास है हम कभी ना कभी जरूर मिलेंगे, वैसे बाहर जाने से पहले मैं एक बार तुमसे मिलना चाहता हूं..
… अगर तुम भी मुझसे मिलना चाहती हो तो यही पास में सेंट जेवियर स्कूल है उसके पीछे के ग्राउंड में अमरूद के पेड़ के पास कल शाम 5 बजे पहुंच जाना…
   मैं तुम्हारा इंतजार करूंगा…
.. और आज का गाना तुम तुम्हारी पसंद से गा कर सुना दो…

  पास बुला के गले से लगा के
तुने तो बदल डाली दुनिया
नए हैं, नजारे नए हैं इशारे
रही ना वो कल वाली दुनिया
सपने दिखाके ये क्या किया
ओ रे पिया ओ ओ..
तुने ओ रंगीले कैसा जादू किया
पिया पिया बोले मतवाला जिया…

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  चांदी का गाया गीत सुन उसके चेहरे पर एक मुस्कान चली आयी और वो अगली शाम का इंतजार करते वहाँ  से चला गया…

  अगले दिन वो अपने स्कूल के बाहर अमरूद के पेड़ के पास उसका इंतजार करता रहा लेकिन वो नहीं आयी और आखिर काफी घंटों के इंतजार के बाद थक कर वो वापस लौट गया…….
   वक़्त बीतता गया … ऐसा नहीं था कि बाहर पढ़ने जाने के बाद रजत कभी अपने शहर नहीं लौटा , लौटा कई बार लौटा… कई बार उसका अपने शहर आना हुआ, उस गली के सामने से गुजरना भी हुआ , लेकिन फिर वो शाम, वो नगमें और वो मखमली आवाज  वापस नहीं आयी..
   
        एक बार तो वो उस घर पर भी गया, लेकिन वहाँ दरवाजा किसी खड़ूस से आदमी ने खोला

“क्या काम है?”

“जी वो यहां एक म्युज़िक क्लास हुआ करती थी , क्या मैं उन संगीत टीचर  से मिल सकता हूँ?”

” नहीं मिल सकते ?”

“क्यों?”

” क्योंकि अब वो यहाँ नहीं रहतीं,  उसकी शादी हो गई और वो अपने घर चली गयी,  हम उनके बाद आने वाले किराएदार हैं?”

“ओह, क्या उनका नम्बर मिल सकता है ?”

” नहीं मिल सकता क्योंकि हमारे पास भी नहीं है!”

  रजत भारी निराशा के साथ आगे बढ़ गया .. पास ही किसी चाय की टपरी पर गाना चल रहा था ..

सांझ ढले गगन तले
हम कितने एकाकी
छोड़ चले नैनो को
किरणों के पाखी

गाना सुनकर रजत सोचने लगा कि वाकई उन शामों कि बात ही कुछ और थी … लेकिन अब उन सिंदूरी शामों को दिलकश बनाने वाली उस जादूगरनी को कहां जाकर ढूंढे ?

भारी मन से वो वापस अपने कॉलेज लौट गया…
दिन बीतते गए….
  कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर रजत कैम्पस सेलेक्शन की नैया में बैठ कर मुंबई पहुंच गया और अपने चमचमाते फाईव स्टार ऑफ़िस की भूलभुलैया में भटक कर रह गया..
     और वो स्कूल की सुरमयी सुरीली शामें जिंदगी की एक खूबसूरत सी याद बन कर रह गईं ….

   ऑफ़िस में एक लड़की मन को भाने लगी , उसे भी रजत में एक अच्छे जीवनसाथी के गुण नजर आने लगे,  दोनों के बीच दोस्ती हो गयी…
   दोनों की पहली डेट पर दोनों सीसीडी में आमने सामने बैठे थे…

” काम के अलावा और क्या करती हो,  मेरा मतलब तुम्हारे शौक क्या हैं?”

“लिसन रजत मुझे कुकिंग का कोई शौक नहीं है , लेकिन हाँ फिटनेस फिक्र हूं , हेल्दी खाना ही पसंद है और जिम में पसीना बहाना बहुत पसंद है..

“ओके,  मैं तो ये जानना चाहता था कि, गानों का कोई शौक है?”

“हाँ सुनती हूँ,  जिम में लाउड म्युज़िक हो तो बात ही क्या ? रॉक, पॉप, जैज़ ब्लूस सब सुनती हूं..”

“नहीं वो म्यूजिक नहीं,  मैं हिन्दी फ़िल्मों के गानों की बात कर रहा हूं, स्पेशली लता मंगेशकर जी के गाने..”

“नेवर यार,  कभी नहीं सुने मैंने तो.. हाँ तुम्हें पसंद है तो सुनकर देखूँ लूँगी, बट फ्रैंकली स्पीकिंग मुझे ये रिरियाते हुए धीमी म्यूजिक वाले गाने बकवास ही लगते हैं…

इसके बाद भी वो काफी कुछ कहती रही लेकिन फिर रजत को कुछ सुनायी नहीं दिया …
   और उनकी ये दोस्ती एक कदम आगे बढ़ पाती उसके पहले ही रजत ने अपने कदम पीछे खिंच लिए..

  घर पर भी उसके लिए लड़कियाँ देखी जाने लगी,  लेकिन हर जगह रजत की घड़ी एक ही सुई पर अटक जाती…
   इत्तेफाक कह लो या बदकिस्मती की, रजत को आज तक एक भी लड़की ऐसी नहीं मिली जिसे लता मंगेशकर जी के गाने सुनने या गाने का शौक हो..
   उसके दिमाग के किसी हिस्से में आज भी वो स्कूल के ज़माने का रजत जिंदा था जो हर शाम एक मखमली आवाज में खोया सा अपने घर पहुंचता था …

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   कुछ दिनों बाद रजत ऑफ़िस से छुट्टी लेकर अपने शहर गया उसके बुआ के लड़के की शादी थी…
.. शादी की धूमधाम में मगन रजत हर किसी का का टार्गेट था,  सभी चाची मामी ताई उसे ही पकड़ पकड़ कर शादी कर लेने की दुहाई दे रही थी,  वो खुद भी तो चाहता था कि शादी कर के सेटल हो जाए पर जाने उसका मन कहाँ अटका पड़ा था..
   शादी की तैयारियों के बीच आखिर बारात वाली रात आ ही गई.. ..
   बारात लग गयी थी, द्वारचार के बाद सभी हंसते मुस्कराते अंदर चले गए ..
अंदर आरकेस्ट्रा में एक गायक कुछ धुनें गुनगुना रहा था….
  उसके बाद लड़की वालों में से एक एक कर के दो तीन लोग आए और माईक पर अपना कारनामा दिखा कर चले गए तभी वही मखमली सी आवाज हवाओं में गूंज उठी…

कोई आहट सी, अंधेरों में चमक जाती है
रात आती है, तो तनहाई महक जाती है
तुम मिले हो या मोहब्बत ने ग़ज़ल गाई है
अजनबी कौन हो तुम…
अजनबी कौन हो तुम, जबसे तुम्हें देखा है
सारी दुनिया मेरी आँखों में सिमट आई है ….

उस आवाज को सुनते ही रजत ने पहचान लिया , उसने तुरंत हाथ में पकड़ रखी खाने की प्लेट एक तरफ़ रखी और भाग कर आरकेस्ट्रा तक पहुंचा और वहाँ माईक पर गाती उस सलोनी सी लड़की को देखते ही उस पर दिल हार गया…
… लेकिन असल परिक्षा तो अब थी क्या पता ये वहीं थी या नहीं?
  और क्या पता ये कुंवारी है या शादीशुदा?
सोचने को बहुत सी बाते थी लेकिन अब रजत को सोचना नहीं था, उसे बस किसी भी हाल में उस लड़की से एक बार तो बात करनी ही थी ….
  गाना गाकर वो जैसे ही नीचे उतरीं रजत तुरंत उस तक पहुंच गया …

“हैलो मैं रजत! दूल्हे का कजिन, मेरी बुआ जी का बेटा हैं वो”

” मैं चांदी! दुल्हन की दोस्त हूं!”

“आप इसी शहर की हैं? मेरा मतलब है क्या आप बचपन से यहीं रहती आयी हैं ?”

पूछने को तो पूछ गया लेकिन मन ही मन ऐसे फ्लर्ट करते हुए वो घबरा भी रहा था , कि जाने सामने वाली कैसे रिएक्ट करेगी? कहीं अपने किसी भाई वाई को बुलवा कर पिटवा ना दे ?
  लेकिन उसकी सोच से उल्टा वो लड़की मुस्कराने लगी…

“जी हाँ बचपन से यही रहती आईं हूं और जब दसवी में पढ़ रही थी तब सेंट जेवियर्स के पास म्यूजिक सीखने जाया करती थी,  फिर दीदी की शादी हो गई और मेरा क्लास जाना छुट गया..

रजत के चेहरे पर एक लंबी सी मुस्कान तैर गई ..उसे यकीन नहीं आ रहा था की उसके सामने वहीं जादूगरनी खड़ी है जिसने आज तक उसका दिल चुरा कर अपने पास छिपाए रखा था ….
उसे लगा वो सामने खड़ी चांदी को अपने सीने से लगा ले , लेकिन हर बार मन का हो जाए ऐसा सम्भव भी तो नहीं …
… वो मुस्करा रहा था कि तभी चांदी आगे बोल पडी..

“तुम्हारी पर्ची पर लिखे गाने मुझे भी बहुत पसंद थे, इनफैक्ट लता जी मेरी फेवरेट सिंगर हैं…

” मेरी भी !! पर एक मिनट तुमने मुझे पहचाना कैसे ?

“मैं उस वक़्त ही तुम्हें देख चुकी थी , हमारे क्लास जाने और लौटने के वक्त पर तुम अपनी साइकल लिए दूर खड़े रहते थे,  मैंने तो कई बार तुम्हें देखा था !”

“फिर मिलने क्यों नहीं आईं,  जब मैंने बुलाया था!”

” आने वालीं थी लेकिन उसी सुबह दादी नहीं रहीं और फिर मैं आ नहीं पायीं!  कुछ समय बाद क्लास जाना शुरू किया पर फिर तुम्हारा आना बंद हो गया.. तुम्हारे चेहरे के अलावा तुम्हारे बारे में कुछ भी नहीं पता था कि तुम्हें ढूंढ पाती तो बस नहीं ढूँढ पाई…

“तुम्हारी शादी हो गई चांदी?”

” नहीं,  और तुम्हारी….?

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एक मुस्कराहट के साथ वो शाम ढलने लगी….

रोज़ शाम आती थी, मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी, मगर ऐसी न थी
ये आज मेरी ज़िन्दगी में कौन आ गया
रोज़ शाम आती थी…

….कहानी तो अब शुरू हुई है….

  दिल से ..

  प्रेम कहानियाँ लिखते का सारा मूड आपके गीतों से ही बनता रहा है लता जी और आगे भी बनता रहेगा …
  आपकी मखमली आवाज और आप अमर हैं!!

  सादर श्रद्धांजलि..

  aparna ….

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दिल से…

एहसासों से रंगों को चुराकर
लफ़्ज़ों के मोतियाँ पिरोकर
गुनती हूँ कुछ किस्सों को यूँ
बिना क्लिक तस्वीर बनाकर

शहद सी मीठी कोई कहानी
कहीं दर्द की बहती रवानी
बूंद बूंद में ढकीं मूंदी सी
पोटली बादलों का पानी।

गंगा के पानी सी पावन
कभी लगे रिमझिम मनभावन
आप सभी की समीक्षाएँ भी
ऊसर में जैसे हो सावन ।।

कुछ शब्दों के जाल बुने
कुछ उल्टे सीधे फाल चुने
कटा सफर अब तक कुछ यूं
भर भर सपनों के ढाल गुने।
कविता तो जितना लिखती जाऊंगी उतनी ही आगे बढ़ती जाएगी, इसलिए कम शब्दों में अब तक का लेखन सफर बेहद शानदार रहा। बेशक बहुत सारे अचीवमेंट्स हैं मेरे खाते में, जैसे लंबी कहानियाँ लिख पाना, मेरे अंदर छिपी बैठी लेखिका को पा लेना लेकिन इस सब के बावजूद मेरा अब तक का सबसे बड़ा अचीवमेंट हैं आप मेरे पाठक !!
  आपसे सबसे जुड़ा ये रिश्ता यूँ ही साल दर साल मज़बूत होता रहे…

क्योंकि आप हैं तो हम हैं…


नए साल की आप सबको शुभकामनाएं!

दिल से….

कायाकल्प चैलेंज:-

सुप्रभात दोस्तों। कैसे हैं आप सब? हेल्दी एंड एनर्जेटिक?.. बिल्कुल!!!

आप लोगों ने अगर ईमानदारी से पूरे सात दिन 20 बार सूर्य नमस्कार करने के बाद 15 मिनट का डांस किया है और गर्म पानी के साथ जिंजर पाउडर हनी लेमन लिया है तो आप अपने आप में खुद फर्क महसूस कर पाएंगे।

देखिए हमें किसी को कुछ साबित करने के लिए नही बल्कि खुद को साबित करने के लिए ये करना है। सिर्फ अपने आप के लिए करना है। यकीन मानिए जब आप अपनी सुबह योग और व्यायाम से करते हैं तो पूरा दिन बेहतरीन बीतता है।

आपमें से कुछ लोग थायरॉइड के लिए योग पूछ रहे थे। आज उसके बारे में छोटी सी जानकारी दूंगी।

थायराइड के लिए सर्वश्रेष्ठ व्यायाम या योग है सूर्यं नमस्कार !! इसे करने की विधि आप सब जानते ही हैं।

थायरॉइड के लिए मुख्य रूप से निम्न योगासन लाभ देते हैं।

1) मत्स्यासन :- सुखासन में बैठ कर धीमे से पीछे की तरफ झुकते हुए सिर को ज़मीन से टिका कर रखना है। इस पोज़ में गर्दन और कंधों पर स्ट्रेच आता है जो थायरॉइड के लिए लाभप्रद है।

मत्स्यासन

2) सर्वांगासन :- इस आसन में आराम से लेटने के बाद पैरों को धीरे धीरे उठाते हुए सीधा 90 डिग्री एंगल पर लाएं। जसके बाद हाथों की सहायता से कमर को सपोर्ट करते हुए कमर को ऊपर उठाते जाएं।

इस आसन में भी कंधों और सिर पर पूरा संतुलन टिका होता है तथा गर्दन पर अच्छे से स्ट्रेच आता है।

सर्वांगासन

3) हलासन :-

हलासन करने का तरीका

पीठ के बल सीधा लेटने के बाद हाथों को शरीर से सटाकर सीधा रखें. पैरों को घुटने से मोड़े बिना धीरे-धीरे ऊपर की ओर उठाएं और फिर सांस छोड़ते हुए पीठ को उठाते हुए पैरों को पीछे की ओर ले जाएं. पैरों की अंगुलियों को जमीन से स्पर्श करने का प्रयास करें. 
– करीब एक मिनट तक इस अवस्था में रहते हुए धीरे-धीरे मूल अवस्था में आ जाएं.

हलासन

4) सिंहासन :-इस आसन को थायराइड के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इस आसन को करने के लिए दोनों पैरों को सामने की ओर फैलाकर बैठ जाएं। अब अपने दाएं पैर को मोड़ें और उसे बाएं पैर की जांघ पर रख लें और बाएं पैर को मोड़ें और उसे दाएं पैर की जांघ पर रख लें। इसके बाद आगे की ओर झुक जाएं। उसके अलावा वज्रासन में बैठ कर दोनों घुटनों के बल होते हुए अपने हाथों को सीधा कर फर्श पर रख लें। इसके बाद अपने शरीर के उपर के हिस्से को आगे की ओर खीचें। अपने मुंह को खोलें और जीभ को मुंह से बाहर की ओर निकालें। नाक से सांस लेते हुए मुंह से आवाज करें। इसे रोजाना 7-11 बार करें। सिंह के समान गर्जन की आवाज़ इसमें निकालनी होती है।

सिंहासन

दिल से…

दोस्तो, कैसी रही आज की सुबह।

आज ज़रा समय की कमी है इसलिए बस थोड़े में ही अपनी बात रखूंगी। आप में से कुछ लोगो ने आर्थराइटिस के लिए किए जाने वाले योग के बारे में पूछा था। आर्थराइटिस में चूंकि हड्डियां थोड़ी कमज़ोर सी होने के कारण बहुत कठिन योग पोश्चर नही किये जा सकते। लेकिन जो आसानी से किये जा सकते हैं वो मै आपको चित्रों के साथ बता रहीं हूँ।

अर्थराइटिस की समस्या से छुटकारा पाने के योगासन

  • यौगिक जॉगिंग
  • सूक्ष्म व्यायाम
  • मंडूकासन
  • शशकासन
  • उष्ट्रासन
  • मंडूकासन
  • भुजंगासन
  • ताड़ासन
मंडूकासन

2) child’s pose .. ये करने में आसान भी होता है। इसमें आपको घुटने मोड़ कर वज्रासन में बैठना है और दोनो हाथों को सामने की ओर फैलाना है। श्वांस सामान्य गति से लेना और छोड़ना है। इसमें पीठ के दर्द में बहुत राहत मिलती है।

बालासन ( child’s pose)

3) वृक्षासन :- इसमें आपको सीधे खड़े होने के बाद एक पैर को घुटने से मोड़ कर दूसरे पैर के घुटने पर टिका कर सहारा देना है। और दोनो हाथ ऊपर नमस्कार की मुद्रा में जोड़ना है। एक बार में 30 सेकंड इस पोज़ में खड़े रहना है और दोनो पैरों से इसकी आवृत्ति करनी है।

वृक्षासन

4)सुखासन :- इसमें पहले पैरों को सामने की तरफ फैला कर फिर घुटनो से मोड़ कर पालथी बना कर बैठना है। इसमें सामान्य श्वांस के साथ ही अन्य प्राणायम आदि भी किये जा सकते हैं।

सुखासन

5) वज्रासन :- बेहद आसान है। इसमें घुटनो को पीछे की तरफ मोड़ कर उस पर अपनी कमर के भाग स्थिर कर बैठना होता है। शुरुवात में अगर कठिन लगे तो सिर्फ 10 की काउंटिंग तक करें, धीरे धीरे इसे 30 सेकंड से 1 मिनट तक बढ़ाया जा सकता है।

ध्यान रहे :- अगर आपको गठियावात के कारण जोड़ों को मोड़ने में तकलीफ है। अगर आपके घुटनों में सूजन है। अगर डॉक्टर ने आपको बताया है कि जोड़ों का पानी कम हो गया है। अगर आपको इन आसनों को करने में बहुत ही ज्यादा दर्द महसूस हो रहा है तो आप किसी योग शिक्षक या जिम इंस्ट्रक्टर की देख रेख में ही योग शुरू करें ,एक बार शुरू कर लेने के बाद आप आसानी सेसब कुछ कर पाएंगे।

याद रखिये :– करना है योग , तभी बनेंगे निरोग।

वज्रासन

दिल से ….

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Hello friends , कैसे हैं आप सब? और कैसा चल रहा है आपका कायाकल्प? प्लीज़ ये मत कहिएगा की मैंने 3 दिन से कोई अपडेट नही डाली इसलिए वेट करते बैठे हैं…

व्यायाम और योग तो हमें रोज़ करना ही है, चाहे मैं अपडेट डालूं या नही। ज्यादा नही करना है सिर्फ 15 मिनट !!!

