नींबू मिर्चें……ए हॉरर स्टोरी….

नींबू मिर्ची

    नेहा को उस कॉलोनी में आये दो चार दिन हो चुके थे लेकिन अब भी वो अपनी पुरानी कॉलोनी और दोस्तों को छोड़ने का गम भुला नही पा रही थी।
    विक्रम का क्या था , वो तो एक बार ऑफिस निकला फिर सीधे रात में ही लौटना होता था, सारा दिन घर पर अकेले तो उसे ही गुज़ारना होता था और उस पर इस नई कॉलोनी में आते ही जिन बातों से उसे रूबरू होना पड़ा था वो भी उसके किये कुछ कम ख़ौफ़नाक नही थी।

    अभी दूसरा दिन ही था जब वो घर के नीचे बनी दुकानों पर कुछ ज़रूरी सामान और राशन लेने गयी थी।
   विक्रम को रात में ही लौटना था इसलिए तफसील से आस पास घूम घूम कर उसने काफी समान खरीद लिया, अब अकेले ले जाना मुश्किल था। दुकान वाले ने काम करने वाले लड़के को सामान के साथ भेज दिया।
    कुछ बैग खुद थामे वो अपने फ्लैट पर पहुंची तो दरवाज़े पर एक पल को ठिठक कर खड़ी रह गयी, ” ये नींबू मिर्ची कौन फेंक गया”

   मन ही मन बुदबुदाती वो उसे पैर से एक तरफ करने वाली थी कि साथ वाला लड़का चिल्ला उठा__” नही मेमसाब, इसे छूना मत। जाने कौन टोटका कर गया आपके घर। किनारे से अंदर चले जाओ आप, सुबह सफाई वाला उठा ले जाएगा।”

  हाँ में सर हिला कर वो अंदर चली गयी। सारा सामान उससे अंदर रखवा कर वो दरवाज़ा बंद कर फ्रीज़ से पानी की बोतल निकाल लायी। हॉल में बैठी पानी पीती वो एक बार फिर उस नींबू मिर्ची के बारे में सोचने लगी।
   जाने क्या सोच कर वो दरवाज़े तक गयी और बाहर एक बार फिर झांक आयी, वहाँ अब भी वो नींबू मिर्ची पड़ी थी।

     दोपहर खाने का मन नही किया, वो टीवी पर कुछ देखते हॉल में ही सो गई, अचानक कॉल बेल बजने से उसकी नींद खुल गयी।
    वो दरवाज़े पर गयी वहाँ कोई नही था।
  वापस आ कर उसने अपने चेहरे आंखों पर ढेर सारा पानी डाला और बाहर बालकनी  में एक कप चाय लिए चली आयी,।
       बालकनी में आते ही उसकी नज़र किनारे रखे तुलसी के पौधे पर चली गयी। अरे ये क्या , उसके पुराने घर पर तो तुलसी एकदम हरी भरी खिली हुई थी, सिर्फ दो ही दिन में ये क्या हो गया?
   खुद से बात करती वो सोचने लगी। सिर्फ दो ही दिन हुए थे लेकिन इन दो दिनों में वो पौधों की तरफ ध्यान भी तो नही दे पाई थी। घर जमाने में इतनी व्यस्त हो गयी थी कि पौधों को भी पानी देना है ये भूल ही बैठी थी।
   हे भगवान! ये नया घर क्या क्या दिखाने वाला है? अभी सुबह ही निम्बू मिर्ची और अब ये सूखी तुलसी।
  उसने चाय का कप उठा लिया, नज़र तुलसी पर ही थी , कप मुहँ से लगाते ही अजीब सा स्वाद आया, उसने देखा उसकी चाय फट चुकी थी।
    एकदम से निराश हो वो कप लिए रसोई में चली गयी___” ये दूध वाले को भी फटकारना पड़ेगा, सुबह का दिया दूध है , और अभी शाम में ही चाय फट गई, ऐसा भी कभी होता है भला?”
    खुद के विचारों में नेहा गुम थी कि एक बार फिर दरवाज़े की घंटी बजी,वो चौन्क कर उठ गई…. तो क्या वो अब तक सपना देख रही थी? हाँ सपना ही तो था, क्योंकि वो तो अब भी हॉल के काउच पर ही थी। वो उठ कर दरवाज़ा खोलने चली गयी, सामने विक्रम को देख उसकी जान में जान आयी।
    विक्रम के अंदर आते ही वो उसे सुबह से बीता सब कुछ बताने को व्याकुल हो उठी लेकिन फिर वो उसके फ्रेश होकर आने का इंतज़ार करती उसके लिए चाय बनाने चली गयी।

