दिल से ….

Advertisements

Hello friends , कैसे हैं आप सब? और कैसा चल रहा है आपका कायाकल्प? प्लीज़ ये मत कहिएगा की मैंने 3 दिन से कोई अपडेट नही डाली इसलिए वेट करते बैठे हैं…

व्यायाम और योग तो हमें रोज़ करना ही है, चाहे मैं अपडेट डालूं या नही। ज्यादा नही करना है सिर्फ 15 मिनट !!!

शुरुवात में बस इतना ही करना भी पर्याप्त है। सबसे पहले हमें अपने शरीर को व्यायाम की आदत करवाना है। उसके बाद आपको सोचने की ज़रूरत ही नही पड़ेगी, आपकी बॉडी खुद ब खुद आपको खींच कर व्यायाम करवा लेगी।

महिलाओं की एक आम समस्या होती है ब्लोटिंग की । यानी पेट फूल रहा है ऐसा महसूस होता है। दोपहर के खाने के बाद शाम के समय में अगर आपको पेट में भारीपन लगता है तो ये ब्लॉटिंग ही हैं, बहुत बार ये भारीपन हल्के से दर्द में भी बदल जाता है।

आज इस ब्लॉटिंग से बचने के कुछ उपाय बताऊंगी… जिनमें से अधिकतर हम जानतें हैं पर अक्सर फॉलो करना भूल जाते हैं।

Advertisements

1) खाना खाते समय बिल्कुल भी पानी न पिएं। बहुत जरूरत हो तो हल्का गुनगुना पानी एक आध सिप ले सकतें हैं।

2) खाने के 40 मिनट बाद भी आपको भर गिलास पानी नही लेना है। थोड़ा थोड़ा ही पिये वो भी गुनगुना पानी। देखिए जैसे आप हवन करते समय अग्नि में आहुति डालते हैं कुछ ऐसा ही हमारे पेट में होता है। भूख के समय हमारे पेट में कई एंजाइम्स सीक्रिट होते हैं जो मान लीजिये पेट की अग्नि है अब उसमें हम खाना दिलातें हैं जैसे आहुति। अब अगर इसके साथ ही आप ठंडा पानी भी डाल देंगे तो पेट की अग्नि तो बुझ जाएगी ना, फिर वो उस भोजन को ठीक से पचायेगी कैसे? और यही अधपचा भोजन तरह तरह की परेशानियों को पैदा करने का कारण बनता है। तो जिस तरह हवन में अग्नि को भड़काने के लिए बीच में घी प्रयोग किया जाता है वैसे ही भोजन के बीच में ज़रूरत पड़ने पर गर्म पानी प्रयोग करें।

3) एक नियम बना लें,जब तक आपका पेट चिल्ला कर आपसे खाना न मांगे तब तक बिल्कुल न खाए। सिर्फ़ इसलिए कि खाने का वक्त हो गया है इसलिए खा लेना चाहिए वाली आदत छोड़ दीजिए। वैसे व्यायाम करने पर बहुत जोर की भूख लगती है और तब कुछ न कुछ हेल्दी फ़ूड ज़रूर खाये।।

4) हमारे खाने में प्रोटीन का बहुत महत्व है क्योंकि प्रोटीन हमारे शरीर की मरम्मत ही नही करता बल्कि शरीर को बनाने में भी सहायक है। इसलिए अपने भोजन में प्रोटीन ज़रूर शामिल करें। प्रोटीन डाइट और कौन सा प्रोटीन हमारे लिए बेटर है पर एक पूरा ब्लॉग लिखूंगी।जिससे और भी ज्यादा क्लियर हो जाएगा।

5) अब आते है आज के ड्रिंक पर। ये ड्रिंक आपको ब्लोटिंग की समस्या से निजात दिलाएगा और इसका उपयोग बहुत चमत्कारी ढंग से पेट के आधे से एक इंच को कम कर देता है। रात में सोने के पहले एक बड़े कॉफी कप में भर कर पानी लें। उसमें कुछ दो चार टुकड़े खीरे +चौथाई टुकड़ा निम्बू+ थोड़े पत्ते धनिया के+मिंट (पुदीना) के पत्ते भिगो दें।

रात भर भीगे इस पानी को सुबह खाली पेट में ले और सुबह भिगाये गए पानी को शाम के वक्त पर लें। आप देखिएगा, सिर्फ पहली बार के प्रयोग से ही आपको ब्लोटिंग की समस्या में बहुत आराम मिलेगा।

वैसे ब्लॉटिंग से बचने का एक और उपाय ये है कि हर बार कुछ भी खाने के बाद बैठ कर आराम करने की जगह कम से कम दस मिनट घर पर ही चल लें। उस से भी गैस और एसिडिटी की समस्या नही होती।

Advertisements

तो करते रहिए व्यायाम । उसी से मिलेगा आराम।।

फिर मिलते हैं अगले ब्लॉग में जिसमें आपके सवालों के जवाब शामिल होंगे कि किस व्याधि में कौन सा आसन किया जा सकता है।

तब तक खूब खाइए और खूब पसीना बहाइये ….

Advertisements

aparna

Advertisements

दिल से…

Advertisements

कायाकल्प चैलेंज

सुप्रभात दोस्तों,

आशा करती हूं कि आज का चैलेंज आपने अब तक पूरा कर लिया होगा… आज का चैलेंज था सिर्फ 20 सूर्य नमस्कार के साथ थोड़ी सी एब्स एक्सरसाईंज़। जो मैंने आपको कल बताई थी। और कल ही एक फैट कटर ड्रिंक भी बताया था आपको। जिंजर पाउडर ड्रिंक। उसे आप सभी लोग लेना शुरू कर दीजिए.. ये मेटाबोलिज्म बढ़ाने के साथ आपको चुस्त रखता है। अब हमारे अगले मुख्य बिंदु।

1) आप अगर किसी दिन सुबह का अपना 15 मिनट भूल जाएं तो कोई बात नही,किसी तरीके से शाम में उस 15 मिनट को अपने लिए निकालें और वॉक ज़रूर कर लें।

Advertisements

2) वॉक के दौरान कोशिश कीजिये कि आप किसी से बात न करें। क्योंकि बात करते हुए हमारी गति धीमी हो जाती है। आप गाने सुनते हुए वॉक कर सकते हैं। और वॉक के बीच में 1 -1 मिनट की रनिंग ज़रूर ट्राय करें।

3)अपने खाने में तरह तरह के रंगों का प्रयोग ज़रूर करें। डायटिंग टिप्स बहुत आसान है। जो मैं इस चैलेंज के साथ साथ बताती जाऊंगी। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है रात का खाना। रात का खाना आप क्या खाते हैं इस पर आपका अगला दिन निर्भर करता है। अगर आप राइस ग्रेवी या हेवी भोजन खाते हैं तो उसे पचाने में शरीर को वक्त लगता है और इसलिए हमारा शरीर अधिक आराम मांगता है और इस कारण सुबह आपकी नींद खुलने में देर हो सकती है और व्यायाम के दौरान भी आपको मसल्स में स्पासम या जकड़न महसूस हो सकती है। इसलिए योग और व्यायाम करने वाले रात का खाना हल्का खाने पर ज़ोर देते हैं।

4) अगर आप वाकई वजन कम करना चाहते हैं तो रात का खाना शाम 7 के पहले कोशिश करें कि खा सकें। अगर उसके बाद आप 10 तक जागते हैं और आपको भूख लगती हैं तो आप दूध ले सकतें है या फिर भुने मखाने या सुगर फ्री बिस्किट। रात में 10 बजे सोना ज़रूरी है तभी तो आप सुबह जल्दी उठ पाएंगे। जल्दी मतलब 4 से 5 के बीच।

5) अब कल के लिए चैलेंज है…. 20 बार सूर्य नमस्कार करने के बाद आपको अपनी पसन्द का कोई भी तेज म्यूज़िक लगाना है और उस म्यूज़िक पर आपको लगातार 12 मिनट तक डांस करना है। और ये आपको जरूर करना है। इसके लिए भी आप यूट्यूब की मदद ले सकाते हैं। पर मेरा कहना है किसी की मदद लिए बिना अकेले ही कूद फांद के वो डांस कीजिये जो बारात में करने का आपका सपना रहा हो और अपने नही किया हो।

Advertisements

तो फ्रेंड्स अगर आप रोज सिर्फ ये 15 मिनट मुझे देते हैं तो मैं वादा करती हूं, इस चैलेंज के बाद आपको आपकी ही कॉलेज पिक्चर से मिलवा कर रहूंगी।

हमारे जो साथी पहले से ही योग और व्यायाम करते आ रहे हैं उनके लिए ये शुरुवाती चैलेंज काफी कम और आसान होंगे, वो साथी अपना रूटीन ही फॉलो करें और बाकी की हेल्थ टिप्स के लिए ये अपडेट देखते रहें।

आगे आने वाले भागों में मैं आसन के नाम भी बताऊंगी और साथ ही ये भी ये कब किये जा सकते हैं और कब इन्हें करना मना है।

करते रहिए योग …. क्योंकि करने से ही होता है!!!

