शादी.कॉम – 24

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  शादी डॉट कॉम:- 24
                   

                  रिवॉलविंग चेयर पे वही तो बैठा था,  अपनी सफेद कमीज की बाहों को कुहनीयों तक मोड़ कर दाहिने हाथ मे ऑडिटर वाली पेन्सिल पकड़े टेबल पर पड़ी फाइल को देखता,,बिल्कुल वैसे का वैसा।। पर बुआ सही कह रही थी ,कुछ दुबला हो गया था,और ये चश्मा कब लग गया जनाब को।।
       अपने इस अवतार में तो और भी लुभावना हो गया था राजा!!
      राजा को देख ही रही थी कि राजा से उसके किसी साथी ने कुछ कहा,जिसे सुन वो खिलखिला के हँस पड़ा और तभी उसकी नज़र दरवाजे पे खड़ी बांसुरी पर पड़ गयी।।

      कितनी दुबली हो गयी थी बांसुरी!! पहले से कुछ अलग भी लगने लगी थी,अपने लम्बे बालों को सदा बांधे रखने वाली बंसी के बाल कितने करीने से कटे संवरे उसने खुले छोड़ रखे थे,एकदम एक सीधी लाइन मे सतर सीधे बाल ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने गर्म लोहा चला दिया हो ,उसपर सामने की कुछ लटें हवा से उड़ कर बार बार आंखों के आसपास आ उसे परेशान कर रही थी,जिन्हें उतनी ही शालीनता से अपनी उंगलियों से कान के पीछे संवारती बांसुरी कितनी प्यारी लग रही थी….
     खुले बाल ,आंखों मे लगा काजल,कानों में छोटे-छोटे हीरे के कर्णफूल,और गले में सोने की पतली सी चेन,उसी से मैच करती रागा की घड़ी, स्मार्ट तो पहले ही थी अब महानगरीय छवि को इतनी आसानी से आत्मसात कर और भी मोहक हो चली थी…..

      दोनों ने अभी एक दूसरे को भर नज़र देखा भी नही था कि सिद्धार्थ की आवाज़ उनके कानों में पड़ी

सिद्धार्थ -“सर ये मेरी एम्प्लायी हैं बांसुरी!!,ये आपको इस फाइल की सारी डिटेल्स समझा देंगी, कम बांसुरी!!”

राजा-” हेलो!! प्लीज़ बी सीटेड!!

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बांसुरी- ” थैंक यू” बोल कर बांसुरी राजा की सामने की कुर्सी पर बैठ तो गयी पर उसे खुद अपने आप पर बड़ी शर्मिंदगी सी हो रही थी,,राजा को देखने के बाद उसकी हृदय गति जिस तीव्रता से बढ़ती चली जा रही थी ,ऐसा लग रहा था शताब्दी से होड़ लगा रही है।।
         कांपते पैरों को यथासम्भव संयत कर उसने झुक कर फाइल उठा ली,,ऑफिस की सबसे होनहार एम्प्लायी का सारा तेज़ आज चूक गया,वहाँ की सबसे धुरंधर खिलाडी का हर दांव टेढ़ा पड़ गया.. बांसुरी उसे देख चकित थी,उसे बार बार देखने का मोह त्याग नही पा रही थी,लेकिन वो अपने पूरे आत्मविश्वास के साथ मुस्कुराता उसके सामने बैठा एक के बाद एक हर साल का हिसाब उससे बड़े आराम से मांगता चला जा रहा था।

     इसी हड़बड़ी में किसी एक जगह पे गलती से छूट गये दस्तखत करने जैसे ही बांसुरी ने टेबल से पेन उठानी चाही,वहीं रखा पानी का गिलास लुढ़क गया, वो ज़मीन पे गिर के चकनाचूर होता उसके पहले ही राजा ने उसे पकड़ लिया __

  राजा– रिलैक्स बांसुरी!! आराम से बताती जाओ ,हमें कोई जल्दी नही है,हम पूरे पांच दिन यहाँ रुकने वाले हैं।।

   पूरे पांच दिन पर राजा ने सच में ज़ोर दिया था या बांसुरी के ही मन का वहम था,पर जो भी था उसका दिल तो बार बार यही कह रहा था कि ये पांच दिन उसके जीवन से कभी समाप्त ना हों।।

    इसके बाद करीबन तीन घन्टे दोनो फाइलों पर सर गड़ाये काम करते रहे,बीच में जितनी भी बातें हुई सिर्फ बैंक और बैंक के काम को लेकर ही हुई।।

    ऑडिटर टीम का लंच फाईव स्टार होटल में प्रस्तावित था,जहां सिद्धार्थ उन सब को लेकर जाने वाला था,पर टीम के सीनियर के साथ अन्य लोगों ने भी वही बैंक के कैन्टीन में ही खाने की इच्छा जाहिर की जिससे एक पल को सिद्धार्थ भी सोच में पड़ गया कि कहीं ये भी टीम की इंटर्नल ऑडिट का हिस्सा तो नही?
      पूरी टीम को लिये सिद्धार्थ कैन्टीन में पहुंच गया, वहाँ पहले से बैठे सभी कर्मचारी सतर हो गये, पर टीम पूरी तन्मयता से मेन्यू देखने में ही व्यस्त थी,जब सभी को समझ आ गया कि ये उनके काम का हिस्सा नही है तब एक बार फिर सभी अपने खाने पीने और बातों में लग गये ।।
 
      उसकी टेबल से कुछ दूर हट कर जिस टेबल पर सिद्धार्थ ने सब को बैठाया वहाँ जान बूझ कर राजा ने ऐसा किया या अनजाने में बांसुरी समझ नही पायी पर जिस कुर्सी को सिद्धार्थ ने राजा के बैठने के लिये खोला उसे छोड़ राजा उस कुर्सी पे जा बैठा जिससे वो ठीक बांसुरी के आमने सामने पड़ गया।।

     वो तो बड़े मज़े से सबसे हँसता बोलता खाता रहा पर बांसुरी के गले से फिर एक निवाला भी नीचे नही उतरा….सभी का साथ देने वहाँ बैठना भी ज़रूरी था,पर अपनी प्लेट और चम्मच से निरर्थक खेलती बांसुरी को बार बार यही लग रहा था की सामने बैठे वो उसे देख रहा है,और इत्तेफाक से जब जब बांसुरी की नज़र राजा पर पड़ी हर बार उसने उसे खुद को देखता हुआ ही पाया….शरमा कर कभी बाल ठीक करती कभी पहले से जमे आंचल को सही करती बांसुरी वहाँ से निकल भागने को तड़प उठी।।

    इतने सालों में मन ही मन जिसका नाम जपती चली जा रही थी ,आज उसी से ऐसे आमना सामना हो गया कि सारा प्रेम सरल संकोच में बदल गया।।
  
      लंच समाप्त कर टीम वापस अपने काम में लग गयी,उन लोगो के रुकने की व्यवस्था बैंक की तरफ से मैरियट में की गयी थी।।
     लंच के बाद बांसुरी वापस अपने डेस्क पर आ गयी थी,कुछ थोड़े बहुत काम निपटा के टीम वहाँ से निकल गयी तब एक बार फिर सिद्दार्थ ने मीटिंग बुला ली।।

“गाईज़ आज का तो काम निबट गया,पर कल ये लोग सारे इंटरनल आडिट शुरु करेंगे, कल का दिन हमारे लिये थोड़ा मुश्किल हो सकता है ,सो बी रेडी”

  सिद्धार्थ के जाते ही माला दो कॉफ़ी के कप पकड़े बांसुरी की डेस्क पर आ गयी।।

” बंसी !! यार देखा तूने क्या हैंडसम बंदा आया है, हाय!!! ऐसे बंदे आयें तो मैं रोज़ ऑडिट करा लूँ ।”

राहुल- ” सुना है ग्रेड बी क्लियर किया है उसने ,वो भी एक बार में।।सही है बॉस ….. भगवान जिसे देतें हैं छप्पर फाड़ के देतें हैं ।”

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माला- ” सही है !!! क्रीम जॉब है,फुल ऐश!! बंदा शकल से ही पैदाईशी ब्रिलीयन्ट दिख रहा,स्कूल कॉलेज टॉपर टाईप,है ना बंसी ।।

   माला की बात सुन बांसुरी को ज़ोर की हँसी आ गयी,वो कैसे मुहँफट होकर राजा को गधा बोल देती थी ,और आज देखो उसके ही ऊपर पहुंच गया।।

माला– नाम क्या था राहुल ,उस बंदे का?? और है कहाँ का??

‘राजकुमार ‘ बोलते बोलते बांसुरी चुप रह गयी

राहुल- तुझे बड़ी माख लगी है पता करने की,,शादी करने का विचार है क्या??

माला– और क्या ? ऐसा सही प्रपोसल मिले तो क्यों ना शादी कर लूँ,तेरे जैसे बन्दर से तो फार बेटर है।

राहुल- आर के बोल रहे थे सब के सब ,हम तो भाई आर. बी.आई. वालों को सर ही बोलतें हैं,क्या पता कल को आठ दस साल बाद ये गवर्नर बन जायें और इनके दस्तखत वाले नोट से हम अपना राशन खरीदें ।
माला– हम्म पर जो भी हो,बंदा तो दिल ले गया मेरा, चल यार बांसुरी अब घर चलें,आज तो थकान भी बड़ी मीठी सी लग रही।।

   सब के सब हँसते हुए घर को निकल पड़े ।।

************

     बांसुरी बाथरूम से हाथ मुहँ धो कर निकली तब तक में माला चाय बना कर ले आयी और रेडियो ट्यून करने लगी__

           मन ये साहेब जी, जाणे हैं सब जी
              फिर भी बनाए… बहाने
          नैना नवाब जी, देखें हैं सब जी
              फिर भी न समझे… इशारे

          मन ये साहेब जी, हाँ करता बहाने
            नैना नवाब जी, न समझे इशारे
              धीरे-धीरे नैनों को धीरे-धीरे
                  जीया को धीरे-धीरे
                     भायो रे साएबों

धीरे धीरे कहाँ वो तो बहुत तेज़ी और मजबूती से हृदय में अपना आसन जमाये बैठा है…..
      बांसुरी एक बार फिर सोच मे पड़ गयी__ इतना लम्बा समय तो नही बीत गया था फिर ये कैसा संकोच दोनो के बीच पसर गया था।
     “चलो मैं तो लड़की हूँ,लड़कियाँ स्वभाव से ही संकोची होती हैं,पर वो तो आगे बढ कर बात कर सकता था,पूछ सकता था__ कैसी हो बांसुरी ?
   पर उसने भी कहाँ ज़रूरत समझी हालचाल पूछने की,अरे इतने साल कहाँ रही,कैसे रही,कुछ जानने का मन नही किया??
   कैसे बना रहा जैसे कोई जान पहचान नही ,सारा वक्त बस फाइल्स और बैंक की ही बातें करता रहा, जैसे बहुत ही गम्भीर हो अपने काम के लिये, क्या मै नही जानती,एक एक रग से वाकिफ हूँ,और मेरे सामने ही इतना दिखावा!!”

    दिखावे वाली बात सोच बांसुरी को खुद पर ही हँसी आ गयी__ कहाँ किया उसने दिखावा?? कोई दिखावा बनावटीपन ना उसे पहले कभी छू पाया था ना अभी!! वो तो बिल्कुल सामान्य बना हुआ था, ना उसे बांसुरी से कोई शिकवा था ना शिकायत!!
   और शायद इसी बात से बांसुरी ज्यादा परेशान हो उठी थी।।
     अगर कभी भी दोनो के बीच प्रेम था तो उसे वापस मिलने के बाद शिकायत करनी चाहिये थी ना, पूछना चाहिये था मुझे अकेला छोड़ कर कहाँ  चली गयी थी बांसुरी पर नही वो तो बिल्कुल तटस्थ बना हुआ था,ऐसे मुस्कुरा रहा था जैसे असल में उसे अब कोई फर्क ही नही पड़ता बांसुरी रहे या ना रहे।।
      पर जब फर्क ही नही पड़ता तो ऐसे घूर घूर के देख क्यों रहा था।।

माला- मैडम जी कहाँ खोयी हुई हो!!! इतनी देर से देख रही हूं बाई गॉड,खुद से बातें कर रही हो, क्या हो गया भई ,,सिद्धार्थ की याद सता रही क्या??

   माला बांसुरी को देख ज़ोर से हंसने लगी

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माला– नही नही अच्छा है,लगे रहो!! बेटा शादी तो करनी ही है एक दिन,और बॉस अगर आप पे फिदा है तो इससे अच्छा तो कोई ऑप्शन हो ही नही सकता ।।।

बांसुरी- चुप करो यार!! ऐसा कुछ नही है,हम तो कुछ और सोच रहे थे…..

माला — अब तो लग रहा जैसे इस आर.के. के चक्कर में मुझे भी तेरे जैसे सोचने की आदत पड़ जायेगी।।
     क्या महक रहा था यार बंदा ,जाने कौन सा पर्फ्यूम लगाया था उसने।

बांसुरी– डेविडॉफ

माला– क्या?? क्या कहा तूने,,तुझे कैसे पता??

बांसुरी– हमें कैसे पता होगा,तुम खुद ही सोचो …. अरे यार हमने तो ऐसे ही मजाक मे कह दिया,और तुम सीरियस होकर बैठ गयी।।

माला– हम्म सही कहा ,पर यार राहुल कह रहा था बंदा तेरे ही शहर का है….यार इसी बहाने बात करवा दे मेरी ,कुछ तू अपने शहर की बात पूछ लियो और उसी बहाने मैं उसे ताड़ लूंगी।।

   बाँसुरी मुस्कुरा कर रसोई में चली गयी__” पुलाव बनाने जा रही हूँ,चलेगा ना।”

माला- दौड़ेगा मेरी जान!! तेरे हाथ के मटर पुलाव पर तो ‘ मैं वारी जावाँ,’।।

***************

अगले दिन सुबह से ही बैंक में अफरा तफरी मची थी, सभी टीम मेंबर्स बहुत गम्भीरता से हर एक फाइल का मुआयना कर रहे थे।।
     टीम के सीनियर तीनो लोग ऑडिट में व्यस्त थे , सभी किसी ना किसी काम को करने में लगे थे बस एक वो ही कहीं नही था।।
   
          चारों तरफ बार बार देखने पर भी बांसुरी को राजा नज़र नही आ रहा था,पहले उसे लगा शायद सिद्धार्थ की केबिन में होगा इसिलिए एक बार वो बहाने से वहाँ भी हो आयी,पर वहाँ भी नदारद।।
     दूसरे ऑफिस रूम में भी नही था,यहाँ तक की हार कर बांसुरी एक बार लॉकर रूम भी झांक आयी, आखिर आज गायब कहाँ हो गया??

         अपने डेस्क पे वापस आ कर बाँसुरी ने फाइल खोली ही थी कि उसे अपने पीछे से वही आवाज़ सुनाई दी__ ” हमें ढूँढ रही थी??”

   चौंक कर बांसुरी ने पीछे देखा,,,राजा खड़ा मुस्कुरा रहा था,वो भी मुस्कुरा उठी…..

सिद्धार्थ– सर!!आईये आईये ,आप ही का वेट कर रहे थे,,अब तबीयत कैसी है आप की,is everything alright?”

राजा- yeah everything is fine,,चलिये आगे का काम देखा जाये।।

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    बांसुरी पे एक के बाद एक बम फोड़ा जा रहा था, पहले आर.बी.आई. की टीम के हिस्से के रूप मे, फिर ऐसी धुआँधार अन्ग्रेजी बोल के…..
    कितना बदल गया था वो,,पर मन से आज भी वही कानपुर का अपने मोहल्ले का राजा भैय्या ही था…..
       जी में तो आ रहा कि एक बार गले से लग के इतने दिनों के सारे ताने उलाहने माफ कर लिये जाये,पर सामने पड़ने पर तो हाथ भी मिलाने की हिम्मत नही हो रही थी।।

**************

    लंच के समय एक बार फिर बांसुरी ने सोचा __ “अगर आज सामने की कुर्सी पर बैठा तो बिना किसी लाज शरम के मैं भी आँखे खोल के देखूँगी….कुछ ज्यादा ही फ्रैंक हो रहे हैं जनाब!!

   पर हाय रे मन!! जो सब सोच सोच के भावी रूपरेखा तैयार की जाती है ,ज़रूरी नही कि ये मन उस समय आपका साथ दे और आपको सब अपने मन का पूरा करने दे।।
      बांसुरी का मन खुद हर बार उसे धोखे पे धोखे दिये जा रहा था,बेचारी कुछ सोच के रखती पर राजा के सामने पड़ते ही हो कुछ जाता।।

     एक बार फिर वही हुआ!!,वो बड़ी शान से अपनी टीम के साथ आया और ठीक उसके सामने की कुर्सी खींच बैठा गया….एक बार फिर बांसुरी कट के रह गयी,ना उसके बाद वो माला से कोई बात कर पायी और ना ही ढंग से कुछ खा पायी।।

    टीम के सदस्यों के खाने की व्यवस्था देख सिद्धार्थ बांसुरी की टेबल पे चला आया ,और एकदम उसकी कुर्सी के पास ही खड़ा हो कर उन लोगों को आगे के बारे में कोई जानकारी देने लगा….
       सिद्धार्थ पहले भी ऐसा करता था या आज ही कर रहा था पर बांसुरी को उसका इतना घुल मिल के  बात करना रास नही आ रहा था….

     बात करते करते सिद्धार्थ ने बांसुरी की प्लेट से एक इडली उठा ली और बड़े मज़े से चटनी लगा कर खाने लगा,पर उसकी इस हरकत पर बांसुरी तिलमिला कर रह गयी,मन ही मन प्रार्थना करती हुई कि राजा ने ना देखा हो उसने जब राजा की तरफ देखा तो वो उसे ही देख रहा था।।
    अब इतनी दूर से वो उसे समझाती भी कैसे कि सिद्धार्थ की इस हरकत में बाँसुरी की कोई जिम्मेदारी नही थी….पता नही आज ही वो क्यों इतना फ्रेंडली हो रहा था।।

    बाँसुरी ने अपने सूखते गले को तर करने पानी पीकर गिलास नीचे रखा और सामने देखा तब तक राजा वहाँ से जा चुका था।।

***************

   राजा को सिद्धार्थ का इस तरह बांसुरी से घुलना मिलना पसंद तो नही आ रहा था,पर वो भी कॉरपोरेट जगत की सभ्यता को समझता था,इस बात को जानने लगा था कि साथ काम करते हुए अक्सर ऐसे रिश्ते बन जाते हैं  ।।
     तभी राजा को फोन बजने लगा उसे उठाये वो बाहर निकल गया।।

   बाँसुरी ने जब राजा को अपनी कुर्सी पर नही पाया तो वो भी लपक के बाहर निकल गयी….

माला– क्या हुआ बंसी ?? कहाँ चल दी तुम?

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बांसुरी– बस अभी आयी……बिना उन लोगो की तरफ देखे वो जल्दी से कैन्टीन से निकल ही रही थी कि बाहर गैलरी में इधर से उधर घूमते हुए फोन पर बात करते राजा पर उसकी नज़र पड़ गयी,राजा ने भी उसे देख लिया,वो मुस्कुराते हुए उसकी तरफ बढ़ आया__
 
   ” बन्टी का फोन था,उसकी पोस्टिंग मुम्बई में ही है, आज शाम मुझसे मिलने पुणे आ रहा है।।

” अच्छा” बांसुरी को इससे अधिक कुछ सूझा ही नही कि क्या कहे।।

राजा– तुम भी चलोगी डिनर पर?? यहीं कहीं आस पास चले जायेंगे जिससे तुम्हें लौटने मे देर ना हो।।

    उफफ!! कितना औपचारिक निवेदन था ये,,अरे पूरे रौब से भी तो कह सकता था,कि बांसुरी रात मे हमारे साथ तुम भी डिनर पर चलना पर नही….
       बांसुरी को अपने विचारों में खोये देख राजा कुछ बोलने ही जा रहा था की उसने तुरंत ही हामी भर दी,बांसुरी को लगा अगर उसने जल्दी से जवाब नही दिया तो कहीं राजा अपनी योजना ही ना बदल दे।।

” हाँ हम आ जायेंगे,पर आना कहाँ हैं??”

” रुके तो हम मैरियट में हैं,, चाहें तो वहाँ डिनर कर सकते है पर वापसी में तुम्हें थोड़ा दूर पड़ेगा।।”

” कोई बात नही,हम आ जायेंगे।।

” ठीक है ,ऐसा करना अपनी सहेली को भी लेते आना जिससे अकेले ना लौटना पड़े ।।”

  बांसुरी ने हाँ में सर हिलाया और मुस्कुरा के वापस चली गयी पर ये आखिरी बात दिल में फांस की तरह चुभ गयी….माला को लेकर आने क्यों बोला आखिर राजा ने??

*************

    वैसे हमेशा सिर्फ दस मिनट में झट से तैयार होने वाली बंसी को आज क्या पहनूँ क्या ना पहनूँ सोचने में ही आधा घंटा लग गया…..
     आधे घन्टे से तैयार हो कर बैठी माला ने जब हर एंगल से अपनी सेल्फी खींच ली तब झल्ला के उसने ही आलमारी से एक मैरून कुर्ता निकाल उसके हाथ में पकड़ा दिया__
    ” बन्सी अब और देर की ना तूने,तो मैं अकेली ही चली जाऊंगी।”

  बांसुरी तैयार होकर आयी तो माला उसे देखती ही रह गयी__
    ” क्या बात है बन्सी!! आज तो मतलब खूब जम रही हो ,,दिन भर जिसके गाने सुनती हो ना तुम्हारी प्यारी सुचित्रा सेन उनकी नवासी रायमा जैसी ही लग  रही हो, भई अब तो बता दो ,हम जा कहाँ रहे हैं ।।

” सरप्राइस है आपके लिये,चलिये तो सही।।”
  मुस्कुराती हुई बंसी दरवाजा खोल बाहर निकल आयी।
 
    दोनों के वहाँ पहुंचने तक राजा और बन्टी भी हॉल में आ चुके थे,और उन्हीं दोनो का इन्तजार कर रहे थे।।

माला–उफ अल्ला!! बन्सी तू वापस चल घर,फिर बताती हूँ तुझे,,एक बार तो बताती की हम आर के से मिलने आ रहे हैं,यार मैं भी कुछ ढंग का पहन लेती, कैसी बेकार सी जीन्स डाल ली मैंने।।

  दोनों को देखते ही राजा ने खड़े होकर दोनो का मुस्कुरा के अभिवादन किया और माला का बन्टी से परिचय करवा दिया_
” ये मेरे कजिन है रविवर्मा,मुम्बई एक्सेंचर में काम कर रहे हैं,मेरा काम पुणे में है पता चला तो मुझसे मिलने आ गये।।
    और बन्टी ये हैं माला जी,ये भी उसी बैंक में काम करती हैं जहां बांसुरी ।।

बन्टी– हेलो जी!! आप दोनो से मिल कर बड़ी खुशी हुई,,क्या हाल है बंसी !!तुम तो यार और दुबली हो गयी हो,वैसे अच्छी लग रही हो।।

माला को कुछ भी समझ नही आ रहा था वो कभी बांसुरी को देखती कभी अपने सामने बैठे दोनो लड़कों को।।

  बांसुरी ने दो दिन से राजा को फॉर्मल कपडों में ही देखा था,उसे अभी ब्लू डेनिम और टी शर्ट में देख थोड़ा संकोच कम होने लगा।।
   इत्तेफ़ाक़ से राजा ने भी मैरून टी शर्ट ही पहनी थी

बांसुरी– कैसे हैं आप बन्टी भैया,क्या हाल चाल हैं ।

बन्टी–हाल तो फिलहाल ए सी है,और चाल चलन के तो हम बचपन से बड़े पक्के हैं।।

राजा– हाँ ये मुझसे बेहतर कौन जानता है,,अरे बन्टी अकेले ही आये तुम रानी को भी लेते आना था।।

बन्टी– मैं ले तो आता लेकिन उनका चौथा महीना चल रहा है,इसिलिए इतनी लम्बी ड्राइव के लिये उसने मना कर दिया।।

बांसुरी– एक मिनट !! किसने मना कर दिया?? क्या चल रहा है?? मुझे कुछ समझ नही आ रहा ,साफ साफ बताईये।।

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राजा– अरे तुम्हें पता नही शायद!! हमारे बन्टी भाई की शादी हो चुकी है,पूरे दो साल हो गये शादी को।।

  ये सुनकर बांसुरी ने बन्टी की तरफ खुशी से चहक के देखा कि बन्टी पहले ही बोल उठा__

बन्टी– यार बन्सी तुम ना तो एफ बी पे हो ना इंस्टा पे , मैं ढूँढता भी कैसे,वैसे मैने राजा को बोला था,तुम्हे बताने के लिये…पता नही इस नामुराद ने बताया क्यों नही।।

बांसुरी– वो सब बाद में,पहले आप अपनी शादी की कहानी तो बताइये।।

बन्टी– हाँ बिल्कुल!! वो तो सबसे ज़रूरी है।।
देखो भई हुआ ये कि दिल्ली में मेरी एक नई गर्लफ्रैंड बन गयी,जिसको खाने का बड़ा शौक था,वो रोज़ सुबह फोन पे यही प्लान करती की किस नये रेस्तराँ को आबाद किया जाये,और बस इतने से पेट नही भरता था उसका,,मेरा दिमाग भी बराबर खाती थी, जाने उसे कौन सी ऐसी गलतफहमी थी कि अंबानी मेरे बाप का नौकर है।।रोज़ नही फरियाद,रोज़ नयी गुजारिश ,अच्छा और फोन इत्ते प्यार से करती ‘ हेलो बाबू’ की मैं एकदम पिघल जाता था।।
     वैसे घंटो बात करती फिर जब उसका रखने का  मन करता तो बहाना मार देती ‘ बेबी मॉम आ रही है’
पहले तो साला मैं गधे पे गधा बनता गया,फिर एक दिन शाम को जब हम लौट रहे थे मैनें कहा घर तक छोड़ देता हूँ,कम्बख्त कहती है-‘ नो बेबी !! होस्टल वॉर्डन  ने देख लिया तो मुसीबत हो जायेगी!!
  मैं सोच में पड़ गया कि होस्टल में मम्मी कैसे आ जाती है पर मैनें कुछ कहा नही।।
   फिर बाद में समझ आया मम्मी वम्मी नही आती वो तो उसके दूसरे बॉयफ्रेंड का फोन आता था,,बेमुराद, बेमुरव्वत, बेवफा !! मैनें लाखों उड़ा दिये उसके गोलगप्पो के पीछे।।
    उसी चक्कर में तो रानी से मिलना हुआ।।

बांसुरी– अच्छा कैसे??

बन्टी– मेरी एक्स को एक दिन गोलगप्पे की तलब लगी,जो उसे हर दो दिन के बाद लग ही जाती थी,तो हम दोनो गली मुहल्ले ढूँढ ढाँढ के उसके पसंदीदा गोलगप्पे वाले तक पहुंच गये …..अब इनका शुरु हुआ ,एक पे एक खाना और उसपे तुर्रा देखो__” भैय्या मिर्ची तो डाली ही नही,थोड़ा और तीखा करो ना” वो गोलगप्पे वाला बेचारा कई बार मिर्ची डालने के बाद अपना एवरेस्ट का पैकेट निकाल चेक करने लगा __ साले टी वी पे बोलते हैं सही तीखा सही लाल ।।और ये धुरंधर यहाँ ‘ ना ही तीखा ना ही लाल’ कर रही है।।
      भर पेट खाने के बाद जब आगे बढ़े तो उसकी पेट में कोहराम मच गया,,एवरेस्ट के तीखालाल ने अपना कमाल दिखाया।।
      मैं  उसको लेकर सीधा एम्स भागा,वहाँ मैडम को तुरंत ऐडमिट कर लिया गया…..
   वहीं हमारी मुलाकात हुई रानी से!! रानी को तो जानती हो ना??

बाँसुरी ने राजा की तरफ प्रश्न पूछती निगाहों से देखा उसने आंखों से ही हाँ कह कर समाधान कर दिया

बन्टी– रानी वहाँ सर्जरी में एम एस कर रही थी,मैने उसे प्रिया से मिलवाया और दोस्ती का वास्ता देकर प्रिया की एक्स्ट्रा केयर लेने को कह ऑफिस निकल गया।
   अब जब जब मैं ऑफिस से फोन करुँ प्रिया का फोन बिज़ी आये,बाद मे उसने कहा मम्मी से बात कर रही थी।।
   पर डिस्चार्ज के समय प्रिया को बाहर भेज रानी ने मुझे सारी सच्चाई बता दी उसके दूसरे बॉय फ्रेंड के बारे में ।।
   बस यही से रानी से दोस्ती शुरु हुई और घर वालों के आशीर्वाद से दो साल पहले शादी भी हो गयी।।

माला– वॉव मज़ा आ गया सुन के!! अब प्लीज़ कोई मुझे ये बतायेगा कि आप सब एक दूसरे को कैसे जानते हैं ।।

बन्टी– क्यों इन दोनों ने तुम्हे कुछ बताया नही।।

बांसुरी ने घबरा के बन्टी की तरफ देखा ही था की राजा की आवाज़ कानों में पड़ी __

राजा- हम दोनो एक ही शहर से हैं,बल्कि एक ही मोहल्ले के हैं,इसिलिए अच्छी जान पहचान है!!बस!!

   मैरियट के बड़े से हॉल में एक तरफ गज़ल सन्ध्या का आयोजन किया गया था,जहां कोई एक साहब गुलाम अली जी की गज़ल गा रहे थे__

  इस शहर में किस से मिलें हम से तो छूटी महफिलें
    हर शख़्स तेरा नाम ले, हर शख़्स दीवाना तेरा।
    कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तेरा।
    कुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा तेरा।।

  डिनर होते होते ग्यारह बज चुके थे ,,इतना समय हो गया देख कर राजा थोड़ा परेशान होने लगा__

राजा — हम साथ चलें क्या बांसुरी,तुम लोगों को वहाँ ड्रॉप कर हम वापस आ जायेंगे।।

बांसुरी– नही नही !! आप परेशान मत होईये,,पुणे तो जागता शहर है,वैसे भी सदाशिव पेठ में भीड़ भाड़ रहती है।।

राजा ने उनके लिये कैब बुक करी और  बांसुरी के
बार बार मना करने के बावजूद गाड़ी में उन दोनों को पीछे बैठा कर खुद ड्राईवर के बाजू वाली सीट पर बैठ गया,दुसरी कैब लेकर बन्टी भी मुम्बई निकल गया।।
 
     उनकी कैब सदाशिव पेठ की तरफ भाग चली, एफ एम में चलते गाने के साथ बांसुरी एक बार फिर कानपुर की गलियों में और राजा में खो के रह गयी…..

         मेरी साँस साँस महके
              कोई भीना भीना चन्दन
         तेरा प्यार चाँदनी है
               मेरा दिल है जैसे आँगन
         हुयी और भी मुलायम
                मेरी शाम ढलते ढलते
        हुयी और भी मुलायम
                मेरी शाम ढलते ढलते
         ये कहाँ आ गये हम
                 यूँ ही साथ साथ चलते………

क्रमशः

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aparna…
    
      

शादी.कॉम – 22

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      आँधी की तरह उड़कर इक राह गुज़रती है
       शरमाती हुई कोई क़दमों से उतरती है
           इन रेशमी राहों में इक राह तो वो होगी
         तुम तक जो पहुंचती है इस मोड़ से जाती है                                                              इस मोड़ से जाते हैं……  
      कुछ सुस्त कदम रस्ते,कुछ तेज़ कदम राहें…

  अपने कमरे में बैठी बांसुरी को समझ ही नही आ रहा था कि उसने सही किया या गलत….अपनी माँ का मुरझाया चेहरा वो कभी भी सहन नही कर पाती थी,उस समय भावावेश में आकर उसने राजा की अम्मा को खरी खोटी सुना तो दी पर अब रह रह के राजा का बुझा बुझा सा चेहरा ,जाते समय उसे रोकती हुई राजा की आंखें सब याद आ रहा था, बांसुरी जैसे खुद से ही बातें कर रही थी__ अच्छे से जानती हूँ,मेरे सामने तक तो मुहँ खोल नही पाता अपनी अम्मा के सामने क्या बोलेगा,बस नाम का राजा बाबू है,सारी होशियारी प्रिंस और प्रेम तक ही सीमित है,,बातें इनकी निकलेंगी जब वसूली करने जातें हैं,बाकी समय तो बस सर हिला के ही काम चला लेंगे….अरे पर एक बार तो अपनी अम्मा को टोक सकता था।”

  बांसुरी का मन राजा से बात करने के लिये व्याकुल हो उठा,

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          पर हाय रे मन!! मन की भी शायद अपनी आत्मा होती है, देह होता है ,तभी तो हर बड़ी छोटी बात को खुद से लगा लेता है,हाड़ मांस से बने शरीर को जितनी चोट नही पहुंचती उससे कहीं अधिक मन चोटिल हो जाता है….
         ऐसे समय जब कोई अपने प्रेम को  सर्वोपरी रख अपनी या सामने वाले की गलती पे झुक जाना चाहे ये मन देवदार बन जाता है,अकड़ के तन जाता है,और हर एक इच्छा को अपने नैनों से तोल कर निर्णय लेता है।।
    यही बांसुरी के साथ हुआ!!उसे मन्दिर में जो सही लगा उसने कर दिया पर अभी उसका मन राजा के लिये रो पड़ा,कैसे भी किसी भी हाल में उससे मिलने को वो तड़प उठी…..पर जैसे ही उसे मेसेज करने उसने फोन उठाया उसके अन्दर से एक आवाज़ आयी __ वो भी तो कर सकता है फ़ोन,,ठीक है शायद हमने बात बिगाड़ दी पर शुरु तो उसी की अम्मा ने किया था,और दोनो भाई मुहँ में कुल्फ़ी जमाये बैठे थे,हम भी आखिर क्या करते।। हम जाने लगे तब आगे बढ़ कर रोक भी तो सकता था,ठीक है अपनी अम्मा के सामने नही बोल सकता पर हमें तो बोलते समय रोक सकता था,हमे भी कोई शौक तो है नही की दूसरों का अनादर करें,बस हो गया जो होना था,अब एक बार फोन तो कर ले ,पूछ तो ले ,कैसी हो बांसुरी ।।पर नही जनाब तो अकड़ के बैठे होंगे,ये विचार आते ही बाँसुरी का दिल कसमसा के रह गया, उसे राजा का मासूम सा चेहरा याद आ गया,भला आज तक कब और किस बात पे वो अकड़ के खड़ा रहा था,वो तो बेचारा फलों से लदा ऐसा तमाल तरु था जिसकी छाँव से उसकी पूरी बिरादरी सुवासित थी।।

    बांसुरी ने फ़ोन करने को फ़ोन उठाया ही था की राजा के नम्बर से कॉल आ गया,थोड़ी देर पहले का क्षुब्ध स्वाभिमान एक बार फिर करवट ले खड़ा हो गया,बांसुरी ने तुरंत उचक कर फोन नही उठाया __ वो भी तो जाने हम बांसुरी  है।।
       हाय रे ये मिथ्या अभिमान!! जिसके लिये दिल टूक टूक रो रहा था,सामने से उसे ही उद्विग्न देख अपनी रोग और पीड़ा भूल गया,और उसके घावों पे मलहम देने की जगह नमक की बोरी उठा ली।।

    बांसुरी जब तक फोन उठाती फोन कट गया, उसके चेहरे पर एक मुस्कान खिल गयी__ अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे,अच्छा मज़ा चखाया!

    एक बार फिर फोन घनघना उठा__

बांसुरी- हेलो

राजा- बांसुरी!!
 
अपना नाम राजा के मुहँ से सुनना था की रहा सहा धैर्य गुस्सा सब भाटे की तरह उतर गया,वेगवती नदी सा बह गया।।

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बांसुरी-” इत्ती देर से याद आयी हमारी,सुबह से कहाँ मर रहे थे,एक बार को नही सोचा कि हम कैसे जी रहे होंगे।”

राजा- अरे सोचा नही होता तो अभी फ़ोन क्यों करते, सुबह से मौका ही नही मिला,सब हमी को घेरे खड़े थे,मन्दिर से आने के बाद अम्मा ने घर पर सब को सब बता दिया है,घर में कर्फ्यू वाली स्थिति हो गयी है।

बांसुरी- तो हमारे घर कौन सा हालात कन्ट्रोल में हैं, मन्दिर से आने के बाद बुआ ने ऐसा हंगामा मचाया है कि हमारे घर में भी इमरजेन्सी के से हालात हो गये हैं,,राजा एक बात बोलें

राजा- घर से भाग चलने बस मत बोलना।

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बांसुरी- हम वही बोलने वाले थे जादुगर सैंया।।

राजा- हम दोनो तरफ सब कुछ संभाल लेंगे बस तुम अपने आप को संभाले रखना,हमे ती समझ नही आता की हम किसे किसे देखे,बाकी सब को या तुम्हें ।कभी भी तमक जाती हो।।

बांसुरी– क्या करें?? हम अपनी अम्मा के लिये कुछ भी सुन नही पाते,,पर अब ध्यान रखेंगे,अच्छा सुनो!! कल कहीं मिल सकते हैं क्या?? अकेले?

राजा- क्या हो गया,अकेले काहे मिलना चाह रही??

बांसुरी- ऐसा कुछ नही,जैसा तुम सोच रहे,और सुनो!! सोचना भी मत!! हम तो प्लान बनाना चाह रहे कि आखिर ऐसा क्या हो सकता है कि तुम्हारी अम्मा की बात माननी भी ना पडे और पूरी भी हो जाये।

राजा- वही तो हम भी सोच रहे,क्या ऐसा किया जाये कि सब सही हो जाये और किसी को तकलीफ भी ना हो,चलो फिर यही ठीक रहा,कल रॉयल पेलेस चलते हैं,वहाँ बैठ के सोचेंगे ।।

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  बांसुरी- सुनो,एक बात बोलें ।

राजा- मना कर देंगे तो नही बोलोगी।

बांसुरी- तब तो और ज़ोर से चिल्ला के बोलेंगे,कान फाड़ के बोलेंगे,तुम्हें सता के बोलेंगे।।

राजा- तो बोलो ना,पूछती क्या रहती हो,सुनो सुनो सुनो!! जैसे बड़ा सम्मान दे देती हो।।

बांसुरी– कल तुम अपनी नीली शर्ट पहन के आना  और हम भी अपनी नीली कुर्ती ही पहनेंगे,ठीक है।

राजा बांसुरी की बात पर खिलखिला के हँस दिया, तभी अचानक किसी के आने की आहट से दोनो ही चौकन्ने हो गये_

राजा- बांसुरी बन्टी ऊपर आ रहा है,हम फोन रखते हैं ।।

बांसुरी- अरे रुको !! सुनो तो….

राजा– अरे रख रहे हैं यार,तुम तो पिटवा कर ही मानोगी लग रहा।।
   हँसते हुए दोनो ने अपना अपना फोन रख दिया।।

            पास बुला के गले से लगा के
             तुने तो बदल डाली दुनिया
             नए हैं नजारे नए हैं इशारे
           रही ना वो कल वाली दुनिया

           सपने दिखाके ये क्या किया
                 ओ रे पिया
           तुने ओ रंगीले कैसा जादू किया
          पिया पिया बोले मतवाला जिया।।

   रेडियो पे बजते गाने ने बांसुरी के चेहरे पे एक लाज भरी मुस्कान बिखेर दी।।

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              *********************

    अगले दिन दोनो परिवार अपनी अपनी दिनचर्या में लीन थे,सुशीला जहां खुश थी कि चलो उस लड़की से पीछा तो छूटा वही अपनी लाड़ली के दुख से प्रमिला दुखी थी,पर दोनो ही महिलाओं ने आम हिन्दुस्तानी औरतों की तरह ही अपने मन को पूर्ण रूपेण अपने नियन्त्रण में रखा हुआ था,एक दुखी थी एक सुखी थी पर दोनो में से किसी की दिनचर्या में कोई व्यवधान नही था।।
        घर के किसी सदस्य की किसी भी आवश्यकता को अधूरा नही रखा गया था,सब समुचित व्यवस्था थी।।
 
     बांसुरी कुछ गुनगुनाती सीढियों से नीचे उतरी, रसोई की खिड़की से झांक लगा के प्रमिला ने उसे आवाज़ लगायी

प्रमिला- लाड़ो!! नाश्ता ले आऊँ तेरा!!

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बांसुरी- नही मम्मी ,हम कुछ काम से बाहर जा रहे हैं, वापस आकर खा लेंगे

प्रमिला- अरे कम से कम दो पूड़ी तो खा ले।

बांसुरी ने मुस्कुराते हुए प्रमिला को देखा,__”पूड़ी तो हमने कब से खाना छोड़ रखा है मम्मी ,भूल जाती हो ,अभी 2 किलो और कम करना है,चलो हम जा रहे वर्ना देर हो जायेगी।।”

” अरे पर जा कहाँ रही छोरी?”

