दिल से….

कायाकल्प चैलेंज:-

सुप्रभात दोस्तों। कैसे हैं आप सब? हेल्दी एंड एनर्जेटिक?.. बिल्कुल!!!

आप लोगों ने अगर ईमानदारी से पूरे सात दिन 20 बार सूर्य नमस्कार करने के बाद 15 मिनट का डांस किया है और गर्म पानी के साथ जिंजर पाउडर हनी लेमन लिया है तो आप अपने आप में खुद फर्क महसूस कर पाएंगे।

देखिए हमें किसी को कुछ साबित करने के लिए नही बल्कि खुद को साबित करने के लिए ये करना है। सिर्फ अपने आप के लिए करना है। यकीन मानिए जब आप अपनी सुबह योग और व्यायाम से करते हैं तो पूरा दिन बेहतरीन बीतता है।

आपमें से कुछ लोग थायरॉइड के लिए योग पूछ रहे थे। आज उसके बारे में छोटी सी जानकारी दूंगी।

थायराइड के लिए सर्वश्रेष्ठ व्यायाम या योग है सूर्यं नमस्कार !! इसे करने की विधि आप सब जानते ही हैं।

थायरॉइड के लिए मुख्य रूप से निम्न योगासन लाभ देते हैं।

1) मत्स्यासन :- सुखासन में बैठ कर धीमे से पीछे की तरफ झुकते हुए सिर को ज़मीन से टिका कर रखना है। इस पोज़ में गर्दन और कंधों पर स्ट्रेच आता है जो थायरॉइड के लिए लाभप्रद है।

मत्स्यासन

2) सर्वांगासन :- इस आसन में आराम से लेटने के बाद पैरों को धीरे धीरे उठाते हुए सीधा 90 डिग्री एंगल पर लाएं। जसके बाद हाथों की सहायता से कमर को सपोर्ट करते हुए कमर को ऊपर उठाते जाएं।

इस आसन में भी कंधों और सिर पर पूरा संतुलन टिका होता है तथा गर्दन पर अच्छे से स्ट्रेच आता है।

सर्वांगासन

3) हलासन :-

हलासन करने का तरीका

पीठ के बल सीधा लेटने के बाद हाथों को शरीर से सटाकर सीधा रखें. पैरों को घुटने से मोड़े बिना धीरे-धीरे ऊपर की ओर उठाएं और फिर सांस छोड़ते हुए पीठ को उठाते हुए पैरों को पीछे की ओर ले जाएं. पैरों की अंगुलियों को जमीन से स्पर्श करने का प्रयास करें. 
– करीब एक मिनट तक इस अवस्था में रहते हुए धीरे-धीरे मूल अवस्था में आ जाएं.

हलासन

4) सिंहासन :-इस आसन को थायराइड के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इस आसन को करने के लिए दोनों पैरों को सामने की ओर फैलाकर बैठ जाएं। अब अपने दाएं पैर को मोड़ें और उसे बाएं पैर की जांघ पर रख लें और बाएं पैर को मोड़ें और उसे दाएं पैर की जांघ पर रख लें। इसके बाद आगे की ओर झुक जाएं। उसके अलावा वज्रासन में बैठ कर दोनों घुटनों के बल होते हुए अपने हाथों को सीधा कर फर्श पर रख लें। इसके बाद अपने शरीर के उपर के हिस्से को आगे की ओर खीचें। अपने मुंह को खोलें और जीभ को मुंह से बाहर की ओर निकालें। नाक से सांस लेते हुए मुंह से आवाज करें। इसे रोजाना 7-11 बार करें। सिंह के समान गर्जन की आवाज़ इसमें निकालनी होती है।

सिंहासन

दिल से ….

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Hello friends , कैसे हैं आप सब? और कैसा चल रहा है आपका कायाकल्प? प्लीज़ ये मत कहिएगा की मैंने 3 दिन से कोई अपडेट नही डाली इसलिए वेट करते बैठे हैं…

व्यायाम और योग तो हमें रोज़ करना ही है, चाहे मैं अपडेट डालूं या नही। ज्यादा नही करना है सिर्फ 15 मिनट !!!