Advertisements

दिल से…

Advertisements

कायाकल्प चैलेंज

सुप्रभात दोस्तों

होप की आप लोगों ने कल अपनी तस्वीर उतार कर रख ली होगी और अपना वजन भी माप लिया होगा। वैसे व्यायाम और योग के हिसाब से आज भी मेरी अपडेट लेट हो रही है। क्योंकि देखा जाए तो व्यायाम का सबसे सही समय होता है सूर्योदय के पहले का। मतलब सूर्योदय से पहले आप व्यायाम शुरू करें और सूर्योदय आपके सामने हो।

Advertisements

अब आज के कुछ खास टिप्स:-

1) कल का हमारा मुख्य मन्त्र था सिर्फ 15 मिनट। इस मंत्र को हमें अभी 1 हफ्ते तक फॉलो करना है, और यकीन मानिए अगर आप हफ्ते भर रोज़ 15 मिनट कसरत करते हैं तो आपको मालूम भी नही चलेगा कि कब आपका 15 मिनट आधे घण्टे में बदला और कब वो आधा घंटा 1 में।

2) आज का आपका चैलेंज है सूर्य नमस्कार की आवृत्ति को 20 तक बढ़ाना है। यानी एक टांग से 10 और दूसरी से भी 10…..

ये बहुत आसान है, सूर्य नमस्कार 20 की संख्या में करना अधिक नही है , कर के देखिए, बड़ा मजा आएगा।

अभी हमें बढाते बढाते ये संख्या 108 पर लेकर जानी है। मैं भी 108 सूर्य नमस्कार चैलेंज ले चुकी हूं और करने में बड़ा मजा आता है। जनवरी में हम एक बड़ा चैलेंज एक साथ करने वाले हैं।

3) सूर्य नमस्कार करने के बाद अगर आप करना चाहें तो थोड़ी सी एब्स की एक्सरसाइज़ कर सकतें हैं , ये भी आसान है… और ये आप खुद भी कर सकते हैं या यूट्यूब की मदद भी ले सकतें हैं। मैंने जब दो साल पहले योग करना शुरू किया था तब मैं Psyche Truth by शनेला को देखा करती थी। इनके वीडियोस छोटे और बहुत हेल्पफुल हैं।

4) आज का आपका 15 मिनट चैलेंज लेने के बाद आप अपने चेहरे पर एक चमक देखेंगे और इसके साथ ही आपको ज़रूरत होगी एक एनर्जी ड्रिंक की । ये ड्रिंक बहुत आसान है और इसे फैट कटर ड्रिंक भी कहा जाता है। उसे आपको दिन में दो बार लेना है। एक बार सुबह और एक बार शाम 4 के आसपास :-

Advertisements

ड्रिंक – 1 बड़ा ग्लास गर्म पानी ( कुनकुना नही , गर्म पानी) लें उसमें आधा निम्बू ( अगर ज्यादा खट्टा पसन्द नही तो थोड़ा कम ) ,1चम्मच शहद, आधा चम्मच सूखे अदरक का पाउडर यानी सोंठ मिलाकर गर्मागर्म ही पी लीजिये जैसे चाय पी जाती है। ये कब्ज़ की समस्या को दूर करने के साथ ही हमारा मेटाबोलिज्म भी बढ़ाता है।

5) हममें से बहुत से लोग फलों को खाना नही पसन्द करते पर अगर आप अपने शरीर से प्यार करते हैं तो उसकी भी सुनें। हमेशा तो हम अपने मन की ही खाते हैं, आज से अपने हार्ट लिवर किडनी की मनपसंद चीज़े भी खाना शुरू कीजिए। इन्हें। फल कच्ची सब्जियां और सलाद बेहद पसंद है तो आज से इनके लिए कम से कम 1 फल रोज़ खाइए और साथ ही 5 बादाम भी( पानी में भिगोए हुए)

Advertisements

आपको ये सब पढ़ कर लगेगा,इसमें नया क्या है? ये सब तो हम पहले से जानते थे। जानते तो हम सब कुछ हैं, पर फॉलो नहीं करते तो आइए फॉलो करें और अपने दिन को और अपने जीवन को हेल्दी बनाये।

Eat healthy live happily ❤️

Advertisements

दिल से….

Advertisements

कायाकल्प चैलेंज

Advertisements

प्यारे दोस्तों, माफ कीजियेगा हमारे चैलेंज के लिए मैं ही लेट हो गयी, पर आप सब एकदम चुस्ती से तैयार हैं … यही देख कर दिल खुश हो गया।

आज इस चैलेंज से जुड़ी सिर्फ 5 बातें बताऊंगी…

1) आज आप सभी जो इस चैलेंज से जुड़ना चाहतें हैं अपना वजन और हाइट माप लीजिये। अगर घर पर इंच टेप रखते हैं तो अपने शरीर को कमर पेट सीना नाप कर डायरी में नोट कर लीजिए( बिना भूले) … अब आपका सबसे मनपसंद काम कीजिये अपनी एक फूल साइज़ तस्वीर ले लीजिए, और उसे भी आज की तारीख के साथ सुरक्षित कर लीजिए।

2) लोग कहतें हैं फिटनेस के लिए ढेर सारा पानी पीजिए। पर मेरा कहना है … रुकिए अपने पानी पीने के तरीके पर ध्यान दीजिए। पानी हम इसलिए पीते हैं कि वो हमारे शरीर से सारे टॉक्सिन्स बाहर निकाल दे,पर ध्यान दीजिएगा अगर आप पानी तो बहुत पीते है पर यूरिन आउटपुट उतना अधिक नही है तो ये पानी भी शरीर में जमा होने लगता है और ये भी वजन बढ़ाता ही है। इसलिए कोशिश यही रखें कि सुबह के समय खूब पानी पिये और उतना ही वाशरूम जाएं….. सूरज ढलने के बाद पानी भी कम कर दें।

Advertisements

3 ) मैं किसी भी तरह की हरी नीली काली लाल चाय का समर्थन नही करती। मेरा मानना है कि आपको जो स्वाद लगे वही खाये पिये .. लेकिन इस बात का ध्यान रखते हुए की वो आप कितनी मात्रा में कंस्यूम करतें हैं। सबसे ज़रूरी बात है अगर आपको चाय या कॉफी की आदत है तो वो लेते रहें पर कोशिश करें कि सुबह और शाम बस 1 कप चाय के अलावा यानी कुल 2 कप चाय कॉफी के अलावा जब भी एक्स्ट्रा चाय लें वो बिना शक्कर की लें।

4) आपके भोजन के साथ भी यही बात है। आप चावल या रोटी एक बार में कोई एक ही तरह का कार्बोहाइड्रेट खाने में प्रयोग करें। अपने खाने को सभी रंगों से सजाएं… हरा साग, पीली दाल, सफेद दही , और रंगबिरंगे सलाद से।

Advertisements

5 ) आज की आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण बात…. शारिरिक श्रम ज़रूर करें। किसी भी तरह का व्यायाम, योग सूर्य नमस्कार वाकिंग जॉगिंग… आप इनमें से जिसमें भी कुशल हैं या आपको करना पसंद है आप चुन सकतें हैं और शुरू कर सकते हैं… आज देर हो गयी पर अगर आप लोग आज ही मेरा ये ब्लॉग पढ़ लेते हैं तो आज से ही शुरू कीजिए… सिर्फ 15 मिनट …

सिर्फ 15 मिनट :-

हमारा फिटनेस मंत्र है सिर्फ 15 मिनट …

हममें से कई हैं जो सोचते ही रह जाते हैं कि आज नही काल से पूरा एक घंटा मेहनत करेंगे, जिम करेंगे पसीना बहाएंगे.. पर वो कल कभी आता ही नही। इसलिए एक मंत्र अपनाइए सर्फ 15 मिनट .. आज अभी कूद पड़िये मैदान में