” कहीं नहीं बुआ,जल्दी आ जायेंगे।।

बांसुरी के निकलते ही बुआ जी ने प्रमिला को पृश्नवाचक निगाहों से भेद दिया__” परमिला कहीं उस रजुआ का बुखार फिर तो नही चढ़ गया छोरी को,कल तो बड़ा पांव पटकती निकली रही मन्दिर से।।

प्रमिला– नही पता जिज्जी,वैसे बांसुरी ऐसी है तो नही,ज़बान की बड़ी पक्की है मेरी बेटी।।

      यही तो लोग नही समझ पाते कि ना प्यार का भरोसा,ना प्यार करने वालों का।।जब एक बार इन्सान प्यार में पड़ जाये तब वो सिर्फ एक ही काम सलीके से और शिद्दत से कर सकता है वो है प्यार,
इसके अलावा हर एक काम बेमानी हो जाता है, ना तो फिर अपना वचन याद रहता है और ना मान सम्मान।।

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        रॉयल पैलेस जाते हुए बांसुरी ने निरमा को भी साथ ले लिया,वहाँ पहुंचने पे देखा राजा और बन्टी पहले से बैठे उनका रास्ता देख रहे थे।।

    बांसुरी को देखते ही राजा की आंखे मुस्कुरा पड़ी,
बन्टी ने आगे बढ़कर दोनो को अपने सामने की कुर्सियों पर बैठा दिया।।

बन्टी- देखो बांसुरी और राजा,तुम दोनो को ऐसा कोई हल निकालना पड़ेगा जिससे सांप भी मर जाये और लाठी भी ना टूटे।।

बांसुरी– भैय्या हम तो चाहतें हैं,ना सांप ही मरे ना लाठी ही टूटे,क्यों राजा!!

राजा– तो क्या सोचा ?? ऐसा क्या करें कि सब मान जायें,  बोलो बांसुरी!!

बांसुरी- राजा तुम हमारे तुम्हारे बारे में सब कुछ अपने पापा को बता दो,हमे यकीन है वो मान जायेंगे।

बन्टी- इत्ता आसान नही है बांसुरी पण्डित जी को भोग लगाना,वो भी परले दर्जे के जट्ठर हैं,बल्कि मौसी ही कुछ मुलायम हैं,जब वही इत्ती भरी बैठी हैं तो मौसा जी का सोचो भी मत,उसपे इनके घर के सब पुरखे अमृत पीकर आये हैं,90 की हो चुकी दादी अब तक अपने पसंद की मोहनथाल बनवाती है बहुओं से।।

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राजा- फिर करें तो क्या करें बन्टी,हमे तो समझ ही ना आ रहा??

बांसुरी– तुम्हें कभी कुछ आसानी से समझ आया भी है? भला हो ये समझ आ गया कि हमसे प्यार है।

बन्टी- देखो बिना दान दहेज ये शादी ना हो पायेगी, बांसुरी तुम भी अच्छे से जानती हो,कुछ काम समाज और दुनिया को दिखाने भी किया जाता है,है ना?

बांसुरी- हाँ तो?

बन्टी- तो ये कि मौसी जी ने जितना बोला उतना तो करना ही पड़ेगा,अब कुछ तो अंकल जी की भी तैयारी होगी ही,बाकी कमी बेसी को हम पूरा कर देंगे, मतलब हम नही हमारा भाई राजा!! क्यों राजा?

राजा ने बन्टी की बात पर बांसुरी को देखा,उसके चेहरे पर भी कोई भाव नही था,जैसे उसे समझने में दिक्कत आ रही थी कि ऐसा करना सही रहेगा या नही।।

बांसुरी– हमारे पापा को शायद अच्छा नही लगेगा राजा

बन्टी- लेकिन कुछ तो रास्ता निकालना ही पड़ेगा ना
तुम अपने पापा को समझा भी तो सकती हो।

बांसुरी- हां समझा सकते हैं,पर एक बात बताइये भैय्या ,हम पापा को ये समझायें की राजा से रुपये उधार ले कर हमारी शादी उसी से करा दे इससे कहीं ज्यादा आसान ये नही रहेगा कि  राजा अपनी अम्मा को ये समझा दे कि वो दहेज नही लेना चाहता।

राजा- बांसुरी तुम्हें क्या लगता है हमनें अम्मा से बात नही की,जितना कह सकते थे कह चुके हैं,,अब देखो यार अम्मा भी अपनी जगह कहाँ गलत है बताओ।

बांसुरी- तुम्हारी आँख मे ना तुम्हारी अम्मा भक्ति का चश्मा चढ़ा है,उस चश्मे को उतारो तब नज़र आयेगा की कौन गलत है और कौन सही,,हमे बन्टी भैय्या की बात अच्छी नही लगी।
      भले ही एक साधारण नौकरी में हैं हमारे पापा पर आज तक हमे किसी चीज़ की कमी नही महसूस होने दी,राजकुमारी बना के पाला पोसा,और आज हम अपने स्वार्थ के लिये अपने पापा के आत्मसम्मान को आग लगा दे,ये नही हो पायेगा राजा।।
     तुमसे प्यार करते हैं इसिलिए तुम्हारे आगे हमारा मान अपमान हम नही देखते पर अपने पापा को तुम्हारे पैरों में रुपयों के लिये झुकते नही देख पायेंगे।

राजा- यार तुम बात को कहाँ से कहाँ मोड़ दी,,काहे तुम्हारे पापा झुकेंगे?? हम चुपचाप जितने की उन्हें ज़रूरत होगी लाएंगे और तुम्हारे घर छोड़ जायेंगे। अब कल को हम उनके दामाद बन जायेंगे तो एक तरह से उनके बेटे जैसे हुआ ना,बेटे से कुछ लेने में कैसा संकोच?

बांसुरी- सही कह रहे हो ,बेटे से कैसा संकोच?? फिर चुपचाप आने का संकोच काहे कर रहे,डंके की चोट पे आना,अपने अम्मा बाऊजी को बोल कर आना की अपने होने वाले ससुर के लिये रुपये लिये जा रहे, उनके ज़रूरत है।।

राजा-बांसुरी तुम कोनो कसम खा कर आयी हो का कि लड़े बगैर नही जायेंगे

बांसुरी- हाँ बिल्कुल!! वैसे ही जैसे कल तुम्हारी अम्मा कसम खा के आयी रही ।।

राजा — बांसुरी!! हम कुछ कहते नही इसका मतलब ये नही कि तुम कुछ भी कहती जाओगी,,अम्मा है हमारी,उन्होनें जितना सहा है ना तुम उनकी पैर की धूल बराबर भी नही हो।। एक बात तो सुन के सही नही जाती तुमसे अम्मा से बराबरी करने चली हो।  अरे बचपन से अपने घर परिवार पड़ोस समाज सब जगह उन्होनें जो देखा है वही उनके दिमाग में बैठा है।। तुम्हारी तरह पढ़ी लिखी होती तब तो उनकी अपनी समझ होती ना,उनके खुद के ब्याह में दहेज मिला,सभी मौसियों का ब्याह ,चाचा का ब्याह फिर बुआ का ब्याह सभी जगह यही देखी है हमरी अम्मा इसे ही सही समझती है,तो इसमे उनकी क्या गलती।।
    जिस उम्र में तुम अपनी माँ के आंचल में दुबकी पड़ी थी उस उमर से घर गृहस्थी का बोझ उठा रही हमारी अम्म्मा।।बारह साल की उमर से ददिया सास चचिया सास और खुद की सास की सेवा में प्राण दिये जा रही हैं,और आज तक उनके सर का पल्लू कभी खिसका तक नही और तुम उनकी दो बातें सुन उन्हें पलट के चार बातें सुना गयी।।
       मजाल है जो आज तक हमारी अम्मा ने दादी को कभी पलट के जवाब दिया हो,ऐसा तो नही है कि हर बार बड़े बूढ़े सही बात ही बोलतें हों,पर जो भी बोला सुनाया हो दादी ने हमारी अम्मा ने उन्हें या बाऊजी को कभी जवाब नही दिया।।

बांसुरी– हम क्या बोल रहे और तुमने क्या समझ लिया।।

राजा- क्या समझ लिया,सही ही समझा।। हमारी ही आँख में चश्मा चढ़ा था,पर अम्मा का नही तुम्हरा,अब उतार फेंकने पर साफ साफ दिख रहा कि तुम्हारा ज्ञान कितना कोरा और उथला है बांसुरी ।।
   एक बात और कह दें,जो लड़की हमारी अम्मा का सम्मान नही करेगी ,इज्जत नही करेगी हम किसी जनम में उससे शादी नही करेंगे।।

बांसुरी– राजा तुम धमकी दे रहे हो हमे।।

राजा– हम सच बोल रहें हैं,,हमारी अम्मा से ज्यादा हम किसी से प्यार नही कर सकते,,तुम अपनी बताओ ,हमारी अम्मा के हिसाब से ढल सकती हो।तो ठीक है वर्ना जाओ,हमें भी तुम्हारी कोई ज़रूरत नही है।

बन्टी और निरमा चुपचाप बैठे दोनो की बातें सुन रहे थे,कुछ देर पहले की साधारण बातें अचानक ही ऐसे मोड़ ले लेंगी किसी ने सोचा भी ना था।।
     किसी ने सही कहा है__ बन्दूक से निकली गोली और ज़बान से निकली बात कभी वापस नही हो सकती।।

  काश दोनो में से एक ने भी अपनी जिह्वा पे समय रहते नियन्त्रण पा लिया होता तो स्थिति इतनी विकट ना होती।यहाँ गलती किसकी थी किसकी नही ये पक्ष विचारणीय रह ही नही गया,दोनों में से किसी ने उस समय झुकना अपनी शान के खिलाफ समझा।।

           ***************************

      इस पूरे वाकये को कई दिन बीत गये।। बांसुरी ने इम्तिहान पास कर लिया और एक महीने की ट्रेनिंग के लिये पुणे आ गयी,बन्टी भी वापस दिल्ली लौट गया, सभी अपने अपने कामों मे लग गये,जीवन का नाम ही चलना है,वो कभी किसी के लिये रुकता कहाँ है।।

     बांसुरी की ट्रेनिंग पूरी हो गयी और पहली नियुक्ति में उसे अम्बा जी गढी जाना पड़ा, उसने अपना कार्यभार संभाल लिया,कभी कुछ दिनों के लिये उसकी अम्मा या बुआ जी आ जाते हैं ।
     बन्टी की जिंदगी में एक बार फिर कोई लड़की आ गयी,वो अपने जीवन अपने बॉस और नयी नयी बनी गर्लफ्रैंड में व्यस्त रहने लगा।

    सभी का जीवन व्यस्त था,सभी अपने आप में लगे थे,बस एक राजा था जिसका जीवन उस शाम रुक गया,,उसने पहले की तरह जिम जाना छोड़ दिया, भैय्या के वसूली के काम में भी अब प्रिंस और प्रेम ही जाते ।।
    घर के लोग जैसे अम्मा,बाऊजी बड़े भैय्या चाचा जी सभी अपने लाड़ले के व्यवहार से क्षुब्द थे दुखी थे,पर वो खुश था अपने आप मे,अपने कमरे में अपनी किताबों के साथ।।
    अम्मा को लगा बांसुरी का भूत उतर गया,अम्मा को इस बात का कई एक बार प्रमाण भी मिल चुका था,, आखिर माँ थी कैसे अपने बेटे के जीवन से अनभिज्ञ रहती,उन्हें समझ आ चुका था की अब बांसुरी और राजा की हल्की फुल्की भी बातचीत नही होती।।
   खूब खोद कुरेद के उन्होनें बन्टी से भी सारी सच्चाई उगलवा ली थी,कि उस शाम के बाद दोनों में कभी कोई बात नही हुई ।।
      उस शाम को बीते पूरे पांच बरस गुज़र गये……बांसुरी चली गयी सिर्फ राजा के जीवन से ही नही उसके शहर से भी दूर ।।
  
   पर जब वो चली ही गयी थी राजा के जीवन से तो ऐसा क्या था जो राजा ने खुद को किताबों में इस कदर गुम कर लिया था…..

क्रमशः

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अपर्णा।।

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शादी.कॉम – 21

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शादी डॉट कॉम: 21

       तेरे बिना चांद का सोना खोटा रे
          पीली पीली धूल उड़ावे रे
            तेरे संग सोना पीतल
             तेरे संग कीकर पीपल
              आजा कटे ना रतिया………
         ओ हम दम बिन तेरे क्या जीना
      तेरे बिना बेस्वादी बेस्वादी रतिया ओ सजना…

   ” लगे रहो बेटा!!! सही जा रहे हो,,एक एक लक्षण प्रेम मे पागल प्रेमी का दिख रहा तुममे।”

” क्या यार बन्टी,,अब ऐसा क्या देख लिये तुम?”

” जैसे गाने सुन रहे हो ना आजकल बेटा मैं ही क्या कोई अन्धा भी तुम्हारी आंखों में देख पढ लेगा कि बच्चा प्यार में है,,,मैं तो फिर भी पढा लिखा हूँ,और वो भी अच्छी खासी दिल्ली युनिवर्सिटी से…..तुमने ये तो ना सोच लिया कि झुमरितलैया से पढ कर भाई इतना ज्ञान बघार रहा है…” अपनी ही बात पे बन्टी ज़ोर ज़ोर से हंसने लगा

” पता है एक बार हमारा बॉस अड़ गया कहता है __ लड़कों कुछ अच्छा करना है मुझे,जिससे मेरे बाद मेरा नाम हो,मैनें धीरे से कहा _ ट्रेन के टॉयलेट  में अपना नाम नम्बर लिख आईये,,सदियों तक लोग गंदे टॉयलेट की फ्रस्ट्रेशन में गालियाँ आपके नाम की निकालेंगे।।”

” तुमने ऐसा कह दिया बॉस से।”

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” अबे नही यार!! ऐसी पते की बातें तो मेरे मन में ही दफन रह जाती हैं,ऊपर से मैनें कहा __ क्या सोच रहे हैं आप बताइये सर जिससे आपकी कुछ मदद की जा सके,,कम्बख्त कहता है बाइजूज़ जैसा कोई काम का एप बनाना चाहता हूँ कि लोग उसमें बच्चों को पढ़ा कर मेरा नाम लें लाइक ‘ साहूज़’ ।।
    मैनें कहा सर एप सही नही है, मैनें एक बार बाईजूज में इतिहास पढ़ना चाहा,कम्बख्त इतना अनाप शनाप हड़प्पा की खुदाई में निकलवा दिया इन लोगों ने कि ‘साहनी साहब’ की आत्मा भी कलप गयी कि यार ये सब इन लोग कहाँ से निकाल निकाल ला रहे मुझे तो ना मिला आज तक….

” फिर मान गया बॉस??”

” जो अपने मातहत की बात मान जाये वो बॉस ही कैसा?? उसके बाद एप का भूत उतरा तो अब अपने क्लाइंट और खुद की प्रोजेक्ट डिस्कशन की विडियो यू ट्यूब पे लॉन्च करने की प्लान कर रहा है कमीना।।कुल मिला के ना खुद चैन से जियेगा,ना हमे जीने देगा….खैर मेरी बातें छोड़ और जल्दी से तैयार हो जा फिर मौसी को लेकर मन्दिर भी तो जाना है।”

दोनों भाई बातों में लगे थे कि सुशीला एक बड़ी सी ट्रे में दो प्लेट में नाश्ता और चाय लिये ऊपर चली आयी।।

” अरे मौसी जी हम नीचे ही आ रहे थे,आप यहाँ नाश्ता क्यों ले आईं ।”

” 9 बज गया अभी तक तुम लोग नीचे आये नही तो हम यहीं ले आये,चलो जल्दी से नाश्ता कर लो,तुम्हारी पसंद का आलू का पराठा और मूँग की दाल का हलुआ बनाये हैं बन्टी।।”

” अरे वाह!! मौसी जी इसी बात पे चलिये मन्दिर घूम आते हैं ।”

” मन्दिर?? अभी !! मतलब सुबह सुबह।।”

” मन्दिर तो सुबह सुबह ही जाया जाता है ना मौसी।”

     इतनी देर से चुप बैठे राजा ने अपनी माँ का हाथ पकड़ कर उन्हें कुर्सी पर बैठाया और माँ की आंखों में देखते हुए अपनी बात उनके सामने रख दी__

” माँ आज बांसुरी और उसकी माँ तुमसे मिलने आने वाली हैं शिव मन्दिर मे!! एक बार मिल लो उन लोगों से।”

सुशीला कभी राजा कभी बन्टी को भौचक नजरों से देखने लगी

” कर ली आखिर अपने मन की,जब हमसे पूछे बिना ही मिलनी तय कर आये तो टीका बरिक्षा भी तय कर आओ।।”

” अम्मा नाराज काहे हो जाती हो….बिना तुम्हरी मर्ज़ी कुछ नही करेंगे भई ,,कम से कम एक बार मिल तो लो,।।”

” का फायदा मिलने जुलने का ,जब हमरी राय कोनो मायने ही नही रखती तो का फायदा बोलो।”

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” कैसी बात कर रही हो मौसी,राजा को बचपन से देखे हैं,आज तक आपसे पूछे बिना तो पानी भी नही पीता लड़का,शादी तो बहुत दूर की बात है।”

” पानिये भर नही पीता है,बाकी सलगे काम अपन मर्ज़ी का ही कर रहा आजकल।”

” एक बार मिलने में कोई बुराई नही मौसी,मिल तो लो पहले,बाद की बाद में देखी जायेगी।”

   आखिर दोनो लड़कों की बहुतेरी जद्दोजहद ने सुशीला को मिलने जाने की हामी भरने मजबूर कर ही दिया…..
      सभी समय से तैयार हो कर मन्दिर पहुंच गये।।

” कहाँ हैं भई तुम्हरे मेहमान ?? अभी तक मन्दिरे नई पहुँचे, बड़ा लड़की ब्याहने चले हैं ।।”
    सुशीला की बड़बड़ जारी थी कि बुआ जी मन्दिर के अन्दर से निकल वहाँ उन लोगों के बीच धम्म से कूद पडीं …..

   ” कैसन हो सुसीला, पहले पहल तो मोहल्ले के सब कार्यक्रम में दिख भी जाती थी,आजकल तो दरसनों दुर्लभ है,अब तो बहु वाली हो फिर भी बाहर फिरे को टैम नही निकाल पाती ।”

” अरे हम बाहर घूमै फिरै लागें तो हुई जाये सब काम धाम।।बहु तो आन गयी पर आजकल की छोरियां ना काम की ना काज की….अपने मरे बिना सरग कहाँ दिखता है जिज्जी,लगे रहत हैं दिन भर काम मा, हम ना सकेलें तो पूरा घर पड़ा रहे,बचपना से एही करते आ रहे बस,अपनी मर्ज़ी से तो आज तक एक साड़ी भी नही ली,अब आजकल के बच्चे हैं सादी ब्याह भी अपनी मर्ज़ी से करना चाहतें हैं ।”

” का कहें सुसीला,आज कल के बच्चो में लाज शरम तो रह नही गया,एक हमारा जमाना था,हम सास के भी सामने अपने इनसे बात नही कर पाते थे,और आजकल के लड़िका लोग पहले ही कहे देते हैं ए अम्मा इन  संग हमर फेरे फिरा,लुगाई बना दो।”

” खाली लड़कों को काहे दोस दे रहीं,लड़कियाँ कम है का आजकल की,ऐसा तो चटक मटक बनी घूमेन्गी ,और फिर कहीं कोनो लड़का कुछ बोल भर दे तो उसके सर जूतियाँ बरसायेंगी….आजकल की लड़कियाँ बड़ी जब्बर हैं,इनसे पार पाना मुस्किल है बल्कि लड़के सीधे हो गये है इनके सामने।”

   बांसुरी ने राजा को देखा,वो सर नीचे किये जमीन पर पड़े छोटे से पत्थर के टुकड़े को अपने पैरों से इधर उधर करता बैठा था,बन्टी ने बांसुरी को देखा फिर उसकी माँ को और आखिर बीच बचाव करने कूद पड़ा …..

” इस चर्चा का तो कोई उपाय और कोई फल नही मौसी जी,,आप दोनो विदुषीयां जब बात कर रहीं तो मुझे बीच मे बोलना तो नही चाहिये,पर मैं कहना चाह रहा था कि राजा और बांसुरी के बारे में अगर बात कर लेते तो…..”

” तो और किसके बारे में बात कर रहे।” मौसी के कठोर जवाब पे बन्टी एक बार फिर मुखर हो उठा

” नहीं मेरा मतलब कि,इनकी शादी के बारे में बात कर लेते तो ….”

” अब यही तो तुम बच्चों के दिमाग मे नही आता, कैसे ये ब्याह सम्भव है?? कोई मेल मिलाप ही नही है दोनों घरों का,, आप ही बताइये जिज्जी!! आप बड़ी हैं घर की,,आप ठहरे सरजूपारी हम के के,,कैसे हो पायेगा,नही नही राजा के बाबूजी बिल्कुल नही मानेंगे।”

” देखो दुल्हीन हम का कह रहे कि एक बार दुनो के बाबूजी लोगो को बात करने देते हैं,हम भी जानते हैं, की रीत रीवाज, दान दहेज,मिलनी पूछनी सब अलग है ,पर हैं तो दुनो परिवार ब्राम्हण ।।तो एक बार बात बढाने मे हर्ज का है।”

” बुज़ुर्गवार हो कर कैसी बात कर रही जिज्जी,,पूरा समाज थू थू करेगा,कहेगा हमारे पास नही रही का लड़की जो बाहर से धरे लायी,और सही बोले अब कोई दुराव छिपाव भी नही रह गया,हमारे राजा के लिये 50-50 लाख का भी रिस्ता आ रहा है।।”

बहुत देर से चुप बैठी प्रमिला ने अपनी बात रखी__

” मैं कह रही थी,हमाई भी तो अकेली ही लड़की है अब शादी के लिये,इसके पापा ने जो जोड़ जाड़ के रखा है,सब इसी का तो है,हमलोग भी अपनी तरफ से बहुत अच्छी शादी ही करेंगे दीदी।”

” देखो मैं किसी को कम जादा नही आंक रही भाई,,बुरा मत मान जाना पर हमरे बड़के के में भी बिना मांगे पूछे ही सब कुछ आ गया था,अब ये हमारा आखिरी लड़का है,रुखा सूखा ब्याह देंगे तो समाज ताना मारेगा_ कहेगा लड़के में कोनो खोट रहा होगा जभी बिना लेन देन के हो गयी सादी।”

प्रमिला- हम पूछ तो रहे जिज्जी,आप अपनी बात रखिये ना ,हम कोसिस पूरी करेंगे कि आपको कोई असुविधा ना हो।

सुशीला- अरे का का करेंगी?? बरीक्षा ही सात आठ लाख की पड़ जायेगी,फिर तिलक कम से कम इक्कीस का तो चढायेंगी,जेवर जट्टा आप अपन बिटिया को जो दे वो आपकी मर्ज़ी पर पांव पखारते समय दामाद को चेन तो पहनाएंगी की नही….
    फिर तिलक बारात हर मौके पे मेहमानों को लिफाफ़ा पकडायेंगी,अब आजकल 20-50 रुपया का लिफाफ़ा भी तो नही चलता ,कम से कम 100 रुपैय्या तो डालना ही पड़ेगा और लड़के के ताऊ ,चाचा फूफा मौसा लोगो को 500 का ।।सास की पिटरिया रीति तो ना भेज देंगी,रूपा 3 तोले का हार लायी रही ,आप उतना ना सही पर कुछ तो डालेंगी,फिर सास के साथ जेठानि को एक आध कर्णफूल अँगूठी कुछ तो पकड़ाना पड़ेगा ही।।
   सामान के लिये चलो हम मना भी कर देंगे पर पार्टी तो देंगे ना आप लोग,कम से कम ग्यारह सौ बराति का खाना खरचा हो जायेगा ।।

प्रमिला- हाँ अब इतना तो करना ही पड़ेगा,,लड़की हमारी है आखिर।।
   प्रमिला के धीमे से शब्द जैसे गले में ही रुंध गये

बांसुरी- इतना कुछ नही करना पड़ेगा मम्मी ।।माफ कीजियेगा आँटी जी,पर बेटी पैदा करने का जो पाप हमारी मम्मी ने किया उसकी अच्छी खासी सज़ा आपने सुना दी,पर हमे ये सज़ा मंजूर नही है।
  राजा तुम अच्छे तो बहुत हो,हमे बहुत प्यारे भी हो पर अब हम तुमसे शादी नही कर पायेंगे ,चलिये मम्मी।।
    और आँटी आपको एक बात और बता दें,हम आगे पढ़ाई और नौकरी दोनो करना चाहतें हैं,पर शायद आपको ये भी पसंद नही आयेगा,वैसे आपकी पसंद का हममे कुछ भी नही है,आपको यहाँ आकर हमारे कारण जो भी परेशानी उठानी पड़ी उसके लिये माफी चाहतें हैं ।नमस्ते।।

बन्टी- अरे ऐसे कैसे!! बांसुरी बड़ों की बात चीत अभी चल रही है,ऐसे बीच मे तुम्हारा बोलना ठीक नही है,,ये सब तो शुरुवाती बाते हैं,धीरे धीरे सब सुलटाएंगे,तुम काहे इतना टेंशन ले रही हो।

बांसुरी- नही बन्टी भैय्या,जहां बातों की शुरुवात ही गलत नींव पर हो वहाँ हमारा सपनों का महल खड़ा नही हो पायेगा,चलिये मम्मी।

   बांसुरी को जाने कौन सी बात इतनी परेशान कर गयी,राजा की अम्मा का हद से ज्यादा बोलना या राजा की गम्भीर चुप्पी !! पर इसके बाद बिना रुके वो अपनी माँ का हाथ पकड़े मन्दिर से बाहर निकल गयी,उनके पीछे बुआ जी अपने पुरखों को कोसती दहेज लोभियों पे भाषण देती धीरे धीरे चल पडी,जाते जाते उन्होनें आखिरी व्यंग सुशीला पे भी दे मारा_

” अच्छा नही किया दुल्हिन!! जितना तुमने कहा उतनी सब की तैयारी रही हमारे भाई की,पर ऐसे इस ढंग से बच्चो के सामने…..का सोच रही अब खुस रह पाओगी तुम?? कर सकती हो तो हमरी बांसुरी के पहले राजा का ब्याह कर के दिखा दो, बड़ी खुसी से तुम्हरे द्वारे आयेंगे तुम्हरे राजकुमार के ब्याह का लड्डू खाने,और हम भी तुम्हें न्योत रहे एक महीना के अन्दर अन्दर तुम्हे बंसी के ब्याह का लड्डू खिला के रहेंगे।।”

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  आंखों से आग बरसाती बुआ जी अपने घुटने संभालती चली गयी।।

          ************************

              एक सौ सोलह चाँद की रातें,
               एक तुम्हारे काँधे का तिल
               गीली मेहंदी की खुशबू,
                झूठमूठ के शिकवे कुछ
          झूठमूठ के वादे भी, सब याद करा दो
         सब भिजवा दो, मेरा वो सामान लौटा दो……

  रेडियो पर बजते गाने के बोल सुन अनजाने ही दो आंसू बांसुरी के गालों पे लुढ़क आये,,खिड़की पर खड़ी वो अपनी सोच में गुम कहीं खो गयी।।

क्रमशः

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aparna..

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शादी.कॉम-20

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           अगर लैला मजनूँ,हीर राँझा के घर वाले एक बार में ही उनके प्यार को कबूल लेते तो शायद ही ऐसी सफल प्रेम कहानियाँ रची जातीं।।

   अम्मा की ना ने दोनो के मन में छिपा रहा सहा संकोच भी समाप्त कर दिया,दोनो को ही समझ आ गया कि एक दूसरे के बिना जीना व्यर्थ है,और अब वो दोनों सिर्फ दोस्त से कहीं आगे निकल चुके हैं ।।

  ” राजा!! ऐसे क्यों देख रहे ,जैसे पहली बार देखा हो।।”

बांसुरी की बात पर राजा मुस्कुराने लगा।।।

” सुनो !! हम तुम्हें छूना चाहते हैं,तुम्हें छू कर तसल्ली करनी है कि हम सपना नही देख रहे,राजा बाबू सच में हमारे घर के सामने खड़े हैं ।

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” अच्छा!! सच में ??” और मुस्कुराते हुए राजा ने बांसुरी को अपनी तरफ खींच कर गले से लगा लिया।।

   दोनों एक दूसरे के गले से लगे एक दूसरे में डूबे खड़े थे कि __

   ” बांसुरी !!इत्ती रात गये यहां का कर रही हो।”

  दोनो इस आवाज़ को सुन झटके से अलग हो गये

  ” पापा आप!! ये ….वो राजा हैं,हमारे जिम इंस्ट्रक्टर,जिन्हें हम पढाते भी थे।” राजा ने लपक के बांसुरी के पिता के पैर छूने चाहे,पर उन्होनें हाथ बढ़ा कर उसे रोक दिया__” हाँ ठीक है ठीक है,तुम अभी घर चलो ।”

” हां पापा चल रहे!! ” बांसुरी ने आंखों ही में राजा से बिदा ली और अपने पापा के पीछे सर झुकाये घर चली गयी।।

  राजा अपने बालों पे हाथ फेरता रह गया,अपनी बुलेट वापस  उसने घर की तरफ मोड़ ली __

  पूरे रास्ते मुस्कुराते हुए राजा घर पहुँचा ,हालांकि बांसुरी के पिता ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया था,पर इस बात से डरने की जगह उसे एक सुखद एहसास था कि बताना तो आखिर सभी को है,चाहे किसी ढंग से पता चला पर खुशी की बात है कि बंसी के घर पे भी पता तो चल ही गया।।

बांसुरी के पिता पढ़े लिखे सरकारी मुलाजिम थे, इसीसे उन्हें कितनी भी गम्भीर विषय से जुड़ी बात हो उसपे अनावश्यक हाय तौबा मचाना पसंद नही था,साधारण तबीयत के साधारण पुरूष थे।।

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       बांसुरी से ना उन्होनें कुछ पूछा ना बांसुरी ने ही आगे बढ़ कर कोई कैफियत दी,पर अपने धीर गम्भीर पिता की आवाज़ से ही उसने भांप लिया कि उसका यह कार्य पिता को कहीं अन्दर तक कष्ट दे गया है।।

    अगले दिन सुबह और दिनों की तरह बांसुरी जिम नही गयी,उसे घर पे ही इधर उधर निरर्थक डोलते देख उसकी अम्मा से रहा नही गया__

  ” का हुआ?? आज जिम नही जाओगी का बंसी ?”

प्रमिला के सवाल का जवाब बंसी की जगह उसके पिता ने दिया__

” नही! आज के बाद ये कभी जिम नही जायेगी, वर्मा से बात हुई है,कल लड़के वालों को घर बुला लिया है….सोच रहा हूँ अब इसी साल इसके भी हाथ पीले कर दूँ ।”

   बांसुरी ने अपनी माँ को देखा और उन्होनें बांसुरी को,आंखों ही आंखों में दोनो ने एक दूसरे की पीड़ा पढ़ ली।।

  ” हुआ क्या?? कुछ बताएंगे भी!!! ऐसे कैसे तुरंत हाथ पीले कर देंगे।”

   ” देखो प्रमिला,मेरा यही मानना है कि हर काम अपने समय पर हो जाना चाहिये,चाहे विद्या ग्रहण हो या पाणिग्रहण!! बहुत पढ लिख ली बांसुरी,अब इसका भी ब्याह कर दूँ तो मुझे भी चैन मिले।”

   ” मर गयी रे,ये जोड़ गठान का दर्द मुआ मेरे परान लेकर ही जायेगा…..” अपने घुटने हाथों से सहलाती बुआ जी ने घर में प्रवेश किया_” ठीके तो कह रहा है मेरा भाई,अब इत्ता सारा तो पढ़ लिख ली है,कौन सा हमें छोकरी को कलेक्टर कमिस्नर बनाना है,अब निबटो इससे भी,उमर हुई जा रही इसकी भी।”

” परनाम करते हैं जिज्जी!! छोटा मुहँ बड़ी बात हो जायेगी,पर अभी बाईस की तो हुई है और अगले हफ्ते इसका बैंक का पेपर भी है,एक बार चुन ली जाये फिर अपने पैर पे खड़ी हो जायेगी फिर निबटाते रहेंगे ब्याह।।”

” हम तुमसे पूछ नही रहे,तुम्हे बता रहे कल शाम को खाने पे बुला लिया है उन लोगों को,तुम अपना सब तैयारी ठीक-ठाक रखना।”

” जी अच्छी बात है!!” प्रमिला ने एक बार बांसुरी को देखा और रसोई में वापस चली गयी,बांसुरी भी सर झुकाये ऊपर अपने कमरे में चली गयी।।

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            **************************


   ” सांसों में बड़ी बेकरारी आंखों में कई रतजगे
कभी कही लग जाये दिल तो,कहीं फिर दिल ना लगे
अपना दिल मैं ज़रा थाम लूँ,जादू का मैं इसे नाम दूँ
जादू कर रहा है,असर चुपके चुपके …….”

    
      जिम में चलता गाना असल में राजा भैया के मन में चल रहा था,रह रह के नज़र दरवाजे पे जा कर अटक रही थी……..सब आ रहे थे जा रहे थे पर ना उसे आना था ना वो आई।।

    आखिर इन्तजार की घडियां पहाड़ बनने लगी और राजा ने बांसुरी को फ़ोन लगा दिया, पूरी रिंग बजती रही पर फ़ोन नही उठा,अब कल रात की एक एक बात किसी फिल्म की रील की तरह आंखों के सामने से गुजरने लगी।।।

     और समझ में आ गया कि बांसुरी क्यों नही आयी , उसने फोन क्यों नही उठाया।।राजा की मोटी अकल को आखिर समझ आ ही गया की बांसुरी के पापा को उन दोनों का यूँ मिलना रास नही आया, अजीब बेचैनी से राजा व्याकुल हो उठा,उसने एक बार फिर बांसुरी को फोन लगाया,इस बार थोड़ी देर में ही फ़ोन उठा लिया गया।।

” फोन क्यों नही उठा रही थी बांसुरी??”

” पापा थोड़ा गुस्से में लग रहे राजा,अब हमे जिम आने नही मिलेगा,अगले हफ्ते हमारा पेपर है,पता नही दे पाएँगे या नही?”

   दोनो अभी अपनी बातों में लगे थे कि राजा की अम्मा किसी से बात करती राजा के कमरे तक आ गयी__

” ए राजा!! देखो कौन आया है??आओ बेटा बन्टी, तुम राजा के कमरे में आराम करो हम तुम्हरा सामान ऊपरे भिजाये दे रहे।”

” जी मौसी जी।”



  राजा की मौसी का बेटा बन्टी राजा का ही हमउम्र था और पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली में रह कर नौकरी कर रहा था,वही अचानक बिना किसी पूर्वसूचना के अपना बैग टाँगे राजा के घर टपक पड़ा था।

” तुमसे बाद में बात करते हैं बांसुरी अभी मेहमान आ गये हैं,रख रहे फोन।”

राजा ने आगे बढ़ कर भाई को गले से लगा लिया__

” का हो गुरू!! एकदम दाढ़ी वाढी बढ़ाए बैठे हो, क्या हो गया ??”

” क्या बताऊँ राजा!! ब्रेक अप हो गया यार,दिमाग एकदम खराब हो गया,दिल्ली में मन नही लग रहा था साला,और मम्मी पापा के पास जाता तो शादी शादी रट लगा देते इसिलिए छुट्टी लेके यहाँ आ गया।”

” ब्रेक अप हो गया ,पर काहे,हमारा मतलब कैसे?”

” वो तो मैं बाद में बताऊंगा,पहले तुम बताओ,किससे इतना घुस घुस के बात कर रहे थे,जो मुझे और मासी को देखते ही फोन रख दिया।”

” अरे वो ?? वो कोई नही ,,बस ऐसे ही ,,तुम अपनी कहानी बताओ पहले।”

” अच्छा !! तो हमारी कहानी सुनने के बाद साहब अपनी सुनायेंगे।अबे कुछ नही रखा यार मेरी कहानी में,बस एक लड़की थी ,पसंद आ गयी थी ….

” फिर?”

” फिर क्या??फिर भाई ने प्रपोस कर दिया,और किस्मत खराब थी साला ,उसने भी एक बार में हाँ कह दी।।”

” इसमें किस्मत का क्या दोष बन्टी,ये तो अच्छा ही हुआ।”

” खाक अच्छा हुआ!!! राजा कानपुर से बाहर निकल के देखो,लोग कितना फॉरवर्ड हो गये हैं,अच्छा एक बात बताओ क्या पढ़ाई करी है मैनें?”

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” तुमने वो क्या कहते हैं …..

” हाँ हाँ बताओ बताओ,निसंकोच बोलो बे।”

” बन्टी वो इंजीनियरिंग वाली पढ़ाई…”

” हाँ वही बी टेक किया है मैनें ,एम बी ए करने वाला हूँ,अच्छी खासी नौकरी कर रहा हूँ,है की नही?”

” हाँ भाई सौ टका!!”

” अब इसके बाद सुनो ,,इतना सब करने के बाद भी मैं मैडम को गंवार लगता हूँ,कहती है तुम्हारी प्रनन्सियेशन सही नही है।।”

” क्या ??क्या सही नही है??”

” अबे उच्चारण यार!!! कहती है बेबी तुम ना सही से बोल नही पाते हो,मैनें कहा यार सेक्रेड हार्ट इंग्लिश मीडियम स्कूल से पढ़ा हूँ,कहती है_ होगा पर तुम्हारा एक्सेन्ट सही नही है,तुम ना ब्रिटिश इंग्लिश नही बोल पाते…..हिन्दुस्तानी हूँ यार अपनी इंग्लिश बोलूंगा ना भाई।।अब मैं तुझे शुरु से अपनी कहानी सुनाता हूँ ।”

” तो अभी तक क्या सुना रहे थे गुरू!!”

” दिमाग ना खराब कर भाई का यार,वर्ना नही सुनाऊंगा।”

” मजाक कर रहे थे भाई ,तुम सुनाओ यार अपनी राम कहानी।”

“जानते हो ,पहली बार कहाँ मिला उससे,,अरे वहीं यार!!!आजकल का प्रेम तीर्थ !! आज कल वही एक जगह है जहां रोज़ हजारों प्रेम कहानियाँ सुबह शुरु होती हैं और शाम होते होते खतम!! मेरी तो फिर भी तीन महीना चल गयी…..

” अबे ऐसी कौन जगह है दिल्ली में??”


“अबे दिल्ली नही ,,,,फेसबुक पे!! बन्दी ने ऐसी ऐसी खूबसूरत फोटो डाल रखी थी कि बस पूछ मत भाई!!! भाई बहक गया,,मैनें फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी उसने मान ली ,,गप्पे शप्पे शुरु हो गयी…..अब तो बन्दी  रोज़ नया प्रोफाइल पिक लगाये ,कभी लेफ्ट से कभी राईट से ,कभी सामने से,ऊपर से ,नीचे से…मतलब ये की फोटो देख देख के ही मैनें तो यार बच्चों के नाम तक सोच लिये,फिर एक दिन धीरे से प्रपोज़ भी कर दिया,उसने झट मान भी लिया,फिर मैनें मिलने को बुलाया,तब नखरे चालू हुए।।फिर भी आखिर मान गयी…..अच्छा उसके ऊपर भी पहली डेट कैसी होनी चाहिये पर भी घुमा फिरा के खूब क्लास ले ली मेरी,कहती है __ ‘मेरी हर फ्रेंड को उसके बी एफ ने पहली मुलाकात में कोई ना कोई गिफ्ट दिया है,जैसे टॉमी हाईफ्लायर की वॉच या रिंग..लायक दैट यू नो!!’ अब मैं इतना भी नासमझ नही हूँ यार एक सोने की अँगूठी खरीद के ले गया।”

” फिर क्या हुआ??”

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” फिर क्या ,जब मैं वहाँ पहुँचा और उसकी शकल देखी!!! कसम से भाई ,दिल का दौरा आते आते बचा,,भगवान बेड़ा गर्क करे इन चीनियों का ऐसे ऐसे फोन बनाये है ना,ओपो-विवो कि साला इस मोबाईल से अपनी ही फोटो खींच के बंदा ना पहचान पाये,जन्मजात कोयला भी इनमें फिरंगी लगे।। खैर मैनें अपना दिल सम्भाला और जाकर बैठ गया,अब उसके आत्मविश्वास की इन्तेहा देखो,पूछती है__ कैसी लग रही हूँ मैं? मैनें कहा_ तुम हूर हो परी हो, इस दिल्ली की नही लगती,शिमला मसूरी हो। मेरे इस भद्दे जोक पे भी हंसने लगी ,कहती है _ शुक्रिया !! खैर अँगूठी ले आया था तो मैनें निकाल लिया देने के लिये, कहती है __ omg ridiculous! तुम गोल्ड रिंग लाये हो ,मैं तो सिर्फ diamonds पहनती हूँ,,फिर सोच क्या हुआ।।”

” ब्रेकअप??”