शुरुवात में बस इतना ही करना भी पर्याप्त है। सबसे पहले हमें अपने शरीर को व्यायाम की आदत करवाना है। उसके बाद आपको सोचने की ज़रूरत ही नही पड़ेगी, आपकी बॉडी खुद ब खुद आपको खींच कर व्यायाम करवा लेगी।

महिलाओं की एक आम समस्या होती है ब्लोटिंग की । यानी पेट फूल रहा है ऐसा महसूस होता है। दोपहर के खाने के बाद शाम के समय में अगर आपको पेट में भारीपन लगता है तो ये ब्लॉटिंग ही हैं, बहुत बार ये भारीपन हल्के से दर्द में भी बदल जाता है।

आज इस ब्लॉटिंग से बचने के कुछ उपाय बताऊंगी… जिनमें से अधिकतर हम जानतें हैं पर अक्सर फॉलो करना भूल जाते हैं।

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1) खाना खाते समय बिल्कुल भी पानी न पिएं। बहुत जरूरत हो तो हल्का गुनगुना पानी एक आध सिप ले सकतें हैं।

2) खाने के 40 मिनट बाद भी आपको भर गिलास पानी नही लेना है। थोड़ा थोड़ा ही पिये वो भी गुनगुना पानी। देखिए जैसे आप हवन करते समय अग्नि में आहुति डालते हैं कुछ ऐसा ही हमारे पेट में होता है। भूख के समय हमारे पेट में कई एंजाइम्स सीक्रिट होते हैं जो मान लीजिये पेट की अग्नि है अब उसमें हम खाना दिलातें हैं जैसे आहुति। अब अगर इसके साथ ही आप ठंडा पानी भी डाल देंगे तो पेट की अग्नि तो बुझ जाएगी ना, फिर वो उस भोजन को ठीक से पचायेगी कैसे? और यही अधपचा भोजन तरह तरह की परेशानियों को पैदा करने का कारण बनता है। तो जिस तरह हवन में अग्नि को भड़काने के लिए बीच में घी प्रयोग किया जाता है वैसे ही भोजन के बीच में ज़रूरत पड़ने पर गर्म पानी प्रयोग करें।

3) एक नियम बना लें,जब तक आपका पेट चिल्ला कर आपसे खाना न मांगे तब तक बिल्कुल न खाए। सिर्फ़ इसलिए कि खाने का वक्त हो गया है इसलिए खा लेना चाहिए वाली आदत छोड़ दीजिए। वैसे व्यायाम करने पर बहुत जोर की भूख लगती है और तब कुछ न कुछ हेल्दी फ़ूड ज़रूर खाये।।

4) हमारे खाने में प्रोटीन का बहुत महत्व है क्योंकि प्रोटीन हमारे शरीर की मरम्मत ही नही करता बल्कि शरीर को बनाने में भी सहायक है। इसलिए अपने भोजन में प्रोटीन ज़रूर शामिल करें। प्रोटीन डाइट और कौन सा प्रोटीन हमारे लिए बेटर है पर एक पूरा ब्लॉग लिखूंगी।जिससे और भी ज्यादा क्लियर हो जाएगा।

5) अब आते है आज के ड्रिंक पर। ये ड्रिंक आपको ब्लोटिंग की समस्या से निजात दिलाएगा और इसका उपयोग बहुत चमत्कारी ढंग से पेट के आधे से एक इंच को कम कर देता है। रात में सोने के पहले एक बड़े कॉफी कप में भर कर पानी लें। उसमें कुछ दो चार टुकड़े खीरे +चौथाई टुकड़ा निम्बू+ थोड़े पत्ते धनिया के+मिंट (पुदीना) के पत्ते भिगो दें।

रात भर भीगे इस पानी को सुबह खाली पेट में ले और सुबह भिगाये गए पानी को शाम के वक्त पर लें। आप देखिएगा, सिर्फ पहली बार के प्रयोग से ही आपको ब्लोटिंग की समस्या में बहुत आराम मिलेगा।

वैसे ब्लॉटिंग से बचने का एक और उपाय ये है कि हर बार कुछ भी खाने के बाद बैठ कर आराम करने की जगह कम से कम दस मिनट घर पर ही चल लें। उस से भी गैस और एसिडिटी की समस्या नही होती।

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तो करते रहिए व्यायाम । उसी से मिलेगा आराम।।

फिर मिलते हैं अगले ब्लॉग में जिसमें आपके सवालों के जवाब शामिल होंगे कि किस व्याधि में कौन सा आसन किया जा सकता है।

तब तक खूब खाइए और खूब पसीना बहाइये ….

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aparna

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दिल से…

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कायाकल्प चैलेंज

सुप्रभात दोस्तों,

आशा करती हूं कि आज का चैलेंज आपने अब तक पूरा कर लिया होगा… आज का चैलेंज था सिर्फ 20 सूर्य नमस्कार के साथ थोड़ी सी एब्स एक्सरसाईंज़। जो मैंने आपको कल बताई थी। और कल ही एक फैट कटर ड्रिंक भी बताया था आपको। जिंजर पाउडर ड्रिंक। उसे आप सभी लोग लेना शुरू कर दीजिए.. ये मेटाबोलिज्म बढ़ाने के साथ आपको चुस्त रखता है। अब हमारे अगले मुख्य बिंदु।

1) आप अगर किसी दिन सुबह का अपना 15 मिनट भूल जाएं तो कोई बात नही,किसी तरीके से शाम में उस 15 मिनट को अपने लिए निकालें और वॉक ज़रूर कर लें।

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2) वॉक के दौरान कोशिश कीजिये कि आप किसी से बात न करें। क्योंकि बात करते हुए हमारी गति धीमी हो जाती है। आप गाने सुनते हुए वॉक कर सकते हैं। और वॉक के बीच में 1 -1 मिनट की रनिंग ज़रूर ट्राय करें।

3)अपने खाने में तरह तरह के रंगों का प्रयोग ज़रूर करें। डायटिंग टिप्स बहुत आसान है। जो मैं इस चैलेंज के साथ साथ बताती जाऊंगी। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है रात का खाना। रात का खाना आप क्या खाते हैं इस पर आपका अगला दिन निर्भर करता है। अगर आप राइस ग्रेवी या हेवी भोजन खाते हैं तो उसे पचाने में शरीर को वक्त लगता है और इसलिए हमारा शरीर अधिक आराम मांगता है और इस कारण सुबह आपकी नींद खुलने में देर हो सकती है और व्यायाम के दौरान भी आपको मसल्स में स्पासम या जकड़न महसूस हो सकती है। इसलिए योग और व्यायाम करने वाले रात का खाना हल्का खाने पर ज़ोर देते हैं।

4) अगर आप वाकई वजन कम करना चाहते हैं तो रात का खाना शाम 7 के पहले कोशिश करें कि खा सकें। अगर उसके बाद आप 10 तक जागते हैं और आपको भूख लगती हैं तो आप दूध ले सकतें है या फिर भुने मखाने या सुगर फ्री बिस्किट। रात में 10 बजे सोना ज़रूरी है तभी तो आप सुबह जल्दी उठ पाएंगे। जल्दी मतलब 4 से 5 के बीच।

5) अब कल के लिए चैलेंज है…. 20 बार सूर्य नमस्कार करने के बाद आपको अपनी पसन्द का कोई भी तेज म्यूज़िक लगाना है और उस म्यूज़िक पर आपको लगातार 12 मिनट तक डांस करना है। और ये आपको जरूर करना है। इसके लिए भी आप यूट्यूब की मदद ले सकाते हैं। पर मेरा कहना है किसी की मदद लिए बिना अकेले ही कूद फांद के वो डांस कीजिये जो बारात में करने का आपका सपना रहा हो और अपने नही किया हो।

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तो फ्रेंड्स अगर आप रोज सिर्फ ये 15 मिनट मुझे देते हैं तो मैं वादा करती हूं, इस चैलेंज के बाद आपको आपकी ही कॉलेज पिक्चर से मिलवा कर रहूंगी।

हमारे जो साथी पहले से ही योग और व्यायाम करते आ रहे हैं उनके लिए ये शुरुवाती चैलेंज काफी कम और आसान होंगे, वो साथी अपना रूटीन ही फॉलो करें और बाकी की हेल्थ टिप्स के लिए ये अपडेट देखते रहें।

आगे आने वाले भागों में मैं आसन के नाम भी बताऊंगी और साथ ही ये भी ये कब किये जा सकते हैं और कब इन्हें करना मना है।

करते रहिए योग …. क्योंकि करने से ही होता है!!!

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दिल से…

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कायाकल्प चैलेंज

सुप्रभात दोस्तों

होप की आप लोगों ने कल अपनी तस्वीर उतार कर रख ली होगी और अपना वजन भी माप लिया होगा। वैसे व्यायाम और योग के हिसाब से आज भी मेरी अपडेट लेट हो रही है। क्योंकि देखा जाए तो व्यायाम का सबसे सही समय होता है सूर्योदय के पहले का। मतलब सूर्योदय से पहले आप व्यायाम शुरू करें और सूर्योदय आपके सामने हो।

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अब आज के कुछ खास टिप्स:-

1) कल का हमारा मुख्य मन्त्र था सिर्फ 15 मिनट। इस मंत्र को हमें अभी 1 हफ्ते तक फॉलो करना है, और यकीन मानिए अगर आप हफ्ते भर रोज़ 15 मिनट कसरत करते हैं तो आपको मालूम भी नही चलेगा कि कब आपका 15 मिनट आधे घण्टे में बदला और कब वो आधा घंटा 1 में।

2) आज का आपका चैलेंज है सूर्य नमस्कार की आवृत्ति को 20 तक बढ़ाना है। यानी एक टांग से 10 और दूसरी से भी 10…..

ये बहुत आसान है, सूर्य नमस्कार 20 की संख्या में करना अधिक नही है , कर के देखिए, बड़ा मजा आएगा।

अभी हमें बढाते बढाते ये संख्या 108 पर लेकर जानी है। मैं भी 108 सूर्य नमस्कार चैलेंज ले चुकी हूं और करने में बड़ा मजा आता है। जनवरी में हम एक बड़ा चैलेंज एक साथ करने वाले हैं।

3) सूर्य नमस्कार करने के बाद अगर आप करना चाहें तो थोड़ी सी एब्स की एक्सरसाइज़ कर सकतें हैं , ये भी आसान है… और ये आप खुद भी कर सकते हैं या यूट्यूब की मदद भी ले सकतें हैं। मैंने जब दो साल पहले योग करना शुरू किया था तब मैं Psyche Truth by शनेला को देखा करती थी। इनके वीडियोस छोटे और बहुत हेल्पफुल हैं।

4) आज का आपका 15 मिनट चैलेंज लेने के बाद आप अपने चेहरे पर एक चमक देखेंगे और इसके साथ ही आपको ज़रूरत होगी एक एनर्जी ड्रिंक की । ये ड्रिंक बहुत आसान है और इसे फैट कटर ड्रिंक भी कहा जाता है। उसे आपको दिन में दो बार लेना है। एक बार सुबह और एक बार शाम 4 के आसपास :-

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ड्रिंक – 1 बड़ा ग्लास गर्म पानी ( कुनकुना नही , गर्म पानी) लें उसमें आधा निम्बू ( अगर ज्यादा खट्टा पसन्द नही तो थोड़ा कम ) ,1चम्मच शहद, आधा चम्मच सूखे अदरक का पाउडर यानी सोंठ मिलाकर गर्मागर्म ही पी लीजिये जैसे चाय पी जाती है। ये कब्ज़ की समस्या को दूर करने के साथ ही हमारा मेटाबोलिज्म भी बढ़ाता है।

5) हममें से बहुत से लोग फलों को खाना नही पसन्द करते पर अगर आप अपने शरीर से प्यार करते हैं तो उसकी भी सुनें। हमेशा तो हम अपने मन की ही खाते हैं, आज से अपने हार्ट लिवर किडनी की मनपसंद चीज़े भी खाना शुरू कीजिए। इन्हें। फल कच्ची सब्जियां और सलाद बेहद पसंद है तो आज से इनके लिए कम से कम 1 फल रोज़ खाइए और साथ ही 5 बादाम भी( पानी में भिगोए हुए)

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आपको ये सब पढ़ कर लगेगा,इसमें नया क्या है? ये सब तो हम पहले से जानते थे। जानते तो हम सब कुछ हैं, पर फॉलो नहीं करते तो आइए फॉलो करें और अपने दिन को और अपने जीवन को हेल्दी बनाये।

Eat healthy live happily ❤️

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दिल से….

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कायाकल्प चैलेंज

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प्यारे दोस्तों, माफ कीजियेगा हमारे चैलेंज के लिए मैं ही लेट हो गयी, पर आप सब एकदम चुस्ती से तैयार हैं … यही देख कर दिल खुश हो गया।

आज इस चैलेंज से जुड़ी सिर्फ 5 बातें बताऊंगी…

1) आज आप सभी जो इस चैलेंज से जुड़ना चाहतें हैं अपना वजन और हाइट माप लीजिये। अगर घर पर इंच टेप रखते हैं तो अपने शरीर को कमर पेट सीना नाप कर डायरी में नोट कर लीजिए( बिना भूले) … अब आपका सबसे मनपसंद काम कीजिये अपनी एक फूल साइज़ तस्वीर ले लीजिए, और उसे भी आज की तारीख के साथ सुरक्षित कर लीजिए।

2) लोग कहतें हैं फिटनेस के लिए ढेर सारा पानी पीजिए। पर मेरा कहना है … रुकिए अपने पानी पीने के तरीके पर ध्यान दीजिए। पानी हम इसलिए पीते हैं कि वो हमारे शरीर से सारे टॉक्सिन्स बाहर निकाल दे,पर ध्यान दीजिएगा अगर आप पानी तो बहुत पीते है पर यूरिन आउटपुट उतना अधिक नही है तो ये पानी भी शरीर में जमा होने लगता है और ये भी वजन बढ़ाता ही है। इसलिए कोशिश यही रखें कि सुबह के समय खूब पानी पिये और उतना ही वाशरूम जाएं….. सूरज ढलने के बाद पानी भी कम कर दें।

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3 ) मैं किसी भी तरह की हरी नीली काली लाल चाय का समर्थन नही करती। मेरा मानना है कि आपको जो स्वाद लगे वही खाये पिये .. लेकिन इस बात का ध्यान रखते हुए की वो आप कितनी मात्रा में कंस्यूम करतें हैं। सबसे ज़रूरी बात है अगर आपको चाय या कॉफी की आदत है तो वो लेते रहें पर कोशिश करें कि सुबह और शाम बस 1 कप चाय के अलावा यानी कुल 2 कप चाय कॉफी के अलावा जब भी एक्स्ट्रा चाय लें वो बिना शक्कर की लें।

4) आपके भोजन के साथ भी यही बात है। आप चावल या रोटी एक बार में कोई एक ही तरह का कार्बोहाइड्रेट खाने में प्रयोग करें। अपने खाने को सभी रंगों से सजाएं… हरा साग, पीली दाल, सफेद दही , और रंगबिरंगे सलाद से।

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5 ) आज की आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण बात…. शारिरिक श्रम ज़रूर करें। किसी भी तरह का व्यायाम, योग सूर्य नमस्कार वाकिंग जॉगिंग… आप इनमें से जिसमें भी कुशल हैं या आपको करना पसंद है आप चुन सकतें हैं और शुरू कर सकते हैं… आज देर हो गयी पर अगर आप लोग आज ही मेरा ये ब्लॉग पढ़ लेते हैं तो आज से ही शुरू कीजिए… सिर्फ 15 मिनट …

सिर्फ 15 मिनट :-

हमारा फिटनेस मंत्र है सिर्फ 15 मिनट …

हममें से कई हैं जो सोचते ही रह जाते हैं कि आज नही काल से पूरा एक घंटा मेहनत करेंगे, जिम करेंगे पसीना बहाएंगे.. पर वो कल कभी आता ही नही। इसलिए एक मंत्र अपनाइए सर्फ 15 मिनट .. आज अभी कूद पड़िये मैदान में

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1) फ्रेश हो लीजिये।

2) अपना योग मैट बिछाइये।

3)अपने कुछ पसंदीदा गाने लगा लीजिये।

4) हाथ जोड़ कर खड़े हो जाइए…. and lets start…

5 ) सिर्फ 5 सेट ( यानी दोनो पैरों से करने पर कुल 10 ) सूर्य नमस्कार कीजिये।

6) आज की शुरुवात बस इतनी ही… आपमें से कइयों को लगेगा अरे बस इतना ही… तो मेरा जवाब है आप शुरू तो करो… ये चैलेंज की शुरुवात है… आगे अभी बहुत कुछ करना है। सो आज शुरू कर दीजिए… और कमेंट में बताइये कैसा लगा।

आप में से बहुत लोग जो ऑलरेडी अपनी फिटनेस के लिए कुछ न कुछ करते ही है वो भी ब्लॉग को पढ़ते रहें भले ही चैलेंज में भाग ले या न ले क्योंकि आगे मैं इसी में पीसीओएस , स्पाइनल प्रॉबलम्स, थयरॉइड , ब्लोटिंग आदि के बारे में भी बताती जाऊंगी।

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ऐसी महिलाएं जो बेबी प्लान करने की सोच रहीं हैं या जो प्रेग्नेंट हैं या जो लेक्टेटिंग मदर हैं इस चैलेंज में भाग न लें… बस पढ़ते रहें … ❤️

किसी भी तरह की हेल्थ इश्यूज वाले दोस्त भी अपने डॉक्टर से सलाह के बाद ही किसी भी तरह के व्यायाम या डाइट प्लान फॉलो करें।

आज बस 15 मिनट का मंत्रा अपनाएं… कल आपको एक सीढ़ी ऊपर चढ़नी है ।।

So be ready …. To fly❤️

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aparna ….

दिल से…..

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कायाकल्प चैलेंज…

प्यारे दोस्तों,

मुझे बेहद खुशी हो रही है कि आप लोग फिटनेस चैलेंज के लिए भारी संख्या में तैयार हो गए हैं।

फिटनेस सिर्फ आपके शरीर से ही नही जुड़ी होती, ये मानसिक आत्मिक और भावनात्मक भी होती है। औरतें अक्सर डिलीवरी के बाद शारीरिक रूप से तो कमज़ोर महसूस करती ही है लेकिन साथ ही भावनात्मक रूप से भी वो काफी कमजोर हो जाती है जिसे हम मूड स्विंग का नाम देते हैं, जिसके लिए काफी हद तक हमारे शरीर के हार्मोन्स ज़िम्मेदार होते हैं।

आपको पता है हम पूरी तरह अपने हार्मोन्स के कंट्रोल में होतें हैं। यानी हमारा हंसना, रोना, हमारा कभी अति उत्साहित होना तो कभी बिल्कुल ही निकम्मा हो जाना सब कुछ हमारे दिमाग में रहने वाली मास्टर ग्लैंड पिट्यूटरी निर्धारित करती है। अब सोचिए हम खुद को इतना बड़ा तीरंदाज मानतें हैं लेकिन एक छोटे मटर के दाने बराबर महज .6ग्राम की ग्लैंड हमारी बॉस होती है।

तो क्या कोई ऐसा तरीका है कि हम अपनी मास्टर ग्लैंड के मास्टर बन जाये…..हॉं है…..

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जब कभी हम अपनी फिटनेस के बारे में सोचते हैं और व्यायाम या योग शुरू करते हैं तो हमारी ये मास्टर ग्लैंड तुरन्त सतर्क हो जाती है,और कुछ न कुछ ऐसा करने लगती है जिससे हम अपने उद्देश्य से भटक जाए क्योंकि ये अच्छे से जानती है कि अगर हम रेगुलर व्यायाम या योग करेंगे तो हम इस ग्लैंड पर राज करने लगेंगे। और इसलिए ये हमे तरह तरह के प्रलोभन देना शुरू करती है और इसी कारण हम बहाने बनाने लगते हैं….

जैसे … मैं जिम नही जाना चाहती,कयोंकि सुना है जिम छोड़ते ही वजन और तेज़ी से बढ़ता है…

– ज्यादा लंबी वॉक नही कर सकते, घुटनों में दर्द होता है।

-खाते तो हम दो चपाती ही हैं पर जाने क्या लग जाता है जो वजन कम नही हो रहा?

इसी तरह के अनगिनत बहाने होते हैं हमारे पास… क्योंकि सच कहूं तो हर किसी को आराम भरी जिंदगी पसन्द है। लेकिन कहतें हैं ना जब तक पानी में कूदोगे नही तैराकी का लुत्फ नही उठा सकते, पानी से डर कर नही बैठना है….

तो आइए हम भी चलते है एक महीने के इस हसीन जहीन सफर पर ….