शुरुवात में बस इतना ही करना भी पर्याप्त है। सबसे पहले हमें अपने शरीर को व्यायाम की आदत करवाना है। उसके बाद आपको सोचने की ज़रूरत ही नही पड़ेगी, आपकी बॉडी खुद ब खुद आपको खींच कर व्यायाम करवा लेगी।

महिलाओं की एक आम समस्या होती है ब्लोटिंग की । यानी पेट फूल रहा है ऐसा महसूस होता है। दोपहर के खाने के बाद शाम के समय में अगर आपको पेट में भारीपन लगता है तो ये ब्लॉटिंग ही हैं, बहुत बार ये भारीपन हल्के से दर्द में भी बदल जाता है।

आज इस ब्लॉटिंग से बचने के कुछ उपाय बताऊंगी… जिनमें से अधिकतर हम जानतें हैं पर अक्सर फॉलो करना भूल जाते हैं।

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1) खाना खाते समय बिल्कुल भी पानी न पिएं। बहुत जरूरत हो तो हल्का गुनगुना पानी एक आध सिप ले सकतें हैं।

2) खाने के 40 मिनट बाद भी आपको भर गिलास पानी नही लेना है। थोड़ा थोड़ा ही पिये वो भी गुनगुना पानी। देखिए जैसे आप हवन करते समय अग्नि में आहुति डालते हैं कुछ ऐसा ही हमारे पेट में होता है। भूख के समय हमारे पेट में कई एंजाइम्स सीक्रिट होते हैं जो मान लीजिये पेट की अग्नि है अब उसमें हम खाना दिलातें हैं जैसे आहुति। अब अगर इसके साथ ही आप ठंडा पानी भी डाल देंगे तो पेट की अग्नि तो बुझ जाएगी ना, फिर वो उस भोजन को ठीक से पचायेगी कैसे? और यही अधपचा भोजन तरह तरह की परेशानियों को पैदा करने का कारण बनता है। तो जिस तरह हवन में अग्नि को भड़काने के लिए बीच में घी प्रयोग किया जाता है वैसे ही भोजन के बीच में ज़रूरत पड़ने पर गर्म पानी प्रयोग करें।

3) एक नियम बना लें,जब तक आपका पेट चिल्ला कर आपसे खाना न मांगे तब तक बिल्कुल न खाए। सिर्फ़ इसलिए कि खाने का वक्त हो गया है इसलिए खा लेना चाहिए वाली आदत छोड़ दीजिए। वैसे व्यायाम करने पर बहुत जोर की भूख लगती है और तब कुछ न कुछ हेल्दी फ़ूड ज़रूर खाये।।

4) हमारे खाने में प्रोटीन का बहुत महत्व है क्योंकि प्रोटीन हमारे शरीर की मरम्मत ही नही करता बल्कि शरीर को बनाने में भी सहायक है। इसलिए अपने भोजन में प्रोटीन ज़रूर शामिल करें। प्रोटीन डाइट और कौन सा प्रोटीन हमारे लिए बेटर है पर एक पूरा ब्लॉग लिखूंगी।जिससे और भी ज्यादा क्लियर हो जाएगा।

5) अब आते है आज के ड्रिंक पर। ये ड्रिंक आपको ब्लोटिंग की समस्या से निजात दिलाएगा और इसका उपयोग बहुत चमत्कारी ढंग से पेट के आधे से एक इंच को कम कर देता है। रात में सोने के पहले एक बड़े कॉफी कप में भर कर पानी लें। उसमें कुछ दो चार टुकड़े खीरे +चौथाई टुकड़ा निम्बू+ थोड़े पत्ते धनिया के+मिंट (पुदीना) के पत्ते भिगो दें।

रात भर भीगे इस पानी को सुबह खाली पेट में ले और सुबह भिगाये गए पानी को शाम के वक्त पर लें। आप देखिएगा, सिर्फ पहली बार के प्रयोग से ही आपको ब्लोटिंग की समस्या में बहुत आराम मिलेगा।

वैसे ब्लॉटिंग से बचने का एक और उपाय ये है कि हर बार कुछ भी खाने के बाद बैठ कर आराम करने की जगह कम से कम दस मिनट घर पर ही चल लें। उस से भी गैस और एसिडिटी की समस्या नही होती।

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तो करते रहिए व्यायाम । उसी से मिलेगा आराम।।

फिर मिलते हैं अगले ब्लॉग में जिसमें आपके सवालों के जवाब शामिल होंगे कि किस व्याधि में कौन सा आसन किया जा सकता है।

तब तक खूब खाइए और खूब पसीना बहाइये ….