” नही यार!! इतना झल्ला भी नही है तेरा भाई ,, बहुत सबर है भाई में….दिल में  तो आवाज़ उठी कि जाहिल औरत किसी भी एंगल से तू डायमन्ड के लायक नही लगती पर ऊपर से मैनें कहा__ चलो बेबी शॉपिंग चलतें हैं,ले लेना अपनी पसंद का कुछ!!
    अब भाई मैं तो उसे ‘ शाह जी’ ,’ अनोपचंद तिलोकचंद’ टिकाने वाला था,कम्बख्त ‘ गीतांजली’ ले गयी यार!!! पूरे बहत्तर हज़ार खरचे तब जाके मैडम के चेहरे पे स्माइल आयी।।
    फिर पूरा दिन घुमाती रही ,कभी यहाँ कभी वहाँ, शाम को जब उसे घर छोड़ने गया,तो मैने बाय बाय के साथ सोचा एक छोटी सी किस ले लूं,कहती है __ नो बेबी !! ये सब शादी के बाद!! मैनें कहा हमारे यहाँ भी गहने शादी में ही चढाये जाते हैं ।।पर मेरा ये खून्खार जोक भी उस नामुराद के पल्ले ना पड़ा ।।
    फिर तो बस सिलसिला ही चल निकला,हर वीकएंड पे शॉपिंग मूवी डिनर!! अब यार इतना भी नही कमा रहा था तेरा भाई!!!

” तो इस बात पे ब्रेकअप हुआ।”

” अबे नही यार!! इतना सब कर के देने के बाद मैडम को ये समझ आया की मैं केयरलेस हूँ मैं उससे रीलेटेड महत्वपूर्ण तारीखें भूल जाता हूँ,जैसे उसके कुत्ते का जन्मदिन, उसकी फुफी की शादी की सालगिरह,हम पहली बार कब एफ बी पे दोस्त बने, इसी तरह के कई बिल्कुल ही भुला देने योग्य तारीखों को कैसे कोई याद रखे।।कहने लगी_ ” तुम मुझसे सच्चा प्यार नही करते,तुम बस मेरी खूबसूरती से प्यार करते हो।।” माँ कसम भाई कलेजा मुहँ को आ गया,जी मे आया चिल्ला चिल्ला के कहूं __ कम्बख्त किसी अच्छे आंखों के डॉक्टर से इलाज करा अपना।।पर मैं फिर ज़ब्त कर गया।।फिर उसकी लाईफ मे आ गया एक एन आर आई बंदा!! बिल्कुल फिल्मी स्टाइल में!! उसके पापा के दोस्त का लड़का !! और भाई विदेशियों ने सदियों हम हिन्दुसतानीयों पे राज किया ही है,वही हुआ ।।मैडम भी उड़ गयी सात समंदर पार,और तेरा भाई पी पिला के गम गलत करने लगा।।”

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” अरे दारु की लत लगा ली तुमने गुरू।”

” अबे दारु की लत लगाये मेरे दुश्मन।।दारु तो बेटा ऐसा है कि भाई के खून में घुली है,इन्जीनियरिंग फर्स्ट ईयर में रैगिंग में कमीने सीनियर्स ने जब पहली बार पिलायी,हमने फुल एक्टींग करी जैसे हमे बिल्कुल नही जन्ची ।।उन्होनें और पिलायी,हमने भी खूब ढकोल के पिया,,तो दारु तो अब ऐसा है कि चढ़नी ही बन्द हो गयी बे।।हम तो चाय पीने पिलाने की लत की बात कर रहे थे।।
    तो बेटा इस तरह हमारी प्रेम कथा शुरु हुई और अपने अंजाम तक पहुंच भी गयी अब तुम बताओ,ये तुम्हारा क्या चक्कर चल रहा है।”

” क्या बताएँ बन्टी,हमारा ऐसा कुछ चलने लायक चल ही नही रहा!! एक लड़की है बांसुरी!! पहले हमारी दोस्त बनी, धीरे धीरे अच्छी लगने लगी…अब तो यार आदत सी पड़ गयी है उसकी,पर हमने पहले ही उसे कह दिया कि अम्मा से पूछ कर ही आगे कदम बढ़ाना है।”

” तो मान गयी मासी जी।”

” अबे कहाँ यार!! अम्मा तो अलगे राग छेड़े बैठी हैं सरजूपारी है तो ब्याह नही हो सकता।।”

” अरे तो सरजूपारी भी तो ब्राम्हण ही है,यहाँ तो हमारे पिता श्री ने हमारा नाम ही अजीब रख दिया __ ‘ रविवर्मा’ इसिलिए बन्टी नाम चलाते हैं ।।कोई बहुत फेमस पेंटर बाबू थे रवि वर्मा साहब!! तुम्हारे कला पारखी मौसा जी यानी मेरे पिताजी को और कोई नाम नही मिला…..पहले पहले तो मुझे कॉलेज में सब वर्मा समझते थे फिर जब पूरा नाम बताया तो खासा मजाक भी बन गया__ रविवर्मा उपाध्याय!!!
हां तो बेटा आगे क्या हुआ?”

” क्या होना था? कुच्छो नही हुआ,ना हो पायेगा,,हम सोच रहे अम्मा के एकदम पैर पकड़ लेते हैं,क्या बोलते हो तुम?”

” क्यों लड़की वाले तैयार बैठे हैं क्या?”



” अबे कहाँ यार!! पहले अम्मा तो तैयार हो जायें ।”

” और अम्मा के तैयार होने के बाद कहीं लड़की वाले मुकर गये तब,क्या करोगे।”

” ये तो सोचे ही नही भाई”

” हमारी मानो तो एक बार लड़की के घर वालों से मिल आओ!! अपने मन की बात बता दो उन्हें,,फिर वो लोग मां गये तो अम्मा तो यार मान ही जायेंगी, आत्महत्या की धमकी चमकी दे डालना और क्या।”

” हम्म!! तो मतलब हम पहले बांसुरी के घर वालों से मिल लें और बात कर लें ।”

” बिल्कुल!! और किसी तरह जुगत लगा के दोनो घर की औरतों की मीटिंग करा दो,किसी मन्दिर में!! घर की औरतें तैयार हो जायें ना तो आदमियों को मानना ही पड़ता है बंधु ।”

” बात तो पते की बोले हो बन्टी भाई ,तो फिर निकलते हैं हम बांसुरी के घर के लिये,तुम अपनी तलब मिटाओ चाय पीकर!!”

” अबे रुको यार!! बड़ी हडबडी में हो क्या बात है?? चाय पीकर मैं भी चले चलता हूँ,,देखूँ तो ज़रा कौन सी बांसुरी बजा रहे हो तुम।”


        **************************


            मेरी हर मन मानी बस तुम तक                         बातें बचकानी बस तुम तक
           मेरी नज़र दीवानी बस तुम तक
तुम तक तुम तक।।

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    दोनो भाई चाय खतम कर बाँसुरी के घर की ओर निकल चले।।

   ” क्या बात है राजा!!! तुम तो बेटा सच में प्यार में पड़ गये हो जभी रान्झणा के गाने सुन रहे हो।”

” क्यों ज़रूरी है प्यार में पड़ने पर रान्झणा के गाने ही सुने जाये।।”

” नही बिल्कुल नही!! मैं तो ब्रेकअप के बाद ‘ लम्बी जुदाई’ सुनने लगा तो एक दोस्त ने कहा ,कौन से जमाने में जी रहे हो यार,मैने कही क्यों__ तो कहता है आजकल लड़कियाँ ब्रेकअप के बाद दिल पे पत्थर रख के मुहँ पे मेक’प कर लेती हैं,और तुम्हारा बावरा मन जाने क्या चाह रहा,सम्भालो यार खुद को।मैनें संभाल लिया और तबसे जस्टिन बीबर सुनने लगा।।”

” वो क्या गाता है गुरू??”

” पता नही भाई!! मैं तो फैशन के मारे सुनता हूं, लोगो को भले गाने का एक शब्द ना समझ आये पर बनेंगे ऐसे जैसे बहुत बड़े अन्ग्रेजी संगीत के ज्ञाता हो,  आस पास इम्प्रेशन मारने एक आध गाना पता होना चाहिये ना।”

   कुछ देर पहले अपने दिल से दुखी राजा के मन का कुहासा बन्टी की बातों से छन्ट गया,अपनी पूरी ऊर्जा के साथ वो गाड़ी भगाता अगले ही पल बांसुरी के दरवाजे खड़ा था।।

   दरवाजे को प्रमिला ने खोला,और पूरे आदर के साथ दोनो लड़कों को अन्दर बिठाया।।।

    अपने पापा के ऑफिस निकलते ही माँ बेटी में सारी बातें हो चुकी थी,बांसुरी ने पापा की नाराजगी का कारण माँ को बता ही दिया था,प्रमिला को वैसे भी पहले से ही राजा पसंद था पर पति की खिलाफत करने की उस भारतीय नारी ने आज तक।कल्पना भी नही की थी,इसीसे अपनी सोच में गुम प्रमिला ने बांसुरी को आवाज़ लगाई।।
    इस वक्त पे माँ और बेटी दोनो यही चाहती थी की कोई भी बाहरी व्यक्ति ना आये और वो लोग राजा के साथ बैठ कर आगे क्या करना है कैसे करना है कि रूपरेखा पर चर्चा कर सकें….पर भगवान को भी कभी कभी अपने प्रियजनों से हँसी मजाक करने का मन करता है इसिलिए वो बुआ जी जैसे लोगों की सृष्टि करतें हैं ।।

    बांसुरी अपने कमरे से उतर कर आयी ही थी कि दरवाजे को भड़भड़ाती बुआ जी का आगमन हुआ।।

” अरे कौन मेहमान बैठे हैं परमिला?”

  बुआ जी का अक्समात आगमन सभी को चकित कर गया।।

“राधेश्याम जी गैस वाले हैं ना,, उन्ही के लड़कें हैं जिज्जी राजकुमार!! “

” हाँ हाँ!! मिले रहे उस दिन !! याद आ गया । औ बेटा कहो कैसन आना हुआ,सब कुसल मंगल घर में,कभी ऐसने अपन अम्मा को भी ले के आओ, अवस्थीन का भी चरन धूलि पड़े घर मा, ये कौन लड़का है जो साथ मे बैठा है।।”

” प्रणाम बुआ जी,ये हमारे भाई हैं मौसी के लड़के _ रविवर्मा नाम है।”

” हैं,तुम्हरी मौसी का सादी(शादी) वर्मा में हुआ रहा का,कायस्थों को ब्याह दिये लड़की।”

” नही नही बुआ जी इनका नाम ही रविवर्मा है सरनेम उपाध्याय लिखते हैं ।”



” तो बेटा तुम ऐसा उजबक नाम काहे रक्खे।”

” बुआ जी अब क्या बताएँ,ऐसे ही उटपटांग शौक हैं हमारे।”

  बुआ जी ने बहुत ही बुरा सा मुहँ बना के मुहँ फेर लिया __” परमिला चाय वाय पिलाओगी कि खुदै आके बना लें।।”
    वापस मुहँ घुमा के बन्टी से पूछा__” पढ़ते लिखते भी हो कुछ??”

” जी दिल्ली में नौकरी करते हैं ।”

नौकरी की बात सुनते ही बुआ जी की आंखों में चमक आ गयी,उन्हें बांसुरी के लिये घर बैठे चमचमाता रिश्ता दिखने लगा।।
” अरे वाह बचुआ!! कितना नोट कमा लेते हो ।।”

” बस बुआ जी आपके आशीर्वाद से अस्सी हज़ार महीना बना लेते हैं ।”

  बन्टी भी बुआ जी की गिद्ध दृष्टी को ताड़ चुका था इसिलिए वो भी मज़े लेने लगा

” और कौन कौन है घर में,मतलब भाई बहन ,दादी चाचा??”

” बस हम ,मम्मी और पापा!! इकलौते हैं ।।”

बुआ जी के चेहरे पे बिल्कुल ऐसे भाव थे जैसे कई दिनो से खिचड़ी का पथ्य सेवन करते पीलिया के रोगी के सामने छप्पन व्यंजनों से सजी थाल परोस दी गयी हो।।हर एंगल से देखने पर भी इस सजीले नौजवान मे उन्हें कोई कमी नज़र नही आयी।।

   वो अभी अपनी बात आगे बढ़ाती कि राजा ने अपनी बात कहनी शुरु की__

  ” बुआ जी ,हमें जादा घुमा फिरा के कहने की आदत तो है नही,हम साफ साफ ही कहेंगे।”

  अभी तो बस मन में आया था कि इस दिल्ली वाले से बात चलाऊँ और ये राजा समझ भी गया,जो दहेज की बात शुरु कर रहा,बुआ जी ऐसा सोच ही रही थी कि राजा ने विस्फोट कर दिया__

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” हम बांसुरी से शादी करना चाहते हैं ।”

प्रमिला और बांसुरी चुप बैठे रहे पर बुआ जी पर जैसे बिजली सी गिरी

” हैं!! क्या करना चाहते हो??”

” शादी करना चाहतें हैं बांसुरी से।”

बुआ जी कभी राजा को कभी बांसुरी को देखने लगी, उन्हें अपनी आंखों पर विश्वास ही नही आ रहा था,जिस छोरी को उसके सांवले रंग के लिये आज तक वो माफ नही कर पाई थी आज उसके लिये साक्षात रामरतन पंचाग के श्री राम की छवि सा सुन्दर लड़का बाहें पसारे खड़ा था।
     बोलो इसे कहतें है किस्मत!! है क्या इस छोकरी मे,भले ही अपने सगे भाई की बेटी है पर ना रूप ना रंग,पर इसे ही किस्मत कहते हैं ।।
      बुआ जी को अपने रूप रंग पे इस बुढऊती आने तक भी नाज़ था,उनके अनुसार उनकी शादी किसी कलेक्टर से होनी थी ,वो तो कंजूस भाई ने दहेज बचाने को ऐसी सुन्दर गुलाब की कलि को एक अदना से क्लर्क से ब्याह दिया।।
        अपने सारे भावों को समेट कर उन्होनें राजा से पूछा __” काहे राजा बाबू तुम्हरे घर सब तैयार है का?

” नही अभी तो नही,पर हो जायेंगे।।”

” पर बेटा तुम ठहरे कान्यकुब्ज,हम सरजूपारी !! बडी मुस्किल आयेगी।।

बुआ जी की बात पर बन्टी उचक पड़ा __” बुआ जी मुश्किल सलटाने के लिये आप हैं ना,,देखिए बुआ जी,अब आपको ही तारणहार बन कर इन दोनो की नैया को पार लगाना पड़ेगा,,चाहे जो हो जाये।”

” हम !! हम ठहरे अनपढ़ ,तुम पढ़ो लिखो के बीच हम का बोलेंगे बेटा ।।”

” अरे बुआ जी खुद को कम ना समझिये!!! आप जितनी सुन्दर है उससे कहीं ज्यादा आप सुलझी हुई और समझदार लगती हैं हमे।।

” कह तो ठीके रहे हो बेटा पर बांसुरी का बाप भी कम ज़ीद्दी नही है,बचपन से अपने छोटे होने का फायदा उठाता रहा है,और आज तक उठा रहा है,एक बार उसने कह दी फिर कोई उसकी बात नही काट सकता।।”

” वो बाद में निबटाएंगे बुआजी,पहले ऐसा किजीये ना एक बार आप और आंटी जी चल कर राजा की अम्मा यानी हमारी मौसी से मिल लेते,देखिए शादी ब्याह तो असल में घर की औरतों को ही तय करना होता है,,है ना…जब घर में दामाद आता है सेवा जतन कौन करता है सास!!! बहू जब ससुराल जाती है,किसके साथ सबसे अधिक समय बिताती है,सास के साथ ना!! दोनों तरफ ही औरतों को ही सब बखेड़ा देखना समझना है तो सही यही रहेगा की एक बार आप लोग आपस में मिल लो,, फिर यदि आप लोगों को सही ना लगे तो ना करना दोनो का ब्याह।।

” ठीक है बेटा तो यहाँ लेते आओ अपनी मौसी को भी।”

” नही बुआ जी घर पर नही,,कल घाट वाले शिव मन्दिर पर आप दोनों आ जाईये बाँसुरी को लेकर, हम दोनों आ जायेंगे मौसी जी को लेकर।।पूरी बात वहीं तय कर लेंगे,,एक बार आप लोगों का मन मिल जाये,फिर तो जय शिव शंभू!!भोलेनाथ चाहेंगे तो भाई की बारात मे नागिन डांस करने के बाद ही अब दिल्ली जाऊँगा।।”

  बन्टी की बात पर सभी खिलखिला उठे….प्रमिला हँसते हुए मिठाई लेने अन्दर चली गयी और राजा और बन्टी वापस जाने उठ खड़े हुए।।

   बांसुरी दोनों को दरवाजे तक छोड़ने आयी।।मुस्कुराती हुई दरवाजे को पकड़ी खड़ी बांसुरी को देख राजा ने पूछा __

   ” क्या हो गया!! बहुत मुस्कुरा रही हो।”

   ” हम्म बना दिया ना अपने जैसा,कहाँ हम सोचते थे तुम्हें पढना लिखना सीखा देंगे उल्टा तुमने ही हमे हमारी पढ़ाई से दूर कर दिया।।”

” ऐसे काहे बोल रही हो,हमने कब मना किया पढ़ने से।।”

” जब दिमाग से बाहर जाओगे तब तो पढ़ पायेंगे, अगले हफ्ते पेपर है हमारा,सेलेक्शन हो गया तो एक महीना ट्रेनिंग करने बाहर चले जायेंगे यहाँ से।”

” ओह हो एक मिनट ,ये नया पेंच क्या है भाई!! बांसुरी नौकरी भी करने की सोच रही हो क्या!! लगता है राजा ने तुम्हें बताया नही,मैं बता देता हूँ,हमारी मौसी जी औरतों की नौकरी के तो सख्त खिलाफ हैं,तो कल जब मन्दिर आना अपनी पढ़ाई नौकरी पेपर इत्यादी से सम्बंधित कोई चर्चा वहाँ ना करना,वर्ना बनती बात बिगड़ जायेगी।।
    यार देखो !! तुम लोग ना धीरे धीरे घर में विस्फोट करो,ऐसा ना कर देना कि सब घनघोर विरोधी हो जायें तुम्हारे।”

” अच्छी बात है रविवर्मा जी,हम कल कुछ नही कहेंगे।।” बांसुरी और राजा फिर मुस्कुराने लगे।

” बना लो बेटा!! मेरे नाम का तुम भी मजाक बना लो, पर यही नाम तुम दोनो के शादी के कार्ड मे शुभाकांक्षी में छपने वाला है,समझे।।”

” समझ गये गुरदेव,चलें अब।।

       मैं ना मांगूंगा धूप धीमी धीमी……
              मैं ना मांगू चाँदनी
     मेरे जीने में तुझसे हो इश्क दी चाशनी।।

  दोनों भाई गाड़ी में गाने को ट्यून करते हँसते मुस्कुराते घर की ओर चल पड़े ।।

क्रमशः

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aparna…

















    



 

खुरापातें….

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Son :- मॉमा s e r लिखुँ या s r e ? सर की स्पेलिंग के लिए?

मॉम:- sir …..😡😡😡

#online classes rocks

#kids rockstars…

Originally mine u can share it…😂😂

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aparna …

कुछ खुरापातें…

She posted a ‘roti aloo ki sbji and dal ki thali ” photo on her wall and wrote …

Friday lunch….

खुरापाती ख्याल आया कि लिख दूँ

–चल finally तुझे खाना तो मिला।

पर मन की मन में रह गयी,नही लिख पायी, संस्कार बहुत है न मुझमें।

Next day she again posted her photo and wrote .. gain half kg after eating my favorite panipuri…

एक और खुरापात आई दिमाग में …

अच्छा हुआ बहन कुछ तो गेन किया वरना जिस ढंग से तू डाइट कर के पतली हो रही है, यूनेस्को वाले तुझे देख हमारे यहाँ अकाल न घोषित कर दें।

पर कह नही पायी क्योंकि संस्कार बहुत है ना मुझमें।

शादी.कॉम-13

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   रूपा की बहन रेखा को आये पूरे दो दिन बीत गये, अपनी बड़ी बहन की चाक चौबंद चौकीदारी में रेखा दुबारा राजा की जिम का रुख नही कर पाई।।
    मिलने की आस जगा कर भी जब रेखा मिलने नही आई तो लल्लन की बेचैनी घड़ी की हर टिक टिक के साथ बढ़ती चली गई,अब तो राजा प्रिंस और प्रेम सभी को उसके बारे में पता था,सभी उसके लटके हुए चेहरे का कारण जानते थे,इसलिये उसे उस समय किसी ने नही छेड़ा ।।
    राजा ने घर जाते समय उसे साथ चलने की पेशकश भी की जिसे ठुकरा कर सबसे अंत मे जिम का ताला लगा कर बेचारा अपने घर को चल दिया।।
    लल्लन को नही पता था कि घर पे एक सरप्राइज़ उसका इन्तजार कर रहा था।।
लल्लन के पिता और भाई की अफसरी ने उसके घर को एक अलग अदब और शिष्टाचार में रंग दिया था, घर पे सभी के लिये पढ़ना लिखना सांस लेने जितना महत्वपूर्ण था,इसिलिए लल्लन भले ही राजा की चंडाल चौकड़ी का हिस्सा था पर उन के साथ घूमते फिरते भी उसने अपनी पढ़ाई का हरजा नही होने दिया था,,वो दिल्ली भी किसी सरकारी नौकरी के सिलसिले में ही गया था।।
      थके हुए तन और बुझे हुए मन से जब लल्लन ने घर में प्रवेश किया,तो लगा  जैसे सभी उसी का इन्तजार कर रहे थे।।उसके घर मे घुसते ही आगे बढ़कर उसकी दीदी ने उसके मुहँ में कलाकन्द ठूंस दिया,,बेचारा इस हमले के लिये तैयार नही था,इतने बड़े टुकड़े को जब तक गालों के दोनों तरफ सेट करता तब तक माँ हाथ में गुलाब जामुन की कटोरी लिये खड़ी हो गई ।।
     मुहँ में गुलाब जामुन की जगह बनाते हुए सर ऊपर नीचे ‘रुको माँ जरा सबर करो’की मुद्रा में हिलाते हुए लल्लन ने पुछा __” आखिर हुआ क्या है?? काहे की मिठाई खवा रहे।”
  ” रेल्वे का जो एग्ज़ाम तुम दिये रहे,उसका रिजल्ट आ गया है,,तुम पास हो गये हो।”

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  लल्लन के बड़े भाई ने आगे बढ़ उसकी पीठ थपथपा के कहा।।

  ” बस हमारी आखिरी चिंता भी दूर हुई,क्यों लता देखी खुश हो अब,,तुम्हारे तीनो बच्चे सरकारी अफसर बन गये,,भई जब सरकार हमें मौका दे रही तो हम काहे लाभ ना उठायें,,बहुत बढ़िया लल्लन,आज हमारा सब चिंता दूर हो गया,,बस अब तुम्हारे दीदी और भैय्या का शादी हो जाये तो एक बार तुम्हारी अम्मा को बद्रीनाथ ले जायेंगे।।”

लल्लन का लटका चेहरा खिल उठा,आखिर उसे भी अपने बड़े भाई और दीदी जैसे नौकरी मिल ही गई,, उसके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई जिसका परिणाम ये हुआ कि बिना किसी डर के लल्लन ने रेखा को ये खुशखबरी देने फोन लगा दिया__

” हेलो शो…,रेखा!!”

” तुम कौन बोल रहे??”

” भाभी जी चरण स्पर्श!! हम लल्लन बोल रहे।”

” बोलो”
रूपा की आवाज़ सुन लल्लन के प्यार का भूत भाग कर वापस बरगद पर लटक गया,वो जब तक हिन्दी वर्णमाला का जाप करना शुरु करता’ अ  ओ…’ तब तक में रेखा ने आकर अपना फ़ोन जिज्जी के हाथ से झपट लिया_ तुमको किचन में तुम्हारी मदर इन लॉ बुला रही हैं “
  और कमरे में भागी” हाँ!! बोलो हम हैं।”

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” थैंक गॉड!! तुम्हारी आवाज़ तो सुनने को मिली।। दो दिन से तुम्हारे बताये टाईम पर रस्ता देख रहे,जिम काहे नही आई।।”

” अरे क्या बताऊँ,मेरी दीदी के अन्दर हिटलर की आत्मा आ गई है,दिन भर तानाशाही,,मेरा फोन भी उन्हीं की निगरानी में रहता है,,कैसे करती फोन??

रेखा अभी भी धर्मसंकट में थी,,लुक्स और घर बार के हिसाब से राजा का पलड़ा ही भारी पड़ रहा था, पर वो जैसी अन्ग्रेज तबीयत की थी उसपे उसे रोहित का साथ भी भा जाता था।।।उसे इस बात पर भगवान से थोड़ी रुष्टता थी,कि क्यों भोले भंडारी उसे सही राह नही दिखा देते।।इसिलिए उसने अपने स्वयं के विवाह के लिये सोलह सोमवार व्रत करने का आज सुबह ही निश्चय किया था।।

” अच्छा शोना!! तुम्हे पता है हमारे लिये कितनी लकी हो तुम! देखो तुम हमारे शहर आई,और हमारा रेल्वे का जोइनींग लेटर भी आ गया,,हमारी नौकरी लग गई बाबु।””

सोलह सोमवार करने का संकल्प फलीभूत हुआ, रेखा को अपनी डगर दिख गयी,अपनी मंजिल मिल गई,अपना शुद्ध सात्विक प्रेम उसने चुन लिया।।

” हाय सच्ची!! मजाक तो नही कर रहे?? लव यू बाबु,,तुम्हें पता है तुम्हारी नौकरी के लिये भी व्रत करने का सोच रही थी मैं,अच्छा सुनो,अभी फोन रखती हूँ,कल कैसे भी कर के जिम आ जाऊंगी ,फिर बात करते हैं ।”

  रेखा ने हमेशा जागती आंखों से एक सुन्दर सपना देखा था,कि एक सजीले नौकरी पेशा लड़के से उसका ब्याह हो जाये,और वो अपने पति के साथ उसकी नौकरी वाले शहर में अपना छोटा सा घोंसला सजाये,जहां ना सास की चिकचिक हो,ना ससुर का दबदबा,,ना ननंद के तेवर हों ना जेठानी के नखरे।।।
अब लल्लन की नौकरी लग जाने से रेखा को उसका सलोना सपना पूरा होता दिख रहा था,,भले ही राजा हैंड्सम था,खानदानी रईस था,पर था तो सयुंक्त परिवार की कड़ी,,जो कभी किसी जनम में अपनी अम्मा का आंचल छोड़ कर बीवी को ले अलग घर नही बसा सकता था,,बस रेखा ने चुन लिया…..रोहित ही है जो उसका जीवनसाथी बनने के सर्वथा उपयुक्त है!!

अगले दिन सुबह रसोई का चाय नाश्ता निपटा के रूपा जब अपने कमरे में बैठी फेस बुक पे सुबह के नाश्ते आलू पूरी की फोटो अपलोड कर रही थी, तब चुपके से रेखा अपना फोन लिये निकल पड़ीं ।।
   जिम में लल्लन सभी का मुहँ मीठा करा रहा था।।

    रेखा को बाहर दरवाजे के पास ही प्रिंस और प्रेम मिल गये__” हाय डॉग्स!! वेयर इस रोहित??”

” अन्दर है।” गुस्से मे तमक के प्रेम ने जवाब दिया।
  अपनी सैंडल चटकाती रेखा भीतर चली गई

” इतना गुस्सा मे काहे जवाब दिये,कित्ता प्यार से पुछि रही बेचारी।।”

” इत्ता प्यार से शराफत से हम दोनों को कुत्ता बोली रही समझे!!”प्रेम के जवाब को सुन कर भी प्रिंस को भरोसा ना हुआ__” जो भी बोलो पर अन्ग्रेजी मे गाली भी बड़ी सुहानी लगती है,,नई??”

  रेखा के अन्दर बचपन से फिल्मी कीड़ा था,,वो भीतर जाते ही लल्लन के गले से लग गई,जिम में उपस्थित सभी की आंखें चौडी हो गई ।।

” आई रे आई रे,ले मै आई हूँ  तेरे लिये,तोड़ा रे छोड़ा रे हर बंधन वो प्यार के लिये”

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  जिम में बजने वाला गाना अचानक नायक और नायिका के लिये बैकग्राउंड म्युसिक बन गया….
 
  बाँसुरी ने धीमे से जाकर दोनो को आवाज़ दी और उन्हे अन्दर ऑफिस में चलने को कहा

ऑफिस के अन्दर राजा बांसुरी,प्रेम प्रिंस लल्लन और रेखा आगे क्या करना है पर सोच विचार में डूबे थे।।

  ” रोहित लिसन!! मेरे घर वाले कभी तुमसे शादी के लिये राज़ी नही होंगे,हमें कुछ और सोचना पड़ेगा।।”

” हाँ वैसे रेखा ठीके कह रही,हम भी तो जानते हैं,भाभी के बाऊजी बड़े जब्बर हैं,कभी ई सादी ना होने देंगे।।”

  ” तो अब क्या करना है शोना,,तुम जो बोलोगी हम सब मानने को तैयार हैं,वैसे हमारे घर में कोई दिक्कत नही होगी,बस एक ही छोटी सी परेशानी है,अभी तक हमारे बड़े भाई और दीदी की भी शादी नही हुई,तो बस ये हो सकता की अम्मा बाबूजी कम से कम दीदी की शादी तक हमको रुकने बोले।”

” पर हमारे पापा उतना नही रुकेंगे,,वो तो अभी पिंकी की इन्गेजमेंट  रतन से हो गई,तो थोड़ा चुप बैठे हैं,पर ज्यादा से ज्यादा एक महीना ,उसके बाद हमारी शादी कर ही देंगे।।”

  “तो बताओ क्या करें फिर।।”

   ” हमें मन्दिर में शादी करनी पड़ेगी रोहित,बाद में घर जाकर घर वालों का आशीर्वाद ले लेंगे, लेकिन अगर अभी जब तक हम दीदी के घर पे हैं हमारी शादी नही हुई तो समझ लेना कि हम तुम्हारा ब्यूटीफुल पास्ट बन जायेंगे,,फिर आ जाना हमारी शादी की दावत खाने।।”

   लल्लन से ज्यादा हडबडी इस शादी की राजा को थी,क्योंकि उसे भी पता था अगर रेखा की लल्लन से शादी नही हुई तो ये ढोल उसके गले ही बन्धेगा ।।

  ” हाँ रेखा एकदम ठीक कह रही,हम तो कहतें हैं कल ही शादी कर लो,हम सब तैयारी कर लेंगे,तुम दोनो बस समय से आ जाना।” राजा की बात सुन प्रिंस ने अपनी बात रखी__

  ” भैय्या जी ठीके कह रहे,कल हम कोर्ट पहुंच जायेंगे,वहीं बकील साहब के सामने साईन उन करके माला बदल लेना।”

   ” काहे प्रिंस!! क्राईम पैट्रोल बिल्कुल नही देखते हो क्या?? ऐसे कोर्ट में शादी के लिये ,एक महीना पहले अर्जी देना पड़ता है,वो अर्जी का आवेदन का फोटो अखबार में छपता है,अगर कोई दावा आपत्ति करना चाहे तो कोर्ट जा कर कर सकता है,फिर एक महीना बाद शादी की डेट मिलती है जिसमे शादी होती है।।”

  ” बन्सी हम भी देखते थे पहले,,हमको  तो एकदम झन्नाट लत लग गया था क्राईम पैट्रोल का, हम भी वैसे ‘ सहाय’ जैसे खुदरे पुलिस बनने का सपना भी देखे लगे थे,,पर हमारे साथ का होता था जानती हो,घर पे कूकर का सिटी भी बजता था तो हम चौंक जाते थे,घर पे किसी काम के लिये कोई मिस्त्री मास्टर आया तो हम उसको अपनी पैनी नज़र से घूरते रहते थे,,हमारे बाऊजी की सुनारी है,बेचारे जब चावड़ी निकलते हम रोज पीछे से टोकते ‘ बाऊजी सतर्क रहना,सुरक्षित रहना।’
    हमको तो सपने भी क्राईम पैट्रोले के आने लगे, छत पे खड़े हों और कहीं आजू बाजू की छत पर एक तरफ शुक्लाईन भाभी खड़ी हो,और दुसरी छत पे तिवारी भैय्या तो हमको लगता ज़रूर ई दोनों का कोई चक्कर चल रहा है,हमारे दिमाग में जासूसी घुस गया,अम्मा अलग चिल्लाती की उनका ये रिस्ता का कहलाता है छूटा जा रहा है,पूरा एक महीना निकल गया,उसके बाद एक दिन अम्मा हमारे हाथ से रिमोटवा को छीन डारी,और अपना सीरियल लगा ली,पर अम्मा के साथ गज़ब हो गया,उनको बेचारी को एक ही एपिसोड पूरा एक महीना झेलने का आदत था,पर उसी एक महीना में जाने का उलट फेर हुआ कि ‘ई रिस्ता का कहलाता है’ के सारे किरदार ही बदल गये,असली हीरोइन छोड़ दी रही सीरियल, और उसके लड़िका बच्चा बड़े हुई गये,,अम्मा अपन सिर धुन ली,बोली ‘ अब हमको नई देखना ई सीरियल,ये कोई तरीका होता है ?? इत्ता फास्ट भगायेंगे तो सिरियल नही ये लोग फिलिम बनायेंगे। और उसके बाद अम्मा ओ सीरियले देखना बन्द कर दी।।”

” फिर अब?? अब तुम्हारी अम्मा टी वी नही देखती?” बांसुरी के सवाल पर प्रिंस ने जवाब दिया

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” देखती है ना!! पर अब अम्मा रिस्ता उस्ता नही देखती अब अम्मा ‘ सावधान इंडिया ‘ देखती है।”

” ये तुम दोनो का अति महत्वपूर्ण टी वी परिचर्चा समाप्त हो गया हो,तो लल्लन और बहन जी का शादी डॉट कॉम पे विचार किया जाये।” प्रेम की इस बात पे राजा ने भी जल्दबाजी दिखानी शुरु की, उसे भी रेखा के साथ सम्भावित विवाह से बचने का यही एकमात्र उपाय दिखा ।।

” आई एम नॉट ए बहन जी,,कॉल मी रेखा ओनली, बोलो रोहित क्या करना है आगे।”

” करना क्या है,शादी करना है और क्या?? ऐसा करते हैं,लल्लन कल सुबह 9 बजे तुम गौरी शंकर मन्दिर पहुंच जाना, प्रिंस तुम बड़े तिवारी पण्डित को लेकर पहुंचना,और प्रेम फूल माला और बाकी पूजन सामग्री ले आयेगा,हम रेखा को लेकर आ जायेंगे, जितनी जल्दी सब निपट जाये उतना अच्छा।।

‘ बांसुरी कल तुम कॉलेज मत जाना,हम रेखा को लेकर तुम्हारे घर ही आयेंगे,तुम्हारे यहाँ ये शादी के लिये तैयार हो जायेगी और फिर वहाँ से तुम दोनो को लेकर हम मन्दिर चले जायेंगे।क्यों ठीक है ना??”

” ठीक है राजा,तो ऐसा करते हैं,हम अभी रेखा को साथ लिये बाज़ार निकल जाते हैं,कल पहनने के लिये रेखा को कुछ शॉपिंग भी तो करना होगा।”

हाय रि किस्मत!!! कहाँ 3 महीने की ब्राइडल सिटिंग,कहाँ हर एक फंक्शन में पहने जाने वाली अलग ड्रेस से मैचींग सैंडल और ज्वेलरी और कहाँ ये धूम फटाक शादी!!!
    पर इसका भी मज़ा है,,थोड़ा एडवेंचर तो इसमें भी है,रेखा ने अपने मन को समझा लिया,अरे हम आपके हैं कौन की माधुरी नही बन पाये तो क्या,दिल की माधुरी तो बन ही सकते हैं,उसमें भी तो आमिर खान के साथ भागना ही पड़ता है आखिर।।

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  राजा के साथ बांसुरी और रेखा ज़रूरी सामान खरीदने चली गई,प्रिंस और प्रेम तिवारी पण्डित को खोजने निकले और लल्लन अपनी तैयारी में लग गया।।

   अगले दिन सुबह राजा और रेखा निकलने ही वाले थे कि रेखा के बाबूजी का आगमन हो गया,वो जिस किसी काम से आये थे,उससे कहीं अधिक आवश्यक कार्य अपनी पुत्री को वापस लेकर जाना था,,इसीसे सुबह सुबह जल्दी जल्दी सारे काम निपटा के सीधे बिटिया की ससुराल पहुंच गये।।
    रूपा जहां पिता को देख कर प्रसन्न हुई वहीं रेखा का चेहरा लटक गया।।

‘ ए रेखा ठहरो!! सुबेरे सुबेरे लल्ला जी के साथ कहाँ चल दी तुम??’ और सुनो भले बाऊजी लेने आ गये तो क्या,हम इत्ता जल्दी तुमको जाने नई देंगे समझीं, एक तो पिंकी की सगाई में आई नई,और अब भागे की तैयारी।।”

” अरे जिज्जी हम कहाँ भाग रहे,यू डोंट वरी!! हम अभी रहेंगे तुम्हारे पास।।” दीदी से अपने मन का कहने के बाद रेखा अपने बाऊजी से मुखातिब हुई

” पापा हम बस यूँ गये और यूँ आये,राजा की बेस्ट फ्रेंड है बांसुरी,उस दिन मिली थी ना जिज्जी तुम ,आज उसके कॉलेज में कुछ फंक्शन है,तो हमें बुलाई है ,मेक’प में  हैल्प करने,बस हम उसे रेडी कर के अभी आये,,चले राजा?'”

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बड़ी मुश्किल से सबसे जान बचा के दोनों वहाँ से निकले और बांसुरी के घर पहुंच गये,बांसुरी पहले ही सारी तैयारी पूरी किये बैठी उन्हीं दोनों का रास्ता देख रही थी।।

” नमस्ते चाची जी!! हम राजा हैं,अवस्थी जी के लड़के,अगले मोहल्ले रहते हैं,बांसुरी कहाँ हैं??”

“ऊपर आ जाओ राजा ,,हम यहाँ अपने कमरे में ही हैं

” अच्छा अच्छा!! ऊ गैस वाले अवस्थी के लड़के हो?” बुआ जी के इस सवाल पे राजा ने सर ऊपर नीचे कर हाँ में जवाब दे दिया,बुआ जी ने बहुत इसरार कर राजा को वहीं बैठा लिया,बांसुरी नीचे आकर रेखा को अपने साथ ले गई ।।

” करते का हो बिटवा?? सादी ब्याह भया की नाही, हम बन्सी की बड़ी बुआ है,कोई अच्छा लड़का नजर में हो तो बताना,वैसे बच्चे कितने तुम्हारे?”