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हमारा फिटनेस चैलेंज है ” कायाकल्प” जिसमें हम पूरे महीने अपनी फिटनेस के लिए जो भी करेंगे उसे अपनी एक डायरी में नोट करते जाएंगे। आप सभी से अनुरोध है कि एक डायरी ज़रूर बना लें। डायरी ऐसी हो कि हम बीच बीच में अपनी तस्वीरें भी लगा सकें।

फिटनेस चैलेंज शुरू करने से पहले आप सभी अपनी हाइट और अपना वजन ज़रूर डायरी में नोट कर लीजियेगा। तारीख और समय के साथ।

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इस चैलेंज के लिए हमें बस कुछ चीज़ों की ज़रूरत पड़ेगी जिनमें सबसे ज़रूरी है योगा मैट। अगर नही भी है तो कोई मोटी दरी या कारपेट काम आ सकता है, बस वो ऐसा नही होना चाहिए जो फर्श पर फिसलने वाला हो। इसके अलावा सबसे ज़रूरी चीज़ है विल पॉवर जो मैं जानती हूं आप सब के पास है।

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तो हमारा चैलेंज शुरू होगा 1 december से….

गणेश हमारी मदद करेंगे कि हम अपना चैलेंज पूरी सफलता से पूरा कर सकें।

So be ready for a tremendous journey…

aparna …

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दिल से…

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हेलो दोस्तों

कैसे हैं आप सब ? जानती हूं अच्छे ही होंगे। बल्कि बहुत अच्छे… खुश स्वस्थ और खुद में मस्त।

स्वस्थ पर मैंने सबसे ज्यादा जोर दिया है…. अब चूंकि ये सिर्फ एक लेखिका का ब्लॉग तो है नही, इसमें एक डॉक्टर एक गृहिणी भी मौजूद है। तो सोचा कि क्यों ब्लॉग को सिर्फ कहानी जंक्शन बना कर छोड़ दिया जाए। क्यों न कुछ और भी इसमें शुरू किया जाए।

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तो मैं आगे जो बताने या पूछने जा रही हूं , वो हो सकता है आपको थोड़ा बोरिंग साउंड करे पर यकीन मानिए ये उतना बोरिंग और उबाऊ नही है, और न ही उतना टफ है जितना सन् कर हमें लगता है…

तो मेरे ब्लॉग के टॉपिक को शुरू करने से पहले आप सभी से सवाल है कि आपमें से कौन कौन मेरे साथ फिटनेस चैलेंज लेने को तैयार है….?

सवाल कठिन है? पर जवाब आसान है… आ जाइये मैदान में जूझ कर…

तो अगर कम से कम पचास लोग भी हामी भर देते हैं तो कल से मैं अपना फिटनेस चैलेंज आप लोगों के साथ शेयर करूँगी।

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Stay fit stay healthy n happy❤️❤️❤️

aparna ….

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दिल से….

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खुशियां आंखें गीली कर जातीं हैं जब कोई ऐसा मौका आये कि किसी ज़मीन से जुड़े शख्स को सिंहासन पर बैठे देखती हूँ……

मेरी नज़रों में ही असल नायक होता है। फल बेचकर 150 रुपये प्रतिदिन कमाने वाले हरिकेला को संतरे को orange कहा जाता है ये मालूम न था। अंग्रेज़ी की ये छोटी सी भाषयी अज्ञानता ने उनके ज्ञान चक्षु खोल दिए। स्वयं की अशिक्षा को मानक मान कर उन्होंने अपनी जीवन भर की कमाई से अपने गांव के बच्चों के लिए स्कूल खोल दिया।

मेंगलुरु के हरिकेला के एक छोटे से प्रयास ने सफलता रची और आज सरकारी अनुदान और कई प्राइवेट ऑर्गेनाइजेशन के सहयोग से उनका हजब्बा स्कूल सफलता के सोपान छू रहा है।

स्नेह सम्मान से लोग इन्हें अक्षर संत भी कहतें हैं। आपके हाथों में पद्मश्री अवार्ड भी मुस्कुरा रहा है।

दिल से ..

आप सभी को रूप चौदस की हार्दिक शुभकामनाएं

तैले लक्ष्मीर्जले गङ्गा दीपावल्याश्चतुर दशीम्
प्रातःस्नानं तु यः कुर्याद्यमलोकं न पश्यति।।
दीपावल्याः चतुर्दशीं तैले लक्ष्मी जले गङ्गा भवति यः
प्रातःस्नानं कुर्यात् यमलोकं न पश्यति |

भाव: मैल, अपवित्रता, गन्दगी दरिद्रता के सूचक है अतः लक्ष्मी
पूजन से पहले इन दरिद्रता के निशानों को मिटा लेने हेतु
चतुर्दशी को प्रातः काल में तेल-उबटन और फिर स्नान कर मैल,
अपवित्रता और गन्दगी को हटाने से यमलोक (नरक) के कभी
दर्शन नहीं होते अर्थात इस लोक में तो सुख से जीते ही हैं बाद
में भी सद्कर्मों के कारण नरक गमन नहीं होता |

रूपचौदस की शुभकामनाएं

दिल से…

चिकित्सा के देवता भगवान धनवंतरी आप सभी पर अपनी कृपा बनाएं रखें, और धन की देवी लक्ष्मी आपके घरों पर स्थायी आवास बना लें।

आप सभी को महापर्व दीपावली के प्रथम दिवस धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएं…💐

दिल से…

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बॉक्सर आमिर खान  अक्षय कुमार से पूछते हैं ” हे ब्रो!! एंजॉइंग? और खिलाड़ी कुमार अपने मस्तमौला अंदाज में जवाब देते हैं येह एंजॉइंग ! बेटर लक नेक्स्ट टाइम!!!
   ये सारा स्पोर्ट्समैनशिप इमानदारी की हार बेईमानी की जीत, अलाना फलाना सब कुछ हम भूल जाते हैं जब इंडिया पाकिस्तान के खिलाफ मैच खेलती है।

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   इतना तो कल दिन भर व्रत रखने के बाद औरतों का खून कम नहीं हुआ होगा जितना इंडिया की हार से हो गया।
  

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अगली बार जीत के आना है बता देती हूं( फ्रॉम अनुष्का)

#दिल से देसी❤️
#छोटी सी भड़ास

दिल से…

लोग कहतें हैं , झूठ मत बोलो।

पर रिश्ते निभाने वाले जानते हैं कि कुछ मीठे झूठ रिश्तों को बनाये रखने के लिये कितने ज़रूरी हैं…..

शादी.कॉम – 26

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शादी डॉट कॉम-26


      
     “मल्टीनेशनल बैन्क्स की तर्ज पर खालिस देसी बैंक भी अपने कर्मचारियों को इस तरह की पार्टी और आयोजन का झुनझुना पकड़ा कर अत्यधिक परिश्रम  कार्य से होने वाली  मानसिक और शारीरिक थकान को दूर करने का सरल उपाय सिखाने की आड़ में उन पर क्षमता से अधिक कार्य थोप रहे हैं,” उस विषय पर प्रस्तावित अन्तिम दिन की कार्यशाला में सारे आयोजन उसी हिसाब से रखे गये थे।।

   पांचवे दिन के ट्रेनिंग सेशन के अंत में सभी की डिनर की व्यवस्था पास के ही एक फाईव स्टार होटल  में की गयी थी,हल्की फुल्की साज सज्जा के साथ ही बैंक कर्मियों में से कुछ एक द्वारा गीत संगीत पेश करने की भी तैयारी थी,इसके अलावा सवेरे के विषय को अनुपूरक करने कुछ एक छोटे मोटे सहभागिता गेम्स का भी आयोजन किया गया था।।
ये पार्टी पूरी तरह से पारिवारिक थी जिसमे कर्मचारी चाहें तो अपने परिवार को भी लेकर आ सकते थे।

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     तीसरे दिन के अपने सेशन के बाद लंच किये बिना ही राजा जो गया था वो चौथे दिन भी बांसुरी को नही दिखा था,ये कैसा बदला ले रहा था वो,जब तक लिस्ट मे बांसुरी का नाम नही था वो मौजूद था और उसका नाम जोड़ने के बाद खुद गायब हो गया था।।
     पर अन्तिम दिन सारी टीम की उपस्थिति अनिवार्य थी,इसीसे बांसुरी को उम्मीद थी,कि आज तो वो आयेगा और हुआ भी वही,राजा आ गया।।

     ऐश ग्रे साड़ी में धागे से बने गुलाबी बूटे बहुत सुंदर लग रहे थे,और उस साड़ी में संवरी बांसुरी भी।।
    माला और बांसुरी साथ ही बैठे थे कि माईक हाथ में लिये सिद्धार्थ ने गाना शुरु कर दिया

        कब कहाँ सब खो गयी
      जितनी भी थी परछाईयाँ
      उठ गयी यारों की महफ़िल
         हो गयी तन्हाईयाँ
       क्या किया शायद कोई
         पर्दा गिराया आपने

      दर्द-ए-दिल, दर्द-ए-जिगर
         दिल में जगाया आपने……….

  हर एक अंतरे पर बांसुरी को निहारता सिद्धार्थ बडे लय में अंदाज में  गा रहा था…..
    बांसुरी सोच ही रही थी कि अच्छा है राजा नही है,वरना सिद्धार्थ की इस बेशर्मी पर जाने उसके बारे में क्या कुछ सोच बैठता,अभी ऐसा सोच के उसने अपने बालों को पीछे किया ही था कि उसके पीछे थोड़ा हट के एक टेबल से टिक के खड़े राजा पर उसकी नज़र पड़ गयी।।
      गहरे ग्रे रंग की शर्ट और काली पैंट में खड़े राजा पर से उसकी आंखें एकाएक हट नही पायीं।।
     तब तक में राजा ने भी उसे देख लिया लेकिन तुरंत ही दुसरी तरफ मुहँ फेर किसी से बातों मे लग गया।।

      पहले दूसरे दिन तो ऐसी निर्लिप्तता नही दिखा रहा था,अचानक ऐसा क्या हो गया ….
     आज अन्तिम दिन था,आज के बाद राजा वापस चला जायेगा,आज ही का दिन है और यही कुछ पलछिन जिनमें वो अपनी बिगडी बना सकती है,पर क्या करे?? कैसे कहे?? कि राजा आज भी हमे फर्क नही पड़ता कि तुम बैंक अधिकारी हो गये!! तुम्हारी नौकरी लग गयी!!
    हमारे लिये तो आज भी तुम हमारे कानपुर के हमारी गलियों के वही राजा हो,कभी जिसकी ज़ुल्फों के साथ हमारी सांसे ऊपर नीचे होती थी।।

    अपनी सोच मे गुम बांसुरी को अचानक स्टेज की तरफ जाते राजा दिखा और तभी सिद्धार्थ ने राजा को गाने के लिये माईक थमा दिया,थोड़ी ना नुकुर के बाद राजा ने माईक संभाल लिया__


       बावरा मन राह ताके तरसे रे
      नैना भी मल्हार बन के बरसे रे
    आधे से अधूरे से, बिन तेरे हम हुए
    फीका लगे है मुझको सारा जहां
     बावरा मन राह ताके…

     ये कैसी ख़ुशी है, जो मोम सी है
    आँखों के रस्ते हँस के पिघलने लगी
      मन्नत के धागे, ऐसे हैं बाँधे
   टूटे ना रिश्ता जुड़ के तुझसे कभी
     सौ बलाएँ ले गया तू सर से रे
          नैना ये मल्हार…

गाने के प्रवाह में खोयी बांसुरी की नज़र राजा पर से हट ही नही पा रही थी,और वो था कि गाते समय उसने एक बार भी उसकी तरफ देखना ज़रूरी नही समझा।।

     डिनर के लिये कर्मियों के परिवारों का भी निमन्त्रण था,बहुत से कर्मचारी अपने बीवी बच्चों के साथ आये हुए थे।।
     
   राजा ने अपना गीत समाप्त किया और स्टेज पर से उतर ही रहा था कि उसकी नज़र सिद्धार्थ पर पड़ गयी और एक बार फिर उसके मुहँ मे एक कड़वाहट घुल गयी,सिद्धार्थ अपनी माँ को सबसे मिलवाते हुए बांसुरी की तरफ ही बढ रहा था।
     दक्षिण भारतीय पोचमपल्ली साड़ी में एक साधारण सा जूड़ा बनाई हुई सिद्धार्थ की माँ चेहरे से ही बेहद सुलझी हुई समझदार गृहिणी लग रही थी, अकेले ही ज़माने की ठोकरें खाती बेटे की अकेले परवरिश ने उनके चेहरे को एक दिव्य तेज़ से रंग दिया था।।

     बांसुरी स्टेज के दूसरी तरफ अकेली ही खड़ी थी कि सिद्धार्थ वहाँ पहुंच गया__

सिद्धार्थ- बांसुरी इनसे मिलो,ये मेरी मॉम है,and mom she is bansuri ,I’ve already told u about her..

  सिद्धार्थ की माँ ने मुस्कुरा कर बांसुरी का अभिवादन किया कि अपने उत्तर भारतीय संस्कारों में लिपटी बांसुरी ने झट आगे बढ कर उनके पैर छू लिये।।
     बांसुरी का लपक के इस तरह पैर छूना उन्हें मोहित कर गया,उन्होँने आगे बढ़ कर उसे गले से लगा लिया,अपनी टूटी फूटी अन्ग्रेजी मिश्रित हिन्दी में उन्होनें अगले दिन सुबह के सह्भोज पर उसे भी आमन्त्रित कर लिया।।

    अगले दिन महीने का दूसरा शनिवार होने से बैंक की छुट्टी थी,इसीसे टीम की वापसी के पहले जितने लोग आज रात की फ्लाईट से नही वापस हो रहे थे उन सब को बड़े इसरार के साथ सिद्धार्थ ने अपने घर सुबह के खाने पर बुला लिया था।।
      राजा ने सिद्धार्थ के आग्रह को सिरे से नकार कर अपने आने की असमर्थता प्रकट कर दी थी।।
     कभी किसी आयोजन का हिस्सा ना बनने वाली सिद्धार्थ की माँ एक तरह से टीम को स्वयं आमंत्रण देने ही आयी थी।।

    बांसुरी से जब तक उनकी बातें होती रही,राजा उन्हें  ही देखता रहा,पर जब उसने देखा की वो बांसुरी को साथ लिये उसी की तरफ आ रही हैं, तो वो एकाएक पलट कर दूसरी ओर देखने लगा।।

    ” हेलो ,कैसे हैं आप??”

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  राजा- जी नमस्कार!!! मैं ठीक हूँ,आप कैसी हैं।

” देखिए आप हमारे घर आये बिना नही जा सकते, मैं स्पेशली आप को इन्वाईट करने ही यहाँ  तक आयी हूँ ,कल का लंच आपको हमारे घर पर ही लेना है।”
    पता नही ये उनका स्नेह भरा आग्रह था या आश्चर्यजनक रूप से उनके व्यक्तित्व की अम्मा से समानता पर उस भद्र महिला के आग्रह को फिर राजा ठुकरा नही पाया, आखिर उसने भी झुक कर उनके पैर छू ही लिये।।

   तभी माला हाथ में स्टार्टर की प्लेट थामे वहाँ चली आयी,चार लोगों के बीच अकेली प्लेट पकड़ी खड़ी खुद को देख उसे अपनी भूल का आभास हुआ,और उसने अपनी प्लेट राजा की तरफ बढ़ा दी__

” सर लिजिये ना,आप कुछ ले ही नही रहे।”

” आप इतने प्यार से देंगी तो कोई लेने से कैसे मना कर सकता है।”
   बांसुरी एक बार फिर बुझ के रह गयी,आखिर हुआ क्या है राजा को।।

    पर बांसुरी को अब हर पल यही लग रहा था कि कैसे भी करके इस गलतफहमी को दूर करना ही पड़ेगा,चाहे इसके लिये उसे किसी भी हद तक जाना पड़े ।।

    माला ने उसी समय माईक बांसुरी के हाथ थमा दिया,बहुत सहम के आखिर उसने गाना शुरु किया

    मैं कागज़ की कश्ती, तू बारिश का पानी
           ऐसा है तुझसे अब ये रिश्ता मेरा
          तू है तो मैं हूँ, तू आए तो बह लूँ
            आधी है दुनिया मेरी तेरे बिना
           जी उठी सौ बार तुझपे मर के रे
                 नैना भी मल्हार…

बांसुरी ने बहुत मन से राजा के गाये हुए गाने को ही आगे बढ़ाया,पर उसके गीत को समाप्त करते में राजा वहाँ से जा चुका था।।

     राजा के जाने के बाद फिर बांसुरी का मन भी उस पार्टी से उचाट हो गया,जैसे तैसे समय काटती आखिर वो भी सर दर्द का बहाना बनाये वहाँ से निकल पड़ी ।।

  पार्टी हॉल में नेटवर्क ना होने से कैब बुक नही हो पा रही थी,इसीसे पैदल मेन रोड पर आगे बढ़ती बांसुरी अपने मोबाइल पर सर झुकाये कैब बुक करने में ही लगी हुई थी__

” अरे सम्भल के,ऐसे चलोगी तो गिर पड़ोगी!!

   राजा की आवाज़ सुन बांसुरी ने झटके से ऊपर देखा,सामने से उसीकी तरफ आते राजा को देख उसका चेहरा खिल उठा__

बांसुरी– ऐसे बीच में पार्टी छोड़ कर कहाँ निकल गये।।

राजा– बहुत बेचैनी सी लगने लगी थी अन्दर, इसिलिए बाहर खुली हवा में सांस लेने निकल गया।

राजा– तुम यहाँ कैसे?? पार्टी तो अभी चल ही रही होगी।।

बांसुरी– हाँ हमें भी थोड़ा अच्छा सा नही लग रहा था,इतनी भीड़ भाड़,हल्ला गुल्ला रास नही आ रहा था।तुमने खाना खाया राजा ??

राजा — खा लेंगे….तुम्हें अचानक हमारी फिक्र कैसे होने लगी।।

बांसुरी– अरे ऐसे क्यों बात कर रहे ,,हम फिक्र नही करेंगे तो और कौन करेगा तुम्हारी??

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राजा — जो हमारे लिये बनी होगी वो करेगी।।

बांसुरी– अच्छा !!! कौन है वो ज़रा हम भी सुनें,तुमने बताया ही नही कि शादी के लिये लड़की भी ढूँढ लिये।।

राजा– हाँ जैसे तुमने तो मिलते साथ ही सब बता दिया।।

बांसुरी– क्या बोल रहे हो तुम?? हमे समझ नही आ रहा,कभी भी साफ साफ बोलने की आदत भी तो नही है तुम्हारी।।

राजा– जैसे तुम सब साफ साफ बोलती हो,जब इतनी ही सफाई है बातो में तो अब तक बताई काहे नही कि उससे शादी करने जा रही हो।।

बांसुरी– पगला गये हो क्या?? किससे शादी करने जा रहे हम??

राजा — बनो मत बांसुरी!! सिद्धार्थ ने हमे सब कुछ बता दिया है।।

बांसुरी– अरे बाबा क्या बता दिया उसने,,हमें भी तो बताओ।।

राजा– यही कि तुम दोनों शादी करने वाले हो।।

बांसुरी– पगला गये हो क्या तुम?? एक बात बोले चाहे तुम कितने बड़े ऑफीसर बन जाओ ,
रहोगे गधे के गधे ,,  उसने कहा और तुमने मान लिया,अरे एक बार हमसे पूछना तो था।।

राजा — सवाल पूछने और जवाब देने का कोई रस्ता पीछे छोड़ गयी थी क्या ,जो हम कुछ पूछ पाते।।

बांसुरी– तुमने भी तो आवाज़ नही दी पीछे से….क्या इतनी सी बात पे कोई ऐसा जीवन भर का बैर मोल लेता है।।कहते कहते बाँसुरी की आंखें भीग गयी

   राजा ने आगे बढ़कर बांसुरी के दोनो हाथ अपने हाथों में ले लिये एक हाथ से उसके बहते आँसूं पोंछ उसकी आंखों में झांकते हुए उसने कहा__

राजा– आज भी तुमसे उतना ही प्यार करते हैं बांसुरी, कभी भूल ही नही पाये तुम्हें ।।
हमारे अनपढ़ होने से हमे छोड़ गयी यही सोच सोच कर पागल हो गये,और तुम्हारे जाने के बाद पढ़ने की ऐसी लत लगी की पागलों के समान किताबों में  ही घुसे रहने लगे,किताबें ही जीवन हो गयी थी हमारे लिये…..तुम्हारे बिन सब कुछ कितना फीका हो गया था ,कितना बेरंग !! चाय भी अच्छी नही लगती थी, फिर भी पीते थे,सिर्फ और सिर्फ तुम्हें याद करने के लिये…..जिम छूट गया!! दोस्त छूट गये!! यहाँ तक की हमारी खुद की तबीयत हमसे रूठ गयी पर तुम नही छूटी,कितना याद किया ये कैसे बताएँ क्योंकि तुम तो हमारे अन्दर ही समा गयी थी,इस कदर हमसे जुड़ गयी थी कि सोते जागते दिमाग में एक ही नाम चलता था ….बांसुरी!!