Advertisements

1) फ्रेश हो लीजिये।

2) अपना योग मैट बिछाइये।

3)अपने कुछ पसंदीदा गाने लगा लीजिये।

4) हाथ जोड़ कर खड़े हो जाइए…. and lets start…

5 ) सिर्फ 5 सेट ( यानी दोनो पैरों से करने पर कुल 10 ) सूर्य नमस्कार कीजिये।

6) आज की शुरुवात बस इतनी ही… आपमें से कइयों को लगेगा अरे बस इतना ही… तो मेरा जवाब है आप शुरू तो करो… ये चैलेंज की शुरुवात है… आगे अभी बहुत कुछ करना है। सो आज शुरू कर दीजिए… और कमेंट में बताइये कैसा लगा।

आप में से बहुत लोग जो ऑलरेडी अपनी फिटनेस के लिए कुछ न कुछ करते ही है वो भी ब्लॉग को पढ़ते रहें भले ही चैलेंज में भाग ले या न ले क्योंकि आगे मैं इसी में पीसीओएस , स्पाइनल प्रॉबलम्स, थयरॉइड , ब्लोटिंग आदि के बारे में भी बताती जाऊंगी।

Advertisements

ऐसी महिलाएं जो बेबी प्लान करने की सोच रहीं हैं या जो प्रेग्नेंट हैं या जो लेक्टेटिंग मदर हैं इस चैलेंज में भाग न लें… बस पढ़ते रहें … ❤️

किसी भी तरह की हेल्थ इश्यूज वाले दोस्त भी अपने डॉक्टर से सलाह के बाद ही किसी भी तरह के व्यायाम या डाइट प्लान फॉलो करें।

आज बस 15 मिनट का मंत्रा अपनाएं… कल आपको एक सीढ़ी ऊपर चढ़नी है ।।

So be ready …. To fly❤️

Advertisements

aparna ….

दिल से…

Advertisements

हेलो दोस्तों

कैसे हैं आप सब ? जानती हूं अच्छे ही होंगे। बल्कि बहुत अच्छे… खुश स्वस्थ और खुद में मस्त।

स्वस्थ पर मैंने सबसे ज्यादा जोर दिया है…. अब चूंकि ये सिर्फ एक लेखिका का ब्लॉग तो है नही, इसमें एक डॉक्टर एक गृहिणी भी मौजूद है। तो सोचा कि क्यों ब्लॉग को सिर्फ कहानी जंक्शन बना कर छोड़ दिया जाए। क्यों न कुछ और भी इसमें शुरू किया जाए।

Advertisements

तो मैं आगे जो बताने या पूछने जा रही हूं , वो हो सकता है आपको थोड़ा बोरिंग साउंड करे पर यकीन मानिए ये उतना बोरिंग और उबाऊ नही है, और न ही उतना टफ है जितना सन् कर हमें लगता है…

तो मेरे ब्लॉग के टॉपिक को शुरू करने से पहले आप सभी से सवाल है कि आपमें से कौन कौन मेरे साथ फिटनेस चैलेंज लेने को तैयार है….?

सवाल कठिन है? पर जवाब आसान है… आ जाइये मैदान में जूझ कर…

तो अगर कम से कम पचास लोग भी हामी भर देते हैं तो कल से मैं अपना फिटनेस चैलेंज आप लोगों के साथ शेयर करूँगी।

Advertisements

Stay fit stay healthy n happy❤️❤️❤️

aparna ….

Advertisements

दिल से….

Advertisements

खुशियां आंखें गीली कर जातीं हैं जब कोई ऐसा मौका आये कि किसी ज़मीन से जुड़े शख्स को सिंहासन पर बैठे देखती हूँ……

मेरी नज़रों में ही असल नायक होता है। फल बेचकर 150 रुपये प्रतिदिन कमाने वाले हरिकेला को संतरे को orange कहा जाता है ये मालूम न था। अंग्रेज़ी की ये छोटी सी भाषयी अज्ञानता ने उनके ज्ञान चक्षु खोल दिए। स्वयं की अशिक्षा को मानक मान कर उन्होंने अपनी जीवन भर की कमाई से अपने गांव के बच्चों के लिए स्कूल खोल दिया।

मेंगलुरु के हरिकेला के एक छोटे से प्रयास ने सफलता रची और आज सरकारी अनुदान और कई प्राइवेट ऑर्गेनाइजेशन के सहयोग से उनका हजब्बा स्कूल सफलता के सोपान छू रहा है।

स्नेह सम्मान से लोग इन्हें अक्षर संत भी कहतें हैं। आपके हाथों में पद्मश्री अवार्ड भी मुस्कुरा रहा है।

दिल से…

चिकित्सा के देवता भगवान धनवंतरी आप सभी पर अपनी कृपा बनाएं रखें, और धन की देवी लक्ष्मी आपके घरों पर स्थायी आवास बना लें।

आप सभी को महापर्व दीपावली के प्रथम दिवस धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएं…💐

दिल से…

Advertisements

बॉक्सर आमिर खान  अक्षय कुमार से पूछते हैं ” हे ब्रो!! एंजॉइंग? और खिलाड़ी कुमार अपने मस्तमौला अंदाज में जवाब देते हैं येह एंजॉइंग ! बेटर लक नेक्स्ट टाइम!!!
   ये सारा स्पोर्ट्समैनशिप इमानदारी की हार बेईमानी की जीत, अलाना फलाना सब कुछ हम भूल जाते हैं जब इंडिया पाकिस्तान के खिलाफ मैच खेलती है।

Advertisements


   इतना तो कल दिन भर व्रत रखने के बाद औरतों का खून कम नहीं हुआ होगा जितना इंडिया की हार से हो गया।
  

Advertisements

अगली बार जीत के आना है बता देती हूं( फ्रॉम अनुष्का)

#दिल से देसी❤️
#छोटी सी भड़ास

मायानगरी -5

Advertisements

 
मायानगरी – 5

      मेरे पास आओ मेरे
     दोस्तों एक किस्सा सुनो
       मेरे पास आओ मेरे
     दोस्तों एक किस्सा सुनो

    कई साल पहले की ये बात है
      बोलो ना चुप क्यों हो गए
         भयानक अंधेरी
        सी यह रात में
       लिए अपनी बन्दूक
             मैं हाथ में……

   ” अबे सालों बस सुनने आये हो क्या? साला आज कल के लड़कों को कोई तमीज ही नही है। हम सीनियर होकर हम ही गाना भी सुनाए। शर्म करो कुत्तों। ये मैं गुनगुना रहा था कमीने कान गड़ाए खड़े हैं।”

Advertisements

     इंजीनियरिंग कैम्पस में कंप्यूटर साइंस के जूनियर्स को मैकेनिकल के सीनियर्स धरे बैठे थे कि कंप्यूटर वाले सीनियर्स वहीं चले आये…

” अरे सीपी यार इन लोगो को काहे दबोच रखे हो, हमारे वाले हैं ये। “

” निशांत यार हम भी जानते हैं । लेकिन देखो, शुरू से ही हमारे कॉलेज में फैकल्टी वाइज कभी फसाद नही हुआ। हम अगर तुम्हारे बंदों को रैंग करते है तो तुम्हे भी तो खुल्ली छूट है यार हमारे बंदों को नोचने की।

“भाई वो बात नही है यार। इस बार की बैच में ज़रा हाई फाई लड़के भी हैं। मैनेजमेंट कोटा खूब भरा है।”

” अरे तो क्या हुआ? मैनेजमेंट कोटा से आने वालों को क्या हम तमीज नही सिखाएंगे। भाई ये हमारी ही नैतिक जिम्मेदारी है कि लड़कों को लड़का बनाया जाए। अब स्कूल से ये क्या सिख पढ़ कर आते हैं। कुछ नही। सिर्फ होर्लिक्स पी लेने से टॉलर स्ट्रॉन्गर और स्मार्टर नही बना जाता। हम ही हैं जो इन टोडलर्स को चलना सिखाते हैं।
  कायदे से यही वो जगह है जहाँ इन जाहिलों को इंसान बनाया जाता है।”
  तभी सीपी की नज़र एक जूनियर पर पड़ी जो थर्ड बटन से सर ऊपर कर के देखने की कोशिश कर रहा था कि सीपी का जोरदार तमाचा उसके चेहरे को लाल कर गया।
   जोश ही जोश में तमाचा इतना ज़ोर का पड़ा की लड़का घूम कर ज़मीन पर गिरा और बेहोश हो गया…

  वहीं चबूतरे पर बैठे अभिमन्यु और बाकी लड़के भी भाग कर देखने चले आये।
  लड़कों में हड़कंप मच गया। कम्प्यूटर वाले लड़के डर के मारे अपनी बिल्डिंग को खिसक लिए। सीपी को लगा नही था कि उसका पंजा ऐसा फौलाद का है। आश्चर्य से वो कभी उस बेहोश जूनी को तो कभी अपने हाथ को देख रहा था कि अभिमन्यु ने लड़के को उठाया और अपने कंधे पर डाल मेडिकल की तरफ भाग चला।
   अधीर भी उसके पीछे हो लिया।

Advertisements

   लंबा चौड़ा अभिमन्यु उस नाजुक दुबले पतले से जूनियर लड़के को कंधे पर लिए बिल्कुल साक्षात सती को कंधो पर लिये महादेव सा चला जा रहा था।

  मेडिकल में गेट पर  से घुसते ही बायीं ओर कॉलेज का हॉस्पिटल था। अभि उसी तरफ निकल गया…

“ला यार थोड़ी देर मैं भी पकड़ लूँ। “

  अधीर के इस प्रोपोजल के आते में ही मेडिकल कैम्पस में खड़ी स्ट्रेचर लिए वार्डबॉय भागा चला आया…

” क्या हुआ है लड़के को? “

  डॉक्टर के सवाल पर अभिमन्यु ने ही जवाब दिया..