   ” विक्रम तुमने बाहर देखा?”

  ” क्या नेहा?”

  “आज मैं कुछ सामान लेने गयी थी, लौटी तो हमारे दरवाज़े पर किसी ने निम्बू मिर्ची फेंकी हुई थी।”

  ” व्हाट रबिश बेबी! इस ज़माने में भी इस सब बकवास पर बिलीव करती हो।”

” मुझ पर भरोसा नही है तो खुद देख लो!”

  ” बात विश्वास की नही है नेहा। ये भी तो हो सकता है कि कोई पड़ोसी सब्जी लेकर जा रहा हो और उसके बैग से वो निम्बू मिर्ची गिर गयी हो।”

  ” वाह गिरने को मिली भी तो निम्बू मिर्ची, आलू बैगन टमाटर नही गिरे। लो बोलो।”

  ” हाँ उस बैग को पता नही होगा कि हमारी मैडम को आलू बैगन पसंद है , वर्ना आलू बैगन ही गिरते।

  विक्रम को हंसते देख फिर नेहा कुछ नही कह पायी, क्योंकि इसके अलावा तो उसने जो देखा वो उसका सपना ही था।

   रात का खाना निपटने के बाद वो रसोई समेटने में लग गयी। रसोई के बाहर की छोटी बालकनी से ही बाजू के घर की बालकनी जुड़ी थी।
    वो रसोई के कपड़ों को धो कर बालकनी की रॉड पर सूखाने जैसे ही बाहर आई एक काली बिल्ली अपनी हरी आंखें चमकाती वहाँ से निकल गयी। उस बिल्ली को देखते ही चौन्क कर उसकी चीख निकल गयी।
   नेहा की आवाज़ सुनते ही बाजू वाली बालकनी में खड़ी महिला उसकी ओर पलटी और उसे देखने लगी, अपनी  आवाज़ से उन्हें चौन्कते देख नेहा झेम्प गयी

  ” सॉरी वो काली बिल्ली थी ना, मैं उसे देख कर डर गई। मुझे पता नही क्यों बिल्लियाँ शुरू से पसंद नही हैं। बचपन से मेरी ताई हमेशा कहा करती थी कि कुत्ता मालिक का सगा होता है , वो मालिक को खाना खाते देख खुश होता है और मन ही मन सोचता है मालिक ऐसे ही खूब खाये और मुझे भी खिलाये जबकि बिल्ली मालिक को खाते देख सोचती है काश ये मर जाए और इसका सारा खाना मैं खा जाऊँ, इसलिए कहते हैं मालिक को बिल्ली के सामने खाना नही चाहिए।”

  अपनी कैफियत में नेहा हड़बड़ा कर कुछ ज्यादा ही कह गयी , सामने खड़ी महिला ने उसे भर नज़र देखा__

  ” वो मेरी पालतू बिल्ली है टिमी।”

  ” ओह्ह I m so sorry , मैं जल्दबाज़ी में कुछ का कुछ कह गयी शायद!”

  ” हम्म! नए आये हो सोसाइटी में ?”