“बुआजी अभी हमारी शादी नही हुई।”
राजा के माथे पर लिखी उसकी जन्म कुंडली का ऐक्सरे निकालती बुआ जी ने अपनी आंखे छोटी छोटी कर बड़े आश्चर्य से कहा__” हैं अब तक ब्याह नही हुआ,,क्यों बेटा दिखने में तो अच्छे खासे हो।।”

” अब ये क्या बतायेंगे जिज्जी!! आप भी ना,लो बेटा चाय पियो,हम ऊपर बांसुरी को भी चाय दे आते हैं,अरे ये तो दोनो लड़कियाँ नीचे ही उतर आईं।”

  मैरून और गहरे हरे रंग के कॉम्बिनेशन लहन्गे में रेखा जितनी खिल रही थी,उतनी ही पीले सलेटी लहरिया लहन्गे में बालों को खुला छोड़ी सांवली सलोनी बांसुरी भी दमक रही थी।।राजा ने बांसुरी को देखा,बाँसुरी ने इशारे में उससे पुछा की ” मैं कैसी लग रही” आंखों से ही ” बहुत सुन्दर” बोल कर राजा ने शरमा कर चेहरा नीचे झुका लिया।।
   तीनों साथ साथ घर से निकल गये।।पर राजा और बांसुरी की इस आँख मिचौली को वहाँ और भी किसी ने देख लिया था।।

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” अरे बसुरीया कहाँ चली तू?? इत्ता सज धज कर तो कभी ना निकली घर से,ई छोरी जा कहाँ रई ।”

” इनकी शादी कराने जा रही बुआ” रेखा का हाथ अपने हाथ मे ले बांसुरी ने हँस के कहा और तीनो वहाँ से निकल गये।।

मन्दिर में पण्डित प्रिंस प्रेम और पूजन सामग्री सब पहुंच चुकी थी,बस कमी थी दूल्हा और दुल्हन की,।।
  राजा रेखा और बांसुरी के पहुंचते ही पण्डित जी अपनी तैयारियों मे लग गये,सब आस पास बैठ कर लल्लन का रास्ता देख रहे थे कि पण्डित जी ने राजा भईया के गले में पड़े स्टायलिश स्टोल को बांसुरी की चुन्नी से बांधा और आचमन कर मन्त्र पढ़ते हुए उन दोनो पर जल सिंचन किया ही था कि रेखा चीख पड़ी __ ओह माय गॉड!! पण्डित जी ये दोनो दूल्हा दुल्हन नही है!! दुल्हन मैं हूँ ।।

  ये सब इतनी हडबडी मे हुआ की बांसुरी या राजा कुछ बोल या समझ पाते कि जो घटना था घट गया, दोनों एक दूसरे को देख ही रहे थे कि रेखा ने झट बांसुरी की चुन्नी खोल दोनो को अलग किया,उतनी देर में लल्लन भी पहुंच गया।।

” कहाँ रह गये थे लल्लन!! अभी तुम्हारी जगह पण्डित जी भैय्या जी और बन्सी के फेरे फिराये दे रहे थे,,बच गये गुरू!! “प्रिंस की बात पे लल्लन ने माथे का पसीना पोछा और बोला_

  ” घर से निकल रहे थे कि अम्मा पीछे लपक ली, सत्ती माई में रोट चढाये गई,उनको वापस घर उतार के निकले कि गाड़ी का तेल खतम हो गया।।”

” वॉट तेल रोहित!! इट्स फ्युल!! चलो आ तो गये,अब आओ जल्दी यहाँ बैठो,फेरों का भी तो मुहूर्त होगा।।”

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” यस ऑफ़कोर्स ! फेरों का भी मुहूर्त है,पण्डित जी अब असली दूल्हा दुल्हन आ गये,शुरु कीजिए।।”

बांसुरी ने रेखा और लल्लन का गठजोड़ किया और मुस्कुराते हुए राजा की बाजू मे खड़ी हो गई ।।शुभ मुहूर्त और मंगल स्वस्तिवचनों के साथ सप्तपदी संपन्न हुई।।।

क्रमशः

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aparna..

शादी.कॉम -12

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   “पहला पहला प्यार है,,पहली पहली बार है,
     जान के भी अनजाना कैसा मेरा यार है।।”

” अबे कौन बजाया बे! बदलो ई पहला पहला प्यार को!!”

” तो का लगायें भैय्या जी।” राजा की दहाड़ सुनते ही प्रिंस लपक पड़ा ।।जिम में लोगों का आवागमन शुरु हो चुका था,ऐसे में प्रिंस वर्कआउट के लिये गाने सेलेक्ट कर रहा था।।

” अब ये भी हमी बताएँ!! तुम्हारी अकल में ना बिल्कुले पत्थर पड़े हैं प्रिंस।।यार कैसे बनिये हो तुम ,, हमरी अम्मा तो कहती हैं बनियों से जादा दिमाग किसी के पास नई होता,,पर तुम तो बिल्कुल बमपिलाट हो।।”

  प्रिंस सदा से बाँसुरी का तरफदार था,इसिलिए आजकल प्रिंस और प्रेम में  ज़रा तनातनी रहने लगी थी।।राजा भैय्या की बात सुन प्रेम चहक उठा __

” भैय्या जी आप हम ठहरे बामण के छोकरे,हमारा तो जन्म ही होता है अपने बाप की चप्पल से पिटने के लिये।।
     ऑफ़िस में बाऊजी को उनका बॉस चमकाया आके हमको धुन देंगे,,गांव में पड़ोसी से जमीन का चिल्ला चिल्ली हुआ आके हमको सून्त देंगे,घर में बहन की शादी नही लग रही पिटाई हमारी होगी,और तो और अम्मा ने लौकी बना दी तब भी हमी धरे जातें  हैं ।।।
    ई तो पुन्यात्मा हैं बनिया घर में पैदा हुआ है, जैसें इनके बाप दादा सोना सहलाते हैं,ऐसे ही फूल की छड़ी से अपना लड़का बच्चा को भी सुधारते हैं, तो भैय्या जी इनको किसी का डर है ये नई,काहे दिमाग दौड़ाएंगे।।”

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” अच्छा बे तुमको बहुत बड़ी बड़ी बात सूझ रही हैं,, देख रहें हैं आजकल कुछ ज्यादा ही टर्रा रये हो।”

प्रिंस राजा की घुड़की सुन चुपचाप वहाँ से सटक लिया,।। उसे असल में भैय्या जी के दिल का हाल मालूम नही था,उसने जाकर दूसरा रोमैंटिक ट्रैक बजा दिया__
             ‘ सदियाँ समा गईं इस एक पल में,दिखने लगा सुकून दुनिया की हलचल में ….’

  तभी हल्के से दरवाजा खुला,हमेशा सलवार और कुर्ती पे चोटी बना के आने वाली बांसुरी के सुर आज कुछ बदले से थे।।
     ट्रैक पैंट पे टी शर्ट पहनी बांसुरी ने खुले बालों की उँची सी पोनीटेल बना रखी थी।।

   बांसुरी के प्रवेश करते ही सब उसकी तरफ देखने लगे…राजा भैय्या ने सिर्फ एक उड़ती नज़र डाली और वापस अपने रजिस्टर में मिलाए हुए नामों को वापस मिलाने लगे।।प्रिंस बांसुरी के इस परिवर्तन पे अति प्रसन्न हुआ और उसे बधाई देने कूद कर उस तक पहुंच गया,थोड़ी देर के लिये प्रेम भी चकरा गया।।

” वाह बंसी तुम तो बहुत-बहुत बहुत इस्मार्ट लग रही हो,।”
  बाँसुरी मुस्कुरा कर राजा की तरफ देखने लगी,इस उम्मीद से कि राजा भी शायद उसके नवेले रूप पे कोई टिप्पणी देगा,पर राजा ने सर उठा कर भी नही देखा।।बांसुरी चुपचाप अपने ट्रेड मिल पे चली गई ।
    लगभग 10 मिनट बीत जाने पर भी जब राजा एक बार भी बांसुरी का हाल चाल पूछने नही आया तो बांसुरी ने वहीं से हांक लगाई__
     ” आज क्या स्पीड रखना है हमें,,कुछ बताओगे भी या ऐसे ही बस भागते रहें ।”

  6km/hrs पे आकर राजा ने ट्रेड मिल सेट किया और वापस जाने लगा।।उसे ऐसे वापस जाते देख बांसुरी ने प्रिंस से इशारे से पूछा कि ‘ आज क्या हो गया राजा को?”जैसे इशारे मे उसने पूछा वैसे कंधे ऊपर कर प्रिंस ने जवाब दे दिया कि हमे नही पता।

  ” कब तक चुप बैठें अब तो कुछ है बोलना,
     कुछ तुम बोलो कुछ हम बोलें ओ ढोलना।।”

जैसे ही गाने के बोल जिम में गूंजे राजा ने सर उठा के प्रिंस को देखा,और बस उतने ही मे__” बदल रहें हैं भैय्या जी,बस अभी बदले।।”
  राजा की घूरती आंखों को देख प्रिंस हडबडी में म्युसिक सिस्टम तक भागा,पर तभी बांसुरी के बोल गूंजे__
         ” ए प्रिंस रुको!! काहे बदल रहे,हमें अच्छा लगता है ये गाना।।”

  ” ऊ भैय्या जी को नही ना पसंद इसिलिए बदले दे रहे।”

” अबे हम कब बोले तुमको बदलने।” राजा की घुड़की से घबराया प्रिंस मुहँ लटकाये बाहर निकल गया,बांसुरी राजा के पास आ कर बैठ गई ।।

” क्या हुआ राजा?? कुछ मूड ऑफ़ लग रहा तुम्हारा, घर पे कुछ हुआ क्या।।”

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” इस बार भैय्या जी के बाऊ जी ने कसम ले ली है कि अबकी बार अगर राजा भैय्या पास नही हुए तो इनकी हत्या कर देंगे या खुद चूहा मार दवा पी के आत्महत्या कर लेंगे।।”लल्लन बोला

बांसुरी ने आंखे तरेर के लल्लन को देखा फिर पूरी सहानुभूति से राजा को निहारने लगी।।

” अरे इसमें इत्ता परेशान होने की क्या बात,इस बार  राजा सिर्फ पास नही होंगे बल्कि बोर्ड एग्ज़ाम टॉप भी करेंगे,,हम पर भरोसा रखो।।”
  बांसुरी के ऐसा बोलते ही प्रेम भी उछल पड़ा

” हम भी यही कह रहे,भैय्या जी क्यों परेशान हो रहे, अरे पास हो गये तो ठीक वर्ना हम पूरे शहर से चूहा मार दवा खरीद कर यहाँ से बहुत दूर ले जाकर फेंक आयेंगे।।जब बाऊजी को दवा मिलेगा ही नही तो का खा कर मरेंगे।।

राजा ने खा जाने वाली नजरों से प्रेम को देखा और उठ कर अपने में ऑफिस में चल दिया,उसके पीछे पीछे बाँसुरी भी भागी,जाते जाते प्रिंस को दो कप चाय लाने कहती गई ।।

” हमें तो बताओ हुआ क्या है राजा?? कल तो बड़े खुश लग रहे थे, हनुमान जी ने ऐसा क्या मन्त्र फूंक दिया कान मे जो उदासे बैठे हो।”

” काहे परेशान कर रही हो,हमने कहा ना कोई बात नही।।”

” जब कोई बात नही ,तो हमें देखा क्यों नही,??  , हमारी नई ड्रेस पे कोई टीका टिप्पणी नही,,देखो तुम्हारे जैसे हमने भी रीबॉक के जूते पहने हैं, सुबह से तुम्हारे आगे पीछे घूम रहे,पर तुम तो जैसे इस दुनिया में हो ही नही,जाने कहाँ विचर रहे हो।।”

” थोड़ा सर मे दर्द था,और कुछ नही!! बस इसिलिए थोड़े चुप चाप बैठे थे।वैसे अच्छी लग रही हो तुम।।

” थैंक यू!! अब बताओ कि हमारी ट्रेनिंग कबसे शुरु कर रहे,,भास्कर सर के बारे में बताया था ना तुम्हें ।।”

” देखो ट्रेनिंग का जहां तक बात है,हमने लड़की पटाने में कोई पी एच डी तो की नही है,जो हम तुम्हें कुछ सीखा सके बता सकें।।तुम तो हमसे जादा समझदार हो।”

” अरे बाबा कम से कम यही बता दो कि तुम किसी लड़की में क्या देख कर इंप्रेस होते हो।।”

” अब देखो ,जहां तक हमारा सवाल है,हमें ना सभ्य संस्कारी लड़कियाँ अच्छी लगती हैं,सीधी साधी,  भोली सी,,अपने बड़ों का बात मानने वाली,कम बोलने वाली,झगड़ा फसाद ना करने वाली।।”

” बस बस हम समझ गये,,मतलब बिल्कुल हमारे अपोजिट लड़की तुम्हें पसंद है,है ना??”

” अरे नही बाबा!! वो मतलब नही है हमारा,,पर देखो एक बात सच्ची बताएँ,लड़कों को ना बहुत ही जादा ज्ञानी लड़की नही पसंद आती,उन्हें वही भाती है जिसके सामने वो जादा ज्ञानी दिखे,,वो लड़को की इस आदत को का कहते हैं …… अरे वो बोलते हैं ना का ….

” ईगो!!! मेल ईगो!! यही कहते हैं,यही बताना चाह रहे ना।।”

” अब देखो सच्ची बात बताये तो तुम बुरा मान गई,अब यही थोड़ा घुमा फिरा के बोलते तो खुश हो जातीं।।अच्छा सुनो तुम कुछ बातों का ध्यान रखना अपने सर के सामने फिर देखना कैसे तुम्हारा जादू चलता है,,, पहला तो उनकी क्लास मे कभी उचक उचक के जवाब मत बताना , नही उन्हें लगेगा इसे पढ़ाने का कोनो ज़रूरत ही नही,,दूसरा जो सवाल बन रहा उसे भी उनसे पूछना क्योंकि इससे उन्हे अन्दर से खुशी मिलेगी कि तुम उनसे कम हो,और वो तुमसे कहीं जादा बुद्धिमान हैं।।
     धीरे से दोस्ती हो जाये,तब उनका हर बात का ध्यान रखना,जैसे हमारा रखती थी,कि कौन सी आंटी फीस भरी है कौन सी नही।”
  ये बोल कर राजा हंसने लगा,बांसुरी भी।।

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” हर छोटी छोटी बात उनसे पूछ कर करना ,भले तुम करो अपने मन की पर सामने वाले को ये लगे कि तुम उनके हिसाब से सब कर रही हो,,बस यही दो चार बातें आजमा लो,तुम्हारा काम हो जायेगा।”

” काम हो जायेगा तो ऐसे बोल रहे जैसे तुम कोई गुरू घंटाल हो,,एक घन्टे में मोहिनी,सौतन से छुटकारा,प्रेमी को वश मे करें,वाले विज्ञापन के बाबा जी की तरह।।”
  बाँसुरी की खिलखिलाने की आवाज़ सुन कर निश्चिंत हो प्रिंस चाय लिये अन्दर आया।।

” बताओ अब आये हो चाय लेकर,अब तो हमारा जाने का समय हो गया।।” बान्सूरी के ऐसा बोलते ही राजा ने  भी खबर ली

“ये पहले गौ माता के पास जाकर दूध निकलवातें हैं,उसके बाद ऊ दूध लिये चमन के पास लाते हैं तब जाके कहीं चाय बनती है,,क्यों हो प्रभु,सही बोले ना हम।।”

” अरे का भईया जी,कतना तारीफ करेंगे हमारा,  लिजिये चाय लिजिये आप दुनो,हम अपनी भी यहीं ले आये।।

अभी तीनों ने अपनी अपनी चाय पीनी शुरु की थी कि जिम में बाहर से किसी ने राजा भैय्या के नाम की पुकार लगा दी,प्रिंस हम देखते हैं बोलकर बाहर दौड़ा, जितनी द्रुत गति से बाहर गया था वैसी ही त्वरित गति से अन्दर भागा__
    ” भैय्या जी ऊ भौजाई आई हैं ।।”
 
  ” हमरी तो शादी ही नही हुई,कहाँ से तुम्हारी भौजाई पैदा हो गई  बे!! कुछ भी बकते हो।

  ” अरे भैय्या जी बड़की भौजाई आई हैं,उनके साथ एक और कोनो लड़की है।।”

राजा भैय्या ने अपना एक हाथ हल्के से अपने माथे पर मारा_ ” अरे यार !! हम भूल गये रहे,,आज भाभी की बहन को स्टेशन लेने जाना था……राजा भैय्या की बात पूरी भी नही हो पाई थी कि दरवाज़ा खोल रुपा भाभी कमर पर हाथ टिकाये खड़ी हो गई।

” काहे लल्ला जी,जब जाना ही नही रहा तो हमे पहले काहे नई बता दिये,,बेचारी रेखा स्टेसन में खड़े खड़े आधा घंटा बेट करी,तब बिचारी हमें फ़ोन करी और हम इसे लेने गये।।”

” काहे इत्ती अनपढ़ है कि अकेले रिक्सा में घर नही आ सकती।।” प्रेम ने धीरे से फुलजड़ी छोड़ी और प्रेम  प्रिंस बांसुरी खिलखिला पड़े

” का बोले तुम प्रेम” ।

” कुछ नही भौजी!! हम बोले तनिक बैठ जाओ,हम समोसा मँगा देते हैं,ए प्रिंस लगाओ यार लल्लन को फ़ोन लगाओ , कहाँ है आजकल??”

प्रेम की इस बात का सभी ने एक स्वर में समर्थन किया।।
रेखा राजा में अपने होने वाले पति को देख रही थी, इसलिये उसके चेहरे पर लज्जा का अभिनय था, शर्म की लुनायी थी।।

राजा अपने मन में त्रस्त था,उसके मन में कुछ समय पहले खिला प्रेम का फूल हवा पानी के अभाव में अकेला इधर उधर डोल रहा था,उसे जिस माली के स्नेह सिंचन की आवश्यकता थी,वो माली अवकाश ग्रहण कर दूसरे की बगिया संवारने में खुद को व्यस्त किये था।।

  बांसुरी रेखा को देख रही थी जो  लगातार राजा को ताड़ रही थी,,बांसुरी राजा भैय्या के चार्म से अपरिचित थी,ऐसा नही था।।वो आये दिन ही जिम में आने वाली अनोखी अलबेली वारान्गनाओं के लटकों झटकों का कारण भली प्रकार समझती थी,पर रेखा की दृष्टी उसे चुभ गई ।।

“कहाँ है भई तुम्हारा समोसा?? इत्ती देर लगा दी,ए प्रेम ऊ लल्लन को फोन घुमाओ की तली मिर्ची भी हमारे लिये अलग से लेता आयेगा।।”

रूपा की इस बात पे राजा ने फ़ोन लगाया__” भाभी औ कुछ मँगा दें,,जलेबी खाओगी??”

” जो मँगाना है जल्दी मँगा दो,,हम तो रेखा को लेके घर जा रहे थे,यही बोली कि राजा हमे लेने कैसे नही आया,चलो दीदी देखे क्या कर रहा ,इसिलिए आ गये,बस चाय पी के निकल जायेंगे हम,,पूरा काम बिखरा पड़ा है,,हम ना करें तो इस घर का एक पत्ता ना हिले,,बहू नही नौकरानी हैं हम….

” अरे का भौजी,नौकरानी नही आप रानी हैं रानी!! कभी रूप देखी हैं अपना,,एकदम किसी रियासत की महारानी सी लगती हैं ।”प्रिंस की बात पर रूपा का बिगड़ा मूड संभल गया

” ऊ तो हम खानदानी रईस जो ठहरे।”भाभी की इस बात को सुन राजा को हँसी आ गई,,वो कई बार अपनी माँ की बड़बड़ इस बाबत सुन चुका था,जब कभी घर पे सास बहु की महाभारत छिड़ती और रूपा अपने कोप भवन में प्रस्थान कर जाती तब पीछे से सासु माँ का रूपा के खानदान का जो बखान शुरु होता ” हूंह बड़ी आई रईस !! जैसे हम नई जानती कि इनके बाप मिट्टी का तेल ( क्रूड ऑयल) प्लाण्ट से चुरा चुरा के बेच बाच के तो रुपया जोड़े,किसके किसके हाथ पांव जोड़ के बकालत का डिग्री खरीदे,अब चार पैसा घर में आ गया तो बडे जमींदार बन रहे।” अम्मा की ये बात याद करके राजा मुस्कुरा रहा था कि रेखा ने उससे सवाल कर दिया_

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” ये लड़की कौन है राजा?? जो आपके साथ खड़ी है?” किसी को ऐसे रूखे सवाल की अपेक्षा नही थी

” मैं बाँसुरी हूँ,यहाँ राजा का जिम जॉइन किया हुआ है।।” बांसुरी को पता था कि राजा अपने पढ़ने वाली बात किसी को नही बताना चाहता था।।

” और हमारी टीचर जी भी,क्यों ठीक है ना बांसुरी ।”

राजा मुस्कुरा कर बांसुरी को देखने लगा,,पर उसका इस तरह किसी और लड़की को देख कर मुस्कुराना दोनो बहनों को अन्दर तक भस्म कर गया।।अभी रूपा कुछ कहने ही जा रही थी कि दरवाजा खोल कर लल्लन समोसों की खुशबू से हवा को महकाते अन्दर आया।।

  अन्दर आते ही सारा सामान सामने रखे टेबल पर रख उसने जैसे ही सर ऊपर किया उसकी नज़र रेखा पर पड़ी __” अरे शोना तुम?”

” रोहित तुम?? तुम यहाँ कैसे?? रेखा ने लल्लन से सवाल किया,दोनो के सवाल सुन रूपा ने रेखा को घूर के देखा__” तुम दोनो एक दूजे को कैसे जानते हो,और ये तुम्हारा शोना नाम कब से पड़ गया रेखा।”

रूपा भाभी के अलावा वहाँ बैठे सभी लोगों को सब समझ आ चुका था,,प्रिंस ने धीरे से चुटकी ली__

” तो ई हैं हमरे लल्लन की शोना बाबु।””प्रिंस चुटकी ले और प्रेम चुप बैठा रहे,ये असम्भव था,अगला वार उसका हुआ_
           ” जी हाँ और दढ़ियल लल्लन हैं इनके बेबी।।।”

” तुम दोनो का खुसर फुसर कर रहे हो हैं??” हम देख रहे ,लल्ला जी के जिम में आजकल यारी दोस्ती की महफिल जादा सज रही,,ए रेखा जल्दी जल्दी ई समोसा ठूसो और घर चलो,घर पहुंच के जानेंगे तुमसे सब ।।”

बाँसुरी सर झुकाये अपनी हँसी रोकने के प्रयास में थी,कि राजा ने सबसे पहले उसी के सामने समोसे बढ़ा दिये।

” पक्का बताओ हम खा लें,जब से तुमने मना किया , तबसे कचौड़ी और समोसा छुआ तक नही,, तीन महीने हो गये।।” हँसते हुए बांसुरी ने कहा।।

” बहुत कहा मानती हो लल्ला जी का,,ऐसा भी क्या हो गया।” रूपा के इस सवाल का जवाब दिया प्रिंस ने

” अरे भौजी ,,बांसुरी तो कम ही बात मानती है भैय्या जी की। पर भैय्या जी तो हर काम बांसुरी के मन का ही करते हैं, हम पे भरोसा ना हो तो पूछ लो भैय्या जी से।।” प्रिंस के बौड़मपने पे प्रेम ज़ोर से हंसने लगा और उसने आगे बढ़ कर बात संभाल ली__

” अरे आप लोग पहिले समोसा तो खाईये,ऊ भी चीख चीख कर कह रहा,हमरे ठन्डे होने से पहले हमे खा लो।”

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          रूपा रेखा को लेकर जब जिम की सीढिय़ां उतरने लगी,तब उसे कार में बैठा कर रेखा दो मिनट में आई कह कर वापस जिम में घुस गई __

” रोहित सुनो!! तुम से कुछ बहुत ज़रूरी बात करनी है,घर से फ़ोन नही कर पायेंगे,दीदी हमारे सर पे सवार रहेगी,,, तुम शाम को यहीं जिम मे हमसे मिलना,,हम किसी बहाने यहाँ आ जायेंगे,समझे।।”

” हाँ हम आ जायेंगे,शाम को 5 बजे जिम खुलेगा,  आज प्रिंस से चाबी हम ले जायेंगे,तुम समय से आ जाना बस।।”

रेखा लल्लन को बाय बोल कर बाहर निकल गई, हल्की सी मुस्कान के साथ जैसे ही लल्लन पलटा सांमने राजा और बाकी लोगों को खड़ा देख हडबडा गया।।

” तो ई है तुम्हरी नैकी जिसके लिये ‘ चदरिया झिनी रे झिनी ‘ सुना सुना के हमारे कान फाड़ दिये तुम?”

लल्लन नीचे सिर किये अपने बालों पे हाथ फिराता शर्माता खड़ा रहा।।

सभी मुस्कुराने हंसने खिलखिलाने लगे तभी राजा को जैसे कुछ याद आया_ ” अबे लल्लन तुम तो सूर्यवंसी लिखते हो ना।।अबे गज़ब कर दिये गुरू,,अब फिर पिंकी औ रतन वाला किस्सा दोहराना पड़ेगा।।”

” तो क्या हुआ,तुम हो ना सबके तारणहार!! तुम्हारे रहते किसी का बुरा हो सकता है,,,कभी कभी तो हमे लगता है,अगर तुम नही होते तो इन सब का क्या होता।।” बांसुरी की बात सुन राजा के मुहँ से निकल गया__” और तुम्हारा??”

” हाँ सही कह रहे,हमारा भी!! हम भी तो तुम्हारे कारण ही ऐसे दिखने लगे।।बाँसुरी खिल्खिलाती हुई वहाँ से बाहर चली गई,और बाकी सारे के सारे लल्लन को घसीटते हुए उसपे लात घूंसे चलाते हुए उसकी राम कथा सुनने लगे।।

क्रमशः

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aparna..

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बहुत नाइंसाफी है…

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मनचाहा पति पाने के लिए –
हरतालिका, तीज, करवाचौथ, सावन सोमवार, शिवरात्रि व्रत आदि।।

और मनचाही पत्नी पाने के लिए —
CAT, UPSC, NEET, GRE, GMAT आदि।।

बहुत नाइंसाफी है ।।।

🤔🤔🙄🙄

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शादी.कॉम -9

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  …………..

     बांसुरी के प्लान के मुताबिक राजा ने प्रेम के घर पे और बांसुरी ने निरमा के घर पे जाकर बात की,पर उम्म्मीद के विपरीत दोनों ही घर की अम्मा लोंगो ने और बड़ी बड़ी कसमें किरिया उठा ली कि,”हमरे जीते जी ई ब्याह ना हो सकब,हमरी ठठरी उठ जाये के बाद अपन अपन मर्ज़ी से निबटा लो जो करना धरना है,एक बार सादी हुई जाये फिर आटे दाल का भाव पता चल जई ।।”

    निरमा के घर से बाहर निकलने पे पूरी तरह से रोक लगा दिया गया,अब बेचारी कॉलेज भी जाती तो उसका एक नकारा मामा उसे लेने और छोड़ने जाता और बेचारी जब तक कॉलेज में रहती वो गेट के बाहर की गुमटी में अपना अड्डा जमाये रहता, उसके इस मामा के पास कोई विशेष कार्य भी नही था,जुआ खेल खेल के अपने बाप को पैसों को स्वाहा कर रहा था,जब उसके बाप यानी निरमा के नाना को इस बात का पता चला तो लात घुन्सों से अच्छी तरह आरती उतार कर उसे घर से निकाल दिया ,और वो अपने में झूमता बीड़ी पीता अपनी जिज्जी के घर आ गया,जिज्जी ने रो धोकर जीजा को उसके यहाँ रहने के लिये मना लिया,तब से मामा जी का निवास यही था,अपने जीजा को भरोसे में लेने के लिये आये दिन कोई ना कोई जुगाड भिड़ाता फिरता और आखिर वो मौका मिल ही गया ,जब बांसुरी ने निरमा की प्रेम कहानी के बारे में उसकी अम्मा को बताया तब सबसे ज्यादा उछल उछल कर घर की बदनामी की फिकर करने वाले मामा ने अपनी बडी बहन को भड़का भड़का कर भांजी का कॉलेज बन्द करा दिया,,बाद में चुपके से भांजी से पैसे वसूल कर उसे कॉलेज जाने की अनुमती दिला दी और जिज्जी से भांजी को रोज कॉलेज छोड़ने लाने के बदले मेहनताना वसूला जाने लगा।।

  इस पूरे प्रकरण को लगभग 40-45दिन बीत गये,बंसी का जिम यथावत चलता रहा ।।
     कि तभी एक दिन सुबह जिम के समय पर अचानक पिंकी फिर जिम पहुंच गई ___

    “प्रिंस !!! भैय्या जी कहाँ है?? जल्दी बुलाओ!!”

   “भैय्या जी तो प्रोटीन पाउडर खरीदने गये हैं,दीदी आप ऑफिस में बैठिए भैय्या जी आते ही होंगे।।”

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  पिंकी ऑफिस पहुंची तो अन्दर बाँसुरी बैठी कुछ लिख रही थी,पूरी तन्मयता से__
     “क्या लिख रही हो बंसी?? इतना खो कर??”

  “अरे दीदी आप !! आप कब आई? ? मैं राजा के लिये कठिन सवालों को अलग छान्ट कर उनके जवाब तैय्यार कर रही हूं,बस ये याद कर लेने से पेपर पास करने में दिक्कत नही होगी।।”

“Very good बंसी!!! तुम पहले से थोड़ी दुबली भी लग रही हो,कुछ वजन तो कम हो ही गया है तुम्हारा।”

” हाँ लगभग साढे तीन से चार किलो कम कर लिया है इन्होनें ।।”राजा ने दरवाजा खोल ऑफिस में प्रवेश करते हुए जवाब दिया,

  बांसुरी ने पलट के राजा को सवालिया नजरों से देखा “पर हमने तो नापा ही नही,तुम्हें कैसे पता चला।।

“भैय्या जी की आंखो मे एक्स रे मशीन फिट है,किस लड़की का कितना वजन बढा कितना घटा सिर्फ देख कर ही बता लेते हैं भैय्या जी”प्रिंस अनजाने में कुछ भी मूर्खता पूर्ण अतिशयोक्ति कर जाता था

“अबे बौरा गये हो का बे!! कुछो भी बकते हो! पिंकी तुम अभी कैसे यहाँ आई,,घर में सब ठीक है ना??”

“कहाँ ठीक है भैय्या!!! वही तो बताने आये हैं,अभी सबेरे भाभी के पापा का फ़ोन आया था,वो लोग हमारी सगाई की तारीख पक्की कर दिये हैं,आज से ठीक पन्द्रह दिन बाद हमारी सगाई है,,,और आप अभी तक बड़े भैय्या से भी बात नही कर पाये।।”

“अरे ई तो नया काण्ड हुई गया!! तुम तो जानती हो पहले ऊ प्रेम के चक्कर में बिज़ी रहे उसके बाद ई जिम का सामान खरीदने दिल्ली चले गये इसी सब में बड़का भैय्या से बात करना रह गया ,अब रुको आजे कुछ जुगाड़ जमाते हैं भैय्या से बात करने का।”

“हम बताएँ राजा ,ऐसा करो ,कोरा बात करने से अच्छा ये है कि किसी तरह भैय्या से रतन की मुलाकात करवा दो,,मुलाकात ऐसी की भैय्या खुद प्रभावित हो जायें,और उसके बाद का प्लान हम बाद मे बताएँगे ।।”

बांसुरी के ऐसा बोलते ही राजा ने सवाल किया

“अब ऐसी कैसी मुलाकात करायें की भैय्या परभावित होई जाये,तुमही आइडिया देई दो।।”

“देखो सुनने में थोड़ा फिल्मी लगता है ,पर काम का  आइडिया है…… अभी बांसुरी बोल ही रही थी कि बीच में प्रेम कूद पड़ा

“भगवान बचाये भैय्या जी इ मुटकि के आइडिया से,हमरे लिये ऐसन खतरू आइडिया दी कि निरमा के दरसन भी दुरलभ हो गये,पहले कम से कम मिल जुल तो पाते थे,अब तो साला घर के अन्दर अम्मा ताने मार मार के जीना मुहाल की है और बाहर ऊ कनफड़े के गुंडे हमार रस्ता ताकते हैं कि कब हम उनके हाथ लगे औ ऊ हमार हड्डी मांस नोच नोच खा जायें  ।।

“प्रेम तुम चुप रहो!! इस बार हमारा आइडिया फेल नही होगा,,तुम्हारा और निरमा का भी ब्याह करायेंगे भाई चिंता ना करो।।”

“अरे काहे ना करे चिंता!! जिसके पास तुम जैसा दोस्त हो जो घरफुक्का राय दे बात बात पे, उसको चिंता छोड़ डायरेक्ट चिता मा चढ़ जाना चाही।।”

“कन्ट्रोल करो यार प्रेम !! तुम्हारा समय आयेगा ,तुम्हारा भी ब्याह हो जायेगा यार अभी बांसुरी का आइडिया सुनो!! हाँ बोलो बांसुरी तुम का बोल रही थी,कुछ फिल्मी उल्मी सा!!”

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” हाँ सुनो!! भैय्या जब अपनी गैस एजेन्सी में बैठे होंगे,,दोपहर को जब सब लंच के लिये जायेंगे और भैय्या अकेले होंगे उसी समय चेहरे पे नकाब बांध के दो नकाबपोश उन्हें लूटने जायेंगे,,सीधे जाकर उनकी कनपटी पे बन्दूक तान देंगे और तभी रतन आयेगा और उन दोनो से लड़ के भैय्या की जान बचा लेगा।।।और जब भैय्या उसको धन्यवाद देकर नाम पूछेंगे तब रतन अपना पूरा हिस्ट्री जॉग्रफ़ी उन्हें बता देगा बस अपना पूरा नाम नही बतायेगा,, बिल्कुल ऐसा माहौल जम जाना चाहिये की भैय्या को लगे काश ये लड़का पहले मिलता तो पिंकी की शादी इसीसे तय करते।।।

“बहुत फिल्मी है बंसी!! पता नही रतन मानेगा या नही।”पिंकी ने कहा

“धमल्लो जी ये भी बता दीजिये की ये गुंडे कहाँ से किराया मा लाने वाली है आप”प्रेम ने सवाल किया

“कही से लाने की का ज़रूरत,हमारे पास आलरेडी हैं गुंडे!! तुम और प्रिंस!!”

“पर बांसुरी तुमको लग रहा ये आइडिया काम करेगा??”भैय्या जी इतनी देर में पहली बार बोले

“भैय्या जी पगलाए गये हो का,ई मोटकी कुच्छो भी बकवास कर रही और आप इसका बात सुन रहे।”प्रेम बौखला गया

“हां तो तुम ही सूझा दो प्रेम बाबु कोई आइडिया है तुम्हरे दिमाग में,,देखो हमारा आइडिया फिल्मी है पर काम ज़रूर करेगा,,पिंकी दीदी रतन को आप मना लेना ,आज ठीक डेढ़ से 2बजे के बीच उसको एजेन्सी में भेज देना कैसे भी कर के,, आगे का सब राजा संभाल लेगा,।”

“हम कैसे बांसुरी??”

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राजा भैय्या के इस सवाल पर बाँसुरी ने उसे घूरा और __”यार हर बात तुम को समझानी पड़ती है,खाना लेकर तुम्ही जाते हो ना ,जब कभी ड्राईवर छुट्टी पर होता है,तो आज भी चले जाना और जब रतन और भैय्या जी की बात होने लगे तब तुम वहाँ पहुंच के ऐसी ऐक्टिंग करना जैसे रतन तुम्हे बड़ा पसंद आ गया ,,अब रतन वहाँ क्या करने जा रहा ,ये बताने की ज़रूरत तो नही है ना,फिर भी आप सबके लिये बता देते हैं,रतन वहाँ नया गैस कनेक्शन लेने जायेगा।।

“अब इसके आगे का प्लान भी सुन लो,राजा तुम अपनी तरफ से सिर्फ रतन की तारीफ करोगे पर पिंकी दीदी के लिये कुछ नही कहोगे उल्टा बढ़ चढ़ के सगाई की तैय्यारी मे लगे रहना, और रतन बड़के भैय्या से धीरे धीरे दोस्ती बढा लेगा।।
          जब सगाई को सिर्फ एक दिन बचेगा उस दिन तुम अपनी इस टोली के साथ चुपके से लड़के को किडनैप कर लेना,,जब सगाई के दिन भी लड़का अपने घर नही पहुंचेगा तो उसके घर वाले तुम्हारे घर फ़ोन करेंगे और माफी मांगेंगे ,तब तुम्हारे बाबूजी अपना सर पकड़ के बैठ जायेंगे क्योंकि सगाई के लिये हाल बुक हो गया है,सारे मेहमान आ गये हैं ,अब क्या किया जाये ,,तभी तुम बड़के भैय्या से कहना कि भैय्या आपका वो दोस्त जो अभी अभी आई ए एस का इंटरव्यू पास किया है उसिसे पिंकी की सगाई करा दो,,तब भैय्या बड़ी लाचारी से कहेंगे कि ऊ हमरे जात का नही है छोटे नही हम अभी इ सगाई कर देते ,लोग कहेंगे अपनी सगी बहन होती तो का ऐसे दुसरी जात में ब्याह देते तब पिंकी दीदी आयेगी और रोते हुए कहेगी भैय्या आपको जो सही लगे मैं करने को तैय्यार हूँ,आज जमाना इन्सान के काम से उसे पहचान रहा ना कि उसकी जात से,आपका दोस्त किसी भी जात का हो ,मैं तैय्यार हूँ,बस आपकी और बडे पापा की नाक नही कटनी चाहिये।।दीदी की ये बात सुनकर बड़के भैय्या खुश हो जायेंगे और जाकर आपके बाऊजी को मनाएंगे समझायेंगे और ये सगाई हो जायेगी।।”

“अरे वाह सुनने में तो अच्छा लग रहा है,पर क्या सच मे ये आइडिया काम करेगा??”

“अरे पिंकी तुमहू इसकी बतकही में आ गई,ये जैसन हमार कोल्हू पिराई है ना ,ऐसने तुम्हे भी पेर के मानेगी ,काहे इसकी बात सुनते हो यार तुम लोग।।”

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“प्रेम चुप रहो अम्मा कसम नही धर देंगे तुमको!! अबे सही लग रहा हमको ई आइडिया,क्यों पिंकी?? लगाओ जरा रतन गुरू को फ़ोन और समझाए बुझाये दो ,हम इन दोनो लामलेट को तैय्यार करते हैं ।
   इस पूरे प्लान में बिल्कुल अनिच्छा से प्रेम को भाग लेना ही पड़ा ,पर जाने क्यों अन्दर ही अन्दर उसे किसी अनिष्ट की आशंका कंपकंपा रही थी,,खैर राजा भैय्या की खातिर नकाब चेहरे पे बांध अपनी हीरो होंडा मे प्रिंस को पीछे बैठाए प्रेम निकला, निरमा की गली से निकलते हुए बड़ी हसरत भरी निगाहों से उसने छत की ओर देखा पर वहाँ खड़ी निरमा ने प्रेम को देख कर भी अनदेखा कर दिया__
               “देखा प्रिंस उस कजरौटी की ऐसी काली नज़र लगी है की हमरी निरमा भी हमारी तरफ देख नही रही।।”
           “अबे प्रेम तुम भी पूरे उल्लू हो यार!! पहला तो चेहरे पे गमछा बांधे हो,और दूसरा उसके ऊपर हेल्मेट चढाये हो ,गाड़ी का नम्बर प्लेट भी बदल दिये हो तो भाभी चिन्हेंगी भी कैसे बे??”
 
               प्लान के मुताबिक प्रिंस और प्रेम नकाब पहन कर युवराज के ऑफिस मे दाखिल हुए ,अभी उन्होनें गन निकाल के युवराज की तरफ मोड़ी ही थी की रतन वहाँ पहुंच गया__
               “आप बिल्कुल मत घबराइये ,मैं आपको बचा लूंगा ।”रतन की बात पूरी होने के पहले एक ज़ोर का चाँटा गन तानने वाले  प्रेम के चेहरे पे पड़ा _”अरे मर गया रे ,मार डाला रे मार डाला !!! “
  चिल्लाते हुए प्रेम अपना नकाब संभाले वहाँ से भागने को हुआ पर जाते जाते भी युवराज का ज़ोर का घूंसा उसकी और प्रिंस की पीठ पर पड़ ही गया, दोनों सर पे पैर रख कर वहाँ से भागे ।।।

  रतन घबराया सा कभी युवराज को कभी जान बचा कर भागते प्रेम और प्रिंस को देख रहा था,,जब दोनो आंखों से ओझल हो गये तब युवराज का दहाड़ना बन्द हुआ,तब तक वो उन दोनो को पानी पी पी कर गालियाँ देता रहा,अब उसने रतन की तरफ देखा !! तब तक रतन यही सोचता रहा कि उसे वहाँ खड़ा रहना चाहिये या भाग जाना चाहिये।।अभी रतन कुछ कहता उसके पहले ही युवराज ने उससे उसका परिचय जानना चाहा लेकिन तभी अचानक उसे तबीयत खराब सी लगने लगी,,सीने में उठने वाले दर्द और घबराहट से वो  दिवार का सहारा लेकर खड़ा हो गया,,युवराज का चेहरा पसीने से भीग गया और कलेक्टर साहब को “जी के “में पढ़े स्ट्रोक के सिम्पटम याद आ गये,,उसने फौरन युवराज को कुर्सी पर आराम से बैठाया और युवराज की बाई गरदन पर हलके हाथों से मसाज करते हुए उसे गहरी सांसे लेने के लिये कहने लगा और फिर धीरे से उसकी रीवोल्विंग चेयर को हल्के हाथों से खींचते हुए गाड़ी तक ले गया,,,युवराज को अपनी गाड़ी में बैठा वो तुरंत अस्पताल की ओर भागा।।


 
     जब रतन की स्विफ्ट एजेन्सी के गेट से निकल रही थी,उसी समय राजा भैय्या अपनी एक्स यू वी में अन्दर दाखिल हो रहे थे,रतन का भैय्या को गाड़ी मे ले कर कहीं जाना तो प्लान का हिस्सा था नही,उन्होनें अपने छोटे से दिमाग पर बहुत ज़ोर दिया पर उन्हें बांसुरी का बताया ऐसा कोई प्लान याद नही आया…..अभी राजा सोच में डूबा खड़ा था की कान्खते कराहते प्रिंस और प्रेम नकाब हटा कर वहाँ चले आये।।

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“हम कहे रहे ,,ई सनिचर हमरी जान की दुसमन है भैय्या जी!! हमको तो लगता है निरमा की अम्मा हमारी सुपारी दे रखी है ई बंसुरीया को,,जब देखो तब हमे मारे का प्लान बनाती रहती है।।आज तो बड़का भैय्या का हाथ से हमारा हत्या हो जाना था, ऊ तो सुबह सुबह चौकी के बजरंग बली का आसिर्वाद ले आये थे ,वर्ना अभी आप हमरी अर्थी सजाते होते।।

  प्रेम अपना दुखड़ा रो रहा था की भैय्या जी का फ़ोन बजा__’ जय हो जय हो शंकरा …..