” बेहोश हो गया है। “

” वो तो दिख रहा है। बेहोश कैसे हुआ? “

  अभि और अधीर एक दूसरे को देखने लगे। डॉक्टर के सामने ये बताना कि रैगिंग में पड़े थप्पड़ ने ये हाल किया है महंगा पड़ सकता था।

” इसने ब्रेकफास्ट नही किया था डॉक्टर!”

ड़ॉक्टर ने अजीब सी नज़रों से अभि को घूर कर देखा और लड़के को साथ लिए अंदर चला गया।

  अभी और अधीर के पीछे सीपी और उसके 1-2 चेले भी भागते हुए मेडिकल चले आए। सीपी और चेले वहीं बाहर बैठ गए।

   अभि और अधीर इधर उधर भटकते उस लड़के के होश में आने का इंतज़ार कर रहे थे कि कहीं से मधुर सी गाने की आवाज़ चली आयी। दोनों उसी दिशा में बढ़ चले…

  मेडिकल प्रथम वर्ष के छात्रों का आज अस्पताल विज़िट करने का पहला दिन था और आज ये नन्हे-मुन्ने बच्चे रेजिडेंट डॉक्टर्स के हत्थे चढ़ गए थे।
   असल में इन्हें इनके कुछ सीनियर्स ने अस्पताल की ओपीडी से कुछ आवश्यक सामान लाने का बेइंतिहा गैरजरूरी काम दिया था।
   इसी चक्कर में ये चार पांच लड़के लड़कियां यहाँ फंस गए थे।
वैसे रेजिडेंट डॉक्टर्स इतना व्यस्त होते थे कि वो जूनियर्स की रैगिंग लेते नहीं थे। लेकिन पिछले दिन की हेक्टिक शेड्यूल की थकान उतारने के लिए आज उनके पास जूनियर्स नाम का एंटरटेनमेंट मौजूद था। और बस इस एंटरटेनमेंट की बहार देखते हुए रेजिडेंट डॉक्टरों का भी उ ला ला करने का मन करने लगा।
  डॉक्टर्स ड्यूटी रूम में इन जूनियर्स की रैगिंग चल रही थी।
  इत्तेफाक से रंगोली ही उस रैगिंग की सबसे पहली शिकार बनी थी। सीनियर से उसे गाना सुनाने को कहा था और वह अपने गले को साफ कर गाना शुरू कर चुकी थी।

Advertisements

देख लो हमको करीब से
आज हम मिले हैं नसीब से
     यह पल फिर कहां
    और यह मंजर फिर कहां
  गजब का है दिन सोचो जरा
   यह दीवानापन देखो जरा
तुम भी अकेले हम भी अकेले मजा आ रहा है कसम से…..

   कमरे के ठीक बाहर खड़े अभिमन्यु और अधीर के कानों तक भी यह स्वर लहरी पहुंच चुकी थी। आवाज का नशा अभिमन्यु पर ऐसा छाया कि बेहोशी के आलम में उसने दरवाजा धीरे से खोल दिया…
उसके दरवाजा खोलते ही सारे सीनियर्स अपनी जगह से उठकर खड़े हो गए। जूनियर्स पहले ही खड़े थे जो थर्ड बटन में थे   वह लोग भी दरवाजे की तरफ देखने लगे । अभिमन्यु और अधीर को ऐसे सामने खड़े देख एक सीनियर रेजिडेंट ने उन लोगों से पूछ लिया…-” आप लोग कौन हैं यहां क्या कर रहे हैं?”

“हम इंजीनियरिंग के हैं ,एक मरीज लेकर आए थे।”

“मरीज लेकर आए थे? क्या हुआ तुम्हारे मरीज को?”

“जरा चक्कर आ गया था।”

“हां तो ठीक है! लेकिन यहां क्या कर रहे हो? मरीज को भर्ती करवा दिया है ना ड्रिप चढ़ेगी शाम तक बंदा अपने पैरों पर चलकर इंजीनियरिंग कैम्पस वापस आ जाएगा इसलिए अब  फुटो यहां से।”

अभिमन्यु ने रंगोली को देखा रंगोली ने अभिमन्यु को और अभिमन्यु के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कुराहट आ गई!  पास खड़ी झनक ने रंगोली को तुरंत कोहनी मारी….-” देख आखिर तेरा पति  तुझे ढूंढता यहाँ तक चला आया।
“चुप कर बकवास मत कर।”
रंगोली  जितना धीमा बोल सकती थी उतना धीमा बोली लेकिन उसने इतना धीमा बोल दिया कि पास खड़ी झनक तक को सुनाई नहीं दिया और झनक ने इतनी जोर से “क्या” कहा कि सारे रेजीडेंट डॉक्टर उन दोनों को देखने लगे।

Advertisements

  उसी वक्त बाहर से गुजरते मृत्युंजय की नजर डॉक्टर्स ड्यूटी रूम पर पड़ गई। वह अभिमन्यु और अधीर को हाथ से हटा कर दरवाजे से भीतर चला आया…-” क्या हो रहा है यहां पर?”
सारे जूनियर रेजीडेंट डॉक्टर घबराकर एक तरफ खड़े हो गए …-“कुछ नहीं सर! वह बस जरा यह फर्स्ट ईयर जूनियर्स हैं इन्हें एनाटॉमी पढ़ा रहे थे।”
“एनाटॉमी पढ़ाना है, तो लैब में पढ़ाया करो। यहां बिना बोन और बिना किसी ऑर्गन के तुम लोग एनाटॉमी कैसे पढ़ा रहे हो?”
मृत्युंजय ने जूनियर की तरफ देखा और उन्हें वहां से जाने की इजाजत दे दी।

  उस कमरे से बाहर निकलते ही जूनियर्स ने चैन की सांस ली… -“यहां तो यार हर मोड़ पर आतंक छाया हुआ है! वह गाना आज मेरी समझ में आ रहा है, यहाँ रोज-रोज हर मोड़ मोड़ पर होता है कोई ना कोई हादसा।  बस उन्हीं हादसों का अड्डा है हमारा कॉलेज। क्लास में बैठते हैं तो फँस जाते हैं। लैब में जाते हैं तो फँस जाते हैं। हॉस्पिटल आते हैं तो भी फँस जाते हैं। जहां देखो वहां सीनियर का आतंक है। आखिर कब बच पाएंगे हम लोग।”
   झनक की बात पर साथ चल रहा लड़का राहुल हंसने लगा…-” तुम लोग तो फिर भी लड़कियां हो यार! तुम बच जाती हो, हम लोगों के साथ हॉस्टल में भी इतनी ज्यादा अति होती है कि हम बता नहीं सकते।”
  “प्लीज बता ना क्या रैगिंग होती है तुम लोगों के साथ।”
  ” चुप कर! नहीं बताना।”
“अरे ऐसा क्या करते हैं भई सीनियर बता ना प्लीज।”
“होती है बॉयज वाली रैगिंग! जैसे तुम्हारी गर्ल्स प्रॉब्लम तुम हमसे शेयर नही कर सकती, हम भी नही कर सकते ।”
” बड़ा आया। मत बता।”
   वो लोग बातें करते अगर बढ़ ही रहे थे कि पीछे से उन्हें आवाज़ लगाते अभिमन्यु और अधीर चले आये…
” एक्सक्यूज मी गाइज़! आप लोग मेडिकोज हैं?
   अभिमन्यु के सवाल पर रंगोली के अलावा बाकी लोगों ने उसे घूर कर देखा..-” हां जी आपको क्या प्रॉब्लम है?”
“नो नो! कोई तकलीफ नहीं है । एक्चुली मैं कुछ जानना चाहता था मेडिकल टर्म्स में।”
राहुल ने उसे बिल्कुल ही हिकारत भरी नज़रों से घूर कर देखा।
” भाई मेरे! ऐसे घूर कर मत देख! मैं भी कोई ऐवें नहीं हूं। इंजीनियरिंग कर रहा हूं, मेकेनिकल से। और उम्र के लिहाज से देखा जाए तो तुम सबसे दो-तीन साल बड़ा ही हूंगा। और प्रोफेशनल कॉलेज के हिसाब से देखा जाए तो यूनिवर्सिटी सीनियर हूं तुम्हारा।”
अबकी बार जवाब राहुल की जगह अतुल ने दिया…-” जी कहिए क्या पूछना है आपको।”