  ” जी हाँ! मेरे हसबैंड का ऑफिस यहाँ से पास पड़ता है, इसके पहले हम गुलमोहर सोसाइटी में रहा करते थे। पर इनका सपना था मालपानी में घर खरीदने का, बस जैसे ही पैसे जुड़े, यहाँ घर ले लिया।”

  ” मैं मानिनी सरकार हूं , एक ही बेटी है शादी होकर विदेश चली गयी सात साल पहले, तबसे यहाँ अकेली रहती हूँ। उससे बात होती रहती है, अभी पंद्रह दिन पहले ही हुई थी।”

  ” ओह्ह अगेन सॉरी, आपके हसबैंड के लिए ?”

  ” अरे नही वो मरा नही है, हम पंद्रह साल पहले अलग हो गए।”

   एक पर एक बेवकूफियां करती नेहा को खुद पर गुस्सा आ रहा था, उसे लगा अब अगर उसने और एक गलती की तो ये मानिनी सरकार इस पंद्रहवें माले से उसे नीचे फेंक देगी।
    वो उनसे विदा ले भीतर चली आयी।

    मालपानी एक शानदार सोसाइटी थी जहाँ लगभग इक्कीस क्लस्टर थे जिनमें सभी बिल्डिंग्स दस से पंद्रह मालों की थी। 2bhk 3 bhk  की बिल्डिंग्स अलग अलग थी।
   उनका घर 3 bhk  वाले अपार्टमेंट में सबसे ऊपर था , जहाँ कुल जमा दो घर ही थे, एक उनका एक मानिनी सरकार का।

     अगले दिन विक्रम के ऑफिस निकलते ही वो अपना काम निपटा कर बाहर बालकनी में कॉफ़ी लिए चली आयी, उसका ध्यान वहाँ रखे पौधों पर नही था, आराम से बैठी वो जैसे ही कॉफी पीने जा रही थी कि उसकी नज़र सामने रखे तुलसी के पौधे पर पड़ी और उसकी आंखें आश्चर्य से फैल गईं।
    कल शाम का देखा उसका सपना सच हो गया था, उसके सामने तुलसी का पौधा सूख कर कुम्हला गया था। वो भाग कर पानी ले आयी। वहाँ रखे सभी पौधों में पानी डालती वो मन ही मन हनुमान चालीसा का जाप भी करती जा रही थी, पर दो लाइन के बाद उसे कुछ याद ही नही आ रहा था। बचपन में पापा उसे कितनी बार चालीसा याद करने कहा करते थे, पर वो हमेशा आलस कर जाती थी आज उसकी वो बेवकूफी उस पर ही भारी पड़ रही थी।
    वो पानी डाल उठी ही थी कि दरवाज़े पर किसी ने घण्टी बजा दी, उसने नीचे सिक्योरिटी वाले से मेड के लिए बात की थी, हो न हो मेड ही होगी सोचती वो दरवाज़ा खोलने चली गयी।
     दरवाज़ा खोलते ही उसने देखा सामने कोई ना था। वो घर से बाहर निकल आयी, आजू बाजू उसने हर तरफ देखा , कोई ना था। घर के ठीक सामने एक तरफ लिफ्ट और उसके बाजू में सीढियाँ थी। उसके घर के ठीक बाजू में मिसेस सरकार का घर था, जो बंद था।
     वो वापस अपने दरवाज़े की ओर मुड़ गयी, लेकिन ये क्या? दरवाज़े के ठीक सामने एकदम ताज़ी पीली निम्बू और हरी मिर्च पड़ी थी।
   उसके मुहँ से हल्की सी चीख निकल गयी।

  वो घबरा कर अंदर घुस गई, और दरवाज़े को बंद कर कुंडी लगा दी।
       अंदर आकर जल्दी से वो नहाने घुस गई। जिस दिन से शिफ्ट हुए थे इतना काम था कि काम की उलझनों में मंदिर अनपैक करना वो लोग भूल ही गए थे।
   इसलिए उसने सोचा नहा धो कर आज मंदिर खोल कर ही रहेगी।
     लेकिन ये क्या?