“हेलो!! राजा बोल रहे हैं ।”

“राजा भैय्या हम रतन बोल रहे हैं,बडे भैय्या को हार्ट अटेक आया है,आप जल्दी से जल्दी सिटी हॉस्पिटल पहुंच जाइये,हम बस अभी पार्किंग मे गाड़ी डाल रहे हैं,,पहले चला रहे थे,इसलिए फ़ोन नही कर पाये,,,जल्दी आ जाईये आप !!”

“हे शिव शंकर ये क्या हो गया,चलो बैठो दोनो,अभी के अभी अस्पताल जाना है,भैय्या का तबीयत बिगड़ गया है,,,साला ई कलेक्टर उलेक्तर से रिस्ता जोडना भी रिस्की है,अब देखो ससुर गाड़ी चला रहा तो फ़ोन नई किया,हमको देरी से खबर मिली,,चलो यार प्रिंस कहाँ अटक गये तुम??”

“ऊ भैय्या जी घर मा फ़ोन करने लग गये थे।”

“किसके घर मे बे??”

“आपके औ किसके,आपकी अम्मा बाऊजी को बता रहे थे ,भैय्या को हार्ट फेल हुआ है।।”

“अबे तुम ना गधे हो एक नम्बर के,,का जरुरत रही अभी से अम्मा को बताने की ,अब ऊ वहाँ रो रो के जो रामायण गायेगी,,तुम्हरी ना ये हडबड़ी की आदत से बहुते परेसान हो गये हैं ।।”

हैरान परेशान राजा प्रिंस और प्रेम जब तक हॉस्पिटल पहुँचे तब तक में वहाँ रतन के फ़ोन से पिंकी और बांसुरी भी पहुंच चुके थे।।

   रतन ने उन्हें बताया की बड़े भैय्या को इमरजेन्सी में भर्ती करा दिया गया है,डॉक्टरों की टीम सारी जांच मे लगी हुई है,अभी किसी को भी अन्दर जाने की इजाज़त नही है।।राजा को बहुत ज्यादा परेशान देख बांसुरी उसके पास पानी की बोतल लिये आई__”पानी पी लो राजा!! और ज्यादा परेशान मत हो!! देखो भैय्या को समय पे अस्पताल तो ले आये ना ,तो अब कुछ भी बुरा तो होगा नही ।।और दुसरी बात तुम चिंता कर कर के अपनी तबीयत बिगाड़ लोगे,जबकि अभी यहाँ सारी भागदौड तुम्हें करनी है।।”अभी बांसुरी राजा से बात कर ही रही थी कि ओब्सर्वेशन रुम का दरवाजा खुला और एक जूनियर डॉक्टर बाहर निकल कर आई__

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  “आप में से युवराज अवस्थी के साथ कौन है”

   रतन पिंकी और राजा दौड़ पड़े “हम हैं ।”

“लिजिये ये कुछ दवाएं और इन्जेक्शन ले आईये , नीचे फार्मेसी है” उस लेडी डॉक्टर ने पर्ची रतन को पकड़ा दी और फिर राजा की तरफ बड़ी गहरी नजरों से देखने लगी__”सुनो तुम राजा हो ना !! राजकुमार अवस्थी!!”

  प्रेम और प्रिंस के साथ साथ पिंकी और बांसुरी की भी आंखे फट गई,ये इतनी सुन्दर डॉक्टरनी राजा को कैसे जानती है।।

“हां हम राजा ही है!! अरे !! तुम ,,तुम तो रानी हो ना ,,अरे यहाँ कैसे ,,और हमारे भैय्या कैसे हैं,पहले ऊ बताओ।।”

“तुम्हारे भैय्या बिल्कुल ठीक है,उन्हे हाइपर ऐसिडिटी हुई थी,,जलन कुछ ज्यादा बढ़ने के कारण और गर्मी से डिहाइड्रेशन से बेहोश हो गये थे,,अब वो ठीक हैं ।।

“का मतलब भैय्या को हार्ट उर्ट अटेक नई आया।”

राजा की बात पर डॉक्टर हँस पड़ी “नही कोई हार्ट अटैक नही आया,,उनका ई सी जी और बाकी सारे टेस्ट नॉर्मल आये हैं ,,घबराने की कोई बात नही है।।
   “तुम यहाँ कैसे रानी ?? तुम तो बाहर गांव चली गई रही पढ़ने”?? राजा के सवाल पर रानी मुस्कुरा दी।।
     “हां पढ़ाई पूरी हो गई,अभी हमे इंटर्नशिप करना था,तो हमने सोचा अपने शहर से ही किया जाये ,इसलिए हम यहीं आ गये।।और बताओ तुम क्या कर रहे अभी।।”
    रानी को देख पहले ही गुलाबी हो रहे राजा भैय्या उसके सवाल पे पूरे लाल हो गये,,अब उस डॉक्टरनी  के सामने क्या बोलते कि पांच साल में भी स्कूल का साथ नही छूटा ,बेचारे जवाब सोचने में व्यस्त हो गये।।

अभी वो दोनो बात कर ही रहे थे कि पूरा का पूरा अवस्थी खानदान वहाँ पहुंच गया,,रूपा और उसकी सास एक दूसरे से होड़ लगाती तार सप्तक में लयबद्धता के साथ रो रही थी,,पिंकी ने रूपा को और बांसुरी ने रूपा की सास को सम्भाला, सब कुछ बता देने पर भी दोनो में से कोई चुप होने को राज़ी ना था ,तब बाँसुरी ने धीरे से रूपा के कान मे कहा__

    “भाभी ,भैय्या एकदम ठीक है अब आप भी शान्त हो जाइये,वैसे भी रोने से आपका काजल फैल के पूरा चेहरा को काला काला कर दिया है,, आप तो हमसे भी अधिक कलूटी लग रही है।।”

   रूपा काली और भयानक दिखने के डर से एकदम से चुप हो गई,और उसकी हालत देख उसकी सास को हँसी आ गई,और वो भी अपना रोना भूल गई ।।
       कुछ देर पहले के चिंता के बादल छंट गये और शीतल मन्द समीर बहने लगी,,डॉक्टर ने बाहर आकर सबको मरीज से मिलने की इजाज़त दे दी।।

राधेश्याम जी युवराज के पैरों की तरफ बैठे और माताजी बेटे के सिरहाने बैठी,धीरे धीरे सर सहलाने लगी__”ये सब हुआ कैसे युव ?? पर अच्छा हुआ तुम समय पे अस्पताल पहुंच गये,अरे पर तुम यहां पहुँचे कैसे ,,मतलब राजा तो हमसे कुछ मिनट पहले ही यहाँ पहुंचा था ना,तो तुम्हे यहाँ लेकर कौन आया??”

“जी बाबूजी !! एक लड़का आया था एजेन्सी में शायद कनेक्शन के लिये आया होगा,वही हमारी तबीयत बिगड़ते देखा तो फौरन अपनी गाड़ी में हमे डाल यहाँ ले आया,,हो सकता है बाहर हो,देखो तो राजा कोई दुबला पतला सा लड़का खड़ा है क्या बाहर,बुला लाओ भीतर,आँख पे चश्मा लगा था,पढा लिखा टाईप का दिख रहा था।।”

अभी युवराज ने अपनी बात पूरी भी नही की थी कि डॉक्टर रानी ने कहा__पढा लिखा टाईप का दिख नही रहा था,वो बहुत पढा लिखा है,,जी आपको अस्पताल लेकर आने वाला कोई और नही अभी अभी आई ए एस का इंटरव्यू अच्छी रैंक से पास करने वाले भावी कलेक्टर रत्नप्रकाश हैं,आप लोग मिल कर जल्दी से धन्यवाद दे दीजिये वर्ना आपके धन्यवाद देने के पहले ही कही मसूरी ना उड़ जाएँ ।।””

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तब तक राजा रतन को अन्दर लेकर आ गया ,, राधेश्याम ने उठ कर रतन के दोनो हाथ पकड़ लिये __”बेटा कैसे धन्यवाद कहूँ आपको ,,आपने जो किया है उसके लिये धन्यवाद बहुत छोटा शब्द है,,वैसे बेटा कौन गांव के हो ,,किसके घर के हो,,हियाँ तो हम लगभग सभी को भले से जानते हैं ।।”

“अंकल जी धन्यवाद की ज़रूरत नही है,,ये तो मेरा फर्ज था,मै नही होता तो कोई और होता जो इन्हें सही समय पर अस्पताल ले आता।।””

“नही दोस्त !! तुमने वाकई बहुत उपकार किया,,कुछ समय के लिये मुझे भी लगा की मुझे हार्ट अटैक आ गया है,,अच्छा डॉक्टरनी साहिबा कह रही थी ,,तुमने आई ए एस निकाल लिया है, ये तो बहुत खुशी की बात है,ये हमारी छोटी बहन है पिंकी!!! इसका भी इंटरव्यू में हो गया है सेलेक्शन !!अच्छा है हम लोग भी सोच में थे इतनी दूर मसूरी अकेले कैसे भेजेंगे ,अब कम से कम कोई जान पहचान का तो रहेगा।।”

  युवराज के ऐसा बोल के चुप होते ही राजा जो अब तक सबसे पीछे चुपचाप खड़ा था ने अचानक अपना मुहँ खोला__” रतन गुरू !! तुम्हें तो ट्रेनिन्ग में जाने मे अभी टाईम है ना।””

“बस पन्द्रह दिन में जाना है मसूरी।।”

“हां तो हमारी बहन की सगाई तक रुक जाओ गुरू,,उसके बाद चले जाना।।”राजा की इस बात का वहाँ सभी ने समर्थन किया,कुछ देर युवराज के साथ बैठ कर घर के लोग वापस चले गये,,जब कमरे में अकेले युवराज और राजा थे,राजा बडे भैय्या के लिये जूस लेकर आया __”राजा पता है हम हमेशा से एक बात सोचते थे”

“क्या भैय्या??”

“हमे ना हमेशा से पिंकी के लिये ऐसे ही लड़के की तलाश थी।।”

“कैसे लड़के की भैय्या??”

“अरे रतन जैसे लड़के की यार!! कितना सोच सोच के बात करता है,,हर शब्द नाप तौल के बोलता है, बिल्कुल सुलझा हुआ समझदार सा लड़का है,,हमारी पिंकी के जैसा ,है ना राजा !!! और देखो पिंकी जैसे ही प्रशासनिक सेवा में भी जा रहा है!! कितना ही अच्छा होता अगर ये लड़का पहले मिल गया होता ,,है ना??”

“तो अभी भी का बिगाड़ होई भईया,,अगर आप चाहो तो सब कर सकते हो,””

“अरे कैसी बात कर रहे हो राजा !! अब तो शादी तय हो गई है पिंकी की ,अब कुछो नई हो सकता भाई।।
वर्ना हमारा ससुर हमारा गला पकड़ लेगा।।”

  दोनो भाई साथ साथ हंसने लगे।।।

  क्रमशः


 
aparna..

शादी.कॉम -8

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    हनुमान गली का गुड्डा असल में गुड्डा नही गुण्डा था,एक नम्बर का मवाली और नकारा गुड्डा अपने मोहल्ले ही नही सारे शहर का सर दर्द था।।
  मोहल्ले में घूम घूम के दुकानदारों को सताना और चिढ़ाना उसका प्रिय शगल था।।
     “काका कचौरी वाले” की दुकान हो या चौरसिया का पान ठेला सभी जगह उसकी उधारी की किताब के पन्ने भरते चले जा रहे थे,और वो ऐसे ताव से सब जगह से वसूली करता फिरता जैसे फ़्री में खाने का उसने लाइसेंस ले रखा हो।।
    उसके ताऊ हवलदार थे,जिनके नाम का डर दिखा कर वो हर किसी पर अपना रौब मारता था। एक बार ऐसे ही मंदिर के बाहर किसी बुज़ुर्ग से गलती से लगी ठोकर के बदले जब गुड्डा ने उस बुज़ुर्ग का गला पकड़ लिया और उन्हें एक पर एक बड़ी बड़ी गालियों से नवाजने लगा तभी जाने कहाँ से हवा में लहराता एक थप्पड़ आया और उसकी कनपटी को झनझनाते हुए निकल गया।।।
      दस सेकंड के लिये उसके कान में सिर्फ मख्खी भिनभिनाने की आवाज़ होती रही,अपनी आंखों को अच्छे से झटक के उसने नेत्र गोलकों को सही जगह टिका कर चेहरे को उस ओर घुमाया जहां से थप्पड़ पड़ा था,सामने ब्लू जीन्स और ब्लैक टी शर्ट में राजा भैय्या खड़े थे।।
            दायें हाथ के मणिबंध में रुद्राक्ष की माला लपेटे,माथे पर अगुरू चंदन का तिलक लगाये, आंखों पे गुची का चश्मा लगाये भैय्या जी बिल्कुल महादेव शिव शंकर का मॉर्डन अवतार लग रहे थे।।
   
    उन्हें देख कुछ 2 सेकंड के लिये गुड्डा  अपने थप्पड़ की तिलमिलाहट भूल कर उन्हें प्रनाम करने ही वाला था कि उसे याद आ गया कि इन्हीं चौड़े तगड़े हाथों ने कुछ समय पहले उसके चौखटे का भूगोल बिगाड़ने की कोशिश की थी।।
      तैश में आकर उसने उन्हें मारने को अपना हाथ उठाया जिसे बड़ी आसानी से अपने बाएं हाथ से ही पकड़ कर भैय्या जी ने मरोड़ कर रख दिया।।।
     दोनों तरफ की सेना मुहँ बाये ये सीन देख रही थी,जो बिल्कुल किसी पुरानी फिल्म की याद दिलाता सा लग रहा था,जिसमें सुनील दत्त ने आशा पारेख का हाथ मरोड़ दिया और वो बेचारी छटपटाते हुए गीत गा रही”मैं तुझसे मिलने आई मन्दिर जाने के बहाने”।।

   इस पहली मुलाकात के बाद गुड्डा ,भैय्या जी से खार खा बैठा।।।अब वो कोई ऐसा मौका  छोड़ना नही चाहता था जहां भैय्या जी की  नेकनामी को बदनामी में बदल सके पर ईश्वर इच्छा बलवती, आज तक उसे ऐसा कोई सुनहरा मौका नही मिला था।।
      परसों शाम जब बनवारी की टपरी पे बैठा अपनी पच्चीसवी मुफ्त की चाय गटक रहा था तभी उसका चेला भागा भागा आया,और उसे अपने मोहल्ले की निरमा और प्रेम को साथ  साथ देखे जाने की खबर दे दी।।
    गुड्डा का मन बल्लियों उछलने लगा ,पर उस वक्त शाम हो चुकी थी,इसलिए मन मार के अगली सुबह का इन्तजार किया,और अगले दिन सुबह उठते ही भैय्या जी के जिम पहुंच गया,,हालांकी वहाँ भी उसे निराशा ही हाथ लगी,क्योंकि प्रिंस ने बड़ी ढिठाई से उसे बोल दिया”भैय्या जी नई हैं,कल आना।।”

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“अबे साले हम भिकारी है का बे!! जो बोल रहे कल आना,,जाके अपना भैय्या जी को बोल देना ,अगर हमरे मोहल्ला की लड़की की तरफ आँख उठा कर देखा तो हम सीधा सरिया आँखी में घुसा देंगे।।समझे!”

इतनी मोटी धमकी जिसके मूर्तरूप में परिणत होने के कोई आसार नही थे,दे कर अपना सीना चौड़ा किये गुड्डा वहाँ से निकल गया,प्रेम की तलाश में!!

    प्रेम का मिलना असम्भव था!!!वो यहाँ जिम मे छिपा बैठा था,जो राजा भैय्या के हत्थे चढ़ चुका था।।

“अबे इधर आओ बे!! का गदर मचा रक्खे हो !! जिसे देखो साला हमे धमकाने चला आ रहा है तुम्हरे कारन !! का है गुरू?? इसक उसक में पड़ गये हो हम सुने!! कौन है भाई ,कुच्छो बताओगे।।”

  प्रेम जो अब तक चुपचाप जिम के बाथरूम में गुड्डा के डर से दुबका बैठा था,उसे राजा भैय्या की बड़ी बड़ी आंखे देख एक बार फिर से प्रेशर आ गया,वो वापस पेट पकड़ कर बाथरूम जा ही रहा था कि भैय्या जी ने पीछे से कन्धे पर हाथ रख उसे रोक दिया__”अब साले जो आ रहा है तुमको ,यहीं करो!! पर पहले बताओ का माजरा है ई ,वर्ना ऐसा धोबी पछाड़ लगायेंगे ना कि सीधा देवरिया जा कर गिरोगे अपन मामा घर!! समझे।।”

“भैय्या जी दुई मिनट दे दो ,बस हल्का होके आके सब बतातें हैं ।।”

  प्रेम जैसे ही वापस लौटा जिम में 4जोड़ी आँखो को खुद को घूरता पाया।।

*********************

  प्रेम ने जवानी में कदम रखते ही अपने नाम को बड़ा सीरियसली लेना शुरु कर दिया था,पुराना दिलजला था,और ऐसा दिलजला था की छांछ से भी मुहँ जलाता फिरता था।।

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   पण्डित रामसनेही दुबे डिग्री कॉलेज में पहुंचते ही जैसे प्रेम के अरमानों को पंख लग गये थे,जो लड़की सामने दिख जाती ,वही दिल को भा जाती,और पूरा दिन प्रेम उसके सपनों में काट देता।।
   फिर एक दिन जब प्रेम अपनी हीरो हौंडा को कॉलेज की पार्किंग में खड़ा कर “कमला पसंद” को निगलने ही जा रहा था,कि अचानक उसकी गाड़ी से किसी की टक्कर हुई और उसकी बाईक आगे वाली और आगे वाली उसके भी आगे वाली बाईक को लेकर गिरती चली गई,गुस्से में गाली देने ही वाला था कि मिसरी जैसी आवाज़ कान मे घुल गई_
     “सॉरी हम जान बूझ के नई गिराये।।”

  पलट के देखा तो देखता ही रह गया,वो और भी कुछ कुछ बोलती रही पर प्रेम के कानों में एक ही गाना सुनाई देता रहा_ एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा ……
     “जैसे खिलता गुलाब,जैसे शायर का ख्वाब
       जैसे उजली किरण,जैसे बन मे हिरण
        जैसे चांदनी रात जैसे नरमी की बात
         जैसे मन्दिर में हो एक जलता दिया !!!!

   जब तक गाने का प्रथम अन्तरा समाप्त हुआ, लड़की जा चुकी थी,परन्तु प्रेम को अपना पहला प्यार मिल गया था।।
     अगले दिन सारी खोज बीन कर ली,राजकीय कन्या इंटर कॉलेज से आई सकीना डिग्री कॉलेज में बी ए फाइनल इयर की छात्रा थी।।
 
“साला आधा साल खराब कर दिये इस कॉलेज में,आज तक हमारा नजरे नई पड़ा,और जब पड़ा तो सीधा प्यारे होई गया।।”प्रेम की इस बात पे नन्हे ने चुटकी ली

“तो परपोस करे दो फिर बेलेन्टाईन आने में तो अभी समय है।।”

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“अरे नई कर सकते भैय्या,हमार महतारी नई मानब!! सकीना की जगह सुसीला ,सीला,कबिता उबिता होती तो अलगे बात होता,,छोड़ो हटाओ।।”
  इस प्रकार प्रेम का पहला प्यार उसके सीने में दफन हो गया,अभी वो देसी दारु और चना चटपटी के साथ अपने गम को अच्छे से भुला भी नही पाया था कि ,उसके जीवन में फिर से एक बार प्यार ने दस्तक दी।।

  अबकी बार दस्तक उसके दरवाजे पे हुई,उसिने दरवाजा खोला__ “नमस्ते!! हम ई पड़ोस वाले घर में आये हैं,कल ही शिफ्ट हुए हैं,थोड़ी चीनी मिलेगी,हमें चाय बनानी है।।”

अभी बातचीत चल ही रहा था,कि अम्मा बाहर निकल आई __”अरे चीनी भी ले जाना,पहले बैठो और चाय पी लो”।

   प्रेम का दूसरा प्रेम अम्मा के संग चाय पीते बतियाता रहा पर प्रेम को कुछ और ही सुनाई दे रहा था__  “एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा………..
          जैसे सुबह का रूप,जैसे सर्दी की धूप।
          जैसे वीणा की तान जैसे रंगो की जान
           जैसे बल्खाये बेल जैसे लहरों का खेल
           जैसे खुशबू लिये आई ठंडी हवा।।।

जब तक दूसरा अन्तरा समाप्त हुआ ये लड़की भी जा चुकी थी,पर बेचारी चीनी लेने आई और भूल कर चली गई,उसके जाने के बाद अम्मा ने प्रेम को कटोरी पकड़ा दी कि नये पड़ोसी को चीनी दे आये।

   मुहँ धो के मर्दों की गोरेपन वाली क्रीम लगा कर बालों को भीगा कर अच्छे से ज़ुलफे संवार कर ,खूब पर्फ्यूम डियो डाल कर पूरी तैय्यारी से प्रेम शक्कर की कटोरी लिये चला।।
 
  “अरे का हमरी पतोहू लेने जाई रहे हो जो अतका सज धज मचा दिये,जल्दी जल्दी आओ,हिया सिलिंडर मरा खतम हुई गवा है,ई टाँकी को अपना फटफटी मा पीछे रख के बदला लाओ।।”

  प्रेम तो खुद मे खोया सा था,अम्मा की इतनी गैर-जरूरी बातें सुनने का उसके पास वक्त ही नही था।।पड़ोस के दरवाजे पे बिल्कुल जेंटलमैन स्टायल में खड़े होकर उसने बेल बजाया,दरवाजा खुला और
ये तो कोई उसकी ही उमर का लड़का खड़ा था_

“जी कहिये!! किससे मिलना है??”

“जी वो !! हमको लग रा हम गलत घर मा आ गये,वो थोड़ी देर पहले सक्कर मांगने…….प्रेम की बात पूरी भी नही हुई कि अन्दर से वही रूपसी जो सुबह चिनी माँगने गई थी ,बाहर आई__
     “बेबी !! ये हमारे पड़ोसी हैं,मै अभी इन्ही के घर से चाय पीकर आ रही हूँ,देखो आंटी जी इस सो स्वीट ,मै भूल गई तो उन्होनें खुद चीनी भेज दी।
  आप अन्दर आईये ना भैय्या!! इनसे मिलिये ये मेरे पति है अतुल शर्मा,और मै आभा।।”

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अच्छा हुआ दिल टूटने की आवाज़ नही होती वर्ना उस नाज़नीँ के मुहँ से भैय्या सुन के प्रेम का दिल जो चाक हुआ था कि बेचारा चीनी उन्हें बमुश्किल थमा भागा वहाँ से।।

  बेचारा प्रेम !!! माँ ने सलमान सोच कर नाम रखा पर किस्मत प्रेम चोपड़ा वाली हो गई ।।एक तो फष्ट इयरे मा लटक गये उसपे लडकियों का सनिचर !!
     इसिलिए जब अम्मा बोली चलो सनी देब  के मन्दिर मा मन्नत का तेल ऊल चढ़ा आये तो प्रेम तुरंते मान गया।।

    सनी देब में तेल चढ़ाया ,सत्ती गुड़ी में रोट चढ़ाया,बस वहीं माता का चमत्कार भवा!!!
   
    रोट चढ़ा के प्रेम मन्दिर की सीढिय़ां उतर अपनी चप्पल ढूँढ ही रहा था कि एक  नाज़ुक नवेली की साईकल की चेन उतर गई ,,अब किसी लड़की को  इतना बड़ा प्राब्लम हो और प्रेम अपनी चप्पल ढूँढता रहे शोभा देता है क्या?? बेचारा नंगे पैर गर्म तवे से जलते रोड पे खड़ा होकर चेन बनाता रहा,और लड़की अपनी गुलाबी चुन्नी से अपना आप को हवा झलती रही!! दो मिनट में चढ़ने वाली चेन भी उस दिन पूरा इक्कीस मिनट में चढ़ी,खैर चेन चढ़ा कर प्रेम ने नजरें ऊपर उठाई,लड़की ने प्रेम को देखा ,प्रेम ने लड़की को देखा ,और पहली बार दोनो दिलों में एक साथ घंटी बजी!!!

     पर ना ये घंटी जो दोनो को संग संग सुनाई दी ये सत्ती माता की आरती की घंटी थी,पर दोनो के हृदय ने एक दूसरे को चीन्ह लिया,,निरमा ने धीमे से कहा-” थैंक यू ….. अबकी बार प्रेम को अन्तिम अन्तरा सुनाई दिया जो सार्थक हो गया__
     “एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा ….
          जैसे नाचता मोर,जैसे रेशम की डोर
          जैसे परियों का राग,जैसे संदल की आग
          जैसे सोलह सिंगार जैसे रस की फुहार
          जैसे आहिस्ता आहिस्ता चढता नशा ।।

    अभी निरमा का नशा प्रेम पे चढ़ने ही वाला था कि बाँसुरी अपनी साईकल हाथ से खींचती चली आई__”तुम यहाँ कहाँ अटक गई,क्या हो गया निरमा??”

“हमारी साईकल का चेन उतर गया था,इन्होने ठीक किया।।”

“तो अब तो ठीक हो गया ना चेन,,अब चलो ,देर हो रही कॉलेज को।।”

  निरमा बाँसुरी के साथ चली गई और छोड़ गई प्रेम के दिल पे अपनी छाप!!!

   ये प्रेमप्रताप पाण्डेय की सम्पूर्ण जीवन गाथा थी जिसमें से सुविधानुसार प्रेम ने अन्तिम अंतरे वाली लड़की वाला अपना किस्सा वहाँ मौजूद सभी को कह सुनाया।।।
               सदियों से होता आ रहा कि किस्से कहानियाँ हम कानों से सुनते हैं लेकिन जाने क्यों हमारी आंखें फैल जाती हैं सुनते हुए,,वहाँ मौजूद सभी के साथ वही हुआ।

“अब करना क्या है गुरू?? सादी वादी का विचार है की नही।”प्रिंस के ऐसा पूछते ही प्रेम ने जवाब दिया

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“हैं काहे नही बे!! शादी तो निरमा से ही करना चाहतें हैं,पर हमारी अम्मा भी कसम खाये बैठीं हैं,कहती है ,वा वर्माइन हमार  बहुरिया ना बनी,, नही ता हम जहर खा ले और मर जाब, ,,अब बोलो का करें,भैय्या जी आप ही कुछ रस्ता सुझाओ।।अभी तक अम्मा से डरे बैठे थे,अब ई गुड्डा और आ गया चौधरी बन के,हम भी कोनो डरते नई हैं,हम तो साले के पनही न पनही लगाते पर आपका और जिम का लिहाज कर के चुप रह गये।।”

“तुम चुप नही रहे बल्कि छुप गये ,अब जादा बतियाओ ना ,नही  हम तुमको सही का पनही (चप्पल)धर देब।।लल्लन के ऐसा बोलते ही प्रिंस के बंमपिलाट दिमाग में एक खतरनाक आइडिया आया

  “हम तो कहते हैं,तुम निरमा को ले कर देवरिया निकल जाओ,हम फ़ोन पे तुम्हें यहाँ का सब खबर देते रहेंगे ,जब मामला ठंडा हो जायेगा तो सादी उदी कर के वापस आ जाना।।”प्रिंस की इस बात का जवाब दिया बांसुरी ने

“वाह ! प्रिंस जवाब नही क्या आइडिया दिये हो” अपनी तारीफ सुन प्रिंस चौड़ा हो गया,तब बांसुरी ने अपनी बात आगे बढ़ाई

“काहे तुम क्राईम पैट्रोल बिल्कुल ही नई देखते क्या?? अरे भागने वालों का फ़ोन नम्बर सबसे पहले ट्रैक करती है पुलीस,उसके बाद इन लोगो का गला पकड़ कर पुलीस लायेगी और दोनो के घर वालो के हवाले कर देगी,उसके बाद मुश्किल से एक महीना मे निरमा की शादी उसके समाज में हो जायेगी और प्रेम यहाँ जिम मे चदरिया झीनी रे झीनी सुनेगा,और हम सब को सुनाएगा।।”

राजा ने बांसुरी को देखा और पूछा__”फिर तुम ही बताओ का करना चाहिये।।”

  “हां हम बताते हैं एक नम्बर आइडिया देंगे जिसका फेल होने का चांस बस फिफ्ती परसेन्ट है।”और बांसुरी हंसने लगी__”सुनो राजा तुम जाओ प्रेम के घर और उसकी अम्मा से बात करो,और हम जायेंगी निरमा के घर उसकी अम्मा से बात करने।।एक बार दोनो घर के गृहमंत्री तैय्यार हो गये तो प्रधान मंत्री को मनाना आसान हो जायेगा।।”

  “लेकिन बंसी अगर हमारी अम्मा नई मानी तो,का करेंगे फिर।””निरमा ने पूछा

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“अगर ऐसा हुआ निरमा तो तुम फिर वही करना जो तुम्हरी अम्मा कहेंगी,क्योंकि एक बात याद रखो अपना अम्मा से ज्यादा तुमको कोई प्यार नही कर सकता ई प्रेम भी नही।।।अपनी जिद अपनी इच्छा अपने घर वालों को बताओ उन्हें मनाने की भी कोशिश करो पर जीने मरने की धमकी मत देना,,अगर प्रेम प्यार से मान गये तो अच्छा है नही तो तुम लोग उनकी बात मान जाना,उसी मे सब का भलाई है निरमा,,आज तुम भले हमारा बात ना समझो पर एक दिन हमारा बात तुम्हारा भेजा में घुस जायेगा।।”

  जिम में सन्नाटा छा गया ,तभी पिंकी ने आगे बढ़ कर बंसी को गले से लगा लिया___प्राउड ऑफ़ यू बंसी !! अब तुम और राजा भैय्या पहले इस प्रेम के प्रकरण को सुलझाओ फिर इसके बाद हमारे लिये काम करना है तुम दोनो को।।है ना।।”

“हां दीदी!!! बड़के भैय्या मान जायेंगे,और बस एक बार वो मान जाये फिर घर वाले भी ।।”दोनो सखियाँ एक साथ मुस्कुराने लगी

“राजा भैय्या अब हम घर जाते हैं,आप भी इस प्रेम का गणित बैठा के जल्दी से घर आ जाओ।।।”

जाते जाते पलट के पिंकी ने राजा को देखा और बोली__”अरे हाँ रेखा को भी फ़ोन कर लेना ,उसका फ़ोन आपने उठाया नही था।।और ज़ोर से खिल्खिलाती हुई पिंकी जिम से बाहर निकल गई ।।

प्रिंस और प्रेम शातिर मुस्कान के साथ भैय्या जी को देखने लगे वहीं लल्लन मन ही मन सोच मे पड़ गया कि बताओ क्या किस्मत है राजा भैय्या की होने वाली दुल्हीन और हमारी गर्ल फ्रेंड का एक ही नाम है।।सोचते सोचते वो भी मुस्कुराते हुए प्रिंस और प्रेम के साथ भैय्या जी को छेड़ने मे लग गया कि तभी उसके फ़ोन की रिंग बजने लगी__

  “हाँ बेबी!! बोलो …..बोलते हुए लल्लन बाहर की ओर निकल लिया।।।

उसके पीछे से एक ज़ोर का ठहाका उसका पीछा करता चला आया।।।
 
  क्रमशः

aparna..

शादी.कॉम-7

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     राधेश्याम जी के घर पे पूरा त्योहार का माहौल हो गया था,शाम को समधि जो आने वाले थे,राधे श्याम और उनके छोटे भाई सीता राम अपने अपने काम धन्धे से जल्दी वापस आ चुके थे लेकिन युवराज अपने पैट्रोल पम्प पर ही था,जाहिर है वो उनका दामाद ठहरा उसे तो अपने ससुराल में ये दिखाना ही है कि वो कितना व्यस्त रहता है,इसी से आज वो पूरी तन्मयता से पेट्रॉल पम्प,फिर एजेन्सी सब जगह घूम घूम कर मुआयना कर रहा था।।

   घर की महिलायें सुबह से रसोई मे जुटी थीं ऐसे जैसे मास्टर शेफ उन्हें ही चुनने आ रहें हैं,खैर उनकी परीक्षा परिणाम का समय आ गया,गिरिधर शास्त्री मय बेटा पधारे –

  “का हो समधि जी ,सब कुशल मंगल??ऐसा प्रस्ताव लाएं हैं कि आप खुशी से नाच उठोगे।”

“अरे आईये आईये !!! आपके आने से ही प्रसन्न हैं, बताईये कौन प्रस्ताव लाये हैं आप??”

“अरे बहू कुछु मीठा उठा पानी वानी लाओ भाई।।”

  “जी बाबूजी अभी लाये,,,आप कैसें है पापा और मम्मी कैसी है??”

  “सब कुशल है बिटिया !! ये लो सब तुम्हारी मम्मी भेजी है तुम्हरे लिये।।”
   रुपा अपने पिता का लाया सारा सामान समेट जल्दी से रसोई में आ गई,उसे चाय चढ़ाने से ज्यादा जल्दी अपने लिये भेजी साड़ी  देखने की थी,और साथ ही उसे बैठक में चल रही बातचीत सुनने की भी हड़बड़ी थी,,इसी सब चक्करों में जल्दी जल्दी चाय चढ़ाने मे लगी थी,तभी उधर से रुपा के चाचा ससुर की लड़की पिंकी गुजरी _”अरी ओ पिंकी हियाँ आओ ज़रा,इ देखो हम पानी खौलने रख दिये हैं,तुम तनिक पत्ती शक्कर दूध डाल डुला के छान लायोगी।”

“तो साफ साफ कहिये ना भाभी कि हम चाय बना दें।”

“अरे चाय बनाने कहाँ कह रहे हम !! हम तो बस ज़रा सा देख लो कह रहे,ना करना चाहो तो जाओ ,हम तो बहु हैं,हमे तो करना है,हमे कहाँ छुटकारा है इस घर गिरस्ती से,तुम तो भैय्या राज्कन्या हो,जाओ जाओ लाड़ो आराम करो।।”

“अरे भाभी इतनी सी चाय के लिये बात कहाँ से कहाँ पहुंचा दी आपने,जाइये मैं चढ़ा दूंगी चाय।”

“हाय सच्ची! देखो हमारे लिये बस इत्ती सी छानना,हम अभी आये।।”और रूपा लपक झपक भागी वहाँ से,और जाकर अपने कान दीवानखाने की दीवार से लगा कर खड़ी हो गई,बीच बीच में देखती भी जाती थी,कि कोई देख ना ले,उसे अपनी बुद्धि मे जितनी बात समझ मे आई उसका सार ये था कि पिंकी के लिये उसके मायके के पड़ोसी श्यामू चाचा के लड़के का रिश्ता उसके पापा उसके ससुर को बता रहे थे,श्यामू चाचा का बीड़ी पत्ते का करोबार था,अच्छे खानदानी रईस आदमी थे,उनके बेटे पप्पू को उसने बचपन में देखा था एकदम गोल मटोल गोलू गप्पू सा था,अब बड़ा होकर वो भी अपने बाबूजी का हाथ बंटा रहा था,,अच्छा है मालदार और बड़े घर चली जायेगी तो बार बार पलट कर मायके नई आयेगी,ननंद के ब्याह लगने से रूपा को अन्दर ही अन्दर प्रसन्नता ही हुई,वैसे पिंकी का जो स्वभाव था उससे इस घर के किसी सद्स्य को कभी कष्ट नही पहुंच सकता था।।

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   पिंकी राधेश्याम जी के छोटे भाई की इकलौती कन्या थी,और इस घर की अकेली   राजकुमारी !!!  ,वैसे उससे पहले उसका एक भाई भी था जो थैलेसिमीया की भेंट चढ़ गया जब मात्र 2साल का था!!! उसके जाने के और 2 साल बाद पिंकी का जन्म हुआ था,इसीसे घर भर की अत्यधिक लाड़ली थी,पर राजा भैय्या के तो जिगर का टुकड़ा थी उनकी ये छोटी लाड़ली बहन ,पूरा घर पिंकी पिंकी की पुकार से गुंजायमान रहता था,और पिंकी घर के किसी कोने या छत पे बैठी अपनी यू पी एस सी की किताबों में खोई रहती।।
    अपने प्रथम प्रयास में ही पिंकी ने मेन्स तक की यात्रा बिना किसी रुकावट के पार कर ली थी,तीव्र बुद्धि की स्वामिनी पिंकी बांसुरी की सीनियर भी थी और उसकी गाइड भी।।
   पिंकी ने अभी शादी ब्याह जैसे समय व्यर्थ करने वाले परिश्रम की तरफ सोचा भी नही था,अभी उसका एकमात्र सपना था प्रशासनिक अधिकारी के पद पर आसीन होकर लाल बत्ती वाली गाड़ी में घूमना।।
      वैसे तो यू पी और बिहार दोनो ही ऐसे राज्य हैं जहां हर दूसरे घर का लड़का यू पी एस सी ही निकालना चाहता है,पर अब लड़कियाँ भी इन मामलों में पीछे नही है।।
   चाय छानकर बाहर लेकर जाती पिंकी से रूपा ने आकर ट्रे अपने हाथ में ले ली और बैठक में जाकर धीरे धीरे सब को चाय पकड़ाने लगी जिससे और कुछ देर वहाँ की बातें स्पष्ट रूप से सुन सके ।।।
     अन्ततः उसके कान जो सुनने को तरस रहे थे, उस बात की अमृतवर्षा से उसके तृशार्त कान सिक्त हो उठे।।

“देखिए समधि जी जादा घुमा फिरा के बोलने की हमारी आदत नही है,हम सीधे सच्चे आदमी हैं।”
गिरिधर के ऐसा कहते ही राधेश्याम जी बिना बात मुस्कुरा उठे-“इसमें कोनो दो राय नही वकील बाबु, जो कहना चाहतें हैं,कह दीजिये,एकदमे स्पस्ट ।।”

“हां तो हम कह रहे ,अगर श्याम त्रिपाठी के लड़का के लिये आप पिंकी का रिश्ता हाँ बोल देते हैं तो आपके राजा के लिये हमरी रेखा की भी हाँ ही होगी,  देखिए समधि जी आपका लड़का सुन्दर सुसील(सुशील) तो है पर का है ना हम ठहरे वकील ,हमे थोड़ा पढ़ाई लिखाई से कुच्छो जादा ही लगाव है,हमरी रेखा तो दिल्ली तक से जाके पढ आई है,बस यही बात है।।”

“अरे कैसी बात करते हैं समधि जी हमरे राजा के लिये एक से बढकर एक पढ़ा लिखा लडकियों का रिस्ता आ रहा है,ऊ कोनो कलेक्टर से कम दिखता है का??”अपने बेटे के बारे में सुन माँ का हृदय चिन्घाड़ उठा।

“बहन जी कलेक्टर दिखना और होना में बहुतै फरक होता है, हमे राजा पसंद है ,हम ये थोड़े कह रहे कि राजा और रेखा की सादी नही करेंगे ,हम तो बस कह रहे एक हाथ दे एक हाथ ले।”

“तुम भीतर जाओ ,खाना उना की तैय्यारी करो,हम हैं ना यहां बैठे,इ सब बात व्यवहार हम देख लेंगे।।”

  श्रीमती जी सनसनाती हुई रसोई में चली गई,जो लड़की उन्हें निपट नापसंद थी,और जिसके  लिये वो पतिदेव के सामने अपनी नाराज़गी  जाहिर कर चुकी थी,उसी लड़की के लिये उनके राजा और पिंकी का ऐसा मोल भाव उस सरल हृदय सरला नारी को कचोट गया,,कैसा आदमी है रिश्तों का भी मोल भाव तैय्यार कर रखा है,,मन मे इतना गुस्सा समेटे भी बेचारी ऊपर से खुशी दिखाती हुई पूरियां छानती रहीं,रसोई में ही रूपा भी थी जो जल्दी जल्दी हाथ चलाती खाना परोसने में लगी थी,उसके सामने कुछ भी कहना आफत मोल लेना था।।
   
                पिंकी की माँ नही थी,और उन्होनें अपने दोनो लड़कों और पिंकी में कभी भेदभाव नही किया था, उन्हें भी पिंकी के ब्याह की जल्दी थी,पर उन्हें ऐतराज गिरिधर शास्त्री के लाये रिश्ते के कारण अधिक था।।
    रूपा ने सारी थालियां टेबल पर सजा कर सभी बड़ों को बुला लिया और सबका भोजन कार्यक्रम शुरु हो गया,इस कार्यक्रम के मध्य ही दामाद बाबु युवराज का भी आगमन हो गया जिन्हें देखते ही गिरिधर शास्त्री का मुखमंडल प्रसन्नता से चमक उठा।।
      अब युवराज भी उस गोष्ठी का हिस्सा था,उसे उसके साले साहब ने सारी बातें सविस्तार समझाई और नये जमाने के व्यापारी युवराज ने सहर्ष सभी बातों के लिये हामी भर दी,वैसे हामी भरने के पहले उसने एक गहरी दृष्टी अपने बाऊजी की ओर फिराई और आंखों ही आंखों में दोनों गुणी जनो ने इस रिश्ते का नफ़ा नुकसान माप लिया ,बाऊजी की तरफ से हरी झण्डी मिलते ही युवराज ने अपनी स्वीकारोक्ती दे दी।।।
      सबका भोजन समाप्त होने के पहले ही राजा भैय्या भी गर्मा गर्म जलेबी संभाले चले आये, जलेबी अपनी अम्मा को पकड़ा कर और मेहमानों को नमस्ते कर भैय्या जी अपने कमरे में चलते बने,उन्हें वैसे भी ऐसी महफिलों में वो रस नही मिलता था,जो उनकी वानर सेना के साथ था।।
    
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    अगले दिन सुबह से रूपा कोयल की तरह कूक रही थी,उसे ब्याह के समस्त क्रियाकलाप के लिये क्या कैसे और कहाँ से करना है की अत्यंत आतुरता थी,और इसी हड़बड़ी में उसने बिना किसी भूमिका के पिंकी को सारी बात कह सुनाई!!