Advertisements

“दोस्त कहीं आराम से बैठ कर बात कर सकते हैं । ज़रा सीरियस मुद्दा है।”
“ओके बाय गाइज़। तुम लोग बैठ कर बातें करो मैं और रंगोली चलते हैं।” झनक रंगोली का हाथ थामे आगे बढ़ने लगी कि अभिमन्यु उन दोनों के सामने अचानक से जाकर खड़ा हो गया….-” अरे मैडम! प्लीज रूके ना आप चार डॉक्टर रहेंगे, तो मेरी समस्या को आप लोग आसानी से समझ कर सुलझा सकते हैं । आप मेडिकल की पढ़ाई करने आई हैं। आप लोगों का तो पेशा ही है लोगों के दुख दर्द सुनना।”
   झनक ने एक नजर अभिमन्यु को देखा और हां में सर हिला दिया।
   रंगोली का वहां रुकने का बिल्कुल मन नहीं था वह झनक का हाथ पकड़े बार-बार उसके हाथ पर दबाव बनाती वहां से निकल चलने की गुजारिश कर रही थी।
    उन चारों डॉक्टरों के साथ अभिमन्यु और अधीर मेडिकल कैंटीन में पहुंच गए।
  वह चारों अभी फर्स्ट ईयर में थे इसलिए कायदे से उन्हें कैंटीन जाना अलाउड नहीं था। और यह बात उन चारों को मालूम नही थी, अनभिज्ञता में वह चारों अभिमन्यु के साथ कैंटीन में प्रवेश कर गये।
   कैंटीन में काम करने वाला लड़का झाड़न अपने कंधे पर लटकाए उन तक चला आया…-‘ फर्स्ट ईयर के लगते हो आप लोग।”
  झनक ने उसे घूर कर देखा…-” हां तो!”
“तो यह कि अगर सीनियर्स ने देख लिया कि फर्स्ट ईयर में वेलकम पार्टी मिले बिना आप लोग कैंटीन चले आए हो तो…?”
“तो क्या बे? हम लोगों को सिखा रहा है!” अबकी बार राहुल उलझ पड़ा।
“मैं क्या सिखाऊंगा? आप लोगों को रात में वह सामने पीपल पर लटकी उल्टी चुड़ैल सब कुछ सिखा देगी।”
“अरे गुरु घंटाल! यह लोग खुद से नहीं आए मैं इन लोगों को लेकर आया हूं! और मैं फिस्थ सेमेस्टर में हूं यानी कि सीनियर बन चुका हूं यूनिवर्सिटी का । और यूनिवर्सिटी के हर कैंटीन में हमें जाना अलाउड है, आई बात समझ में।”

अजीब सा मुहँ बनाकर उनके टेबल पर झाड़न मार कर वह लड़का जाने लग गया….-” अबे जाते-जाते ऑर्डर तो ले जा।”
“क्या लोगे आप लोग?” उसने एक नजर सब को घूर कर फिर पूछा….
” तेरे यहां का सबसे स्वादिष्ट व्यंजन क्या है ?”
“इस वक्त सिर्फ मैगी और सैंडविच मिलेगा।”
“और पीने के लिए ?”
   अभिमन्यु ने मुस्कुराते हुए पूछा…
” आप जो पीते हो वो कतई नही मिलेगा।
उस लड़के ने एक नज़रअभिमन्यु को देखा और अपनी ही कही बात संभाल ली…-” स्ट्रौबरी शेक।”
अभिमन्यु का मुंह बन गया उसने कहा …-“इन चारों के लिए वही ले आ।”
“अब बोलो? कौन सी  मेडिकल इमरजेंसी के बारे में पूछना था तुम्हें? झनक के सवाल पर अभिमन्यु मुस्कुराने लगा।
“अबे ओए टॉम क्रूज दांत बाद में दिखाना पहले फटाफट बता तेरी प्रॉब्लम क्या है ?” अबकी बार राहुल लपका
“वह प्रॉब्लम यह है कि मेरा एक दोस्त है उसकी याददाश्त जरा गुम होने लगी है! सुबह ब्रश किया है कि नहीं उसे कुछ याद नहीं रहता।  कई बार रात में सोता है लेकिन सुबह उठने पर फिर कहता है मैं तो रात भर सोया ही नहीं। नहा कर आता है, और फिर नहाने चला जाता है। खाने का तो पूछो ही मत जितनी बार दे दो हर बार खा जाता है। क्योंकि वह यही भूल चुका होता है कि वह खा चुका है। और तो और कई बार यह भी भूल जाता है कि वह सुसु पॉटी करके आ चुका है। इस प्रॉब्लम का इस समस्या का कोई समाधान है आप लोगों के पास डॉक्टर?”
“अबे यार कौन है यह नमूना? “
अभिमन्यु ने अधीर की तरफ इशारा कर दिया अधीर ने उसे घूर कर देखा और अपनी जगह से खड़ा हो गया…
” शरमा गया बेचारा। क्या है ना ऐसी समस्या है कि बाहर किसी से डिस्कस नहीं कर सकते, आप लोगों को देखकर लगा जैसे दिल से आपसे रिश्ता है। इसीलिए आपसे यह तकलीफ कह गया।”

Advertisements

    अभिमन्यु अपनी बात कहते हुए रंगोली को देखता रहा। रंगोली ने घबराकर पलके नीचे कर ली। वह झनक का हाथ इतनी जोर से पकड़ी हुई थी, कि अब झनक को हाथ में दर्द होने लगा था। झनक अपनी जगह से खड़ी हो गई…-” चल रंगोली अब हम वापस जाते हैं हॉस्टल के लिए लेट हो रहे हैं।’
   वह दोनों वहां से निकलने को ही थी कि चार पांच सीनियर लड़कों की टोली उनका रास्ता रोक खड़ी हो गयी…
” फर्स्ट ईयर? “उनमें से एक ने कड़क कर पूछा।
“यस सर!” मिमियाती सी आवाज़ में राहुल ने जवाब दिया
” वेलकम पार्टी के पहले कैंटीन जूनीज़ के लिए अलाउड नही है। तुम लोगो को मालूम नही था।”
” वी आर सो सॉरी सर। हमें वाकई मालूम नही था। “
” अच्छा बेटा! और फर्स्ट मन्थ में ही तितलियों को लेकर कैंटीन घूम रहें हो। “
  रंगोली के लिए तितली सम्बोधन सुन अभिमन्यु का खून खौल उठा…-“माइंड योर लैंग्वेज, व्हाटएवर इस योर नेम? “
” तू कौन है बे? बीच में बोलने वाला? मेडिको तो नही है!”
” मेकेनिकल इंजीनियरिंग थर्ड ईयर का स्टूडेंट हूँ,नाम अभिमन्यु है। “
” तो बेटा अभिमन्यु तेरे गुर्दो में दर्द क्यों हो रहा जब हम अपने बच्चों को डांट रहे। “
” डाँटो लेकिन तमीज से। अगर गर्ल्स के लिए कोई बदतमीजी करोगे तो मैं सहन नही करूँगा। “
” क्यों बे तेरी सेटिंग है क्या ये। ” उसने रंगोली की तरफ इशारा किया..
” हां है। और आज के बाद इसे परेशान किया तो नाम याद रख लेना अभिमन्यु से बुरा कोई नही होगा।”
  अभिमन्यु उसे धमका कर निकल गया,अधीर भी उसके पीछे गिरता पड़ता भाग गया।
   इतनी सारी बहस के बीच पीछे खड़े सीनियर्स के इशारे पर वो सारे जूनियर्स भी वहाँ से खिसक लिए।
” वेलकम बेटा अभिमन्यु! मेडिकल के चक्रव्यूह में तुम्हारा स्वागत है। जानते नही हो तुम, तुम्हारा पाला ऋषि खुराना से पड़ा है।”
   खून का घूंट पीकर ऋषि खुराना भी अपनी गैंग के साथ निकल गया।