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aparna

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दिल से…

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कायाकल्प चैलेंज

सुप्रभात दोस्तों,

आशा करती हूं कि आज का चैलेंज आपने अब तक पूरा कर लिया होगा… आज का चैलेंज था सिर्फ 20 सूर्य नमस्कार के साथ थोड़ी सी एब्स एक्सरसाईंज़। जो मैंने आपको कल बताई थी। और कल ही एक फैट कटर ड्रिंक भी बताया था आपको। जिंजर पाउडर ड्रिंक। उसे आप सभी लोग लेना शुरू कर दीजिए.. ये मेटाबोलिज्म बढ़ाने के साथ आपको चुस्त रखता है। अब हमारे अगले मुख्य बिंदु।

1) आप अगर किसी दिन सुबह का अपना 15 मिनट भूल जाएं तो कोई बात नही,किसी तरीके से शाम में उस 15 मिनट को अपने लिए निकालें और वॉक ज़रूर कर लें।

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2) वॉक के दौरान कोशिश कीजिये कि आप किसी से बात न करें। क्योंकि बात करते हुए हमारी गति धीमी हो जाती है। आप गाने सुनते हुए वॉक कर सकते हैं। और वॉक के बीच में 1 -1 मिनट की रनिंग ज़रूर ट्राय करें।

3)अपने खाने में तरह तरह के रंगों का प्रयोग ज़रूर करें। डायटिंग टिप्स बहुत आसान है। जो मैं इस चैलेंज के साथ साथ बताती जाऊंगी। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है रात का खाना। रात का खाना आप क्या खाते हैं इस पर आपका अगला दिन निर्भर करता है। अगर आप राइस ग्रेवी या हेवी भोजन खाते हैं तो उसे पचाने में शरीर को वक्त लगता है और इसलिए हमारा शरीर अधिक आराम मांगता है और इस कारण सुबह आपकी नींद खुलने में देर हो सकती है और व्यायाम के दौरान भी आपको मसल्स में स्पासम या जकड़न महसूस हो सकती है। इसलिए योग और व्यायाम करने वाले रात का खाना हल्का खाने पर ज़ोर देते हैं।

4) अगर आप वाकई वजन कम करना चाहते हैं तो रात का खाना शाम 7 के पहले कोशिश करें कि खा सकें। अगर उसके बाद आप 10 तक जागते हैं और आपको भूख लगती हैं तो आप दूध ले सकतें है या फिर भुने मखाने या सुगर फ्री बिस्किट। रात में 10 बजे सोना ज़रूरी है तभी तो आप सुबह जल्दी उठ पाएंगे। जल्दी मतलब 4 से 5 के बीच।

5) अब कल के लिए चैलेंज है…. 20 बार सूर्य नमस्कार करने के बाद आपको अपनी पसन्द का कोई भी तेज म्यूज़िक लगाना है और उस म्यूज़िक पर आपको लगातार 12 मिनट तक डांस करना है। और ये आपको जरूर करना है। इसके लिए भी आप यूट्यूब की मदद ले सकाते हैं। पर मेरा कहना है किसी की मदद लिए बिना अकेले ही कूद फांद के वो डांस कीजिये जो बारात में करने का आपका सपना रहा हो और अपने नही किया हो।

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तो फ्रेंड्स अगर आप रोज सिर्फ ये 15 मिनट मुझे देते हैं तो मैं वादा करती हूं, इस चैलेंज के बाद आपको आपकी ही कॉलेज पिक्चर से मिलवा कर रहूंगी।

हमारे जो साथी पहले से ही योग और व्यायाम करते आ रहे हैं उनके लिए ये शुरुवाती चैलेंज काफी कम और आसान होंगे, वो साथी अपना रूटीन ही फॉलो करें और बाकी की हेल्थ टिप्स के लिए ये अपडेट देखते रहें।

आगे आने वाले भागों में मैं आसन के नाम भी बताऊंगी और साथ ही ये भी ये कब किये जा सकते हैं और कब इन्हें करना मना है।

करते रहिए योग …. क्योंकि करने से ही होता है!!!