“क्या बात कर रही हो भाभी!!! हमारी शादी ?? अभी से,अरे अभी तो हमे पढ़ना है,किसने तय कर दी हमारी शादी??”

“क्या बात करती हो नंद रानी!! और कौन तय करेगा,घर के बुजुर्गों ने तय की ।।। और पढ़ाई का क्या है,वो तो ससुराल जा के भी हो जायेगी।।इत्ता बड़ा काम है उन लोगों का ,वैसे भी राजरानी बन के रहोगी,का ज़रूरत फिर पढ़ाई लिखाई का।।”

“देखिए भाभी आपसे हमें बहस नही करनी,बड़ी अम्मा कहाँ हैं,ये बताओ!! उन्होनें कुछ नही बोला?? और राजा भैय्या??”

“किसी ने कुच्छो नई बोला,सब बड़े खुस हैं,और तुम भी हो जाओ,,लाखों का दूल्हा है,मिट्टी के मोल मिल रहा है समझीं,,उनका करोबार देख कर एक से एक बड़ा घर का रिस्ता आ रहा है,वो तो हमारे पापा के साथ अच्छे संबंध हैं इसिलिए तुम्हें हमारे कारण मांग लिया,वर्ना कमी है क्या उनके पास??”

“तो जब उनके लड़के मे कमी नही है तो अपने जैसी या आपके जैसी सर्वगुण सम्पन्न लड़की ढूँढ लें हमें काहे फंसा रहे,उनके बीड़ी पत्ता के गोदाम में बैठ के पढेंगे क्या हम,खैर छोडिए आप ये बताईये राजा भैय्या कहाँ हैं,सुबह से दिखे नही।।”

“लल्ला जी तो सबेरे ही जिम निकल गये,वहीं मिलेंगे तुम्हें ,,अरे रुको तो कहाँ भागी जा रही हो,चाय तो खतम कर लो।।”भाभी की बात खतम होने से पहले ही पिंकी जिम को निकल ली।।

“हे भगवान!! इ भगवान ने थोड़ा सा बुद्धि का दे दिया रानी जी खुद को जाने का समझ बैठी हैं,अरे ऊ तो हमारा सादी हो गया नही तो हम भी कलेक्टरनी नई भी बनते तो कम से टीचर उचर तो बनी जाते।”

“सही कह रही हो बहु जी!! आपका तो कदर इ नई करता ई घर का लोग,कहाँ आप अऔ कहाँ ओ।”

“चल चल बस कर !! जल्दी जल्दी हाथ चला,ढ़ेर सा काम पड़ा है यहाँ,मुझे तो सांस लेने की भी फुर्सत नही।।” घर की मुहँ लगी नौकरानी नागेश्वरी को काम समझा अपनी चाय उठा रूपा वहाँ से चली गई ।।

  उधर पिंकी जिम पहुंची तब राजा भैय्या सभी महिलाओं को कसरत करवा रहे थे।।

“अरे पिंकी तुम यहाँ?? घर पे सब ठीक तो है??” प्रिंस ने पिंकी को देखते ही पूछा

“राजा भैय्या कहाँ है?? जल्दी बुलाओ उन्हें ।।”

“हां हम बुला रहे,तुम इधर भैय्या जी के ऑफिस में आ जाओ,वहाँ बैठो,हम भैय्या जी को भेजते हैं ।”
  
  पिंकी जैसे ही ऑफ़िस में घुसी वहाँ बाँसुरी बैठी राजा के लिये नोट्स तैय्यार कर रही थी।।

“बंसी तुम यहाँ??”

“हाँ हम भी थोड़ा दुबला होना चाहते हैं, पर आप इस समय यहाँ कैसे दीदी।।बांसुरी ने मुस्कुराते हुआ जवाब पे सवाल दाग दिया।।

तभी राजा भी दरवाजा खोल अन्दर आ गया,और उसके पीछे से प्रिंस 3कप में चाय लाकर रख गया।

“प्रिंस तुम बाहर जाओ ,हमे राजा भैय्या से कुछ प्राईवेट बात करनी है।”प्रिंस के साथ बांसुरी भी उठने लगी –“अरे तुम बैठी रहो बंसी,तुमसे हमे कोई परहेज नही।।

“बोल छुटकी ऐसा क्या हो गया,कि तू सुबह सुबह यहाँ दौड़ी आई??”

“राजा भैय्या आपको पता भी है घर मे क्या चल रहा है।।

“क्या चल रहा है,तू ही बता दे।”

“हे भगवान !! मेरे भोले भंडारी भैय्या!! आपके रिश्ते की बात चल रही ,और मेरी भी।।
   भाभी के पड़ोसी के अनपढ़ लड़के के साथ हमे बान्ध देना चाहते हैं ,और भाभी की बहन के साथ आपको,कुछ पता है आपको??”सब आटा बाटा, अदला-बदली चल रही है।।”

“अरे मेरी प्यारी छुटकी बहना शादी तो करनी ही है ना,तो कर लो जिससे अम्मा बाऊजी कह रहे।।”

“आप कर लेंगे रेखा से शादी??”

“अरे उसमें का बवाल हो गया ,,अम्मा कहेगी तो ज़रूर कर लेंगे ,बस हम पहले पास हो जायें,उसके बाद जो बड़े भैय्या अम्मा बाऊजी कहेंगे हम कर लेंगे।।”

“हाँ तो आप कर लिजिये,हम नही कर सकते,ऐसे किसी ऐरे गैरे से शादी,इतनी मेहनत से पढ़ाई किये हैं …..अभी पिंकी की बात पूरी भी नही हो पाई थी कि राजा भैय्या बोल पड़े-

“अरे तो तुम्हारे ससुराल वाले तुम्हरी पढ़ाई के खिलाफ है क्या??हम दो मुक्का मार के अभी सीधा कर देंगे ससुरों को।।”

“नही भैया बात वो नही है!! असल में हम किसी और को पसंद करते हैं,उसका नाम है रतन !! पूरा नाम रतन मराबी।।”

“अरे दीदी ये तो हमारे स्कूल वाले भैय्या है ना जो बारहवीं मे हेड बॉय थे,आपकी कक्षा में ही थे ना।।”
बांसुरी चहकी

“हाँ बंसी वही रतन!! स्कूल के बाद वो बी ई करने चला गया और हम बी एस सी।।उसिने हमे यू पी एस सी के लिये प्रेरित किया,,हम दोनो ने साथ ही सारी पढ़ाई करी है भैय्या,और अब हम रतन को पसंद करने लगे हैं ।।”

“का गजब कर रही हो छुटकी,हमारे यहाँ आज तक किसी ने अपनी मर्ज़ी से शादी ब्याह नही किया!! बाऊजी तो तुम्हारे साथ हमे भी मार डालेंगे।।”

“दीदी तो रतन भी मेन्स निकाल चुके हैं??”बांसुरी ने पूछा।।

“हां बंसी!! और इंटरव्यू के रिजल्ट के बाद ही हम लोग घर में बात करने वाले थे,उसके पहले ही ये सारा काण्ड हो गया,हम नही जानते भैय्या ,आपको बडी अम्मा और बड़े भैय्या से बात करना ही पड़ेगा,वर्ना??”

“वर्ना का करोगी तुम,घर से भाग जाओगी??”
भैय्या जी के ऐसा बोलते ही पिंकी ने उन्हें घूर के देखा।।

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“नहीं वर्ना हम खुद ही बात करेंगे!! हमे लगा पहले आप से बात करनी चाहिये,भैय्या आप तो कम से कम अपनी छुटकी की बात मान जाओ,रतन बहुत अच्छा लड़का है,आप एक बार मिल लो खुश हो जाओगे।।”

“अरे बौड़म हमारी खुशी तो तेरी खुशी में है,पर हमे बाऊजी से बहुत डर लगता है,इन सब मामलों में, अच्छा पूरा नाम का बताया लड़के का।।”

“तुम अभी तक क्या सुन रहे थे राजा!! मराबी है सरनेम,यही जानना चाहते थे ना,तो सुन लो रतन ब्राम्हण नही है।।”बांसुरी इतना बोल के मुस्कुराने लगी।।

राजा आँखें फाड़े कभी बाँसुरी को कभी पिंकी को देखने लगा,वो पहले ही परेशान हो रहा था कि घर पे कैसे बात की जाये अब ये जाति वाला मामला हल निकालने की जगह बात को और बिगाड़ गया।।

“नही हो सकता !! ये बिल्कुल नही हो सकता छुटकी ।। अम्मा की  कसम, बाऊजी तुझे और मुझे गोली से उड़ा देंगे ,उनके गोली मारने के पहले अम्मा हम दोनो को जहर देके मार डालेगी ,और कहीं इन दोनों से बचे तो भाभी के ताने जान ले लेंंगे।।भूल जा छुटकी ,तू भूल जा उस लड़के को।।”

“नही भैय्या हम नही भूल सकते,और ना आपको भूलने देंगे,अब इस मुसीबत से आप ही हमे निकालेंगे और आप ही हमारी शादी रतन से करायेंगे।।”

“राजा !!! एक बात बताओ ,तुमने डर के मारे सबका नाम लिया बस बड़े भैय्या का नही,,इसका मतलब तुम्हारा सब कॉन्शियस माइंड कहीं ना कहीं ये जानता और मानता है कि बड़े भैय्या हमारी मदद करेंगे।।”
          बांसुरी ने अपना ज्ञान दिया,जो राजा भैय्या के लिये काला अक्षर भैंस बराबर था।।

“का बोली तुम बांसुरी??कौन सा माइंड??”
राजा भैय्या के इस सवाल का जवाब दिया पिंकी ने

“सही कहा बंसी!! अब राजा भैय्या को बड़के भैय्या को पटाना पड़ेगा,अगर वो मान गये तो फिलहाल हमारे इंटरव्यू के रिजल्ट तक के लिये शादी टल जायेगी या कैन्सिल हो जायेगी,और बस उसके बाद हमारे दोनो भाई मिल कर हमारे लिये रास्ता बना देंगे।।”

दोनो सखियाँ एक दूजे को देख मुस्कुराने लगी और राजा भैय्या सर पकड़ के बैठे रहे ,तभी प्रिंस ने दरवाजा खोला और भैय्या जी को आवाज़ दी–

“भैय्या जी ऊ पुडुष वाली (घोष) आंटी तो रिलेक्सर से उतरे नई रई हैं,और उनके पीछे सब आंटी लोग उसी में चढ़ने के लिये अपना पारी का रस्ता देख रही है,का करे हम।।”

“सर फोड़ लो अपना,और हमारा भी।”भैया जी का बौखलाया जवाब सुन के प्रिंस वापस भाग गया।।

तभी भैय्या जी का फ़ोन खनखनाया “नमो नमो श्री शंकरा”
रेखा का नाम देख भैय्या जी का मुहँ बन गया,बड़ी लाचारी से उन्होनें पिंकी को देखा

“उठाओ उठाओ,अब काहे नई उठा रहे,आपकी होने वाली बीवी का फ़ोन है।”

“अरे !! अभी हुई थोड़ी ना है,पहले तुम्हारे पचड़े से बाहर तो निकलें तब जाके अपना बारे मे सोचेंगे।।”

“अच्छा,तो मतलब तैय्यार बैठे हैं आप रेखा से शादी के लिये,भैय्या जी सुन लो ,ना मेरी उस बीड़ी वाले से शादी होगी और ना आपकी इस बिलाई से मै होने दूंगी।।”

पिंकी की बिलाई वाली बात में बांसुरी को इतना रस मिला की वो हो हो कर हंसने लगी,और उसे हँसते देख राजा भैय्या को भी हँसी आ गई,तीनों के सम्मिलित ठहाकों से बाहर खड़े प्रिंस को थोड़ी राहत मिली और वो एक बार फिर अन्दर झाँका–

“भैय्या जी !! एक बात बोलनी थी।।”

“अबे बोलो बे!! तुम तो साले मरे जाते हो ,हम ना रहे तो।।ऐसा का आफत हो गया अब।।बोलो।”

“भैय्या जी वो हनुमान गली वाला गुड्डा है ना चार पांच चेलों को लिये आया था,आपको पूछ रहा था,हमने बोल दिया ,आप नई हैं अभी।।”

“हमे काहे पूछ रहा था बे,,पूछे नही तुम??”

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“पूछे ना ,तो बोलता है ,प्रेम उनकी गली की किसी लड़की को पटा लिया है,इसिलिए प्रेम के हाथ पैर तोड़ने से पहले आपको चमकाने आया था,कह रहा था,बोल दियो अपने राजा भैय्या से हमरी गली की तरफ आँख उठाया तो सरिया घुसा देंगे आँखी में।”

“हे शिव शंकर!! आज का दिन दिखा रहे हो परभू ,, एक के बाद एक नारियल हमारे ही सर फोड़ रहे हो।
  अब ई प्रेम कौन सी लड़की को फंसा लिया यार।।
तुम ठीके कहती हो बांसुरी!! हम बहुतै बड़े बौड़म है।।”

“हम समझ गये कौन है वो लड़की”बांसुरी के ऐसा कहते ही प्रिंस राजा पिंकी सब उसकी तरफ देखने लगे__
         “निरमा!! हाँ 100% निरमा ही है।।”

तभी बाहर से कुछ हल्ले गुल्ले की  आवाज़ आयी और चारों के चारों बाहर की ओर लपके।।

क्रमशः

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aparna..

शादी.कॉम- 6

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                    राजा भैय्या के जिम में उन्होनें पहले महिलाओं और पुरूषों के लिये अलग अलग समय रखा था,परन्तु उनके चेले चपाडों का उन्हे वक्त बेक़क्त घेरे रहना उस मे दिक्कत डालने लगा था इसिलिए सारा कॉमन समय कर दिया,फिर भी अधिकतर घरेलू महिलायें,कॉलेज जाने वाली लड़कियाँ 9बजे के बाद जब घर के पुरूष ऑफिस और बच्चे स्कूल निकल जाते तभी आती,।।
     भैय्या जी ने सारी समय सारिणी बांसुरी को बता दी,,अभी कुछ दिनों के लिये कॉलेज की छुट्टियां होने से बाँसुरी ने भी 9बजे का टाईम स्लॉट चुन लिया।।

    भैय्या जी ने जिम में पहनने योग्य कपडों के बारे में उसे उतनी ही जानकारी दी जितनी ना भी देते तो काम चल जाता ।।

   पहले दिन एक हाथ में पानी की बड़ी सी बोतल थामे बांसुरी ठीक 9 बजे जिम पहुंच गई ।।
    उस समय तक एक भी लड़की नही आई थी,पर हाँ मोहल्ले के जाने किस किस कोने से निकल के अर्नोल्ड श्वाज़नेगर के बाप वहाँ आये हुए थे।।कोई पूरी तल्लीनता से डम्बल कर रहा था,कोई पुश अप्स, कोई बाइसेप्स पे भिड़ा था तो कोई चेस्ट पे काम कर रहा था,,ऐसा लग रहा था अगले मिस्टर इंडिया की तैय्यारी यही लोग कर रहे ,और इन्ही मे से कोई एक मिस्टर इंडिया बनने वाला है।।

“अरे आ गई तुम,बड़ी समय की पाबंद हो,अच्छा है,ये अच्छा की अपना पानी का बोतल भी लाई हो।” भैय्या जी ने आगे बढ़ कर बांसुरी का स्वागत किया

“पानी नई ग्लूकोस का बोतल है,हमे लगा पहली बार मेहनत का काम करेंगे ,कहीं चक्कर वक्कर आ गया तो।”

“ठीक बोल रही हो,कमजोर भी तो हो।”लल्लन ऐसे बोल के हंसने लगा,,भैय्या जी ने घूर के उसे देखा और बांसुरी को एक ट्रेड मिल पे ले गये,तभी दरवाजा खुला और एक आंटी जी ने अन्दर झाँका
  “पुडुषो का भी एही टाईम है क्या??”

  “क्या बोल रही हो आंटी??”प्रिन्स ने पूछा

  “मैं ए जानना चाहती हूं कि लेडीश लोगों का अलग टाईम है या पुडुषों के साथ ही उनको भी जिम कडणा (करना) है।””

“का बोल रही है यार ये आंटी?”प्रिन्स ने लल्लन से कहा -“अबे चुप रहो तुम ,कलकत्ता की हैं आंटी जी समझे।।”लल्लन ने कहा

तब तक भैय्या जी चले आये,-“आईये आईये मैडम ,आज आपका पहला दिन है ,आपको एक फॉर्म भरना पड़ेगा, आपका हाईट और वेट चेक कर के आपका बी एम आई निकाले देते हैं,जिससे पता चले कि आपको कितना वजन कम करना है।”

“अडे बाबा हमको बजन कम नही कडणा ,हम तो इहाँ देखने आया था कि हमाडा हश्बैंड भी घड(घर) से जिम बोलके निकलता है,यहाँ आया है कि धेलू के यहाँ बैठ के रोशोगुल्ला खा रहा है।”

“अरे बाप रे आंटी तो करमचंद निकली यार!!”

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राजा भैय्या ने उन्हें जाकर प्यार से जाने क्या समझाया अगले दिन से खुद ही जिम आने की कसम खा कर घोष आंटी वहाँ से चलती बनी।।

अब हो चुके थे सवा नौ और धीरे धीरे कर के जिम की रौनक बढ़ने लगी,एक एक कर शहर की दुबली पतली लम्बी गोरी छरहरी वामायें धीरे धीरे दरवाजा खोल खोल कर अन्दर आने लगी,ये वही लड़कियाँ थी जिनके इन्तजार में लड़के पुश अप्स कर कर के अपना सीना फुलाए जा रहे थे…..इन लडकियों के अन्दर आते ही जिम का माहौल बदलने लगा था,हर लड़का कुछ अधिक ही जोश में वर्क आउट कर रहा था,और मज़े की बात ये थी कि इंस्ट्रक्टर राजा भैय्या के अलावा हर लड़का इंस्ट्रक्टर बना बैठा था,,और ये सब एक दूसरे को नही सिर्फ लडकियों को ही ज्ञान दे रहे थे…….
                   आज बाँसुरी का पहला दिन था,ऐसी पतली छरहरी लडकियों को देख उस बेचारी को समझ ही नही आ रहा था कि ये यहाँ करने क्या आयी हैं,उन में से कुछ का ये हाल था कि अगर ट्रेड मील पे 5मिनट भी दौड़ ले तो उन्हें फिर सीधे स्ट्रेचर पे डाल कर सीधा एम्स रिफर करना पड़ता वो भी एयर लिफ्ट,,कुछ एक जितना तो वर्क आउट नही कर रही थी ,उतना अपने आप को हर एंगल से पलट पलट के आईने में देख रही थी….एक ने तो गज़ब ही कर दिया ,ट्रेड मील में चढ़ने के पहले जाकर अपनी लिपस्टिक डार्क की,फिर क्रॉस ट्रेनर पे चढ़ने के पहले भी ,फिर साईकल के भी,इस तरह से हर वर्क आउट सेशन के पहले उसका एक टच’प हो जाता …….
                     बांसुरी बेचारी को पहला दिन था इसिलिए 5km/hrs की स्पीड पे 20 मिनट चलने का आदेश हुआ था,वो अपनी मशीन पे चलती इधर उधर देखती जा रही थी……. कुछ देर बाद एक बड़ा लॉट आंटियों का अन्दर आया,उन्हें देख बांसुरी को कुछ तसल्ली हुई क्योंकि भले ही वो अलग अलग साइज़ ऐंड शेप की थी,पर थी सब की सब मोटी।।
      अब इतनी सारी महिलायें जहां हो वो जगह गुलजार ना हो ,ऐसा कैसे हो सकता है…..पूरे जिम का माहौल कुछ ही देर मे किट्टी पार्टी के माहौल मे तब्दील हो गया।।

   इनमें से कुछ एक ही लोकल थी,अधिकतर दिल्ली गुडगाँव से थी।।

  “क्यों बेटा जी,आज क्या पहला दिन है आपका??”
  उनमें से एक ने बांसुरी से पूछा।

“हाँ!! पर आपको कैसे पता ?”

“हा हा !! अब बोलो पटियाला सलवार पहन के कौन जिम करने आता है।” ये बोल कर वो फिक से हँस दी।।

  “और ऐसे स्किन कलर की जेगिंग पहन के कौन आता है आंटी।।”

  आंटी वहाँ से उतर के साईकल चलाने चली गई ।।

  बांसुरी चलती रही अभी भी 20मिनट पूरे होने मे 10मिनट बाकी थे,अभी वो चल ही रही थी कि अचानक से वहाँ रखे साउंड बॉक्स पे किसी लड़के ने गाना बजा दिया

   “चदरिया झीनी रे झीनी ,आंखे भीनी ये भीनी ये भीनी, यादें झीनी रे झीनी रे झीनी।।”

बांसुरी को वर्क आउट के साथ गाना अच्छा लग ही रहा था कि किसी लड़की ने ट्रैक बदल दिया-

“आजा पिया तोहे प्यार दूँ,गोरी बहियां तो पे वार दूँ ।”
  बांसुरी को ये भी पसंद आने ही वाला था कि फिर ट्रैक बदला-

“दीवारों से मिल कर रोना अच्छा लगता है,हम भी पागल हो जायेंगे,ऐसा लगता है।।”

ये भी ठीक लगना शुरु होता उसके पहले फिर ट्रैक बदला-
    “लैमबोर्गिनी चलाई जान्दे ओ”

अब ट्रैक बदलता इसके पहले ही भैय्या जी की आवाज़ जिम मे गूँज उठी

“अरे देवदास की छठी औलाद तू यहाँ वर्जिश करने आता है या,मनहूस गाने बजाने….मैडम लोग जो गाना सुनना चाहते हैं वो बजा लेने दो भई,काहे इतना चिरै चिरैय्या लगा रख्खे हो,थोड़ा फास्ट ट्रैक बजाएंगे तो लोगों को भी वर्जिश करने में मज़ा आयेगा ,और तुम झीनी चदरिया बजाये पड़े हो।।

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बीच बीच में भैय्या जी आकर बांसुरी को कुछ ज़रूरी बातें बता जाते।।अबकी बार बांसुरी के दोनो ओर की मशीनों पे आंटी लोगों ने कब्जा जमा लिया और चलते चलते अपनी बातों में भी लग गई ।।

“कल तुम क्लब के “सावन सुन्दरी “में क्यों नही आई,बड़ा गज़ब इन्तेजाम था,इस बार क्लब की लेडिस को अकल आई ,थोड़ा अच्छा खाना पीना था।।

  “अरे नाग-पंचमी थी ना कल,,, तो हमारी सासु जी कहा करती हैं,,नाग पंचमी के दिन घर से मत निकला करो,इसिलिए क्लब नही आ पाये,वैसे क्या रखा था खाने में ।”

(सास सही कहती है,नागिनों को निकलना भी नही चाहिये कोई पिटारा मे बन्द कर लिया तो)प्रिन्स और लल्लन उंन लोगों की बातों में अपनी अलग कॉमेन्ट्री कर रहे थे

“लिट्टी चोखा था,स्वाद अच्छा था….पर घी ज़रा कम शुद्ध लगा मुझे ,अब वैसे भी होटल वाले हमारे जैसा शुद्ध घी कहाँ बना पायेंगे।।”

“बस लिट्टी!! और मीठा में कुछ नही दिये??”आंटी जी की आत्मा कलप गई कि हाय बेचारी लेडिस लोग 2 घन्टे के तपस्या कर के इतना लीप पोत के क्लब पहुंची और इतना सूखा सूखा निपटा दिये।।

“था ना,,मीठा में इमरती खिलाए थे,और चाय कॉफ़ी था,जिसको जो पीना हो,लगभग सभी ने दोनो पिया।।”

  “पीना भी चाहिये जी!! महीना का 300रुपया लेते भी तो हैं ये लेडिस क्लब वाले,हम होते तो 2चाय और 2कॉफ़ी पी लेते।।”

(भगवान बचाये!!) फिर प्रिन्स चहका।।
“कहाँ से वजन कम हो,जितनी कंजूसी से पसीना बहाती हैं जिम में ,,उतनी दरियादिली से ठूंसती हैं।।
  अब यहीं देख लो,जब से चढ़ी है मशीन मे खाना पीना में ही अटकी हैं “__लल्लन ने अपना ज्ञान दिखाया।।

“अरे ये तो बताओ बनी कौन इस बार सावन सुन्दरी?”

“सोनी बनी है इस बार की सावन सुन्दरी।”

“हैं!!! ऐसा तो कोई खास चेहरा मोहरा है नही,मैनें तो कल तुम्हारे फोटो देखे थे फेसबुक पे,तुम ज्यादा सुन्दर लग रही थी।।”

“अरे चेहरा देख के नही दिया ना !!वो तो जो जितना ज्यादा हरा पहन के आयेगा उसपे जोड़ घटाव किया,मेरा तो साड़ी ब्लाऊस,चूड़ी बिन्दी,कान का गले का ,नेल पोलिश ,हेयर क्लिप,रुमाल सब हरा  था,बल्कि सैंडल और पर्स भी।।

“तो फिर सोनी कैसे जीत गई जी।”??

“ये दुसरी वाली आंटी ना बस मजे ले रही है,इसे कोई सहानुभूति नही है,की वो हरा रुमाल वाली आंटी इत्ता कर के भी नही जीती,बल्कि हमको लगता है दिल ही दिल में खुस हो रई है कि हाँ बेटा देखा !! ससूरी  खुद को ऐस्वर्या राय समझती है।”
   प्रिन्स ने लल्लन के कान मे फुसफुसाया

“अर्र्रे क्या बताऊँ,वो सोनी ने बाल भी हरे रंग से हाईलाईट करा लिया था,अब देखो मैनें इतना किया ,सब फेल हो गया….आँख के ऊपर हरा रंग का शेडो लगाये थे,उसी को थोड़ा गाल पे भी मार लिये थे,लिपस्टिक तक हरा था हमारा ,,अब सोचो।।

“हे भगवान !!! इसके पति का हार्ट फेल कैसे नही हुआ इसको देख के,,ये तो पूरी दमदमी माई लग रही होगी।””लल्लन बोला।

“तुम दोनो यहाँ का कर रहे हो बे!! जाओ उधर वो योगा मैट बिछाओ ,,हम योग शुरु करेंगे अब।।”
  राजा भैय्या के फटकार लगाते ही दोनो लोग मशीन से कूद कर दूसरी तरफ भाग गये।।

   राजा भैय्या के योग सेशन के बाद सभी महिलायें बड़ी आत्मीयता से अपनी अपनी परेशानियां राजा भैय्या को बताने लगी,जिस सब का सार यही था कि इतनी मेहनत कर के भी वजन का कांटा 10grm भी इधर से उधर नही हिलता जबकि खाने में पूरा परहेज बरता जा रहा है,राजा भैय्या ने रोज की तरह उन्हें दो चार पते की बातें बताईं ,जैसे दिन भर पानी पीना,सुबह खाली पेट में गर्म पानी में शहद मिला के लेना वगैरह वगैरह,,पर उस पे भी अधिकतर महिलाओं का तुर्रा यही था कि,हम तो 10-12ग्लास पानी पी जातें हैं,फिर भी यही हाल ….
       खैर किसी तरह भैय्या जी का सेशन समाप्त हुआ और एक एक कर सारी महिलायें जिम से निकल गई ।।

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“तुम तो बहुतै सहनशील हो राजा।”बाँसुरी के ऐसा बोलने पर राजा ने पूछा

“काहे?? ऐसा काहे बोल रहीं।”

“तो और क्या?? सब को इत्ता प्यार से समझा रहे हो ,और सब समझने की जगह उल्टा ‘ हम तो यही करते हैं ‘ की रट लगाये बैठी हैं,अरे अगर यही करती हो,तो दुबला काहे नही जाती,हम तो सच्ची कहें राजा !! अगर तुम जो जो बताये हो वो वो हम रोज करें तो हम पक्का पतले हो जायेंगे।।”

  बांसुरी और राजा के चेहरों पे मुस्कान आ गई ।।
तभी भैय्या जी का फ़ोन रिंग हुआ ,और प्रिन्स फ़ोन लिये भागता आया “भैय्या जी बाबूजी का फ़ोन है।”

“कहाँ हैं लाट साहब??”

“जिम में हैं बाबूजी कहिये क्या काम है।”

“काम तो ऐसा कुच्छो नई है,पर शाम को इहाँ उहाँ घूमने ना चले जाना,आज शाम को तुम्हारी भाभी के फादर आ रहें हैं,तो तुम्हारा भी घर पे रहना ज़रूरी है,समझे।।”

“भाभी के बाऊजी आ रहें,उसमें हमारा रहना नई रहना से का होगा,सामान सब्जी मिठाई उठाई हम अभी पहुंचा देते हैं,जो आप बोलो।”

“अरे जब हम बोल रहे कि तुम्हारा रहना ज़रूरी है तो है,ऊ अपनी रेखा के बारे में कुछ बात चीत करना चाहते हैं,समझे!!! तो समय पे घर आ जाना,और बाकी सब तो हम ले आये हैं तुम आते समय गर्मा गर्म जलेबी लेते आना।”

“ठीक है हम आ जायेंगे बाबूजी,और कुछ?”

“और कुछ तो ऐसा पूछ रहे जैसे बहुत काम के हो,सारा जमाना का फाल्तू काम बस करा लो इनसे, भूलना मत ,हम दुबारा फ़ोन नई करेंगे,ठीक है!!”

“ठीक बात”

तभी लल्लन का फ़ोन बजने लगा, प्रिन्स ने फ़ोन उठाया ,उधर से एक मधुर सी आवाज़ आई- “हेलो रोहित??”

“नही ,यहाँ तो कोई रोहित नई है बहन जी” प्रिंस ने जवाब दिया।।

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“अरे ऐसे कैसे,इसी नम्बर पे तो सुबह रोहित से मेरी बात हुई थी,एक मिनट रुको……..उधर से उस लड़की ने फ़ोन में चैट खोल के नम्बर एक बार और चेक किया “हाँ जी मैने सही नम्बर लगाया है,अभी कुछ देर पहले ही इसी नम्बर से रोहित ने एक साई बाबा वाला  मेसेज मुझे भेजा था जिसके बाद हमारा झगड़ा हो गया था,तो बस उतनी ही बात से गुस्सा होकर उसने नम्बर बदल दिया??”

“नही दीदी नम्बर तो किसी ने नही बदला ,वैसे ऐसा क्या मेसेज था कि झगड़ा हो गया आपका?”

“वेट वेट!! तुम मुझे दीदी क्यों बोल रहे हो,, i m not a दीदी type material और दुसरी चीज़ उस बुद्धू राम ने मुझे मेसेज किया कि ये साई बाबा की असली फोटो है,पन्द्रह लोगो को भेजो तो गुड न्यूज़ मिलेगी,,whatever!! इसी लिये झगड़ा हो गया मेरा ,पर यार मैं तुम्हे क्यों ये सब बता रही हूं,तुम फ़ोन रखो।।

अभी वो मोहतरमा फ़ोन काटने ही वाली थी कि, लल्लन गिरता पड़ता भागता हुआ आया और प्रिंस से फ़ोन छीन लिया

“हेलो ,हेलो बेबी !! मैं आ गया,सॉरी वो वॉश रुम में था ,तभी फ़ोन नही उठा पाया,बेबी सॉरी।।”

बांसुरी राजा भैय्या प्रिंस सभी लल्लन को आंखे फाड़ फाड़ के देखने लगे

“अबे तुम्हारा नाम रोहित कब से हो गया बे??”

  लल्लन के फ़ोन रखते ही राजा भैय्या ने सवाल किया।।

“भैय्या जी हमारा स्कूल में नाम रोहित ही था,वो तो घर पे अम्मा लोग फिर आप लोग सब लल्लन ही कहने लगे तो वही चल पड़ा।।”

“बड़ा फैंसी नाम रखे हो रोहित बबुआ ” प्रेम ने कहा

“तुम भी तो बड़ा फिल्मी नाम रखे हो प्रेम बाबु।”

“हां वो हमारी अम्मा मैनें प्यार किया देख के आई और उसी रात हम पैदा हो गये,तो बस हमारा नाम प्रेम पड़ गया।।।”

“वाह बहुत बढ़िया!!! हमारी सहेली निरमा की अम्मा को निरमा के पैकेट पे बनी लड़की इतनी सुहाई की वो अपनी बिटिया का नाम निरमा रख दी।।

बांसुरी के ऐसा बोलते ही सब हंसने लगे–“तुम हमेशा बोलती रहती हो इसिलिए तुम्हारी अम्मा तुम्हारा नाम बांसुरी रख दी।।है ना।”प्रिंस ने बोला

“हां और ये बिल्कुल साक्षात कहीं के राजकुमार दिखते हैं,इसलिए इनका नाम राजकुमार पड़ा ,है ना राजा??”

बांसुरी के ऐसा कहते ही राजा भैय्या का चेहरा गुलाबी हो गया और बेचारे शरमा के रह गये।।।

…….

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……………तो यहाँ लल्लन बाबु ही थे जो रेखा से जुदाई के गम में जिम में सुबह जुदाई वाले गानों की बहार सजाये हुए थे…..अभी कोई उनसे उनके फ़ोन के बारे में पूछता ,उसके पहले ही उन्होनें वहाँ से खिसकने में ही अपनी भलाई समझी,वो निकल ही रहे थे कि प्रिंस ने पूछ ही लिया- “अरे लल्लन तुम बताये नई,वो लेडिस कौन थी जिसका फ़ोन आया था तुम्हारे लिये??”