   बांसुरी के आँसू रूकने के बजाय बहते चले जा रहे थे,और अब राजा के आँसू भी उसका साथ दे रहे थे।।

बांसुरी– तुम्हें क्या लगता है,हम यहाँ बहुत खुश थे,किसी से तुम्हारे बारे में पूछ नही पाते थे,प्रिंस प्रेम सबने हमसे बात करना बन्द कर दिया,यहाँ तक की निरमा ने भी,,बस बुआ की चिट्ठी में कभी कोई हाल तुम्हारा मिला तो मिला,वर्ना कुछ नही।।

राजा– एक बार फोन भी तो कर सकती थी ना, राजा जिंदा है या मर गया,जानने की भी इच्छा नही हुई तुम्हारी ।।

बांसुरी–तुम तो फिर भी अपने अम्मा बाऊजी के साथ थे युवराज भैय्या के साथ थे,,हम तो यहाँ एकदम अकेले हो गये थे!! कभी तुम्हें नही लगा कि अकेले क्या कर रही कैसे जी रही एक बार फोन ही कर लूँ ।।
      कभी कहीं से गुजरते और तुम्हारे पर्फ्यूम की खुशबू आ जाती तो पागलों जैसे इधर से उधर भटकते फिरते,तुम्हें ढूंढते रहते थे,जबकि जानते थे की तुम यहाँ नही हो।।
     हमारे पागलपन की हद बताएँ राजा,तुम्हें हमेशा अपने पास महसूस करने के लिये लड़की होते हुए भी तुम्हारा जेंट्स पर्फ्यूम लगाते हैं,माला जाने कितनी बार इस बात पर हमारा मजाक भी बना चुकी है,पर हमे अपने कपडों से आने वाली तुम्हारी खुशबू ही भाती है ,क्या करें।।

     दोनो एक दूसरे का हाथ थामे एक दूसरे की आंखों में इतने सालों के अपने पलछिन देखते हुए सवाल जवाब में लगे थे कि अचानक राजा बांसुरी के चेहरे पे झुकने लगा__

बांसुरी– क्या कर रहे हो ये राजा ??

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राजा– उस शाम एक काम अधूरा रह गया था बंसी …… आज वही पूरा करने जा रहे …..

मुस्कुराते हुए बांसुरी ने राजा को पीछे धकेल दिया

बांसुरी– इतनी सारी शिकायतें जमा कर रखी है हमने,उन्हें सुनने की फुरसत नही है?? आये बड़े प्यार करने वाले….

राजा– कर लेना बाबा, शिकायतें भी कर लेना,,सब सुन लूंगा……
      राजा ने अपने दोनो हाथों में बड़े प्यार से बांसुरी का चेहरा पकड़ा और….
   ” पहले उस रात का हिसाब तो पूरा कर लेने दो।”

बांसुरी– नही ,पहले हमारी बात सुनो!! क्या कह रहे थे सिद्धार्थ सर ,मुझसे शादी करेंगे,हो चुकी तब तो।।तुमने कहा नही उनसे कि बांसुरी सिर्फ और सिर्फ राजा की है,और राजा से ही बांसुरी की शादी होगी।।

राजा– नही कहा!! लेकिन कल उनके घर जायेंगे ना तब कह देंगे,,अब खुश!!

बांसुरी– हाँ बहुत बहुत खुश ।।

राजा– तो फिर आओ इधर।

बांसुरी– कब से देख रहे हैं,घूम फिर के एक ही जगह तुम्हारा कांटा अटक जा रहा

राजा– इत्ते साल से इन्तजार भी तो किया है तुम्हारा बन्सी!!!
      मुस्कुराती हुई बांसुरी आगे बढ़ कर राजा के गले से लग गयी,और राजा उसके चेहरे पे झुकता चला गया।।

क्रमशः

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aparna..

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दिल से…. चिट्ठी आप सबों के नाम!

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प्यारे दोस्तों।

सबसे पहले तो आप सभी का शुक्रिया अदा करती हूं कि मेरे एक बार बोलने पर आप सभी मेरे ब्लॉग पर चले आए। पर यहां मेरे ब्लॉग पर भी आप सब मुझे सपोर्ट कर रहे हैं। मैं जानती हूं आप सब के दिल में यह भी चल रहा होगा कि आखिर मैंने अपना ब्लॉग लिखना क्यों शुरू किया। देखा जाए तो यह जरूरी था बेहद जरूरी। सिर्फ मेरे लिए ही नहीं मेरे जैसे उन ढेर सारे लेखकों के लिए भी जो ढेर सारी मेहनत करके लिखते तो हैं लेकिन उनके लिखेगा प्रतिसाद उन्हें नहीं मिल पाता।

मैं यहां किसी भी प्लेटफार्म की बुराई नहीं करूंगी। सभी प्लेटफार्म अपनी अपनी जगह सही है चाहे वह ऑनलाइन लेखन के प्लेटफार्म हों या ऑडियो स्टोरी सुनाने के प्लेटफार्म। हर एक प्लेटफार्म अपने आपके लिए काम करता है। अपनी ग्रोथ के लिए अपनी खुद की टीम के लिए । अगर हम लेखक उन प्लेटफार्म से जुड़ते हैं तो कहीं ना कहीं हमारा भी अपना एक लालच होता है कि हमें पाठक मिले। हमारी कहानियों को श्रोता मिले। आज बहुत से लेखक ऐसे हैं जो 1 से अधिक प्लेटफार्म पर काम कर रहे हैं। और यह लेखक लगातार काम कर रहे हैं। किसी प्लेटफार्म पर कहानियां लिखते हैं तो किसी दूसरे ऑडियो प्लेटफॉर्म के लिए भी अपनी कहानियां देते हैं। आप सोचिए उन लेखकों के दिन में भी 24 घंटे ही हैं। और वह उस टाइम को मैनेज करके लगातार मेहनत करते हैं। सिर्फ इसलिए कि उनकी कहानियों से उनकी कोई कमाई हो सके। लेकिन सच कहूं तो कोई भी प्लेटफार्म लेखकों को उनके परिश्रम के मुताबिक पारिश्रमिक नहीं देता। शायद इसीलिए लोगों को लेखन में कैरियर बनाने के लिए बहुत सोचना पड़ता है। ना ही इस क्षेत्र में जल्दी पैसा मिलता है और ना ही नाम। बावजूद लेखक के अंदर की भूख उसे लिखने के लिए बाध्य करती हैं। और यह भूख पैसों की भूख से कहीं ज्यादा तीव्र होती है । यह भूख होती है कि उसके लिखे को कोई पढ़े सराहे। अगर किसी लेखक को ढेर सारे पाठक मिलते हैं तो भले ही कमाई ना हो लेकिन वह उसी में संतुष्ट हो जाता है यह मेरा व्यक्तिगत विचार है जरूरी नहीं कि हर लेखक मेरे विचारों से सहमत हो।

अब मैं बात करती हूं अपने ब्लॉग और प्रतिलिपि की।

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मैं सच कहूं तो प्रतिलिपि की शुक्रगुजार हूं क्योंकि प्रतिलिपि ने ही मुझे वह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म दिया जहां आप सब से मेरी मुलाकात हो पाई। आज से ढाई साल पहले मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं लेखक भी बन सकती हूं । तब तक मैं सिर्फ और सिर्फ एक पाठक थी। प्रतिलिपि पर मैंने कभी कोई कहानी पढ़ कर लिखना नहीं सिखा। जैसा कि बाकी लेखक कहते हैं कि वह अपने शुरुआती दिनों में प्रतिलिपि पर पढ़ा करते थे और यही पढ़ते हुए उन के मन में लेखक बनने का विचार जागा। मैं बचपन से ही पाठक थी और वह भी जबरदस्त पाठक । पढ़ने का इस कदर शौक था कि मैं रोज घर पर आने वाले दोनों न्यूज़पेपर पूरे चट कर जाने के बाद सारे एडवर्टाइजमेंट और यहां तक कि निधन वाले कॉलम भी पढ़ लिया करती थी। जब कभी बचपन में मैं अपनी अलमारी जमाया करती तो कहीं भी अगर न्यूज़ पेपर बिछाने की पारी आती तो मैं उस पेपर को खोलकर घंटों तक पढ़ती रह जाती। मेरे इसी पढ़ने के शौक में जाने कितनी बार मेरी चाय के बर्तन को दूध की गंज को जला दिया। कॉलेज के दिनों में भी मेरा यही हाल था। संडे हमारा एक टाइम फीस्ट होने के कारण शाम के समय हमारा टिफिन नहीं आया करता था और तब पारी पारी से हम सहेलियां सबके लिए मेगी बनाया करती थी। जिस दिन मेरी पारी होती थी आप सोच ही सकते हैं कि मैं कितना बंटाधार करती रही होंगी। मैंगी चढ़ा कर वहीं खड़े-खड़े मैं कोई ना कोई किताब खोल कर पढ़ने लग जाया करती थी और मैगी की जलने की खुशबू सूंघकर मेरी सहेलियां दौड़कर रसोई में भागती थी कि आज फिर मैंने उनके डिनर को जला दिया।

पढ़ने के इतने जल्लादी शौक के बाद भी मुझे लेखन हमेशा से रॉकेट साइंस लगा करता था। मैं जब भी अपने पसंदीदा लेखकों को पढ़ती थी तो यही सोचती थी कि लिखना बहुत मेहनत का काम है। कैसे कोई लेखक इस कदर हमारी भावनाओं को अपने पन्नों पर उतार लेता है। और कैसे हम उसके लिखे को पढ़कर बिल्कुल वही महसूस करने लगते हैं। उसके लिखे शब्दों के साथ हंसते हैं और उसी के लिखे शब्दों को पढ़कर रोते हैं। ऐसा कैसे संभव हो सकता है? मेरे लिए लेखक हमेशा से परम श्रद्धेय थे अब भी हैं और हमेशा रहेंगे!

आप में से कई लोग बहुत बार यह सवाल भी कर चुके हैं कि मैं प्रतिलिपि पर इन लेखकों को पढ़ती हूं तो मैं आपको बताना चाहती हूं कि मैं जिम साहित्यकारों को पढ़कर बड़ी हुई हूं और जिनकी रचनाएं आज भी समय निकालकर पढ़ती हूं उनमें से प्रेमचंद शरतचंद्र ममता कालिया आदि के अलावा शायद ही किसी की रचना प्रतिलिपि पर मौजूद हो।

प्रतिलिपि पर आज के नए लेखकों की भरमार है और सभी बेहद खूबसूरत लिखते हैं। लेकिन इनमें से किसी को भी पढ़ने का अब तक सौभाग्य नहीं मिल पाया और इसका कारण उन लेखकों की कमी नहीं बल्कि मेरे पास वक्त की कमी है। जब थोड़ा सा समय मिलता है आप सभी के लिए कुछ ना कुछ लिखने की कोशिश करती हूं और इसी कोशिश में किन्ही भी नए लेखकों को नहीं पढ़ पाती हूँ।

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प्रतिलिपि पर जब से मोनेटाइजेशन शुरू हुआ लेखकों के बीच भी एक होड़ सी लग गई अपने सब्सक्राइबर्स बढ़ाने की होड । पर देखा जाए तो इस बात पर हम लेखकों का कोई कसूर भी नहीं आज तक निशुल्क लिखी रहे थे लेकिन जब कहानी पर कमाई का जरिया मिला है तो कोई भी क्यों छोड़ना चाहेगा।

इसके बाद बात शुरु हुई पाठकों की नाराजगी की । सब्सक्रिप्शन से हटाने के लिए लोगों ने इनबॉक्स में भूकंप ला दिया। पहले पहल मैंने भी सोचा कि मैं अपनी कहानियों को सब्सक्रिप्शन से हटा लूंगी लेकिन फिर यह महसूस हुआ कि अगर मैं ऐसा करती हूं तो मेरे साथ के बाकी लेखक ऐसा नहीं करते तो जाहिर सी बात है कि उनके ऊपर और भी ज्यादा दबाव डाला जाएगा कि देखिए उन्होंने तो अपनी कहानी से सब्सक्रिप्शन हटा लिया फिर आप क्यों इतना लालच कर रही हैं। जाहिर है यह कंपैरिजन नहीं होना चाहिए लेकिन होगा। अगर मैं सब्सक्रिप्शन हटाती हूं तो इसमें मेरे साथी लेखकों की तो कोई गलती नहीं है अगर वह अपनी कहानी उसे अपनी मेहनत से कोई कमाई करना चाहते हैं तो इसमें वह कोई गुनाह नहीं कर रहे बल्कि मैं पूरी तरह से उन सभी के सपोर्ट में हूं कि ऐसा करना ही चाहिए।

और इसीलिए मैंने अपनी कहानियों से सब्सक्रिप्शन नहीं हटाया। बल्कि बीच का यह रास्ता चुना कि मैं ब्लॉग पर भी अपनी कहानियां उसी समय पोस्ट कर सकूं। जिससे जो लोग सब्सक्रिप्शन लेकर नहीं पढ़ना चाहते वह मेरे ब्लॉग पर आकर उसी दिन निशुल्क उस कहानी को पढ़ सकते हैं।

इतना शानदार ऑफर देने के बावजूद अब तक बहुत से लोग प्रतिलिपि पर ही मुझे पढ़ना चाहते हैं । मैं उन पाठकों की इस बात को भी पूरी तरह समझती हूं मैं विज्ञान की विद्यार्थी हूं और अच्छे से जानती हूं कि मोमेंट ऑफ इनर्शिया यही होता है। जी हां इसे जड़त्व का नियम भी कहा जाता है इसका अर्थ है जब हम चलते रहते हैं तो हम चलना ही चाहते हैं रुकने के लिए हमारा शरीर हमारा विरोध करता है इसीलिए जब हम चलती हुई बस से उतरते हैं तो हम एकदम से स्थिर नहीं हो सकते हमें थोड़ी देर तक अपने शरीर को बस के साथ ही दौड़ आना पड़ता है या गति में रखना पड़ता है।

बस यही मोमेंट आफ इनर्शिया प्रतिलिपि पर पढ़ने वाले पाठकों के साथ भी हैं । उन्हें लगता है प्रतिलिपि पर पढ़ना आसान है। इसके अलावा कहीं भी और जाकर वह पढ़ना नहीं चाहते। मैं भी किसी पर दबाव नहीं बनाना चाहती लेकिन इसी कारण अब मुझ पर दबाव बढ़ने लग गया है । दो प्लेटफार्म पर एक साथ एक ही कहानियों को चलाना बेहद मुश्किल और तनाव भरा है। कब किस जगह पर कौन सी कहानी पोस्ट की थी। किस प्लेटफार्म पर अभी कहानी का अगला कौन सा भाग डालना है यह सब बहुत जटिल हो गया है।

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और इसीलिए अब यह सोचा है कि कुछ कहानियां सिर्फ अपने ब्लॉग पर ही लिखूंगी।

ब्लॉग पर लिखने से मुझे क्या फायदा है अब मैं उसके बारे में आप सभी को बताना चाहती हूं। पहली बात ब्लॉग पर आप सभी निशुल्क मुझे पढ़ सकते हैं दूसरी बात मेरे ब्लॉग पर अगर 1000 से ज्यादा फॉलोवर्स होते हैं तो वर्डप्रेस ब्लॉग मुझे मेरा ब्लॉग लिखने के लिए आप सब से कोई शुल्क लिए बिना मेरे अकाउंट को बिजनेस अकाउंट बना देता है और जिससे मुझे लाभ मिलता है। इसके अलावा मेरी कहानियों पर गूगल ऐड जो भी एडवर्टाइजमेंट डालता है उससे भी मुझे रेवेन्यू जेनरेट होता है यानी कि मेरी कमाई होती।

अब आप सोचिए कि ये आपके और मेरे दोनो के लाभ का सौदा है। आपको कुछ नहीं करना सिर्फ आकर मुझे पढ़ना है वह भी पूरी तरह से निशुल्क और उसके बदले मुझे गूगल से और वर्डप्रेस से पैसे दिए जाएंगे क्योंकि मेरा पेज बार-बार खोला जा रहा है और मेरे पेज पर एडवर्टाइजमेंट नजर आ रहे हैं।

क्योंकि यह मेरा पर्सनल ब्लॉग है और यह गूगल पर है तो इसलिए 1000 फॉलोअर्स से अधिक होने पर गूगल भी मुझे कुछ निश्चित राशि देना शुरू करेगा। मैं मानती हूं यह राशि बहुत कम है ।रेवेन्यू बहुत ज्यादा जनरेट नहीं होता लेकिन फिर भी मुझे मंजूर है। क्योंकि यहां मेरे पाठकों को मुझे पढ़ने के लिए कुछ भी खर्च करने की जरूरत नहीं है। लेकिन मुझे फायदा बढ़ाने के लिए आप यह जरूर कर सकते हैं कि मेरी कहानियों को आप अपनी सोशल अकाउंट पर शेयर कर सकते हैं। मेरे इस पेज यानी अनकहे किस्से को आप ज्यादा से ज्यादा अपने इंस्टाग्राम फेसबुक आदि अकाउंट पर शेयर कर सकते हैं। अगर आप सभी के फेसबुक पर 100 दोस्त भी हैं, और अगर उन्हें मेरी कहानी पढ़ना पसंद आता है ।तो वह मेरे ब्लॉग पर आकर मुझे फॉलो कर सकते हैं और इस तरह मेरे फॉलोवर्स की संख्या बढ़ सकती है। और साथ ही बढ़ सकते हैं मेरी रोजाना के व्यूज। आपको इस सम्बंध में कोई भी डाउट है तो आप समीक्षा में मुझसे खुल कर पूछ सकते हैं।

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वैसे यह आप सभी का प्यार ही था कि पहले महीने में ही मेरे ब्लॉग पर लगभग रोज के 1000 से ज्यादा व्यूज आने लग गए थे। लेकिन आप सभी को एक बार फिर अपना प्यार साबित करना पड़ेगा मेरे फॉलोवर्स बढ़ाने में और मेरे व्यूज बढ़ाने में सिर्फ आप सभी मेरी मदद कर सकते हैं।

प्रतिलिपि और मेरी मोहब्बत कितनी तगड़ी है यह तो आप सब जानते हैं । वहाँ पर ढेर सारे लेखक अपने कुकू एफएम पॉकेट एफएम के पोस्ट शेयर करते रहते हैं लेकिन उनसे प्रतिलिपि को कोई परेशानी नहीं है। और मैं ने जैसे ही अपने ब्लॉग के बारे में लिखा मुझे तुरंत नोटिस जारी कर दिया। इसलिए अब वहां मैं अपनी कोई पोस्ट शेयर नहीं कर सकती। हो सकता है कि कई पाठकों को शायद यह पता ही नहीं कि मैं अब मेरे ब्लॉग पर भी लिखती हूं तो दोस्तों हो सके तो आप सभी के सोशल अकाउंट पर मेरी कहानियों या मेरे पेज का प्रचार करने में मेरी मदद करें।

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बाकी तो आप सभी जानते हैं कि मैं संस्कारी बहुत हूं इसलिए पंगों से दूर ही रहती हूं। पर अब जाने क्यों आप सभी ब्लॉगर जो मेरे ब्लॉग पर मुझे फॉलो करते हैं से एक अलग से जुड़ाव हो गया है आप लोगों के सामने तो दिल खोल कर मैं अपनी भड़ास निकाल सकती हूं। तो बस मुझे दिवाली तक में 1000 फॉलोअर्स चाहिए और साथ ही चाहिए डेली के 2000 प्लस व्यूज भी।

वहां 22000 लोग फॉलो करते हैं पर पता नहीं क्यों फॉलो करते हैं। मेरी बात सुनते तो है नहीं पर चलो कोई नहीं। जो सुनते हैं वह लोग भी अगर मान गए तो भी बहुत बड़ी बात है।

एक और बात कहनी थी आप 297 फॉलोअर्स यहां मौजूद हैं। क्या आप सभी को मेरी हर पोस्ट की नोटिफिकेशन मिलती है। अगर आप लोगों को नोटिफिकेशन नहीं मिलती तो प्लीज प्लीज प्लीज मुझे इस पोस्ट पर मैसेज करके बताइए। मेरा टेलीग्राम चैनल और फेसबुक पेज की लिंक भी मैं आपसे शेयर करूंगी। आप हो सके तो मेरे फेसबुक पेज को भी फॉलो कर सकते हैं और टेलीग्राम चैनल को भी। जिससे मैं हर कहानी की पोस्ट का लिंक वहां शेयर कर सकूं।

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और अगर आप इतना सारा मेरे लिए करेंगे तो मेरा भी फर्ज बनता है कि मैं नई नई अनोखी और अलग हटकर कहानियां आप लोगों के लिए सिर्फ आप लोगों के लिए अपने ब्लॉग पर लिखती रहूं।

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आप सभी की संस्कारी लेखिका

aparna…..