   वहीं पीछे एक सबसे किनारे की टेबल पर गौरी बैठी अपनी नोटबुक में कुछ लिख रही थी।
  उसकी एकमात्र खास सहेली प्रिया किसी काम से स्टाफ रूम गयी थी। उसी का इंतज़ार करती गौरी अपनी नोटबुक खोली बैठी थी कि तभी विधायक नारायण दत्त का लड़का वेदांत वहाँ अपनी टोली के साथ चला आया।
   यही वो लड़का था जिसके इधर उधर तफरीह करने से परेशान सीपी सर अभिमन्यु और बाकियों को लिए निरमा से मिलने गए थे।
   कैंटीन में सारे टेबल भरे थे। गौरी के सामने तीन कुर्सियां खाली पड़ी देख वेदांत ने एक कुर्सी पकड़ कर पीछे खींची और बैठने को था कि मृत्युंजय आकर उस कुर्सी पर बैठ गया।
    मृत्युंजय ने वेदांत को देख उसे थैंक्स बोला और गौरी की तरफ देखने लगा।
  गौरी वेदांत के व्यवहार को देखते हुए अचरज में थी कि मृत्युंजय आ गया और उसे देख गौरी के चेहरे पर सुकून लौट आया।
   उन दोनों को एक दूसरे को देखते देख वेदांत वहाँ से हट गया कि तभी उसके एक चेले ने उसे आवाज़ लगा दी…-” गुरु यहाँ टेबल खाली है। आ जाओ।”
   एक नज़र गौरी को घूर कर वेदांत आगे बढ़ गया…

“, थैंक यू सर। आप हमेशा मेरी परेशानी में मेरा साथ देने खड़े रहते हैं।”
” इट्स माय प्लेजर गौरी। और बताओ कैसी हो तुम?”
“ठीक हूँ । अभी एक हफ्ते से मेडिसिन बंद की है। और मुझे नींद भी सही या रही है।”
” इट्स गुड! लेकिन एकदम से विड्रॉ नही करेंगे। धीरे धीरे ही मेडिसिन छोड़ना।”

Advertisements


” जी सर। “
” कॉफी लोगी? “
गौरी ने हाँ में सिर हिला दिया…
दोनो साथ बैठे कॉफी पीते इधर उधर की बातें करते रहे।
     जय के साथ होने पर गौरी के चेहरे पर काफी समय बाद मुस्काने लौटने लगीं थीं…..

क्रमशः

Advertisements

aparna…

कुछ खुरापातें…

She posted a ‘roti aloo ki sbji and dal ki thali ” photo on her wall and wrote …

Friday lunch….

खुरापाती ख्याल आया कि लिख दूँ

–चल finally तुझे खाना तो मिला।

पर मन की मन में रह गयी,नही लिख पायी, संस्कार बहुत है न मुझमें।

Next day she again posted her photo and wrote .. gain half kg after eating my favorite panipuri…

एक और खुरापात आई दिमाग में …

अच्छा हुआ बहन कुछ तो गेन किया वरना जिस ढंग से तू डाइट कर के पतली हो रही है, यूनेस्को वाले तुझे देख हमारे यहाँ अकाल न घोषित कर दें।

पर कह नही पायी क्योंकि संस्कार बहुत है ना मुझमें।

मैं मैं हूँ!! जब तक तुम तुम हो!

Advertisements

मैं,मैं हूँ! जब तक तुम,तुम हो !

तुमसे सारे रंग रंगीले
तुमसे सारे साज सजीले,
नैनों की सब धूप छाँव तुम,
होठों की मुस्कान तुम ही हो।
मैं,मैं हूँ! जब तक तुम,तुम हो !

तुमसे प्रीत के सारे मौसम
तुमसे सूत,तुम ही से रेशम
तुमसे लाली,तुमसे कंगन,
मन उपवन के राग तुम ही हो
मैं,मैं हूँ! जब तक तुम,तुम हो !

जीवन का यह सार तुम्हारा,
मेरा सब संसार तुम्हारा,
गुण अवगुण मेरे सब जानो,
मुझमे बसे मेरे प्राण तुम ही हो।
मैं,मैं हूँ! जब तक तुम,तुम हो !।।

शुभकामनाएं … हिंदी दिवस की

महादेवी वर्मा

Advertisements

जो तुम आ जाते एक बार

जो तुम आ जाते एक बार

कितनी करूणा कितने संदेश
पथ में बिछ जाते बन पराग
गाता प्राणों का तार तार
अनुराग भरा उन्माद राग

आँसू लेते वे पथ पखार
जो तुम आ जाते एक बार

हँस उठते पल में आर्द्र नयन
धुल जाता होठों से विषाद
छा जाता जीवन में बसंत
लुट जाता चिर संचित विराग

आँखें देतीं सर्वस्व वार
जो तुम आ जाते एक बार

Advertisements
Advertisements

समिधा-27

Advertisements

   समिधा- 27

    केदारनाथ त्रासदी को घटे सात महीने बीत चुके थे। जिन्होंने अपने अपनों को खोया था वो उस त्रासदी को इन सात महीनों में भी नही भूल पा रहे थे, यही हाल उनका भी था जिनके अपने इस त्रासदी से वापस लौट चुके थे।

        वरुण मंदिर ट्रस्ट में स्थायी सदस्यता पा चुका था। उसके माता पिता ने भी इस बार न उसे रोका न टोका,और सहर्ष सहमति दे दी। कादम्बरी के परिवार ने ज़रूर कुछ टोकाटाकी करने की कोशिश की लेकिन वरुण का परिवार वरुण के सामने दीवार बन खड़ा रहा, फिर अपना सा मुहँ लेकर उन्हें भी लौटना ही पड़ा।
    कोलकाता के मंदिर में दो महीने बिताने के बाद वरुण और दो चार अन्य सेवादारों को मथुरा राधाकृष्ण मंदिर भेज दिया गया था।

    मंदिर में सुबह सवेरे उठ कर सारे मंदिर परिसर में झाड़ू लगाने के बाद पानी का छिड़काव कर वरुण अपने दो साथी सेवादारों के साथ पोंछा लगाया करता।
     मंदिर की ही पुष्पवाटिका से चुन चुन कर लाये फूलों की फिर सारे लोग मिल कर लंबी सी माला गूंथते और द्वारिकाधीश का श्रृंगार होता।
      दोपहर बाद सभी एक साथ बैठे भजन गाया करते।
   इस सब के साथ ही सुबह और शाम का समय वेदाध्ययन के लिए भी निश्चित था।
   वरुण को ये सारे कार्य प्रिय थे। वह इन सभी कार्यों को करते हुए अपने मन को शांत रखने का पूरा प्रयास करता और उसे इन कुछ महीनों में इन कार्यों में एक सुख मिलने लगा था एक शांति मिलने लगी थी ऐसा लगने लगा था कि वह अपने कृष्ण के आसपास है और कृष्ण सिर्फ उसके ही नहीं हर किसी के आसपास हैं। और इसीलिए धीरे-धीरे वरुण की श्रद्धा इस बात पर बढ़ने लग गई थी कि जो जिसके साथ होता है वह सब कृष्ण का रचा रचाया है और इसीलिए उससे अच्छा और कुछ नहीं हो सकता ।
  वरुण की यही सोच उसे धीरे-धीरे शांति की तरफ ले जा रही थी, लेकिन बीच-बीच में कभी अचानक एक चेहरा उसकी खुली आंखों में झांकने चला आता। जैसे पूछ रहा हो…-” मेरा क्या कसूर था जो तुम्हारे कृष्ण ने मुझे ऐसी सजा दी ?” ऐसे समय में वरुण अपने विचारों को झटक कर कोई ना कोई किताब खोल कर पढ़ने बैठ जाया करता। लेकिन इन सारी व्यस्तताओं के बाद भी बार बार एक जोड़ी पनीली आंखें उसका पीछा करती सी लगती जैसे कह रहीं हो “वापस आ जाओ!”  उसे अक्सर यूँ लगता कि वो मन से यही सब करना चाहता तो है पर उसकी आत्मा इस सब में शामिल ही नही होना चाहती। 
सुबह और शाम के समय के अतिरिक्त रात में भी जब उसे समय मिलता वह मंदिर परिसर के कोने में बैठ अपनी किताब को पढ़ने में डूब जाया करता। वेदों का अध्ययन करते करते धीरे-धीरे उसे हिंदू धर्म की जटिलताएं समझ में आने लगी थी।
   आज तक जिन रीति-रिवाजों को मानने के लिए वह अपनी मां का मजाक उड़ाया करता था और रीति-रिवाजों के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को देख पढ़ कर समझ कर उसके ज्ञान चक्षु भी खुलने लगे थे।
    मंदिर का पूरा कार्य एक ट्रस्ट के अधीन था वह ट्रस्ट पूरे भारतवर्ष ही नहीं बल्कि विदेशों में भी कृष्ण मंदिर की स्थापना कर चुका था। मंदिरों में होने वाले आय-व्यय के साथ ही दानदाताओं को अधिक से अधिक दान के लिए प्रेरित करने के लिए भी मंदिर ट्रस्ट को पढ़े लिखे शिक्षित वर्ग की आवश्यकता थी और अगर वरुण जैसे युवा इस कार्य में उनका सहयोग करें तो मंदिर ट्रस्ट को लाभ ही लाभ था इसलिए वरुण की तरफ मठाधीशों का कुछ अधिक ही झुकाव था।