“तुम गधे के गधे ही रहोगे प्रिंस,लेडिस नही एकवचन के लिये लेडी कहा जाता है,तुमको पूछना चाहिये कि वो लेडी कौन थी जिसका फ़ोन आया था।।”बांसुरी के ऐसा बोलते ही प्रिंस बिखर गया

“यार तुम ना भैय्या जी को पढ़ाने आई हो,उन्हें ही पढ़ाओ,हमे ना समझाओ सिखाओ ,समझी।।”

अभी प्रिंस और बांसुरी का फसाद चल ही रहा था की लल्लन सबकी नज़र बचा कर वहाँ से निकल लिया।।।

क्रमश:

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aparna…

शादी.कॉम -5

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  “अम्मा जी खीर बना के रख दिये हैं,और कद्दू भी छौंक दियें हैं,ये देख लिजिये पूड़ी का आटा,इत्ता हो जायेगा कि और ले लें ।।”

  रूपा यानी युवराज अवस्थी की दुल्हनीया और राजा भैय्या की भाभी आज बड़ी प्रसन्न हैं,हो भी क्यों ना !! आज उनके पिता और भाई शाम के भोजन पर उन सब से मिलने आ रहे हैं ।।
    गिरिधर शास्त्री यानी रुपा के पिता कभी कोई काम निराधार नही  करते ,,उनके हर कार्य के पीछे लम्बी चौडी योजना होती है।।
      गिरिधर शास्त्री का भी शहर में अच्छा खासा नाम है,उस ज़माने के वकालत पढ़े हैं,भले ही प्रैक्टिस ना करें पर मोहल्ले भर के फ़्री के पटवारी हैं,किस की ज़मीन कहाँ अटकी भटकी पड़ी है,उसे कैसे पार लगाना है आदि आदि के आँकड़े उनके जिव्हाग्र पे हमेशा अंकित रहते हैं ।।
     किसी के मिट्टी के मोल बिकती जमीन पे उन्होनें करोडों का नफ़ा करवाया है तो किसी के सदियों से फंसे वकालती विरासत के मामले को चुटकियों मे यूँ सुलझा के रख दिया,जैसे कोई मसला था ही नही।।

  पहले पहले तो कुछ लोगों ने उनपे तंज कसने ही उन्हें वकील बाबु कहना शुरु किया पर धीरे धीरे बच्चे बूढ़े सभी के लिये वो वकील बाबु बन गये,यहाँ तक की उनकी अपनी खुद की सगी बीवी भी उन्हें वकील बाबु ही बुलाती है।।
     और जब जब वो अपने पल्लू के ओट से उन्हें मीठी सी झिड़की के साथ ‘ओकील बाबू’ बुलाती ,वकील बाबू खुद को कहीं का मजिस्ट्रेट समझने लगते ,और इसी समझने समझाने में तीन तीन लड़कों के साथ दो दो बिटिया भी घर के आंगन को निहाल करने लगीं ।।
   दो बड़े भाईयों के बाद रुपा फिर रेखा और फिर एक छोटा भाई नाहर।।

    राधेश्याम अवस्थी के बड़े पुत्र युवराज को एक बार उन्होनें पटवारी कार्यालय में अपने पैट्रोल पम्प के कागजों के लिये माथा पच्ची करते देखा था,और वो गोरा चिट्टा उंचा नौजवान उन्हें अपनी बड़ी के लिये भा गया था,बस उन्होनें पूरे परिवार की जन्मकुण्डली बांची और चट मंगनी पट ब्याह निबटा दिया।।
      इधर कुछ दिनों से वो रेखा के ब्याह के लिये घर वर ढूँढ रहे थे।।ऐसे ही कभी मायके आई रुपा ने अपनी माँ के कान मे रेखा और राजा भैय्या के रिश्ते की बात डाली थी…
     जब पति को रात दिन एक ही उलझन मे परेशान देखा तो एक रात श्रीमती जी ने खाने की थाली में आलू मेथी के साथ अपना आइडिया भी परोस दिया-
  “ए जी सुनो!! हम का कह रहे,ई बिटिया का देवर है ना ,राजा!! हमरी रेखा के लिये उसका रिस्ता काहे नई देखते,घर का घर में ही रिस्ता हो जायेगा, वैसने पहली बार में इत्ता सारा दे चुके हैं अब दुसरी में थोड़ा राहत हो जायेगा।।””

   गिरिधर शास्त्री बाहरी बातों में औरतों का हस्तक्षेप अच्छा नही मानते थे,पर इस बात में उन्हें थोड़ा दम लगा।।

“राहत हो जायेगा से मतलब का है तुम्हरा।”

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“अरे रूपा के टाईम जो सोफा आलमारी फिज टीवी दिये रहे ,ऊ अब रेखा के टाईम देने की का ज़रूरत।
एकै घर मा दू दू ठो सोफा दू दू फ्रिज का करेंगे समधि ।”

“अच्छा ऐसा बोल रही हो,हां पर गहना उहना तो देबै पड़ी ।”

“तो हम कब मना किये,गहना तो हम बनबा रख्खे हैं,पर तुम एक बार बात तो करो समधि जी से।”

“ठीक बोल रही हो गुड्डू की अम्मा ,हम कलै फ़ोन करते हैं अवस्थी जी को,,उनका छुटका देखा भाला है,अच्छा लड़का है।।”

  अगले दिन शास्त्री जी के फ़ोन से अवस्थी जी की बांछे खिल गई,उन्हें मन मांगी मुराद मिल गई,इत्ते बड़े आदमी की दोनो बेटियाँ उनके घर आ जायेंगी तो समझो उनकी वसीयत का 2 बटा 5भाग उनका हुआ,हालांकी वो जानते थे,शास्त्री पुरानी रीति का आदमी है ,वो लडकियों को जितना देना है शादी मे दे दुआ के खतम करने वालों मे से है,और लडकियों का वसीयत पे कोई अधिकार हो सकता है ये वो कभी नही मान सकता,पर अपनी लड़ाकू फूलन देवी सरीखी बहु रूपा पे उन्हें पूरा विश्वास था,80 एकड़ खेती का ज़मीन नही भी दिये तो 40 एकड़ का आम का बगैचा तो बिटिया लोगों के नाम कर ही देगा गिरिधर  शास्त्री!!
       उन्होनें युवराज के ब्याह मे रेखा को देखा था, लड़की ऐसी बुरी भी नही थी,कॉलेज तक की पढ़ाई कर चुकी थी,और अभी कोई फैसन वाला कोई कोर्स कर रही थी,उन्होनें इस बारे में अपनी श्रीमती जी से बात की-
        “अरे का कह रहे आप,ऊ सिडबिल्ली को हम अपनी बहु ना बनाएँगे, रुपा तो चलो कम से कम काम भी कर लेती है,ज़बान चलाने के साथ,पर ऊ लड़की का तो लक्षनै ठीक नई लगता,जब देखो अन्ग्रेजी मा गिटर पिटर करती रहती है।।”

    “अरे तुम कहाँ से कहाँ पहुंच जाती हो,देखो हमरा राजा भी तो पढ़ लिख नही पा रहा,उसके लिये कहाँ से कलक्टरनी लायोगी खोज के, औ ई सोचो दुनो बहन एक ही घर मे रहेंगी तो झगड़ा फसाद भी नई होगा,बांट बखरा का झमेला से मुक्ति,भई हमरा तो दुई ठो लड़का है,दुनो एक संग निभा लेंगे।।”

   “अरे तो लडकियों का अकाल पड़ गया है का,,जो इक्के घर की दुनो को बहू बनाना चाह रहे।”

  “अब तुमसे बहस नही करना चाहते कल शास्त्री आ रहा अपने लड़का के साथ,इहै बातचीत करने,अच्छा से खान पान की तैय्यारी कर लेना, हम जा रहे ठीका में देखने,बहुत दिन से उधर गये नही।

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   राधेश्याम ज्यादा औरतों के पर्पंच में पड़ने वाले आदमी नही थे,सीधे और शान्त स्वभाव के थे,अपनी बात रखने के बाद एक बार ज़रूर पत्नि का पक्ष सुनते पर जब उसे अपने पक्ष मे नही पाते तो बिना मतलब की बहस करने की जगह एक बार मे अपना निर्णय सुना कर निकल लेते थे,,कम उम्र से उठाई जिम्मेदारियों के कारण पैसों के थोड़े लालची थे,कहीं से मुफ्त में आ रही लक्ष्मी से उन्हें कोई वैराग्य नही था,हालांकी उनकी दिली ख्वाहिश हमेशा ही थी कि उनके दोनो लड़कों की शादी पढ़ी लिखी लड़कियों से हो,पर जब युव के लिये रूपा का रिश्ता आया तो बारहवीं पास रूपा में उन्हें सुलक्षणी बहु का रूप दिखा या सरस्वती मैय्या पे लक्ष्मी मैय्या भारी पड़ गई,पर जो भी हो उन्होनें सहर्ष उस रिश्ते को स्वीकार लिया था,अबकी बार रेखा थी सामने,जो कि अपने पूरे घर परिवार में अकेली थी जिसने अन्ग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करी थी,तो उस अंग्रेज़ी माध्यम का मोह भी अवस्थी जी संवरण नही कर पा रहे थे।।

   रेखा शास्त्री!! रूपा की छोटी बहन ,अपने पूरे कुनबे में सबसे ज्यादा लिखी पढ़ी मानी जाती थी,एक तो इनकी शिक्षा ‘कार्मल कॉन्वेन्ट ‘ से हुई थी, इन्होनें स्कूल में अपने बाकी भाई बहनों के जैसे सरस्वती वन्दना की जगह प्लेज किया था,,जहां इनके भाई बहन बचपन में किसी भी मेहमान के आने पर समवेत स्वर में “हम होंगे कामयाब एक दिन “गाया करते थे,वही घर की छुटकी बिटिया रेखा उसकी जगह अकेले पूरे गर्व से “we shall overcome ,one day..” गाया करती थी।।
    बचपन से इस भेद भाव का असर हुआ कि रेखा के मन में ये पैठ गया कि वो कुछ विशेष है,क्योंकि वो इंग्लिश मीडियम से पढ़ी है,,उसके इंग्लिश मीडियम में पढ़ने का श्रेय जाता था उसकी मासी को,शादी के चार सालों में भी जब हीरा व्यापारी तिलोकचंद त्रिपाठी के घर बाल ग्वाल नही विराजे तो उनकी धर्मपत्नी सुलोचना ने अपनी बड़ी बहन की छोटी लड़की रेखा को गोद लेने की सोची।।
     इस सोच-सोच में ही उन्होनें उसे ढेरों कपड़े दिलवाये,विदेशी गुड़िया दिलवाई,चॉकलेट खिलवाई और शहर के सबसे बड़े इंग्लिश मीडियम स्कूल में उसे भर्ती कराया….पर विधाता के खेल!!! जिस दिन से गोद लेने का कानूनी तीन पांच शुरु होना  था उसी दिन सुबह नाश्ते की टेबल पर नाश्ता  देख कर ही सुलोचना का जी मचल गया,डॉक्टर ने आते ही हाथ की नब्ज थाम कर हीरा व्यापारी को बधाई दे डाली,,आनन फानन घर में उत्सव का माहौल बन गया,और इस सब में उलझे त्रिपाठी दंपति गोद लेंने लिवाने की रस्म भूल गये….
      सब छूट गया,सभी का जीवन खुद मे व्यस्त हो गया पर रेखा का स्कूल नही छूटा,,बीच बीच में जब भी हीरों से लदी फदी मासी अपने बाल गोपाल को कमर पे टिकाई बड़ी बहन से मिलने आती अपनी प्यारी रेखा की इंग्लिश मीडियम बातें सुन खुशी से चौडी हो जाती,और इन्ही सब बातों का धीमा धीमा ज़हर रेखा के खून मे घुलता चला गया।।

    दिखने में ठीक ठाक परन्तु कपडों जूतों से बेहद स्टाईलिश रेखा ने जब अपनी दीदी की शादी में अपने दीदी के लुभावने देवर को देखा तो पहली ही नज़र में अपना दिल हार गई,उसे पूरी शादी में अपने खुद के अन्दर माधुरी और राजा भैय्या के अन्दर सलमान खान दिखता रहा।।
      उसने बड़ी नज़ाकत से जूते भी चुराये और जूतों के बदले पैसों की गुहार भी लगाई,पर उधर सलमान खान नही था,जो ‘ जूते दो पैसे लो ‘की गुजारिश करता,उधर तो राजा भैय्या थे,उन्होनें साफ साफ पूछ लिया”कितने चाहिये??”
       अब इधर रेखा के पहले ही किसी एक नाज़नीँ ने लपक के -“पूरा पांच हज़ार एक रुपैय्या चाहिये भैय्या जी” बोल दिया।।
   
    भैय्या जी हो हो कर हँस दिये-” बस इत्ता ही चाहिये,अरे हमरे बड़के भैय्या का जूता ही ग्यारह हज़ार का है,ई लो रख लो,और ला दो हमरे भैय्या का जूता।।”

   अब बेचारी रेखा जब तक बाकी सखियों को जूते और पैसों के लिये लड़ने का मह्त्व सिखाती बताती तब तक में  लाली दौड़ कर जूते का डिब्बा उठा लायी,भैय्या जी नये करारे नोट गिन के लाली के हाथ में रख दिये और जूते का डिब्बा उठाये बिना अपनी माधुरी दीक्षित को देखे ही चल दिये।।

     बेचारी रेखा मन मसोस के रह गई ।।

दुसरी बार आस जगी जब उसकी बड़ी बहन रूपा ने उसे कुछ दिन अपने पास रहने को बुलाया,किसी दूर की रिश्तेदारी में होने वाली शादी में पूरा अवस्थी परिवार जाने वाला था,बस राजा भैय्या और रूपा ही नही जाने वाले थे।।
    बिल्कुल माधुरी जैसी कातिल रेड ड्रेस पहन के रेखा अपने सलमान के इंतज़ार मे पलक पांवडे बिछाए बैठी थी कि अब राजा आयेगा और उसकी खुली जिप्सी में जाते समय वो भी मन भर के गायेगी-” फूलों कलियों की बहारें,चंचल ये हवाओं की पुकारें…..ये मौसम का जादू है मितवा “

   पर एक बार फिर भगवान ने उसकी इच्छाओं पे घडों पानी फेर दिया।।राजा भैय्या तो आये,जिप्सी में ही आये ,पर भाभी को साथ लिये आये, वहाँ घर में कोई बड़ा ना होने के कारण रुपा को कुछ दो चार दिन के लिये मायके भेज दिया गया।।

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    मायके के नाम पे खिली रूपा दौड़ी चली आई,दोपहर का भोजन खा कर सलमान खान अपने घर मोहल्ले को निकल गया और माधुरी अकेली विरह अग्नि में जलती रही,और बैकग्राउंड में गाना बजता रहा- “सोचेंगे तुम्हें प्यार करें कि नही।”

  रुपा कुछ चार दिन रह कर,अपनी सास को मन भर गालियाँ देकर चली गई,पर जाते जाते अपनी माँ के कान में अपनी छुटकी बहना और राजा की शादी का मन्त्र भी फूंक गई।।
    ना ना ऐसा बिल्कुल भी नही था कि रुपा की सास दुष्ट थी,जालिम थी,बहुओं पर अत्याचार करने वाली शशिकला और बिंदू टाईप की सास थी,अरे ऐसा होता तो ऐसे नर्क में रूपा अपनी बहन को झोंकने क्यों तैय्यार हो जाती???
    पर मायके आ कर अपनी माँ बहन के सामने दुखड़ा रोना भी एक कला है,इसका अपना अलग एक मज़ा है,और पकौड़ी की प्लेट के साथ वो मज़ा दुगुना हो जाता है।।

माँ और दीदी को बात करते सुन रेखा खुशी से बावली हो गई,,उसकी मन मांगी मुराद ऐसे टप से उसकी गोद में आ गिरेगी ,इसका उसे भान भी नही था।।
    कहाँ वो “हम आपके हैं कौन “के सपने देख रही थी और कहाँ उसे “हम साथ साथ हैं “मिल गई ।।

  इन चार दिनों में रेखा ने अपनी बड़ी बहन की खूब सेवा की,बिल्कुल सगी जेठानी मान के।।
    उसकी बिदाई के एक दिन पहले उसे अपने साथ शॉपिंग पर ले गई,उसकी साड़ी से मैचींग नेल पॉलिश दिलाई,क्लचर दिलाया,एक छोटा पर्स दिलाया और ब्लू लेडी का पर्फ्यूम भी दिलाया,बड़ी बहन निहाल हो गई,जाते जाते रेखा के गले लग खूब रोयी(रोने का नेग भी ज़रूरी होता है)और चुपके से बोली”अब अगली बार तुम्हें अपने देवर के लिये बिदा करा ले जायेंगे।।”

  दीदी के रवाना होते ही रेखा अपने कमरे में जाकर राजा की यादों में खोने जा ही रही थी कि फ़ोन पे मैसेज आ गया__
             “कैसी हो जान?? दीदी गई? अब तो हमारे लिये समय निकाल लो।”

उफ्फ ये वॉट्सएप्प भी ना,जब ज़रूरत ना हो तभी घि घि बजने लगेगा,रेखा मेसेज चेक कर चुकी थी, अब जवाब ना देना मतलब आधे घन्टे का सर फुटौव्वल,इसिलिए बेचारी ने जवाब दिया-

  “मैं ठीक हूं बेबी,अभी मम्मी काम से बुला रही, बाद में बात करती हूं ।”

  असल में दीदी की शादी और बाद में भी राजा ने कभी रेखा  में कोई विशेष दिलचस्पी नही दिखाई थी।उसी समय फैशन डिज़ाइनिंग का शार्ट टर्म कोर्स करने रेखा दिल्ली गई,जहां उसकी मुलाकात रोहित से हो गई,वो भी वहाँ किसी शार्ट टर्म कोर्स के लिये आया था,दोनो अपने अपने शहर से निकल कर इतने बड़े अंजान शहर में अकेले थे सो दोस्ती हो गई पर नही वो दोस्ती वहाँ प्यार में नही बदली,वहाँ दोनो सिर्फ दोस्त ही थे,साथ साथ टपरी में चाय पीना, सैंडविच खाना,और अपनी अपनी क्लास के बारे में चर्चा करना,बस इतना ही!! यहाँ तक की दोनों ने अपने घर परिवार और शहर की भी बात नही की।।
  इस पन्द्रह दिन की दोस्ती के बाद दोनो मोबाईल नम्बर एक्सचेंज कर अपने अपने शहर चले गये।।
   
   शुरुवात हुई रोज सुबह की good morning और रात की good night से…फिर धीरे धीरे क्या कर रहे हो??
खाना खाया? क्या खाया?क्या पहना ? वगैरह वगैरह से होते हुए दिन भर की लम्बी चैट में बदल गई ,और आखिर एक दिन दोनो को समझ आ गया कि दोनो प्यार में हैं…..प्यार का इजहार हुआ और दोनो की दुनिया बदल गई ।।
     अब तो दोनो को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण काम मिल गया “चैटींग “और बाकी सारे काम इस काम के सामने निरे नीरस और बेवजह हो गये।।
      रोहित कुछ ज्यादा ही सीरियस होने लगा इसलिए धीरे से अपने परिवार के बारे में बताना शुरु किया….पापा अधिकारी है,बड़ा भाई भी अधिकारी ,दीदी टीचर ,रेखा ने पूछा और तुम??
  “मैं तुम्हारा आशिक” इस खुशनुमा रंगीन चैटींग में पहला रोड़ा बनके आयी जात पात की दीवार
    बातों बातों में जब रोहित ने बताया कि उसका नाम है रोहित सूर्यवंशी!!!! हाय राम !! सूर्यवंशी !!
     रेखा का कलेजा मुहँ को आ गया,अब क्या करूं?? पापा तो नही मानेंगे!! दिखने में इतना साफ सुन्दर चिट्टा लड़का ,उसने तो देख कर by defalut सोच लिया था कि कोई दुबे चौबे तिवारी त्रिपाठी उपाध्याय ही होगा बंदा,पर अब क्या करे…..
     इतनी गहरी उलझन में डूबी लैला को और डुबाने उसकी बड़ी बहन धमक पड़ी और ये आ गया प्रेम कहानी में दूसरा रोड़ा ।।
    जब रूपा ने माँ से रेखा और राजा की बात की तो रेखा को वापस “हम आपके हैं कौन “वाले दिन याद आ गये और आज के ज़माने की लैला ने अपने सपनों को नई दिशा में मोड़ लिया….पर बेचारी अपनी सपनों की ज़मीन पे राजा के प्यार की फसल बो पाती उसके पहले ही 3 दिन से वैराग्य धारण किये रोहित का उबलता खनकता हुआ मेसेज आ गया….
   माँ किसी काम से बुला रही है,बोलकर किसी तरह रेखा ने जान बचाई और इसी सोच में डूब गई कि आगे रोहित को क्या और कैसे बोलना है,ऐसा नही था कि उसे रोहित पसंद नही था,या उसे राजा अधिक पसंद था,,असल मे उसे इन दोनो से कही ज्यादा पसंद था शादी का उत्सव उत्साह!!
    उसे भी बाकी लडकियों की तरह 3महीने का bridal course करना था,हर मौके के लिये अलग अलग थीम में सजे लहन्गे लेने थे,खूब सारे जेवर लेने थे,कपड़े लेने थे,इतनी महत्वपूर्ण विमर्श वाली चीज़ों के मध्य कोई इनसे कमतर (दूल्हा) के बारे में सोच के क्यों मगजमारी करे।।
    इसिलिए अपने मन को समझा कर रेखा अब रोहित को समझाने की तैय्यारी करने लगी।।

क्रमश:

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aparna..

शादी.कॉम -4

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  ,”पर्मिला अरी ओ पर्मिला,,कहाँ मरी पड़ी है,,हे राम!!! एक तो मरे घुटने के दर्द से चला फिरा नही जाता फिर भी तेरी बेटी के लिये कैसे रात दिन एक किये हूँ,,देख तो सही।।”

  अपने पेट पर के टायरों को संभाले घुटनों को सहलाते बुआ जी प्रमिला को आवाज़ देती भीतर चली आईं, उनकी आवाज़ से प्रमिला रसोई से हाथ पोछती भागी भागी आई और उन्हें प्रणाम किया।।उनकी आवाज़ बिना सुने ही सीढियों से नीचे उतरती बाँसुरी ने जैसे ही बुआजी को देखा वापस ऊपर को जाने लगी पर बुआजी की गिद्ध नजरों से बच ना सकी_
     “अरी लाड़ो तू भी आ जा,तेरे लिये ही तो आती हूँ बिटिया,,देख कैसा हीरो जैसा रिश्ता लेकर आई हूँ,,आ आकर देख तो जा।।”

अभी उनकी बात पूरी भी नही हुई थी कि वीणा अपनी चमचमाती रानी कलर की साड़ी में लसर फसर वहाँ पहुंच गई ।।

प्रमिला ने दोनो के हाथ में बादाम का हलुआ पकड़ा दिया,”जिज्जी पहले इ खा के बताओ ,कैसा बना है,हमरी लाड़ो को बड़ा पसंद है,उसी के लिये बनाया है,बहुत दिमाग का काम करती है रात दिन बेचारी,खटती रहती है किताबों के बीच।।

“बस अम्मा यही सब घी में तर हलुआ पूड़ी ठून्गो अपनी लाड़ली को,दिन बा दिन बरगद बनती जा रही है,अरे  इतना तेजी से महंगाई नही मोटाती जैसी तेजी से तुम्हरी पेटपुन्छनी मुटा रही, कुछ तो रहम करो अम्मा।।”

“अरे तो का भूका मार दे अपनी लड़कोर को, तुम्हे भी तो खिला पिला के पाला पोसा है बड़की ।।

“हमें खिला पिला के पाला है इसे खिला पिला के मुट्वा रही हो,फरक है दोनो में अम्मा।।

“प्रणाम करते हैं बुआजी,और दीदी कैसी हो,गोलू को कहाँ छोड़ आई आज।”

“उसकी दादी के पास छोड़ा है,अरे दादी हैं इतना तो करे अपने पोता के लिये।।”

किसी बात पे बुआजी ने अपना प्रिय राग छेड़ दिया और वीणा भी उनके सुर से सुर मिलाने लगी।।

“करेला उसपे नीम चढ़ा”बाँसुरी ने धीरे से गुनगुना कर कहा।।

“का बोली तुम ,हैं!! ए बांसुरी,हमे नीम बोल रही हो।खुद का सकल(शक्ल) देखी हो आईना में, कोनो साईड से लड़की नही लगती हो,हम तो समझा समझा के थक गये,कि कभी पार्लर भी चली जाओ।”

“ठीक ए बोल रही हो बिटिया,ऐसा करो लड़का वाला आने वाला है बांसुरी को देखने,,….. दुई चार दिन में आ जायेगा,तब तक तुम इसका थोड़ा रंग रोगन करा दो।।”
बुआ जी के इस प्रस्ताव का वीणा ने पूरा पूरा समर्थन किया ,पर बाँसुरी अड़ गई

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“हम वो अदनान सामी के लिये पार्लर नही जायेंगे,,हमको नही पसंद वो मौत का कुआँ मे जाना ।”

“पगला गई हो का,,कौन बोला तुमको ऊ मौत का कुआँ है??हम तो जातें हैं थ्रेडिंग कराने,और फेसियल कराने ।”

“हाँ तो तुम जाओ ना दीदी,हमको नही पसंद वहाँ जाना ।।जब हमारा मन करेगा तभी जायेंगे।।”

“तो इतना खेती काहे बढ़ा डाली हो आँखी के ऊपर , कम से कम थ्रेडिंग ही करा लो।।”

“हम काहे करायें,वो लड़का तो हमारे लिये कुछ नही करा रहा।।”

“हाय राम!! मैं कहाँ जाके मरूं,अरे लड़के कभी थ्रेडिंग कराते हैं क्या?? कैसा पागल समान बात करती हो बंसी।।””

“जानती हो दीदी लड़के काहे थ्रेडिंग नही कराते जिससे उनका बात सही साबित हो जाये कि ‘ मर्द को दर्द नही होता’ अरे जब तक औरतों वाले काम करोगे ही नही तब तक दर्द पता कैसे चलेगा।।

“अरे सुन ना हमको पता है तू बहुतै ज्ञानी है,अभी चल हमारे साथ कम से कम क्लीन अप करा ले लड़की!!!चल बुआजी की बात का लाज रख ले………..अम्मा तुम आज रात के खाने पे आलू टिक्की बना लो,जिससे हमारी धमल्लो खुस हो जाये,चल अब टिक्की के नाम पे चल पार्लर।।”

जाने क्या सोच बाँसुरी वीणा के साथ चली गई,लौटते में उसे जिम में रुकना था भैय्या जी को सुबह 7:30 पे ज्यादा कुछ पढा नही पाई थी इसीसे शाम 4 का समय फिर से दिया था,,4बजे निरमा वहीं पहुंचने वाली थी।।
   
        पार्लर से लौटते हुए बांसुरी ने जैसे ही जिम में रुकने की इच्छा जाहिर की,वीणा का मन मयूर नाच उठा,अपने मोहल्ले की परिपाटी को निभाते हुए वो भी किसी ज़माने में भैय्या जी की फैन हुआ करती थी,पर नारी सुलभ शील संकोच ने खिड़की से झांक लगा के रोड पे जॉगिन्ग करते भैय्या जी को देखने से ज्यादा की अनुमती नही दी और फिर सरकारी नौकरी करते यू डी सी का आया चमचमाता रिश्ता उसके घर वालों ने लपक लिया,और कभी भैय्या जी को बड़ी अदा से राजकुमार बुलाने वाली वीणा भी संसार के सुर में सुर मिलाती भैय्या जी बोलने लगी।।
   
        पर आज बांसुरी की इच्छा सुन उसके मन में सोया प्यार जाग उठा,,अरे अपने प्रथम प्यार को एक झलक देख लेना पतिदेव से चीटिँग थोड़े है !! वो तो बस ऐसे ही………जैसे लगातार चलते बोरिंग से सीरियल के बीच सलमान खान का तूफानी ठंडा एडवरटाइजमेंट ……….जैसे थाली भर बेस्वाद खिचड़ी के साथ भरवा लाल मिर्च का अचार!!! हाय !!
  
       “ठीक है चलो फिर बंसी!! हम भी तुम्हारे साथ जिम चले चलतें हैं ।”

  “काहे?? तुम क्या करने जाओगी दीदी??”

  “अरे तो तुम का करने जा रही हो,,पतला होने का भूत सवार हो गया क्या??”

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भैय्या जी नही चाहते थे कि उनकी ट्यूशन वाली बात जिम से बाहर लीक हो इसिलिए उन्होनें अपनी आदत के अनुसार बांसुरी को ‘मम्मी की कसम’ खिला दी थी,अब उस कसम के बोझ तले दबी बाँसुरी ने असल कारण नही बताया- “हाँ दीदी हम सोच रहे थोड़ा जिम वीम करें,बहुत हट्टी कट्टी हो गये हैं …… नही!!”

“हाँ हो तो गयी हो एकदमी टुनटुन लगने लगी हो।।”

“अब इतना तारीफ भी मत करो दीदी,हम सोनाक्षी सिन्हा जैसे फिगर के हैं ।”

“ओह्हो बड़ी आई सोनाक्षी!! तो अब का करीना बनने का विचार है।।”

“अब यही मान लो दीदी,बचपन से हमे जानती हो,जो ठान ली तो फिर कर के रह्ते हैं,है ना!!, अब तुम जाओ,हम एक घंटा में घर आ जायेंगे।”

बड़े बेमन से जिम में झांकती फाँकती वीणा घर की तरफ मुड़ गई,उसे बाँसुरी पे पूरा पूरा विश्वास था,कि  चाहे प्रलय आ जाये राजा भैय्या उसकी छुटकी बहन जैसी रूपवती पे कभी दृष्टिपात नही करेंगे, इसी विश्वास पे अडिग बाँसुरी को वहाँ अकेली छोड़ वो घर चली गई ।।

   बाँसुरी वहाँ पहुंची तो निरमा और प्रेम एक ट्रेड मिल पे बैठे गप्पे मार रहे थे,भैय्या जी ज़मीन पे योगा मैट बिछाए किताबों के जाल मे उलझे बौराये बैठे थे,,दो चार छुटभैये इधर उधर वर्जिश करने की बहुत बुरी एक्टिंग कर रहे थे ।।
         हड़बड़ाती हुई बांसुरी अन्दर गई और भैय्या जी के पास पहुंच के बैठ गई,और किताबें देखने लगी

“अरे इत्ता सारा किताब काहे ले आये,आपको सिर्फ बारहवीं पास करना है,कोई आई ए एस थोड़े ही बनना है अभी।।”

“हमारे पास जो जो रख्खा था,हम सब उठा लाये,काम की तो सभी है ना।।”

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“नही!! आपके काम की कोई नही….आप मान लिजिये कि आप गधे पैदा हुए हैं,स्कूल मे भी गधे ही रहे और कॉलेज में भी गधे ही रहेंगे।।’

“भैय्या जी आपका लिहाज करके चुप हैं,समझा दीजिये इस लड़की को,कहीं हमारा दिमाग सटक गया तो हमारे हाथ से खून ना हो जाये इसका।”
एक गपोड़ी चिल्लाया

   भैय्या जी ने बिल्कुल सरकार वाले अमिताभ की स्टायल मे उसे हाथ दिखा के चुप करने का इशारा किया और बाँसुरी से बोले-“काहे हमरा इतना बेज्जती करती हो बात बात पे!! क्या मज़ा आता है इसमें ।”

“अरे तुम्हारी बेइज्जती नही कर रहे भई!! बस इत्ती सी बात कह रहे कि इतना सब किताब को मारो गोली,बस एक किताब पकड़ो नाम है ‘ युगबोध’!! और उसमें भी सब पढ़ने का ज़रूरत नही है,हम पिछले दस साल का पेपर देख के महत्वपूर्ण सवाल टिक कर देंगे,बस उसी उसी को तुमको रट्वा देंगे,,समझे।।”इतना सब किताब पकड़ के रट्टा मारोगे,हाथ में और दिमाग में दर्द हो जायेगा,समझे।

“देखा भैय्या जी ई लड़की फिर आपका बेज्जती कर रही,अरे भैय्या जी मर्द हैं ,उनको किताब पकड़ने से दर्द नही होता।।”

“का नाम है तुम्हारा ??”

“प्रिन्स!! प्रिन्स नाम है हमारा।”चेले ने सीना ठोक के जवाब दिया,उसे नही पता था कि उसने कैसी चतुर बिलाई से पंगा ले लिया था।।

“तो प्रिन्स तुम मर्द नही हो??”

“अरे काहे नही है,,हम भी हैं ।”

” जल्लाद देखे हो कभी?? कैसा दिखता है।”

“नही असली का नही देखे,,हम पिच्चर वाला जल्लाद देखे हैं ,अरे वही मिथुन चक्रवर्ती वाला जल्लाद।”प्रिन्स के चेहरे पे अभूतपूर्व ज्ञान की छटा फहर रही थी।।

“ब्यूटी पार्लर जानते हो?? वहाँ जो काम करती है ना, असल में वो जल्लाद होतीं हैं,समझे !!! भयानक खून की प्यासी!!
       पीपल पे उल्टी लटकी चुड़ैल भी इन पार्लर वालियों से बहुत डरती हैं ।।”

“आपको  कैसे पता बाँसुरी मैडम जी ।।”भैय्या जी ने अपनी भोली मुस्कान बिखेरते हुए पूछा ।।

“अरे कभी टी वी पे किसी भूतनी को मेक’प किये देखे हैं क्या?? सब बाल बिखराये पगलाये घूमती हैं ।।”

“आप मजाक बहुत करती हैं,हैं ना!!” भैय्या जी हँसते हुए बोले

“नही मजाक नही कर रहे,,आज ही दोपहर को हमारी दीदी और हमारी बात हो रही थी,मर्द और औरत की बराबरी के बारे मे….हम बोले मर्द कभी औरत का बराबरी कर ही नही सकते,जितना दर्द औरत झेल सकती है ,मर्द झेल पायेंगे भला??”

“ए बांसुरी तुम बहुत जादा बोलती हो,कहाँ हम मर्द और कहाँ तुम औरतें ।।।प्रिन्स की बात सुन बाँसुरी ने अपनी बीन बजानी चालू रखी

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  ”  तो प्रिन्स बाबू इतने बड़े मर्द हो तो आ जाओ अखाड़े में ब्यूटी पार्लर के ,और फिर हम देखेंगे तुम्हरी मर्दानगी ….एक कुर्सी मे बैठा दो एक लड़की को और दूसरे में तुम्हें या किसी भी मर्द को ,हम लिख के दे रहे हैं बाबु  , जब यमराज जैसी शकल की दो ब्युटिशियन हाथ में धागा पकड़ी भौंहो को नोचने आयेंगी ना तब तुम ससुरे मर्द ज्यादा जोर से चिल्लाओगे ।।
     अरे थ्रेडिंग तो सबसे सिम्पल दर्द है।।।जब दो खतरनाक खूनी खेल खेलने वाली नागिन आयेंगी तुम्हारे सामने और उनमें से एक तुम्हारा खरीफ की फसल से लहलहाता खेत वाला  हाथ पकड़ के उबलता हुआ वैक्स पलट देंगी और उसके बाद अपनी आंखों से आग उगलते हुए एक बोरी का टुकड़ा तुम्हारे हाथ पे बिछा के उसको जमा के जोर से सटाक !!!खींचेंगी ना तब कसम से कह रहे तुम्हें तुम्हरी अम्मा के साथ साथ नानी भी याद नही आ गई ना तो हमारा नाम बदल देना,,एक बार सह के देखो वो दर्द बबुआ और फिर बोलो मर्द को दर्द होता है कि नही….ऐसे बिलबिला के भागोगे ना कि सीधा मंगल यान से उड़ान भरोगे फिर चाहे कोई कितना  भी आवाज़ दे ले रुकने वाले नही  तुम मर्द!!!
          बड़े आये मर्द!!! खुद को कुच्छो नई कराना और हम सलगे ज़माने का दर्द झेले इनके लिये।।

“और सुनो ये फेशियल से चेहरा चमकाने का दावा करने वाली नागिने सबसे पहले चेहरा साफ कर चेहरे पे ब्लीच पोत देती हैं,वो कभी चेहरे पे पुतवा के देखो,रोंम रोम से ऐसे अंगारे फूटेंगे की जीते जी नरक की दावग्नी का स्वाद चख लोगे बबुआ।।
     ये सब करा लो उसके बाद हमसे कहना कि मर्द को दर्द नही होता।।”

“अरे बंसी !! हुआ क्या?? इत्ता काहे भरी बैठी हो।।”निरमा के पूछते ही बाँसुरी का ध्यान गया कि वो पढ़ना पढाना छोड़ कर बस इधर उधर की बतकही में लगी है।।

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  “अरे कुछ नही निरमा आज हमें दीदी जबर्दस्ती पकड़ के पार्लर ले गई थी,और बस ये ही कोई काम बिना मर्ज़ी के करना हमे पसंद नही।।”

“अरे कोई बात नही मैडम जी !! पर एक बात है,,आज आप अच्छी भी लग रही हैं ,कुछ कुछ सोनक्षी सिन्हा जैसी  ।।” राजा भैय्या के ऐसा बोलते ही बांसुरी मुस्कुरा पड़ी -” पर राजा हमें सोनाक्षी नही पसंद,हमें तो श्रीदेवी पसंद है,भले ही हमारी मम्मी के जमाने की हेरोइन है पर पसंद वही है।।”

  राजा भैय्या का मुहँ खुला रह गया क्योंकि दिल ही दिल में उनके भी ख्वाबों की शहजादी श्रीदेवी ही थी।।उनके आसमान के बादल श्रीदेवी के दम पे थे और उस आसमान की बिजलियां थी श्रीदेवी की अंगड़ाई ।।

“तो क्या हुआ आप बन सकती हैं श्रीदेवी !! अगर आप चाहें।”

“वो तो ठीक है पर तुम हमें ये आप आप क्यों कहते हो,तुम हमें बाँसुरी ही कहा करो,जैसे हम तुम्हें राजा कहते हैं ।।”

“ठीक है,,अच्छी बात है,तो अगर बुरा ना मानो तो एक बात कहें बांसुरी,तुम जिम शुरु कर दो।।तुम हमें पढ़ा दिया करो,और हम तुम्हें कसरत करवायेंगे, बस छै महीने मे तुम पूरी श्रीदेवी बन जाओगी।।”

“हाय !! सच्ची”

“और का! चाहे तो हम मम्मी की कसम खा लेते हैं ।”

“अरे नई नई कसम ना खाओ,,चलो तो फिर कल सुबह से हम आते हैं ,सुबह व्यायाम और शाम को पढ़ाई,ठीक है??”

“ठीक है।”राजा भैय्या ने मुहर लगा दी।।

बाँसुरी ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और राजा भैय्या ने अपनी मैनिक्यूर्ड (मैनिक्यूर की हुई जैसी दिखती)
उंगलियों से उसका हाथ थाम लिया।।

    एक तरफ जहां राजा भैय्या बांसुरी की बुद्धिप्रद कुशाग्र बातों में आकन्ठ डूबते जा रहे थे ,वही बाँसुरी को भी भैय्या जी की भोली हरकतों मे कम से कम बात करने लायक मित्र की झलक मिलने लगी थी।।

  बांसुरी ने जाते जाते पलट के प्रिन्स को बुलाया, प्रिन्स जो अभी तक ब्यूटी पार्लर के स्केरी हाऊस के डर के साये मे कांप रहा था,चुप चाप आकर उसके सामने खड़ा हो गया।।

“ए सुनो!! इतना ना डरो ,तुम्हे इस जनम पार्लर नही जाना पड़ेगा।।और एक बात कहें??”

“जी बांसुरी जी !! कहिये।।”

“ये जो शर्ट के दो बटन खोल के सिंघम बने घूमते हो ना कुछ नही होने वाला बबुआ,एक तो दिखते हो जैसे टी बी का मरीज एकदम सुख्खड़,,और उसपे बटन खोले और अपनी सच्चाई दिखा देते हो….
बन्द करो वर्ना लड़कियाँ तुम्हरे फेफड़े की हड्डियां गिन डालेंगी,और फिर शर्त लगाएंगी ,एक बोलेगी 12थी रे तो दुजी कहेगी नही मैनें तो 14 गिनी।।

हँसते हँसते बांसुरी और निरमा घर निकल गये।।

क्रमशः

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aparna..

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घरवाली

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            “अरे कहाँ व्यस्त हो भाई लोग ,,सब के सब ऐसा क्या देख रहे कम्पयूटर पे…जरा हम भी तो देखें ।।””
    ” अरे कुछ नही रवीश ,ये मेरी एक दोस्त है ,उसने अपनी पार्टी की फोटो पे मुझे टैग किया है ,फेसबुक पे,तो बस वही देख रहे ,हम दोनो।”
     रवीश भी देखने लगा। कुछ आठ दस लड़कियों का ग्रूप फोटो था,सबने अजीब आढे टेढे मुहँ बना रखे थे,सबसे बीच मे एक निहायत ही खूबसूरत लड़की खड़ी थी ,फ्लाइंग किस करती।
 
       रवीश की आंखे अटक गई ,घूम फिर के बार बार वही चेहरा देखने का मन कर रहा था।
     रवीश एक 25  26साल का सॉफ़्टवेयर इंजीनियर है ,पुणे मे वाकड़ मे खुद का फ्लैट ले चुका है,दिखने मे भी ठीक है,घर वाले अब चाहते हैं,वो शादी कर ले……आज तक उसे अपनी आजादी बहुत प्यारी थी,हफ्ते मे 5दिन काम करो,और 2दिन आराम से दोस्तों के साथ पार्टी करो
  घर मे पानी की बोतल से ज्यादा बीयर की बोतलें पड़ी होती हैं, कोई टोकने वाली तो है नही।
  सामने वाली करंजकर आंटी की बाई आकर साफ सफाई कर जाती है।खाना कभी कैंटीन मे खा लेता है,कभी मैगी से काम चल जाता है।बिल्कुल राजा महाराजा सा जीवन है……पर आज एक अदद फोटो ने सारा खेल बिगाड़ दिया।

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      आज अचानक रवीश को अपने आप पर बहुत तरस आने लगा,कोई नही है ,जो फ़ोन करके पुछे,घर कब आ रहे…..अच्छा सुनो खाने मे क्या पका लूं ….बेचारा! इतवार की रात का कितना भी हैंगओवर हो अगले दिन सुबह खुद ही उठ के नीम्बू पानी बनाना पड़ता है।
      अब उसकी भी उमर हो रही है,उसे भी अब शादी कर के घर बसा लेना चाहिये,हर चीज़ वक्त पे हो जाये तभी अच्छा है….
           आज रवीश को अपनी आज़ादी बहुत खल रही है ।
        एक बार फिर तस्वीर पे उड़ती सी नज़र डाली और अपने क्यूबिक मे आके बैठ गया।

       ऐसा नही था की रवीश की जिन्दगी मे कभी कोई लड़की नही आई,स्कूल कॉलेज मे छोटे मोटे अफेयर हो चुके थे,पर दोनो ही पक्ष बहुत सीरियस नही थे….हाँ दो साल पहले ऑफ़िस मे एक नई लड़की आई थी,रूही…..वो उसे बड़ा भा गई थी।
         वो अक्सर अपने काम के लिये रवीश की राय लेती थी,कभी कभी दोनो साथ ही लंच भी किया करते थे…..उसे रूही अच्छी लगने लगी थी।
     एक शाम तो वो बाँका ज्वेलर्स भी पहूंच गया था,हीरे की अंगूठी लेने,सोचा अंगूठी देके ही प्रोपोस करूंगा ,पर तभी नासपीटे लोकेश का फ़ोन आ गया।
     “यार कहाँ है तू,जल्दी आ जा,,आज तेरी भाभी अपनी बहन के घर रुकेगी….अमित और विक्की भी आ रहे…party करेंगे।”
     “बस यही  ‘पार्टी करेंगे’ एक ऐसा शब्द है जिसे सुन के मरता हुआ लड़का भी जी उठे,और यमराज से लड झगड़ के अपने मित्रों के पास पहुंच जाये।
     बस वही रवीश के साथ हुआ,,हीरे की अंगूठी तो कभी भी आ जायेगी,पर भाभी जी रोज रोज तो मायके जाती नही,बेचारा लड़का पार्टी की तैय्यारियो मे चला गया।
         फिर एक शाम टी ब्रेक मे रूही और रवीश कैन्टीन मे थे -“अरे रवीश तुम्हे मैने बताया नही ना….मेरे मॉम डैड मक्का जा रहे”।
     “मक्का ! वहाँ क्यों? वहाँ तो मुस्लिम जातें हैं ना ?”
    “हाँ तो ! मैं मुस्लिम ही तो हूँ,मेरा पूरा नाम नही पता क्या?  रूही अंसारी।”
   “या अल्लाह! रवीश त्रिपाठी जी किस दुनिया मे रहतें हैं आप ! “
       रवीश चुपचाप मुस्कुराता रहा,चाय पीता रहा।उसे एक महिने मे कभी पता ही नही चला की रूही मुसलमान थी,,अच्छी बहुत लगती थी पर इतना भी नही की अपने घर वालों से शादी के लिये लडता झगड़ता।
     “यार लोकेश बचा लिया यार तूने, 38000बह जाते अंगूठी मे।”
        अभी 6महिने पहले हंसती खिलखिलाती रूही उसे अपने निकाह का कार्ड थमा गई तब उसकी जान मे जान आई,हालांकी रूही के मन मे ऐसा कभी कुछ नही था,फिर भी कार्ड पाके उसे बहुत खुशी हुई।

        पर इस बार बात हर बार से अलग थी,लड़की ऐसी थी की जिसके लिये सारे संसार से लड़ा जा सकता था,इस बार उसे जाति धर्म कुछ नज़र नही आ रहा था।
         बड़ी हिम्मत करके उसने अमित से उस लड़की के बारे मे पूछ ही लिया।
    “मुझे नही पता यार,वो तो रेणू मेरी स्कूल की दोस्त है,उसिने फोटो भेजी थी।”
    “हाँ तो उसी रेणू से पूछ ले”।
“पागल हो गया है क्या,,मरवायेगा तू….रेणु मेरी और मेरी बीवी दोनो की दोस्त है,उससे कुछ पूछा ना तो मेरे घर जाके आग लगा आयेगी।”
   “यार अमित अपने भाई के लिये इतना नही कर सकता तू।”
“और कहीं फिर से लड़की मुसलमान या किरिस्तांन निकली तो?? तेरे अन्दर का पण्डित फिर जाग जायेगा।”
    “नही भाई ,इस बार मुझे सच मे प्यार हो गया है,प्लीज उसका पता कर दे,तेरा अहसान जिंदगी भर नही भूलूंगा।”
       दो दिन बाद अमित ने रवीश को एक फ़ोन नम्बर दे दिया।
     “देख यार,रेणु खुद उस लड़की के बारे मे कुछ नही जानती,रेणु की पार्टी मे उसकी किसी सहेली के साथ ही ये आई थी,,नाम तक नही पता।अब तू जान ,कैसे बात करेगा,क्या करेगा।”

      खुशी से अमित को गले से लगा लिया रवीश ने ,घर जाते समय उसकी कार मे ‘लम्बोर्गिनी ‘बज रहा था,उसने ट्रैक बदल दिया और सोनू निगम का “अब मुझे रात दिन तुम्हारा ही खयाल है” सुनते सुनते घर पहुँचा।
          घर पहुच्ंते ही नम्बर सेव किया और वॉट्सएप्प पे तुरंत डी पी देखा।
     उफ्फ ,कैसा सलोना चेहरा है,कितनी मासूम है,
कितनी प्यारी मुस्कान है,,चेहरे से तो ब्राम्हण ही लग रही,पर चलो नही भी हुई तो भी कोई बात नही।
    अब शादी तो इसी से करनी है,चाहे दुनिया इधर की उधर हो जाये……बहुत हिम्मत कर के अपने दिल को समेट के रवीश ने उसे मैसेज किया
  “हेल्लो ,कैसे हो आप।”
   “Sorry …who is this ?
” hi ,myself Raveesh …मै अमित का दोस्त हूं ।”
   “कौन अमित “?
“आपकी दोस्त है ना रेणु ,,उसी रेणु का दोस्त है अमित।”
“ओह्ह्ह्ह अच्छा आप रेणु के दोस्त हैं।”
“हांजी ,ऐसा ही समझ लिजिये,,क्या मै आपसे कुछ देर बात कर सकता हूँ,आप फ़्री हैं अभी?”
  “असल मे मै,मेरे बेटे का होमवर्क करा रही हूँ,तो अभी तो बात नही कर पाऊंगी।”
   “अच्छा ,बेटा भी है आपका।”और पति ?
  उफ्फ घबराहट मे ये क्या बोल गया….
“Obviously, पति भी है,और बेटा भी।आपको अगर कोई ज़रूरी काम नही है तो हम बाद मे बात करते हैं।”
   रवीश बेचारा रो पड़ा,तुरंत फ़ोन काटा और नम्बर डिलीट किया…..
      उसे बहुत बहुत ज़ोर का गुस्सा आ रहा था,थोड़ा सा रोना भी आया,पर हद है…..लड़कियों को शादी करने  का भी बड़ा शौक है,और शादीशुदा नही दिखने का भी।
         कहीं से भी फोटो मे समझ ही नही आ रहा की कम्बख्त बाल बच्चों वाली है…..पहले का समय अच्छा था कम से कम देख के समझ तो आता था की लड़की शादीशुदा है,किसी की घरवाली है।
            बेचारा रवीश !अपना गम गलत करने एक बार फिर अपने दोस्तों के साथ पार्टी करने चल दिया।।।।

aparna ….