    ये भी आज ही होना था! अब अगले पांच दिन वो मंदिर छू भी नही सकती थी। उसे अचानक घबराहट सी होने लगी, यहाँ किससे वो अपनी तकलीफ साझा करें? आखिर कौन था जो उसके घर के बाहर निम्बू मिर्ची फेंक कर जा रहा? और क्यों ये ऐसा कर रहा?
   उसे बाजू वाली मानिनी आंटी याद आ गयी, उसे दरवाज़ा खोल कर उनके घर जाने में डर लग रहा था उसने घर पर मिले आई पी फ़ोन से उनके घर का नंबर डायल किया, पर लगातार रिंग जाने पर भी किसी ने फ़ोन नही उठाया।
   वो परेशान होकर रसोई के पीछे वाली बालकनी में चली आयी, वहाँ से वो उन्हें आवाज़ देती रही लेकिन जैसे उसकी आवाज़ उस सूने पंद्रहवें माले में कहीं खोकर रह गयी थी।

   ******

   उस शाम भी विक्रम के थके होने से वो उसे ज्यादा कुछ नही कह पायी लेकिन उस नींबू मिर्ची के बारे में बता दिया।
    विक्रम के कहने पर की वो नीचे के माले में जाकर लोगों से दोस्ती करे बातचीत करे तो उसके लिए भी अच्छा होगा सोचकर अगले दिन विक्रम के ऑफिस निकलते ही वो नहा कर तैयार होकर नीचे चली गयी।

  पर नीचे भी किसके घर जाकर ऐसे बेल बजा दे, अच्छा भी तो नही लगता। बडी सोसाइटी में रहने वाले लोगों के चोंचले भी तो बड़े होतें हैं, सोचते सोचते ही वो लिफ्ट से ग्राउंड फ्लोर पर चली आयी।

    उसकी बिल्डिंग के बाईं तरफ छोटा सा पार्क बना था, वो धीमे कदमों से चलती उसी तरफ आगे बढ़ गयी, रास्ते में सोसाइटी की आइसक्रीम शॉप से उसने अपनी पसंदीदा आइसक्रीम ली और उस बगीचे में एक बेंच पर जा बैठी।
   वो जहाँ बैठी थी, वहाँ से उसे अपनी रसोई वाली बालकनी साफ दिख रही थी ।
   वो आइसक्रीम खाती ऊपर अपनी बालकनी देख ही रही थी कि उसकी पड़ोसन मानिनी आंटी की काली बिल्ली उनकी बालकनी की पतली सी दीवार पर लचक मटक कर चलने लगी।
  उसे देखती नेहा घबरा गई कि कहीं इतनी ऊंचाई से बिल्ली गिरी तो सीधे परलोक ही जाएगी उसी वक्त बिल्ली का एक पैर फिसला और नेहा की चीख निकल गयी। हालांकि उसकी चीख बहुत घुटी सी थी बावजूद जाने कैसे उस बिल्ली ने सुन लिया और वो अपनी जलती आंखों से उसे घूरने लगी।
      नेहा उसे हाथ के इशारे से जाने कह रही थी कि उसकी आइसक्रीम पर मुहँ मारने वो काली बिल्ली ऊपर से कूद पड़ी।
     एक चीख के साथ नेहा ने आंखे बंद कर ली, तभी उसे लगा उसके कंधे पर किसी ने हाथ रखा, धीरे से आंख खोल उसने पीछे देखा एक उसी की उम्र की लड़की खड़ी थी__

  ” हैलो मैं शुभांगी! यहाँ  c block  में रहती हूँ, आप यहाँ नई लग रहीं, पहले कभी देखा नही आपको।”

  “जी ! मैं भी सी ब्लॉक में ही आयी हुँ 15 माले पर । “

“ओह्ह तो पेंट हाउस लिया है आपने , मैं 12 वें माले में रहती हूँ। मेरे हसबैंड का बिज़नेस है खुद का। और मैं इंटीरियर डिज़ाइनर हूँ। कभी आपको इंटीरियर करवाना हुआ तो बताइयेगा।”

  ” श्योर ! वैसे हमारे नीचे कौन रहता है ? क्या है आस पड़ोस में जान पहचान होनी चाहिए ना!”