मायानगरी -6

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   मायानगरी-6

    होस्टल के कमरे में रंगोली रोती बैठी थी और झनक की समझ से बाहर था कि आखिर ऐसी कौन सी बात हो गयी जो रंगोली ऐसे धुंआधार रोये पड़ी है।

” अरे कुछ बता भी दो यार रंगोली! हुआ क्या? क्या रैगिंग वाली बात से परेशान हो ? ये सब बहुत कॉमन है यार। इसके लिए इतना टेंशन लेने की ज़रूरत नही है। बस कुछ दिनों की बात है फिर यही सीनियर्स खूब हेल्प करेंगे। ले पानी पी और अब चुप हो जा।”

   पानी पीकर रंगोली थोड़ा संभली और अपनी परेशानी उसने कहनी शुरू की…-“झनक यार इस लड़के ने मुझे कहीं का नही छोड़ा।”
  झनक चौन्क कर रंगोली को देखने लगी, उसे रंगोली की बात एकदम से समझ में नही आई…-” किस की बात कर रही है तू ?”
“वही इंजीनियरिंग वाला। कहाँ से आकर गले पड़ गया यार। अब क्या करूँ। ये तो हर जगह मुझे बदनाम करने में लगा हुआ है। सीनियर्स पर प्रोफेसर्स पे मेरा कितना खराब इम्प्रेशन पड़ेगा, सोच तो!”
” अरे यहाँ ये सब कोई नही सोचता!”
“सभी जगह सोचते हैं यार! बस कहने की बात है कि नही सोचते। आज तक मेरे स्कूल में मेरी इतनी अच्छी इमेज थी इसने सब सत्यानाश कर दी। एक नम्बर का बेवकूफ है , अरे भई मैंने मांगी तुझसे हेल्प तो तू क्यों हर जगह मेरा गार्जियन बनकर घूम रहा  है।”
” गार्जियन नही पति!” झनक ने चुटकी ली और रंगोली एक बार फिर नाराज़ होकर रोने लगी…-“यार प्लीज़ मत बोल ऐसा। इस लड़के से ऐसी नफरत हो रही है ना कि सामने आ जाये तो गला दबा दूँ। इसने सब जगह मेरा नाम खराब किया है।”.
” तो अब कर भी क्या सकते हैं यार। छोड़ ना। तू क्या उससे माफी मंगवायेगी?”
” हाँ ! बिल्कुल मंगवाऊंगी। जिस जिस से जाकर उसने खुद को मेरा पति बोला है उस हर एक के सामने जाकर हाथ जोडकर माफी मांगेगा और माफी जब तक नही मिलेगी हमारे सीनियर्स के पैरों पड़ा रहेगा।”
” तेरी मर्ज़ी! लेकिन मुझे नही लगता वो हीरो तेरी बात मानेगा।”
” झनक तू बस ये सोच की हम उससे कहाँ मिल सकतें हैं । मुझे उससे अकेले में बात करनी है।”
” हम्म इंजीनियरिंग वाला बंदा है, कैंटीन में सुट्टा मारते मिल ही जायेगा। नाम गांव कुछ पता है उसका?”
” नाम अभिमन्यु बताया था और मैकेनिकल पांचवे सेम का स्टूडेंट है। यार एक तो मुझे पढ़ाई की इतनी ज्यादा टेंशन हो गयी है कि हर वक्त पेट में अजीब सी गुड़गुड़ होती रहती है ऊपर से इस ने और नाक में दम कर दिया।”
” पढ़ाई की टेंशन अभी से क्यों?”
” बुक्स देखीं हैं। इतनी मोटी मोटी की लगता है मुझे खा जाएंगी। ये फिजियो की “गायटन एंड हाल” और ये ग्रे की एनाटॉमी। पता नही कुछ मेरे पल्ले भी पड़ेगा कि नही। मुझे तो ये सब पढ़ने के लिए डिक्शनरी लेकर बैठना पड़ेगा यार। मेरी स्कूलिंग हिंदी मीडियम थी ना!”
” अबे ये बात! इसलिए इतना डर रही तू। सुन किताबें तो यहीं हैं जो तीर्थ है हमारा ! लेकिन हमें तीर्थ पूरा करवातें हैं चौरसिया जी और जैन साहब।”
” मतलब?”
” मतलब फिजियो की हम पढेंगे जैन और एनाटॉमी में पढ़ेंगे बी डी चौरसिया। ये हमारी भाषा की किताबें हैं। यानी है तो इंग्लिश में लेकिन हमारी आसान सी इंग्लिश में। और फिर जो समझ न आये उसके लिए मैं हूँ ना। “
” हम्म ! मैं पास तो हो जाऊंगी ना!”
” तुझे रंगोली बस रोने की बीमारी है क्या? अब तक उस छछूंदर के नाम पर आँसू बहा रही थी, अब पढ़ाई के नाम पर।”
” यार झनक क्या करूँ? यहाँ रैगिंग के सिवा कुछ होता ही नही तो मज़ा कैसे आएगा। मुझे तो हॉन्टेड कैसल लग रहा है ये मायानगरी।”
” चल नीचे चलते हैं। कुछ अच्छा सा खाएगी तो दिमाग काम करेगा और फिर तुझे उस रितिक रोशन से लड़ने भी तो जाना है ना?”
” छोड़ यार! किसी ने उससे बात करते देख लिया तो और मुसीबत हो जाएगी। जाने दे। बस भगवान से प्रार्थना है अब मेरी पढ़ाई पूरी होते तक उसकी शक्ल न देखने को मिले।
“आमीन !! नही मिलेगी।”

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  रंगोली जो कुछ देर पहले अभिमन्यु को पानी पी पीकर कोस रही थी, अब उसे भूलभाल कर नीचे होस्टल मेस में जाने की तैयारी कर रही थी।
    झनक के साथ रंगोली नीचे पहुंची तो पता चला आज किन्हीं कारणों से मेस बंद रहेगा। उन लोगों के पास ऊपर कमरे में भी कुछ खाने को नही था। झनक के कहने पर दोनों हॉस्टल के बाहर बनी कॉमन कैंटीन में आ गईं।
   
     अभिमन्यु भी अधीर को साथ लिए रंगोली को ताड़ने के बहाने हैं मेडिकल कॉलेज की तरफ पडने वाली कैंटीन में आकर बैठा था कि उसी वक्त रंगोली झनक के साथ कैंटीन में दाखिल हुई।
   उसे देखते ही खुशी से चौक कर वो खड़ा हो गया और तुरंत रंगोली के पास पहुंच गया ” हेलो कैसी हैं आप? मैं अभिमन्यु!”
   अभिमन्यु को वहां आया देख रंगोली के तन बदन में आग लग गई। उसे पिछले चार-पांच दिन से जो चल रहा था वह सब एकदम से याद आ गया और वह बुरी तरह से अभिमन्यु पर भड़क उठी।
” तुम समझते क्या हो खुद को और मुझे क्या समझ रखा है? यह कोई फिल्म चल रही है कि तुम हीरो और मैं हीरोइन बन गई।
  देखो मिस्टर अच्छे से इस बात को समझ लो, कि मैं सिर्फ और सिर्फ पढ़ाई करने यहां आई हूं! तुम मेरे नाम के साथ अपना नाम इस तरह से जोड़ दोगे तो मैं तुम्हारी डायरेक्ट कंप्लेन अपनी डीन से कर दूंगी। डीन से यह बात सीईओ मैडम तक पहुंची तो तुम्हें सीधे रस्टिकेट कर दिया जाएगा। अब तुम फोर्थ सेमेस्टर में रहो चाहे फिफ्थ सेमेस्टर में, तुम्हारी पूरी की पूरी पढ़ाई डब्बा हो जाएगी। समझ में नहीं आता  की तुम्हें कॉलेज में पढ़ाई करना है या बस हीरोगिरी करने आए हो। क्या इधर-उधर घूम घूम के लड़कियों को परेशान करना , सिर्फ यही काम है तुम्हारा।
मेरी सारी इमेज खराब कर दी । पता नहीं मेरे सीनियर क्या सोचेंगे कि कल कि आई जूनियर अफेयर चला रही है।
   देखो तुम होगे किसी रईस बाप की बिगड़ी औलाद , तुम्हारे लिए पढ़ाई करना एक शौक होगा। तुम्हें रुपए पैसे कमाने से कोई लेना-देना नहीं होगा लेकिन मैं ऐसी नहीं हूं। मैं हद दर्जे की मिडिल क्लास लड़की हूं। रुपए पैसों से भी और फैमिली वैल्यूज से भी।
    मैं इतनी मिडिल क्लास हूं कि मेरे विचार भी मेरे जैसे ही मिडिल क्लास हैं। मेरे लिए मेरा कैरेक्टर सबसे बड़ी बात है, मैं यहां सिर्फ और सिर्फ पढ़ने आई हूं । पढ़ाई करके मुझे एक अच्छा डॉक्टर बनना है। अपना क्लीनिक डालना है खूब पैसे कमाने हैं। अपने मम्मी पापा को खुश रखना है। उनके आज तक के जो सपने पूरे नहीं हो पाए उन्हें पूरा करना है। मेरे पास प्यार इश्क मोहब्बत करने के लिए बिल्कुल वक्त नहीं है।
    तुम सोच भी नहीं सकते कि तुमने मेरा कितना बड़ा नुकसान किया है। मैं माफी मांगती हूं मुझसे गलती हो गई कि मैंने रैगिंग से बचने के लिए आकर तुम्हें गलती से प्रपोज कर दिया और वह सिर्फ और सिर्फ रैगिंग थी उसके लिए मुझे माफ करो। और प्लीज मेरी जिंदगी से दूर हट जाओ।
   हो सके तो अब जब तक मैं इस कॉलेज में हूं मुझे अपनी शक्ल मत दिखाना । प्लीज तुम्हारे हाथ जोड़ती हूं, क्योंकि तुम मेरे लिए यह तो करोगे नहीं कि मेरे सारे सीनियर से जाकर यह बात कहो कि तुम जो भी कह रहे थे वह गलत था, झूठ था, मजाक था। पहले मेरी सारी सीनियर्स मैडम के सामने तुमने मेरी इमेज खराब की, बाद में मेरे सीनियर सर लोगों के सामने भी तुमने वही कर दिया। अब मेरे पूरे कॉलेज में सब मुझे तुम्हारी गर्लफ्रेंड समझ रहे हैं। जबकि ऐसा कुछ है नहीं और तुम शायद नहीं जानते प्रोफेशनल कॉलेज में कैरेक्टर बहुत ज्यादा मैटर करते हैं।
   तुम्हें शायद नहीं पता होगा लेकिन मेरे मार्क्स पर भी इस बात का असर पड़ेगा । मेरे प्रैक्टिकल मार्क्स तो ज़ीरो ही हो गए क्योंकि प्रोफेसर एक कैरक्टरलेस लड़की को कभी भी अच्छे मार्क्स नहीं देते।”

   बोलते बोलते रंगोली की आंखों से आंसुओं की धार बहने लगी झनक उसे संभाली हुई थी। और बार-बार शांत करवा रही थी लेकिन अभिमन्यु रंगोली के इस रूप को देखकर दिल से घबरा गया था। रंगोली के आंसू उसकी आंखें भिगो गए थे । उसने सोचा भी नहीं था कि जिस बात को वह आज तक इतना कैजुअल ले रहा था वो रंगोली के लिए इतनी बड़ी बात हो सकती है, उसने तुरंत अपने दोनों हाथ जोड़  दिए।

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“मुझे माफ कर दो रंगोली मैं तुम्हारे हर एक सीनियर से मिलकर माफी मांग लूंगा। और तुम बेहिचक पढ़ाई करो मैं अब तुम्हें कभी डिस्टर्ब करने नहीं आऊंगा।”

  अभिमन्यु अपनी आंखें पोंछता वहां से बाहर निकल गया अधीर भी उसके पीछे भागता चला गया।

  वह तो अच्छा था कि इस कैंटीन में ज्यादा भीड़ भाड़ नहीं थी और यह लोग दरवाजे पर ही टकरा गए थे इसलिए किसी ने भी इन लोगों पर ध्यान नहीं दिया लेकिन रंगोली को अब बस यही महसूस हो रहा था कि हर किसी की निगाहें उसी की तरफ़ है। उसने झनक का हाथ पकड़कर धीमे से कहा कि “अब मैं अंदर नहीं जा सकती मुझे वापस कमरे में जाना है” झनक उसकी हालत समझ गई थी इसलिए उसे साथ लेकर वह हॉस्टल वापस चली आई।

   लुटा पिटा सा अभिमन्यु भी अपने हॉस्टल पहुंच गया अधीर ने उससे खाने के लिए भी पूछा लेकिन अब उसकी भूख प्यास सब उड़ गई थी।
   उसने अपने कमरे का दरवाजा खोला तो देखा सामने सीपी सर बैठे हैं।
“सर आप यहां? मुझे बुला लिया होता।”

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“अब का कांड कर दिए हो मिसिर जी?”

“क्या बात हो गई सर मैं समझा नहीं?”

“मेडिकल में जाकर कुछ हंगामा किए हो भाई?”

“आपसे किसने कहा?”

“ऋषि खुराना की टीम सीईओ मैडम के पास गई थी! तुम्हारी शिकायत लेकर। बुलावा आया है, वाशिंग पाउडर के ऑफिस में।
      कल मैडम ने तुमको याद किया सुबह सुबह पहुंच जाना नौ बजे। हम भी चलेंगे तुम्हारे साथ हम जानते हैं तुम कुछ गलत काम तो कर नहीं सकते। पर यार थोड़ा तो सोचा करो निरमा मैडम के पास हम ही लोग गए थे यह फरियाद लेकर कि स्टूडेंट्स का अपनी परिधि को लांघना बंद करवा दीजिए। उन्होंने बंद करवाने की कोशिश शुरू की कि हमारा यह लड़का मेडिकल में पहुंच गया। “

अभिमन्यु को बीते दिन वाली सारी बातें याद आ गई और उसने अपने सर पर अपना हाथ मार लिया

“अब याद आया! तो वह साला इस चक्रव्यूह में फंसाने की बात बोल रहा था। उस कमीने को तो मैं देख लूंगा सिपी सर।”

“अरे हटाओ छोड़ो यार ! उसको तो हम एक साथ सब देख लेंगे, उसकी चिंता छोड़ो। फिफ्थ सेम के एग्जाम की डेट आ गई है। उस पर भी फोकस करो। इस बार तुम्हारा चांस है अगर इस बार टॉप कर लिए तो अगले सेमेस्टर बुक बैंक फ्री मिलेगा तुमको।

“यह बढ़िया बात बताएं सर आप। एग्जाम कब से हैं?”

“2 हफ्ते बाद की डेट आई है बेटा! कभी थोड़ा लाइब्रेरी के बाहर लगे नोटिस बोर्ड पर भी नजरें फिरा लिया कीजिए। वैसे तो आप दोनों बहुत ही ज्यादा व्यस्त रहते हैं! लेकिन अपने व्यस्त शेड्यूल से थोड़ा टाइम निकाल कर नोटिस बोर्ड पर भी नजर डाला कीजिए।”

  अभिमन्यु और अधीर झेंप कर इधर-उधर देखने लगे।
सीपी उठकर अभिमन्यु के बालों पर हाथ रख कर बाहर निकल गया दरवाजे से पलट कर एक बार फिर उसने अभिमन्यु को आवाज लगा दी…- घबराओ मत ऋषि खुराना की तो खबर हम सब मिल कर लेंगे! अभी फिलहाल कल जाकर मैडम के पैर पकड़ लेना कि तुम को सस्पेंड ना करें! 2 हफ्ते बाद एग्जाम हैं। इस बात की भी दुहाई दे देना जिससे तुम्हें माफ कर दें। आई बात समझ में?”

  अभिमन्यु ने झुक कर सीपी सर के पैर छू लिये। और सीपी  ने उसे ऊपर उठा कर अपने कलेजे से लगा लिया…-” छोटे भाई हो बे हमारे।’

******

   अगली सुबह निरमा के ऑफिस के बाहर अभिमन्यु इधर से उधर चक्कर काट रहा था कि तभी निरमा के ऑफिस का दरवाजा खुला और एक लंबे चौड़े डील डौल वाला स्मार्ट सा बंदा एक बच्ची का हाथ पकड़े बाहर निकल आया…
   हड़बड़ी में अभिमन्यु उससे टकराते टकराते बचा…-” सॉरी सर! वो ज़रा दिमाग घुमा हुआ है ना। इसलिए कुछ सूझ नही रहा और आपसे टकरा गए।”
” कोई बात नही। “
वो व्यक्ति आगे बढ़ने को था कि उस बच्ची ने अभिमन्यु के हाथ में थमा गुलाबों का बुके देख उसे पाने की ज़िद शुरू कर दी।
   और अभिमन्यु उस लड़की से बचाने के लिए गुलाब इधर उधर छुपाने लगा…
  ” नो मीठी! अभी यहाँ से चलो तुम्हें शाम में पापा रोज़ेज़ दिलवा देंगे।”
” आप भूल जातें हैं पापा।”


   उस व्यक्ति ने मुस्कुरा कर अभिमन्यु की तरफ देखा…-“तुम परेशान मत हो। जाओ अंदर मैं इसे सम्भाल लूंगा। “
  अभिमन्यु विनम्रता से दुहरा होता उसी आदमी से अपने मन की बात कहने लगा….
” ये असल में मैडम के लिए लेकर आया हूँ।”
  सामने खड़े आदमी की भौहें ज़रा तन गयीं। उसके चेहरे के भाव देख अभिमन्यु को लगा ये आदमी भी अंदर बैठी औरत से परेशान ही होगा , वो अपनी लय में कहता चला गया।
  ” क्या बताऊँ सर। इतनी कड़क हैं ये मैडम की आपकी गलती न भी हो तो भी आपको सॉरी बुलवा कर रहेंगी।”
   सामने खड़े उस आदमी ने अभिमन्यु का कंधा थपथपा दिया…-“समझ सकता हूँ। और ये बात मुझ से बेहतर कौन जानेगा।”
” सर इतनी स्ट्रिक्ट है मैडम की पहला तो इन्हें देखते ही हम क्या कहने आये थे वो भूल जातें हैं। दूसरा ये अपनी मीठी ज़बान से हमें ऐसे लपेटतीं हैं कि जो वो करवाना चाहतीं हैं फिर वही होता है।
   आप कितने पापड़ बेल लो होगा वही जो इन्होंने सोच रखा होगा। इन्हें कोई फर्क नही पड़ता की पढ़ने में कैसे हैं? आपके एम्बिशन क्या हैं? हम सब इनके लिए सिर्फ गधे हैं। बल्कि इन्हें यह लगता है कि इनके इस केबिन के बाहर हर कोई गांव है यह अकेली हिटलर है।
   हिटलर नहीं बल्कि यह तो मुझे तुगलक लगती है। बिना सर पैर के फरमान जारी कर दिया तो कर दिया। अब तुम फॉलो करते हो तो ठीक और अगर नहीं की तो तुम्हारा सर कलम कर दिया जाएगा।
   अच्छा सदियों से यह परंपरा रही है कि कितना भी खडूस राजा रहा हो,सर कलम करने से पहले आप की आखिरी इच्छा जरूर पूरी करने के लिए पूछता था। लेकिन यह ऐसी है कि आप की आखिरी इच्छा भी नहीं पूछेंगी सीधे खटाक।