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दिल से…

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कायाकल्प चैलेंज

सुप्रभात दोस्तों

होप की आप लोगों ने कल अपनी तस्वीर उतार कर रख ली होगी और अपना वजन भी माप लिया होगा। वैसे व्यायाम और योग के हिसाब से आज भी मेरी अपडेट लेट हो रही है। क्योंकि देखा जाए तो व्यायाम का सबसे सही समय होता है सूर्योदय के पहले का। मतलब सूर्योदय से पहले आप व्यायाम शुरू करें और सूर्योदय आपके सामने हो।

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अब आज के कुछ खास टिप्स:-

1) कल का हमारा मुख्य मन्त्र था सिर्फ 15 मिनट। इस मंत्र को हमें अभी 1 हफ्ते तक फॉलो करना है, और यकीन मानिए अगर आप हफ्ते भर रोज़ 15 मिनट कसरत करते हैं तो आपको मालूम भी नही चलेगा कि कब आपका 15 मिनट आधे घण्टे में बदला और कब वो आधा घंटा 1 में।

2) आज का आपका चैलेंज है सूर्य नमस्कार की आवृत्ति को 20 तक बढ़ाना है। यानी एक टांग से 10 और दूसरी से भी 10…..

ये बहुत आसान है, सूर्य नमस्कार 20 की संख्या में करना अधिक नही है , कर के देखिए, बड़ा मजा आएगा।

अभी हमें बढाते बढाते ये संख्या 108 पर लेकर जानी है। मैं भी 108 सूर्य नमस्कार चैलेंज ले चुकी हूं और करने में बड़ा मजा आता है। जनवरी में हम एक बड़ा चैलेंज एक साथ करने वाले हैं।

3) सूर्य नमस्कार करने के बाद अगर आप करना चाहें तो थोड़ी सी एब्स की एक्सरसाइज़ कर सकतें हैं , ये भी आसान है… और ये आप खुद भी कर सकते हैं या यूट्यूब की मदद भी ले सकतें हैं। मैंने जब दो साल पहले योग करना शुरू किया था तब मैं Psyche Truth by शनेला को देखा करती थी। इनके वीडियोस छोटे और बहुत हेल्पफुल हैं।

4) आज का आपका 15 मिनट चैलेंज लेने के बाद आप अपने चेहरे पर एक चमक देखेंगे और इसके साथ ही आपको ज़रूरत होगी एक एनर्जी ड्रिंक की । ये ड्रिंक बहुत आसान है और इसे फैट कटर ड्रिंक भी कहा जाता है। उसे आपको दिन में दो बार लेना है। एक बार सुबह और एक बार शाम 4 के आसपास :-

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ड्रिंक – 1 बड़ा ग्लास गर्म पानी ( कुनकुना नही , गर्म पानी) लें उसमें आधा निम्बू ( अगर ज्यादा खट्टा पसन्द नही तो थोड़ा कम ) ,1चम्मच शहद, आधा चम्मच सूखे अदरक का पाउडर यानी सोंठ मिलाकर गर्मागर्म ही पी लीजिये जैसे चाय पी जाती है। ये कब्ज़ की समस्या को दूर करने के साथ ही हमारा मेटाबोलिज्म भी बढ़ाता है।