  ” 14 वे माले पर एक ही घर ऑक्युपाइड है, बैचलर लड़के रहतें हैं शायद! सुबह से जो निकलते हैं सीधे रात में ही आते हैं सो उन लोगों से ज्यादा किसी को लेना देना नही होता। और 13वा माला जब से बना खाली ही है। लोगों का मानना है कि 13 अशुभ नंबर है !इसी से वहाँ कभी कोई रहने नही आया।”

  ” ओह्ह मतलब आपके बाद सीधे मैं और मानिनी आंटी ही हैं।”

  ” आप मानिनी सरकार को कैसे जानती हैं?”

  शुभांगी की बात सुन नेहा आश्चर्यचकित हो गयी, स्वाभाविक है मानिनी उसकी पड़ोसन है तो उसे जानना कौन सी बड़ी बात हो गयी?

  “जी जानती नही हूँ, पर मेरे ठीक बाजू वाला घर उन्हीं का तो है ना?”

  ” अरे हाँ ! वो भी तो पंद्रहवें माले में ही रहती हैं, मैं एक बार गयी थी उनके घर , उन्होंने इंटीरियर करवाने बुलाया तो था लेकिन मेरी कुछ सुने बिना सब अपनी मर्ज़ी से करवा रही थी। बहुत अजीब औरत हैं।”

” अच्छा ? अजीब तो उनकी बिल्ली भी है!”

  ” सही कहा ! मैं जब गयी तो उन्होंने बहुत अजीबोगरीब सजावट करवाई थी घर की। अजीब से गहरे रंगों से एक दीवार रंगवा कर उसमें कुछ अजीब मंत्र लिखवाने लगी।
       घर पर लाइट्स भी बहुत कम रखी थी उन्होंने सिर्फ कैंडल्स ही कैंडल्स जला रखे थे। मुझे तो अजीब घबराहट सी होने लगी थी, उस पर ज़बरदस्ती ज़िद कर के मिल्कशेक भी ले आईं। पीने का बिल्कुल मन नही था तभी उनकी काली बिल्ली आयी और मुझ पर कूद पड़ी , मिसेस सरकार तो मुस्कुराने लगी कहती है तुम टिमी को पसंद आ गयी हो इसलिए तुम्हारे ऊपर जम्प कर रही लेकिन मेरी सांस रुकने लगी थी, बड़ी मुश्किल से जान बचा कर भागी, और बाद में आस पास के लोगों ने कहा भी…

” क्या कहा?”

” यही की वो कुछ अलग सी है, उनकी अपनी दुनिया है, और वो जादू टोना भी करती हैं..  तुम ये बात किसी से कहना नही”

  ” व्हाट ? जादू टोना मतलब?”

  नेहा के सवाल पर शुभांगी आस पास देख कर उसके और करीब खिसक आयी

  ” मैंने सुना है अपनी बेटी की शादी के बाद बहुत अकेली हो गयी थी इसलिए ये सब करने लगी। कुछ लोग तो कहते हैं पहले से यह सब करती थी इसलिए उनके पति भी उन्हें छोड़ गए। अब सच्चाई तो मालूम नही जितने मुहँ उतनी बातें। भई सच तो हम भी नही जानते लेकिन अब अगर कहीं नींबू मिर्ची पड़ी मिलेगी तो दिमाग में खटका तो लगेगा ना?”

” क्या किसी के घर के सामने मिली क्या?

  शुभांगी फिर धीरे से फुसफुसाने लगी__

” ये सब कोई खुल के थोड़े ही बताता है! वैसे तुम्हें कुछ भी ज़रूरत हो तो बताना ज़रूर , आखिर पड़ोसी ही तो एक दूसरे के काम आते हैं। है ना?”