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“बहुत सताए हुए लग रहे हो इनके।”

” क्या करें इनसे ज्यादा हम अपनों के सताए हुए हैं।अपने कॉलेज के लौंडो की मदद करने के चक्कर में बुरी तरह से फंसे बैठे हैं। पता है अंदर जाएंगे तो मैडम सूली पर चढ़ा ही देंगी।”

“एक बार बात करके देखो दोस्त ! हो सकता है तुम्हारी सुन ले।”

अभिमन्यु ने लाचारगी से ना में से सिर हिला दिया…

“अभी 2 दिन पहले तो इनसे बात करके गए हैं सर जी। कैंपस में इधर-उधर लड़के ना घूमे उसके लिए आकर बड़े प्यार से इन से बात की कि आर्ट्स एंड स्पोर्ट्स वाले लड़कों का इधर-उधर घूमना बंद करवा दें। वह लड़के वैसे भी वाहियात हैं। अब कल तो हम किसी काम से मेडिकल गए थे अब वहां के कुछ लड़कों ने आकर आग लगा दी! अब मैडम जी हमारे नाम से फतवा जारी कर चुकी हैं। हमें इसीलिए बुलवाया गया है कि हमारे नाम का सस्पेंशन लेटर हमारे हाथ में रख दिया जाए ,क्योंकि मैडम ने आदेश पारित कर दिया था। और वह आदेश भी ऐसा वैसा नहीं कि दो से तीन बार वार्निंग दी जाएगी फलाना ढिकाना। बल्कि आदेश यह था कि अब से अगर कोई भी लड़का किसी दूसरे कैंपस में नजर आया तो उसे तुरंत सस्पेंड कर दिया जाएगा। एक महीना के लिए। अब बोलिए 15 दिन बाद हमारे एग्जाम होने हैं। यह हमें सस्पेंड कर देंगी तो हम तो पूरा एक सेमेस्टर पीछे हो जाएंगे ना। “

“बात तो चिंता की है! पर तुम ऐसा करना, जाते साथ पहले मैडम से यह सारी बातें बोल देना। हो सकता है सुन ले, वैसे कभी-कभी सामने वाले की भी सुन लेती हैं। स्ट्रिक्ट तो हैं लेकिन अगर कोई अपनी सच्चाई पर अडिग रहे तो उसे माफ भी कर देतीं हैं।’

“पापा चलो न देर हो जाएगी। फिर मम्मी आपको डांट लगाएंगे कि मीठी को लेट करवा दिया।”

अभिमन्यु ने प्यार से उस बच्ची के सर पर हाथ फेरा और मुस्कुरा कर उसके पास झुक कर बैठ गया …-“हां बेटा जाओ घर पर आपकी मम्मी वेट कर रही होगी ना।”

“नहीं भैया! मम्मी तो अंदर बैठी हैं ।यह मम्मी का ही ऑफिस है। और स्कूल ले जाने के पहले पापा मुझे मम्मी से मिलवाने लाते हैं।”

   अभिमन्यु खट से खड़ा हो गया। उसने घबराते हुए सामने खड़े आदमी की तरफ देखा…-” आई एम सॉरी सर। मुझे पता नहीं था कि आप….”
    वह कहते कहते रुक गया कि प्रेम ने उसके सामने हाथ बढ़ा दिया…-” मैं प्रेम सिंह चंदेल हूँ। अंदर आपकी जो हिटलर मैडम बैठी हैं हमारी ही शरीक-ए-हयात हैं।
   और वैसे इतनी भी खडूस नहीं है वो। नाम क्या बताया तुमने अपना?”

“सर अभिमन्यु! अभिमन्यु मिश्रा मेकेनिकल 5th सेमेस्टर में पढ़ता हूं।”

“अरे जन्मकुंडली नहीं पूछी भाई । जाओ जाओ अंदर जाओ । मैडम ने ग्रीन बत्ती जला दी है।”

  अपने बालों पर हाथ फेरता झूमता हुआ सा अभिमन्यु निरमा की केबिन में दाखिल हो गया और प्रेम मीठी का हाथ  थामे उसके स्कूल के लिए निकल गया।

******

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    कैंटीन से लौटती रंगोली और झनक हॉस्टल पहुंचे कि देखा एक पुलिस की गाड़ी उनके कम्पाउंड में खड़ी है, और आसपास काफी सारी भीड़ भाड़ जमा हो रखी है।
    वो लोग भी धीमे से घुस कर भीड़ का एक हिस्सा हो गए। आसपास खुसफुसाहट चल रही थी,ध्यान लगा कर सुनने में भी कुछ समझ नही आ रहा था। झनक ने साथ खड़ी एक लड़की से ” माज़रा क्या है?”पूछ ही लिया।
  उसने जो बताया वो सुन कर रंगोली और झनक के होश उड़ गए।
    उन्हीं के हॉस्टल में किसी लड़की ने फंदे से लटक कर आत्महत्या कर ली थी……

क्रमशः

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aparna..

वापसी ….

समय के चक्र को घुमा कर रख देने वाली एक प्रेम कहानी…

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वो कितना कुछ कर रहा था खुद को संभालने के लिए। ऐसा लगने लगा था उसने यामिनी को नही अपने जीवन को खो दिया है। यामिनी की कही हर बात, उसकी मुस्कान, उसकी आंखें कुछ भी तो भुला नही पा रहा था। जब सब कुछ सही था तो यामिनी ऐसे उसे छोड़ क्यों चली गयी। वो खुद को ही मनाता समझाता रहता कि वो एक दिन वापस आएगी। ज़रूर आएगी।

हर वो जगह जहां वो यामिनी के साथ एक बार भी गया था छान आया। यामिनी का कोई दोस्त और सहेली नही बचे थे जिनसे उसने उसके बारे में पूछताछ न कि हो। यामिनी से जुड़ी हर चीज़ को उसने गले से लगा कर सम्भाल रखा था। पहले पहल लोग उस पर तरस खाते थे, उसे समझाने की कोशिश करते थे, लेकिन अब लोगों ने उससे और उसके पागलपन से कन्नी काटना शुरू कर दिया था।

वजह !!! वजह यही थी कि लोग अब उसे समझा कर थक चुके थे कि रागिनी मर चुकी है। उसका प्लेन 35000 फीट की ऊंचाई पर क्रैश हो चुका है। उसके अस्थि पंजर भी किसी को नसीब नही हो सकते….

लेकिन वो लोगों की कही बातों में भी उसे ढूंढ ही लेता था। और ऐसे ही एक दिन किसी की इस बात को की मरे हुए लोग वापस नही आते, उनसे मिलने के लिए खुद मरना पड़ता है , पूरा करने वो भी शहर की सबसे ऊंची पहाड़ी पर नीचे छलांग लगा कर मरने ही तो खड़ा था, कि किसी के कोमल हाथों ने उसे अपनी तरफ खींच लिया था।

वो भोर थी!! मानवविज्ञान की विद्यार्थी। जो जाने कब से उसके मोहपाश में बंधी खुद को ही भूल बैठी थी। और फिर उसने उसे बाहों में समेट लिया। जिस प्यार की तलाश में वो अपनी ज़िंदगी भूल बैठा था उसी ज़िन्दगी से उसे प्यार करना सीखा दिया भोर ने।

उसकी जिंदगी ने जैसे दूसरी करवट ले ली थी। भोर के साथ ने उसके जीवन में मधुमास वापस ला दिया था। अब उसके भी दिन रात चाशनी में भीगे बीतने लगे थे। दोनों ने शादी कर ली थी, और फिर भोर ने उसे उसकी जिंदगी का सबसे सुंदर तोहफा दिया था… उसका अपना बेटा।

ज़िन्दगी ऐसी खुशगवार भी हो सकती है, उसने नही सोचा था। देखते ही देखते तीस साल बीत चुके थे। आज वो खुद पचपन बरस की उम्र में अपने आप को कितना खुश और संतुष्ट पाता था और इसका एकमात्र कारण थी भोर। भोर वाकई उसके जीवन में सवेरा लेकर आई थी। अपने नाम के जैसे ही सुंदर, हालांकि अब तो उसके चेहरे पर भी उम्र के निशान नज़र आने लगे थे। माथे पर कुछ समय की लकीरें खींच गयीं थी और कनपटी और मांग पर के बालो में चांदी झलकने लगी थी, ये और बात थी कि वो हर पंद्रह दिन में बड़े करीने से अपने बालों को डार्क ब्राउन शेड्स से रंग लेती थी। पर कमर पर की परिधि, पेट के आसपास का बढ़ता वृत्ताकार घेरा उसे भी बावन का न सहीं अड़तालीस का तो दिखाने ही लगा था।

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आईने के सामने खड़े वो खुद भी तो अपनी कनपटी पर की सफेदी देख मुस्कुरा उठता था, और बालों की स्टाइल बदल बदल कर उन्हें छिपाने की असफल कोशिश में लग खुद ही ठठा कर हँस पड़ता था। आज भी इसी कोशिश में था कि दरवाज़े पर घंटी बजी। घंटी सुनते ही उसके चेहरे पर लंबी सी मुस्कान खेल गयी थी। आज ही उसके बेटे का पच्चीसवाँ जन्मदिन था, और आज ही उसे एक नई कंपनी में जॉइन करना था। वो ही घर वापस आया होगा ये सोच कर दिनकर दरवाज़ा खोलने आगे बढ़ गया।

दरवाज़ा खुला लेकिन सामने उसका बेटा नही यामिनी खड़ी थी। यामिनी !!! वही यामिनी, जिसके लिए वो कभी पागल हो चुका था। वही यामिनी जिसके लिए वो खुद को मारने जा रहा था। लेकिन ये तो सचमुच वही यामिनी थी। वही आज से तीस साल पहले वाली यामिनी। सिर्फ बाइस साल की यामिनी। पर ऐसा कैसे संभव है? गुलाबी टॉप और ब्ल्यू डेनिम में सीधे सतर बालों को दोनो तरफ के कंधों पर सामने रखे खड़ी वो वैसे ही मुस्कुरा रही थी जैसे उस दिन जब वो उसे प्लेन में बैठाने गया था…..

क्या ये सम्भव था ? या यामिनी किसी तूतनखामेन की ममी में अब तक सोई पड़ी थी जो जस की तस वापस लौट आयी थी।

मेरे प्यारे पाठकों , ये रही मेरी नई कहानी की छोटी सी झलक। ये कहानी भी मेरी बाकी कहानियों की तरह प्रेम कहानी ही होगी लेकिन बहुत सारे रहस्य और रोमांच से भरी इस कहानी का अंत कुछ अलग हट के होगा।

ये कहानी नवंबर में दीवाली के बाद शुरू होगी। और इसके भाग रोज़ आएंगे। एक और बात ये कहानी एक्सक्लुसिवली सिर्फ और सिर्फ मेरे ब्लॉग पर ही आएगी।

मुझे पढ़ने और सराहने के लिए आप सभी का दिल से शुक्रिया….

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यूँ ही…

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एक तारा भी नज़र आता नही मुम्बई के आसमान पर

यूँ कहने को मुम्बई सितारों की नगरी है…..

aparna ..

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मायानगरी -5

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मायानगरी – 5

      मेरे पास आओ मेरे
     दोस्तों एक किस्सा सुनो
       मेरे पास आओ मेरे
     दोस्तों एक किस्सा सुनो

    कई साल पहले की ये बात है
      बोलो ना चुप क्यों हो गए
         भयानक अंधेरी
        सी यह रात में
       लिए अपनी बन्दूक
             मैं हाथ में……

   ” अबे सालों बस सुनने आये हो क्या? साला आज कल के लड़कों को कोई तमीज ही नही है। हम सीनियर होकर हम ही गाना भी सुनाए। शर्म करो कुत्तों। ये मैं गुनगुना रहा था कमीने कान गड़ाए खड़े हैं।”

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     इंजीनियरिंग कैम्पस में कंप्यूटर साइंस के जूनियर्स को मैकेनिकल के सीनियर्स धरे बैठे थे कि कंप्यूटर वाले सीनियर्स वहीं चले आये…

” अरे सीपी यार इन लोगो को काहे दबोच रखे हो, हमारे वाले हैं ये। “

” निशांत यार हम भी जानते हैं । लेकिन देखो, शुरू से ही हमारे कॉलेज में फैकल्टी वाइज कभी फसाद नही हुआ। हम अगर तुम्हारे बंदों को रैंग करते है तो तुम्हे भी तो खुल्ली छूट है यार हमारे बंदों को नोचने की।

“भाई वो बात नही है यार। इस बार की बैच में ज़रा हाई फाई लड़के भी हैं। मैनेजमेंट कोटा खूब भरा है।”

” अरे तो क्या हुआ? मैनेजमेंट कोटा से आने वालों को क्या हम तमीज नही सिखाएंगे। भाई ये हमारी ही नैतिक जिम्मेदारी है कि लड़कों को लड़का बनाया जाए। अब स्कूल से ये क्या सिख पढ़ कर आते हैं। कुछ नही। सिर्फ होर्लिक्स पी लेने से टॉलर स्ट्रॉन्गर और स्मार्टर नही बना जाता। हम ही हैं जो इन टोडलर्स को चलना सिखाते हैं।
  कायदे से यही वो जगह है जहाँ इन जाहिलों को इंसान बनाया जाता है।”
  तभी सीपी की नज़र एक जूनियर पर पड़ी जो थर्ड बटन से सर ऊपर कर के देखने की कोशिश कर रहा था कि सीपी का जोरदार तमाचा उसके चेहरे को लाल कर गया।
   जोश ही जोश में तमाचा इतना ज़ोर का पड़ा की लड़का घूम कर ज़मीन पर गिरा और बेहोश हो गया…

  वहीं चबूतरे पर बैठे अभिमन्यु और बाकी लड़के भी भाग कर देखने चले आये।
  लड़कों में हड़कंप मच गया। कम्प्यूटर वाले लड़के डर के मारे अपनी बिल्डिंग को खिसक लिए। सीपी को लगा नही था कि उसका पंजा ऐसा फौलाद का है। आश्चर्य से वो कभी उस बेहोश जूनी को तो कभी अपने हाथ को देख रहा था कि अभिमन्यु ने लड़के को उठाया और अपने कंधे पर डाल मेडिकल की तरफ भाग चला।
   अधीर भी उसके पीछे हो लिया।

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   लंबा चौड़ा अभिमन्यु उस नाजुक दुबले पतले से जूनियर लड़के को कंधे पर लिए बिल्कुल साक्षात सती को कंधो पर लिये महादेव सा चला जा रहा था।

  मेडिकल में गेट पर  से घुसते ही बायीं ओर कॉलेज का हॉस्पिटल था। अभि उसी तरफ निकल गया…

“ला यार थोड़ी देर मैं भी पकड़ लूँ। “

  अधीर के इस प्रोपोजल के आते में ही मेडिकल कैम्पस में खड़ी स्ट्रेचर लिए वार्डबॉय भागा चला आया…

” क्या हुआ है लड़के को? “

  डॉक्टर के सवाल पर अभिमन्यु ने ही जवाब दिया..

” बेहोश हो गया है। “

” वो तो दिख रहा है। बेहोश कैसे हुआ? “

  अभि और अधीर एक दूसरे को देखने लगे। डॉक्टर के सामने ये बताना कि रैगिंग में पड़े थप्पड़ ने ये हाल किया है महंगा पड़ सकता था।

” इसने ब्रेकफास्ट नही किया था डॉक्टर!”

ड़ॉक्टर ने अजीब सी नज़रों से अभि को घूर कर देखा और लड़के को साथ लिए अंदर चला गया।

  अभी और अधीर के पीछे सीपी और उसके 1-2 चेले भी भागते हुए मेडिकल चले आए। सीपी और चेले वहीं बाहर बैठ गए।

   अभि और अधीर इधर उधर भटकते उस लड़के के होश में आने का इंतज़ार कर रहे थे कि कहीं से मधुर सी गाने की आवाज़ चली आयी। दोनों उसी दिशा में बढ़ चले…

  मेडिकल प्रथम वर्ष के छात्रों का आज अस्पताल विज़िट करने का पहला दिन था और आज ये नन्हे-मुन्ने बच्चे रेजिडेंट डॉक्टर्स के हत्थे चढ़ गए थे।
   असल में इन्हें इनके कुछ सीनियर्स ने अस्पताल की ओपीडी से कुछ आवश्यक सामान लाने का बेइंतिहा गैरजरूरी काम दिया था।
   इसी चक्कर में ये चार पांच लड़के लड़कियां यहाँ फंस गए थे।
वैसे रेजिडेंट डॉक्टर्स इतना व्यस्त होते थे कि वो जूनियर्स की रैगिंग लेते नहीं थे। लेकिन पिछले दिन की हेक्टिक शेड्यूल की थकान उतारने के लिए आज उनके पास जूनियर्स नाम का एंटरटेनमेंट मौजूद था। और बस इस एंटरटेनमेंट की बहार देखते हुए रेजिडेंट डॉक्टरों का भी उ ला ला करने का मन करने लगा।
  डॉक्टर्स ड्यूटी रूम में इन जूनियर्स की रैगिंग चल रही थी।
  इत्तेफाक से रंगोली ही उस रैगिंग की सबसे पहली शिकार बनी थी। सीनियर से उसे गाना सुनाने को कहा था और वह अपने गले को साफ कर गाना शुरू कर चुकी थी।

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देख लो हमको करीब से
आज हम मिले हैं नसीब से
     यह पल फिर कहां
    और यह मंजर फिर कहां
  गजब का है दिन सोचो जरा
   यह दीवानापन देखो जरा
तुम भी अकेले हम भी अकेले मजा आ रहा है कसम से…..

   कमरे के ठीक बाहर खड़े अभिमन्यु और अधीर के कानों तक भी यह स्वर लहरी पहुंच चुकी थी। आवाज का नशा अभिमन्यु पर ऐसा छाया कि बेहोशी के आलम में उसने दरवाजा धीरे से खोल दिया…
उसके दरवाजा खोलते ही सारे सीनियर्स अपनी जगह से उठकर खड़े हो गए। जूनियर्स पहले ही खड़े थे जो थर्ड बटन में थे   वह लोग भी दरवाजे की तरफ देखने लगे । अभिमन्यु और अधीर को ऐसे सामने खड़े देख एक सीनियर रेजिडेंट ने उन लोगों से पूछ लिया…-” आप लोग कौन हैं यहां क्या कर रहे हैं?”

“हम इंजीनियरिंग के हैं ,एक मरीज लेकर आए थे।”

“मरीज लेकर आए थे? क्या हुआ तुम्हारे मरीज को?”