5) हममें से बहुत से लोग फलों को खाना नही पसन्द करते पर अगर आप अपने शरीर से प्यार करते हैं तो उसकी भी सुनें। हमेशा तो हम अपने मन की ही खाते हैं, आज से अपने हार्ट लिवर किडनी की मनपसंद चीज़े भी खाना शुरू कीजिए। इन्हें। फल कच्ची सब्जियां और सलाद बेहद पसंद है तो आज से इनके लिए कम से कम 1 फल रोज़ खाइए और साथ ही 5 बादाम भी( पानी में भिगोए हुए)

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आपको ये सब पढ़ कर लगेगा,इसमें नया क्या है? ये सब तो हम पहले से जानते थे। जानते तो हम सब कुछ हैं, पर फॉलो नहीं करते तो आइए फॉलो करें और अपने दिन को और अपने जीवन को हेल्दी बनाये।

Eat healthy live happily ❤️

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साबूदाना : स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद है या नही?

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  साबूदाना:-



    साबूदाना नाम लेते ही हमारे सामने उपवास से भरे दिन के बाद की सजी हुई थाली नजर आने लगती हैं साबूदाना हमारे हिंदुस्तान का एक बहुत प्रचलित खाद्य पदार्थ है।
     उत्तर भारत हो मध्य भारत हो या महाराष्ट्र उपवास में मुख्य रूप से खाए जाने वाले आहार का हिस्सा है साबूदाना। साबूदाना से तरह-तरह की चीजें बनाई जा सकती हैं चाहे वह साबूदाना की खिचड़ी हो साबूदाना के बड़े हो या खीर ।
यह सारे ही भोज्य पदार्थ पोषकता के मानकों पर खरे उतरते हैं।

   व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी में इधर कुछ दिनों से साबूदाने के ऊपर लंबे चौड़े वीडियोज़ रहे हैं कि इन्हें पशुओं की चर्बी से पॉलिश किया जाता है या साबूदाना बनाने में एनिमल फैट प्रयोग किया जाता है तो इन्हें उपवास में प्रयोग में कैसे लाया जाए?

सबसे पहली बात तो यह है कि बिना किसी विश्वसनीय साइट के आप सिर्फ व्हाट्सएप के वीडियोस के आधार पर कोई भी भ्रांति मन में ना पाले यह एक तरह से अफवाहों का अड्डा ही है कोई अफवाह चल गई तो ट्रेंड में आ जाती है और लगातार लगातार उस वीडियो को देखते हुए आप अपने मन में एक धारणा तैयार कर लेते हैं।

  साबूदाना का इतिहास खंगाला जाए तो यह मालूम पड़ता है कि यह हमारे परंपरागत आहार का हिस्सा नहीं था। यह मुख्य रूप से अफ्रीका में होने वाली टैपिओका की प्रजाति है।
    भारतवर्ष में इसे लाने का श्रेय त्रिवेंद्रम के राजा जी को जाता है। कई जगह इतिहास में यह भी वर्णित है कि साबूदाना की खेती सबसे पहले तमिलनाडु में शुरू की गई लेकिन बहुत सी जगह पर इसकी खेती सबसे पहले केरल में किए जाने के सबूत भी मिलते हैं।

साबूदाना पूरी तरह से वानस्पतिक आहार है। वनस्पतियों के रस से बनाया आहार उपवास के लिए पूरी तरह शुद्ध और सात्विक होता है।