  “हाँ !
   शुभांगी हो सके तो कोई माली मिले तो भेजना न।
शिफ्टिंग में प्लांट्स खराब हो गए, तुलसी तो बिल्कुल मुरझा गयी।”

” ओहहो तुलसी मुरझा गयी? तुलसी का मुरझाना हमारे यहाँ अच्छा नही मानते, इसका मतलब जानती हो क्या होता है?”

  नेहा कुछ कह पाती की उसका फोन घनघना उठा, फ़ोन विक्रम का था। उसके ऑफिस में पार्टी थी उसे रात लौटने में देर हो सकती है ये सूचना देकर उसने फोन रख दिया….
    ये पता चलते ही कि वीरेन को देर होगी उसका मन डूबने लगा, वो साथ बैठी शुभांगी से विदा लेकर घर की ओर निकलने लगी, तभी उसे ध्यान आया कि शुभांगी के आने के पहले उसने टिमी को नीचे गिरते देखा था लेकिन वो वहाँ कहीं थी ही नही?
     वो बुझे मन से  आगे बढ़ गयी, शुभांगी के बारहवें माले पर अपने घर के लिए उतरते ही वो लिफ्ट में अकेली रह गयी।
         वो अकेली थी, अभी दो मालों का सफर तय करना था कि उसे कहीं से बिल्ली की आवाज़ सुनाई पड़ी , वो चौन्क कर इधर उधर देखने लगी।
   उसका माला आते ही वो जल्दी से लिफ्ट से निकल अपने घर की ओर बढ़ गयी, लेकिन  एक बार फिर उसकी आंखें आश्चर्य से खुली रह गईं जब उसने अपने दरवाज़े पर नींबू मिर्ची पड़ी देखी__

   ” अब तो हद ही हो गयी, ये पक्का इन मैडम मानिनी जी का ही काम है, आज तो इनसे बात करनी ही पड़ेगी। कमबख्त ने इतना डरा रखा है कि बैठे बैठे उटपटांग सपने देखने लगती हूँ, कभी इनकी बिल्ली को छत से कूदते देखती हूँ तो कभी कुछ! “

  गुस्से में बड़बड़ाती वो उनका दरवाज़ा खटखटाने लगी, बेल पर बेल बजाती वो बार बार दरवाज़े पर थाप भी देती जा रही थी।
  उसकी लगातार थाप सुन नीचे से दो लड़के भाग कर ऊपर चले आये__

  ” कोई प्रॉब्लम है मैडम?”

  ये शायद वही बैचलर लड़के थे जिनके बारे में शुभांगी ने उसे बताया था, लेकिन इन पढ़े लिखे सॉफिस्टिकेटेड लड़कों से वो नींबू मिर्ची वाली बात बोलेगी कैसे? ये लोग उसे जाहिल और गंवार नही समझने लगेंगे?

   क्या जवाब देना चाहिए सोच कर उसने आखिर एक जवाब तय कर ही लिया__

  ” जी वो मानिनी आंटी दरवाज़ा नही खोल रही और ना ही फोन उठा रही, इसलिए बस…

  ” ओह्ह ये तो चिंता की बात है। उनकी उम्र भी ज्यादा है , अकेले रहती हैं, और पिछले कई दिनों से नज़र भी नही आयीं।”