   मंदिर में अलग-अलग कार्यों के लिए अलग-अलग पद सृजित बहुत से सेवादार ऐसे थे जो स्वेच्छा से जीवन पर्यंत सिर्फ सेवादार ही बने रह जाते थे।लेकिन कुछ उनमें से ऐसे भी थे जो सेवादार से ऊपर के कुछ 1 पदों तक जाकर रुक जाए करते थे। लेकिन वरुण जैसे उच्च शिक्षित युवाओं को मंदिर ट्रस्ट द्वारा सीढ़ी दर सीढ़ी चढ़ाते हुए मंदिर के मठाधीश तक के पद तक पहुंचाए जाने की व्यवस्था थी। वैसे मंदिर में जाति धर्म या गरीबी अमीरी के नाम पर किसी भी तरह का कोई भेदभाव नहीं था। सभी के लिए समान कार्य बांटे गए थे , और सभी को अपने हिस्से के कार्य करने ही होते थे। अंतर बस इतना होता था कि शिक्षित लोग जो विद्या अध्ययन करने में सक्षम थे उन्हें वेदों का अध्ययन करवा कर उनसे प्रवचन आदि दिलवाए जाने की व्यवस्था की जाती थी।
     पिछले कुछ समय में ही वरुण ने बहुत सारी किताबों का अध्ययन कर लिया था और जैसे-जैसे अध्ययन करता जा रहा था उसका दिमाग भी विस्तृत होता जा रहा था।
       मंदिर परिसर हर किसी के लिए खुला था लोग दर्शनों के लिए आते मंदिर में चढ़ावा चढ़ाते, और चले जाते। सब के जाने के बाद हफ्ते में एक दिन चढ़े हुए सारे चढ़ाव की गणना की जाती और उसके बाद उस धनराशि को मंदिर ट्रस्ट के पास भेज दिया जाता।
    ट्रस्ट से हर महीने एक निश्चित धनराशि मंदिर में रहने वालों के खाने पीने आदि के लिए भेज दी जाती। इन सब का हिसाब योगेंद्र जी रखा करते थे।

   मंदिर परिसर बहुत विशाल था। चारों तरफ फैली वृहत वाटिका के बीचो बीच स्थापित मंदिर में पीछे तरफ कमरे बने हुए थे जहां सेवादार और बाकी के मंदिर कर्मचारी रहा करते थे।
      उसी परिसर में एक और हटकर विधवा आश्रम बना हुआ था जहां वृद्ध युवा और बाल विधवाये रहा करती थी। आश्रम के कर्मचारियों तथा अन्य लोगों के लिए भोजन पकाने बर्तन साफ करने आदि की जिम्मेदारी इन्हीं महिलाओं की थी । महिलाओं की संख्या कम अधिक होती रहती थी। वैसे तो एक बार जिस महिला को उसके घर वाले इस आश्रम में छोड़ जाते उसका वापस अपने घर लौट पाना असंभव ही था। इसलिए अधिकतर समय उस आश्रम में महिलाओं की संख्या में वृद्धि ही हुआ करती थी, संख्या में कमी तभी आती थी जब उनमें से कोई देवलोक को चली जाया करती थी।
     उनका जीवन कठिन नहीं कठिनतम था। क्योंकि उनके जीवन में वेद अध्ययन को स्थान नहीं दिया गया था। उनमें से अधिकतर वृद्ध महिलाएं अपने आपको कृष्ण समर्पित कर चुकी थी । इसलिए उनका मन सिर्फ कृष्ण को समर्पित लोगों की सेवा से ही प्रसन्न हो जाता था। लेकिन कुछ युवा और बाल विधाएं भी थी जिन्हें अच्छा खाने और अच्छा पहनने का शौक हुआ करता था। लेकिन उस स्थान में जहां उन्हें पर्याप्त आहार भी ना मिल पाता हो,उनके शौक कौन पूछता और कौन पूरे करता?

    वह औरतें एक रटी रटाई दिनचर्या का पालन करती हुई बस जीवन जीती चली जा रही थी! जिसका ना कोई आदि था ना अंत। बहुत बार ऐसा लगता जैसे वह वहां रहते हुए बस अपनी सांसें गिन रही हैं, कि किस तरह उनकी सांसो की अवधि पूरी हो और वह स्वयं कृष्ण के लोक पहुंच जाएं। कुछ महिलाओं ने एक आध बार वहां से निकलने की भी कोशिश की, लेकिन बाहर भी उनके पास कोई और आश्रय नहीं था दो-चार दिन बाद लौट कर वापस ही आ गई थी।
        जैसे ज़िन्दगी कट रही हो बस…. बिना जीने की आरज़ू के।
   लेकिन वरुण इन बातों से अनजान था….
….. पर अब अधिक समय नही बचा था कि वो इन सारी अव्यवस्थाओं से अपरिचित रह पाता…

******

   
     देव को गए वक्त बीत चुका था। जब उसके जाने का पता चला था उस समय उसके परिवार द्वारा किये कर्मकांड में पारो की माँ और बाकी सदस्य आये और जाते वक्त पारो की माँ देव की माँ के चरणों में लोट गयी….-” गरीब की बेटी का कोई आसरा नही होता बऊ दी! पहले ही बिना बाप की थी अब माथे से पति का साया भी सरक गया। पता नही इतनी बदकिस्मत लड़की क्यों मेरे घर ही पैदा हुई। इससे तो पैदा होते ही मर जाती तो सही होता,लेकिन फिर ये बदकिस्मती कैसे देखती?
  आपके पांव पड़ती हूँ, इसका आसरा मत छीनना। यहीं कहीं किसी कोने में पड़ी रहेगी। घर की नौकरानी को भी तो दो वक्त का खाना दिया ही जाता है। उससे अधिक की अब इसे दरकार भी कहाँ रही? “

Advertisements

   बोलते-बोलते जाने कितनी बार वो भरभरा के रो पड़ीं। इतने कठोर शब्द मुहँ से भी तो नही निकल पा रहे थे। कैसी मर्मान्तक पीड़ा के साथ अपनी ही बेटी के लिए नौकरानी जैसा अलंकार जोड़ना पड़ा। किस्मत लड़की से ज्यादा तो उनकी खराब थी। पहले पति का दुख सहा फिर लक्ष्मी सी बेटी का …
  … इतनी छोटी सी उम्र में ये रंगविहीन साड़ी ! ये देखने से पहले दुर्गा माँ उसे उठा लेती तो कितना अच्छा होता। कम से कम अपनी ही बेटी का ये रूप तो न देखना पड़ता।
    दिल में तो आ रहा था कि बेटी को सीने से लगाये अपने साथ ले जाये। कैसे भी कर के अपने पास रख लेगी लेकिन अभी तो वो अकेली अपनी ससुराल की गुलामी में टूट रही है फिर अपने साथ अपनी फूल सी बेटी को वैसे ही टूटते कैसे देख पाएंगी?
   दूसरी बात जब घर भर मछली भात खा रहा होगा उसकी लाड़ली को सिर्फ शाक खा कर संतोष करना पड़ेगा। पान की कितनी शौकीन थी,अब तो वो भी कहाँ खा पाएगी।
   ये सारा सब अपनी आंखों से देखना उसके लिए मृत्युतुल्य कष्ट सहने के बराबर था।
   इससे तो अपनी ससुराल में रह कर क्या कर रही क्या नही इन सब बातों से तो उन्हें फुर्सत रहेगी।
  वैसे उनके मन में एक छोटा सा लालच और भी तो था…..
   देव का छोटा भाई दर्शन पारो से एक दो साल ही तो बड़ा था। अगर पारो यहीं अपनी ससुराल में रह गयी तो हो सकता है घर वालों के मन में पारो का ब्याह दर्शन से कर देने का विचार जाग जाए। और अगर ऐसा हो गया तो इससे अच्छा पारो के लिए क्या होगा भला।
   इतने गहन दुख के बीच एक बहुत छोटी सी खुशी उनके मन को उद्भासित कर गयी ..
…..-“ऐसा क्यों कह रही हो बऊ माँ। नौकरानी सी क्यों रहेगी भला। देव के पीछे अब यही तो हमारी देव है। पारोमिता जैसी अब तक रहती आयी है वैसे ही रहेगी।”