  आइए देखते हैं साबूदाना बनता कैसे हैं…

भारतवर्ष में साबूदाना मुख्य रूप से टेपियोका की जड़ से बनाया जाता है सबसे पहले खेती वाली जगह से सारी टेपियोका की जड़ों को एक साथ निकाल लिया जाता है। यह जड़ें निकालते समय कुछ-कुछ मूली की तरह नजर आती हैं। बड़ी-बड़ी मशीनों में इन्हें डाल कर अच्छे से इनकी मिट्टी साफ कर ली जाती है तेज पानी की धार में धुली हुई यह जड़ें मशीन में आगे पहुंचती हैं। जहां पर इन्हें पील कर दिया जाता है, यानी कि इनके ऊपर का छिलका उतार दिया जाता है। छिलका उतारने के बाद एक बार फिर इन जड़ों को तेज पानी की धार से निकाला जाता है जिससे इन में लगी थोड़ी बहुत भी मिट्टी हो तो वह साफ हो जाती है। इसके आगे मशीनों में लगे चौपर से गुजरते हुए टेपियोका कि यह जड़ें छोटे-छोटे टुकड़ों में कट जाती हैं आगे एक बार फिर इन टुकड़ों को क्रश किया जाता है जिससे इन जड़ों का दूध पूरी तरह से निकाला जा सके। टेपियोका की जड़ों से निकाला गया यह दूध फिर सेट होने के लिए रख दिया जाता है।
क्योंकि यह दूध टैपिओका की जड़ से निकाला हुआ स्टॉर्च है कुछ देर तक स्थिर रखने से यह जम जाता है। अच्छी तरह जम जाने के बाद इसे वापस बड़े बड़े टुकड़ों में तोड़ लिया जाता है अब इन बड़े टुकड़ों को बहुत बारीक पीस लिया जाता है। इस पाउडर को वापस मशीनों की सहायता से आगे बढ़ाया जाता है कि यह छोटे-छोटे पारदर्शी गोलों में बदल जाते हैं।

  इस सारी तकनीक के बाद साबूदाना के दाने तैयार हो जाते हैं साबूदाना की यह मोती जैसे दाने मुख्य रूप से 2 तरह की साइज में उपलब्ध होते हैं।
    अब बाजार में तो वही बिकता है जो दिखता है इसीलिए साबूदाना के इन दानों को पॉलिश कर लिया जाता है। इस तरह यह साबूदाना के दाने आप की प्लेट में आने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाते हैं। आइए अब देखते हैं कि साबूदाने की न्यूट्रीशनल वैल्यू क्या होती है?

  साबूदाना मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट का सोर्स माना जाता है। कार्बोहाइड्रेट के अलावा कैलशियम पोटैशियम और अन्य मिनरल्स और खनिज भी इसमें पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं।

  उपवास में क्यों है ये मुख्य आहार:-

साबूदाना उपवास का सर्वप्रमुख आहार है इसका मुख्य कारण साबूदाने का कार्बोहाइड्रेट रिच होना ही माना जाता है। जब पूरा दिन उपवास करने के बाद शरीर की शक्ति कम होने लगती है तब हमारे शरीर को कार्बोहाइड्रेट से मिलने वाली ऊर्जा की आवश्यकता होती है। पूरा दिन उपवास करने के बाद  अनाज नहीं लेना चाहिए और सिर्फ फलाहार करना चाहे तब ऐसे में साबूदाना सबसे अच्छा ऑप्शन माना जाता है। साबूदाना को अनाज में नहीं गिना जाता लेकिन बावजूद उसमें काफी मात्रा में कार्बोहाइड्रेट पाए जाते हैं जो उपवास से होने वाली थकान और ऊर्जा की क्षति को पूरा कर देते हैं।

वजन बढ़ाने में सहायक :– साबूदाना में पाए जाने वाला फैट और कार्बोहाइड्रेट दुबलेपन से ग्रस्त लोगों में वजन बढ़ाने के लिए उपयोग में लाया जाता है।  इसीलिए काफी समय पहले टीबी सेनेटोरियम में साबूदाने की खीर सभी मरीजों को आवश्यक रूप से बांटी जाती थी इसका मुख्य उद्देश्य टीबी के मरीजों में वजन को बढ़ाना ही होता था।

हड्डियों के लिए लाभदायक:-  साबूदाना में पाए जाने वाले पोषक तत्व हमारे शरीर की हड्डियों के वर्धन में सहायक हैं । साबूदाना में कैल्शियम आयरन और मैग्नीशियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। साबूदाना में पाए जाने वाला कैल्शियम जहां हड्डियों के वर्धन और विकास के लिए सहायता करता है । वही इस में उपस्थित आयरन ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने में भी सहायक होता है ।  इसके साथ ही साबूदाना में पाए जाने वाला मैग्नीशियम आज समय में होने वाले हड्डियों के रोगों से भी लड़ने में सहायक होता है । यह हड्डियों को मजबूत बनाता है और फिट रखता है।