“जरा चक्कर आ गया था।”

“हां तो ठीक है! लेकिन यहां क्या कर रहे हो? मरीज को भर्ती करवा दिया है ना ड्रिप चढ़ेगी शाम तक बंदा अपने पैरों पर चलकर इंजीनियरिंग कैम्पस वापस आ जाएगा इसलिए अब  फुटो यहां से।”

अभिमन्यु ने रंगोली को देखा रंगोली ने अभिमन्यु को और अभिमन्यु के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कुराहट आ गई!  पास खड़ी झनक ने रंगोली को तुरंत कोहनी मारी….-” देख आखिर तेरा पति  तुझे ढूंढता यहाँ तक चला आया।
“चुप कर बकवास मत कर।”
रंगोली  जितना धीमा बोल सकती थी उतना धीमा बोली लेकिन उसने इतना धीमा बोल दिया कि पास खड़ी झनक तक को सुनाई नहीं दिया और झनक ने इतनी जोर से “क्या” कहा कि सारे रेजीडेंट डॉक्टर उन दोनों को देखने लगे।

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  उसी वक्त बाहर से गुजरते मृत्युंजय की नजर डॉक्टर्स ड्यूटी रूम पर पड़ गई। वह अभिमन्यु और अधीर को हाथ से हटा कर दरवाजे से भीतर चला आया…-” क्या हो रहा है यहां पर?”
सारे जूनियर रेजीडेंट डॉक्टर घबराकर एक तरफ खड़े हो गए …-“कुछ नहीं सर! वह बस जरा यह फर्स्ट ईयर जूनियर्स हैं इन्हें एनाटॉमी पढ़ा रहे थे।”
“एनाटॉमी पढ़ाना है, तो लैब में पढ़ाया करो। यहां बिना बोन और बिना किसी ऑर्गन के तुम लोग एनाटॉमी कैसे पढ़ा रहे हो?”
मृत्युंजय ने जूनियर की तरफ देखा और उन्हें वहां से जाने की इजाजत दे दी।

  उस कमरे से बाहर निकलते ही जूनियर्स ने चैन की सांस ली… -“यहां तो यार हर मोड़ पर आतंक छाया हुआ है! वह गाना आज मेरी समझ में आ रहा है, यहाँ रोज-रोज हर मोड़ मोड़ पर होता है कोई ना कोई हादसा।  बस उन्हीं हादसों का अड्डा है हमारा कॉलेज। क्लास में बैठते हैं तो फँस जाते हैं। लैब में जाते हैं तो फँस जाते हैं। हॉस्पिटल आते हैं तो भी फँस जाते हैं। जहां देखो वहां सीनियर का आतंक है। आखिर कब बच पाएंगे हम लोग।”
   झनक की बात पर साथ चल रहा लड़का राहुल हंसने लगा…-” तुम लोग तो फिर भी लड़कियां हो यार! तुम बच जाती हो, हम लोगों के साथ हॉस्टल में भी इतनी ज्यादा अति होती है कि हम बता नहीं सकते।”
  “प्लीज बता ना क्या रैगिंग होती है तुम लोगों के साथ।”
  ” चुप कर! नहीं बताना।”
“अरे ऐसा क्या करते हैं भई सीनियर बता ना प्लीज।”
“होती है बॉयज वाली रैगिंग! जैसे तुम्हारी गर्ल्स प्रॉब्लम तुम हमसे शेयर नही कर सकती, हम भी नही कर सकते ।”
” बड़ा आया। मत बता।”
   वो लोग बातें करते अगर बढ़ ही रहे थे कि पीछे से उन्हें आवाज़ लगाते अभिमन्यु और अधीर चले आये…
” एक्सक्यूज मी गाइज़! आप लोग मेडिकोज हैं?
   अभिमन्यु के सवाल पर रंगोली के अलावा बाकी लोगों ने उसे घूर कर देखा..-” हां जी आपको क्या प्रॉब्लम है?”
“नो नो! कोई तकलीफ नहीं है । एक्चुली मैं कुछ जानना चाहता था मेडिकल टर्म्स में।”
राहुल ने उसे बिल्कुल ही हिकारत भरी नज़रों से घूर कर देखा।
” भाई मेरे! ऐसे घूर कर मत देख! मैं भी कोई ऐवें नहीं हूं। इंजीनियरिंग कर रहा हूं, मेकेनिकल से। और उम्र के लिहाज से देखा जाए तो तुम सबसे दो-तीन साल बड़ा ही हूंगा। और प्रोफेशनल कॉलेज के हिसाब से देखा जाए तो यूनिवर्सिटी सीनियर हूं तुम्हारा।”
अबकी बार जवाब राहुल की जगह अतुल ने दिया…-” जी कहिए क्या पूछना है आपको।”

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“दोस्त कहीं आराम से बैठ कर बात कर सकते हैं । ज़रा सीरियस मुद्दा है।”
“ओके बाय गाइज़। तुम लोग बैठ कर बातें करो मैं और रंगोली चलते हैं।” झनक रंगोली का हाथ थामे आगे बढ़ने लगी कि अभिमन्यु उन दोनों के सामने अचानक से जाकर खड़ा हो गया….-” अरे मैडम! प्लीज रूके ना आप चार डॉक्टर रहेंगे, तो मेरी समस्या को आप लोग आसानी से समझ कर सुलझा सकते हैं । आप मेडिकल की पढ़ाई करने आई हैं। आप लोगों का तो पेशा ही है लोगों के दुख दर्द सुनना।”
   झनक ने एक नजर अभिमन्यु को देखा और हां में सर हिला दिया।
   रंगोली का वहां रुकने का बिल्कुल मन नहीं था वह झनक का हाथ पकड़े बार-बार उसके हाथ पर दबाव बनाती वहां से निकल चलने की गुजारिश कर रही थी।
    उन चारों डॉक्टरों के साथ अभिमन्यु और अधीर मेडिकल कैंटीन में पहुंच गए।
  वह चारों अभी फर्स्ट ईयर में थे इसलिए कायदे से उन्हें कैंटीन जाना अलाउड नहीं था। और यह बात उन चारों को मालूम नही थी, अनभिज्ञता में वह चारों अभिमन्यु के साथ कैंटीन में प्रवेश कर गये।
   कैंटीन में काम करने वाला लड़का झाड़न अपने कंधे पर लटकाए उन तक चला आया…-‘ फर्स्ट ईयर के लगते हो आप लोग।”
  झनक ने उसे घूर कर देखा…-” हां तो!”
“तो यह कि अगर सीनियर्स ने देख लिया कि फर्स्ट ईयर में वेलकम पार्टी मिले बिना आप लोग कैंटीन चले आए हो तो…?”
“तो क्या बे? हम लोगों को सिखा रहा है!” अबकी बार राहुल उलझ पड़ा।
“मैं क्या सिखाऊंगा? आप लोगों को रात में वह सामने पीपल पर लटकी उल्टी चुड़ैल सब कुछ सिखा देगी।”
“अरे गुरु घंटाल! यह लोग खुद से नहीं आए मैं इन लोगों को लेकर आया हूं! और मैं फिस्थ सेमेस्टर में हूं यानी कि सीनियर बन चुका हूं यूनिवर्सिटी का । और यूनिवर्सिटी के हर कैंटीन में हमें जाना अलाउड है, आई बात समझ में।”

अजीब सा मुहँ बनाकर उनके टेबल पर झाड़न मार कर वह लड़का जाने लग गया….-” अबे जाते-जाते ऑर्डर तो ले जा।”
“क्या लोगे आप लोग?” उसने एक नजर सब को घूर कर फिर पूछा….
” तेरे यहां का सबसे स्वादिष्ट व्यंजन क्या है ?”
“इस वक्त सिर्फ मैगी और सैंडविच मिलेगा।”
“और पीने के लिए ?”
   अभिमन्यु ने मुस्कुराते हुए पूछा…
” आप जो पीते हो वो कतई नही मिलेगा।
उस लड़के ने एक नज़रअभिमन्यु को देखा और अपनी ही कही बात संभाल ली…-” स्ट्रौबरी शेक।”
अभिमन्यु का मुंह बन गया उसने कहा …-“इन चारों के लिए वही ले आ।”
“अब बोलो? कौन सी  मेडिकल इमरजेंसी के बारे में पूछना था तुम्हें? झनक के सवाल पर अभिमन्यु मुस्कुराने लगा।
“अबे ओए टॉम क्रूज दांत बाद में दिखाना पहले फटाफट बता तेरी प्रॉब्लम क्या है ?” अबकी बार राहुल लपका
“वह प्रॉब्लम यह है कि मेरा एक दोस्त है उसकी याददाश्त जरा गुम होने लगी है! सुबह ब्रश किया है कि नहीं उसे कुछ याद नहीं रहता।  कई बार रात में सोता है लेकिन सुबह उठने पर फिर कहता है मैं तो रात भर सोया ही नहीं। नहा कर आता है, और फिर नहाने चला जाता है। खाने का तो पूछो ही मत जितनी बार दे दो हर बार खा जाता है। क्योंकि वह यही भूल चुका होता है कि वह खा चुका है। और तो और कई बार यह भी भूल जाता है कि वह सुसु पॉटी करके आ चुका है। इस प्रॉब्लम का इस समस्या का कोई समाधान है आप लोगों के पास डॉक्टर?”
“अबे यार कौन है यह नमूना? “
अभिमन्यु ने अधीर की तरफ इशारा कर दिया अधीर ने उसे घूर कर देखा और अपनी जगह से खड़ा हो गया…
” शरमा गया बेचारा। क्या है ना ऐसी समस्या है कि बाहर किसी से डिस्कस नहीं कर सकते, आप लोगों को देखकर लगा जैसे दिल से आपसे रिश्ता है। इसीलिए आपसे यह तकलीफ कह गया।”

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    अभिमन्यु अपनी बात कहते हुए रंगोली को देखता रहा। रंगोली ने घबराकर पलके नीचे कर ली। वह झनक का हाथ इतनी जोर से पकड़ी हुई थी, कि अब झनक को हाथ में दर्द होने लगा था। झनक अपनी जगह से खड़ी हो गई…-” चल रंगोली अब हम वापस जाते हैं हॉस्टल के लिए लेट हो रहे हैं।’
   वह दोनों वहां से निकलने को ही थी कि चार पांच सीनियर लड़कों की टोली उनका रास्ता रोक खड़ी हो गयी…
” फर्स्ट ईयर? “उनमें से एक ने कड़क कर पूछा।
“यस सर!” मिमियाती सी आवाज़ में राहुल ने जवाब दिया
” वेलकम पार्टी के पहले कैंटीन जूनीज़ के लिए अलाउड नही है। तुम लोगो को मालूम नही था।”
” वी आर सो सॉरी सर। हमें वाकई मालूम नही था। “
” अच्छा बेटा! और फर्स्ट मन्थ में ही तितलियों को लेकर कैंटीन घूम रहें हो। “
  रंगोली के लिए तितली सम्बोधन सुन अभिमन्यु का खून खौल उठा…-“माइंड योर लैंग्वेज, व्हाटएवर इस योर नेम? “
” तू कौन है बे? बीच में बोलने वाला? मेडिको तो नही है!”
” मेकेनिकल इंजीनियरिंग थर्ड ईयर का स्टूडेंट हूँ,नाम अभिमन्यु है। “
” तो बेटा अभिमन्यु तेरे गुर्दो में दर्द क्यों हो रहा जब हम अपने बच्चों को डांट रहे। “
” डाँटो लेकिन तमीज से। अगर गर्ल्स के लिए कोई बदतमीजी करोगे तो मैं सहन नही करूँगा। “
” क्यों बे तेरी सेटिंग है क्या ये। ” उसने रंगोली की तरफ इशारा किया..
” हां है। और आज के बाद इसे परेशान किया तो नाम याद रख लेना अभिमन्यु से बुरा कोई नही होगा।”
  अभिमन्यु उसे धमका कर निकल गया,अधीर भी उसके पीछे गिरता पड़ता भाग गया।
   इतनी सारी बहस के बीच पीछे खड़े सीनियर्स के इशारे पर वो सारे जूनियर्स भी वहाँ से खिसक लिए।
” वेलकम बेटा अभिमन्यु! मेडिकल के चक्रव्यूह में तुम्हारा स्वागत है। जानते नही हो तुम, तुम्हारा पाला ऋषि खुराना से पड़ा है।”
   खून का घूंट पीकर ऋषि खुराना भी अपनी गैंग के साथ निकल गया।

   वहीं पीछे एक सबसे किनारे की टेबल पर गौरी बैठी अपनी नोटबुक में कुछ लिख रही थी।
  उसकी एकमात्र खास सहेली प्रिया किसी काम से स्टाफ रूम गयी थी। उसी का इंतज़ार करती गौरी अपनी नोटबुक खोली बैठी थी कि तभी विधायक नारायण दत्त का लड़का वेदांत वहाँ अपनी टोली के साथ चला आया।
   यही वो लड़का था जिसके इधर उधर तफरीह करने से परेशान सीपी सर अभिमन्यु और बाकियों को लिए निरमा से मिलने गए थे।
   कैंटीन में सारे टेबल भरे थे। गौरी के सामने तीन कुर्सियां खाली पड़ी देख वेदांत ने एक कुर्सी पकड़ कर पीछे खींची और बैठने को था कि मृत्युंजय आकर उस कुर्सी पर बैठ गया।
    मृत्युंजय ने वेदांत को देख उसे थैंक्स बोला और गौरी की तरफ देखने लगा।
  गौरी वेदांत के व्यवहार को देखते हुए अचरज में थी कि मृत्युंजय आ गया और उसे देख गौरी के चेहरे पर सुकून लौट आया।
   उन दोनों को एक दूसरे को देखते देख वेदांत वहाँ से हट गया कि तभी उसके एक चेले ने उसे आवाज़ लगा दी…-” गुरु यहाँ टेबल खाली है। आ जाओ।”
   एक नज़र गौरी को घूर कर वेदांत आगे बढ़ गया…

“, थैंक यू सर। आप हमेशा मेरी परेशानी में मेरा साथ देने खड़े रहते हैं।”
” इट्स माय प्लेजर गौरी। और बताओ कैसी हो तुम?”
“ठीक हूँ । अभी एक हफ्ते से मेडिसिन बंद की है। और मुझे नींद भी सही या रही है।”
” इट्स गुड! लेकिन एकदम से विड्रॉ नही करेंगे। धीरे धीरे ही मेडिसिन छोड़ना।”

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” जी सर। “
” कॉफी लोगी? “
गौरी ने हाँ में सिर हिला दिया…
दोनो साथ बैठे कॉफी पीते इधर उधर की बातें करते रहे।
     जय के साथ होने पर गौरी के चेहरे पर काफी समय बाद मुस्काने लौटने लगीं थीं…..

क्रमशः

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aparna…

खुरापातें….

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Son :- मॉमा s e r लिखुँ या s r e ? सर की स्पेलिंग के लिए?

मॉम:- sir …..😡😡😡

#online classes rocks

#kids rockstars…

Originally mine u can share it…😂😂

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aparna …

कुछ खुरापातें…

She posted a ‘roti aloo ki sbji and dal ki thali ” photo on her wall and wrote …

Friday lunch….

खुरापाती ख्याल आया कि लिख दूँ

–चल finally तुझे खाना तो मिला।

पर मन की मन में रह गयी,नही लिख पायी, संस्कार बहुत है न मुझमें।

Next day she again posted her photo and wrote .. gain half kg after eating my favorite panipuri…

एक और खुरापात आई दिमाग में …

अच्छा हुआ बहन कुछ तो गेन किया वरना जिस ढंग से तू डाइट कर के पतली हो रही है, यूनेस्को वाले तुझे देख हमारे यहाँ अकाल न घोषित कर दें।

पर कह नही पायी क्योंकि संस्कार बहुत है ना मुझमें।

बहुत नाइंसाफी है…

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मनचाहा पति पाने के लिए –
हरतालिका, तीज, करवाचौथ, सावन सोमवार, शिवरात्रि व्रत आदि।।

और मनचाही पत्नी पाने के लिए —
CAT, UPSC, NEET, GRE, GMAT आदि।।

बहुत नाइंसाफी है ।।।

🤔🤔🙄🙄

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टायफाइड – लक्षण और उपचार

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टायफाइड:—

    टाइफाइड एक बैक्टीरिया से फैलने वाली  ऐसी बीमारी है जो ज्यादातर दूषित पानी और दूषित भोजन के कारण मनुष्य की आंतों में असर कर पूरे शरीर में लक्षणों को उत्पन्न करती है। टाइफाइड मुख्य रूप से एक तरह का ऐसा बुखार है जो कि बैक्टीरिया के संक्रमण से उत्पन्न होता है।
    टाइफाइड की उत्पत्ति में कारक है सालमोनेला टायफिमयूरीयम।
सालमोनेला पैराटायफी भी टाइफाइड की उत्पत्ति में सहयोगी बैक्टीरिया है।

    मुख्य रूप से बाहर के खाने पीने दूषित जल संक्रमित भोज्य पदार्थ आधे पके भोज्य पदार्थ, सड़े और पर्युषित खाने से टाइफाइड की उत्पत्ति होती है। टाइफाइड का बैक्टीरिया मनुष्य की आंत में संक्रमण उत्पन्न कर मुख्य रूप से पेट से संबंधित लक्षणों को उत्पन्न करता है। इंफेक्शन बढ़ने पर मनुष्य में सर्व शरीर गत लक्षणों की उत्पत्ति होती है, जिनमें मुख्य रुप से बुखार आना सिर में दर्द बना रहना सारे शरीर में दर्द बना रहना आदि प्रमुख लक्षण  हैं।

    टाइफाइड का इनक्यूबेशन पीरियड लगभग 1 से 2 सप्ताह है जब की बीमारी की अवस्था तीन से 4 सप्ताह तक बनी रहती है।

    टाइफाइड के लक्षण सामान्यता दवा शुरू करने के बाद 3 से 5 दिन में समाप्त हो जाते हैं कभी-कभी किसी केस में यह लक्षण 2 से 3 सप्ताह तक भी पाए जाते हैं ।
    सही चिकित्सा और पथ्य अपथ्य के अभाव में बहुत बार लक्षणों में जटिलताओं की उत्पत्ति होने के कारण टाइफाइड पलट कर दोबारा हो जाता है। बहुत बार एंटीबायोटिक का कोर्स करना टाइफाइड में जरूरी होता है कोर्स कंप्लीट नहीं करने पर भी टाइफाइड दुबारा पलटकर हो सकता है। टाइफाइड को गंभीर बीमारी माने जाने का मुख्य कारण यही है कि अगर पूरी तरह से बैक्टीरिया का सफाया ना किया जाए तो यह बार-बार होने वाली बीमारी में से एक है जो कि आगे चलकर आंतों को कमजोर कर देता है। इसीलिए टाइफाइड के लिए कहा जाता है कि बीमारी से बचाव अधिक कारगर है। टाइफाइड से बचाव आसान है पानी उबालकर पीना, साफ सफाई रखना और शुद्ध और गर्म भोज्य पदार्थों का सेवन करना हमेशा टाइफाइड से सुरक्षा का कारण बनता है।

  टाइफाइड के लक्षण:–

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बुखार या ज्वर टाइफाईड का सर्वप्रमुख लक्षण है।

-जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता जाता है वैसे-वैसे ही भूख भी धीरे-धीरे कम होती जाती है।

-टाइफाइड से ग्रस्त रोगी को सिर दर्द होता है।

-शरीर में दर्द का बने रहना, वेदना होना।

-ठण्ड तथा कंपकपी  की अनुभूति होना।

– शरीर में सुस्ती एवं आलस्य का अनुभव होना।

-शरीर में कमजोरी का बने रहना।

•- दस्त होना।

•-उल्टी होना।

कब जाने कि रोगी को डॉक्टर के पास जाना चाहिए?