   देव की ठाकुर माँ का स्वर उस कमरे में गूंज गया और फिर घर के किसी सदस्य की पारो को वहाँ से हटाने या निकालने की हिम्मत नही हुई।

*****

  दिन कट रहे थे सिर्फ पारो के ही नही बल्कि घर के अन्य सदस्यों के भी।
  पहले पहल किसी ने पारो से कुछ नही कहा। वो अपने कमरे में सारा सारा दिन चुपचाप पड़ी देव को याद कर ऑंसू बहाती रहती।
   कभी खिड़की पर घंटो खड़ी रह जाती। यूँ लगता जैसे उसी का इंतज़ार कर रही हो।
  उसे पता नही क्यों अंदर से यही लगता कि समय को चीरता देव उसके पास वापस चला जायेगा।
कभी अचानक ही उसका मन ये मानने से इनकार कर देता की देव नही रहा।
वो उसकी कमीज़ें धोती अपनी साड़ी के साथ सुखाती और आयरन कर अलमीरा में सजा देती। जूते भी रोज़ रोज़ साफ करती और जब देखती की पहनने वाला तो दूर दूर तक नज़र नही आ रहा तो बिलख उठती।
    अब उसका खाना उसकी सास उसकी जेठानी के हाथों उसके कमरे में ही भिजवा दिया करतीं। शायद उन्हें मन ही मन लगने लगा था कि उन सब सुहागिनों के बीच बैठ पारो अपनी रूखी थाली का निवाला कैसे ले पाएगी। लेकिन पारो की जेठानी से ये पक्षपात जाने क्यों सहन नही हुआ जा रहा था।।
  रोज़ रोज़ उसकी रूखी सूखी थाली ऊपर लेकर जाना उसके मन को मसले दे रहा था, आखिर एक दिन घर भर की औरतों की नज़र बचा कर उसने मछली के झोल भरी कटोरी पारो की थाली में रखी और दाल की कटोरी में घी भर अपने आँचल से ढाँक ऊपर ले चली।
  पारो की तो नही लेकिन उसकी खुद की सास ने देख कर उसे आधी सीढ़ियों पर ही टोक दिया। पारो उस समय छज्जे पर कपड़े सूखा रही थी। उसने भी बड़ी माँ की रुबावदार आवाज़ सुन ली और ऊपर से झांकने लगी…-” ए आनंदी! की होलो? पारो के लिए क्या माछ लेकर जा रही हो? “

आनन्दी सकपका गई। उसे नही लगा था कि उसकी चोरी ऐसे पकड़ी जाएगी। उसने बहुत धीमी आवाज़ में अपनी बात रखी…-” उसकी अभी उम्र ही क्या है माँ। इतनी छोटी सी उम्र में इतना कुछ झेल गयी , अब कम से कम ठीक से खा पी तो सके। यही तो खाने पहनने की उम्र…”

Advertisements

  उसकी बात बीच में ही काट कर उसकी सास लगभग उस पर चीख पड़ी…-“अब तुम आज की लड़कियां हमें नियम बताओगी, उसकी उम्र क्या है ये हमे बताने की ज़रूरत नही है।तुमसे ज्यादा दुनिया देखी है हमने। चुपचाप माछेर झोल उठा कर थाली से बाहर कर दो। “

” धीमे बोलिए मां ,वो सुन लेगी। अच्छा नही लगेगा।”

” तुम्हें नियम भंग करते हुए अच्छा लगा न तो अब मुझे कोई लेना देना नही की किसे बुरा लगेगा और किसे नही। जो सच्चाई है सो है। अगर भगवान को उस पर इतना ही तरस था दयादृष्टि थी तो उसके पति को ऐसे अकालमृत्यु नही मिलती.।

   आगे की पंक्तियों के साथ ही भावुकता में बड़ी माँ रोने लगी,क्योंकि बेटा भले ही देवरानी का था लेकिन प्रेम तो उन्हें भी उससे बहुत था। और देव की असमय मृत्यु का दुख अब पारो पर गुस्से और नाराज़गी के रूप में उतारना शुरू हो रहा था।

आनन्दी समझ गयी कि इस वक्त सास से लड़ने में कोई लाभ नही है। वो चुपचाप मछली की कटोरी हटा कर फिर थाली ऊपर ले गयी….
… धीरे से उसने पारो के कमरे के दरवाज़े को धक्का दिया,पारो पलंग पर सिर टिकाए ज़मीन पर बैठी थी।
” आओ पारो !खाना खा लो!”
 
  पारो ने ऑंसू भरी आंखों से अपनी जेठानी को देखा और फिर बाहर देखने लगी…-“मेरी प्यारी छोटी बहन कुछ तो खा लो। देखो ऐसे भूखा रहने से क्या होगा। बल्कि तुम ऐसे भूखी रहोगी तो देव बाबू की भी आत्मा तड़प उठेगी। वो कैसे सुख से रह पाएंगे भला। चलो खा लो चुपचाप। बड़ी माँ की बातों को दिल से न लगा लेना। वो सब अभी बहुत दुखी हैं। उबर नही पाएं हैं ना । तुम तो समझ सकती हो।”

पारो ने हाँ में सिर हिला दिया और नीचे देखती चुप बैठी रही।
आनन्दी को उसी वक्त नीचे से किसी ने आवाज़ दी और वो एक बार फिर पारो से खा लेने का इसरार करती बाहर चली गयी।
पारो का थाली देखने का भी जी नही किया…  उसने धीरे से थाली सरका दी जैसे थाली से नाराजगी हो कि तुम उस समय क्योँ सामने नही इठलाई जब देव बाबू साथ थे और अपने हाथो से अपनी प्रेयसी अपनी पत्नी को खिलाना चाहते थे। उस वक्त इसी थाली ने क्यों चुपके से उसके कान में  नही कहा कि खा ले पारो! फिर इतना प्रेम करने वाला जीवन में कोई नही आएगा। “

  देव के बारे में सोचते हुए वो फफक के रो पड़ी। वहीं उस गांव से कई किलोमीटर दूर मथुरा में स्वामी वरुण के सामने सेवादार थाली परोस कर रख गया, पर जाने अंदर से वरुण को कैसी बेचैनी ने घेरा की उसने उस थाली को धीरे से आगे सरका दिया…-” स्वामी ऐसा क्यों? क्या आज भोजन नही लेंगे।”

” मालूम नही केवल लेकिन आज बिल्कुल भी खाने का जी नही कर रहा। अंदर से ऐसा लग रहा जैसे हृदय में किसी बात की पीड़ा सी उबर रही है। यूँ लग रहा कोई बहुत करीबी दुख में है, अपार दुख में और मैं उसकी कोई सहायता नही कर पा रहा हूँ। अब बस कृष्ण से यही प्रार्थना है कि वो जो कोई भी है उसे जल्दी से जल्दी मुझसे मिलवा दे, जिससे अपने मन की इस बेचैनी से छुटकारा पा सकूं।”

  वरुण क्या जानता था कि उसके कॄष्ण उसके प्रिय को उससे मिलवाने की भूमिका बांध ही चुके हैं…..

क्रमशः

aparna…..
  


Advertisements

मैं हूँ…..

मैं खुशबू से भरी हवा हूँ
मै बहता जिद्दी झरना हूँ
कठिन आंच मे तप के बना जो
मै ऐसा सुन्दर गहना हूँ ।।

छोटा दिखता आसमान भी,
मेरे हौसलों की उड़ान पे,
रातें भी जो बुनना चाहे,
मैं ऐसा न्यारा सपना हूँ ।।

हरा गुलाबी नीला पीला
मुझसे हर एक रंग सजा है,
इन्द्रधनुष भी फीका लगता
प्रकृति की ऐसी रचना हूं ।।

मैं हूँ पत्नी ,मै हूँ प्रेयसी
मै हूँ  बेटी, मै ही बहू भी,
तुझको जीवन देने वाली
मै ही माँ,मै ही बहना हूं ।।

मैं हूँ मीठी धूप सुहानी,
मैं ही भीगी सी बयार भी,
मुझमें डूब के सब कुछ पा ले,
मै ऐसा अमृत झरना हूं ।।।

अपर्णा ।

ओ स्त्री: कभी खुद को भी जिया करो……..

जल्द आ रही है, मेरे ब्लॉग पर !!

बस यूं ही….

भीड़ से निकले तो सिग्नल ने पकड़ लिया,
ज़िन्दगी स्पीड ब्रेकर की नुमाइंदगी हो गयी….