ऊर्जा देने में सहायक:– साबूदाने में उपस्थित कार्बोहाइड्रेट आपके शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है अगर आप किसी काम से थके हुए हैं और आपके शरीर का एनर्जी लेवल नीचे गिरा हुआ है, तब ऐसे में साबूदाने का सेवन आपके एनर्जी लेवल को सुधार कर आपको तुरंत ताकत और बल प्रदान करता है।

मेटाबोलिज्म के संतुलन में सहायक :-   गर्मी के दिनों में जब हमारे शरीर को ग्लाइकोजन की अतिरिक्त आवश्यकता होती है उस समय साबूदाने में उपस्थित कार्बोहाइड्रेट और फैट ग्लूकोस में बदलकर हमारे शरीर को तुरंत शक्ति प्रदान करता है और शरीर में उपस्थित गर्मी को दूर करता है इसीलिए ताप से जुड़ी बीमारियों में भी साबूदाने को खीर के रूप में या पानी के साथ उबालकर रोगियों को दिया जाता है।

उच्च रक्तचाप में साबूदाना:–   साबूदाना में पोटैशियम और फास्फोरस प्रचुर मात्रा में पाया जाता है इसके कारण यह शरीर में बढ़ने वाले उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायता करता है साबूदाना में सोडियम की मात्रा काफी कम पाई जाती है जिसके कारण इसके सेवन से रक्तचाप बढ़ने की समस्या नहीं होती इसके अलावा इसमें पाए जाने वाले फास्फोरस और पोटेशियम के कारण बढ़ा हुआ रक्तचाप कम होता है तथा उच्च रक्तचाप के मरीजों के लिए यह एक उचित नाश्ते का विकल्प माना जाता है।

रक्ताल्पता में इसका प्रयोग:– शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी को एनीमिया माना जाता है। एनीमिया से ग्रस्त रोगी को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। साबूदाना में उपस्थित आयरन लाल रक्त कणिकाओं की वृद्धि कर खून की कमी को दूर करता है। शोध द्वारा यह मालूम चला है कि साबूदाने में बहुत अधिक मात्रा में आयरन नहीं पाया जाता इसलिए एनीमिया के लिए सिर्फ साबूदाने का सेवन पर्याप्त नहीं है , साबूदाने के साथ ही अन्य आयरन युक्त आहार अधिक लाभप्रद माना जाता है।


मस्तिष्क के लिए उपयोगी:- साबूदाना में प्राकृतिक रूप से फॉलिक एसिड भी पाया जाता है। इसमें पाए जाने वाला फॉलिक एसिड शारीरिक रोगों के साथ-साथ मानसिक रोगों में भी लाभप्रद है मस्तिष्क में उत्पन्न विकारों में साबूदाना एक उचित आहार होता है।


रक्त परिसंचरण में लाभप्रद:– साबूदाना में पाए जाने वाला आयरन और फोलिक एसिड रक्त धमनियों में जाकर रक्त के परिसंचरण को सुगम बनाता है।
   

अतिसार में लाभदायक :– किसी कारण से दस्त हो जाने या अतिसार में भी बिना दूध के पकाया हुआ साबूदाना बहुत लाभप्रद होता है।

गर्भावस्था में :- गर्भावस्था में गर्भ में पल रहे शिशु के पर्याप्त पोषण हेतु भी साबूदाना उपयुक्त आहार माना जाता है। साबूदाना में लौह और खनिज तत्व पर्याप्त मात्रा में पाए जातें हैं जो शरीर की बढ़त के लिए अति आवश्यक हैं।

   इसके अलावा साबूदाना का फेस पैक त्वचा में कसाव लाकर त्वचा को चमकदार बनाने में भी सहायक होता है।

   साबूदाना के इतने सारे लाभ जान कर अब आप भी इसे अपने रोजाना के आहार का हिस्सा बना सकतें हैं।  ये एक उच्च ऊर्जायुक्त सुपाच्य आहार है जिसके फायदे अनेक हैं।

  डॉ अपर्णा मिश्रा

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