टाइफाइड के रोगी को अगर बुखार लगातार बना हुआ है, सर में दर्द है खाने का मन नहीं करता तो ऐसे में रोगी को बिना देर किए डॉक्टर के पास चले जाना चाहिए । क्योंकि टाइफाइड का इन्फेक्शन बहुत देर तक आंतों में रहने पर आंत्रशोथ की स्थिति उत्पन्न करता है ऐसे में आंतों में घाव बनकर छेद हो जाते हैं यह टाइफाइड की वह गंभीर स्थिति है जिसमें मल त्याग के समय रोगी को कई बार रक्तस्त्राव भी हो सकता है। यह स्थिति आगे चलकर कई विषमताओं को उत्पन्न करती है, इसलिए समय रहते टाइफाइड के रोगी को लक्षणों के नजर आते ही डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

टाइफाइड एक ऐसी बीमारी है जिसमें चिकित्सा से बेहतर बचाव है आइए जानते हैं टाइफाइड के बचाव के उपायों के बारे में:–

खान पान में बदलाव कर:–

हमेशा हल्के और सुपाच्य आहार का सेवन करें।

ताजा और गर्म भोज्य पदार्थ ही सेवन करें

पानी उबालकर पिए अथवा फिल्टर कर अथवा बोतलबंद पानी का या केमिकल युक्त पानी का सेवन करें।

डिब्बाबंद भोज्य पदार्थ, बाहर की खाने-पीने की वस्तुएं, तथा बासी भोजन पदार्थों का सेवन ना करें।

अत्यधिक प्याज लहसुन आदि तेज गंध युक्त भोज्य पदार्थ अधिक मसालेदार अधिक तैलीय चटपटा मिर्च मसालेदार सिरका युक्त भोज्य पदार्थों का त्याग करे।

मांसाहार के सेवन से दूर रहें।

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पचने में भारी और गरिष्ठ सब्जियां और फल जैसे अनानास कटहल आदि का प्रयोग कम करें।

देर से पचने वाले आहार ओं का सेवन कम करें और अत्यधिक पेट भर कर कोई भी चीज ना खाएं

शराब सिगरेट चरस गुटका तंबाकू पान इत्यादि का सेवन न करें।

अन्य सावधानियां:–

भोजन से पहले हमेशा हाथों को गर्म पानी से धोएं।

खाने से पहले फलों और कच्ची सब्जियों को धोकर ही खाएं।

हमेशा साफ पानी का प्रयोग ब्रश करने चेहरे और हाथों को साफ करने तथा सब्जियों फल आदि को धोने के लिए करें।

कैसा भोजन करें:–

टाइफाइड में क्योंकि रोगी के शरीर में डिहाइड्रेशन के कारण बहुत बार कमजोरी पैदा हो जाती है इसलिए उस कमजोरी को दूर करने के लिए उच्च कैलोरी युक्त उच्च कार्बोहाइड्रेट से भरपूर भोजन को सम्मिलित करना चाहिए। इसके साथ ही शरीर में हुई जल धातु की कमी को पूरा करने के लिए तरल वस्तुओं का प्रयोग करना चाहिए। जैसे पतली खिचड़ी, फलों के रस ,सब्जियों के सूप इत्यादि के प्रयोग से रोगी के शरीर से हुई तरल की कमी को पूरा किया जा सकता है। टाइफाइड के रोगी को रोग से उठने के बाद उच्च मात्रा में डेरी प्रोडक्ट दूध दही पनीर अंडे अर्थात उच्च प्रोटीन का भी सेवन करना चाहिए।

  ओमेगा 3 फैटी एसिड से युक्त आहार शरीर में उत्पन्न सूजन को कम करने में सहायक होते हैं। टाइफाइड बुखार से होने वाली हानि को सही करने के लिए सही मात्रा में खनिज इलेक्ट्रोलाइट और ओमेगा 3 फैटी एसिड की भी आवश्यकता होती है।

टायफाइड की चिकित्सा:

   टाइफाइड बुखार की चिकित्सा मुख्य रूप से संक्रमण को रोककर या एंटीबायोटिक दवाओं द्वारा संक्रमण के उपचार को करके की जाती है।
   टाइफाइड संक्रमण को रोकने के लिए दी जाने वाली एंटीबायोटिक दवाइयों के नाम हैं 1)अमाक्सीसिलिन
2)एंपीसिलीन
3)क्लोरेंफेनीकोल
4)ट्राइमेथोप्रिम
5) सल्फेमेथाक्साजोल इत्यादि….

अगर रोगी दवाओं के साथ भोजन करने में समर्थ है तो तरल पदार्थों खिचड़ी फलों का जूस इत्यादि का सेवन दवाओं के साथ करवाना उचित रहता है। किंतु कई अन्य रोगी इस तरह के होते हैं जिनमें उल्टी की समस्या बहुत अधिक होती है ऐसे में वह मुख द्वारा कोई भी दवा लेने में अक्षम होते हैं ऐसे रोगियों को एन एस फ्लूइड पर रखकर इंजेक्टबल दवाओं का प्रयोग किया जाता है बहुत सारे उपद्रव से ग्रस्त टाइफाइड के रोगी में बहुत बार पित्ताशय की थैली सर्जरी करके निकालनी भी पड़ सकती है।

टायफाइड की रोकथाम :–

टाइफाइड से सुरक्षा का सर्वश्रेष्ठ उपाय है स्वच्छता के नियमों का पूर्ण पालन करना।

1) भोजन पकाने हेतु और फलों और सब्जियों को धोने के लिए सदा साफ और बहते जल का प्रयोग करें।

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2) घर पर पानी के जिस बर्तन में पानी को स्टोर किया जाता है हमेशा ढक कर रखें।

3) पीने के पानी को हो सके तो हर मौसम में उबालकर पीएं अथवा कम से कम बारिश के मौसम में उबालकर ही प्रयोग में लाएं ।

4)वाटर फिल्टर का प्रयोग भी किया जा सकता है।

5) भोज्य पदार्थ हमेशा गर्म और तुरंत पकाए हुए ही प्रयोग करें पर्युषित सड़ा गला अधपका खाना ना खाएं।

6) बाहर के भोज्य पदार्थों को चाट के ठेले गली नुक्कड़ के भुज पदार्थों को खाना अवॉइड करें।

7) घर पर पानी के निर्गमन और संधारण का प्रबंध स्वछता पूर्वक करें ।

8)भोजन बनाने वाले बर्तनों की सफाई पर भी उचित

ध्यान रखें।

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9) खाना हमेशा हाथ धोकर खाएं.. शौच के पश्चात घर में बाहर कहीं से आने के पश्चात और भोजन से पूर्व तथा भोजन के पश्चात हमेशा हाथ किसी मेडिकेटेड सॉप से धोना सुनिश्चित करें।

10) समय-समय पर हैंड सैनिटाइजर का प्रयोग भी करें।

11) टाइफाइड के लिए टीका भी उपलब्ध है जो लगभग 2 वर्षों तक प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखता है टीके का प्रयोग करके भी टाइफाइड से बचा जा सकता है।

टायफाइड में घरेलू उपाय:–

कई अन्य ऐसे घरेलू उपाय हैं जिनके प्रयोग से टाइफाइड से बचा जा सकता है यह उपाय निम्न है:–

1) फलों का रस:– मौसमी फलों का जूस निकालकर टाइफाइड के रोगी को दिया जा सकता है संतरा मोसंबी अनार आदि के जूस टाइफाइड में शरीर में होने वाली तरल की हानि को दूर करते हैं।

2) सेब का रस:– सेब के रस में समान मात्रा में अदरक का स्वरस मिलाकर रोगियों को देने से पद्य का कार्य करता है।

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3) तुलसी :– आयुर्वेद के अनुसार तुलसी पत्र स्वरस का प्रयोग भी किया जाता है।

4)लौंग:– आयुर्वेद के अनुसार लौंग का ताजा निर्मित क्वाथ भी टाइफाइड में दिया जाता है। इसमें लगभग 2 गिलास पानी में 4 लौंग डालकर इसे इतना उबालना है कि वह एक चौथाई शेष रह जाए तब  इसका पान करना है।
    सुबह और शाम समान मात्रा में एक कप लौंग का पानी अत्यधिक फायदेमंद है।

5) शहद :– गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर रोगी को दिया जा सकता है।

6 ) लहसन ;– आयुर्वेद मतानुसार 6 से 7 कच्ची लहसुन को कुचलकर लहसुन कल्क बनाकर सेंधा नमक के साथ मिलाकर टाइफाइड के रोगी को बुखार में दें।

7) कुछ आयुर्वेद औषधियां जैसे विषम ज्वरहरलोह ज्वरअंकुश रस ज्वर मुरारी इत्यादि ऐसी औषधियां है जो टाइफाइड के रोगी में बुखार को उतार कर उसके इम्यून सिस्टम को  मजबूत करती हैं।

8) आयुष 64 के कैप्सूल भी दिए जा सकते हैं।

  इस प्रकार सही समय पर टाइफाइड के लक्षणों को पहचान कर अगर रोगी डॉक्टर के पास पहुंच जाता है और उचित दवाओं के साथ पथ्य अपथ्य का भी सेवन करता है तो इस रोग को आसानी से पराजित कर सकता है और स्वास्थ्य लाभ पा सकता है।

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डॉ अपर्णा मिश्रा







ओ स्त्री!!!

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पुरुष के मन मस्तिष्क
शब्द हृदय
हर जगह छाई हो।
ओ स्त्री!!!
तुम कहाँ से आई हो?

वो कहता है
मैंने तुझे पंख दिए।
परवाज़ दिए
उड़ लो, जितना मैं चाहूं
ओ स्त्री !!!
क्या तुम उसकी मोहताज हो?

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उसका घरौंदा बनाया
तिनका तिनका सजाया
पर जब वक्त आया तुम्हारा
उसने तुम्हें
अपने पैरों पे गिराया
ओ स्त्री!!!
तुम कैसे उसकी सरताज हो?

वो बेबाक है बिंदास है
जो जी में आये
करने को आज़ाद है
कूबत तो तुम्हारी भी है
फिर
ओ स्त्री!!!
तुम क्यों हर मर्तबा
झुकने को तैयार हो?

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कभी ये ना पहनो
का अधिकार
कभी ऐसे न बोलो
का अहंकार
पर हर दफा उसकी
सुन कर चुप
रह जाने वाली
ओ स्त्री!!!
तुम खुद में एक अंगार हो

क्यों जानती नही,
तुम खुद को मानती नही
वो ‘मैं’ में अड़ा रहता है,
क्यों  पहचानती नही?
तुम खुद को घोल घोल
ज़िन्दगी को पी गयी
ओ स्त्री !!!
तुम स्वयं एक संसार हो…

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  To be continued …..

आप सब चाहें तो मेरी इस रचना को अपने शब्दों से सजा कर आगे बढ़ा सकतें हैं…. ” ओ स्त्री!!”
  बिंदास लिखिए
   बेबाक लिखिए..

  क्योंकि..
कलम को जितना चला लो ये शिकायत नही करती…

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aparna…


लड़कियाँ

आंसूओं को छिपाने के लिए

जबरन मुस्कुराती लड़कियाँ….

दिल के दर्द को, बस यूं ही

हंसी में उड़ाती लड़कियाँ…

दिन भर खट कर पिस कर

तुम करती क्या हो सुन कर भी

चुप रह जाने वाली लड़कियां

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बाप की खुशी के लिए

अपना प्यार ठुकराती लड़कियां….

भाई की सम्पन्नता के लिए

जायदाद से मुहँ मोड़ जाती लड़कियां….

पति के सम्मान के लिए

अपना घर द्वार खुशी छोड़ जाती लड़कियां….

बच्चों को बढ़ाने के लिए

ऊंची नौकरी को लात मार जाती लड़कियां…

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डूबते से संसार की

अजूबी सी ये लड़कियां

जाने कब किस जगह इनकी मुस्काने

छिन जाएंगी…

उन बेपरवाह हंसी के गुब्बारों से

खुद को सजाती ये लड़कियां….

इन लड़कियों का जहान कुछ अलग सा होता है

इतनी आसानी से कैसे समझ पाओगे इन्हें

की क्या होती हैं ये लड़कियां!!!

aparna …

Once in a blue moon!!!

Once in a blue moon – रिश्ता.कॉम

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    डिनर की प्लेट इन्हें थमा कर मैं वापस रसोई की ओर मुड़ गयी, रसोई साफ़ करने और बरतन धोने।।…..
 
     हम औरतें काम भी सारा ऐसे करती हैं जैसे कोई जंग लड़ रही हों, हाथ काम निपटाते हैं और दिमाग में युद्ध चलता रहता है, कभी सामने वाली पड़ोसन की लाल लपटें मारती नयी साड़ी, कभी सास बहू का ना देख पाया सिरियल, कभी सखी सहेलियों का फॉरेन ट्रिप तो कभी किसी खास मौके पर मायके ना जाने पाने की पीड़ा….

    लेकिन अभी तो वक्त ऐसा चल रहा कि हर औरत के दिमाग में एक ही शमशीर लहरा रही है__ हे प्रभु और कितना काम करवाओगे?? कब खुलेगा लॉकडाऊन? कब दर्शन देगी वो जिसे देखने की राह तकते तकते आंखें पथराने लगी हैं।। इतना ढ़ेर सारा काम तो अपनी आज तक की जिंदगी में कुल जमा नही किया होगा जितना इन एक महिने में कर लिया, भगवान जाने ये कोरोना हम औरतों से किस जनम का बदला ले रहा है??

    यही सब सोचते हुए मैं भी काम में लगी रहती हूँ, लेकिन इसके साथ ही पतिदेव को आराम से सोफे पर पैर पसारे हाथ में थामे रिमोट के साथ मटरगश्ती करते देख अन्दर से सुलग जाती हूँ __ इन्हीं का जीवन सही है, कोई फेर बदल नही हुआ, उल्टा वर्क फ्रॉम होम के नाम पर जल्दी उठने और भागादौड़ी से राहत मिल गयी, कोई मदद नही करेंगे बस सोफे पर लेटे लेटे ऑर्डर पास करतें जायेंगे__” मैडम समोसे खाये बहुत दिन हो गये ना? तुम बनाती भी अच्छा हो, आज शाम ट्राई कर लो फिर!!

  कभी कहेंगे __” सुनो इतना बड़ा सा तरबूज़ ले आया हूँ, सड़ा कर फेंक मत देना, ना खा पाओ तो सुबह शाम मुझे जूस बना कर दे देना”

   अब झाड़ू पोन्छा बरतन कपड़े से कुछ राहत मिले तब तो कोई एक्स्ट्रा काम करे, उस पर इनकी फ़रमाइशें…..

बेचारे फ़रमाइश एक दिन करतें हैं और उसे पूरी कर मैं सात दिन तक उसको पूरा करने की पीड़ा में सुलगती हूँ …..

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  ऐसी ही किसी बिल्कुल ही फ़िज़ूल सी इनकी इच्छा पर मेरे दिल दिमाग में द्वंद चल रहा था और मैं समेट कर सारे धोने लायक बरतन सिंक में जमा कर चुकी थी कि  साहब अपनी प्लेट थामे रसोई में चले आये__ “पनीर पसन्दा बनाने में तुम्हारा कोई जवाब नही, बहुत यमी था, अरे इतने बरतन , लाओ आज मैं साफ़ कर देता हूँ “

   पहला तो खाने की तारीफ कर दी और दूजा मेरे हाथ से धोने के लिये थामी कटोरी छीन ली…..

   ” जाओ जाओ तुम भी खाना खा लो, मैं ये सब निपटाता हूँ ।”

   हाय कहाँ संभालू इतना प्यार……. मैंने प्यार भरे गुस्से से इन्हें देखा और कटोरी वापस ले ली__

  ” आप भी ना!!! जाओ आप न्यूज़ देखो मैं ये ज़रा से तो बरतन हैं , निपटा कर आती हूँ “
   एक तरह से धकिया कर मैने इन्हें रसोई से बाहर कर दिया….. ये काउच पे मैं रसोई में , कुछ देर पहले दिमाग में जो ज्वालामुखी फटने को तैयार था वहाँ मनभावन सावन की बूंदे बरस कर उसे शांत कर चुकी थी, अपने मोबाईल पर अपने पसंदीदा गानों को सेट कर मैंने चलाया और मुस्कुराते हुए काम पर लगा गयी__

   ” मेरे यारा तेरे सदके इश्क सीखा,
         मैं तो आई जग तज के इश्क सीखा,
               जब यार करे परवाह मेरी…..”

  मधुर रोमांटिक गानों के साथ बरतन धोने का मज़ा ही अलग है, बरतन धो कर पोंछ कर करीने से जमा कर , सारा सब कुछ यथावत कर अपनी चमकीली रसोई की नज़र उतार ली।

       चेहरे पर एक मुस्कान चली आयी, काम कुछ किया नही बस मुझे रिझा कर सब करवा लिया…… साहब भी ना पक्के मैनेजर हैं , इन्हें अच्छे से पता है किस लेबर से कब और कैसे काम  निकलवाना है , अब प्राईवेट सेक्टर के बंदे लेबर से कम तो होते नही और उनके सर पर बैठे मैनेजर ठेकेदार!! खैर …..

मैंने  अपनी प्लेट लगाने के लिये केसरोल खोला कि देखा रोटी तो है ही नही__उस समय ये सोच कर नही सेंकी थी कि काम निपटा कर गरमा गरम फुल्के सेंक लूंगी, पर अब मन खट्टा सा हो रहा था, एक ही तो रोटी खानी है , सेंकू या रहने दूँ, दूध ही पीकर सो जाऊंगी…..दिमाग का ज्वालामुखी वापस प्रस्फ़ुटित होने जा ही रहा था कि साहब वापस रसोई में चले आये__
      ”  लाओ ये बेलन दो मेरे हाथ में ” मैं इनकी बात समझ पाती कि तब तक ये मेरे हाथों से बेलन ले चुके थे….

” अब तुम जाओ मैडम!! जाकर सोफे पर आराम फर्माओ, मैं तुम्हारी थाली परोस कर लाता हूँ ।”
    मेरे कुछ कहने से पहले एक तरह से जबर्दस्ती धकिया के इन्होंने मुझे अपने आसन पर बैठा दिया और खुद गुनगुनाते हुए रसोई की ओर चल पड़े

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  ” रोज़ तो तुम्हारा खाना ठंडा हो जाता है, आज मेरे हाथ से गरमा गरम फुल्के खा ही लो।”

  ” पर सुनो एक ही बनाना!!”

  ” क्यों?? आज के लिये ये कैलरी काउंटींग छोड़ो, एक की जगह तीन रोटियाँ ना खा ली तो मेरा नाम बदल देना।”

   कुछ इनकी रसीली बातें और कुछ गरम स्वाद भरा खाना , मैं सच थोड़ा ज्यादा ही खा गयी, चेहरे पर बिल्कुल वही संतुष्टी थी जो दिन भर थक हार के काम से लौटे मजदूर के हाथ में रोटी होने से होती है…..

    पर दिल के आगे एक दिमाग भी है, जिसने तुरंत सोचना शुरु कर दिया था, पर उसी समय मैंने मन ही मन एक छोटी सी कसम ले ली कि ऐसी शानदार थाली परोसने के बदले में पतिदेव ने किचन स्लैब और गैस चूल्हे का जो सत्यानाश किया होगा चुपचाप बिना किसी हील हुज्जत के झेल लूंगी, एक बार फिर सफाई कर लूंगी लेकिन इनके इतने ढ़ेर सारे प्यार के बदले कोई ज़हर नही उगलूंगी…..
     अपनी कसम मन ही मन दुहराती प्लेट रखने रसोई में आयी की मेरी आंखे फटी की फटी रह गईं…….

…..ये क्या मेरे स्वामी तो लिक्विड सोप स्प्रे कर कर के स्लैब को रगड़ रगड़ कर साफ़ कर चुके थे, सारा काम समेट कर गुनगुनाते हुए वो हाथ धो रहे थे, पूरे 20 सैकेण्ड से और मैं उन्हें देखती सोच रहीं थी__

   हाय मैं वारी जांवा , शायद इसे ही कहतें हैं once in a blue moon……….

aparna…..

मैं मैं हूँ!! जब तक तुम तुम हो!

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मैं,मैं हूँ! जब तक तुम,तुम हो !

तुमसे सारे रंग रंगीले
तुमसे सारे साज सजीले,
नैनों की सब धूप छाँव तुम,
होठों की मुस्कान तुम ही हो।
मैं,मैं हूँ! जब तक तुम,तुम हो !

तुमसे प्रीत के सारे मौसम
तुमसे सूत,तुम ही से रेशम
तुमसे लाली,तुमसे कंगन,
मन उपवन के राग तुम ही हो
मैं,मैं हूँ! जब तक तुम,तुम हो !

जीवन का यह सार तुम्हारा,
मेरा सब संसार तुम्हारा,
गुण अवगुण मेरे सब जानो,
मुझमे बसे मेरे प्राण तुम ही हो।
मैं,मैं हूँ! जब तक तुम,तुम हो !।।

मैं हूँ…..

मैं खुशबू से भरी हवा हूँ
मै बहता जिद्दी झरना हूँ
कठिन आंच मे तप के बना जो
मै ऐसा सुन्दर गहना हूँ ।।

छोटा दिखता आसमान भी,
मेरे हौसलों की उड़ान पे,
रातें भी जो बुनना चाहे,
मैं ऐसा न्यारा सपना हूँ ।।

हरा गुलाबी नीला पीला
मुझसे हर एक रंग सजा है,
इन्द्रधनुष भी फीका लगता
प्रकृति की ऐसी रचना हूं ।।

मैं हूँ पत्नी ,मै हूँ प्रेयसी
मै हूँ  बेटी, मै ही बहू भी,
तुझको जीवन देने वाली
मै ही माँ,मै ही बहना हूं ।।

मैं हूँ मीठी धूप सुहानी,
मैं ही भीगी सी बयार भी,
मुझमें डूब के सब कुछ पा ले,
मै ऐसा अमृत झरना हूं ।।।

अपर्णा ।

ओ स्त्री: कभी खुद को भी जिया करो……..

जल्द आ रही है, मेरे ब्लॉग पर !!