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शादी.कॉम-2

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  …………………………

           भैय्या जी के लिये औरतें सिर्फ और सिर्फ आदर की वस्तु थीं।
   
             अपनी उबलती हुई उमर में भी आज तक किसी कंचन कामिनी की छाया उन्होनें अपने हृदय पे पड़ने नही दी थी,कहीं ना कहीं इसका कारण उनका स्कूल भी रहा होगा।।
      राधेश्याम  जी पक्के जनसंघी थे, जब तक जा पाये हर रविवार गोशाला में होने वाली शाखा का हिस्सा बनते रहे,फिर पिता की असामयिक मृत्यु के बाद मिली अनुकम्पा नियुक्ति में एक सरकारी दफ्तर की बाबूगिरी निभाने और घर की जिम्मेदारियां उठाने में बेचारे धीरे धीरे गोशाला भूलने लगे,पर उनका शाखा प्रेम बना रहा।।अपने पिता के बाद उन्होनें सारे उत्तरदायित्वों को बखूबी निभाया,अपनी बड़ी बहन की शादी की,अपनी बुआ की जचकी उठवाई,अपनी माँ को तीरथ कराये, अपने फेरे फिराये और छोटे भाई को भी ठिकाने लगाया,इन सब में बेचारे राधेश्याम जी की उमर ही निकल गई,पर उनका शाखा प्रेम नही चूका ,इसीसे जब धर्मपत्नी सुशीला ने बड़े होते लड़कों की तरफ इशारा किया कि अब इनका स्कूल भेजने का समय हो चला तो तिवारी जी ने  बिना आगा पीछा देखे दोनो लड़कों को सरस्वती विद्या मन्दिर में डाल  दिया।।
     दोनों सुंदर सजीले बालक जब सुबह नहा धो कर बालों में खूब सारा तेल डाल भली प्रकार चपटा कर स्कूल बैग को कंधे पे टाँगे भूरी निकर घुटनों तक झुलाये स्कूल को निकलते तिवारी जी के कंधे अभिमान से चौड़े हो जाते।।

   विद्या मन्दिर में पढ़ने वाले बालकों में संस्कार कूट कूट कर भरे होतें हैं,पर शहर के बाकी स्कूल के बच्चों का यही मानना है कि पढ़ाई लिखाई के लिये तो स्कूल अच्छा है,पर सबसे मनभावन उमर में उमड़ने घुमड़ने वाली भावनाओं का कचरा कर देता है,सीधे शब्दों में ये स्कूल रोमांस को पनपने ही नही देता,एक तो सभी सहपाठीयों को एक दूसरे को दीदी भैय्या बोलना पड़ता है, दूसरे ये लोग हर त्योहार स्कूल मे मनाते हैं,और सबसे ज्यादा हर्षोल्लास से रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार मनाया जाता है…..अब ऐसे में किसी बालक के मन में किसी सुन्दर सहपाठिनी  के लिये कोई कोमल भावना पैदा हो भी गई तो ये स्कूल वाले राखी बंधवा के सब गुड़ गोबर कर डालते हैं ।।

    भैय्या जी जब नौवीं में पहुँचे तब उनके बड़े भैय्या बारहवीं पास कर स्कूल से निकल चुके थे,इसिलिए राजा भैय्या ने आज़ादी की सांस ली,और अपने आप में अपने मन में कुछ कोमल बदलाव भी महसूस किये,अभी तक जितने आराम से कक्षा की लडकियों को दीदी कह लेते थे,अब ऐसा कहने में थोड़ा संकोच होने लगा,उसी समय उनकी बैंच पे उनके साथ बैठने वाले जयेश ने उन्हें एक अद्भुत खेल सिखा दिया….. एक ऐसा अनोखा खेल जिसे अब वो अक्सर कक्षा में सबसे पीछे की बैंच पे बैठे अकेले ही खेलते खोये रहते,उस खेल का नाम था -“FLEMS “
F- friend , L- love, E- enemy,  M-marriage ,  S- sister..
  इस खेल मे लड़की के नाम की स्पेलिंग और खुद के नाम की स्पेलिंग लिख के जितने कॉमन अल्फ़ाबेट कट सकते उन्हें काट कर बचे हुए जोड़ कर flems को काटना होता ,और अंत में जो आखिरी बचा अल्फ़ाबेट होगा,वो आपका भविश्य तय करता।।।

   राजा भैय्या कक्षा में बैठे इधर उधर नज़र फिराते और जो सुन्दरी भाती उसके साथ FLEMSकाटते।।
कभी किसी के साथ फ्रेंड आता तो खुश,किसी के साथ लव आ जाता तो बहुत खुश,पर जिस किसी के नाम के साथ सिस्टर आता उससे वो पूरी शिद्दत से सिस्टर का रिश्ता निभाते,तो इसी तरह फ्लेम में डूबे भैय्या जी नौवीं में लुढ़क गये।।
       दूसरे साल होम एग्ज़ाम होने के कारण आचार्य जी लोगों ने उन्हें किसी तरह पास कर दिया।।

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    दसवीं कक्षा में भैय्या जी की रूचि गुल्ली-डंडा और क्रिकेट में भी जाग गई ….कक्षा में तो टाईम पास करने के लिये फ्लेम्स और दोस्त थे,कक्षा के बाहर क्रिकेट था,जीवन सहज और सुन्दर था, पर पढ़ाई कठिन थी,भैय्या जी दसवीं में भी लुढ़क गये।।दो बार में किसी तरह आगे पीछे बैठे दोस्तों की मदद से दसवीं पार लगी।।

ग्यारहवीं आचार्य जी लोगों की कृपा से एक बार मे पास कर भैय्या जी बारहवीं में पहुंच गये,और इन पांच सालों में उनके बड़े भैय्या यानी युवराज अवस्थी कहाँ से कहाँ पहुंच गये।।
      स्कूल की पढ़ाई के बाद बड़के भैय्या ग्रैजुएशन के साथ साथ अपने चाचा जी के काम मे उनका हाथ बंटाने लगे,चाचा जी का पुश्तैनी धंधा ब्याज पे पैसे देने का था,चाचा जी उतने में ही संतुष्ट थे पर बड़के भैय्या ने अपना दिमाग दौड़ाया और ब्याज के सारे काले धन को श्वेत दिखाने सिटी कॉलेज के बाहर दो मंजिला आर्चीस का शो रुम डाल लिया, जवान लड़के लडकियों ने और पूरे सात दिन तक मनाये जाने वाले प्रेम पर्व वैलेंटाइन डे ने उनके बिजनेस को 3साल में ही चमका दिया।।
       राधेश्याम तिवारी के पुण्य प्रताप का असर था या उनकी धर्मपत्नी के निरंतर व्रत पूजन का कि धन की देवी माता लक्ष्मी को तिवारी जी की देहरी और उनकी तिजोरी से प्रेम हो गया,और सदा की चंचला माता लक्ष्मी अपने वाहन के साथ उनके घर पे जम के बैठ गई,माता लक्ष्मी के आगमन का संकेत देते बड़के भैय्या के काम और माता के वाहन का संकेत देते राजा भैय्या के काम।।।

   इसके बाद बड़के भैय्या ने इंडेन की गैस एजेंसी ले ली,उसके अगले साल रिलांयस का पैट्रोल पम्प, बड़के भैय्या की जय हो!! जल्दी ही गिरिधर शास्त्री जी की कन्या रूपा से उनका ब्याह हो गया,और बड़के भैय्या का जीवन खुशहाल गृहस्थी का विज्ञापन हो गया,पर इधर छुटके भैय्या यानी राजकुमार अवस्थी! यानी राजा भैय्या अब तक स्कूल में बारहवीं में ही अटके थे।।

    जिस साल राजा भैय्या बारहवीं दुसरी बार कर रहे थे,उस साल किसी ट्रांसफर केस में एक नई कन्या ने बारहवीं जीव विज्ञान में प्रवेश लिया,सुबह प्रार्थना कक्ष में सबको विश्राम सावधान कराते राजा भैय्या ने जब दो चोटी को जुही चावला(गज़ब का है दिन देखो ज़रा) स्टाइल में आगे पीछे करते बला की खूबसूरत लड़की को देखा तो उनका दिल  शताब्दी एक्सप्रेस से टक्कर लेता धड़कने लगा,,जैसे तैसे प्रार्थना समाप्त कर दोस्तों के साथ उसका नाम पता करने का प्रयास करने लगे,बहुत जद्दोजहद के बाद उस कन्या का नाम पता चला रानी !!!

     राजा भैय्या ने तुरंत अपने पर्सनल भविष्यवक्ता से जानना चाहा अपना और रानी का भविष्य़ ।। फ्लेम्स मे कट पिट के भविष्य आया M याने मैरिज।
राजा भैय्या का दिल प्रफुल्लित हो उठा,अब तो सुबह शाम जीवविज्ञान की कक्षा के चक्कर लगने लगे,कला संकाय का बंदा रसायन शास्त्र की लैब में क्लोराइड के नारंगी छल्ले उड़ाती अपनी लैला को खिड़की से देख देख के मोहित होने लगा।।

“दिल क्या करे जब किसी से,किसी को प्यार हो जाये….जाने कहाँ कब किसी को किसी से प्यार हो जाये।।””

             अब सारा समय भैय्या जी का दिल यही गुनगुनाता, वो वैसे भी दुनिया भर की ऊंची-ऊंची रस्मे मानने वालों में से थे नही…..आखिर दोस्तों के बहुत समझाने पे और कुछ रानी के इकरार भरी आंखों के इशारे ने उन्हें हिम्मत दी और उन्होनें अपने जीवन का पहला प्रेमपत्र लिख डाला।।

   रानी,
    हमको तुम बहुत अच्छी लगती हो,जब प्रार्थना के समय सामने खड़े होकर सबको सावधान कराते हैं,तुम्ही को देखते रहते हैं,और क्या कहें,आगे तुम खुद समझदार हो तभी तो जीव विज्ञान ली हो।।
   हमसे दोस्ती करोगी।

            राजा।।

राजा भैय्या के चेले गुड्डू ने रानी की सहेली को चिट्ठी पकड़ा दी और भाग गया,चिट्ठी पढ़ कर आधी छुट्टी में रानी राजा भैय्या की कक्षा में आई और इशारे से राजा को बाहर बुला लिया।।

“ए सुनो!! तुमसे कुछ कहना है,वहाँ इमली के पेड़ के पास चल के बैठो,हम आ रहे।”

धड़कते दिल को समेटे राजा भैय्या इमली के चबूतरे पे जा बैठे तभी रानी भी आ गई ।

“राजा सुनो! हम पढ़ने लिखने वाली लड़की हैं, ये सब प्यार मोहब्बत के चक्कर मे हमारा फ्यूचर खराब हो जायेगा,हमारा सपना डॉक्टर बनने का है,और इसके लिये हमको बहुत पढ़ना है, अभी भी रात दिन सुबह शाम पढ़ाई करते हैं,ट्यूशन जातें हैं कोचिंग जाते हैं,हमारी माँ डॉक्टर नही बन पाई थी,नाना जी के पास पैसे नही थे ना,इसिलिए माँ हमे डॉक्टर बनाना चाहती हैं,राजा तुम हमें भी अच्छे लगते हो,पर तुम से प्यार कर बैठे तो हम अपने और माँ के सपने को भूल जायेंगे,तुम समझ रहे हो ना,हम क्या कह रहे?? देखो अभी हमारी सिर्फ पढ़ने लिखने की उमर है,प्यार मोहब्बत के लिये पूरी जिंदगी पड़ी है,हो सके तो हमे भूल जाना,तुम बहुत अच्छे लड़के हो राजा।।
    इतनी सारी ज्ञान भरी बातें सुन सचमुच राजा भैय्या के ज्ञान चक्षु खुल गये,कुछ देर पहले की प्रेयसी में उन्हें माता सरस्वती के दर्शन होने लगे, उनकी आत्मा भी इस पवित्रता से जगमगा उठी और बहुत श्रद्धा से उन्होनें अपनी आंखें बन्द कर ली,तभी अचानक ऐसा लगा जैसे ज़ोर का भूचाल आया….धड़ाम की आवाज़ के साथ भैय्या जी चबूतरे से नीचे गिर पड़े,उन्होनें आंखें मलते देखा तो बाजू में उनके बाँसुरी गिरी पड़ी थी।।

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    असल में हर खाने योग्य वस्तु पर अपना एकाधिकार समझने वाली बाँसुरी उस समय दसवीं की छात्रा थी,और बाकी छोटे बच्चों को पीछे धकेल धकेल के वो इमली की पकी पकी फलियां जमा करने में लगी थी,तो उससे बदला लेने तीन चार बच्चों ने एक साथ मिल कर “ज़ोर लगा के हाइशा” का नारा लगाते हुए उसे ऐसा धक्का दिया कि वो सामने बैठे अपने सीनियर राजा भैय्या के ऊपर से होती हुई चबूतरे के नीचे गिर पड़ी , दोनों की नजरें मिली,बांसुरी की आंखों की आंच बड़ी तेज़ थी,जाने अपनी गलती पर भी वो भैय्या जी को क्यों खा जाने वाली नजरों से घूर रही थी,जब भैय्या जी ने ये जानने के लिये आंखों से ही बाँसुरी से सवाल किया तो बाँसुरी ने भी आंखों से ही जवाब देते हुए उनके जूतों की तरफ इशारा कर दिया,भैय्या जी ने झुक कर अपने पैरों की तरफ देखा ,वहाँ उनके निहायत ही गंदे कीचड़ मिट्टी से सने जूतों के नीचे बाँसुरी की कमाई बिखरी चपटी पड़ी थी,सारी इमली जूतों में दब कर बुरी तरह से कुचला चुकी थी,भैय्या जी एकदम से हड़बड़ा कर बाँसुरी से माफी मांगते वहाँ से जान बचा के भागे,इस सब में अपने प्रथम प्रेम और प्रथम सन्गिनी को बेचारे भूल ही गये…. और बस उस दिन रानी की कही बातों का ये असर हुआ कि राजा भैय्या के मन में सदा सदा के लिये औरतों के प्रति बेइन्तिहा इज्जत आ गई,और उन्होंने जाने अनजाने एक कसम उठा ली कि किसी लड़के को कभी किसी लड़की का अपमान करने नही देंगे।।
    अपने बड़े भैय्या की तरह वो भी अपनी माँ की पसंद की लड़की से ही ब्याह करेंगे ,और अपना पूरा जीवन समाज की सेवा में लगायेंगे।।
       फिर उसी साल रानी का पी,एम टी में सलेक्शन हो गया और वो उस शहर को छोड़ कर मेडीकल कॉलेज पढ़ने चली गई,पर राजा भैय्या का अपने स्कूल और इमली के पेड़ से लगाव बना रहा,और वो बारहवीं में ही जमे रहे।।
     
     अब तो ऐसा था कि बाँसुरी भी बारहवीं गणित से कर कॉलेज के दूसरे साल में पढ़ाई के साथ साथ बैंक के एग्ज़ाम की तैय्यारी कर रही थी….पर अब राजा भैय्या इतने सारे समाज के कामों मे संलग्न हो  चुके थे कि उन्होंने स्कूल जाना लगभग बन्द कर दिया था ।।वो कभी कहीं मुफ्त रक्तदान शिविर का आयोजन करते,कभी रेल्वे स्टेशन के भिखारियों के लिये मुफ्त में खिचड़ी भोग बँटवाते।।

    उनका ठिकाना था उनके मोहल्ले के बाहर के चौक पर की पान की गुमटी,,पर मजाल जो सारा दिन पान की गुमटी में बिताने के बाद भी राजा भैय्या एक सिगरेट तो पी लें,उनमें ऐसा कोई राजसी ऐब नही था,पान गुटका बीड़ी सिगरेट शराब ठर्रा सब से दूर भोले भंडारी के भक्त राजा भैय्या हर सावन कांवर उठा कर भोले नाथ को जल चढ़ाने भी जाते।।

   राजा भैय्या के भलमनसाहत के किस्से जितने फेमस थे उससे कहीं ज्यादा भैय्या जी के कातिल रंग रूप के चर्चे थे मोहल्ले की लडकियों के बीच।।।।
      क्या कुंवारी कन्यायें और क्या शादीशुदा ,सभी सुबह सुबह भैय्या जी एक झलक पाने को किसी ना किसी बहाने अपने द्वारे खिंची चली आती,कोई खिड़की से झांक लेती कोई छत से,कोई उसी समय अपने कुत्ते को टहलाती ,कोई अपनी गाय का सानी भूसा करती, सब चोर नजरों से राजा भैय्या को एक झलक देख कर ही तृप्त हो जाती,और भोले भंडारी राजा भैय्या इन सब बातों से बेखबर सुबह सुबह अपने जिम पहुंच जाते।।

     नीले रंग का  ट्रैक सूट पहने  अपनी रेशमी ज़ुल्फे उड़ाते राजा भैय्या जॉगिन्ग ट्रैक पे दौड़ते हुए जाने कितने कन्या रत्नों का हृदय अपनी मुट्ठी में भींचे दूर तक दौडे चले जाते….. और पीछे रह जातीं उनकी अनन्य प्रशंसिकायें।।।

क्रमशः

aparna..

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शादी डॉट कॉम

a beautiful love stories

“पर्मिला अरे कहाँ मर गई पर्मिला(प्रमिला)? कोई है घर में कि नही,दरवाजा तो सदा ही खुल्ला छोड़े रखती हो दोनों माँ बेटी।”

बुआजी प्रमिला को आवाज़ लगाती घर के भीतर दालान तक चली आई,दालान के एक ओर बने रसोईघर में प्रमिला चाय चढ़ा रही थी,उसने झट से पल्लू सर मे सजाया और बुआजी को आकर धोक दिया(प्रणाम )

बुआजी अपने लपटें मारते गोरे रंग की तरह ही आग उगलती फिरतीं थीं,नाटे से कद की बुआजी रंग रूप में भटूरे का गुन्था हुआ आटा यानी मैदा लगतीं थी,उनके चमकीले रूप ने उन्हें इस कदर गर्व से भर दिया कि अपने शरीर पे चढ़ती चर्बी की तरफ उनका कभी ध्यान ही नही गया,बढ़ते बढ़ते अब उनके पेट कमर और कूल्हों पर ऐसे टायर तैनात थे कि वो एक छोटा मोटा सा ट्रक प्रतीत होती थीं ।।

    पर बुआजी में परोपकार की भावना कूट कूट कर भरी थी,किस किस के घर ब्याह के लायक लड़का लड़की मौजूद हैं,वो सूंघ के पता लगा लेती थी ,और ऐसे ऐसे रिश्ते खोज के बताती थीं कि लड़के लड़की के माता पिता अपना सर धुन लें,पर बुआजी की दबंग  पर्सनैलिटी के सामने ज़बान खोलना माने महाभारत का शंखनाद करना था इसीसे सब उनके सामने चुप लगा जाते,और घर से उनके जाते ही घर की महिलायें अपने पेट से आवाज़ निकाल निकाल कर उन्हें गालियाँ देती,पर मजाल किसी की जो उनके सामने चूं भी कर दें।

   प्रमिला उनके सगे भाई की पत्नि थी,पर एक तो भाई की पत्नि की वैसे ही कोई कदर नही,उसपे प्रमिला ने एक के पीछे एक दन्न से दो दो लड़कियाँ जन के हमेशा हमेशा के लिये खुद को उनके कोप का भाजन बना लिया था,बड़की तो फिर भी गोरी सुन्दर थी तो उस पे बुआ जी की नाराजगी कम रहती पर छुटन्कि!! एक तो मोटी उसपे निपट काली ,ना गेहूँई,ना सांवली ,,पूरी की पूरी काली।। अब ऐसी कन्या के ब्याह का आसमान नीला कैसे रहेगा वहाँ तो हमेशा काली बदरी छायी रहती वो भी  सिर्फ गरजती हुई,बरसना तो जैसे उसने जाना ही नही ,अच्छा इतने से ही खैर हो जाती तो भी ठीक था,पर छुटंकी एक नम्बर की मुहँफट भी थी..

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         भगवान ने चुन चुन के अवगुण उसमें पिरोये थे, अपनी माँ सा सपाट सादा फीका चेहरा चपटी नाक ,पिता का घोर कृष्ण वर्ण और बुआ की जलती ज़बान और इन सब के साथ बेहिसाब मोटापा!!
      
            कहने का तात्पर्य ये कि अगर ‘जीवनसाथी डॉट कॉम ‘ पे छुटकी का प्रोफाइल बनाया जाये तो ये प्रोफायल 5-6सालों तक प्रीमियम मेम्बरशिप के साथ भी वहाँ अपने पैर अंगद की तरह जमाये रहेगा ,बल्कि हो सकता है कि प्रोफाइल के इस अडिग,अचल व्यवहार के कारण ‘ जीवनसाथी’ वाले छुटकी को लाइफटाईम मेम्बरशिप दे दे,वो भी बिल्कुल फ़्री!!!

    घर की बड़ी लड़की वीणा का ब्याह हो चुका था,और अब बुआ जी की कृपादृष्टी छुटकी पर थी।।
बुआ जी नित नये तरह तरह के रंगीन सफेद काले, गोरे, अमीर ,गरीब हर तरह के रिश्तों की पोटली लिये चली आती,पर प्रमिला को उनकी इतनी कीमती पोटली में अपनी मुटल्लो के लिये कोई सजीला पसंद ही नही आता।।

“अरे पर्मिला अबकी ऐसा रिश्ता लाई हूँ,आंखे चुन्धिया जायेंगी तेरी,ये देख फोटू,लड़का सरकारी दफ्तर में काम करता है,,सारी बड़ी बड़ी फाइलें उसी की नाक के नीचे से इधर उधर होती हैं ।।”

प्रमिला ने फोटो देखी,लड़का पुराने वाले अदनान सामी को मात देता पूरा डबल डेकर बस लग रहा था।।

“हाय जिज्जी!! जे लड़का तो बहुतै मोटा है,हमरी बाँसुरी का क्या होगा??”

“अरे तो तुम्हरी बाँसुरी भी तो बस नामे की बाँसुरी है,लगे तो वो भी ढोल सी है,कहे दे रही हूँ पर्मिला जादा नाक भौ सिकोडोगी तो अंत में मिलेगा कोई दुहेजू तिहेजू,तब नई कहना कि जिज्जी कहाँ जाके मरूं ।”

“पर जिज्जी जे लड़का बिल्कुलै नही सुहा रहा का करें।”

अभी ननन्द भौजाई की गोष्ठी चाय के साथ चल ही रही थी कि प्रमिला की बड़ी लड़की वीणा भी अपने दो साल के लड़के को बेतरतीबी से खींचती घसीटती चली आई।।

“परनाम करते हैं बुआ,औ अम्मा कैसी हो?? कही कोनो बात आगे बढ़ी हमार मोटल्लो की या नही।”

“खुस रहो बिटिया!! बस तुम्हरे मुहँ मे घी सक्कर, लड़का सरकारी दफ्तर में काम करे है,ये देखो
  फोटू।”

“अरे वाह!! जोड़ी तो बहुत जमेगी ,दोनो डील डौल मे  एक ही से हैं,देखो अम्मा अब तुम जादा ना नुकुर ना करना,हमरी मानो तो इस अक्ती ब्याह निपटा दो, एक तो जैसे तुम पूड़ी कचौड़ी खिला खिला के उसे सींच रही हो लगता है पूरा सौ किलो का कर के ही मानोगी,बुआ वैसे लड़का करता क्या है?”

“सरकारी दफ्तर में ….” वीणा बड़ी बेसब्री थी,उसने बुआजी की बात आधे में ही काट दी-

“अरे बुआजी वो तो सुन लिये हम कि सरकारी दफ्तर में काम करता है,पर करता क्या है, अर्जिनवीस है,बाबू है कलेक्टर है,अरे है क्या,वो बताओ।”

“बिटिया वो …..बहुत खांस खखार के अपने गले को बार बार साफ कर अपनी आवाज़ को जितना धीमा कर सकती थी उतना धीमा कर के फुसफुसा के कहा- चपरासी है”

जितना ही आवाज़ दबा के बुआजी ने भावी दूल्हे का पद बताया उससे दुगुनी तेज़ आवाज़ में चिल्ला कर वीणा ने उस पदनाम को दुहराया -“क्या चपरासी है!! पर चपरासी के हिसाब से कुछ जादा मोटा नही है लड़का।।।”

भावी दूल्हे की पदप्रतिष्ठा सुन प्रमिला का मन बुझ गया,आखिर वो माँ थी,और हर माँ को अपना बच्चा जान से ज्यादा प्यारा होता है…एक स्वाभाविक सी बात ये भी है कि सभी बच्चों में सबसे कमजोर बच्चा माँ का सबसे अज़ीज़ होता है,हालांकी यहाँ वो कमजोरी शारीरिक नही अपितु सामाजिक थी।।

“अम्मा सुनो ,एक बात कहे दे रहे तुम्हें,इसे ना थोड़ा डायटिंग वाइटिँग कराओ वर्ना ऐसे ही अमजद खान,कादर खान के रिश्ते आयेंगे,तुम्हरी मुटकि भी तो टुनटुन बनती जा रही है।”

“ए दीदी तुमको इतना हमारी फिकर करने की ज़रूरत नही है,तुम उधर अपने सपूत को देखो, नाक बहा रहा है,ए गोलू इधर आओ,तुम्हारा नाक पोछ दें।”

“छुटकी तनिक अपनी ओर भी ध्यान दो,एक बात कहें,लड़के खुद भले ही ओम पूरी दिखते हों पर लड़की उन्हें कटरीना कैफ ही चाहिये,अब भई सब की किस्मत हमारे समान थोड़े ही ना होती है, हमारी सादी(शादी) ,में तो अम्मा बाऊजी को कोई मेहनत ही नई करना पड़ा,हम तो हुआं मेला में खड़े चाट खा रहे थे,और तुम्हरे जिज्जा को हमरा चटखारे लेना ऐसा भाया कि घर रिस्ता(रिश्ता) भेज दिये, और देखो चट मंगनी पट ब्याह ।”

“और झट गोलू”कह कर बाँसुरी हंसने लगी।।

“हमारे जिज्जा को चश्मा भी तो कितना मोटा लगा है दीदी बेचारे दूर से जाने किसे  देख हमारे घर रिश्ता भेज डाले,,खैर जिज्जा में एक खूबी तो है ,सहनशक्ती बहुत है उनमें,क्यों दीदी सही कहे ना हम।ए गोलू इधर आओ मौसी के पास ।”

बच्चे ने बडी अदा से सर हिला के मना कर दिया, और अपनी माँ से कुछ खिलाने की जिद करने लगा, उसकी जिद सुन छुटकी रसोई से कचौड़ियाँ प्लेट में सजा लाई और साथ में सोंठ की चटनी!!
    कचौड़ी देख बच्चे ने गन्दा सा मुहँ बनाया और क्रीम बिस्किट पाने को मचलने लगा,उसकी माँ जो बड़ी तल्लीनता से एक बेहद रोचक विषय पर अपनी माँ और बुआ से परिचर्चा में लीन थी,इस तरह बार बार अपनी साड़ी  झकझोरे जाने पे झल्ला उठी और पलट के बेटे को दो करारे हाथ जड़ दिये, जितनी ज़ोर का थप्पड़ नही था,उससे तेज़ पोंगा फाड़ कर बच्चा रो पड़ा,छुटकी ने आगे बढ़ कर उसे गोद में उठा लिया,और पवनपुत्र सी एक हाथ में भांजे और दूसरे हाथ मे कचौड़ी की तशतरी थामे वो अपने कमरे में चली गई ।।

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  छुटकी के जन्म के समय पूरे परिवार में कोई प्रसन्न नही हुआ,मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मी दुसरी कन्या रत्न उसपे काली ,सबके मुहँ से ऐसी हाय निकली कि बेचारी का बचा खुचा रंग भी जल गया, पर जाने क्या सोच उसकी माँ ने उसका नाम बाँसुरी रखा!! बचपन में छुटकी का खाने से विशेष बैर था,उसे दाल या तरी में रोटी को तोड़ के डुबोना और फिर मुहँ में ले जाकर रखना बहुत बड़ा काम लगता,उसकी माँ सदा इसी जतन में रहती की उनकी लाड़ो कुछ खा ले,ऐसे हालात में जब बच्चा सही भोजन नही करता तब आस पड़ोस के सभी महिला पुरूष एक साथ डॉक्टर बन जाते हैं,तरह तरह की नसीहतें कि ये खिलाओ तो बच्चा सही बढ़ेगा,वो खिलाओ तो बच्चे को पोषण मिलेगा इसी तरह का बहुत कुछ माँ को सिखाया जाता है।।।

           जो आता है वही  कोई नया नुस्खा पकड़ा के चला जाता है, बान्सूरी के मामले में एक बात और जुड़ गई,लोग प्रमिला को ऐसा भोजन खिलाने की भी नसीहत दे जाते जिससे लड़की का रंग खुल जाये,कोई कहता बादाम वाला दूध दो,कोई कहता केसर वाला… कोई दही कोई पनीर,कोई नारियल !! इंन सारी बातों का सार प्रमिला ने ये निकाला कि हर वो खाने की चीज़ जो सफेद है बिटिया को खिलाने से रंग साफ होगा, अब वो बेचारी दिन भर बिटिया के पीछे तरह तरह के पकवान लिये घूमती नतीजा ये हुआ कि दस बरस की होते होते बाँसुरी पूरी तबला बन गई ,उसे खाने की ऐसी लत लगी कि क्या सफेद क्या काला उसे हर खाने की वस्तु में स्वाद मिलने लगा,खाने को लेकर उसकी ऐसी श्रद्धा जगी कि बाहर गली के नुक्कड़ के खोमचे वाले से चाहे दो प्लेट चाट चटकारे लेकर टिका आये तब भी माँ के हाथों बने दाल चावल वो त्याग नही पाती ,हाँ चाट के बाद दाल का फीकापन दूर करने आम के अचार की बड़ी सी फाँक ले वो उस नीरस भोजन में भी रस ढूँढ लेती।।।
     बाँसुरी के जीवन के दो ही मुख्य उउद्देश्य हो गये,एक खाना और दूजा पढ़ना ।।।

    दिन दिन भर अपने कमरे में बैठी लड़की कुछ ना कुछ पढ़ती रहती और ठूँसती रहती इसका असर ये हुआ की शरीर और दिमाग दोनों ही ज़बरदस्त तरक्की कर गये,पर इस बात का बाँसुरी को कोई घमंड ना था।।।

    बाँसुरी के पड़ोस में पांच  घर छोड़ के छठा घर था राजा भैय्या का।।
      राजा भैया का पूरा नाम था राजकुमार अवस्थी!
भैय्या जी थे भी पूरे राजकुमार!!
     चाल ढाल चेहरे मोहरे से बिल्कुल कहीं के नवाब शहंशाह लगते।।
  गोरे चिकने उंचे पूरे राजा भैय्या का रुआब भी कम नही था,घर हो चाहे बाहर सब उनके पीछे हाथ बांधे घूमते,भैय्या जी दिखने में जहां पिघला  सोना थे वही मन के सुच्चे मोती ।।
     “दुनिया की सारी अच्छाई एक तरफ ,और पढ़ाई एक तरफ” राजा भैय्या के बेइंतिहा सद्गुणों के ऊपर उनका एक अदद दुर्गण भारी पड़ जाता,जब जब उनके इम्तिहान का रिजल्ट उनके पिता श्री के हाथ आता,पिता जी इतने शानदार रिजल्ट के बदले अपनी चप्पल से राजा भैय्या की आरती उतारते और वो बेचारे इधर से उधर कूदते फांदते दौड़ के छत की सीढिय़ां चढ़ भाग निकलते,और फिर रात में पिता जी के सोने के बाद ही उनकी घर वापसी होती।।।

    राजा भैय्या का पसंदीदा काम था वर्जिश करना और कराना,उन्होनें अपने आप में ही एक प्रण ले रखा था सारे संसार को सही स्वास्थ्य का मह्त्व समझाना और अपने शरीर सौष्ठव को बनाये रखना।। राजा भैय्या के इन्हीं रुचिकर गुणों के कारण उनके चेले चपाटे भी बहुत थे,उनके जिस मित्र को जब कभी उनकी ज़रूरत होती वो पलक झपकते उसकी सेवा में तत्पर रहते ये और बात थी कि जब कभी वो अपनी समाज सेवा के कामों के लिये अपने पिता की चप्पलें खाते उनकी वानर सेना हमेशा जादुई बौने सी अदृश्य हो जाती।।
     मोहल्ले की छुट पुट नेतागिरी में भी भैय्या जी को बहुत रस  मिलता,चौक की राजनीति निपटाना उनके बाएँ हाथ का खेल था,ऐसे ही उनके मोहल्ले का पार्षद जब जीतने के बाद पहली बार मोहल्ले वासीयों को धन्यवाद ज्ञापित करने आया तब अपनी बातों मे उसे उलझा कर मोहल्ले मे जिम खुलवाने के लिये उन्होनें राज़ी कर लिया,और उसके दफ्तर के चक्कर काट काट कर और नव युवकों के जोश की खबरों से उसे डरा डरा कर सिर्फ छै महीने में अपने मोहल्ले मे नव युवक जागरण समिति का जिम खुलवा लिया,जिसके एक अदद ट्रेनर वो स्वयं बने और पूरे मोहल्ले की फिटनेस का भार उनके चौडे कन्धों पर आ गया।।।

   हँसी मजाक में एक बार राजा भैय्या के परम मित्र प्रेम ने उनसे कहा भी-“भैय्या जी बड़ा शौक है आपको लोगों को पतला करने का,ज़रा एक बार अपनी कृपा दृष्टी मोहल्ले की टुनटुन पर भी फिरैये, बेचारी गंगा नहा आयेगी।”

  राजा भैय्या औरतों की जबरदस्त इज्जत करते थे, और कहीं वो औरत पढ़ने लिखने वाली हुई तब तो उनकी नजरों में उसकी इज्जत सौ गुना बढ़ जाती थी।।। उनके घर की औरतों चाहे वो उनकी माँ हो काकी हो दादी हो भाभी हो किसी को भी उन्होनें पढ़ते लिखते नही देखा था,सभी सारा दिन चूल्हे में खट खटा के अपना दिन पूरा करती और रात मे कमरे में अपने पति से घर की बाकी औरतों की बुराइयाँ निकालती,यही सब देख के राजा भैय्या के पिता झुंझलाते और हमेशा राजा भैय्या को पढ़ाई की अति आवश्यकता पे लेक्चर देते जिसका सार भैय्या जी ने निकाला कि उन्हें एक पढ़ी लिखी लड़की से ही शादी करनी है।।।

   बाँसुरी के लिये प्रेम के सद्विचारों को सुन राजा भैय्या को गुस्सा आ गया,और उन्होनें उसे धुनने को हाथ उठाया पर कुछ सोच कर शान्त हो गये।।

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“देखो भैय्या हमने बचपन में देखा था,तब दो चोटी कर के अपनी साईकल पे यहाँ से स्कूल जाती थी, फिर अब क्या पढ़ रही,क्या कर रही हमें नही पता,और प्रेम सच बोलें तो हमें लड़कियो का ऐसे मजाक उड़ाना पसंद भी नही भाई।।”

“हाँ,यहाँ से साईकल में गुजरती थी,और अक्सर उसके वजन से साईकल पंचर हो जाती थी,तब तुम्ही तो उसकी साईकल पंचर वाले तक खींच के ले जाते थे,याद है कि नहीं ।”

“नही भाई, सच कहूँ तो मुझे तो उसकी शकल भी याद नही।”

“भैय्या जी आप शकल याद रखें ऐसी हूर परी भी नही वो” भैय्या जी के एक चेले ने कह दिया,और भैय्या जी ने उसे एक लप्पड़ लगा ही दिया….

क्रमश:

aparna…

लफ़्ज़ों का खेल…..

दंसवी स्टेट बोर्ड का इम्तिहान 70 फीसदी नंबरों से पास करने वाला जब खुद को बाहुबली समझ कर गयरहवीं में अति आत्मविश्वास में मैथ्स ले लेता है …. और अर्धवार्षिक परीक्षा में जब हाथ में थमा पर्चा खुलता है और आंखों के सामने आता है इंटीग्रेशन डिफ्रेंशियेशन तब बालक की हालत ……

आंखों में हमने आपके सपने सजाएं है

ठहरे हुए पलों में ज़माने बिताए हैं……ऑब्वियस है पल ठहर ही जायेंगे जब कुछ लिखा न जाएगा…