  नेहा ने तो सोचा था वो गुस्से में मानिनी को चार बातें सुना कर निकल लेगी लेकिन यहाँ ये लड़के चले आये और बात दूसरी ही तरफ मुड़ गयी, अब अगर इन लड़कों के सामने आंटी ने दरवाज़ा खोल भी दिया तो क्या वो बदतमीज़ी से उनसे लड़ पाएगी।
    और ये लड़के तो बड़े चिंतित से दरवाज़ा तोड़ने में ही लग गए थे। तीन लंबे चौड़े लड़को के लगातार  प्रहार से वो मज़बूत दरवाज़ा भी हिल गया, आखिर उसकी लीश खीँच खांच कर अंदर लगी चिटकनी उन लोगों ने खोल ली।
   दरवाज़ा खुलते ही एक तेज़ बदबू से उन सभी ने नाक बंद कर ली।
     उन तीनों के साथ नेहा भी अंदर चली गयी। बदबू बहुत तेज़ थी, हॉल पार करते ही एक अँधियारा गलियारा था जिसे पार करते ही एक कमरा था जिसके दरवाज़े को हल्का सा अंदर धकेलते ही अंदर का नज़ारा देख नेहा की चीख ही निकल गयी , लड़के भी स्तब्ध खड़े रह गए थे।
    पलंग पर मानिनी सरकार की लाश पड़ी थी। उनके पैरों के पास ही उनकी काली बिल्ली भी मरी पड़ी थी।
  उनमें से एक लड़के ने तुरंत सिक्योरिटी को बुलाने के बाद पुलिस को फ़ोन लगा दिया।
   नेहा के आँसू रुक ही नही रहे थे।
पुलिस के साथ आई फोरेंसिक टीम जांच में लग गयी। एक एक कर पड़ोसी भी आते चले गए, जिसे जो पता था वो बताता गया। फोरेंसिक टीम के अनुसार मानिनी सरकार की मृत्यु पंद्रह दिन पहले ही हो चुकी थी।
    पंद्रह दिन पहले उन्होंने कुछ सब्ज़ियां मंगवाई रही होंगी, क्योंकि उनके टेबल पर आलू बैगन लौकी तो रखी थी लेकिन नींबू मिर्ची टेबल से नीचे गिरी हुई थी।
   नेहा उनका हॉल और कमरा देख रही थी, उसकी नज़र उस कलात्मक दीवार पर जा कर अटक गयी जहाँ गहरे नारंगी रंगों के ऊपर गहरा हरा फिर नीला रंग गोलाई में पुता था और उसके एक ओर बुद्ध के चेहरे की रेखाएं खींची थी, और नीचे कुछ शांति पाठ से लिखा था।
     हॉल में एक तरफ छोटा सा मंदिर रखा था, जिसमें हनुमान चालीसा पर नज़र पड़ते ही नेहा के हाथ खुद ब खुद जुड़ गए।
   नही इतना पूजा पाठ करने वाली औरत कभी कोई टोना नही कर सकती , ये नींबू मिर्ची मानिनी उसे संदेश देने के लिए ही उसके घर के बाहर तक पहुंचा रही थी, शायद अपनी मौत के बारे में बताने।
 
   वो वहाँ तफ्तीश करती पुलिस से क्या कहती कि वो एक रात पहले ही मानिनी सरकार से लगभग पंद्रह मिनट बात कर चुकी थी। तभी उसके कानों में किसी की आवाज़ पड़ी

  ” अरे किसी ने नेहा को इन्फॉर्म किया या नही?”

  नीचे रहने वाली कोई पड़ोसन आंटी थी जो पूछ रही थी तभी किसी ने जवाब दिया कि नेहा के नंबर पर उसे बता दिया है ,वो कल तक पहुंच जाएगी।

  ओह्ह तो ये बात थी, उनकी बेटी का नाम भी नेहा था, शायद इसलिए मानिनी सरकार की आत्मा उसे हिंट पर हिंट दे रही थी और वो समझ ही नही पायी…
   सोचती नेहा वहाँ से बाहर निकल रही थी कि विक्रम भी हड़बड़ा कर वहाँ पहुंच गया।
   विक्रम का सहारा लिए वो वहाँ से बाहर निकल रही थी कि उसकी नज़र बालकनी में रखी आंटी की सूखी तुलसी पर चली गयी, वो बुझे मन और भीगी पलकों के साथ वापस अपने घर चली आयी।

  aparna…